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Class 9 Hindi क्या लिखूँ? Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? Extra Question Answer
क्या लिखूँ? Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लेखक के अनुसार निबंध लिखने की विशेष मानसिक स्थिति क्या होती है?
उत्तर:
ए. जी. गार्डिनर के अनुसार, जब मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होता है, तब निबंध लिखने की विशेष मानसिक स्थिति बनती है।
प्रश्न 2.
आदर्श निबंध की शैली कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
शैली में प्रवाह होना चाहिए, वाक्य छोटे और एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। हालाँकि, विद्वता दिखाने के लिए कुछ लोग अस्पष्टता और लंबे वाक्यों का भी प्रयोग करते हैं।
प्रश्न 3.
तरुण और वृद्धों के दृष्टिकोण में क्या अंतर बताया गया है?
उत्तर:
तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है और वे क्रांति के समर्थक होते हैं, जबकि वृद्धों के लिए अतीत सुखद होता है और वे अतीत-गौरव के संरक्षक होते हैं।
प्रश्न 4.
मानटेन की निबंध पद्धति की क्या विशेषता है?
उत्तर:
मानटेन की पद्धति में लेखक अपने देखे सुने और अनुभव किए हुए भावों को स्वच्छंद रूप से लिपिबद्ध करता है। इसमें सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता है।
प्रश्न 5.
अमीर खुसरो की किस चतुराई का उदाहरण दिया है?
उत्तर:
अमीर खुसरो ने चार अलग-अलग औरतों की इच्छाओं (खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल) को एक ही पद्य में पिरोकर उनकी पूर्ति कर दी थी। लेखक इसी पद्धति का उपयोग कर दोनों निबंध विषयों को एक साथ जोड़ना चाहते हैं।
प्रश्न 6.
लेखक ने जीवन को प्रगतिशील क्यो कहा है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार, समाज में निरंतर नए दोष उत्पन्न होते हैं और उनके सुधार के लिए नए प्रयास किए जाते हैं। दोषों और सुधारों का यह अंतहीन चक्र ही जीवन को प्रगतिशील बनाता है।
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Class 9 Hindi Chapter 2 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘हैट’ और ‘खूँटी’ के उदाहरण के माध्यम से लेखक निबंध लेखन के किस मर्म को समझाना चाहते हैं?
उत्तर:
इस उदाहरण का विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है-
- भावों की प्रधानता – जिस प्रकार हैट को टाँगने के लिए किसी भी खूँटी का उपयोग किया जा सकता है, उसी प्रकार मन के उमंग और आवेग को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय चुना जा सकता है। लेखक के अनुसार, यथार्थ वस्तु मन के भाव हैं, न कि वह विषय जिस पर लिखा जा रहा है।
- मानसिक स्थिति का महत्व – अंग्रेजी लेखक ए. जी. गार्डिनर के हवाले से बताया गया है कि लेखन एक विशेष मानसिक स्थिति की उपज है। जब मन में स्फूर्ति और आवेग होता है, तब विषय की चिंता नहीं रहती; लेखक किसी भी विषय में अपने हृदय के आवेग को भर देता है।
- स्वच्छंदता और अनुभूति – यह उदाहरण मानटेन द्वारा शुरू की गई निबंध पद्धति का समर्थन करता है, जहाँ लेखक की सच्ची अनुभूति और उसके व्यक्तिगत उल्लास को महत्व दिया जाता है। यहाँ निबंध को मन की एक स्वच्छंद रचना माना गया है।
- तथ्य बनाम अभिव्यक्ति – लेखक यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि निबंध केवल शब्दों का संग्रह या तथ्यों की जानकारी नहीं है, बल्कि वह लेखक के व्यक्तित्व और उसके विचारों की सच्ची अभिव्यक्ति है।
‘हैट’ लेखक के विचारों और अनुभूतियों का प्रतीक है, जबकि ‘खूँटी’ केवल वह आधार या विषय है जिसके सहारे उन विचारों को दुनिया के सामने रखा जाता है।
प्रश्न 2.
‘क्या लिखूँ?’ निबंध की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से रखने के लिए कई शैलियों का मिश्रण किया है। इसका विस्तृत विवरण नीचे दिए गए बिंदुओं के आधार पर समझा जा सकता है-
(क) विचारात्मक और विश्लेषणात्मक शैली
पूरा निबंध विचारों के ताने-बाने से बुना गया है। लेखक केवल तथ्य नहीं बताते, बल्कि हर विषय (जैसे-निबंध रचना, समाज-सुधार या अतीत- मोह) का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं।
(ख) व्याख्यात्मक एवं विवरणात्मक शैली
जहाँ लेखक ने निबंध-रचना के नियमों, ‘मानटेन’ की पद्धति और ‘ए. जी. गार्डिनर’ के सिद्धांतों की चर्चा की है, वहाँ उनकी शैली व्याख्यात्मक हो गई है।
(ग) प्रतीकात्मक और सोदाहरण शैली
लेखक ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए बेहतरीन प्रतीकों और उदाहरणों का सहारा लिया है-
- हैट और खूँटी : भावों (हैट) और विषय (खूँटी) के संबंध को समझाने के लिए यह एक अनूठा उदाहरण है।
- दूर के ढोल : यह मुहावरा एक दार्शनिक प्रतीक के रूप में उभरा है, जो वर्तमान के प्रति असंतोष को व्यक्त करता है।
(घ) भाषा की सहजता और तत्सम प्रधानता
• शब्दावली : इसमें तत्सम शब्दों (जैसे- आवेग, स्फूर्ति, उत्थित, यथार्थ, गौरव, स्मारक) का प्रचुर प्रयोग है, जो इसे साहित्यिक गंभीरता प्रदान करता है।
उर्दू-अंग्रेजी का पुट : लेखक ने ‘हैट’, ‘खूँटी’, ‘गार्डिनर’, ‘रहस्य’ जैसे प्रचलित विदेशी और देशज शब्दों का प्रयोग सहजता से किया है।
(ङ) संक्षिप्तता और सूक्तिपरक वाक्य
उनके वाक्य छोटे हैं परंतु मारक हैं, जो अक्सर ‘सूक्तियों’ (Quotes) जैसा प्रभाव छोड़ते हैं। जैसे- “दोषों का अंत नहीं है और न सुधारों का।’ “दूर के ढोल सुहावने होते हैं।”
(च) आत्मीयता और संवादात्मकता
निबंध पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे लेखक पाठक से सीधे संवाद कर रहे हों। अमिता और नमिता के आदेशों का जिक्र करना और अपनी मानसिक स्थिति (दुविधा) को पाठकों के सामने ईमानदारी से रखना शैली में आत्मीयता पैदा करता है।
Class 9 Ganga Chapter 2 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘लेखक का मानना है कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं क्योंकि उनकी कर्कशता हमें दूर से सुनाई नहीं देती और वे हमें आकर्षक लगते हैं।” इस वाक्य से लेखक का क्या तात्पर्य है और वह वे क्या दर्शाना चाहते हैं?
उत्तर:
इस वाक्य से लेखक का भाव है कि दूर की चीजें हमें अधिक आकर्षक और सुंदर लगती हैं, क्योंकि हम उन्हें वास्तविक रूप से नहीं देखते, जिससे उनकी कर्कशता और कठोरता कम महसूस होती है। लेखक यह दर्शाना चाहते हैं कि हम कभी-कभी दूर से किसी चीज को आदर्श या सुंदर मानते हैं, लेकिन जब उसे करीब से देखते हैं, तो उसकी सच्चाई सामने आती है।
प्रश्न 2.
लेखन की प्रक्रिया में विचारों का चयन और शब्दों का चुनाव कितना महत्वपूर्ण होता है, इसे आप किस तरह से समझते हैं? लिखिए।
उत्तर:
विचारों का चयन और शब्दों का चुनाव लेखन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सही विचार हमें स्पष्ट दिशा देते हैं,
जबकि सही शब्दों का चयन हमारी बातों को प्रभावी और समझने योग्य बनाता है। विचारों और शब्दों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
Class 9 Hindi Chapter 2 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. अंग्रेजी के निबंधकारों ने एक दूसरी ही पद्धति को अपनाया है। उनके निबंध इन आचार्यों की कसौटी पर भले ही खरे सिद्ध न हों, पर अंग्रेजी साहित्य में उनका मान अवश्य है। उस पद्धति के जन्मदाता मानटेन समझे जाते हैं। उन्होंने स्वयं जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया। ऐसे निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं। उनमें न कवि की उदात्त कल्पना रहती है, न आख्यायिका-लेखक की सूक्ष्म दृष्टि और न विज्ञों की गंभीर तर्कपूर्ण विवेचना। उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है। उनमें उसके सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति होती है, उनमें उसका उल्लास रहता है। ये निबंध तो उस मानसिक स्थिति में लिखे जाते हैं, जिसमें न ज्ञान की गरिमा रहती है और न कल्पना की महिमा, जिसमें जीवन का गौरव भूलकर हम अपने में ही लीन हो जाते हैं, जिसमें हम संसार को अपनी ही दृष्टि से देखते हैं और अपने ही भाव से ग्रहण करते हैं। तब इसी पद्धति का अनुसरण कर मैं भी क्यों न निबंध लिखूँ। पर मुझे तो दो निबंध लिखने होंगे।
(क) अंग्रेजी के निबंधकारों ने किस पद्धति को अपनाया?
(i) वैज्ञानिक पद्धति
(ii) वर्णनात्मक पद्धति
(iii) स्वच्छंद पद्धति
(iv) तर्कपूर्ण पद्धति
(ख) निबंधकार अपने निबंधों में क्या लिखते थे?
(i) कल्पनाएँ
(ii) दूसरों के विचार
(iii) स्वयं के अनुभव
(iv) ऐतिहासिक घटनाएँ
(ग) ऐसे निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
(i) गहरी तर्कशक्ति
(ii) मन की स्वच्छंद रचनाएँ
(iii) वैज्ञानिक दृष्टिकोण
(iv) कथानक की जटिलता
(घ) निबंधों में क्या प्रमुख रूप से पाया जाता है?
(i) कल्पना
(ii) तर्क
(iii) सच्ची अनुभूति
(iv) इतिहास
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : ऐसे निबंधों में लेखक के सच्चे भावों की अभिव्यक्ति होती है।
कारण (R) : क्योंकि लेखक अपने स्वयं के अनुभवों को ही लिखता है।
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(ii) कथन (A) सही है तथा कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
प्रगतिशील साहित्य-निर्माता क्या समझकर साहित्य निर्माण कर रहे हैं?
प्रश्न 2.
लिखने की विशेष मानसिक स्थिति कैसी होती है?
प्रश्न 3.
ढोल की कर्कशता लोगों को कब कटु प्रतीत नहीं होती है?
प्रश्न 4.
तरुण जीवन के संग्राम के अनुभव किस प्रकार से देखना चाहते हैं?