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Class 9 Hindi ऐसी भी बातें होती हैं Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं Extra Question Answer
ऐसी भी बातें होती हैं Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लता मंगेशकर ने अपने पिता के बारे में क्या बताया है?
उत्तर:
लता जी के अनुसार उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर बहुत ही अनुशासित और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने बिना डाँटे-फटकारे अपने बच्चों को जीवन के संस्कार दिए। लता जी ने उनसे ही संगीत की बारीकियाँ और विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का साहस सीखा।
प्रश्न 2.
शुरुआती दौर में गीत रेकॉर्ड करने में क्या तकनीकी कठिनाइयाँ आती थीं?
उत्तर:
शुरुआती दौर में आज जैसी उन्नत तकनीक नहीं थी। जैसे, ‘आएगा आने वाला’ गीत की रेकॉर्डिंग के समय लता जी को स्वर के सही प्रभाव को पैदा करने के लिए माइक के पास काफी दूर से चलकर आना पड़ता था। साथ ही, उस समय गायक और कोरस को एक साथ ही गाना पड़ता था, क्योंकि आज की तरह अलग-अलग ट्रैक रेकॉर्डिंग की सुविधा नहीं थी।
प्रश्न 3.
लता जी ने कितनी फ़िल्मों में अभिनय किया तथा बाद में अभिनय क्यों छोड़ दिया?
उत्तर:
लता मंगेशकर ने अपने शुरुआती जीवन में लगभग 8-10 फिल्मों में अभिनय किया। बाद में उन्होंने अभिनय इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उनकी रुचि गायन में अधिक थी और वे एक सफल पार्श्वगायिका बनना चाहती थीं।
प्रश्न 4.
पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर ने अपने जीवन में कौन-सी ज़िम्मेदारियाँ निभाई?
उत्तर:
पिता के निधन के बाद लता मंगेशकर ने अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी सँभाली। उन्होंने अपने भाई-बहनों की परवरिश
की, घर का खर्च उठाया और अपने कठिन परिश्रम से परिवार को सहारा दिया।
प्रश्न 5.
लता मंगेशकर ने कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने के बारे में क्या सीख दी?
उत्तर:
लता मंगेशकर ने सिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए। संघर्षो
से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका सामना करके आगे बढ़ना चाहिए।
प्रश्न 6.
लता मंगेशकर के अनुसार संगीत में कैसी शक्ति होती है? और उसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
लता मंगेशकर के अनुसार संगीत में अद्भुत असीम शक्ति होती है। अगर सुर सच्चे हों तो उनके आगे प्रकृति भी झुक जाती है। वर्षा राग गाने से वर्षा हो जाती है और दीपक राग गाने से दीये जल उठते है।
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Class 9 Hindi Chapter 4 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लता मंगेशकर के व्यक्तित्व में उनके पिता के प्रभाव और उनके शुरुआती जीवन के संघर्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर के जीवन और व्यक्तित्व पर उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर की गहरी छाप थी। उन्होंने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से ही संगीत की प्रारंभिक शिक्षा लेनी शुरू की थी। पिता के अनुशासित स्वभाव ने लता जी को जीवन में संयम और स्वाभिमान की सीख दी। जब उनके पिता का देहांत हुआ, तब परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनका शुरुआती जीवन काफी कठिन और संघर्षपूर्ण रहा। बहुत कम उम्र में उन्हें घर चलाने के लिए फिल्मों में अभिनय और मेकअप करना पड़ा, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं था। वे कोल्हापुर से मुंबई आई और सुबह से लेकर देर रात तक अलग-अलग स्टूडियो के चक्कर लगाईं ताकि काम मिल सके। उन्होंने कभी भी अपनी मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने पिता से मिले संस्कारों के कारण स्वाभिमान के साथ अपनी संगीत यात्रा को आगे बढ़ाया।
प्रश्न 2.
‘तकनीकी विकास ने संगीत रेकॉर्डिंग की प्रक्रिया को बदल दिया है’- पाठ के संदर्भ में लता जी के अनुभवों के आधार पर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
इस पाठ में लता मंगेशकर ने संगीत रेकॉर्डिंग के पुराने दौर और आधुनिक दौर के अंतर को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, पुराने समय में आज जैसी ‘मल्टी-ट्रैक’ रेकॉर्डिंग की सुविधा नहीं थी। उस समय गायक, वाद्ययंत्र बजाने वाले और कोरस सभी को एक साथ बैठकर गाना रेकॉर्ड करना पड़ता था। यदि कोई एक भी गलती करता तो पूरी रेकॉर्डिंग दोबारा करनी पड़ती थी। ‘आएगा आने वाला’ जैसे गीतों के उदाहरण से पता चलता है कि तब आवाज में गहराई और दूरी का प्रभाव पैदा करने के लिए गायक को शारीरिक रूप से माइक से दूर चलना पड़ता था। आज यह काम कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर की मदद से आसानी से हो जाता है। 1980 के दशक के बाद यह बदलाव आया कि कोरस और संगीत पहले रेकॉर्ड हो जाते थे और गायक बाद में अपनी आवाज देते थे। लता जी मानती हैं कि यदि उस दौर के महान संगीतकारों के पास आज की तकनीक होती, तो वे और भी प्रभावशाली काम कर पाते।
प्रश्न 3.
“संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह ज़रूर रच देता है, जिसका अनुभव भी कई बार हमें हुआ है”- लता जी द्वारा कहे गए इस कथन का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लता जी अपने अनुभवों के आधार पर बताती हैं कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उसमें अद्भुत और असीम शक्ति है। कई बार संगीत ऐसे चमत्कारिक और अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न कर देता है, जिसकी हम पहले कल्पना भी नहीं कर सकते।
संगीत मनुष्य के मन को बदल देता है, दुखी व्यक्ति को खुशी देता है, तनाव को कम करता है और लोगों के हृदय को आपस में जोड़ता है। लता जी ने अपने जीवन में कई बार संगीत की इस शक्ति को अनुभव किया, इसलिए उन्होंने यह बात कही।
Class 9 Ganga Chapter 4 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
त्योहारों पर गाए जानेवाले लोकगीत किसी राज्य की संस्कृति का सबसे जीवंत और संगीतमय दस्तावेज़ होते हैं- पाठ के संदर्भ में इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
त्योहारों पर गाए जाने वाले लोकगीत किसी भी राज्य की संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं, क्योंकि इन गीतों में वहाँ के लोगों की भावनाएँ, परंपराएँ रीति-रिवाज और जीवन शैली झलकती है। दिए गए पाठ के अनुसार लोकगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते, बल्कि वे उस क्षेत्र के इतिहास, सामाजिक संबंधों और प्रकृति से जुड़ाव को भी दर्शाते हैं। त्योहारों के अवसर पर जब लोग मिलकर इन्हें गाते हैं, तो सामूहिकता, आनंद और सांस्कृतिक एकता का वातावरण बनता है। इस प्रकार लोकगीत किसी राज्य की संस्कृति का संगीतमय और सजीव दस्तावेज बन जाते हैं।
प्रश्न 2.
‘संघर्ष व्यक्ति को माँजकर उसे और भी निखार देता है।’ लता मंगेशकर के शुरुआती जीवन के संघर्षों को देखते हुए, क्या आप इस कथन से सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि संघर्ष व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने का काम करता है। लता मंगेशकर का जीवन इसका जीवंत उदाहरण है-
- जिम्मेदारी का अहसास : पिता जी के निधन के बाद बहुत कम उम्र में पूरे परिवार का बोझ उठाने के संघर्ष ने लता जी को समय से पहले परिपक्व बना दिया। यदि उन्हें यह संघर्ष न करना पड़ता, तो शायद उनके भीतर वह अटूट धैर्य और जुझारूपन विकसित नहीं होता जो एक महान कलाकार के लिए आवश्यक है।
- नापसंद को पसंद में बदलना : उन्हें अभिनय और मेकअप पसंद नहीं था, लेकिन परिवार के लिए उन्होंने वह काम भी पूरी निष्ठा से किया। इस अनुभव ने उन्हें अनुशासन और काम के प्रति समर्पण सिखाया।
- कला में गहराई : उनके गायन में जो दर्द, गहराई और ठहराव महसूस होता है, वह कहीं न कहीं उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों और संघर्षों की ही उपज है। अभावों के बीच रास्ता खोजने की उनकी कला ने ही उन्हें ‘आएगा आने वाला’ जैसे कठिन गीतों की रेकॉर्डिंग में सफल बनाया।
अतः, लता जी के जीवन से यह स्पष्ट होता कि कठिन समय और संघर्ष इनसान को केवल कमजोर नहीं बनाते, बल्कि उसे अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें निखारने का भी अवसर प्रदान करते हैं।
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ऐसी भी बातें होती हैं Extra Questions विषयवस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
यतींद्र मिश्र ने लता जी के साथ अपने साक्षात्कार की शुरुआत किस तरह से की और इस बातचीत के पीछे उनका मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर:
यतींद्र मिश्र ने लता मंगेशकर जी के साथ साक्षात्कार की शुरुआत अत्यंत आत्मीय और सम्मानपूर्ण ढंग से की। उनका मुख्य उद्देश्य उन करोड़ों प्रशंसकों को लता जी के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं से परिचित कराना था, जो उनके गीतों से प्रतिदिन प्रेरणा पाते हैं।
यतींद्र मिश्र स्वयं को देश के असंख्य संगीत प्रेमियों के प्रतिनिधि के रूप में देखते थे। वे उन सभी देशवासियों की ओर से प्रश्न पूछकर लता जी के महान जीवन और संगीत के प्रति उनके समर्पण को जनता के सामने लाना चाहते थे।
प्रश्न 2.
फिल्म ‘महल’ के प्रसिद्ध गाने ‘आएगा आने वाला’ की रिकॉर्डिंग के लिए किस विशेष तकनीक का प्रयोग किया गया था?
उत्तर:
लता जी ने बताया कि ‘आएगा आने वाला’ गाने की रिकॉर्डिंग के समय एक बहुत ही अनोखी और कठिन तकनीक अपनाई गई थी। गाने में आवाज के धीरे-धीरे पास आने का रहस्यमयी प्रभाव पैदा करने के लिए उन्हें रिकॉर्डिंग हॉल में माइक से बहुत दूर खड़ा किया गया था।
उन्हें गाते हुए दबे पाँव धीरे-धीरे चलकर माइक के समीप आना पड़ता था। जैसे-जैसे वे माइक के पास पहुँचती थीं, उसी अनुपात में उनके स्वर की गूँज और उतार-चढ़ाव रिकॉर्ड होता जाता था। इस विशेष प्रयोग के कारण ही गाने में वह जादुई प्रभाव उत्पन्न हो पाया, जो आज भी श्रोताओं को रोमांचित कर देता है।
प्रश्न 3.
पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने मराठी रंगमंच की संगीत परंपरा में किस प्रकार का नया प्रयोग (नवाचार) किया था?
उत्तर:
पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने पहली बार मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब की संगीत शैलियों का समावेश करके एक बड़ा नवाचार किया। उन्होंने विशेष रूप से कर्नाटक जाकर वहाँ के संगीत और गीतों को सीखा और फिर उन्हें अपने नाटकों में पूरी कुशलता के साथ शामिल किया। उस समय मराठी रंगमंच पर केवल स्थानीय संगीत शैली का ही प्रभाव था, इसलिए अन्य क्षेत्रों के संगीत को अपनाकर उन्होंने मराठी नाटकों को एक नई और समृद्ध पहचान प्रदान की।
प्रश्न 4.
लता जी बचपन में ‘संत तुकाराम’ फिल्म के दृश्यों का अभिनय (नकल) किस प्रकार करती थीं?
उत्तर:
लता जी बचपन में ‘संत तुकाराम’ फिल्म की नकल बहुत ही मनोरंजक तरीके से उतारती थीं। वे कमरे में गद्दों और तकियों को एक के ऊपर एक रखकर ऊँचा स्थान बनाती थीं, जिसे वे अपना ‘स्वर्ग’ कहती थीं। उस पर बैठकर वे ‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’ गीत गाती थीं। उनके भाई-बहन मीना, पंढरीनाथ और आशा नीचे बैठकर तुकाराम के अनुयायी बनते थे। वे अभिनय करते हुए रोते थे और लता जी से प्रार्थना करते थे कि वे उन्हें भी अपने साथ स्वर्ग ले चलें।
प्रश्न 5.
वर्ष 1980 के बाद संगीत जगत में कोरस रिकॉर्डिंग की पद्धति में क्या मुख्य बदलाव आए?
उत्तर:
वर्ष 1980 से पहले रिकॉर्डिंग की तकनीक आज की तुलना में भिन्न थी। उस समय मुख्य गायक या गायिका के साथ ही कोरस कलाकारों को भी एक साथ बैठकर गाना रिकॉर्ड करना पड़ता था, चाहे वह एकल गीत हो या युगल गीत। 1980 के दशक के बाद इस पद्धति में बड़ा बदलाव आया। नई तकनीक के आने से अब कोरस गायकों और संगीत का हिस्सा अलग से रिकॉर्ड कर लिया जाता था। इसके बाद मुख्य गायक या गायिका अपनी सुविधा के अनुसार अपना हिस्सा अलग से रिकॉर्ड करते थे, जिन्हें बाद में तकनीक की सहायता से एक साथ जोड़ दिया जाता था।
प्रश्न 6.
लता मंगेशकर जी ने उस्ताद अली अकबर खाँ के कंसर्ट का प्रसंग किस संदर्भ में सुनाया और उस घटना का मुख्य मर्म क्या था?
उत्तर:
जब यतींद्र मिश्र ने तानसेन और हरिदास बाबा से जुड़ी संगीत के चमत्कारों की कथाओं के बारे में पूछा, तब लता जी ने प्रमाण के तौर पर उस्ताद अली अकबर खाँ का यह प्रसंग सुनाया। मुंबई में आयोजित एक संगीत सभा में लता जी सबसे आगे बैठी थीं और उस्ताद अली अकबर खाँ तथा पंडित रविशंकर मंत्रमुग्ध कर देने वाला वादन कर रहे थे। लगभग एक घंटे की अद्भुत प्रस्तुति के बाद अचानक उस्ताद जी के सरोद का एक तार टूट गया। जब लता जी ने ग्रीन रूम में जाकर इस पर खेद जताया, तब उस्ताद जी ने बड़ी मार्मिक बात कही कि जब सुर बहुत अधिक शुद्ध और गहरा लग जाता है, तो तार उसे सह नहीं पाता और टूट जाता है। इस घटना ने लता जी के इस विश्वास को और दृढ़ कर दिया कि संगीत की शक्ति असीम और भौतिक सीमाओं से परे होती है।
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प्रश्न 7.
लता जी के अनुसार महाराष्ट्र में ‘गुड़ी पड़वा’ का पर्व किस प्रकार मनाया जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है?
उत्तर:
लता जी के अनुसार, महाराष्ट्र में नवरात्रि के पहले दिन को ‘गुड़ी पड़वा’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रत्येक घर के बाहर ‘गुड़ी’ बाँधी जाती है और कलश की स्थापना की जाती है। सूर्योदय के समय गुड़ी पर बताशों की माला चढ़ाई जाती है, जिसे सूर्यास्त के समय उतारकर परिवार के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस परंपरा के पीछे यह मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, तब उनके स्वागत में हर घर में इसी प्रकार बताशों की लड़ियाँ सजाकर गुड़ी बाँधी गई थी। इसी मंगल आयोजन के साथ अगले नौ दिनों तक उत्सव का क्रम चलता है।
प्रश्न 8.
लता जी ने अपने संघर्ष के दिनों और रिकॉर्डिंग की कठिनाइयों के विषय में क्या विचार व्यक्त किए?
उत्तर:
लता जी का मानना था कि उनके लिए अपनी परिस्थितियों को बहुत अच्छा या बहुत बुरा कहना कठिन है, क्योंकि उन्होंने हमेशा अपना पूरा ध्यान कठिन परिश्रम पर केंद्रित रखा। रिकॉर्डिंग के दौरान होने वाली शारीरिक थकान या तकनीकी समस्याओं से उन्हें अधिक फर्क नहीं पड़ता था । उनके मन में रिकॉर्डिंग की तकलीफों से बड़ी चिंता यह रहती थी कि अगले दिन उन्हें कितने गीत गाने को मिलेंगे। उस समय उनका एकमात्र लक्ष्य अधिक से अधिक काम करना था, ताकि वे पर्याप्त धन कमाकर अपने परिवार की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें और उन्हें एक बेहतर जीवन दे सकें।
प्रश्न 9.
पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व, उनके अनुशासन, संगीत-समर्पण तथा मराठी रंगमंच में उनके योगदान का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दीनानाथ मंगेशकर अत्यंत अनुशासनप्रिय स्वाभिमानी और संगीत के प्रति पूर्णत: समर्पित व्यक्तित्व के धनी थे। वे अपने बच्चों को बिना डाँटे ही समझा देते थे, जिससे उनका प्रभाव स्पष्ट होता था। उनका जीवन संगीत और रंगमंच को समर्पित था। उनकी नाट्य प्रस्तुतियाँ देर रात तक चलती थीं, जिनमें शास्त्रीय रागों पर आधारित गायन की विशेष परंपरा थी। वे एक ही राग में सुर बदलकर नए प्रयोग करने में निपुण थे। उन्होंने मराठी रंगमंच में कर्नाटक और पंजाब के संगीत को सम्मिलित कर नवीनता लाई । उनके घर में संगीत सभाएँ आयोजित होती थीं, जहाँ शास्त्रीय संगीत का वातावरण रहता था। इस प्रकार उन्होंने मराठी संगीत नाटक परंपरा को समृद्ध बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न 10.
लता मंगेशकर के जीवन में उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कारों-विशेषकर स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और सही निर्णय लेने की प्रेरणा का उनके व्यक्तित्व और करियर पर क्या प्रभाव पड़ा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर के व्यक्तित्व और करियर पर उनके पिता के संस्कारों का गहरा प्रभाव पड़ा। पं. दीनानाथ मंगेशकर ने उन्हें स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता और सत्य के पक्ष में खड़े रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने सिखाया कि जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए । यही कारण था कि लता जी ने संघर्ष के दिनों में भी आत्मसम्मान बनाए रखा और निरंतर परिश्रम करती रहीं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाया। उनके निर्णयों में दृढ़ता और आत्मविश्वास दिखाई देता है, जो पिता के संस्कारों का परिणाम था। इन मूल्यों ने उन्हें एक महान कलाकार ही नहीं, बल्कि मजबूत व्यक्तित्व वाली आदर्श महिला भी बनाया।
प्रश्न 11.
लता मंगेशकर ने अभिनय के क्षेत्र को क्यों पसंद नहीं किया? अभिनय के प्रति उनके दृष्टिकोण को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर ने अभिनय के क्षेत्र को कभी पसंद नहीं किया। यद्यपि उन्होंने बचपन में कुछ फिल्मों में अभिनय किया था, परंतु उन्हें मेकअप करना, कैमरे के सामने अभिनय करना और लोगों के सामने भाव प्रदर्शन करना सहज नहीं लगता था। वे अभिनय की तुलना में गायन को अधिक स्वाभाविक और प्रिय मानती थीं। उन्हें यह अच्छा नहीं लगता था कि कैमरे के सामने कृत्रिम रूप से रोना या हँसना पड़े। इसलिए उन्होंने अभिनय छोड़कर पूरी तरह संगीत को अपना जीवन बना लिया। हालाँकि वे अच्छी फिल्मों की सराहना अवश्य करती थीं, लेकिन स्वयं अभिनय करने की इच्छा उनके मन में कभी नहीं रही। इस प्रकार, उनका झुकाव सदैव संगीत की ओर ही बना रहा।
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प्रश्न 12.
‘छत्रपति शिवाजी’ फिल्म के साथ लता मंगेशकर के भावनात्मक संबंध का वर्णन कीजिए तथा बताइए कि उन्होंने इसमें भाग लेने की इच्छा क्यों व्यक्त की।
उत्तर:
लता मंगेशकर का ‘छत्रपति शिवाजी’ फिल्म से विशेष भावनात्मक संबंध था। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति अत्यंत श्रद्धा और सम्मान रखती थीं। यद्यपि उन्होंने अभिनय छोड़ दिया था, फिर भी इस फिल्म में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने स्वयं निर्देशक भालजी पेंढारकर से अनुरोध किया कि फिल्म के अंतिम गीत की दो पंक्तियाँ वे गाना चाहती हैं। उनकी इस इच्छा को स्वीकार किया गया और उन्होंने हिंदी तथा मराठी दोनों संस्करणों में गीत की अंतिम पंक्तियाँ गाई। यह प्रसंग उनके शिवाजी महाराज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को दर्शाता है। इस प्रकार, यह फिल्म उनके लिए केवल एक कलात्मक अवसर नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक थी।
प्रश्न 13.
अपने प्रारंभिक करियर में लता मंगेशकर को किन कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा? उनके संघर्ष और परिश्रम का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अपने प्रारंभिक करियर में लता मंगेशकर को अनेक कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उस समय रिकॉर्डिंग की सुविधाएँ सीमित थीं और उन्हें दिनभर एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक लगातार काम करना पड़ता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियाँ भी उनके कंधों पर थीं, इसलिए वे निरंतर परिश्रम करती रहीं। वे सुबह से रात तक रिकॉर्डिंग में व्यस्त रहती थीं और अपने काम के अलावा किसी अन्य बात पर ध्यान नहीं देती थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और पूरे समर्पण के साथ संगीत साधना जारी रखी। यही परिश्रम और दृढ़ निश्चय उनकी सफलता का आधार बना।
प्रश्न 14.
लता मंगेशकर ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए किस प्रकार निरंतर परिश्रम किया? इस संदर्भ में उनके जीवन-दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को अत्यंत गंभीरता से निभाया। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी, इसलिए उन्होंने कम उम्र में ही कार्य करना शुरू कर दिया। वे दिनभर रिकॉर्डिंग में व्यस्त रहती थीं और अधिक से अधिक गीत गाकर परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती थीं। उनके मन में सदैव यही चिंता रहती थी कि परिवार को किसी प्रकार की कमी न हो। उन्होंने कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर अपने परिवार को सँभाला और उन्हें सुख-सुविधाएँ प्रदान कीं। इस प्रकार, उनका जीवन परिवार के प्रति समर्पण और कर्त्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 15.
बचपन में मेडल प्राप्त करने की लता मंगेशकर की इच्छा किस प्रकार उनके मन में विकसित हुई? इस प्रसंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बचपन में लता मंगेशकर के मन में मेडल प्राप्त करने की इच्छा अपने पिता और अन्य महान कलाकारों को देखकर उत्पन्न हुई। उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर अपने कार्यक्रमों में प्राप्त मेडल अपने वस्त्रों पर लगाकर मंच पर बैठते थे। इसी प्रकार उन्होंने पंडित कुमार गंधर्व को भी कई मेडल लगाकर गाते हुए देखा, जो उन्हें बहुत आकर्षक लगा । तब उनके मन में यह भावना उत्पन्न हुई कि जब वे बड़ी होंगी, तो उन्हें भी ऐसे ही सम्मान और मेडल प्राप्त होंगे। यह इच्छा उनके मन में लंबे समय तक बनी रही और आगे चलकर उनके संगीत जीवन में प्राप्त सम्मान और पुरस्कारों के रूप में पूर्ण भी हुई।
प्रश्न 16.
पुराने और आधुनिक संगीतकारों की कार्यशैली तथा तकनीकी संसाधनों के अंतर पर लता मंगेशकर के विचारों को विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर के अनुसार, पुराने समय के संगीतकार सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद अत्यंत रचनात्मक और समर्पित होते थे। वे विशेष प्रभाव उत्पन्न करने के लिए अनेक नए प्रयोग और तकनीकें अपनाते थे। उदाहरण के लिए ‘आएगा आने वाला’ गीत की रिकॉर्डिंग में उन्हें दूर से चलते हुए माइक तक आना पड़ा था, जिससे विशेष ध्वनि प्रभाव उत्पन्न हुआ। आज तकनीकी सुविधाएँ अत्यधिक विकसित हो चुकी हैं, जिससे संगीत निर्माण अधिक सरल हो गया है। फिर भी पुराने संगीतकारों की सादगी, गहराई और रचनात्मकता अद्वितीय थी। उनके अनुसार यदि पुराने संगीतकारों को आज की तकनीक मिलती, तो वे और भी उत्कृष्ट संगीत रच सकते थे।
प्रश्न 17.
लता मंगेशकर के अनुसार होली का त्योहार उनके घर में किस प्रकार पारंपरिक ढंग से मनाया जाता था? उसके विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर के घर में होली पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाई जाती थी। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता था, जिसमें मिठाइयाँ और नारियल अर्पित किए जाते थे। बाद में उस नारियल को निकालकर प्रसाद के रूप में बाँटा जाता था। होलिका की राख को अगले दिन एक-दूसरे पर लगाया जाता था, जिसे ‘गुड़वड़’ कहा जाता था। रंग पंचमी के दिन माता-पिता बच्चों पर केसर का छिड़काव करते थे और घर में मिठाई बनाकर भगवान को अर्पित की जाती थी। इस प्रकार उनके घर में होली धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार शांत और श्रद्धापूर्वक मनाई जाती थी।
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प्रश्न 18.
‘गुड़ी पड़वा’ और ‘नवरात्रि’ पर्व से संबंधित महाराष्ट्र की परंपराओं का वर्णन करते हुए उनके सांस्कृतिक महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में ‘गुड़ी पड़वा’ और ‘नवरात्रि’ का विशेष सांस्कृतिक महत्त्व है। गुड़ी पड़वा के दिन घर के बाहर ‘गुड़ी’ बाँधी जाती है और कलश स्थापना की जाती है। गुड़ी पर बताशों की माला सजाकर उसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह पर्व भगवान राम के अयोध्या आगमन की स्मृति में मनाया जाता है। इसके बाद नौ दिनों तक उत्सव चलता है, जिसका समापन रामनवमी के दिन होता है। महाराष्ट्र में नवरात्रि को राम के आगमन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जबकि अन्य राज्यों में इसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार, यह पर्व धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
प्रश्न 19.
दीपावली के अवसर पर लता मंगेशकर द्वारा वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाने की परंपरा का वर्णन कीजिए तथा इससे उनके व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का परिचय मिलता है?
उत्तर:
दीपावली के अवसर पर लता मंगेशकर अपने वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाती थीं। वे सुबह-सुबह उठकर नौशाद साहब, अनिल विश्वास, रोशनलाल, मदन मोहन और बर्मन दादा जैसे संगीतकारों के यहाँ बधाई देने पहुँचती थीं। यह परंपरा उनके सम्मान, विनम्रता और कृतज्ञता के भाव को दर्शाती है। एक बार नौशाद साहब ने भी उनके इस व्यवहार की सराहना करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया । यह घटना उनके सरल और संस्कारी व्यक्तित्व का परिचायक है। इससे स्पष्ट होता है कि वे अपने वरिष्ठों के प्रति अत्यंत आदर और श्रद्धा रखती थीं।
प्रश्न 20.
महाराष्ट्र में ‘मंगलागौर’ उत्सव की परंपरा का वर्णन कीजिए तथा इसमें स्त्रियों की सहभागिता और सांस्कृतिक महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में ‘मंगलागौर’ विवाह के बाद नई बहू के आगमन पर मनाया जाने वाला एक महत्त्वपूर्ण उत्सव है। इस अवसर पर आस-पड़ोस की स्त्रियाँ एकत्र होकर गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। यह उत्सव अत्यंत सरल और ग्रामीण शैली में मनाया जाता था। इसमें स्त्रियाँ विभिन्न प्रकार के रूप धारण कर नौटंकी और तमाशा जैसी प्रस्तुतियाँ भी करती थीं।
यह आयोजन स्त्रियों के बीच आपसी प्रेम, सहयोग और सामाजिक एकता को बढ़ाने का माध्यम था। लता मंगेशकर ने बताया कि बचपन में वे भी इस उत्सव में भाग लेती थीं। हालाँकि समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
प्रश्न 21.
कोरस गायिकाओं के साथ लता मंगेशकर के संबंधों का वर्णन करते हुए उस समय की रिकॉर्डिंग पद्धति और सहयोगात्मक वातावरण पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
लता मंगेशकर के कोरस गायिकाओं के साथ अत्यंत आत्मीय और पारिवारिक संबंध थे। पहले एक ही समूह की लड़कियाँ विभिन्न संगीतकारों के साथ कोरस गाने जाती थीं, जिससे उनके बीच गहरा सहयोग और अपनापन विकसित हो गया था।
वे सभी एक-दूसरे के घर आते-जाते थे और पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल होते थे। उस समय कोरस और मुख्य गायकों की रिकॉर्डिंग साथ- साथ होती थी, जिससे संगीत में सामंजस्य बना रहता था। बाद में तकनीकी परिवर्तन के कारण अलग-अलग रिकॉर्डिंग होने लगी । फिर भी लता जी ने कोरस कलाकारों के योगदान को हमेशा सम्मानपूर्वक याद किया और उनके साथ अपने संबंधों को अत्यंत स्नेहपूर्ण बताया।
Class 9 Hindi Chapter 4 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. यह जिस जमाने की कथाएँ हैं, जिसमें हरिदास बाबा और तानसेन जैसे महान संगीतकारों के लिए ऐसा कहा गया, तो हो सकता है। कि उनकी कला में कोई सच्चा सुर या आत्मा की आवाज लगी होगी, तो ऐसा कुछ घट गया होगा, ऐसा हम आदर में मान लेते हैं। परंतु यह निश्चित ही हुआ होगा, यह कम से कम मैं नहीं कह सकती क्योंकि ऐसा मेरा कोई अनुभव नहीं है। हालाँकि मैं यह मानती हूँ कि संगीत में वह असीम शक्ति है कि कुछ अप्रत्याशित वह जरूर रच देता है, जिसका अनुभव भी कई बार हमें हुआ है। कई बार अपने बाबा पंडित दीनानाथ मंगेशकर को सुनते हुए भी मैं कुछ अप्रत्याशित अनुभव करती थी।
(क) इस गद्यांश में किन महान संगीतकारों का उल्लेख है?
(i) कबीर और सूरदास
(ii) हरिदास बाबा और तानसेन
(iii) मीरा और तुलसीदास
(iv) रविशंकर और बिस्मिल्लाह खान
(ख) महान संगीतकारों की कला के बारे में क्या कहा गया है?
(i) उसमें केवल अभ्यास होता है
(ii) उसमें सच्चा सुर या आत्मा की आवाज होती है
(iii) उसमें केवल मनोरंजन होता है
(iv) उसमें कोई विशेषता नहीं होती
(ग) लता जी संगीत के बारे में क्या मानती है?
(i) यह केवल कला है
(ii) यह सीमित शक्ति रखता है
(iii) इसमें असीम शक्ति होती है
(iv) यह व्यर्थ है
(घ) संगीत क्या करने में सक्षम है?
(i) केवल आनंद देने में
(ii) कुछ अप्रत्याशित रच देने में
(iii) केवल शिक्षा देने में
(iv) केवल समय बिताने में
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही
विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : लेखिका को संगीत में कोई शक्ति नहीं लगती।
कारण (R) : क्योंकि वह मानती है कि संगीत कुछ अप्रत्याशित नहीं करता।
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) का सही कारण (R) है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, पर कारण (R), कथन (A) का सही कारण (R) नहीं है।
(iii) कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
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2. लता मंगेशकर : मुझे भगवान ने बहुत कुछ दिया है। मुझे किसी बात की शिकायत नहीं है। मैं बहुत खुश हूँ। आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है, जो दुनिया ने मुझे दिया है… मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं उसे तो जाना ही है, आज नहीं तो कल कल नहीं तो परसों या किसी न किसी दिन… इस बात पर मुझे कोई अफसोस नहीं होता। वह तो होकर रहेगा। हमारे यहाँ यही कहा जाता है- ‘गाँव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है। मैं इसको हमेशा से मानती रही हूँ। एक बात की मुझे सबसे ज्यादा खुशी है कि मैंने अपने पिताजी का नाम थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।
आज मुझे लगता है कि हे प्रभु! तुमने जो भी दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज्यादा दिया। अपनी कृपा की छाया से जैसे मुझे छाँह दी है, वैसे ही हर एक कलाकार और नेक इंसानों के ऊपर भी रखना… यही प्रार्थना है।
(i) लता मंगेशकर अपनी अमरता के संबंध में क्या विचार रखती हैं?
(क) वे मानती हैं कि उनका शरीर हमेशा अमर रहेगा।
(ख) वे अमरता को दुनिया द्वारा दिए गए प्यार का एक रूप मानती हैं।
(ग) वे स्वयं को अमर मानकर अत्यंत गर्व महसूस करती हैं।
(घ) वे मृत्यु के विचार से दुःखी और भयभीत हैं।
(ii) ‘गाँव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन इस लोकोक्ति का गद्यांश के संदर्भ में क्या अर्थ है?
(क) गाँव का अस्तित्व समाप्त होने पर व्यक्ति का नाम भी मिट जाता है।
(ख) भौतिक शरीर या वस्तुएँ नष्ट हो जाती हैं, परंतु व्यक्ति का नाम (कीर्ति) शेष रह जाता है।
(ग) केवल गाँव के लोगों का नाम ही इतिहास में याद रखा जाता है।
(घ) नाम कमाने के लिए व्यक्ति को अपना गाँव छोड़ देना चाहिए।
(iii) कथन (A) : लता जी को मृत्यु की अनिवार्यता पर कोई अफ़सोस नहीं होता।
कारण (R) : वे मानती हैं कि शरीर नश्वर है और उसे एक न एक दिन जाना ही है।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(iv) लता जी को अपने जीवन की किन उपलब्धियों पर सबसे अधिक संतोष और खुशी है?
1. उन्हें दूसरों से कहीं ज्यादा धन-दौलत प्राप्त हुई।
2. उन्होंने अपने पिताजी का नाम आगे बढ़ाया।
3. वे दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला बनीं।
4. उन्हें ईश्वर की असीम कृपा और दुनिया का प्यार मिला ।
कूट
(क) 1 और 2
(ख) 2 और 4
(ग) केवल 3
(घ) 2 और 3
(v) गद्यांश के अंत में लता जी प्रभु से क्या प्रार्थना करती हैं?
(क) प्रभु केवल उन्हीं पर अपनी कृपा बनाए रखें।
(ख) उन्हें और अधिक संपत्ति और प्रसिद्धि प्रदान करें।
(ग) प्रभु अपनी कृपा हर कलाकार और नेक इंसान पर बनाए रखें।
(घ) दुनिया के सभी लोग उन्हें ही सर्वश्रेष्ठ गायिका मानें।
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
लता जी होली किस प्रकार मनाती थीं?
प्रश्न 2.
कुमार गंधर्व कौन थे तथा उन्हें देखकर लता जी के मन में कौन-सी इच्छा जगी?
प्रश्न 3.
‘संगीत की सीमा अनंत है।’ लता जी ने ऐसा क्यों कहा?
प्रश्न 4.
लता जी ने अपने पिता का नाम कैसे आगे बढ़ाया?
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विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
लता जी के अनुसार पिताजी की ड्रामा कंपनी में संगीत का क्या महत्त्व था?
प्रश्न 2.
पिताजी ने कर्नाटक और पंजाब का संगीत मराठी रंगमंच में लाकर क्या नया किया?
प्रश्न 3.
लता जी ने फिल्मों में काम करने के बारे में क्या कहा? अभिनय छोड़कर केवल गायन क्यों चुना?
प्रश्न 4.
“संगीत में अपरिमित शक्ति होती है” इस विचार की पुष्टि पाठ से किन उदाहरणों से होती है?
प्रश्न 5.
लता जी की दृष्टि में ‘नाम आगे बढ़ाने’ का वास्तविक अर्थ क्या है और यह केवल प्रसिद्धि से किस प्रकार भिन्न है?
प्रश्न 6.
इस साक्षात्कार से आपको व्यक्तिगत जीवन में क्या प्रेरणा मिलती है?