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Class 9 Hindi आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 5 आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer
आखिरी चट्टान तक Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
सैंड हिल पर किस तरह का दृश्य दिखाई दे रहा था?
उत्तर:
सैंड हिल पर यात्रियों की टोलियाँ थीं, जहाँ नवयुवक-युवतियाँ और गाँधी टोपी पहने लोग रंगीन कपड़ों में सूर्यास्त देख रहे थे और कॉफी पी रहे थे।
प्रश्न 2.
सूर्यास्त के समय समुद्र के पानी के बदलते रंगों का किस प्रकार वर्णन किया गया है?
उत्तर:
लेखक बताता है कि सूर्यास्त के समय रंग इतनी तेज़ी से बदल रहे थे कि उन्हें कोई एक नाम देना असंभव था। पहले पानी पर ‘सोना ही सोना’ (सुनहरा रंग) बिखरा हुआ था, जो सूरज डूबने के साथ ही ‘लहू’ (लाल रंग) जैसा दिखने लगा। अंत में वह लाल रंग ‘बैजनी’ और फिर ‘काला’ पड़ गया।
प्रश्न 3.
कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
वहाँ की रेत में अनगिनत अनाम रंग हैं। यह रेत सुरमई, खाकी, पीली और लाल जैसे कई रंगों के सम्मिश्रण से बनी हैं जो हर एक इंच पर अलग दिखाई देती है।
प्रश्न 4.
कन्याकुमारी के शिक्षित नवयुवकों की क्या स्थिति बताई गई है?
उत्तर:
वहाँ के शिक्षित नवयुवक बेकारी की समस्या से जूझ रहे हैं। वे अकसर नौकरियों के लिए अर्जियाँ देते हैं और छोटे-मोटे काम जैसे फोटो एल्बम या सीपियाँ बेचकर गुजारा करते हैं।
प्रश्न 5.
सूर्यास्त के बाद प्राकृतिक दृश्य लेखक को डरावना क्यों लगने लगा?
उत्तर:
सूर्यास्त के बाद जब पूरे दृश्य पर स्याही (अँधेरा) फैल गई, तो दूर खड़े नारियल के झुरमुट स्याह पड़कर ऐसे लगने लगे जैसे वे सिर धुन रहे हों और हाथ-पैर पटक रहे हों।
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प्रश्न 6.
बेकारी की समस्या पर चर्चा करते हुए नवयुवक ने कौन-सी दार्शनिक बात कही?
उत्तर:
नवयुवक ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वे लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं और उन्हें विवेकानंद चट्टान से इतनी प्रेरणा तो मिलती ही है।
Class 9 Hindi Chapter 5 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति’ – लेखक ने कन्याकुमारी के समुद्र तट पर किस प्रकार के अनुभव को व्यक्त किया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
लेखक जब भारत के स्थल – भाग की आखिरी चट्टान पर खड़ा होता है, तो वह स्वयं को तीन समुद्रों (अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी) के संगम पर पाता है। इस दृश्य को देखते हुए वह अपनी पूरी चेतना से ‘शक्ति के विस्तार’ को महसूस करता है।
- विशालता का अहसास : तीनों दिशाओं में क्षितिज तक फैला पानी और विशेषकर हिंद महासागर का गहरा और अनंत विस्तार लेखक को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
- स्वयं का विस्मरण : उस असीम विस्तार को देखकर लेखक कुछ देर के लिए यह भूल जाता है कि वह एक यात्री या दर्शक है; वह स्वयं को उस विशाल दृश्य का एक हिस्सा महसूस करने लगता है।
- प्रकृति की शक्ति : सागर की ऊँची-ऊँची लहरों का चट्टानों से टकराना और फिर चूरा-बूंदों में बदल जाना प्रकृति की अदम्य शक्ति को दर्शाता है। लेखक उस समय स्वयं को बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी-सी चट्टान की तरह तुच्छ और प्रकृति के अधीन महसूस करता है।
प्रश्न 2.
अध्याय के आधार पर कन्याकुमारी के सामाजिक और आर्थिक जीवन का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
कन्याकुमारी एक धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहाँ मंदिर की घंटियाँ और भक्तों की टोलियाँ आस्था का केंद्र हैं। आर्थिक रूप से यहाँ मल्लाह और छोटे दुकानदार पर्यटकों पर निर्भर हैं। समाज में विरोधाभास है- एक तरफ सरकारी गेस्ट हाउस की विलासिता है, तो दूसरी तरफ शिक्षित युवाओं की भीषण बेकारी। लोग यहाँ प्रकृति का आनंद लेने आते हैं, पर स्थानीय लोग जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
Class 9 Ganga Chapter 5 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘लगता था कि उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं’ – यह पंक्ति लेखक की किस मानसिक स्थिति को दर्शाती है?
उत्तर:
यह पंक्ति लेखक के मन में उपजे ‘विस्मय’ और ‘अनंतता’ के भाव को दर्शाती है। हिंद महासागर के गहरे और दूर तक फैले जल को देखकर लेखक को यह बोध होता है। कि मानवीय सीमाएँ प्रकृति के सामने बहुत छोटी हैं। यह दृश्य उन्हें संसार की नश्वरता और प्रकृति की अमरता का अनुभव कराता है, जहाँ दृष्टि का कोई अंत नज़र नहीं आता।
प्रश्न 2.
लेखक ने इस यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय बेबसी के बीच जो द्वंद्व दिखाया है, उसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
मोहन राकेश का यह यात्रा वृत्तांत केवल प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की असीम सत्ता और मनुष्य की सीमित क्षमता के बीच के संबंधों का गहरा विश्लेषण करता है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- प्रकृति की विराटता बनाम मानवीय लघुता : लेखक जब समुद्र के संगम पर खड़ा होता है, तो वह ‘विस्तार की शक्ति’ को महसूस करता है। वह स्वयं को बड़ी चट्टानों के बीच एक ‘छोटी-सी चट्टान’ और उस विशाल कैनवास पर एक ‘रंगहीन बिंदु’ की तरह महसूस करता है। यह दर्शाता है कि प्रकृति के विस्तार के सामने मनुष्य का अस्तित्व कितना छोटा है।
- सौंदर्य और भय का सह-अस्तित्व : लेखक जिस सूर्यास्त के सौंदर्य को देखने के लिए टीलों पर चढ़ता है, वही प्रकृति सूर्य डूबते ही ‘स्याह’ (काली) और डरावनी हो जाती है। जो लहरें पहले चूरा बूँदें बनाकर सुंदर लगती थीं, अँधेरा होने पर वही लेखक को अपनी लपेट में लेने वाली दुश्मन लगने लगती हैं। यह प्रकृति के दोहरे चरित्र – सृजन और विनाश का विश्लेषण करता है।
- दार्शनिकता और वास्तविकता का टकराव : विवेकानंद चट्टान पर बैठा शिक्षित नवयुवक दार्शनिक बातें करता है और सीपियों का गूदा खाता है, लेकिन उसकी असली समस्या ‘बेकारी’ (बेरोजगारी) है। लेखक एक तरफ प्रकृति के आध्यात्मिक आनंद में खोना चाहता है, तो दूसरी तरफ उसे बस का टाइम टेबल और जीवन की भागदौड़ याद आने लगती है।
आखिरी चट्टान तक Extra Questions विषयवस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
“शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” कथन के माध्यम से लेखक समुद्र की किस विशेषता को रेखांकित करना चाहता है?
उत्तर:
लेखक जब कन्याकुमारी की उस अंतिम चट्टान पर खड़ा था, जहाँ तीन समुद्रों का मिलन होता है, तब उसे चारों ओर असीम जलराशि ही दिखाई। दे रही थी। इस कथन का अर्थ यह है कि प्रकृति की विशालता ही उसकी वास्तविक शक्ति है। समुद्र का वह अनंत विस्तार मनुष्य को अपनी लघुता का एहसास कराता है और यह दर्शाता है कि जहाँ तक दृष्टि जाती है, वहाँ केवल जल की शक्ति का ही साम्राज्य है। यह दृश्य मन में भय और विस्मय दोनों उत्पन्न करता है।
प्रश्न 2.
सूर्यास्त देखते समय लेखक सैंड हिल पर रुकने के बजाय आगे के टीलों की ओर क्यों बढ़ता गया?
उत्तर:
सूर्यास्त देखते समय लेखक सैंड हिल पर रुकने के बजाय आगे के टीलों की ओर इसलिए बढ़ता गया, क्योंकि उसे सैंड हिल से सामने का विस्तार तो दिख रहा था, लेकिन दाहिनी ओर एक ऊँचा टीला अरब सागर के दृश्य को रोक रहा था। लेखक चाहता था कि उसे वह बिंदु मिले, जहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला और अबाध दृश्य मिल सके। वह सूर्य को सीधे समुद्र के पानी में डूबते हुए देखने की लालसा में एक के बाद एक कई टीले पार करता चला गया।
प्रश्न 3.
पाठ में वर्णित ‘विवेकानंद चट्टान’ की बनावट और उसके वातावरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पाठ में वर्णित विवेकानंद चट्टान समुद्र के बीच स्थित एक विशाल और स्याह चट्टान है, जो तीनों समुद्रों-अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल पर स्थित है। चारों ओर से ऊँची-ऊँची लहरें उससे टकराती रहती हैं, जिससे उसका वातावरण अत्यंत गंभीर और प्रभावशाली प्रतीत होता है। यह चट्टान शांत, ध्यानमग्न और आध्यात्मिक वातावरण से भरपूर लगती है, क्योंकि यहीं स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। वहाँ का प्राकृतिक दृश्य मन में श्रद्धा, शांति और प्रेरणा की भावना उत्पन्न करता है।
प्रश्न 4.
कन्याकुमारी के शिक्षित नवयुवकों की मानसिक स्थिति और उनकी विवशता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
लेखक ने एक स्थानीय ग्रेजुएट युवक के माध्यम से वहाँ की बेरोजगारी की समस्या को दर्शाया है। वहाँ के शिक्षित युवक अपनी डिग्री होने के बावजूद छोटे-छोटे काम करने को मजबूर हैं। वे पर्यटकों को फोटो एल्बम बेचते हैं। या दार्शनिक बातों में उलझे रहते हैं। उनके पास उच्च शिक्षा तो है, लेकिन जीविकोपार्जन के साधन सीमित हैं। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और अक्सर नौकरियों की कमी पर आपस में बहस करते पाए जाते हैं।
प्रश्न 5.
लेखक ने सूर्यास्त के समय रेत के बदलते रंगों का चित्रण किस प्रकार किया है?
उत्तर:
लेखक ने सूर्यास्त के समय रेत के बदलते रंगों का चित्रण इस प्रकार किया है
- प्रारंभ में सूर्य की किरणों से रेत सुनहरी दिखाई दे रही थी।
- जैसे-जैसे सूर्य डूबने लगा, रेत का रंग सुनहरा, फिर लाल और धीरे-धीरे बैंगनी होने लगा।
- अंत में, गहरा अँधेरा छाने पर वह रेत स्याह या काली दिखाई देने लगी।
- रंगों का यह मेल ऐसा लग रहा था मानो किसी ने विभिन्न रंगों को आपस में मिलाकर तट पर बिखेर दिया हो।
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प्रश्न 6.
“लगता था कि उस ओर दूसरा छोर है ही नहीं” हिंद महासागर को देखकर लेखक के मन में यह विचार क्यों आया?
उत्तर:
हिंद महासागर की अनंत गहराई और उसका असीम विस्तार देखकर लेखक अभिभूत था। कन्याकुमारी भारत का अंतिम सिरा है, इसके आगे केवल जल ही जल है। जब लेखक ने दक्षिण की ओर देखा, तो उसे क्षितिज तक पानी के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई नहीं दिया। इस दृश्य ने उसे यह एहसास दिलाया कि प्रकृति का यह रूप सीमाहीन है और मानवीय दृष्टि इस विशालता का अंत नहीं पा सकती।
प्रश्न 7.
समुद्र तट से वापस लौटते समय लेखक के सामने कौन-सी चुनौतियाँ आई?
उत्तर:
अँधेरा होने के बाद वापस लौटते समय लेखक एक कठिन स्थिति में फँस गया था। समुद्र का पानी बढ़ने लगा था और लहरें तट की ओर बढ़ रही थीं। किनारे की चौड़ाई बहुत कम रह गई थी और फिसलन भरी चट्टानों के कारण रास्ते पर चलना खतरनाक हो गया था। एक समय ऐसा आया, जब सामने एक ऊँची चट्टान खड़ी थी और रास्ता बंद था। लेखक को डर था कि कहीं वह लहरों की चपेट में न आ जाए, लेकिन अंततः उसने साहस दिखाकर चट्टान की नोंकों को पकड़कर ऊपर चढ़कर अपनी जान बचाई।
प्रश्न 8.
लेखक ने कन्याकुमारी के प्रातः कालीन दृश्य और वहाँ के जनजीवन का कैसा वर्णन किया है?
उत्तर:
कन्याकुमारी की सुबह का दृश्य आध्यात्मिक और सक्रियता से भरा होता है। घाट पर लोग सूर्योदय देखने और अर्घ्य देने के लिए जमा हो जाते हैं। मंदिर की घंटियाँ सुनाई देती हैं और वातावरण में एक पवित्रता होती है। स्थानीय लोग अपनी जीविका के लिए सक्रिय हो जाते हैं, जिसमें युवतियाँ यात्रियों को हस्तशिल्प की वस्तुएँ जैसे- शंख और मालाएं दिखाती हैं और ग्रेजुएट नवयुवक फोटो एल्बम बेचता है। चारों ओर समुद्र की लहरों का संगीत गूंजता रहता है।
प्रश्न 9.
पाठ के आधार पर बताइए कि समुद्र के बीच जाने वाली ‘नाव’ की बनावट और मल्लाहों का कौशल कैसा था?
उत्तर:
पाठ के अनुसार समुद्र के बीच जाने वाली नाव साधारण थी। वह किसी मजबूत लकड़ी की बड़ी नाव नहीं थी, बल्कि रबर के पेड़ के तीन तनों को एकसाथ जोड़कर बनाई गई थी।
उसी छोटी-सी नाव में चार मल्लाह लेखक और अन्य लोगों को विवेकानंद चट्टान तक ले गए। मल्लाह बहुत साहसी, कुशल और अनुभवी थे, क्योंकि वे ऊँची-ऊँची लहरों और नुकीली चट्टानों के बीच से सावधानीपूर्वक नाव को आगे बढ़ा रहे थे। उनकी कुशलता और संतुलन के कारण ही यात्री सुरक्षित रूप से समुद्र के बीच स्थित चट्टान तक पहुँच सके।
प्रश्न 10.
“अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया।” लेखक यहाँ अपनी किस मानसिक अवस्था का वर्णन कर रहा है?
उत्तर:
यहाँ लेखक उस संतोष की बात कर रहा है, जो एक कठिन लक्ष्य को पाने के बाद मिलता है। वह बहुत थक चुका था और सूर्यास्त देखने के लिए उसने कई टीलों की चढ़ाई की थी। जब उसे अंततः वह सही स्थान मिल गया, जहाँ से प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य पूर्ण रूप से दिखाई दे रहा था, , तो उसकी सारी थकान मिट गई। उसे लगा कि उसका भागना और संघर्ष करना सफल रहा। यह सुख किसी बड़ी उपलब्धि को पाने जैसा था।
प्रश्न 11.
‘आखिरी चट्टान तक’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘आखिरी चट्टान तक’ शीर्षक पाठ की विषयवस्तु और लेखक के अनुभवों के अनुरूप अत्यंत सार्थक है। इस यात्रा वृत्तांत में लेखक कन्याकुमारी स्थित भारत के दक्षिणी छोर की अंतिम चट्टान तक पहुँचने का वर्णन करता है, जहाँ तीनों समुद्र- अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का संगम होता है।
यह चट्टान केवल भौगोलिक सीमा का संकेत नहीं देती, बल्कि लेखक की जिज्ञासा, साहस, प्रकृति प्रेम और आत्मानुभूति का प्रतीक भी है। वहाँ पहुँचकर लेखक को रोमांच, विस्मय और संतोष की अनुभूति होती है। इस प्रकार शीर्षक यात्रा के उद्देश्य, अनुभव और भावनात्मक गहराई को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है।
प्रश्न 12.
लेखक ने तीनों समुद्रों के संगम स्थल का चित्रण किस प्रकार किया है? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
लेखक ने तीनों समुद्रों-अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के संगम स्थल का अत्यंत सजीव और प्रभावशाली चित्रण किया है। चारों ओर फैली जलराशि, ऊँची-ऊँची लहरों का चट्टानों से टकराना और दूर तक फैला क्षितिज दृश्य को भव्य बनाते हैं।
समुद्र की अपार शक्ति और विस्तार को देखकर लेखक प्रभावित होता है और स्वयं को उस दृश्य का एक छोटा सा हिस्सा अनुभव करता है। यह स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ विवेकानंद चट्टान स्थित है। संगम का यह दृश्य लेखक के मन में विस्मय और शांति की भावना उत्पन्न करता है।
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प्रश्न 13.
यात्रा के दौरान लेखक को किन-किन नवीन अनुभवों से गुजरना पड़ा? विस्तार से बताइए।
उत्तर:
यात्रा के दौरान लेखक को अनेक नवीन और रोचक अनुभव प्राप्त हुए। उसने पहली बार तीन समुद्रों के संगम का अद्भुत दृश्य देखा और समुद्र की विशालता का अनुभव किया। सैंड हिल तक पहुँचने की कठिन यात्रा,
सूर्यास्त के बदलते रंगों का दृश्य तथा समुद्र तट की बहुरंगी रेत उसके लिए विशेष अनुभव रहे।
बढ़ते पानी के बीच सुरक्षित मार्ग खोजने का रोमांच भी नया था। विवेकानंद चट्टान तक छोटी नाव से पहुँचने का अनुभव भी साहसपूर्ण था। इन सभी अनुभवों ने लेखक के मन में विस्मय, आनंद, भय और आत्मचेतना की भावनाएँ उत्पन्न कीं।
प्रश्न 14.
‘आखिरी चट्टान तक’ पाठ के आधार पर यात्रा-वृत्तांत की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
‘आखिरी चट्टान तक’ पाठ में यात्रा-वृत्तांत की अनेक प्रमुख विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इसमें प्राकृतिक दृश्यों का सजीव और चित्रात्मक वर्णन किया गया है; जैसे- समुद्र, चट्टानें, सूर्यास्त और रंग-बिरंगी रेत। लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं – विस्मय, रोमांच, भय और संतोष को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों के जीवन और बेरोजगारी की समस्या का उल्लेख सामाजिक पक्ष को भी उजागर करता है। भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। इस प्रकार यह यात्रा वृत्तांत प्रकृति, अनुभव और चिंतन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 15.
पाठ में ‘सीपियों’ का जिक्र किस संदर्भ में आया है और ये वहाँ के लोगों के लिए क्या महत्त्व रखती हैं?
उत्तर:
पाठ में सीपियों का उल्लेख मुख्य रूप से दो संदर्भों में हुआ है। ये हैं
- जीविका का साधन – स्थानीय युवतियाँ समुद्र से सीपियाँ और शंख इकट्ठा करके उनकी मालाएँ बनाती हैं और उन्हें यात्रियों को बेचकर अपना गुजारा करती हैं।
- भोजन का आधार – शिक्षित बेरोजगार युवक के अनुसार, वहाँ के लोग सीपियों का गूदा खाते हैं, जो उनकी गरीबी और समुद्र पर उनकी निर्भरता को दर्शाता है।
प्रश्न 16.
लेखक को ‘कैप कोमोरिन’ (कन्याकुमारी) के सूर्यास्त और अन्य स्थानों के सूर्यास्त में क्या अंतर महसूस हुआ? पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर:
लेखक के अनुसार, अन्य स्थानों पर सूर्यास्त केवल एक खगोलीय घटना होती है, लेकिन कन्याकुमारी में यह एक उत्सव जैसा है। यहाँ तीन समुद्रों के मिलन स्थल पर सूर्य का पानी में विलीन होना रंगों की एक ऐसी अद्भुत प्रदर्शनी लगाता है, जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलती। यहाँ का सूर्यास्त केवल आँखों को नहीं, बल्कि आत्मा को तृप्त करता है और मनुष्य को प्रकृति के साथ एकाकार कर देता है।
प्रश्न 17.
लेखक के मन में उत्पन्न भय और साहस के भावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यात्रा के दौरान लेखक के मन में कई बार भय और साहस के मिश्रित भाव उत्पन्न हुए। समुद्र का पानी बढ़ने से तट का रास्ता सँकरा होता जा रहा था और लहरे पैरों तक पहुँचने लगी थीं, जिससे लेखक को खतरे का आभास हुआ। अँधेरा बढ़ने और रास्ता भटक जाने की आशंका से उसका मन भयभीत हो उठा। फिर भी उसने धैर्य और साहस बनाए रखा तथा सुरक्षित मार्ग खोजने का प्रयास किया।
विवेकानंद चट्टान तक छोटी नाव से जाते समय भी ऊँची लहरों और नुकीली चट्टानों के बीच उसे डर लगा परंतु उसने अपने साहस और संयम से परिस्थिति का सामना किया। इस प्रकार, लेखक का साहसिक और दृढ़ व्यक्तित्व स्पष्ट होता है।
प्रश्न 18.
सैंड हिल तक पहुँचने की यात्रा में लेखक के अनुभवों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सैंड हिल तक पहुँचने की यात्रा लेखक के लिए अत्यंत रोचक और चुनौतीपूर्ण रही। सूर्यास्त का सुंदर दृश्य देखने की इच्छा से वह लगातार एक के बाद एक ऊँचे रेत के टीलों को पार करता गया। यद्यपि उसकी टाँगे थक गई थीं, फिर भी उसका उत्साह कम नहीं हुआ। अंततः वह ऐसे स्थान पर पहुँचा, जहाँ से सूर्यास्त का अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहा था। सुनहरी किरणों से चमकती रेत और बदलते रंगों वाला आकाश उसे अत्यंत आकर्षक लगा। इस दृश्य को देखकर उसे अपने प्रयास की सफलता पर संतोष और गर्व का अनुभव हुआ।
प्रश्न 19.
“समुद्र का पानी हर पल अपना चरित्र बदल रहा था।” वाक्य की पुष्टि पाठ के उदाहरणों से कीजिए।
उत्तर:
पाठ में कई स्थानों पर समुद्र के पानी के बदलते स्वभाव का सजीव चित्रण मिलता है। कभी ऊँची-ऊँची लहरें चट्टानों से टकराकर अपनी प्रचंड शक्ति दिखाती हैं, तो कभी शांत और विस्तृत रूप में दिखाई देती हैं। सूर्यास्त के समय समुद्र का रंग बार-बार बदलता रहता है। वह पहले सुनहरा, फिर लाल, फिर बैजनी और अंत में काला हो जाता है। बढ़ते पानी के कारण तट की चौड़ाई भी लगातार कम होती जाती है, जिससे उसका रूप और व्यवहार बदलता प्रतीत होता है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि समुद्र का पानी हर क्षण अपना चरित्र बदल रहा था।
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प्रश्न 20.
पाठ के अंत में लेखक के मन में क्या टीस या मलाल रह गया था?
उत्तर:
पाठ के अंत में लेखक को इस बात का दुःख था कि वह उस जादुई दृश्य को और अधिक समय तक नहीं देख सका। उसे लगा कि वह अपनी इस यात्रा को पूरी तरह से जी नहीं पाया और उसे वापस अपने शहरी जीवन की भागदौड़ में लौटना होगा। प्रकृति के उस असीम विस्तार को छोड़कर वापस छोटे कमरों और बंद दफ्तरों में जाने की सोच ने लेखक के मन को थोड़ा उदास कर दिया था।
प्रश्न 21.
समुद्र के बढ़ते पानी के बीच लेखक को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समुद्र के बढ़ते पानी के कारण लेखक को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तट की चौड़ाई लगातार कम होती जा रही थी और लहरें उसके पैरों तक पहुँचने लगी थीं, जिससे उसे खतरे का एहसास हुआ। ऊपर जाने का रास्ता ऊँची रेत के कारण बंद था, इसलिए उसे तेजी से आगे बढ़ना पड़ा।
रास्ते में एक चट्टान से टकराकर उसे हल्की चोट भी लगी। आगे बढ़ने के लिए उसे चट्टानों पर चढ़ना पड़ा। अंततः दूसरी ओर सुरक्षित तट देखकर उसे राहत मिली। इस अनुभव ने उसकी साहसिकता और धैर्य को उजागर किया।
प्रश्न 22.
लेखक के व्यक्तित्व की विशेषताएँ इस यात्रा-वृत्तांत के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
इस यात्रा-वृत्तांत के आधार पर लेखक का व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील, साहसी और जिज्ञासु प्रतीत होता है। वह प्रकृति-प्रेमी है और समुद्र, चट्टानों तथा सूर्यास्त के दृश्यों से गहराई से प्रभावित होता है। कठिन परिस्थितियों में भी वह धैर्य और साहस बनाए रखता है।
नई जगहों को देखने और समझने की उसकी उत्सुकता स्पष्ट दिखाई देती है। स्थानीय लोगों की समस्याओं के प्रति उसकी संवेदनशीलता भी उल्लेखनीय है। वह आत्मचिंतनशील और अनुभवों से सीखने वाला व्यक्ति है। इस प्रकार लेखक का व्यक्तित्व दृढ भावुक और प्रकृति से जुड़ा हुआ दिखाई देता है।
Class 9 Hindi Chapter 5 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. सूर्यास्त पूरे विस्तार की पृष्ठभूमि में देखा जा सके, इसके लिए मैं कुछ देर सैंड हिल पर रुका रहकर आगे उस टीले की तरफ़ चल दिया। पर रेत पर अपने अकेले कदमों को घसीटता वहाँ पहुँचा, तो देखा कि उससे आगे उससे भी ऊँचा एक और टीला है। जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई टीले पार किए। टाँगें थक रही थीं पर मन थकने को तैयार नहीं था। हर अगले टीले पर पहुँचने पर लगता कि शायद अब एक ही टीला और है, उस पर पहुँचकर पच्छिमी क्षितिज का खुला विस्तार अवश्य नज़र आएगा। और सचमुच एक टीले पर पहुँचकर वह खुला विस्तार सामने फैला दिखाई दे गया। वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी, जैसे वह टीले से समुद्र में उतरने का रास्ता हो । सूर्य तब पानी से थोड़ा ही ऊपर था। अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया- ऐसे जैसे वह टीला संसार की सबसे ऊँची चोटी हो, और मैंने सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।
(क) लेखक सैंड हिल पर क्यों रुका था?
(i) सूर्यास्त देखने के लिए
(ii) सूर्यास्त का विस्तार देखने के लिए
(iii) सूर्यास्त के विस्तार को पृष्ठभूमि में देखने के लिए
(iv) इनमें से कोई नहीं
(ख) लेखक की टाँगे थक गईं थी, लेकिन क्या थकने को तैयार नहीं था?
(i) साहस
(ii) मस्तिष्क
(iii) मन
(iv) हाथ
(ग) एक टीले पर पहुँचकर लेखक को क्या दिखाई दे गया?
(i) खुला विस्तार
(ii) खुला मैदान
(iii) समुद्र
(iv) इनमें से सभी
(घ) लेखक टीले पर क्यों बैठ गया?
(i) प्रकृति की सुदंरता से संतुष्ट होकर
(ii) प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर
(iii) अपनी थकान मिटाने के लिए
(iv) इनमें सभी
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही
विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : वहाँ से दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी।
कारण (R) : जैसे वह टीले से समुद्र में उतरने का रास्ता हो।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) सही है तथा कारण (A), कथन की सही व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की गलत व्याख्या करता है।
2. केप होटल के आगे बने बाथ टैंक के बाईं तरफ समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टानों में से एक पर खड़ा होकर मैं देर तक भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा पृष्ठभूमि में कन्याकुमारी के मंदिर की लाल और सफेद लकीरें चमक रही थीं अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी, इन तीनों के संगम स्थल-सी वह चट्टान, जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी, हर तरफ से पानी की मार सहती हुई स्वयं भी समाधिस्थ सी लग रही थी।
हिंद महासागर की ऊँची-ऊँची लहरें मेरे आस-पास की स्याह चट्टानों से टकरा रही थीं। बलखाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई। आती थीं, जिससे उनके ऊपर चूरा बूँदों की जालियाँ बन जाती थीं। मैं देख रहा था और अपनी पूरी चेतना से महसूस कर रहा था – शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी ही पानी था, फिर भी सामने का क्षितिज, हिंद महासागर का अपेक्षाकृत अधिक दूर और अधिक गहरा जान पड़ता था।
(i) लेखक जिस चट्टान पर खड़ा था, उसके पीछे किस मंदिर की झलक दिखाई दे रही थी?
(क) रामेश्वरम मंदिर
(ख) कन्याकुमारी मंदिर
(ग) मीनाक्षी मंदिर
(घ) पद्मनाभस्वामी मंदिर
(ii) गद्यांश के अनुसार, किस महासागर का क्षितिज अपेक्षाकृत अधिक दूर और गहरा दिखाई देता है?
(क) अरब सागर
(ख) बंगाल की खाड़ी
(ग) हिंद महासागर
(घ) ये सभी
(iii) लेखक ने स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल का वर्णन किस प्रकार किया है?
(क) वह चट्टान पानी की मार से सुरक्षित है।
(ख) वह चट्टान स्वयं भी समाधिस्थ सी लग रही थी।
(ग) उस चट्टान पर कोई लहर नहीं पहुँचती।
(घ) वह चट्टान सफेद रंग की है।
(iv) कथन (A) : समुद्र की लहरें जब नुकीली चट्टानों से टकराती थीं, तो उन पर चूरा बूँदों की जालियाँ बन जाती थीं।
कारण (R) : नुकीली चट्टानें लहरों के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर उन्हें काट देती थीं।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(v) गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. लेखक भारत के स्थल भाग की आखिरी चट्टान को देख रहा था।
2. कन्याकुमारी में तीन सागरों का संगम होता है।
3. स्वामी विवेकानंद ने उसी चट्टान पर समाधि लगाई थी, जिसका वर्णन लेखक कर रहा है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(क) 1 और 2
(ख) 2 और 3
(ग) 1 और 3
(घ) 1, 2 और 3
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
मोहन राकेश द्वारा रचित यात्रा वृत्तांत किसका सुंदर संगम है?
प्रश्न 2.
विवेकानंद चट्टान की भौगोलिक स्थिति क्या है?
प्रश्न 3.
चट्टान पर पहुँचने पर लेखक के डर का क्या प्रभाव दिखा?
प्रश्न 4.
अँधेरा होने पर लेखक क्या निर्णय लेता है?
विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक ने कन्याकुमारी के ‘सूर्योदय’ के दृश्य को सूर्यास्त की तुलना में किस प्रकार भिन्न पाया?
प्रश्न 2.
“एक मरे हुए शहर की तरह शांत” लेखक ने यह उपमा किस संदर्भ में और क्यों दी है?
प्रश्न 3.
पाठ में लेखक की ‘शारीरिक और मानसिक थकान’ का वर्णन किस प्रकार हुआ है?
प्रश्न 4.
“हर चट्टान एक कहानी कह रही थी।” पाठ के आधार पर किन्हीं दो चट्टानों की विशेषताओं का उल्लेख करें।
प्रश्न 5.
लेखक ने कन्याकुमारी की ‘हवा’ और ‘नमी’ का वर्णन किस प्रकार किया है?