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Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer
रीढ़ की हड्डी Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रामस्वरूप अपने नौकर रतन पर क्यों झल्लाते हैं?
उत्तर:
एकांकी की शुरुआत में जब रतन पूछता है कि “बिछा दूँ साहब?” तो रामस्वरूप को लगता है कि रतन बेवकूफी भरी बातें कर रहा है। वे उसे ताना मारते हैं कि जब भगवान के यहाँ अक्ल बँट रही थी तो क्या वह देर से पहुँचा था ? मेहमानों के आने की जल्दी और घबराहट के कारण वे रतन की छोटी-छोटी बातों पर झल्ला उठते हैं।
प्रश्न 2.
शंकर किस कॉलेज में पढ़ रहा था? उसका व्यक्तित्व कैसा बताया गया है?
उत्तर:
शंकर मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था। शंकर के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी कमी यह थी कि उसका अपना कोई स्वतंत्र विचार या ‘रीढ़ की हड्डी’ नहीं थी। वह पूरी तरह अपने पिता की गलत बातों पर निर्भर था और केवल ‘ही-ही’ करके उनकी हाँ-में-हाँ मिलाता था। उसका चरित्र भी कमजोर था और वह शारीरिक रूप से भी झुककर चलता था।
प्रश्न 3.
उमा को चश्मा पहने देखकर गोपालप्रसाद और शंकर क्यों चौक गए?
उत्तर:
उमा को चश्मा पहने देखकर गोपालदास और शंकर इसलिए चौंक गए क्योंकि गोपालप्रसाद को संदेह हुआ कि कहीं यह चश्मा अधिक पढ़ने-लिखने के कारण तो नहीं लगा है, क्योंकि वे कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते थे।
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प्रश्न 4.
उमा ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किस प्रकार किया?
उत्तर:
उमा ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन आत्मविश्वास, बुद्धिमत्ता और स्पष्ट विचारों के माध्यम से किया। उसने गोपालदास के सामने निर्भीक होकर अपनी बात रखी। उसके तर्कपूर्ण उत्तर और समझदारी से उसकी प्रतिभा प्रकट होती है।
प्रश्न 5.
उमा ने गोपालप्रसाद को ‘खरीदार’ और लड़कियों को ‘बेबस भेड़-बकरियाँ’ क्यों कहा?
उत्तर:
उमा ने गोपालदास को खरीदार इसलिए कहा क्योंकि वह लड़कियों को एक वस्तु की तरह देखता है। वह उनके गुण, शिक्षा या व्यक्तित्व को महत्व नहीं देता, बल्कि केवल यह देखता है कि लड़की उसके बेटे के लिए उपयुक्त है या नहीं। लड़कियों को बेबस भेड़-बकरी इसलिए कहा गया है। क्योंकि वे समाज की परंपराओं और दबाव के कारण अपनी इच्छा नहीं बता पातीं। इस प्रकार उमा समाज में लड़कियों की कमजोर स्थिति और पुरुषों की संकीर्ण सोच पर व्यंग्य करती है।
प्रश्न 6.
उमा ने शंकर के बारे में उसके पिता को क्या-क्या बताया?
उत्तर:
उमा ने शंकर के पिता को कहा कि यदि उसकी पढ़ाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उनके बेटे के चरित्र पर भी सवाल उठने चाहिए। उसने बताया कि आपका बेटा लड़कियों के हॉस्टल के आस-पास घूमता था और वहाँ से भगाया गया था।
Class 9 Hindi Chapter 6 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
गोपालप्रसाद के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए और बताइए कि वे स्त्री-शिक्षा के विरोधी क्यों थे?
उत्तर:
गोपालप्रसाद पेशे से वकील हैं, लेकिन उनकी सोच अत्यंत संकीर्ण और रूढ़िवादी है। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- दोहरा मापदंड – वे स्वयं वकील हैं और बेटे को मेडिकल पढ़ा रहे हैं, लेकिन बहू अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी चाहते हैं।
- स्त्री-विरोधी – उनका मानना है कि पढ़ाई और तर्क करना केवल पुरुषों का काम है, औरतों का काम बस घर सँभालना है।
- व्यावसायिक सोच – वे शादी को एक ‘बिजनेस’ (सौदा) मानते हैं और लड़की को एक वस्तु की तरह परखते हैं। वे स्त्री-शिक्षा के विरोधी इसलिए थे क्योंकि उन्हें लगता था कि पढ़ी-लिखी महिलाएँ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएँगी और पुरुषों के नियंत्रण में नहीं रहेंगी।
प्रश्न 2.
उमा का चरित्र आज की लड़कियों के लिए कैसे एक प्रेरणा स्रोत है?
उत्तर:
उमा इस एकांकी की सबसे सशक्त और प्रभावशाली पात्र है। उसका चरित्र आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक निम्नलिखित कारणों से है-
- आत्मसम्मान – वह खुद को ‘भेड़-बकरी’ या ‘फर्नीचर’ की तरह प्रदर्शन की वस्तु नहीं बनने देती।
- साहस – वह गोपालप्रसाद जैसे दबंग व्यक्ति के सामने निडर होकर अपनी बात रखती है।
- शिक्षा की गरिमा – वह अपनी शिक्षा को छिपाने के बजाय उसे अपना गौरव मानती है।
- कुरीतियों का विरोध – वह समाज के उन पुरुषों को आईना दिखाती है जो खुद चरित्रहीन हैं लेकिन बहू के गुणों की लंबी सूची चाहते हैं। उमा सिखाती है कि नारी को केवल सहनशील नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने वाला होना चाहिए।
प्रश्न 3.
“जब कुसी – मेज बिकती है तो दुकानदार कुर्सी मेज से कुछ नहीं पूछता।” उमा के इस कथन के पीछा छिपा व्यंग्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब कुर्सी-मेज बिकती है, तब दुकानदार कुर्सी मेज से कुछ नहीं पूछता” – इस कथन में तीखा व्यंग्य है कि समाज में लड़कियों को वस्तुओं की तरह माना जाता है। विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी इच्छा या राय को महत्व नहीं दिया जाता, बल्कि केवल लड़के और उसके परिवार की पसंद को ही प्राथमिकता दी जाती है। उमा ने यह बात इसलिए कही क्योंकि गोपालदास उसे भी एक वस्तु की तरह देख रहा था और परख रहा था। वह इस उदाहरण के माध्यम से यह दिखाना चाहती थी कि लड़कियों के साथ होने वाला यह व्यवहार अन्यायपूर्ण और अपमानजनक है। उसके शब्द समाज की संकीर्ण मानसिकता और स्त्री की उपेक्षित स्थिति पर गहरा कटाक्ष करते हैं।
Class 9 Ganga Chapter 6 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
उमा ने गोपालप्रसाद के साथ जो व्यवहार किया, आपके विचार से वह कितना उचित है, लिखिए?
उत्तर:
गोपालप्रसाद समाज के उन लोगों का प्रतीक हैं, जिनकी सोच समाज के लिए हितकर नहीं है। ऐसे लोग नारी जाति को मात्र उपभोग की वस्तु समझते हैं। वे स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी होते हैं। उनके विचार से यदि नारी पढ़-लिख गई तो अपने अधिकारों के प्रति सजग हो जाएगी।
उमा द्वारा गोपालप्रसाद के साथ किया गया व्यवहार बिल्कुल उचित है। स्त्री और पुरुष समाज के महत्वपूर्ण अंग हैं। दोनों बराबर हैं। उमा शिक्षित युवती है जो अपना हित-अहित समझती है। नारी के विरुद्ध ऐसी सोच रखने वाले को लताड़कर उमा ने ठीक ही किया।
प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि उमा के कथन में लड़कियों की पीड़ा प्रकट होती है।
उत्तर:
उमा, रामस्वरूप की बी०ए० पास विवाह योग्य पुत्री है। उसे देखने शंकर नामक युवा अपने पिता गोपाल प्रसाद के साथ आता है। गोपालप्रसाद अधिक पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहता है। वह तरह-तरह से उमा की जाँच-पड़ताल करता है, जिससे उमा को गहरी ठेस पहुँचती है। उमा की आँखों पर चश्मा लगा देखकर वह उमा की उच्च शिक्षा का अनुमान कर लेता है और तरह-तरह की बातें करता है। उमा को यूँ अपनी तोल-मोल अपमानजनक लगती है। वह दुखी होती है और कहती है कि वह मेज़-कुर्सी से भी बदतर है क्योंकि खरीदने वाला मेज़ कुर्सी से कोई प्रश्न तो नहीं करता है। बस उन्हें मोल-भाव कर खरीद लिया जाता है। ऐसा आदमी जो लड़कियों को भेड़-बकरियों के समान समझता है, खुद कसाई के समान है। वह अपनी ऊँची पढ़ाई को भी जायज ठहराती है। इस प्रकार उसके कथन में लड़कियों की पीड़ा है।
प्रश्न 3.
उमा ने समाज की अन्य लड़कियों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। ‘रीढ़ की हड्डी’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक ने उसके किन-किन मूल्यों का आकलन किया है?
उत्तर:
उमा बी०ए० पास, सिलाई-कढ़ाई, पाक-कला, संगीत में निपुण लड़की है। उसके पिता लड़के वालों से उसी उच्च शिक्षा की बात छिपाना चाहते हैं, जिसका उमा विरोध कर सच्चाई सबके सामने प्रस्तुत कर देती है। उसके मूल्यों का आँकलन निम्नलिखित है-
- स्पष्टवादिनी होना – उमा स्पष्टवादिनी है। वह निःसंकोच भाव से सच्चाई को बताकर समाज की अन्य लड़कियों के लिए अनुकरण प्रस्तुत करती है।
- रूढ़िवादिता का विरोध – उमा इस बात का कड़ा विरोध करती है कि उच्च शिक्षा केवल लड़कों के लिए ही है, लड़कियों के लिए नहीं। वह अन्य रूढ़ियों का भी विरोध करती है।
- आत्मविश्वास से भरपूर होना – उमा आत्मविश्वास से भरी है। यही आत्मविश्वास उसे शंकर जैसे लड़के से श्रेष्ठतर सिद्ध करता है।
- दृढ़ निर्णय लेने में सक्षम – उमा दृढ़ निर्णय लेने में सक्षम है। इसी कारण वह अपने पिता शंकर और उसके पिता के सामने अपना निर्णय सुना देती है।
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प्रश्न 4.
शंकर के पिता गोपालप्रसाद दोहरी मानसिकता वाले व्यक्ति हैं, जिनकी समझ न लड़कियों की शिक्षा के प्रति अच्छी है और न समाज के लिए। पाठ के आधार पर उनके इन जीवन-मूल्यों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करें।
उत्तर:
शंकर के पिता गोपालप्रसाद जो खुद उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ वकील भी हैं किंतु दोहरी मानसिकता में जीने वाले व्यक्ति हैं। उनका बेटा शंकर बी०एस०सी० करने के बाद मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। वे लड़कों के लिए उच्च शिक्षा का समर्थन करते हैं परंतु अपने बेटे के लिए ऐसी बहू चाहते हैं, जो दसवीं से अधिक पढ़ी न हो। उनका मानना है कि ऊँची शिक्षा सिर्फ़ पुरुषों के लिए होती है। उनका यह भी मानना है कि लड़के जहाँ बाहर के काम के लिए होते हैं, वहीं लड़कियाँ घर में काम करने के लिए ही होती हैं। उनकी ऐसी मानसिकता एवं सोच से न समाज का भला होना है और न लड़कियों का। वे लड़के एवं लड़कियों में भेदभाव करते हैं। इससे समानता, शिक्षा हेतु प्रोत्साहन देना, मनोबल बढ़ाने, सहयोग करने जैसे मूल्यों की उपेक्षा होती है।
प्रश्न 5.
उमा के पिता रामस्वरूप और उसकी माता प्रेमा दोनों ही उमा की उच्च शिक्षा छिपाने का प्रयास करते हैं। उनके इस कार्य को आप कितना उचित मानते हैं और क्यों? जीवन-मूल्यों को ध्यान में रखकर बताइए कि अन्य माता-पिता को आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?
उत्तर:
हर माता-पिता की तरह ही रामस्वरूप और प्रेमा को अपनी बेटी के विवाह की चिंता है। उमा उच्च शिक्षित (बी०ए० पास), साहसी, निर्भीक तथा अपनी बात को दृढ़ता से कहने वाली लड़की है। उसकी शादी की बात वकील गोपालप्रसाद के पुत्र शंकर से चलती है। गोपालप्रसाद और शंकर दोनों ही लड़कियों की उच्च शिक्षा के घोर विरोधी हैं। वे चाहते हैं कि लड़की ज्यादा से ज्यादा मैट्रिक पास हो। इधर उमा के माता-पिता इस रिश्ते को हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। इस विवशता में वे उमा की उच्च शिक्षा की बात छिपाने का भरपूर प्रयास करते हैं।
मेरे विचार से उनका यह कार्य पूर्णतया अनुचित है क्योंकि इससे उमा का मनोबल कमजोर पड़ जाता। ऐसे अभिभावकों को मैं यह सुझाव देना चाहूँगा कि वे अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दें और उसे गर्व के साथ सबके सामने रखें क्योंकि ऐसा करके वे अपनी बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा होने में अपना योगदान देंगे।
Class 9 Hindi Chapter 6 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. रामस्वरूप : (चौंककर खड़े हो जाते हैं।) उमा, उमा!
उमा : अब मुझे कह लेने दीजिए, बाबूजी… ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए हैं, इनसे जरा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उनके चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?
गोपालप्रसाद : (ताव में आकर) बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?
उमा : (तेज आवाज़ में) जी हाँ, और हमारी बेइज्जती नहीं होती जो आप इतनी देर से नाप-तोल कर रहे हैं? और ज़रा अपने इन साहबजादे से पूछिए कि अभी पिछली फरवरी में ये लड़कियों के होस्टल के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहे थे, और वहाँ से कैसे भगाए गए थे!
शंकर : बाबूजी, चलिए।
गोपालप्रसाद : लड़कियों के होस्टल में?… क्या तुम कालेज में पढ़ी हो? (रामस्वरूप चुप)
(क) उमा द्वारा गोपाल प्रसाद को ‘खरीददार’ कहना किस सामाजिक बुराई की ओर संकेत करता है?
(i) बाजारवाद की ओर
(ii) विवाह के नाम पर होने वाले लड़कियों के मोल-भाव की ओर
(iii) बढ़ती हुई बेरोजगारी की ओर
(iv) शिक्षा के गिरते स्तर की ओर
(ख) उमा के संवाद “क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?” में ‘कसाई’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और क्यों?
(i) रामस्वरूप के लिए, क्योंकि वे अपनी बेटी को मजबूर कर रहे हैं।
(ii) शंकर के लिए, क्योंकि वह डरा हुआ है
(iii) गोपाल प्रसाद जैसे संकीर्ण सोच वाले लोगों के लिए, जो लड़कियों को वस्तु समझते हैं।
(iv) समाज के उन लोगों के लिए जो मांस का व्यापार करते हैं।
(ग) “बाबूजी, चलिए।” – शंकर का यह संवाद उसकी किस चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?
(i) पिता के प्रति उसका अत्यधिक सम्मान।
(ii) अपनी पोल खुल जाने के डर से उत्पन्न घबराहट और कायरता।
(iii) घर जल्दी पहुँचने की उसकी व्याकुलता।
(iv) उमा के प्रति उसका आदर भाव।
(घ) गोपालप्रसाद का उमा से यह पूछना कि “क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो?” उनकी किस मानसिकता को दर्शाता है?
(i) स्त्री शिक्षा के प्रति उनका अत्यधिक लगाव।
(ii) उनकी यह सोच कि पढ़ी-लिखी लड़कियाँ तर्क करती हैं और उनके नियंत्रण में नहीं रहेंगी।
(iii) कॉलेज की पढ़ाई के प्रति उनकी जिज्ञासा।
(iv) उमा की योग्यता की जाँच करने की इच्छा।
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : उमा का व्यवहार गोपालप्रसाद और उनके बेटे के प्रति अपमानजनक और अनुचित था।
कारण (R) : उमा ने अपनी चुप्पी तोड़कर अपनी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा की तथा समाज की दोहरी मानसिकता को
आईना दिखाया।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बताइए कि वर्तमान युग में लड़का-लड़की में समानता लाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
प्रश्न 2.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में प्रेमा द्वारा पढ़ाई-लिखाई को जो दोष दिया गया है, वह आपकी दृष्टि में कितना उचित है ? इस विचारधारा को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
प्रश्न 3.
“आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं।” कथन का भाव स्पष्ट करते हुए लिखिए कि शंकर जैसे लड़कों की आदतों को सुधारने के लिए आप क्या उपाय करेंगे?
प्रश्न 4.
समाज में महिलाओं को उचित स्थान दिलवाने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?