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Class 9 Hindi दो बैलों की कथा Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा Extra Question Answer
दो बैलों की कथा Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कांजीहौस में किन्हें कैद किया जाता है तथा उनके साथ कैसा व्यवहार होता है?
उत्तर:
काँजीहौस में उन लावारिस जानवरों को बंद किया जाता है जो दूसरे की फसलों को चर जाते हैं या अन्य तरीकों से नुकसान पहुँचाते हैं। वहाँ बंद जानवरों के साथ अत्यंत क्रूर व्यवहार किया जाता है। उन्हें पानी के सहारे जिंदा रखा जाता है। भोजन तो बस नाम मात्र का ही दिया जाता है। भागने का प्रयास करने पर डंडे बरसाए जाते हैं। ऐसे कई जानवर एकत्र होने पर उन्हें नीलाम कर दिया जाता है।
प्रश्न 2.
हीरा-मोती गया के साथ क्यों नहीं जाना चाहते थे?
उत्तर:
हीरा-मोती का मालिक झूरी उन्हें बहुत चाहता था। वह बैलों के चारा-पानी का ध्यान रखते हुए उनसे लगाव रखता था। हीरा मोती भी खुशी-खुशी काम करते थे। ऐसे में जब झूरी का साला गया उन्हें ले जाने लगा तो उन्होंने समझा कि उन्हें बेच दिया गया। वे झूरी के लिए अपनी जान लगाकर काम करना चाहते थे, पर उन्हें अपना यूँ बेचा जाना पंसद न था, इसलिए वे गया के साथ नहीं जाना चाहते थे।
प्रश्न 3.
मोती के चरित्र की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मोती के चरित्र की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- मोती उग्र स्वभाव का था परंतु दयालु भी था।
- मोती के हृदय में परोपकार था। उसने काँजीहौस के अन्य जानवरों को भगाया।
- मोती सच्चा मित्र है, वह हीरा को विपत्ति में कभी भी अकेला नहीं छोड़ता है।
- वह अत्याचारों का खुलकर प्रतिरोध करता है तथा अवसर पर साहस का प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटता है।
प्रश्न 4.
गया के साथ जाते समय हीरा मोती के मन में आए भावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हीरा मोती जब झूरी के घर से गया के साथ जा रहे थे तो उनका उल्लास खो-सा गया था। वे निराश थे। वे झूरी का साथ कदापि नहीं छोड़ना चाहते थे। वे समझ रहे थे कि उन्हें बेचा जा चुका है। वे पूरे जी-जान से झूरी के लिए काम करना चाहते थे। वे झूरी के सान्निध्य में ही रहना चाहते थे।
प्रश्न 5.
गया के घर हीरा और मोती ने स्वयं को अपमानित महसूस किया, क्यों?
उत्तर:
गया ने अपने घर पर हीरा मोती को खाने के लिए सूखा भूसा डाल दिया और अपने बैलों को खली, चूनी, चोकर दिया। इसके अलावा वह हीरा मोती को पीटता भी था। गया के इस व्यवहार से वे स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे थे।
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प्रश्न 6.
गया के घर कदम-कदम पर अपमानित होने के बाद भी हीरा – मोती को ऐसा क्यों लगा कि यहाँ भी किसी सज्जन का वास है?
उत्तर:
गया के घर बार-बार अपमानित होने के बाद भी हीरा-मोती को ऐसा इसलिए लगा क्योंकि रात में एक छोटी बालिका दो रोटियाँ लेकर आती और एक-एक रोटी दोनों को खिलाकर चली जाती। लड़की का अपने प्रति त्याग एवं प्रेम देखकर उन्हें लगा कि यहाँ भी किसी सज्जन का वास है।
प्रश्न 7.
किस घटना से पता चलता है कि हीरा मोती के मन में औरत जाति के प्रति सम्मान था?
उत्तर:
हीरा मोती को गया के घर केवल सूखा भूसा दिया जाता था, जबकि उनसे दिनभर काम लिया जाता था। ऐसी स्थिति में दोनों में विद्रोह भर गया था। मोती घर के एकाध सदस्य को अपने सींग से फेंक देना चाहता था, पर हीरा ने मना किया। जब उसने लड़की की सौतेली माँ को फेंकने की बात कही तो हीरा ने उससे कहा कि औरत जाति पर सींग चलाना मना है। इससे पता चलता है कि उनके मन में औरत जाति के प्रति सम्मान था।
प्रश्न 8.
शत्रुओं के बारे में हीरा मोती के विचार किस तरह भिन्न थे?
उत्तर:
शत्रुओं के बारे में हीरा और मोती के विचार एक समान नहीं थे। वे शत्रु को पराजित करना चाहते थे। हीरा का विचार था कि पराजित शत्रु पर सींग नहीं चलाना चाहिए जबकि मोती का विचार था कि यह सब ढोंग है और दुश्मन को ऐसे मारना चाहिए कि वह फिर उठ न सके।
प्रश्न 9.
हीरा-मोती ने कांजीहौस में बंद जानवरों का जीवन किस प्रकार बचाया?
उत्तर:
हीरा और मोती ने देखा कि काँजीहौस में अनेक जानवर बंद हैं जो भोजन-पानी के अभाव में अधमरे-से हो रहे हैं। दिनभर चारा न मिलने से क्रोधित हीरा ने दीवार गिरानी शुरू की। मोती और हीरा के परिश्रम से आधी दीवार गिर गई। यह देख घोड़ियाँ, भैंसें, बकरियाँ भागीं। मोती ने सींग मारकर गधों को भी काँजीहौस से भगा दिया। इस तरह उन्होंने जानवरों का जीवन बचाया।
प्रश्न 10.
दढ़ियल के साथ जाते हीरा मोती को अन्य जानवर स्वार्थी क्यों नज़र आ रहे थे?
उत्तर:
दढ़ियल के साथ जाते हीरा मोती ने देखा कि गाय-बैलों का झुंड हरे-भरे खेत में प्रसन्नतापूर्वक चर रहा था। वे सब कितने सुखी थे और उनके ही भाई बधिक के हाथ पड़े थे। किसी को इसकी चिंता नहीं थी, इसलिए उन्हें अन्य जानवर स्वार्थी नज़र आ रहे थे।
प्रश्न 11.
‘दो बैलों की कथा’ पाठ में आए किन्हीं दो जीवन-मूल्यों को प्रसंग सहित लिखिए।
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ पाठ में अनेक जीवन-मूल्य उभरकर आए हैं, जिनमें प्रमुख हैं-
- सच्ची मित्रता की भावना – हीरा और मोती अपनी जान की परवाह न करके एक-दूसरे का साथ देकर सच्ची मित्रता का निर्वाह करते हैं।
- परोपकार की भावना – काँजीहौस में बंद अनेक जानवरों का जीवन बचाकर हीरा मोती परोपकार का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 12.
हीरा मोती किस प्रकार सहयोग एवं प्रेम करते थे? इससे आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:
हीरा-मोती एक साथ ही नाँद में खाते थे तथा साथ ही मुँह हटाते थे। वे एक-दूसरे के काम को अपने कंधों पर लेना चाहते थे। दोनों ने मुसीबत में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। इससे हमें परस्पर सहयोग से काम करने, प्रेम करने एवं सच्ची मित्रता करने की सीख मिलती है।
प्रश्न 13.
हीरा और मोती में से आप किसे अधिक सहनशील एवं सभ्य मानते हैं?
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर मैं दोनों में से हीरा को अधिक सभ्य और सहनशील मानता हूँ; क्योंकि-
- हीरा औरतों पर सींग उठाना अपने धर्म के अनुरूप नहीं समझता है।
- वह गिरे हुए शत्रु पर सींग नहीं चलाता तथा ऐसा करने से मोती को भी मना करता है।
- गया द्वारा गाड़ी में जोते जाने पर मोती गाड़ी को खाई में गिराना चाहता है, पर हीरा मना कर देता है।
- मोती दढ़ियल पर सींग चला देता है, पर हीरा नहीं।
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Class 9 Hindi Chapter 1 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
“हीरा और मोती ने गया के घर पर सूखा भूसा खाकर भी अपमान सह लिया, लेकिन जब उनकी ‘आजादी’ और ‘अस्तित्व’ पर संकट आया, तो उन्होंने विद्रोह कर दिया। इस कथन के आलोक में स्पष्ट कीजिए कि आत्म-सम्मान और गुलामी में से बैलों ने किसे चुना और क्यों?”
उत्तर:
यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि हीरा और मोती के लिए भोजन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता थी। उन्होंने गया के यहाँ अपमान सहा क्योंकि वे झूरी के प्रति वफादार थे और शांति प्रिय थे। परंतु जब उन्हें लगा कि उन्हें बेड़ियों में जकड़कर उनके व्यक्तित्व को कुचला जा रहा है और कसाई के हाथों उनकी जान को खतरा है, तो उन्होंने ‘मूक सहनशीलता’ का त्याग कर ‘विद्रोह’ का मार्ग चुना। प्रेमचंद इस भाव के माध्यम से यह संदेश देते हैं। कि जीवित रहने का अर्थ केवल सांस लेना या पेट भरना नहीं है, बल्कि गरिमा के साथ जीना है। गुलामी की रोटियों से कहीं बेहतर स्वतंत्रता का संघर्ष है, चाहे उसमें जोखिम ही क्यों न हो। बैलों का विद्रोह यह सिद्ध करता है कि “स्वतंत्रता अत्यंत प्रिय है और इसकी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाना उचित है।”
प्रश्न 2.
गया के घर से भागकर आए हीरा-मोती को देख झूरी, बच्चे और उसकी पत्नी ने किस प्रकार प्रतिक्रिया व्यक्त की?
उत्तर:
गया के घर से भागकर आए हीरा मोती को देखकर झूरी स्नेह से गद्गद हो गया। उसने उन्हें गले से लगा लिया और चूमने लगा। इधर बच्चों ने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। उन्होंने हीरा – मोती को सम्मानित करने का मन बनाया। उनके लिए बच्चे अपने घर से रोटियाँ, गुड़, चोकर, भूसी आदि ले आए। इसके विपरीत झूरी की पत्नी अपने द्वार पर बैलों को देख जल-भुन गई और उन्हें नमक हराम कहने लगी। उसे लगा कि काम के डर से बैल भाग आए हैं। उसने नौकर को चेतावनी दे दी कि इन्हें खाने को सूखा भूसा ही दिया जाए।
Class 9 Ganga Chapter 1 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘जानवरों में भी मानवीय संवेदनाएँ होती हैं’- ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हीरामोती बार-बार ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे मनुष्य। वे सुख-दुख बाँटने के लिए एक-दूसरे को चाटते- सूँघते हैं। वे बार- बार भागकर झूरी के पास वापस आना चाहते हैं। वे रोटियाँ खिलाने वाली बालिका के पिता को चाहकर भी चोट नहीं पहुँचा पाते, क्योंकि उन्हें बालिका के अनाथ होने का भय है। वे काँजीहौस से दूसरे जानवरों को मुक्ति दिलाते हैं और विपत्ति में सच्चे मित्र के कर्तव्य का निर्वाह करते हुए एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते हैं, जिससे जानवरों में भी मानवीय संवेदनाएँ होने का प्रमाण मिलता है।
प्रश्न 2.
‘स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है’- ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पाठ को पढ़ने से ज्ञात होता है कि अपनी खोई आज़ादी को हासिल करने के लिए हीरा मोती को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, यहाँ तक कि उनकी जान को जोखिम हो जाता है। गया के घर से भागना, दुबारा भागने पर पकड़ा जाना, फिर भागना, साँड़ से लड़ाई करना, काँजीहौस में बंदी होना, हफ़्ते भर भूखे-प्यासे रहना, बधिक के हाथों नीलाम होना और अंत में मुक्ति पाने से लगता है कि स्वतंत्रता के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
प्रश्न 3.
‘दो बैलों की कथा’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि एकता में शक्ति होती है।
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्र हीरा-मोती जोर लगाकर भागते हैं और पकड़ में नहीं आते हैं। वे अपने से भारी-भरकम और खूँखार साँड़ को पराजित कर देते हैं। दोनों मिलकर काँजीहौस की दीवार गिराकर जानवरों को आजाद कराते हैं और दढ़ियल से मुकाबला कर जान बचा लेते हैं। इससे सिद्ध होता है कि एकता में शक्ति होती है।
प्रश्न 4.
‘लेकिन औरत जाति पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो’ – इस कथन के द्वारा लेखक ने समाज की किस विडंबना की ओर संकेत किया है?
उत्तर:
उक्त कथन के माध्यम से लेखक ने उस सामाजिक विडंबना की ओर संकेत किया है, जहाँ नारी को कदम-कदम पर पुरुष के हाथों अपमानित होना पड़ता है और घरेलू हिंसा सहनी पड़ती है। वह विवशता से यह सब सहती है। उक्त कथन समाज के मुँह पर करारा व्यंग्य है कि पुरुषों से तो अच्छे जानवर ही हैं।
प्रश्न 5.
सिद्ध कीजिए हीरा नरम विचारों तथा मोती गरम विचारों वाला क्रांतिकारी है।
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती के कार्यों तथा उनकी प्रतिक्रियाओं को देखकर लगता है कि हीरा नरम दल का तथा मोती गरम दल का क्रांतिकारी है। हीरा अपने कार्यों द्वारा धैर्य, सहनशीलता, अहिंसा और विनम्रता की अभिव्यक्ति करता है, जबकि मोती उग्रता, प्रतिकार, बदला तथा उत्सर्ग की अभिव्यक्ति करता है। हीरा गया द्वारा मार खाकर भी कहता है, “नहीं, हमारी जाति का यह धर्म नहीं है”, वहीं मोती छोटी लड़की की सौतेली माँ के लिए कहता है, “तो मालकिन को फेंक दूँ। वही तो उस लड़की को मारती है” आदि से लगता है कि वह अत्याचार नहीं सहन कर सकता है। वह सचमुच गरम विचारों वाला क्रांतिकारी है।
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दो बैलों की कथा Extra Questions विषयवस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए।
प्रश्न 1.
हीरा और मोती ने सांड को कैसे पराजित किया?
उत्तर
हीरा और मोती ने सांड को अपनी एकता और बुद्धिमानी से हराया। सांड बहुत शक्तिशाली था और एक-एक करके दोनों को मार सकता था। इसलिए हीरा और मोती ने योजना बनाई कि वे दोनों तरफ से एकसाथ हमला करेंगे। जब सांड एक पर झपटता, तो दूसरा उस पर पीछे से वार करता। इस संगठित हमले से सांड घबरा गया और अंततः थककर गिर पड़ा।
प्रश्न 2.
लेखक के अनुसार, मनुष्य सभ्य कब कहलाता है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार जिस प्रकार जापान ने युद्ध में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करके दुनियाभर में सम्मान अर्जित किया उसी प्रकार हीरा और मोती ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, तो उन पर अत्याचार कम हुआ था। इसी प्रकार कोई मनुष्य यदि अपनी सरलता छोड़कर कठोरता एवं शक्ति का सिद्धांत अपना ले और ईंट का जवाब पत्थर से देने लगे, तो वह सभ्य कहलाता है।
प्रश्न 3.
झूरी अपने बैलों के साथ कैसा व्यवहार करता था? ‘दो बैलों की ‘कथा’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
झूरी अपने बैलों, हीरा और मोती के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता था। वह उन्हें प्रेम से खली चोकर मिला हुआ भूसा खिलाता और स्नेह से उनकी पीठ सहलाता और उनसे अपना प्रेम प्रकट करता था। वह उन्हें कभी मारता नहीं था, वह हर समय बैलों के हित की चिंता करता था और बैल भी झूरी के व्यवहार से प्रसन्न रहते थे।
प्रश्न 4.
‘दो बैलों की कथा’ पाठ के अनुसार गया कौन था? गया द्वारा हाँके जाने पर बैल क्या करते थे?
उत्तर:
गया, झूरी की पत्नी का भाई था। झूरी ने हीरा और मोती को कुछ दिनों के लिए गया के साथ काम करने के लिए भेजा था। जब गया दोनों बैलों को अपने घर ले जा रहा था, तो वे उसके साथ नहीं जाना चाहते थे। उन्हें लगा कि उनके मालिक झूरी ने उन्हें बेच दिया है।
इसलिए गया द्वारा हाँके जाने पर दोनों बैल सीधा चलने के बजाय रास्ते में अड़कर खड़े हो गए। वे लगातार दाएँ-बाएँ भागने और पीछे की ओर ज़ोर लगाने लगे, जिससे गया को उन्हें अपने घर ले जाने में बहुत परेशानी उठानी पड़ी।
प्रश्न 5.
‘दो बैलों की कथा’ पाठ में हीरा और मोती गया के साथ क्यों नहीं जाना चाहते थे और यह उनके किस भाव को दर्शाता है?
उत्तर:
हीरा और मोती गया के साथ इसलिए नहीं जाना चाहते थे, क्योंकि उन्हें यह गलतफहमी हो गई थी कि उनके मालिक झूरी ने उन्हें गया के हाथों बेच दिया है। वे झूरी को बहुत प्रेम करते थे और उनसे बिछड़ना नहीं चाहते थे। उनका यह व्यवहार मुख्य रूप से मालिक के प्रति वफ़ादारी और समर्पण के भाव को दर्शाता है।
प्रश्न 6.
झूरी की पत्नी ने बैलों को नमकहराम क्यों कहा? बाद में उनका माथा क्यों चूमा? ‘दो बैलो की कथा’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तर:
झूरी की पत्नी ने अपने भाई गया के घर अपने दोनों बैल भिजवाए थे, लेकिन हीरा मोती वहाँ से भाग आए । बैलों की इस हरकत से झूरी की पत्नी को अपना और अपने भाई गया का अपमान जैसा लगा, इसलिए क्रोधवश उसने बैलों को नमकहराम कहा। अंत में जब बैल भागकर वापस आ गए, तो उसे हीरा मोती की स्वामिभक्ति का भी आभास हुआ, तब उसने आनंदित होकर बैलों का माथा चूम लिया।
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प्रश्न 7.
गया के घर दोबारा भेजे जाने पर बैलों (हीरा-मोती) ने किस प्रकार विरोध प्रदर्शन किया?
उत्तर:
गया जब दोनों बैलों को दोबारा गाड़ी में जोतकर ले जा रहा था, तब मोती ने उसे बैलगाड़ी समेत खाई में गिराना चाहा, परंतु हीरा ने सँभाल लिया। गया के घर में सूखा भूसा डाले जाने पर उन्होंने आँख उठाकर भी नहीं देखा। काम न करने के कारण हीरा की नाक पर जब डंडे पड़े, तो मोती हल, जुआ, जोत सब कुछ तोड़ते हुए उन्हें लेकर भागा। इस प्रकार, बैलों ने भरपूर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रश्न 8.
‘दो बैलो की कथा’ पाठ के आधार पर बताइए कि छोटी बच्ची हीरा और मोती को रोटियाँ क्यों खिलाती थी?
उत्तर:
छोटी बच्ची भैरों की बेटी थी। उसकी सौतेली माँ उस पर तरह-तरह के अत्याचार करती थी। ठीक उसी तरह गया बैलों पर अत्याचार करता था। छोटी बच्ची बैलों का दर्द समझती थी, इसलिए वह बैलों को रोटियाँ खिलाती थी।
प्रश्न 9.
बच्ची द्वारा दी जाने वाली रोटी के संदर्भ में बताइए कि ‘प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी’ से क्या आशय है?
उत्तर:
मातृहीन लड़की द्वारा प्रेम से प्रतिदिन दी जाने वाली रोटी के कारण उसके स्नेह से तृप्त हीरा मोती की शारीरिक शक्ति और क्षमता ज्यों-की-त्यों बनी रही। गया द्वारा किए जा रहे अत्याचार और सूखा भूसा भी उन्हें दुर्बल न कर सका। गया के घर झूरी के प्रेम से वंचित होने के उपरांत छोटी बच्ची द्वारा मिले प्रेम ने बैलों को तृप्त कर दिया।
प्रश्न 10.
हीरा और मोती ने सांड का सामना किस प्रकार किया?
उत्तर:
सांड का सामना होने पर हीरा और मोती ने भागने की अपेक्षा उससे लड़ना ही उचित समझा। दोनों ने संगठित होकर आक्रमण करने की रणनीति अपनाई। सांड को संगठित शत्रुओं से लड़ने का अनुभव नहीं था। वह तो एक ही शत्रु से मल्लयुद्ध कर सकता था। वह हीरा और मोती का मुकाबला न कर सका और घायल होकर भाग गया।
प्रश्न 11.
हीरा-मोती द्वारा सांड को मार गिराना क्या संदेश देता है?
उत्तर:
हीरा-मोती द्वारा मिलकर सांड को मार गिराना यह संदेश देता है कि संघर्ष के लिए संगठन आवश्यक है।
संगठित होकर और योजना बनाकर संघर्ष करने से शक्तिशाली शत्रु को भी हराया जा सकता है। हीरा और मोती के मैत्री भाव एवं संगठन की शक्ति के कारण सांड को हार माननी ही पड़ी।
प्रश्न 12.
“गिरे हुए बैरी पर सींग नहीं चलाना चाहिए” ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के इस कथन के आधार पर हीरा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
“गिरे हुए बैरी पर सींग नहीं चलाना चाहिए” – हीरा का यह कथन भारतीय संस्कृति के आदर्श का प्रतिनिधित्व कर रहा है। प्रेमचंद ने हीरा (बैल) के माध्यम से यह बताया है कि निहत्थे पर वार नहीं करना चाहिए। निहत्थे पर वार कायर ही करते हैं। सच्चे वीर, साहसी और दयालु लोग ऐसा नहीं करते। अतः हीरा में एक न्यायप्रिय, साहसी, शूरवीर एवं दयालु स्वभाव जैसी अनेक विशेषताएँ मौजूद हैं।
प्रश्न 13.
काँजीहाउस किसे कहते हैं? वहाँ पशुओं के साथ कैसा व्यवहार होता है? ‘दो बैलों की कथा’ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
काँजीहाउस उस स्थान को कहते हैं, जहाँ आवारा पशुओं को पकड़कर रखा जाता है। वहाँ पशुओं के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार होता है तथा पशुओं के खाने के लिए किसी प्रकार के चारे की व्यवस्था नहीं होती है। दिनभर में एक बार पीने के लिए केवल पानी की व्यवस्था कर दी जाती है। वहाँ बंद सभी जानवर मरने जैसी हालत में हो जाते हैं। काँजीहाउस में जानवरों के प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं रहती।
प्रश्न 14.
काँजीहाउस में हीरा और मोती ने जानवरों को किस प्रकार निकाला? ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
काँजीहाउस में हीरा और मोती ने देखा कि वहाँ कई भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे कैद थे, सब ज़मीन पर मुर्दों के समान पड़े थे। वहाँ किसी को चारा नहीं दिया जाता था। यह देखकर दोनों ने सींग मारकर दीवार गिरा दी और जानवरों को वहाँ से भगा दिया। वे स्वयं की आज़ादी के साथ दूसरे जानवरों की भी आज़ादी चाहते थे।
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प्रश्न 15.
‘दो बैलों की कथा’ पाठ के प्रमुख पात्र हीरा मोती के कार्य- व्यवहार के आधार पर बताइए कि सच्चे मित्रों की क्या पहचान होती है?
उत्तर:
सच्चे मित्रों की सबसे बड़ी पहचान हीरा और मोती के कार्य व्यवहार से स्पष्ट होती है। वे दोनों एक-दूसरे को समस्या में पड़ने से बचाते हैं, घुल-मिलकर रहते हैं और शरारत से खेल-खेल में कुलेल भी करते हैं। हीरा-मोती यह प्रयास भी करते थे कि उसकी ही गर्दन पर ज़्यादा और दूसरे पर कम बोझ पड़े। इस तरह वे एक-दूसरे के सुख-दुःख का ध्यान रखते हैं।
प्रश्न 16.
‘दो बैलों की कथा’ नामक पाठ से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
यह पाठ हमें सिखाता है कि स्वतंत्रता हर प्राणी का मूल अधिकार हैं, जिसके लिए हमें हर कष्ट सहकर भी संघर्ष करते रहना चाहिए। हमें पशुओं के प्रति गहरा प्रेम और दया का भाव रखना चाहिए। सच्चा प्रेम और गहरी मित्रता ही जीवन की हर विपत्ति का सामना करने की असली शक्ति होती है।
Class 9 Hindi Chapter 1 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. एक दिन बाड़े के सामने डुग्गी बजने लगी और दोपहर होते-होते वहाँ पचास-साठ आदमी जमा हो गए। तब दोनों मित्र निकाले गए और उनकी देखभाल होने लगी। लोग आ आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते। ऐसे मृतक बैलों का कौन खरीदार होता?
सहसा एक दढ़ियल आदमी जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यंत कठोर आया और दोनों मित्रों के कूल्हों में उँगली गोदकर मुंशी जी से बातें करने लगा। उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे। वह कौन है और उन्हें क्यों टटोल रहा है, इस विषय में उन्हें कोई संदेह न हुआ। दोनों ने एक-दूसरे को भीत नेत्रों से देखा और सिर झुका लिया।
हीरा ने कहा गया के घर से नाहक भागे। अब जान न बचेगी।
मोती ने अश्रद्धा के भाव से उत्तर दिया- कहते हैं, भगवान सबके ऊपर दया करते हैं। उन्हें हमारे ऊपर क्यों दया नहीं आती?
प्रश्न 1.
डुग्गी बजना किसका संकेत था?
(क) खेल होने का
(ख) भोजन का वक्त होने का
(ग) नीलामी होने का
(घ) लोगों को बुलाने का
प्रश्न 2.
लोग मन फीका करके क्यों चले जाते थे?
(क) उन्हें हीरा-मोती पसंद नहीं थे।
(ख) वे हीरा मोती का मरियल रूप देखकर उदास हो जाते थे।
(ग) हीरा मोती उन्हें सींग मारते थे।
(घ) हीरा -मोती बेहोश हो चुके थे।
प्रश्न 3.
‘मन फीका करना’ का आशय है-
(क) दुखी होना
(ख) निराश होना
(ग) परेशान होना
(घ) मज़ा आना
प्रश्न 4.
‘मृतक बैल’ का आशय है-
(क) मरियल बैल
(ख) मरे हुए बैल
(ग) उदास बैल
(घ) पतले बैल
प्रश्न 5.
दढ़ियल आदमी कौन था?
(क) गया
(ख) झूरी
(ग) किसान
(घ) खरीदार
2. नीलाम हो जाने के बाद दोनों मित्र उस दढ़ियल के साथ चले। दोनों की बोटी-बोटी काँप रही थी। बेचारे पाँव तक न उठा सकते थे, पर भय के मारे गिरते पड़ते भागे जाते थे, क्योंकि वह ज़रा भी चाल धीमी हो जाने पर जोर से डंडा जमा देता था।
राह में गाय-बैलों का एक रेवड़ हरे हरे हार में चरता नज़र आया। सभी जानवर प्रसन्न थे, चिकने, चपल कोई उछलता था, कोई आनंद से बैठा पागुर करता था। कितना सुखी जीवन था इनका, पर कितने स्वार्थी हैं सब किसी को चिंता नहीं कि उनके दो भाई बधिक के हाथ पड़े कैसे दुःखी हैं।
सहसा दोनों को ऐसा मालूम हुआ कि यह परिचित राह है। हाँ, इसी रास्ते से गया उन्हें ले गया था। वही खेत, वही बाग, वही गाँव मिलने लगे। प्रतिक्षण उनकी चाल तेज़ होने लगी। सारी थकान, सारी दुर्बलता गायब हो गई। आह? यह लो! अपना ही घर आ गया। इसी कुएँ पर हम पुर चलाने आया करते थे, यही कुआँ है।
(i) दढ़ियल व्यक्ति कौन था?
(क) झूरी की पत्नी का भाई
(ख) एक व्यापारी
(ग) एक कसाई
(घ) झूरी
(ii) राह में चर रहे जानवरों (रेवड़) की प्रमुख विशेषता क्या थी?
(क) वे दुर्बल, निराश और एक-दूसरे के प्रति चिंतित थे।
(ख) वे शांत थे, पर पागुर नहीं कर रहे थे।
(ग) वे चिकने, चपल, प्रसन्न थे और आनंद से पागुर कर रहे थे।
(घ) वे सब भी दढ़ियल से डरकर भागे जा रहे थे।
(iii) बैलों को किसका जीवन अधिक सुखमय लगा?
(क) दड़ियल व्यक्ति का
(ख) राह में मिले गाय-बैलों के झुंड का
(ग) गाँव के जीवन का
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
(iv) दोनों बैलों की चाल अचानक तेज क्यों हो गई?
1. उन्हें लगा कि वे जिस रास्ते से जा रहे हैं, वह परिचित है।
2. उनके मन में दढ़ियल व्यक्ति को मारने का विचार आया।
3. वे गाय-बैलों के रेवड़ में मिल जाना चाहते थे।
कूट
(क) 1, 2 और 3
(ख) केवल 1
(ग) 2 और 3
(घ) 1 और 3
(v) कथन (A) : रास्ते में गाय-बैलों का रेवड़ (झुंड) देखकर हीरा और मोती ने उन्हें स्वार्थी समझा।
कारण (R) : रेवड़ के जानवर बहुत दुःखी थे, लेकिन वे दोनों मित्रों की तरह एक-दूसरे का साथ नहीं दे रहे थे।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
झूरी अपने दोनों बैलों के साथ कैसा व्यवहार करता था?
प्रश्न 2.
झूरी के घर आने पर हीरा मोती का स्वागत कैसे हुआ?
प्रश्न 3.
कांजीहौस किसे कहते हैं? ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर लिखिए।
प्रश्न 4.
हीरा और मोती ने किसे स्वार्थी कहा और क्यों?
विषयवस्तु पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
‘दो बैलों की कथा’ में ‘बछिया के ताऊ’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त किया गया है और क्यों?
प्रश्न 2.
हीरा और मोती अपनी आपसी मित्रता कैसे प्रकट करते थे? ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।
प्रश्न 3.
दोनों बैलों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह क्यों झलक रहा था? ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 4.
‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर पशुओं की स्वामी भक्ति का वर्णन कीजिए।
प्रश्न 5.
‘दो बैलों की कथा पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है।
प्रश्न 6.
कॉंजीहाउस में बंद हीरा मोती को ऐसा क्यों लगा कि इससे तो अच्छा गया ही था? काँजीहाउस के कर्मचारियों और गया के व्यवहार के आधार पर स्पष्ट कीजिए।