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Class 9 Hindi आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
सैंड हिल पर किस तरह का दृश्य दिखाई दे रहा था?
उत्तर:
सैंड हिल पर यात्रियों की टोलियाँ थीं, जहाँ नवयुवक-युवतियाँ और गाँधी टोपी पहने लोग रंगीन कपड़ों में सूर्यास्त देख रहे थे और कॉफी पी रहे थे।
प्रश्न 2.
सूर्यास्त के समय समुद्र के पानी के बदलते रंगों का किस प्रकार वर्णन किया गया है?
उत्तर:
लेखक बताता है कि सूर्यास्त के समय रंग इतनी तेज़ी से बदल रहे थे कि उन्हें कोई एक नाम देना असंभव था। पहले पानी पर ‘सोना ही सोना’ (सुनहरा रंग) बिखरा हुआ था, जो सूरज डूबने के साथ ही ‘लहू’ (लाल रंग) जैसा दिखने लगा। अंत में वह लाल रंग ‘बैजनी’ और फिर ‘काला’ पड़ गया।
प्रश्न 3.
कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
वहाँ की रेत में अनगिनत अनाम रंग हैं। यह रेत सुरमई, खाकी, पीली और लाल जैसे कई रंगों के सम्मिश्रण से बनी हैं जो हर एक इंच पर अलग दिखाई देती है।
प्रश्न 4.
कन्याकुमारी के शिक्षित नवयुवकों की क्या स्थिति बताई गई है?
उत्तर:
वहाँ के शिक्षित नवयुवक बेकारी की समस्या से जूझ रहे हैं। वे अकसर नौकरियों के लिए अर्जियाँ देते हैं और छोटे-मोटे काम जैसे फोटो एल्बम या सीपियाँ बेचकर गुजारा करते हैं।
प्रश्न 5.
सूर्यास्त के बाद प्राकृतिक दृश्य लेखक को डरावना क्यों लगने लगा?
उत्तर:
सूर्यास्त के बाद जब पूरे दृश्य पर स्याही (अँधेरा) फैल गई, तो दूर खड़े नारियल के झुरमुट स्याह पड़कर ऐसे लगने लगे जैसे वे सिर धुन रहे हों और हाथ-पैर पटक रहे हों।
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प्रश्न 6.
बेकारी की समस्या पर चर्चा करते हुए नवयुवक ने कौन-सी दार्शनिक बात कही?
उत्तर:
नवयुवक ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वे लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं और उन्हें विवेकानंद चट्टान से इतनी प्रेरणा तो मिलती ही है।
Class 9 Hindi Chapter 5 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ – लेखक ने कन्याकुमारी के समुद्र तट पर किस प्रकार के अनुभव को व्यक्त किया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
लेखक जब भारत के स्थल – भाग की आखिरी चट्टान पर खड़ा होता है, तो वह स्वयं को तीन समुद्रों (अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी) के संगम पर पाता है। इस दृश्य को देखते हुए वह अपनी पूरी चेतना से ‘शक्ति के विस्तार’ को महसूस करता है।
- विशालता का अहसास : तीनों दिशाओं में क्षितिज तक फैला पानी और विशेषकर हिंद महासागर का गहरा और अनंत विस्तार लेखक को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
- स्वयं का विस्मरण : उस असीम विस्तार को देखकर लेखक कुछ देर के लिए यह भूल जाता है कि वह एक यात्री या दर्शक है; वह स्वयं को उस विशाल दृश्य का एक हिस्सा महसूस करने लगता है।
- प्रकृति की शक्ति : सागर की ऊँची-ऊँची लहरों का चट्टानों से टकराना और फिर चूरा-बूंदों में बदल जाना प्रकृति की अदम्य शक्ति को दर्शाता है। लेखक उस समय स्वयं को बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी-सी चट्टान की तरह तुच्छ और प्रकृति के अधीन महसूस करता है।
प्रश्न 2.
अध्याय के आधार पर कन्याकुमारी के सामाजिक और आर्थिक जीवन का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
कन्याकुमारी एक धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहाँ मंदिर की घंटियाँ और भक्तों की टोलियाँ आस्था का केंद्र हैं। आर्थिक रूप से यहाँ मल्लाह और छोटे दुकानदार पर्यटकों पर निर्भर हैं। समाज में विरोधाभास है- एक तरफ सरकारी गेस्ट हाउस की विलासिता है, तो दूसरी तरफ शिक्षित युवाओं की भीषण बेकारी। लोग यहाँ प्रकृति का आनंद लेने आते हैं, पर स्थानीय लोग जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
Class 9 Ganga Chapter 5 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘लगता था कि उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं’ – यह पंक्ति लेखक की किस मानसिक स्थिति को दर्शाती है?
उत्तर:
यह पंक्ति लेखक के मन में उपजे ‘विस्मय’ और ‘अनंतता’ के भाव को दर्शाती है। हिंद महासागर के गहरे और दूर तक फैले जल को देखकर लेखक को यह बोध होता है। कि मानवीय सीमाएँ प्रकृति के सामने बहुत छोटी हैं। यह दृश्य उन्हें संसार की नश्वरता और प्रकृति की अमरता का अनुभव कराता है, जहाँ दृष्टि का कोई अंत नज़र नहीं आता।
प्रश्न 2.
लेखक ने इस यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय बेबसी के बीच जो द्वंद्व दिखाया है, उसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
मोहन राकेश का यह यात्रा वृत्तांत केवल प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की असीम सत्ता और मनुष्य की सीमित क्षमता के बीच के संबंधों का गहरा विश्लेषण करता है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- प्रकृति की विराटता बनाम मानवीय लघुता : लेखक जब समुद्र के संगम पर खड़ा होता है, तो वह ‘विस्तार की शक्ति’ को महसूस करता है। वह स्वयं को बड़ी चट्टानों के बीच एक ‘छोटी-सी चट्टान’ और उस विशाल कैनवास पर एक ‘रंगहीन बिंदु’ की तरह महसूस करता है। यह दर्शाता है कि प्रकृति के विस्तार के सामने मनुष्य का अस्तित्व कितना छोटा है।
- सौंदर्य और भय का सह-अस्तित्व : लेखक जिस सूर्यास्त के सौंदर्य को देखने के लिए टीलों पर चढ़ता है, वही प्रकृति सूर्य डूबते ही ‘स्याह’ (काली) और डरावनी हो जाती है। जो लहरें पहले चूरा बूँदें बनाकर सुंदर लगती थीं, अँधेरा होने पर वही लेखक को अपनी लपेट में लेने वाली दुश्मन लगने लगती हैं। यह प्रकृति के दोहरे चरित्र – सृजन और विनाश का विश्लेषण करता है।
- दार्शनिकता और वास्तविकता का टकराव : विवेकानंद चट्टान पर बैठा शिक्षित नवयुवक दार्शनिक बातें करता है और सीपियों का गूदा खाता है, लेकिन उसकी असली समस्या ‘बेकारी’ (बेरोजगारी) है। लेखक एक तरफ प्रकृति के आध्यात्मिक आनंद में खोना चाहता है, तो दूसरी तरफ उसे बस का टाइम टेबल और जीवन की भागदौड़ याद आने लगती है।
Class 9 Hindi Chapter 5 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. सूर्यास्त पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जा सके, इसके लिए मैं कुछ देर सैंड हिल पर रुका रहकर आगे उस टीले की तरफ़ चल दिया। पर रेत पर अपने अकेले कदमों को घसीटता वहाँ पहुँचा, तो देखा कि उससे आगे उससे भी ऊँचा एक और टीला है। जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है, उस पर पहुँचकर पच्छिमी क्षितिज का खुला विस्तार अवश्य नज़र आएगा। और सचमुच एक टीले पर पहुँचकर वह खुला विस्तार सामने फैला दिखाई दे गया। वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी, जैसे वह टीले से समुद्र में उतरने का रास्ता हो । सूर्य तब पानी से थोड़ा ही ऊपर था। अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया- ऐसे जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो, और मैंने सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।
(क) लेखक सैंड हिल पर क्यों रुका था?
(i) सूर्यास्त देखने के लिए
(ii) सूर्यास्त का विस्तार देखने के लिए
(iii) सूर्यास्त के विस्तार को पृष्ठभूमि में देखने के लिए
(iv) इनमें से कोई नहीं
(ख) लेखक की टाँगे थक गईं थी, लेकिन क्या थकने को तैयार नहीं था?
(i) साहस
(ii) मस्तिष्क
(iii) मन
(iv) हाथ
(ग) एक टीले पर पहुँचकर लेखक को क्या दिखाई दे गया?
(i) खुला विस्तार
(ii) खुला मैदान
(iii) समुद्र
(iv) इनमें से सभी
(घ) लेखक टीले पर क्यों बैठ गया?
(i) प्रकृति की सुदंरता से संतुष्ट होकर
(ii) प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर
(iii) अपनी थकान मिटाने के लिए
(iv) इनमें सभी
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही
विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।
कारण (R) : जैसे वह टीले से समुद्र में उतरने का रास्ता हो।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) सही है तथा कारण (A), कथन की सही व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
मोहन राकेश द्वारा रचित यात्रा वृत्तांत किसका सुंदर संगम है?
प्रश्न 2.
विवेकानंद चट्टान की भौगोलिक स्थिति क्या है?
प्रश्न 3.
चट्टान पर पहुँचने पर लेखक के डर का क्या प्रभाव दिखा?
प्रश्न 4.
अँधेरा होने पर लेखक क्या निर्णय लेता है?