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Class 9 Hindi संवादहीन Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन Extra Question Answer
संवादहीन Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
ताई ने मिट्टू को अपने जीवन का सहारा क्यों बना लिया था?
उत्तर:
ताई ने मिट्टू को अपने जीवन का सहारा इसलिए बना लिया था क्योंकि वह अकेली थीं और उनके जीवन में कोई अपना नहीं था। मिट्टू (तोता) ही उनका साथी मनोरंजन और स्नेह का आधार बन गया था। वह उसी से बातें करती थीं और उसे अपने बच्चे की तरह प्यार करती थीं।
प्रश्न 2.
‘ताई को घड़ी भर के लिए भी मिट्ठू का वियोग सहन नहीं हो सकता था’-ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर:
‘ताई को घड़ी भर के लिए भी मिट्टू का वियोग सहन नहीं हो सकता था ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि ताई को मिट्ठू से अत्यधिक लगाव था। वह उसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानती थीं। उसके बिना उन्हें अकेलापन और दुख महसूस होता था, इसलिए थोड़ी देर के लिए भी उससे दूर रहना उनके लिए कठिन था।
प्रश्न 3.
अत्यधिक मोह के बावजूद मिट्टू को छोड़कर कुंभ-स्नान जाने में ताई की क्या महबूरी रही होगी?
उत्तर:
अत्यधिक मोह के बावजूद ताई को कुंभ-स्नान जाने की मजबूरी इसलिए रही होगी क्योंकि वह धार्मिक आस्था से जुड़ी थीं। कुंभ-स्नान को उन्होंने पुण्य का कार्य माना होगा और सामाजिक / धार्मिक कर्तव्य समझकर जाना आवश्यक समझा, भले ही इसके लिए उन्हें मिट्ठू को छोड़ना पड़ा।
प्रश्न 4.
जगन मास्टर का स्वभाव कैसा था? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जगन मास्टर का स्वभाव दयालु, समझदार और सहानुभूतिपूर्ण था। वह ताई की भावनाओं को समझते थे और उनके दुख में उनका साथ देते थे। उन्होंने परिस्थिति को सँभालने की कोशिश की और ताई को मानसिक सहारा दिया।
प्रश्न 5.
ताई और मिट्टू के बीच नोक-झोंक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ताई और मिट्टू के बीच नोक-झोंक का एक उदाहरण यह है कि जब मिट्टू शरारत करता था या कुछ उल्टा-सीधा बोलता था, तो ताई उसे डाँटती थीं, लेकिन तुरंत ही उसे प्यार भी करने लगती थीं। इस तरह उनकी नोक-झोंक में स्नेह झलकता था।
प्रश्न 6.
गाँव वालों में मिट्टू के उड़ जाने पर ताई को भ्रम में क्यों रखा?
उत्तर:
गाँव वालों ने मिट्ठू के उड़ जाने पर ताई को भ्रम में इसलिए रखा क्योंकि वे जानते थे कि ताई मिट्ठू से बहुत अधिक प्रेम करती हैं। यदि उन्हें सच्चाई पता चल जाती तो उन्हें गहरा दुख पहुँचता । इसलिए उन्होंने ताई की भावनाओं की रक्षा के लिए उन्हें सच्चाई नहीं बताई।
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Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘संवादहीन’ कहानी के आधार पर ताई के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ताई का चारित्रिक चित्रण
ताई इस कहानी की एक संवेदनशील, स्नेहमयी और अकेली वृद्ध महिला हैं। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
अत्यंत स्नेही और ममतामयी – ताई मिट्ठू को अपने बच्चे की तरह प्यार करती हैं। उनके जीवन में वही उनके स्नेह का केंद्र है।
अकेलापन और भावुकता – ताई के जीवन में कोई अपना नहीं है, इसलिए वह मिट्टू को ही अपना सहारा बना लेती हैं। छोटी-सी बात पर भी भावुक हो जाती हैं।
मोहग्रस्त स्वभाव – उन्हें मिट्टू से इतना लगाव है कि वे उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकतीं। यह उनका अत्यधिक मोह दर्शाता है।
धार्मिक प्रवृत्ति – ताई धार्मिक आस्था रखने वाली महिला हैं। कुंभ – स्नान के लिए जाना उनकी श्रद्धा और विश्वास को दिखाता है।
सरल और भोली – ताई का स्वभाव सीधा-सादा है। गाँव वाले उन्हें आसानी से भ्रम में रख लेते हैं, जिससे उनकी सरलता प्रकट होती है।
झुंझलाहट में भी प्रेम – वे कभी-कभी मिट्टू पर नाराज भी होती हैं, पर उनके मन में केवल प्रेम ही होता है।
प्रश्न 2.
कहानी ‘संवादहीन’ में उजागर सामाजिक विसंगतियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इस कहानी में ग्रामीण समाज की कई विसंगतियाँ सामने आती हैं। पलायन के कारण बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाते हैं और संवाद का अभाव उनके जीवन को सूना बना देता है। ताई का अकेलापन इसी विसंगति का उदाहरण है। साथ ही, यह कहानी आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को भी उजागर करती है – जहाँ जगन मास्टर आदर्शवादी होकर मिट्टू को स्वतंत्रता देना चाहते हैं, वहीं ताई के लिए मिट्टू का बंधन ही उनके जीवन का सहारा था।
प्रश्न 3.
“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।”
उत्तर:
इस पंक्ति का भाव यह है कि ताई और मिट्टू दोनों ही अकेले और असहाय थे। ताई के जीवन में कोई अपना नहीं था और वह एक सुनसान, जर्जर घर में रहती थीं। ऐसे में मिट्टू ही उनका एकमात्र साथी बन गया था। दूसरी ओर, मिट्टू भी ताई के सहारे ही जी रहा था। अर्थात दोनों एक-दूसरे के जीवन का सहारा थे-ताई मिट्टू के बिना अकेली थीं और मिट्टू ताई के बिना असहाय। उनके बीच का यह संबंध प्रेम, सहारा और आपसी निर्भरता को दर्शाता है।
Class 9 Ganga Chapter 3 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
कहानी ‘सवादहीन’ में ताई और मिट्टू का संबंध किस प्रकार मानव जीवन में संवाद और अपनत्व को उजागर करता है? विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
- ताई का परिवार गाँव छोड़कर शहर चला गया, जिससे उनका जीवन अकेला और सूना हो गया।
- मिट्टू उनके लिए केवल एक तोता नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम और ममता का केंद्र बन गया।
- ताई और मिट्टू के बीच प्रेमपूर्ण संवाद, नोक-झोंक और अपनत्व ने ताई के जीवन को रौनक दी।
- यह संबंध दर्शाता है कि मनुष्य को जीवन में संवाद, अपनापन और सहारा चाहिए, चाहे वह किसी मनुष्य से मिले या किसी पशु-पक्षी से।
- कहानी यह भी बताती है कि संवादहीनता और अकेलापन जीवन को बोझिल बना देता है, जबकि संवाद और प्रेम जीवन को सार्थक बनाते हैं।
प्रश्न 2.
यदि आप ताई की स्थिति में होते और आपका सबसे प्रिय साथी अचानक आपके जीवन से दूर चला जाता, तो आप उस स्थिति का सामना कैसे करते? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
ताई का जीवन अकेलेपन से भरा था और मिट्टू उनका संवाद का सहारा था।
- मिट्ठू के उड़ जाने से ताई का जीवन और अधिक सूना हो गया।
- इसमें यह विचार किया जा सकता है कि ऐसे समय में मनुष्य को धैर्य, आत्मबल और विवेक से काम लेना चाहिए।
- इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत अनुभव और सोच के आधार पर देंगे।
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संवादहीन Extra Questions विषयवस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
प्रश्न 1.
ताई के स्वभाव में ‘तुनकमिजाजी’ और ‘ममता’ का अद्भुत मिश्रण कैसे दिखाई देता है?
उत्तर:
ताई का स्वभाव ममतामयी है, जो उनके मिट्टू के प्रति प्रेम और उसकी चिंता में साफ झलकता है। वे उसे अपने बच्चे की तरह प्यार करती हैं और उसे मिर्ची-चने खिलाती हैं, लेकिन साथ ही वे कभी-कभी उसे डाँटती और झिड़कती भी हैं। उनके जीवन का अकेलापन और वृद्धावस्था की व्याकुलता उन्हें स्वभाव से थोड़ा चिड़चिड़ा या तुनकमिजाज बना देती है, फिर भी उनके हृदय की कोमलता मिट्टू के लिए हमेशा बनी रहती है। यह विरोधाभास उनके चरित्र को यथार्थवादी बनाता है।
प्रश्न 2.
मिट्टू के शांत हो जाने पर ताई की मानसिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मिट्टू के अचानक शांत हो जाने पर ताई अत्यंत व्याकुल और बेचैन हो उठी थीं। उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था, जैसे उनके घर की रौनक और उनका जीवन खत्म सा हो गया हो। वे बार-बार पिंजरे के पास जातीं, उसे पुकारती और उसके न बोलने पर पशोपेश में पड़ जाती थीं। ताई के लिए मिट्टू का मौन केवल एक पक्षी का न बोलना नहीं था, बल्कि उनके भावनात्मक संसार का ढह जाना अर्थात् गहरी भावनाओं का अचानक पूरी तरह से टूट जाना था, जिसने उन्हें गहरी मानसिक यातना में डाल दिया था।
प्रश्न 3.
गनपत का सुझाव ताई के प्रति सहानुभूति और व्यावहारिकता का परिचय कैसे देता है?
उत्तर:
गनपत एक व्यावहारिक युवक है, जो ताई के दुःख को देख नहीं पा रहा था, इसलिए उसने मिट्टू जैसा ही दूसरा तोता लाने का सुझाव दिया। उसका मानना था कि ताई की कमजोर नजरों के कारण वे असली और नकली तोते में फर्क नहीं कर पाएँगी और मिट्टू को बोलता देखकर उनका मन खुश हो जाएगा। यह सुझाव ताई को सच की पीड़ा से बचाने के लिए एक ‘सफेद झूठ’ जैसा था। गनपत का यह व्यवहार उसकी संवेदनशीलता और बुजुगों के प्रति उसके सम्मान को भी प्रकट करता है।
प्रश्न 4.
मिट्टू ताई को सुबह कैसे जगाता था?
उत्तर:
मिट्टू ताई को सुबह जगाने के लिए अपना पाठ शुरू कर देता। वह जोर जोर से “हर हर गंगे! हर हर गंगे!! सीताराम बोल! सीताराम बोल!!” कहता। ताई अचकचाकर उठ बैठतीं और प्यार से मिट्टू को आशीष देतीं। इससे ताई की थकान दूर हो जाती और दिन की शुरुआत अच्छी होती।
प्रश्न 5.
ताई मिट्टू को कौन-सी कहानियाँ सुनाती थीं?
उत्तर:
ताई मिट्टू को अपने वैभव के दिनों की राम कहानी सुनाती थीं। जमींदार साहब का रोबीला चेहरा, दरबार की रौनक, हाथी-घोड़े, खेल-तमाशे, व्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार और भोज दाबते। मिट्ठू गर्दन टेढ़ी करके कभी ध्यान से सुनता और कभी अपनी समझ से टीका-टिप्पणी भी कर देता।
प्रश्न 6.
ताई ने मिट्टू को जगन मास्टर के घर क्यों छोड़ा?
उत्तर:
ताई एक वृद्ध और अकेली महिला थीं, जिनके जीवन में मिट्टू तोता ही उनके संवाद और ममता का एकमात्र सहारा था। जब ताई को कुछ दिनों के लिए जगन्नाथ पुरी की तीर्थयात्रा पर जाना था, तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या मिट्टू की देखभाल की थी। घर में उनके अतिरिक्त कोई दूसरा सदस्य नहीं था, जो उनकी अनुपस्थिति में मिट्ठ को दाना-पानी दे सके। ताई को डर था कि यदि वे उसे घर में अकेला छोड़ जाएँगी, तो वह भूख-प्यास से मर सकता है। अपनी इसी ममता और सुरक्षा की भावना के कारण उन्होंने मिट्टू को अपने परिचित और भरोसेमंद पड़ोसी जगन मास्टर के घर छोड़ने का निर्णय लिया, जिससे कि उनकी अनुपस्थिति में मिट्टू सुरक्षित रहे और उसे समय पर भोजन मिलता रहे।
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प्रश्न 7.
“राम राम कहो, सीताराम कहो।” ताई मिट्टू को बार-बार यह सिखाने का प्रयास क्यों करती थीं? इससे ताई की किस मानसिक अवस्था का पता चलता है?
उत्तर:
ताई मिट्टू को “राम राम कहो, सीताराम कहो।” इसलिए सिखाती थीं, क्योंकि उनके भरे-पूरे घर में अब कोई और बात करने वाला नहीं बचा था। वे अपने अकेलेपन और घर के सन्नाटे को मिट्टू की आवाज़ से भरना चाहती थीं। इससे ताई की गहरी संवेगात्मक रिक्तता और अकेलेपन की मानसिक अवस्था का पता चलता है। वे ममता और वात्सल्य से भरी हुई थीं, लेकिन उस प्रेम को व्यक्त करने के लिए उनके पास कोई मनुष्य नहीं था। इसलिए वे अपनी समस्त संवेदनाएँ मिट्टू पर केंद्रित कर देती थीं। बार-बार एक ही वाक्य (राम राम कहो, सीताराम कहो) सिखाने का धैर्य यह दर्शाता है कि वे मानसिक रूप से किसी ऐसे ‘संवाद’ की प्रतीक्षा में थीं, जो उनके जीवन की नीरसता को दूर कर सके। यह उनके भीतर छिपी असुरक्षा और अपने अस्तित्व को किसी के साथ जोड़े रखने की व्याकुलता को भी प्रकट करता है।
प्रश्न 8.
ताई जब कुंभ से लौटीं तो क्या हुआ?
उत्तर:
ताई जब कुंभ से लौटीं तो वे सीधे जगन मास्टर के घर पहुँची। वे सोच रही थीं कि मिट्टू उन्हें देखते ही रट लगाकर तूफान खड़ा कर देगा। लेकिन एवजी मिट्टू चुपचाप इधर-उधर ताकता रहा। ताई गुहार कर थक गई, पर असली मिट्टू कहीं अमराइयों में घूम रहा था।
प्रश्न 9.
ताई के व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
ताई सरल, ममता भरी और सहनशील थीं। उनके व्यक्तित्व की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
- अत्यधिक एकाकीपन – ताई एक वृद्ध स्त्री हैं, जो अपने विशाल घर में अकेली रहती हैं। उनका भरा-पूरा परिवार अब उनके साथ नहीं है, जिसके कारण वे अकेलेपन का शिकार हैं। यह अकेलापन ही उन्हें एक पक्षी (मिट्टू) के इतना करीब ले आता है।
- ममतामयी स्वभाव – ताई का हृदय ममता से भरा हुआ है। भले ही उनके पास अपना कोई संबंधी नहीं है, लेकिन उनकी सारी ममता मिट्टू पर उमड़ पड़ती है। वे उसके लिए नियमपूर्वक भोजन बनाती हैं और उसे अपने बच्चे की तरह दुलारती व झिड़कती हैं।
- धार्मिक प्रवृत्ति – ताई एक धार्मिक महिला हैं। वे मिट्टू को ‘राम-राम’ और ‘सीताराम’ बोलना सिखाती हैं। साथ ही, वे कुंभ के अवसर पर गंगा स्नान के लिए प्रयाग जाती हैं, जो उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।
- असुरक्षा की भावना – अकेलेपन के कारण ताई के अंदर एक अनजाना डर और असुरक्षा रहती है। वे घर से बाहर निकलते समय बार-बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें (कुंडियाँ) टोहकर देखती हैं, ताकि सब कुछ सुरक्षित रहे।
- संवेदनशील हृदय – वे मूक प्राणियों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। मिट्टू की चुप्पी उन्हें व्याकुल कर देती है और वे घंटों उसके पास बैठकर उसकी स्थिति के बारे में सोचती रहती हैं। वे पक्षियों की स्वतंत्रता और उनके बंधनों को लेकर भी चिंतनशील रहती हैं।
प्रश्न 10.
कहानी में मनुष्य और पक्षी के संबंध को कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर:
शेखर जोशी की कहानी ‘संवादहीन’ में मनुष्य और पक्षी के संबंध को एक गहरे भावनात्मक और आत्मीय सहारे के रूप में दर्शाया गया है। ताई के लिए मिट्टू केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि उनके एकाकी जीवन का वह अभिन्न अंग था, जो उनके सूनेपन को अपनी आवाज़ से भर देता था। ताई की ममता मिट्टू की सेवा और उसके लिए नियम से भोजन बनाने में प्रकट होती थी, जो उनके जीवन जीने का मुख्य आधार बन गया था।
यह रिश्ता दिखाता है कि संवेदनाएँ प्रजातियों की सीमा नहीं मानतीं और एक मूक प्राणी भी मनुष्य के लिए संवाद का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। अंततः, दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे से इस कदर जुड़ा था कि मिट्ठू की चुप्पी ताई को मानसिक रूप से व्याकुल और निरुद्देश्य कर देती थी।
प्रश्न 11.
मिट्टू के उड़ जाने के बाद ताई की स्थिति कैसी हो गई?
उत्तर:
मिट्टू के उड़ जाने के बाद ताई की स्थिति अत्यंत दयनीय और भावनात्मक रूप से कष्टदायी हो गई थी। उनके जीवन का एकमात्र सहारा और संवाद का केंद्र छिन जाने से वे अंदर से पूरी तरह टूट गई थीं और उनका घर अब उन्हें एक सूने खंडहर की तरह प्रतीत होने लगा था। उनकी ममता, जो मिट्टू की सेवा और उसके लिए नियम से भोजन बनाने में व्यस्त रहती थी, अब पूरी तरह निरुद्देश्य हो चुकी थी।
मिट्ठू की अनुपस्थिति ने उनके अकेलेपन को इतना गहरा कर दिया था कि वे मानसिक रूप से व्याकुल रहने लगी थीं और उनके जीवन की जीवंतता समाप्त हो गई थी। ताई की इस नाजुक हालत को देखकर उनके आस-पास के लोग भी इतने भयभीत थे कि वे उन्हें मिट्टू के खोने का सच बताने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे।
प्रश्न 12.
“गनपत ने जब यह तोता उन्हें लाकर दिया था, तब उन्हें आभास भी नहीं था कि यह पक्षी उनके खालीपन को इस कदर भर देगा।” गनपत का पात्र ताई के जीवन में किस प्रकार सहायक सिद्ध हुआ?
उत्तर:
गनपत का पात्र ताई के जीवन में एक संवेदनशील सहायक के रूप में उभरता है। उसने ताई की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को समझा और उन्हें एक तोता लाकर दिया, जिसने ताई के जीवन के खालीपन को ममता और व्यस्तता से भर दिया। जब असली मिट्टू गायब हो गया, तब भी गनपत ने ताई की उम्र और उनकी कमज़ोर आँखों का ध्यान रखते हुए एक हमशक्ल तोता लाने का सुझाव दिया। उसका उद्देश्य ताई को उस गहरे मानसिक आघात और पीड़ा से बचाना था, जो मिट्टू के न होने से उन्हें पहुँच सकती थी।
प्रश्न 13.
कहानी में ‘मिट्टू’ को केवल एक पक्षी न मानकर एक ‘संवाद का माध्यम’ क्यों कहा गया है? ताई और मिट्टू के बीच होने वाले संवादों की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
मिट्टू को ‘संवाद का माध्यम’ इसलिए कहा गया है, क्योंकि ताई अपनी दिनभर की बातें सुख-दुःख और यहाँ तक कि अपनी झिड़कियाँ ( नाराजगी) भी उसी से साझा करती थीं। उन दोनों के बीच का संवाद अद्भुत था; कभी ताई उसे दुलारतीं, तो कभी उसे चुप रहने पर डाँटतीं। मिट्टू की प्रतिक्रियाएँ ताई को यह महसूस कराती थीं कि कोई उन्हें सुन रहा है। इन संवादों की विशेषता यह थी कि ये शब्दों से ज्यादा भावनाओं पर टिके थे। मिट्टू की ‘राम राम’ की रट ताई के लिए किसी प्रियजन की बातों से कम नहीं थी।
प्रश्न 14.
“ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।” क्यों?
उत्तर:
ताई के जीवन में अब कोई सगा संबंधी नहीं बचा था, जो उनकी ममता का पात्र बन सके, इसलिए उनके हृदय का सारा स्नेह मिट्टू की ओर मुड़ गया था। मिट्टू उनके लिए केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि एक संतान या मित्र की तरह था, जिससे वे घंटों बातें करती थीं। जब वे उसे दाना खिलातीं या उससे राम-राम बुलवाती तो उन्हें एक सुखद आत्मीयता का अनुभव होता था। एकाकीपन की इस स्थिति में मिट्टू ही वह माध्यम था, जिसने ताई के अंदर की ममता को जीवित रखा था।
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Class 9 Hindi Chapter 3 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. भला हो गनपत का, जिसने ताई के सूनेपन को सहारा दे दिया था, वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था। ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी। वह रात-दिन मिट्टू को लेकर ही बेचैन रहने लगीं। जो ताई अपनी खातिर चूल्हा जलाने में आलस्य कर जाती थीं, वही अब नियमपूर्वक मिट्टू के लिए दाल-भात बनातीं । मिट्टू के वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखतीं । अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चे तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचें हैं।
(क) ताई के सूनेपन को सहारा देने के लिए प्यारा-सा पहाड़ी तोता कौन लाया था?
(i) जगन मास्टर
(ii) गनपत
(iii) घनपत
(iv) इनमें से कोई नहीं
(ख) ताई की सारी ममता किस पर बरस पड़ी?
(i) मिट्टू पर
(ii) गनपत पर
(iii) जगन मास्टर पर
(iv) इनमें सभी पर
(ग) ताई नियमपूर्वक मिट्टू के लिए क्या बनाती थीं?
(i) रोटी
(ii) हलवा
(iii) सब्ज़ी
(iv) दाल-भात
(घ) ताई रोटी बचाकर क्यों रखती थी?
(i) किसी भिखारी के लिए
(ii) अपने लिए
(iii) गाय को खिलाने के लिए
(iv) मिट्टू के वक्त-बेवक्त के तकाज़ों के लिए
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(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही
विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।
कारण (R) : वह रात-दिन मिट्टू को लेकर ही बेचैन रहने लगी।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
2. अब जगन मास्टर हर रोज कमरा बंद करते। मिट्ठू को बाहर आने का आमंत्रण देते और उनकी आजादी का सुख स्वयं भोगते। यह क्रम तीन-चार दिन तक चला ही था कि एक दिन मिट्ठू की नजर ऊपर खुले रोशनदान पर पड़ गई और सहज कौतूहलवश वह पिंजरे की छत से तिरछी आँख अपने लक्ष्य की ओर देखकर रोशनदान पर पहुँच लिए। जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीतारहस्य’ से हटकर मिट्टू के पंखों की फड़फड़ाहट पर गया, फिर रोशनदान पर बैठे मिट्ठू पर जगन मास्टर हाथ में अनाज लेकर ‘आ-आ’ की गुहार लगा ही रहे थे कि मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए ! बो गए !! अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए। ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।
प्रश्न
(i) ‘उनकी आजादी का सुख स्वयं भोगते’ इस पंक्ति का जगन मास्टर के संदर्भ में क्या अर्थ है?
(क) जगन मास्टर स्वयं पिंजरे में बंद हो जाते थे।
(ख) जगन मास्टर मिट्ठू को उड़ता देखकर स्वयं को बंधन मुक्त महसूस करते थे।
(ग) मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालकर उन्हें एक प्रकार का मानसिक संतोष और सुख मिलता था।
(घ) वे मिट्टू की तरह ही आसमान में उड़ना चाहते थे।
(ii) मिट्ठू की नजर अचानक कहाँ पड़ी, जिसने उसकी पूरी स्थिति बदल दी?
(क) अनाज के थैले पर
(ख) ऊपर खुले हुए रोशनदान पर
(ग) बरामदे में रखे पिंजरे पर
(घ) बगीचे के दूसरे पक्षियों पर
(iii) ‘जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए’ लेखक ने इस मुहावरे जैसी पंक्ति का प्रयोग क्यों किया है?
(क) क्योंकि जगन मास्टर ने बहुत सारे तोते पाले हुए थे।
(ख) क्योंकि जगन मास्टर घबरा गए और उनकी सारी योजना या सोच धरी की धरी रह गई।
(ग) क्योंकि बगीचे के सारे तोते उड़ गए थे।
(घ) क्योंकि जगन मास्टर को तोते पकड़ना नहीं आता था।
(iv) कथन (A) : जगन मास्टर हाथ में अनाज लेकर ‘आ-आ’ की गुहार लगाते रहे।
कारण (R) : मिट्टू रोशनदान पर बैठकर बाहर की दुनिया की ओर देख रहा था और उड़ने की तैयारी में था।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(v) निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प गद्यांश के संदर्भ में सही है?
1. मिट्ठू को जब आजादी का रास्ता दिखा, तो वह पिंजरे और जगन मास्टर के मोह से मुक्त हो गया।
2. जगन मास्टर को मिट्ठू के उड़ने से बहुत खुशी हुई और उन्होंने उसे वापस नहीं बुलाया।
कूट
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
संवादहीन कहानी के केंद्रीय तत्व पर प्रकाश डालिए।
प्रश्न 2.
मिट्टू ताई के एकाकीपन को दूर करने का एक महत्वपूर्ण साधन क्यों बन गया था?
प्रश्न 3.
ताई और मिट्टू के बीच कभी-कभार होने वाली नोक-झोंक क्या दर्शाती है?
प्रश्न 4.
अंत में ताई पुनः अकेला क्यों हो गई?
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विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
गनपत ने ताई के लिए मिट्ठू क्यों लाकर दिया?
प्रश्न 2.
मिट्ठू ताई के लिए केवल एक तोता नहीं, बल्कि क्या बन गया था?
प्रश्न 3.
मिट्ठू के उड़ जाने की खबर सुनकर गाँववाले क्यों चिंतित हो गए?
प्रश्न 4.
ताई और मिट्ठू की नोक-झोंक उनके आपसी प्रेम को किस प्रकार पुष्ट करती है?
प्रश्न 5.
जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालने के पीछे क्या उद्देश्य था? क्या उनका यह कदम नैतिक रूप से सही था? कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
प्रश्न 6.
ताई के घर में सन्नाटा पसरने के सामाजिक कारणों पर प्रकाश डालिए।
प्रश्न 7.
कहानी के अंत में ताई और नए तोते के बीच जो ‘मूक संवाद’ या ‘खामोशी’ है, वह पाठक के मन में क्या संवेदना जगाती है?
प्रश्न 8.
“पिंजरे की सलाखों को ही अपनी नियति मान लेना।” समाज में व्याप्त ऐसी कौन सी बेड़ियाँ’ या ‘बंधन’ हैं, जिन्हें मनुष्य अपनी किस्मत मानकर स्वीकार कर लेता है? उनके विरुद्ध आवाज़ उठाना क्यों आवश्यक है?