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Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रामस्वरूप अपने नौकर रतन पर क्यों झल्लाते हैं?
उत्तर:
एकांकी की शुरुआत में जब रतन पूछता है कि “बिछा दूँ साहब?” तो रामस्वरूप को लगता है कि रतन बेवकूफी भरी बातें कर रहा है। वे उसे ताना मारते हैं कि जब भगवान के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो क्या वह देर से पहुँचा था ? मेहमानों के आने की जल्दी और घबराहट के कारण वे रतन की छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठते हैं।
प्रश्न 2.
शंकर किस कॉलेज में पढ़ रहा था? उसका व्यक्तित्व कैसा बताया गया है?
उत्तर:
शंकर मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था। शंकर के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी कमी यह थी कि उसका अपना कोई स्वतंत्र विचार या ‘रीढ़ की हड्डी’ नहीं थी। वह पूरी तरह अपने पिता की गलत बातों पर निर्भर था और केवल ‘ही-ही’ करके उनकी हाँ-में-हाँ मिलाता था। उसका चरित्र भी कमजोर था और वह शारीरिक रूप से भी झुककर चलता था।
प्रश्न 3.
उमा को चश्मा पहने देखकर गोपालप्रसाद और शंकर क्यों चौक गए?
उत्तर:
उमा को चश्मा पहने देखकर गोपालदास और शंकर इसलिए चौंक गए क्योंकि गोपालप्रसाद को संदेह हुआ कि कहीं यह चश्मा अधिक पढ़ने-लिखने के कारण तो नहीं लगा है, क्योंकि वे कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते थे।
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प्रश्न 4.
उमा ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किस प्रकार किया?
उत्तर:
उमा ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन आत्मविश्वास, बुद्धिमत्ता और स्पष्ट विचारों के माध्यम से किया। उसने गोपालदास के सामने निर्भीक होकर अपनी बात रखी। उसके तर्कपूर्ण उत्तर और समझदारी से उसकी प्रतिभा प्रकट होती है।
प्रश्न 5.
उमा ने गोपालप्रसाद को ‘खरीदार’ और लड़कियों को ‘बेबस भेड़-बकरियाँ’ क्यों कहा?
उत्तर:
उमा ने गोपालदास को खरीदार इसलिए कहा क्योंकि वह लड़कियों को एक वस्तु की तरह देखता है। वह उनके गुण, शिक्षा या व्यक्तित्व को महत्व नहीं देता, बल्कि केवल यह देखता है कि लड़की उसके बेटे के लिए उपयुक्त है या नहीं। लड़कियों को बेबस भेड़-बकरी इसलिए कहा गया है। क्योंकि वे समाज की परंपराओं और दबाव के कारण अपनी इच्छा नहीं बता पातीं। इस प्रकार उमा समाज में लड़कियों की कमजोर स्थिति और पुरुषों की संकीर्ण सोच पर व्यंग्य करती है।
प्रश्न 6.
उमा ने शंकर के बारे में उसके पिता को क्या-क्या बताया?
उत्तर:
उमा ने शंकर के पिता को कहा कि यदि उसकी पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उनके बेटे के चरित्र पर भी सवाल उठने चाहिए। उसने बताया कि आपका बेटा लड़कियों के हॉस्टल के आस-पास घूमता था और वहाँ से भगाया गया था।
Class 9 Hindi Chapter 6 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
गोपालप्रसाद के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए और बताइए कि वे स्त्री-शिक्षा के विरोधी क्यों थे?
उत्तर:
गोपालप्रसाद पेशे से वकील हैं, लेकिन उनकी सोच अत्यंत संकीर्ण और रूढ़िवादी है। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- दोहरा मापदंड – वे स्वयं वकील हैं और बेटे को मेडिकल पढ़ा रहे हैं, लेकिन बहू अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी चाहते हैं।
- स्त्री-विरोधी – उनका मानना है कि पढ़ाई और तर्क करना केवल पुरुषों का काम है, औरतों का काम बस घर सँभालना है।
- व्यावसायिक सोच – वे शादी को एक ‘बिजनेस’ (सौदा) मानते हैं और लड़की को एक वस्तु की तरह परखते हैं। वे स्त्री-शिक्षा के विरोधी इसलिए थे क्योंकि उन्हें लगता था कि पढ़ी-लिखी महिलाएँ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएँगी और पुरुषों के नियंत्रण में नहीं रहेंगी।
प्रश्न 2.
उमा का चरित्र आज की लड़कियों के लिए कैसे एक प्रेरणा स्रोत है?
उत्तर:
उमा इस एकांकी की सबसे सशक्त और प्रभावशाली पात्र है। उसका चरित्र आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक निम्नलिखित कारणों से है-
- आत्मसम्मान – वह खुद को ‘भेड़-बकरी’ या ‘फर्नीचर’ की तरह प्रदर्शन की वस्तु नहीं बनने देती।
- साहस – वह गोपालप्रसाद जैसे दबंग व्यक्ति के सामने निडर होकर अपनी बात रखती है।
- शिक्षा की गरिमा – वह अपनी शिक्षा को छिपाने के बजाय उसे अपना गौरव मानती है।
- कुरीतियों का विरोध – वह समाज के उन पुरुषों को आईना दिखाती है जो खुद चरित्रहीन हैं लेकिन बहू के गुणों की लंबी सूची चाहते हैं। उमा सिखाती है कि नारी को केवल सहनशील नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने वाला होना चाहिए।
प्रश्न 3.
“जब कुसी – मेज बिकती है तो दुकानदार कुर्सी मेज से कुछ नहीं पूछता।” उमा के इस कथन के पीछा छिपा व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब कुर्सी-मेज बिकती है, तब दुकानदार कुर्सी मेज से कुछ नहीं पूछता” – इस कथन में तीखा व्यंग्य है कि समाज में लड़कियों को वस्तुओं की तरह माना जाता है। विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी इच्छा या राय को महत्व नहीं दिया जाता, बल्कि केवल लड़के और उसके परिवार की पसंद को ही प्राथमिकता दी जाती है। उमा ने यह बात इसलिए कही क्योंकि गोपालदास उसे भी एक वस्तु की तरह देख रहा था और परख रहा था। वह इस उदाहरण के माध्यम से यह दिखाना चाहती थी कि लड़कियों के साथ होने वाला यह व्यवहार अन्यायपूर्ण और अपमानजनक है। उसके शब्द समाज की संकीर्ण मानसिकता और स्त्री की उपेक्षित स्थिति पर गहरा कटाक्ष करते हैं।
Class 9 Ganga Chapter 6 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
उमा ने गोपालप्रसाद के साथ जो व्यवहार किया, आपके विचार से वह कितना उचित है, लिखिए?
उत्तर:
गोपालप्रसाद समाज के उन लोगों का प्रतीक हैं, जिनकी सोच समाज के लिए हितकर नहीं है। ऐसे लोग नारी जाति को मात्र उपभोग की वस्तु समझते हैं। वे स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी होते हैं। उनके विचार से यदि नारी पढ़-लिख गई तो अपने अधिकारों के प्रति सजग हो जाएगी।
उमा द्वारा गोपालप्रसाद के साथ किया गया व्यवहार बिल्कुल उचित है। स्त्री और पुरुष समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं। दोनों बराबर हैं। उमा शिक्षित युवती है जो अपना हित-अहित समझती है। नारी के विरुद्ध ऐसी सोच रखने वाले को लताड़कर उमा ने ठीक ही किया।
प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि उमा के कथन में लड़कियों की पीड़ा प्रकट होती है।
उत्तर:
उमा, रामस्वरूप की बी०ए० पास विवाह योग्य पुत्री है। उसे देखने शंकर नामक युवा अपने पिता गोपाल प्रसाद के साथ आता है। गोपालप्रसाद अधिक पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहता है। वह तरह-तरह से उमा की जाँच-पड़ताल करता है, जिससे उमा को गहरी ठेस पहुँचती है। उमा की आँखों पर चश्मा लगा देखकर वह उमा की उच्च शिक्षा का अनुमान कर लेता है और तरह-तरह की बातें करता है। उमा को यूँ अपनी तोल-मोल अपमानजनक लगती है। वह दुखी होती है और कहती है कि वह मेज़-कुर्सी से भी बदतर है क्योंकि खरीदने वाला मेज़ कुर्सी से कोई प्रश्न तो नहीं करता है। बस उन्हें मोल-भाव कर खरीद लिया जाता है। ऐसा आदमी जो लड़कियों को भेड़-बकरियों के समान समझता है, खुद कसाई के समान है। वह अपनी ऊँची पढ़ाई को भी जायज ठहराती है। इस प्रकार उसके कथन में लड़कियों की पीड़ा है।
प्रश्न 3.
उमा ने समाज की अन्य लड़कियों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक ने उसके किन-किन मूल्यों का आकलन किया है?
उत्तर:
उमा बी०ए० पास, सिलाई-कढ़ाई, पाक-कला, संगीत में निपुण लड़की है। उसके पिता लड़के वालों से उसी उच्च शिक्षा की बात छिपाना चाहते हैं, जिसका उमा विरोध कर सच्चाई सबके सामने प्रस्तुत कर देती है। उसके मूल्यों का आँकलन निम्नलिखित है-
- स्पष्टवादिनी होना – उमा स्पष्टवादिनी है। वह निःसंकोच भाव से सच्चाई को बताकर समाज की अन्य लड़कियों के लिए अनुकरण प्रस्तुत करती है।
- रूढ़िवादिता का विरोध – उमा इस बात का कड़ा विरोध करती है कि उच्च शिक्षा केवल लड़कों के लिए ही है, लड़कियों के लिए नहीं। वह अन्य रूढ़ियों का भी विरोध करती है।
- आत्मविश्वास से भरपूर होना – उमा आत्मविश्वास से भरी है। यही आत्मविश्वास उसे शंकर जैसे लड़के से श्रेष्ठतर सिद्ध करता है।
- दृढ़ निर्णय लेने में सक्षम – उमा दृढ़ निर्णय लेने में सक्षम है। इसी कारण वह अपने पिता शंकर और उसके पिता के सामने अपना निर्णय सुना देती है।
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प्रश्न 4.
शंकर के पिता गोपालप्रसाद दोहरी मानसिकता वाले व्यक्ति हैं, जिनकी समझ न लड़कियों की शिक्षा के प्रति अच्छी है और न समाज के लिए। पाठ के आधार पर उनके इन जीवन-मूल्यों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करें।
उत्तर:
शंकर के पिता गोपालप्रसाद जो खुद उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ वकील भी हैं किंतु दोहरी मानसिकता में जीने वाले व्यक्ति हैं। उनका बेटा शंकर बी०एस०सी० करने के बाद मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वे लड़कों के लिए उच्च शिक्षा का समर्थन करते हैं परंतु अपने बेटे के लिए ऐसी बहू चाहते हैं, जो दसवीं से अधिक पढ़ी न हो। उनका मानना है कि ऊँची शिक्षा सिर्फ़ पुरुषों के लिए होती है। उनका यह भी मानना है कि लड़के जहाँ बाहर के काम के लिए होते हैं, वहीं लड़कियाँ घर में काम करने के लिए ही होती हैं। उनकी ऐसी मानसिकता एवं सोच से न समाज का भला होना है और न लड़कियों का। वे लड़के एवं लड़कियों में भेदभाव करते हैं। इससे समानता, शिक्षा हेतु प्रोत्साहन देना, मनोबल बढ़ाने, सहयोग करने जैसे मूल्यों की उपेक्षा होती है।
प्रश्न 5.
उमा के पिता रामस्वरूप और उसकी माता प्रेमा दोनों ही उमा की उच्च शिक्षा छिपाने का प्रयास करते हैं। उनके इस कार्य को आप कितना उचित मानते हैं और क्यों? जीवन-मूल्यों को ध्यान में रखकर बताइए कि अन्य माता-पिता को आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?
उत्तर:
हर माता-पिता की तरह ही रामस्वरूप और प्रेमा को अपनी बेटी के विवाह की चिंता है। उमा उच्च शिक्षित (बी०ए० पास), साहसी, निर्भीक तथा अपनी बात को दृढ़ता से कहने वाली लड़की है। उसकी शादी की बात वकील गोपालप्रसाद के पुत्र शंकर से चलती है। गोपालप्रसाद और शंकर दोनों ही लड़कियों की उच्च शिक्षा के घोर विरोधी हैं। वे चाहते हैं कि लड़की ज्यादा से ज्यादा मैट्रिक पास हो। इधर उमा के माता-पिता इस रिश्ते को हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। इस विवशता में वे उमा की उच्च शिक्षा की बात छिपाने का भरपूर प्रयास करते हैं।
मेरे विचार से उनका यह कार्य पूर्णतया अनुचित है क्योंकि इससे उमा का मनोबल कमजोर पड़ जाता। ऐसे अभिभावकों को मैं यह सुझाव देना चाहूँगा कि वे अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दें और उसे गर्व के साथ सबके सामने रखें क्योंकि ऐसा करके वे अपनी बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा होने में अपना योगदान देंगे।
रीढ़ की हड्डी Extra Questions विषयवस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रामस्वरूप अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा को गोपालप्रसाद से क्यों छिपाना चाहते थे? इसके पीछे उनकी क्या विवशता थी?
उत्तर:
रामस्वरूप एक आधुनिक और प्रगतिशील पिता थे, जिन्होंने अपनी बेटी को बी. ए. तक पढ़ाया था। लेकिन जब उमा के विवाह की बात आई तो उन्हें गोपालप्रसाद जैसे रूढ़िवादी लोग मिले, जो बहू के रूप में कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहते थे। रामस्वरूप की विवशता यह थी कि वे अपनी बेटी का हाथ एक प्रतिष्ठित परिवार में देना चाहते थे। उन्हें डर था कि यदि वे उमा की वास्तविक शिक्षा के बारे में बता देंगे, तो गोपालप्रसाद इस रिश्ते को ठुकरा देंगे। अपनी बेटी के सुखद भविष्य की चिंता में उन्होंने सच को छिपाना ही उचित समझा।
प्रश्न 2.
गोपालप्रसाद विवाह को एक ‘बिजनेस’ (व्यापार) क्यों मानते थे? उनके इस दृष्टिकोण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
गोपालप्रसाद के लिए विवाह कोई भावनात्मक या पवित्र बंधन नहीं, बल्कि एक व्यापारिक सौदा था। वे ‘अच्छा, तो साहब, अब बिजनेस की बात कर। ली जाए’ कहकर अपनी इसी मानसिकता को प्रकट करते हैं। उनके अनुसार, विवाह में लेनदेन, लाभ-हानि और अपनी शर्तों को मनवाना ही मुख्य उद्देश्य था। वे बहू को घर की सदस्य मानने के बजाय उसे एक ऐसी वस्तु की तरह देखते थे, जिसे अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से ‘मार्केट’ (बाजार) से खरीदा या चुना जा सकता है।
प्रश्न 3.
पाठ के आधार पर शंकर के व्यक्तित्व की उन कमियों का वर्णन कीजिए, जिसके कारण वह एक अयोग्य पात्र सिद्ध होता है।
उत्तर:
शंकर इस एकांकी का सबसे कमजोर पात्र है। उसकी पहली कमी उसकी खराब शारीरिक बनावट है; उसकी कमर झुकी हुई है और वह सीधा खड़ा नहीं हो पाता। दूसरी कमी उसका कमजोर चरित्र है; वह लड़कियों के हॉस्टल के आसपास ताक झाँक करते हुए पकड़ा गया था जहाँ से उसे बेइज्जत होकर भागना पड़ा था। तीसरी बड़ी कमी उसका अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व न होना है वह पूरी तरह अपने पिता के विचारों पर निर्भर है और उनकी गलत बातों पर भी केवल भीगी बिल्ली की तरह हँसता रहता है।
प्रश्न 4.
उमा के चश्मा लगाने पर गोपालप्रसाद और शंकर का चौंकना उनकी किस सोच को दर्शाता है?
उत्तर:
जैसे ही उमा के चेहरे पर चश्मा दिखा, गोपालप्रसाद और शंकर दोनों एक साथ ‘चश्मा!’ कहकर चौंक गए। उनकी यह प्रतिक्रिया उनकी इस दकियानूसी सोच को दर्शाती है कि चश्मा केवल वही लड़कियाँ लगाती हैं जो बहुत अधिक पढ़ाई-लिखाई करती हैं या फिर जिनमें कोई शारीरिक दोष होता है। वे कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहते थे, ताकि उसे आसानी से दबाया जा सके। चश्मा देखकर उन्हें भय हुआ कि कहीं उमा उनकी उम्मीद से अधिक शिक्षित तो नहीं हैं, जो उनके घर के अनुशासन के लिए ‘खतरा’ बन सकती है।
प्रश्न 5.
‘क्या लड़कियों के दिल नहीं होते?’ क्या उन्हें चोट नहीं लगती?’ उमा के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कथन उमा के अंदर दबे हुए आक्रोश और स्वाभिमान को प्रकट करता है। गोपालप्रसाद उमा से ऐसे सवाल कर रहे थे जैसे कि वे किसी फर्नीचर की जाँच कर रहे हों। उमा इस अपमान को सहन नहीं कर पाती और दृढ़ता से कहती है कि लड़कियों की भी भावनाएँ होती हैं, उनका भी अपना आत्मसम्मान होता है। उन्हें केवल सजावट की वस्तु समझकर उनकी भावनाओं को न समझना गलत है। वह यह स्पष्ट करना चाहती है कि लड़कियों को भी अपनी पसंद-नापसंद व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।
प्रश्न 6.
रामस्वरूप और प्रेमा के बीच होने वाली शुरुआती बातचीत से घर के वातावरण और उमा की स्थिति का क्या पता चलता है?
उत्तर:
पाठ के आरंभिक दृश्य से पता चलता है कि घर में मेहमानों के आने को लेकर बहुत जल्दबाजी और तनाव का माहौल है। रामस्वरूप और प्रेमा दोनों ही इस बात से परेशान हैं कि उमा सजने-संवरने के लिए सहमत नहीं है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि उमा एक सादगी पसंद और सत्यनिष्ठ लड़की है, जबकि उसके माता-पिता सामाजिक दबाव के कारण उसे सजने-सँवरने के लिए कहते हैं। घर का वातावरण मध्यमवर्गीय दिखावे और बेटी की शादी की चिंता से भरा हुआ है।
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प्रश्न 7.
गोपालप्रसाद ने स्त्री-शिक्षा के विरोध में ‘मोर और शेर’ का उदाहरण क्यों दिया?
उत्तर:
गोपालप्रसाद ने तर्क दिया कि ‘मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।’ इस उदाहरण के माध्यम से वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि प्रकृति ने पुरुष और स्त्री के कार्यक्षेत्र और योग्यताओं में स्पष्ट अंतर किया है।
उनके अनुसार, पढ़ना-लिखना और बाहर के काम करना केवल पुरुषों का अधिकार है, जबकि स्त्रियों का काम केवल घर की सेवा करना है। वे शिक्षा को पुरुषों का आभूषण मानते थे और स्त्रियों के लिए इसे अनावश्यक और हानिकारक समझते थे।
प्रश्न 8.
एकांकी के अंत में उमा ने गोपालप्रसाद को उनकी बेइज्जती का अहसास कैसे कराया?
उत्तर:
जब गोपालप्रसाद ने उमा पर उनकी बेइज्जती करने का आरोप लगाया, तो उमा ने बहुत ही करारा जवाब देते हुए कहा कि जो लोग उसे यहाँ एक नुमाइश की वस्तु की तरह जाँचने आए हैं, क्या वे उसकी बेइज्जती नहीं कर रहे? उसने गोपालप्रसाद को आईना दिखाते हुए कहा कि अपने बेटे की ‘बैकबोन’ (रीढ़ की हड्डी) के बारे में पूछिए कि वह पिछली रात लड़कियों के हॉस्टल के पास क्या कर रहा था। इस प्रकार उमा ने उनकी आँखों में आँखें डालकर उनके झूठे अहंकार को चूर-चूर कर दिया।
प्रश्न 9.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? आज के समय में इस पाठ की क्या प्रासंगिकता है?
उत्तर:
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी हमें शिक्षा देती है कि स्त्रियों का सम्मान और उनकी शिक्षा समाज की उन्नति के लिए अनिवार्य है। यह पाठ हमें सिखाता है कि विवाह जैसे रिश्तों में दिखावे और व्यापारिक सोच के स्थान पर सच्चाई और सम्मान होना चाहिए। आज के समय में भी यह पाठ प्रासंगिक है, क्योंकि आज भी कहीं न कहीं समाज में लड़कियों की शिक्षा को लेकर भेदभाव देखा जाता है। यह पाठ हमें रूढ़ियों (अंधविश्वास ) को तोड़कर एक स्वस्थ और समतावादी समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 10.
पाठ के प्रारंभ में रामस्वरूप द्वारा नौकर रतन पर झुंझलाने और उसे ‘परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी’ जैसा ताना मारने से उनकी कैसी मानसिक स्थिति का पता चलता है?
उत्तर:
पाठ के प्रारंभ में रामस्वरूप द्वारा नौकर रतन पर झुंझलाना और उसे परमात्मा के यहाँ अक्ल बँट रही थी जैसा ताना मारना उनकी चिंतित, अधीर और तनावपूर्ण मानसिक स्थिति को प्रकट करता है। वे लड़के वालों के आने की तैयारी में अत्यधिक व्यस्त और उत्सुक हैं, इसलिए छोटी-सी गलती पर भी क्रोधित हो उठते हैं। इससे उनका सामाजिक दबाव और दिखावे की मानसिकता भी स्पष्ट होती है। वे चाहते हैं कि मेहमानों के सामने कोई कमी न रह जाए, इसलिए अधीर होकर नौकर पर अपनी झुंझलाहट उतारते हैं। यह व्यवहार उनके भीतर की असुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने की चिंता को भी दर्शाता है।
प्रश्न 11.
प्रेमा अपनी बेटी उमा को पाउडर और लाली लगाने के लिए क्यों मजबूर कर रही थी? क्या आप उसकी इस सोच से सहमत हैं?
उत्तर:
प्रेमा एक ऐसी माँ है, जो जानती है कि समाज में लड़की की खूबसूरती को बहुत अधिक महत्त्व दिया जाता है। वह चाहती थी कि उमा मेहमानों के सामने सुंदर दिखे, ताकि रिश्ता पक्का हो जाए। उनका मानना था कि बिना सजावट के कोई लड़की अच्छी नहीं लगती। हम प्रेमा की इस सोच से सहमत नहीं हो सकते, क्योंकि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी रूप-रंग से नहीं, बल्कि उसके गुणों, शिक्षा और चरित्र से होनी चाहिए। कृत्रिम सुंदरता थोपना व्यक्ति के आत्मविश्वास को कम करता है।
प्रश्न 12.
गोपालप्रसाद ने खाने की मेज पर ‘पुराने जमाने की तारीफ’ करते हुए क्या तर्क दिए? उनके विचारों से उनके व्यक्तित्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
गोपालप्रसाद ने पुराने जमाने की तारीफ करते हुए कहा कि उस समय के लोग बहुत ताकतवर होते थे और अधिक खान-पान में रुचि रखते थे। उन्होंने अपनी युवावस्था के खान-पान और स्कूल की पढ़ाई की तुलना आज के समय से की। उनके विचारों से पता चलता है कि वे एक अहंकारी व्यक्ति हैं, जो अपनी हर बात को सही साबित करना चाहते हैं। वे पुरानी परंपराओं को श्रेष्ठ मानते हैं और नए जमाने की शिक्षा और जीवन शैली को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं।
प्रश्न 13.
‘बिजनेस’ शब्द सुनकर रामस्वरूप का चौंकना और फिर गोपालप्रसाद की बात पर हँसना, उनकी किस लाचारी को दर्शाता है?
उत्तर:
‘बिज़नेस’ शब्द सुनकर रामस्वरूप का चौंकना और फिर गोपालप्रसाद की बात पर हँस देना उनकी सामाजिक विवशता और बनावटी सहमति को दर्शाता है। वे जानते हैं कि विवाह को व्यापार की तरह देखना अनुचित है, फिर भी लड़के वालों को नाराज़ न करने के लिए विरोध नहीं करते। उनकी यह हँसी वास्तविक प्रसन्नता नहीं, बल्कि परिस्थितियों से समझौता करने की मजबूरी है। इससे स्पष्ट होता है कि वे बेटी के विवाह हेतु समाज की रूढ़ियों के सामने झुक जाते हैं और अपनी वास्तविक सोच व्यक्त करने का साहस नहीं कर पाते। यह उनकी मानसिक दुविधा और निर्बलता को उजागर करता है।
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प्रश्न 14.
उमा द्वारा सितार पर ‘मीरा का भजन’ गाना उसकी किस चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?
उत्तर:
उमा द्वारा सितार पर ‘मीरा का भजन’ गाना उसकी संवेदनशीलता, सादगी, आध्यात्मिकता और कला प्रेम को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि वह केवल पढ़ी-लिखी ही नहीं, बल्कि संगीत में भी पारंगत और गंभीर स्वभाव की है। भजन गाते समय उसकी तल्लीनता उसके एकाग्र और भावुक व्यक्तित्व को प्रकट करती है। साथ ही यह उसकी विनम्रता और संस्कारशीलता का भी परिचायक है। उमा का यह व्यवहार बताता है कि वह दिखावे से दूर रहकर अपनी प्रतिभा और आंतरिक गुणों को महत्त्व देती है। इससे उसका संतुलित और उच्च आदर्शों वाला चरित्र स्पष्ट होता है।
प्रश्न 15.
गोपालप्रसाद ने उमा से उसकी ‘पेंटिंग’ और ‘सिलाई’ के बारे में क्यों पूछा? उनकी इस जिज्ञासा का मूल कारण क्या था?
उत्तर:
गोपाल प्रसाद ने उमा से उसकी पेंटिंग’ और ‘सिलाई’ के बारे में इसलिए पूछा, क्योंकि वे विवाह के लिए लड़की की घरेलू योग्यताओं और पारंपरिक स्त्री-गुणों को परखना चाहते थे। उनके विचार में लड़की का मुख्य कार्य घर सँभालना और परिवार की सेवा करना होता है। वे यह जानना चाहते थे कि उमा एक अच्छी गृहिणी बनने योग्य है या नहीं। उनकी इस जिज्ञासा का मूल कारण उनकी रूढ़िवादी मानसिकता और स्त्री के सीमित सामाजिक दायरे की धारणा थी, जिसमें वे उच्च शिक्षा की अपेक्षा घरेलू कौशल को अधिक महत्त्व देते थे।
प्रश्न 16.
जब गोपालप्रसाद ने उमा को ‘जरा मुँह खोलना’ और ‘चाल ढाल’ दिखाने को कहा, तो उमा की खामोशी क्या बयाँ कर रही थी?
उत्तर:
गोपालप्रसाद की इन माँगों पर उमा की खामोशी उसके गहरे अपमान और गुस्से को बयाँ कर रही थी। वह एक शिक्षित और स्वाभिमानी लड़की थी, जिसे किसी वस्तु की तरह परखा जाना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी चुप्पी इस बात का संकेत थी कि वह अंदर ही अंदर इस अपमानजनक स्थिति के विरुद्ध विद्रोह कर रही है। वह यह महसूस कर रही थी कि उसे इंसान नहीं, बल्कि एक निर्जीव वस्तु समझा जा रहा है।
प्रश्न 17.
क्या रामस्वरूप द्वारा उमा की शिक्षा को छिपाना पूरी तरह गलत था? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
नैतिक रूप से रामस्वरूप द्वारा उमा की शिक्षा को छिपाना गलत था, क्योंकि किसी भी रिश्ते की नींव सच पर आधारित होनी चाहिए। लेकिन यदि हम उस समय की सामाजिक परिस्थितियों को देखें, जहाँ शिक्षित लड़कियों को शादी के लिए अयोग्य माना जाता था, तो रामस्वरूप का यह कदम उनकी लाचारी और पिता के प्रेम का परिणाम था। वे अपनी बेटी को समाज के अंधविश्वास से बचाकर उसका घर बसाना चाहते थे, हालाँकि इस झूठ ने अंततः स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।
Class 9 Hindi Chapter 6 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. रामस्वरूप : (चौंककर खड़े हो जाते हैं।) उमा, उमा!
उमा : अब मुझे कह लेने दीजिए, बाबूजी… ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे जरा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?
गोपालप्रसाद : (ताव में आकर) बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?
उमा : (तेज आवाज़ में) जी हाँ, और हमारी बेइज्जती नहीं होती जो आप इतनी देर से नाप-तोल कर रहे हैं? और ज़रा अपने इन साहबजादे से पूछिए कि अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे, और वहाँ से कैसे भगाए गए थे!
शंकर : बाबूजी, चलिए।
गोपालप्रसाद : लड़कियों के होस्टल में?… क्या तुम कालेज में पढ़ी हो? (रामस्वरूप चुप)
(क) उमा द्वारा गोपाल प्रसाद को ‘खरीददार’ कहना किस सामाजिक बुराई की ओर संकेत करता है?
(i) बाजारवाद की ओर
(ii) विवाह के नाम पर होने वाले लड़कियों के मोल-भाव की ओर
(iii) बढ़ती हुई बेरोजगारी की ओर
(iv) शिक्षा के गिरते स्तर की ओर
(ख) उमा के संवाद “क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?” में ‘कसाई’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और क्यों?
(i) रामस्वरूप के लिए, क्योंकि वे अपनी बेटी को मजबूर कर रहे हैं।
(ii) शंकर के लिए, क्योंकि वह डरा हुआ है
(iii) गोपाल प्रसाद जैसे संकीर्ण सोच वाले लोगों के लिए, जो लड़कियों को वस्तु समझते हैं।
(iv) समाज के उन लोगों के लिए जो मांस का व्यापार करते हैं।
(ग) “बाबूजी, चलिए।” – शंकर का यह संवाद उसकी किस चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?
(i) पिता के प्रति उसका अत्यधिक सम्मान।
(ii) अपनी पोल खुल जाने के डर से उत्पन्न घबराहट और कायरता।
(iii) घर जल्दी पहुँचने की उसकी व्याकुलता।
(iv) उमा के प्रति उसका आदर भाव।
(घ) गोपालप्रसाद का उमा से यह पूछना कि “क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो?” उनकी किस मानसिकता को दर्शाता है?
(i) स्त्री शिक्षा के प्रति उनका अत्यधिक लगाव।
(ii) उनकी यह सोच कि पढ़ी-लिखी लड़कियाँ तर्क करती हैं और उनके नियंत्रण में नहीं रहेंगी।
(iii) कॉलेज की पढ़ाई के प्रति उनकी जिज्ञासा।
(iv) उमा की योग्यता की जाँच करने की इच्छा।
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : उमा का व्यवहार गोपालप्रसाद और उनके बेटे के प्रति अपमानजनक और अनुचित था।
कारण (R) : उमा ने अपनी चुप्पी तोड़कर अपनी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा की तथा समाज की दोहरी मानसिकता को
आईना दिखाया।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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2. हाँ एक तो बाबू गोपालप्रसाद और दूसरा खुद लड़का है। देखो, उमा से कह देना कि ज़रा करीने से आए ये लोग ज़रा ऐसे ही हैं, गुस्सा तो मुझे बहुत आता है, इनके दकियानूसी ख्यालों पर। खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा-सोसायटियों में जाते हैं, मगर लड़की चाहते हैं, ऐसी कि ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो।
(i) प्रस्तुत गद्यांश में वक्ता को किस बात पर गुस्सा आता है?
(क) उमा के सजने-सँवरने पर
(ख) बाबू गोपालप्रसाद और उनके लड़के के आने पर
(ग) बाबू गोपालप्रसाद के दकियानूसी ख्यालों पर
(घ) वकालत के पेशे पर
(ii) बाबू गोपालप्रसाद और उनका लड़का कैसी लड़की की तलाश में हैं?
(क) जो बहुत अधिक पढ़ी-लिखी हो
(ख) जो ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो
(ग) जो सभा सोसायटियों में जाने वाली हो
(घ) जो वकील हो
(iii) ‘खुद पढ़े-लिखे हैं, वकील हैं, सभा-सोसायटियों में जाते हैं-यह कथन किसके चरित्र पर प्रकाश डालता है?
(क) रामस्वरूप
(ख) उमा
(ग) बाबू गोपालप्रसाद
(घ) शंकर
(iv) कथन (A) : वक्ता उमा को ‘करीने से’ आने के लिए कहता है।
कारण (R) : क्योंकि आने वाले लोग रूढ़िवादी विचारों के हैं और वे लड़की के आधुनिक रूप-रंग या व्यवहार को शायद पसंद न करें।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(v) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बाबू गोपालप्रसाद स्वयं एक पढ़े-लिखे व्यक्ति और वकील हैं।
2. वक्ता बाबू गोपालप्रसाद के आधुनिक विचारों का समर्थन करता है।
3. बाबू गोपालप्रसाद ऐसी बहू चाहते हैं, जो बहुत अधिक शिक्षित न हो।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(क) 1 और 2
(ख) 2 और 3
(ग) 1 और 3
(घ) ये सभी
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बताइए कि वर्तमान युग में लड़का-लड़की में समानता लाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
प्रश्न 2.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में प्रेमा द्वारा पढ़ाई-लिखाई को जो दोष दिया गया है, वह आपकी दृष्टि में कितना उचित है ? इस विचारधारा को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
प्रश्न 3.
“आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं।” कथन का भाव स्पष्ट करते हुए लिखिए कि शंकर जैसे लड़कों की आदतों को सुधारने के लिए आप क्या उपाय करेंगे?
प्रश्न 4.
समाज में महिलाओं को उचित स्थान दिलवाने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?
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विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
गोपालप्रसाद लड़कियों की शिक्षा के बारे में क्या विचार रखते थे? ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 2.
गोपालप्रसाद को अधिक पढ़ी-लिखी लड़की क्यों पसंद नहीं थी?
प्रश्न 3.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर उमा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
प्रश्न 4.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बाबू रामस्वरूप के व्यक्तित्व और मानसिकता पर प्रकाश डालिए।
प्रश्न 5.
गोपालप्रसाद के विचारों से तत्कालीन समाज की कौन-सी सोच उजागर होती है?
प्रश्न 6.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में विवाह के लिए लड़की के निरीक्षण की परंपरा पर लेखक ने कैसे व्यंग्य किया है?
प्रश्न 7.
‘रीढ़ की हड्डी’ एक सामाजिक व्यंग्य है- उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।