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Class 9 Hindi राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 9 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Extra Question Answer
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लक्ष्मण के वाक् चातुर्य पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
लक्ष्मण जी के पास परशुराम जी की हर बात को काटने के लिए तर्क थे। उनके वाक्चातुर्य में व्यंग्य का समावेश है। उन्होंने अपने व्यंग्य बाणों से परशुराम जी के क्रोध को बहुत बढ़ा दिया था।
प्रश्न 2.
राजा जनक परशुराम के प्रति कैसा व्यवहार करते हैं?
उत्तर:
राजा जनक विनम्र, शिष्ट और मर्यादित व्यवहार करते हैं। वे स्वयं आगे बढ़कर परशुराम को प्रणाम करते हैं और माता सीता से भी उन्हें प्रणाम करवाते हैं।
प्रश्न 3.
परशुराम के वचनों को ‘कठोर’ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
परशुराम के वचन ‘कठोर’ इसलिए कहलाए हैं क्योंकि उनमें अत्यधिक क्रोध, धमकी और अपमान का भाव है। वे राजा जनक को ‘जड़’ और ‘मूढ़’ कहकर संबोधित करते हैं।
प्रश्न 4.
परशुराम राजा जनक को क्या चेतावनी दे रहे हैं?
उत्तर:
परशुराम राजा जनक को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि उन्होंने शिव धनुष तोड़ने वाले को तुरंत सामने नहीं लाया, तो वे उनके पूरे राज्य को नष्ट कर देंगे।
प्रश्न 5.
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ से परशुराम के स्वभाव की कौन-सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं?
उत्तर:
इन पंक्तियों से परशुराम का उग्र, अहंकारी और अत्यंत क्रोधी स्वभाव प्रकट होता है। साथ ही उनकी अपार शक्ति और रौद्रता भी स्पष्ट होती है।
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Class 9 Hindi Chapter 9 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर:
परशुराम के क्रोध के समय राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाएँ एक-दूसरे से भिन्न हैं।
श्रीराम पूर्ण रूप से शांत, विनम्र और मर्यादित रहते हैं। वे अत्यंत सम्मानपूर्वक परशुराम से बात करते हैं और स्वयं को उनका दास बताकर उनके क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं। राम का व्यवहार धैर्य, संयम और आदर्श व्यक्तित्व का परिचायक है।
इसके विपरीत लक्ष्मण निर्भीक, तर्कशील और व्यंग्यात्मक प्रवृत्ति के हैं। वे परशुराम के क्रोध पर तीखे और व्यंग्यपूर्ण वचन बोलते हैं, जिससे संवाद में नाटकीयता आती है। तुलसीदास ने दोनों पात्रों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियों में विनय और विवेक अधिक प्रभावी होते हैं।
प्रश्न 2.
“राम सामान्य नहीं अलौकिक हैं” – ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सीता स्वयंवर के अवसर पर धनुष- भंग का प्रसंग ऐसा है जो सर्वथा राम को ‘अलौकिक’ सिद्ध करता है। जिस धनुष को बड़े-बड़े प्रतापी नहीं उठा सके, वह शिव धनुष उनके स्पर्श मात्र से टूट गया। संसार के राजाओं का मान-मर्दन करने वाले परशुराम को धनुष टूटने का पता चलता है, तो वे बड़बड़ाते आते हैं। राम उनके सामने निडर, गंभीर, शांत बने रहते हैं, विचलित नहीं होते। अतः हम कह सकते हैं कि श्रीराम सामान्य नहीं थे। वे निश्चित ही अलौकिक थे। अंत में उन्हीं के वचनों से परशुराम का क्रोध शांत हो जाता है।
प्रश्न 3.
इस प्रसंग में परशुराम के क्रोध के कारण और परिणाम स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परशुराम के क्रोध का मुख्य कारण शिव धनुष का टूटना था, जिसे वे अत्यंत पवित्र अस्त्र मानते थे। उन्हें यह सहन नहीं हुआ कि किसी ने शिव धनुष को तोड़ दिया है। इसी कारण वे जनक की सभा में क्रोधित होकर आते हैं और दोषी को सामने लाने की माँग करते हैं।
उनके क्रोध के परिणामस्वरूप सभा में भय और आतंक का वातावरण फैल जाता है। राजा जनक मौन हो जाते हैं, अन्य राजा घबराए रहते हैं और सुनयना तथा सीता भी चिंतित हो उठती हैं।
प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों के काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए। अपने उत्तर में भाषा, शब्द चयन, भाव और अलंकार का उल्लेख कीजिए।
अति रिस बोले बचन कठोरा।
कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा
उत्तर:
इन पंक्तियों में कवि तुलसीदास ने परशुराम के प्रचंड क्रोध को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। भाषा अवधी है, परंतु इसकी अभिव्यक्ति ओज, शक्ति और प्रभाव से भरी हुई है। “अति रिस” और “बचन कठोरा” जैसे शब्द परशुराम की उग्रता, कठोरता और क्रोध की तीव्रता को सजीव बना देते हैं।
शब्द-चयन अत्यंत सशक्त है “जड़ जनक” जैसे संबोधन परशुराम के अहंकार और क्रोध दोनों को दर्शाते हैं। पंक्तियों में नाटकीयता, ओज गुण और रौद्र भाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं, जिससे दृश्य जीवंत हो उठता है।
इन पंक्तियों में अलंकार की दृष्टि से अनुप्रास (बोले बचन कठोरा, कहु जड़ जनक) का प्रयोग हुआ है, जो वाक्य में संगीतात्मकता और बल प्रदान करता है। पूरा पद्यांश परशुराम के व्यक्तित्व की तीव्रता और सभा में फैले भय के वातावरण को सुंदर और प्रभावपूर्ण रूप से व्यक्त करता है।
इस प्रकार भाषा, शब्द-सौंदर्य, भाव प्रकटन और अलंकार – इन सभी तत्वों ने मिलकर इस पद्यांश को अत्यंत प्रभावशाली बनाया है।
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Class 9 Ganga Chapter 9 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
धनुष टूटने पर श्रीराम द्वारा परशुराम को जो उत्तर दिया गया, उसके आधार पर श्रीराम की चारित्रिक विशेषताएँ बताते हुए लिखिए कि उनमें से आप किससे अधिक प्रभावित हुए और क्यों?
उत्तर:
श्रीराम के संवाद के आधार पर उनकी चारित्रिक विशेषताओं को निम्नलिखित रूप में चिह्ननित किया जा सकता है-
- श्रीराम अत्यंत विनम्र स्वभाव के थे।
- शील आचरण के थे।
- बड़ों का सम्मान करते थे।
(विद्यार्थी प्रभावित होने वाली विशेषता और कारण स्वयं लिखेंगे।)
प्रश्न 2.
यदि लक्ष्मण की जगह श्रीराम भी परशुराम को व्यंग्यपूर्ण उत्तर देते, तो सभा की स्थिति किस प्रकार बदल सकती थी? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
यदि लक्ष्मण की जगह श्रीराम भी परशुराम को व्यंग्यपूर्ण या कठोर उत्तर देते, तो सभा की स्थिति और अधिक गंभीर तथा तनावपूर्ण हो जाती। परशुराम पहले से ही शिव- धनुष टूटने के कारण अत्यंत क्रोधित थे। ऐसे में राम की ओर से भी तीखे शब्द आग में घी का काम करते और परशुराम का क्रोध और भड़क सकता था। इससे संघर्ष या हिंसा की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती।
श्रीराम का शांत, संयमित और विनम्र व्यवहार ही परशुराम के क्रोध को धीरे-धीरे शांत करने में सहायक बना। इससे यह सिद्ध होता है कि कठिन परिस्थितियों में संयम, धैर्य और विवेकपूर्ण व्यवहार अधिक प्रभावी होता है। अतः राम का मार्ग अधिक उचित और समाज के लिए कल्याणकारी सिद्ध होता है।
प्रश्न 3.
‘राम-लक्ष्मण परशुराम संवाद’ पाठ को आज के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जोड़ते हुए बताइए कि यह आज के समय की कौन-कौन सी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है?
उत्तर:
‘राम लक्ष्मण परशुराम संवाद’ पाठ आज के युग में भी अत्यंत प्रासंगिक है। आज के समाज में छोटी छोटी बातों पर विवाद, गुस्सा, अहंकार और हिंसा बढ़ती जा रही है। लोग अपनी बात मनवाने के लिए संयम की बजाय आक्रामक व्यवहार अपनाते हैं, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इस पाठ में परशुराम का क्रोध आज के उन लोगों का प्रतीक है जो शक्ति, पद या ज्ञान के अहंकार में दूसरों को अपमानित करते हैं। वहीं लक्ष्मण का तर्क आज की युवा पीढ़ी के आत्मविश्वास और निर्भीकता को दर्शाता है, लेकिन यह भी दिखाता है कि केवल तर्क से समस्या नहीं सुलझती । श्रीराम का शांत, संयमित और विनम्र व्यवहार आज के समय के लिए सबसे बड़ा संदेश है। वे सिखाते हैं कि क्रोध के सामने शांति, संवाद और विवेक से ही समस्या का समाधान संभव है।
आज के लोकतांत्रिक समाज, प्रशासन, शिक्षा व्यवस्था और पारिवारिक जीवन में यदि राम जैसे गुण-धैर्य, मर्यादा और विनम्रता-अपनाए जाएँ, तो संघर्ष और तनाव को कम किया जा सकता है। इस प्रकार यह पाठ हमें सिखाता है कि समस्या का समाधान शक्ति से नहीं, बल्कि संयम, संवाद और मानवीय मूल्यों से होता है, इसलिए यह पाठ आज के युग में भी पूर्णत: समसामयिक है।
Class 9 Hindi Chapter 9 Extra Question Answer for Practice
दिए गए पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।
आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।।
सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।
सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।
बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।
एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।
(क) धनुष तोड़ने के कारण श्रीराम से कौन क्रोधित हैं?
(i) राजा जनक
(ii) परशुराम
(iii) लक्ष्मण जी
(iv) राजा दशरथ
(ख) ‘सेवकु सो जो करे सेवकाई’ का अर्थ है-
(i) सेवक युद्ध करता है
(ii) सेवक सेवा करता है
(iii) सेवक आदेश देता है
(iv) सेवक राजा बनता है
(ग) काव्यांश में ‘भंजनिहारा’ किसे कहा गया है?
(i) निर्माण करने वालों को
(ii) तोड़ने वालों को
(iii) सेवकों को
(iv) इनमें से कोई नहीं
(घ) श्रीराम क्या कहकर परशुराम जी के क्रोध को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं?
(i) शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई एक दास ही होगा
(ii) शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई शत्रु ही होगा
(iii) शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई एक शिष्य ही होगा
(iv) शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई शुभचिंतक ही होगा
(ङ) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही
विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : राम स्वयं को परशुराम का दास कहते हैं।
कारण (R) : परशुराम स्वयं को शिव धनुष का रक्षक मानते हैं।
विकल्प-
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ii) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 1.
राम-लक्ष्मण – परशुराम संवाद से राजा जनक के स्वभाव की कौन-सी विशेषताएँ प्रकट होती हैं?
प्रश्न 2.
कुटिल भूप हरषे मन माही’ पंक्ति का अर्थ और संदर्भ स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 3.
‘अरि करनी करि करिअ लराई’ में क्या संदेश दिया गया है?
प्रश्न 4.
परशुराम ने श्रीराम को क्या चेतावनी दी?