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Class 9 Hindi Chapter 11 MCQ झाँसी की रानी
Class 9 Hindi झाँसी की रानी MCQ
झाँसी की रानी MCQ Questions – Class 9 Hindi Chapter 11 MCQ Online Test
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
कविता में ‘बुंदेले हरबोलों के मुँह’ से क्या तात्पर्य है?
(क) बुंदेलखंड के लोगों की कहानी
(ख) एक गीत
(ग) सैनिकों की आवाज़
(घ) राजा का आदेश
उत्तर:
(क) बुंदेलखंड के लोगों की कहानी
प्रश्न 2.
‘बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।’
इस अंश से क्या निष्कर्ष निकलता है?
(क) यह पूरी तरह काल्पनिक कहानी है।
(ख) यह लोककथाओं पर आधारित ऐतिहासिक वर्णन है।
(ग) यह केवल गीत है
(घ) यह एक नाटक का संवाद है
उत्तर:
(ख) यह लोककथाओं पर आधारित ऐतिहासिक वर्णन है।
प्रश्न 3.
रानी लक्ष्मीबाई किसकी मुँहबोली बहन थीं?
(क) अजीमुल्ला खाँ की
(ख) अहमदशाह शैली की
(ग) नाना धुंधूपंत पेशवा की
(घ) ठाकुर कुँवर सिंह की
उत्तर:
(ग) नाना धुंधूपंत पेशवा की
प्रश्न 4.
कविता का शीर्षक ‘झाँसी की रानी’ सबसे उपयुक्त क्यों है?
(क) यह ऐतिहासिक नाम है
(ख) यह रानी के जीवन के एक भाग को दिखाता है
(ग) यह पूरे काव्य के केंद्रीय चरित्र और विषय को दर्शाता है
(घ) यह झाँसी के बारे में बताता है
उत्तर:
(ग) यह पूरे काव्य के केंद्रीय चरित्र और विषय को दर्शाता है
प्रश्न 5.
निम्नलिखित कथन और कारण को पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन : रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों के खिलाफ़ युद्ध किया।
कारण : अंग्रेजों ने उनके राज्य को हड़पने की कोशिश की।
विकल्प-
(क) दोनों कथन सही हैं और कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण है
(ख) दोनों कथन सही हैं, लेकिन कारण कथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है
(ग) कथन सही है, कारण गलत है
(घ) कथन गलत है, कारण सही है
उत्तर:
(क) दोनों कथन सही हैं और कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण है
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दिए गए पद्यांशों और उन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरों को पढ़िए।
1. सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फ़िरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में
वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 177)
शब्दार्थ – सिंहासन – राजगद्दी कुर्सी। भृकुटी – भौंह। गुमी – खोई हुई। कीमत – मूल्य। फ़िरंगी – अंग्रेज़। ठानी थी – निश्चय किया था। मर्दानी – बहादुर, पुरुषोचित
भाव-सौंदर्य – अंग्रेज़ों की गलत नीतियों से देशी शासक वर्ग चिंतित था। अपने शोषण और अपमान से राज परिवारों की भौंहें क्रोध से तन गई थीं। वर्षों की गुलामी ने जिस भारत को बूढ़ा और कमज़ोर कर दिया था, उसमें भी जवानी का नया जोश हिलोरें मारने लगा था। सबको अपनी खोई हुई स्वतंत्रता का महत्व समझ में आने लगा और सबने यह निश्चय कर लिया कि अंग्रेज़ों को देश से भगाना है।
सन 1857 की लड़ाई में पुरानी तलवारें भी चमक उठीं और मर्दों के साथ किसी मर्द की भाँति वीरता से वह स्त्री भी खूब लड़ी जो झाँसी की रानी थी। बुंदेलखंड के हरबोलों के मुँह से हमने उसकी कहानी सुनी थी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है। खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है। यहाँ ‘सिंहासन हिलना’ और ‘भृकुटी तानना’ जैसे मुहावरों के माध्यम से राजनैतिक असंतोष को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है।
• मानवीकरण अलंकार – “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी” (भारत को एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जिसमें पुनः जोश जाग उठा है)।
• “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी” में ‘ह’ और ‘न’ वर्णों की आवृत्ति से कारण अनुप्रास अलंकार है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी” –
इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री तत्कालीन भारत की किस राजनीतिक स्थिति की ओर संकेत कर रही हैं?
(i) राजाओं के बीच आपसी युद्ध और सत्ता का संघर्ष।
(ii) ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरुद्ध भारतीय शासकों में पनपता तीव्र असंतोष।
(iii) मुगल साम्राज्य का पतन और नए राज्यों का उदय।
(iv) राजाओं द्वारा अपनी विलासिता त्याग कर संन्यास लेना।
उत्तर:
(ii) ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरुद्ध भारतीय शासकों में पनपता तीव्र असंतोष।
(ख) कविता में भारत को ‘बूढ़ा’ कहकर संबोधित करने के पीछे कवयित्री का मुख्य मनोवैज्ञानिक तर्क क्या हो सकता है?
(i) भारत की सभ्यता विश्व में सबसे प्राचीन है।
(ii) भारत की अधिकांश जनसंख्या वृद्ध हो चुकी थी।
(iii) सदियों की गुलामी और हताशा के कारण देश अपनी शक्ति और चेतना खो चुका था।
(iv) देश में संसाधनों की भारी कमी हो गई थी।
उत्तर:
(iii) सदियों की गुलामी और हताशा के कारण देश अपनी शक्ति और चेतना खो चुका था।
(ग) “गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी”- इस पंक्ति का आशय है-
(i) आजादी को बाजार में खरीदा और बेचा जा सकता है।
(ii) पराधीनता के दुख को भोगने के बाद अब लोगों को स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य समझ आने लगा था।
(iii) अंग्रेज़ों ने भारत को बहुत ऊँचे दामों पर खरीदा था।
(iv) भारतीयों ने अपनी संपत्ति अंग्रेज़ों को सौंप दी थी।
उत्तर:
(ii) पराधीनता के दुख को भोगने के बाद अब लोगों को स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य समझ आने लगा था।
(घ) ‘तलवार पुरानी’ और ‘चमक उठी’ – इन परस्पर विरोधी शब्दों के प्रयोग द्वारा कवयित्री क्या सिद्ध करना चाहती हैं?
(i) पुरानी तलवारें नई तलवारों से अधिक तेज होती हैं।
(ii) भारतीयों के पास आधुनिक हथियारों की कमी थी।
(iii) वर्षों से सुप्त पड़ी वीरता और युद्ध कौशल फिर से जागृत हो उठा था।
(iv) पुराने समय में युद्ध अधिक शांतिपूर्ण होते थे।
उत्तर:
(iii) वर्षों से सुप्त पड़ी वीरता और युद्ध कौशल फिर से जागृत हो उठा था।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ कहकर संबोधित किया है।
कारण (R) : उस युग की सामाजिक व्यवस्था में युद्ध क्षेत्र में शौर्य प्रदर्शन को केवल पुरुषों का गुण माना जाता था, जिसे लक्ष्मीबाई ने चुनौती दी।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
उत्तर:
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
2. कानपुर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ.
उसको याद ज़बानी थीं।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 177 )
शब्दार्थ – मुँहबोली – मुँह से बोली हुई, मानी हुई। छबीली – सुंदर। संतान – औलाद, संतति। कृपाण – छोटी तलवार। गाथाएँ – कहानियाँ, प्रशंसा गीत।
भाव-सौंदर्य – झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती संतान थी। बचपन में उसे नाना साहब ‘छबीली’ कहते थे। वे उसे अपनी बहन मानते थे। वह बहुत सुंदर भी थी। वह नाना के साथ ही पढ़ती और खेलती थी। उनकी दोस्ती केवल बरछी, ढाल, तलवार और कटार से थी। शिवाजी की वीरता की कथाएँ उसे जुबानी याद थीं। बुंदेलखंड के हरबोले कहते हैं कि वह एक महान योद्धा थी, जो युद्ध में मर्दों की भाँति लड़ी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
“कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी…” ‘बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी’ के साथ ‘सहेली’ शब्द का प्रयोग रानी के वीर व्यक्तित्व को बचपन से ही रेखांकित करता है। इसमें अनुप्रास अलंकार की छटा दिखाई देती है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ‘अस्त्र-शस्त्रों’ को लक्ष्मीबाई की ‘सहेली’ क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि उनके पास कोई मित्र नहीं था।
(ii) क्योंकि उन्हें बचपन से ही युद्ध कला में गहरी रुचि थी।
(iii) क्योंकि उन्हें खिलौनों से डर लगता था।
(iv) क्योंकि वे एक सैनिक की पुत्री थीं।
उत्तर:
(ii) क्योंकि उन्हें बचपन से ही युद्ध कला में गहरी रुचि थी।
(ख) वीर शिवाजी की कहानियों का लक्ष्मीबाई पर क्या प्रभाव पड़ा?
(i) उन्हें कहानियाँ सुनाना अच्छा लगने लगा।
(ii) उनमें साहस और देशप्रेम की भावना जागी।
(iii) उन्हें वीरों की कहानियाँ अच्छी लगने लगीं।
(iv) वे महाराष्ट्र जाकर रहना चाहती थीं।
उत्तर:
(ii) उनमें साहस और देशप्रेम की भावना जागी।
(ग) “पिता की संतान अकेली” होने का लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व पर क्या असर हुआ?
(i) वे बहुत कमजोर और डरपोक बन गई।
(ii) वे हमेशा उदास और अकेली रहती थीं।
(iii) उन्हें बेटों के समान शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण मिला।
(iv) वे बहुत अधिक जिद्दी हो गई।
उत्तर:
(iii) उन्हें बेटों के समान शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण मिला।
(घ) “नाना के संग पढ़ना और खेलना” लक्ष्मीबाई के किस गुण को दर्शाता है?
(i) शिक्षा और वीरता के अद्भुत मेल को।
(ii) केवल उनकी मित्रता को।
(iii) उनकी पढ़ाई में अरुचि को।
(iv) उनके पास समय की कमी को।
उत्तर:
(i) शिक्षा और वीरता के अद्भुत मेल को।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : लक्ष्मीबाई के लिए शस्त्र (बरछी, ढाल, कटारी) मात्र उपकरण नहीं बल्कि सहेलियों के समान थे।
कारण (R) : उन्होंने अपनी पहचान उन पारंपरिक स्त्री भूमिकाओं से अलग बनाई थी, जो समाज द्वारा उनके लिए निर्धारित की गई थीं।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
उत्तर:
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
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3. लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध, व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना, ये थे उसके प्रिय खिलवार,
महाराष्ट्र-कुल-देवी उसकी
भी आराध्य भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 178 )
शब्दार्थ – अवतार – किसी देवता का मनुष्यादि के रूप में जन्म लेना। पुलकित – खुश। व्यूह-रचना – युद्ध में दुश्मन को घेरने की कला। सैन्य – सेना। दुर्ग – किला। खिलवार – खेल। आराध्य – जिसकी अराधना की जाए। भवानी – दुर्गा।
भाव-सौंदर्य – यह कहना मुश्किल है कि रानी लक्ष्मीबाई लक्ष्मी थी, दुर्गा थी या स्वयं वीरता ने उसके रूप में जन्म लिया था। उसकी तलवारबाजी मराठों में प्रसन्नता की लहर भर देती थी। नकली युद्ध व्यूह-रचना, शिकार करना, सेना घेरना, किले तोड़ना – यही बचपन में रानी के प्रिय खेल थे। महाराष्ट्र की कुलदेवी माँ दुर्गा की वह भी पूजा किया करती थी। बचपन से ही उसमें वीरता के संस्कार भरे हुए थे। बुंदेलखंड के हरबोले उस साहसी वीरांगना की वीरगाथा को गा-गाकर सुनाते हैं।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• “लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार…”
यहाँ ‘संदेह’ और ‘उपमा’ अलंकार का प्रयोग कर लक्ष्मीबाई की तुलना ‘देवी लक्ष्मी और दुर्गा से की गई है। ‘युद्ध’, ‘व्यूह’, ‘शिकार’ जैसे शब्द वीरता के वातावरण को सजीव करते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) लक्ष्मीबाई को ‘लक्ष्मी’ या ‘दुर्गा’ का अवतार क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि ये उनके बचपन के नाम थे।
(ii) क्योंकि वे मंदिरों में पूजा करती थीं।
(iii) क्योंकि वे बहुत सुंदर दिखती थीं।
(iv) क्योंकि उनमें देवी के समान अजेय शक्ति और वीरता थी।
उत्तर:
(iv) क्योंकि उनमें देवी के समान अजेय शक्ति और वीरता थी।
(ख) लक्ष्मीबाई के ‘प्रिय खिलवार’ (खेल) क्या थे?
(i) गुड़ियों से खेलना और घर सजाना।
(ii) किले तोड़ना और सेना की घेराबंदी करना।
(iii) नाच-गाना और चित्रकारी करना।
(iv) जंगलों में घूमना और फल इकट्ठा करना।
उत्तर:
(ii) किले तोड़ना और सेना की घेराबंदी करना।
(ग) लक्ष्मीबाई की तलवारबाजी देखकर ‘मराठे पुलकित’ (प्रसन्न) क्यों होते थे?
(i) क्योंकि एक महिला को इतनी कुशल योद्धा देख, उन्हें गर्व होता था।
(ii) क्योंकि वे उनके रिश्तेदार थे।
(iii) क्योंकि तलवारें बहुत चमकती थीं।
(iv) क्योंकि वे उन्हें युद्ध सिखाती थीं।
उत्तर:
(i) क्योंकि एक महिला को इतनी कुशल योद्धा देख, उन्हें गर्व होता था।
(घ) ‘कुल- देवी भवानी’ की पूजा करना लक्ष्मीबाई के किस पक्ष को दर्शाता है?
(i) उनकी केवल धार्मिक रुचि को।
(ii) शक्ति की उपासना और विजय के संकल्प को।
(iii) उनके डरपोक स्वभाव को।
(iv) उनके महाराष्ट्र छोड़ने के विचार को।
उत्तर:
(ii) शक्ति की उपासना और विजय के संकल्प को।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा के साथ हुआ था।
करण (R) : वे बचपन से ही युद्ध की रणनीतियाँ (जैसे व्यूह रचना) बनाने का अभ्यास करती थीं।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
उत्तर:
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
4. हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाईं झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया,
शिव से मिली भवानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 178 )
शब्दार्थ – वैभव – समृद्धि, सुख-संपत्ति। ब्याह – विवाह, शादी। सुभट – रणकुशल, वीर योद्धा। विरुदावलि – प्रशंसा और यश के गीत कीर्तिगाथा।
भाव-सौंदर्य – वीरता की प्रतीक रानी का विवाह सुख-समृद्धि के प्रतीक झाँसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ। राजमहल में खुशियाँ छा गई। बधाई के गीत गाए गए। बुंदेलखंड के वीर योद्धाओं के यश का गीत जो दुनिया गाती है, रानी लक्ष्मीबाई उस गीत को चरितार्थ करने झाँसी के महलों में आई। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे चित्रा ने अर्जुन को पा लिया हो और शिव ने भवानी को आज भी बुंदेलखंड के हरबोलों के मुख से हम उस साहसी रानी की कथा सुनते हैं, जिसने पुरुषों को भी कड़ी टक्कर दी थी।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• “हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में…” यहाँ ‘वीरता’ (रानी) और ‘वैभव’ (झाँसी) का मानवीकरण किया गया है।
‘चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी’ पंक्ति में पौराणिक उपमाओं के माध्यम से जोड़ी की महत्ता बताई गई है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “वीरता की वैभव के साथ सगाई” – इस पंक्ति में ‘वीरता’ और ‘वैभव’ किसके प्रतीक हैं?
(i) वीरता – झाँसी के लिए, वैभव-रानी के लिए
(ii) वीरता – रानी लक्ष्मीबाई के लिए, वैभव – झाँसी राज्य के लिए
(iii) वीरता – राजा गंगाधर राव के लिए, वैभव-अंग्रेज़ों के लिए
(iv) वीरता और वैभव दोनों ही झाँसी की सेना के प्रतीक हैं
उत्तर:
(ii) वीरता – रानी लक्ष्मीबाई के लिए, वैभव – झाँसी राज्य के लिए
(ख) “सुभट बुंदेलों की विरुदावलिसी” लक्ष्मीबाई की तुलना ‘विरुदावलि’ (यशगान) से क्यों की गई है?
(i) क्योंकि वे बहुत सुंदर कविताएँ लिखती थीं।
(ii) क्योंकि उनके आने से झाँसी का गौरव और मान बढ़ गया था।
(iii) क्योंकि उन्हें गाना गाना बहुत पसंद था।
(iv) क्योंकि वे बुंदेलखंड के राजा की पुत्री थीं।
उत्तर:
(ii) क्योंकि उनके आने से झाँसी का गौरव और मान बढ़ गया था।
(ग) “चित्रा ने अर्जुन को पाया”- यहाँ चित्रा और अर्जुन की उपमा किनके लिए दी गई है?
(i) सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति के लिए
(ii) शिव और पार्वती के लिए
(iii) लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर राव के लिए
(iv) झाँसी की जनता और उनकी सेना के लिए
उत्तर:
(iii) लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर राव के लिए
(घ) रानी के आने पर राजमहल में ‘खुशियाँ छाने’ का मुख्य कारण क्या था?
(i) राजमहल में बहुत बड़ा उत्सव था।
(ii) झाँसी को एक साहसी और योग्य रानी मिल गई थी।
(iii) झाँसी में बहुत धन-दौलत आ गई थी।
(iv) अंग्रेज़ों ने झाँसी को आजाद कर दिया था।
उत्तर:
(ii) झाँसी को एक साहसी और योग्य रानी मिल गई थी।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : कवयित्री ने लक्ष्मीबाई और गंगाधर राव की जोड़ी को ‘शिव-भवानी’ की उपमा दी है।
करण (R) : यह उपमा उनके विवाह की पवित्रता और उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व को दर्शाती है।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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5. उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाईं,
रानी विधावा हुई हाय! विधि को भी नहीं दया आई,
निःसंतान मरे राजाजी,
रानी शोक-समानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 178)
शब्दार्थ – उदित – उगना। सौभाग्य – सुख। मुदित – प्रसन्न।
उजियाली – रोशनी, उजाला। कालगति – समय का चक्र। काली घटा – विपत्ति। कर – हाथ। भाईं – अच्छी लगीं। विधि – भाग्य, भाष्य। निःसंतान – बिना किसी संतान के। शोक-समानी – दुख में समा जाना।
भाव सौंदर्य – रानी लक्ष्मीबाई के जीवन में सौभाग्य का उदय हुआ। महलों में रोशनी छा गई, लेकिन भाग्य को यह सब मंजूर न था। समय का चक्र शीघ्र ही उनके जीवन में अंधकार ले आया। तीर – व र-कमान थामने वाले उनके हाथों में भाग्य से सुहाग की चूड़ियाँ देखी नहीं गईं। राजा जी निःसंतान ही चल बसे। रानी विधवा हो गई। रानी के दुख की कोई सीमा नहीं थी। ईश्वर को भी उन पर दया नहीं आई। बुंदेलखंड के हरबोलों के मुँह से हमने उस वीरांगना और साहसी रानी की कथा सुनी है।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• ‘उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजयाली छाई…’
‘मुदित महलों’ में अनुप्रास अलंकार है। ‘काली घटा घेर लाई’ मुहावरे का प्रयोग आने वाले संकट (राजा की मृत्यु) के लिए बहुत मार्मिक तरीके से किया गया है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “काली घटा घेर लाई” – इस मुहावरेदार पंक्ति का यहाँ क्या अर्थ है?
(i) झाँसी में बहुत तेज बारिश होने लगी थी।
(ii) झाँसी के ऊपर संकट और दुखों के बादल छा गए थे।
(iii) महलों में रोशनी कम हो गई थी।
(iv) अंग्रेजों ने झाँसी के चारों ओर घेरा डाल दिया था।
उत्तर:
(ii) झाँसी के ऊपर संकट और दुखों के बादल छा गए थे।
(ख) “तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई” – इस पंक्ति में ‘विधि’ (भाग्य) की किस क्रूरता की ओर संकेत किया गया है?
(i) भाग्य को रानी का चूड़ियाँ पहनना पसंद नहीं था।
(ii) भाग्य को रानी के हाथों में शस्त्रों के बजाय चूड़ियाँ देखना स्वीकार नहीं था।
(iii) भाग्य ने रानी का सौभाग्य (सुहाग) छीनकर उन्हें पुनः शस्त्र उठाने पर मजबूर कर दिया।
(iv) रानी को चूड़ियाँ पहनना अच्छा नहीं लगता था।
उत्तर:
(ii) भाग्य को रानी के हाथों में शस्त्रों के बजाय चूड़ियाँ देखना स्वीकार नहीं था।
(ग) राजाजी के ‘निस्संतान’ मरने से झाँसी पर क्या कानूनी संकट आ गया था?
(i) झाँसी में कोई उत्सव नहीं मनाया जा सकता था।
(ii) उत्तराधिकारी न होने के कारण अंग्रेज़ों को झाँसी हड़पने का बहाना मिल गया।
(iii) रानी को महल छोड़कर जाना पड़ा।
(iv) झाँसी की जनता ने विद्रोह कर दिया।
उत्तर:
(ii) उत्तराधिकारी न होने के कारण अंग्रेज़ों को झाँसी हड़पने का बहाना मिल गया।
(घ) ‘कालगति’ का चुपके-चुपके आना किस बात की ओर संकेत करता है?
(i) समय बहुत तेजी से बीत रहा था।
(ii) मृत्यु और संकट का आगमन अचानक और अप्रत्याशित था।
(iii) रानी को संकट का आभास पहले ही हो गया था।
(iv) झाँसी में धीरे-धीरे अँधेरा छा रहा था।
उत्तर:
(ii) मृत्यु और संकट का आगमन अचानक और अप्रत्याशित था।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई गहरे शोक में डूब गई।
करण (R) : राजा की मृत्यु न केवल एक व्यक्तिगत क्षति थी, बल्कि इससे झाँसी का भविष्य भी असुरक्षित हो गया था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों गलत हैं।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
6. बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया,
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा
झाँसी हुई बिरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 179)
शब्दार्थ – हरषाया – खुश हुआ। हड़पना – छल से हासिल करना। अवसर – मौका। फौरन – तुरंत। फौजें – सेनाएँ। लावारिस – बिना उत्तराधिकारी के। वारिस – उत्तराधिकारी। अश्रुपूर्ण – आँसुओं से भरी हुई। बिरानी – पराई।
भाव-सौंदर्य – राजा की मृत्यु के बाद झाँसी राज्य में दुख का अँधेरा छा गया। उसकी देखभाल करने वाला कोई न रहा। यह समाचार जानकर लॉर्ड डलहौजी मन ही मन बहुत खुश हुआ। उसने समझा कि राज्य को हड़पने का यह अच्छा मौका है। उसने तुरंत ही सेनाएँ भेजकर झाँसी के किले पर अपना झंडा फहरा दिया और स्वयं को उस राज्य का अधिकारी घोषित कर दिया, जिसका कोई उत्तराधिकारी न था। आँखों में आँसू भरे हुए रानी ने देखा-झाँसी पराई हो गई थी, वहाँ अतीव-सी ताई हुई थी। हरबोलों के मुँह से हमने उस हिम्मतवाली रानी की कहानी ती है, जो जमकर दुश्यनों से लड़ी थी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• ‘बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया…’
‘बुझा दीप’ यहाँ झाँसी के राजा की मृत्यु का प्रतीक है। डलहौजी की कुटिलता के लिए ‘पैर पसारे’ और ‘काया पलट गई’ जैसे मुहावरों का सटीक प्रयोग हुआ है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) डलहौजी की प्रसन्नता तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की किस मानसिकता को दर्शाती है?
(i) परोपकारी और मददगार सोच।
(ii) साम्राज्यवादी और अवसरवादी सोच।
(iii) धार्मिक और शांतिप्रिय सोच।
(iv) व्यापारिक और निष्पक्ष सोच।
उत्तर:
(ii) साम्राज्यवादी और अवसरवादी सोच।
(ख) “लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया” – इस कथन में कवयित्री ने किस ओर इशारा किया है?
(i) ब्रिटिश सरकार झाँसी के बच्चों की देखभाल करना चाहती थी।
(ii) अंग्रेजों ने नैतिकता दिखाते हुए झाँसी की मदद की।
(iii) अंग्रेजों ने कानूनी पेचीदगियों का सहारा लेकर एक स्वतंत्र राज्य को कब्जा लिया।
(iv) झाँसी की जनता ने स्वयं अंग्रेज़ों को शासन के लिए बुलाया था।
उत्तर:
(iii) अंग्रेजों ने कानूनी पेचीदगियों का सहारा लेकर एक स्वतंत्र राज्य को कब्जा लिया।
(ग) “झाँसी हुई बिरानी थी”- यह वाक्यांश झाँसी की किस स्थिति का चित्रण करता है?
(i) झाँसी में जनसंख्या कम हो गई थी।
(ii) झाँसी की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान खतरे में पड़ गया था।
(iii) झाँसी के लोग दूसरे शहरों में चले गए थे।
(iv) झाँसी में विकास कार्य रुक गए थे।
उत्तर:
(ii) झाँसी की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान खतरे में पड़ गया था।
(घ) इस काव्यांश के अनुसार, डलहौजी ने झाँसी पर कब्जा करने के लिए किस ‘अवसर’ का लाभ उठाया?
(i) झाँसी में हुए नागरिक विद्रोह का।
(ii) रानी की अस्वस्थता का।
(iii) निस्संतान राजा की मृत्यु से पैदा हुए उत्तराधिकार के संकट का।
(iv) झाँसी की सेना की कमजोरी का।
उत्तर:
(iii) निस्संतान राजा की मृत्यु से पैदा हुए उत्तराधिकार के संकट का।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) द्विया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : रानी लक्ष्मीबाई के लिए झाँसी ‘बिरानी’ (पराई) हो गई थी।
करण (R) : अपनी आँखों के सामने अपने दुर्ग पर दुश्मन का झंडा फहराते देखना एक गौरवशाली
विकल्प-
शासक के लिए असहनीय दुख और अपमान की बात थी।
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कारण (R) सही है, लेकिन कथन (A) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) दोनों कथन और कारण असत्य हैं।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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7. अनुनय-विनय नहीं सुनता है, विकट फ़िरंगी की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौजी ने पैर पसारे अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया,
रानी दासी बनी बनी यह
दासी अब महरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 179)
शब्दार्थ – अनुनय-विनय – प्रार्थना। विकट – अज़ीब कठिन। माया – चाल। काया पलटना – बदलाव आ जाना।
भाव सौंदर्य – अंग्रेज़ों की चालाकियों को समझना कठिन था। वे किसी की प्रार्थना नहीं सुनते थे। जब वे व्यापारी बनकर भारत आए, तब उन्होंने हमसे दया माँगी थी, लेकिन अब डलहौजी ने देश में अपना राज्य विस्तार आरंभ कर दिया था, उनका स्वरूप बदल गया था। राजाओं और नवाबों को भी वह अपने पैरों की धूल के समान समझने लगे थे। नवाबों और राजाओं की रानियाँ दासी बन गई थीं और अंग्रेज़ महिलाएँ महारानी बनती चली जा रही थीं। बुंदेले हरबोलों के मुँह से हमने लक्ष्मीबाई की वीरता की सभी कहानियाँ सुनी हैं।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी शुरुआती पैठ जमाने के लिए किस रणनीति का सहारा लिया था?
(i) सीधे तौर पर भारतीय राजाओं पर युद्ध थोपना।
(ii) व्यापारिक रियायतों की आड़ में विनम्रता और दया का प्रदर्शन करना।
(iii) भारतीय जनता को आधुनिक शिक्षा देने का लालच देना।
(iv) भारत के सभी राजाओं के साथ समान मित्रता करना।
उत्तर:
(ii) व्यापारिक रियायतों की आड़ में विनम्रता और दया का प्रदर्शन करना।
(ख) लॉर्ड डलहौजी के शासनकाल में भारतीय रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति में क्या प्रमुख बदलाव आया?
(i) बातचीत और समझौतों को प्राथमिकता दी जाने लगी।
(ii) भारतीय राजाओं को प्रशासन में ऊँचे पद दिए गए।
(iii) विनम्रता का स्थान कठोरता और जबरन राज्य हड़पने की नीतियों ने ले लिया।
(iv) अंग्रेजों ने भारत से अपना व्यापार समेटना शुरू कर दिया।
उत्तर:
(iii) विनम्रता का स्थान कठोरता और जबरन राज्य हड़पने की नीतियों ने ले लिया।
(ग) 1857 के विद्रोह के पूर्व भारतीय राजाओं और नवाबों के प्रति अंग्रेजों के बढ़ते अपमानजनक व्यवहार का मुख्य परिणाम क्या हुआ?
(i) राजाओं ने अंग्रेज़ों की अधीनता सहर्ष स्वीकार कर ली।
(ii) भारतीय शासकों में गहरा असंतोष और विद्रोह की भावना पनपी।
(iii) भारत में राजशाही पूरी तरह समाप्त होकर लोकतंत्र आ गया।
(iv) अंग्रेज़ों ने राजाओं को ब्रिटेन में बसने का आमंत्रण दिया।
उत्तर:
(ii) भारतीय शासकों में गहरा असंतोष और विद्रोह की भावना पनपी।
(घ) औपनिवेशिक काल के दौरान भारत की संप्रभुता के संदर्भ में ‘दासी’ और ‘महारानी’ के प्रतीकों का प्रयोग किस राजनीतिक सत्य को दर्शाता है?
(i) भारतीय महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार को।
(ii) भारत की अपनी सत्ता का छिनना और विदेशी शक्ति का शासक बन बैठना।
(iii) भारत और इंग्लैंड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों को।
(iv) राजाओं के महलों में दास प्रथा के अंत को।
उत्तर:
(ii) भारत की अपनी सत्ता का छिनना और विदेशी शक्ति का शासक बन बैठना।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : ब्रिटिश शासन में भारतीय राजाओं और नवाबों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी।
करण (R) : अंग्रेज पहले भारत में व्यापार करने आए थे। धीरे-धीरे उन्होनें राज करना आरंभ कर दिया।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की पुष्टि करता है।
(iv) दोनों ही कथन असत्य हैं।
उत्तर:
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
8. छिनी राजधानी देहली की लिया लखनऊ बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठूर में हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपूर, तंजोर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात,
जबकि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात,
बंगाले, मद्रास आदि की
भी तो यही कहानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥ (पृष्ठ सं०- 179 )
शब्दार्थ – देहली – दिल्ली। कैद – बंद। घात – धोखा। बिसात – हैसियत। वज्र-निपात- भारी मुसीबत आना।
भाव-सौंदर्य – अंग्रेज़ों ने दिल्ली की राजधानी छीन ली। देखते ही देखते लखनऊ पर भी अधिकार कर लिया। उन्होंने पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया। नागपुर पर भी धोखे से अधिकार कर लिया। उदयपुर, तंजौर, सतारा और कर्नाटक की भी उनके सामने कोई हैसियत नहीं रही। सिंध, पंजाब और ब्रह्मा (बर्मा-वर्तमान ‘म्यांमार) पर भी उनके भीषण आक्रमण की मुसीबत आई। बंगाल और मद्रास आदि राज्यों की भी यही दशा थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह से हमने इनकी कथा के साथ रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कथा भी सुनी है।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया
गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है। कविता में कई स्थानों का उल्लेख किया गया है।
• कविता में राष्ट्रीय चेतना का उभार है और घटनाओं का जीवंत चित्रण किया गया है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) 1857 के विद्रोह से ठीक पहले अंग्रेज़ों के प्रति भारत के प्रमुख ‘राजनीतिक केंद्रों (जैसे दिल्ली और लखनऊ) की स्थिति कैसी थी?
(i) वे अंग्रेज़ों के साथ शांतिपूर्ण व्यापारिक समझौतों में व्यस्त थे।
(ii) वे अपनी स्वायत्तता खो चुके थे और ब्रिटिश नियंत्रण का शिकार हो रहे थे।
(iii) उन्हें ब्रिटिश शासन द्वारा आधुनिक प्रशासनिक अधिकार दिए गए थे।
(iv) वे पूरी तरह सुरक्षित थे और अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध की तैयारी कर चुके थे।
उत्तर:
(ii) वे अपनी स्वायत्तता खो चुके थे और ब्रिटिश नियंत्रण का शिकार हो रहे थे।
(ख) नागपुर और बिठूर जैसे राज्यों पर हुए ‘आघात’ और ‘कैद’ की घटनाएँ अंग्रेजों की किस नीति की ओर संकेत करती हैं?
(i) भारतीय राजाओं के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार।
(ii) शक्तिशाली भारतीय शासकों को शक्तिहीन कर उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करना।
(iii) केवल आर्थिक लाभ के लिए व्यापारिक संधियाँ करना।
(iv) भारतीय संस्कृति का संरक्षण करना।
उत्तर:
(ii) शक्तिशाली भारतीय शासकों को शक्तिहीन कर उन्हें राजनीतिक रूप से समाप्त करना।
(ग) सिंध, पंजाब और ब्रह्म (बर्मा) जैसे सुदूर क्षेत्रों पर ‘वज्र-निपात’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(i) उन क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार करना।
(ii) भारत की सीमाओं को सुरक्षित बनाना।
(iii) ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाओं का आक्रामक विस्तार करना और संसाधनों पर कब्जा करना।
(iv) वहाँ के स्थानीय राजाओं की आपसी लड़ाई को सुलझाना।
उत्तर:
(iii) ब्रिटिश साम्राज्य की सीमाओं का आक्रामक विस्तार करना और संसाधनों पर कब्जा करना।
(घ) बंगाल और मद्रास जैसे विकसित प्रांतों की दशा को वाक्यांश ‘यही कहानी’ कहना किस ओर इशारा करता है?
(i) वहाँ के लोग बहुत खुशहाल थे।
(ii) ब्रिटिश प्रभाव और शोषण का चक्र पूरे भारत में एक समान रूप से फैल रहा था।
(iii) वहाँ कोई भी राजनीतिक हलचल नहीं हो रही थी।
(iv) वे क्षेत्र अंग्रेज़ों से पूरी तरह स्वतंत्र थे।
उत्तर:
(ii) ब्रिटिश प्रभाव और शोषण का चक्र पूरे भारत में एक समान रूप से फैल रहा था।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : 1857 तक आते-आते सतारा, तंजौर और कर्नाटक जैसी छोटी रियासतें बड़ी शक्ति बनकर उभरीं।
कारण (R) : डलहौजी की ‘हड़प नीति’ और निरंतर सैन्य अभियानों ने अधिकांश भारतीय राज्यों को पंगु बना दिया था।
विकल्प-
(i) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) कथन (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से गलत हैं।
उत्तर:
(i) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
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9. रानी रोई रनिवासों में बेगम गम से थीं बेजार,
उनके गहने-कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाजार,
सरेआम नीलाम छापते थे अंग्रेजों के अखबार,
‘नागपूर के जेवर ले लो’, ‘लखनऊ के लो नौलख हार’,
यों परदे की इज्जत पर-
देशी के हाथ बिकानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 180)
शब्दार्थ – रनिवास – रानी के रहने का स्थान। बेगम – बादशाह की पत्नी। गम – दुख। बेजार – दुखी, परेशान। सरे-आम – खुलेआम। परदेसी – दूसरे देश के।
भाव सौंदर्य – अंग्रेजों ने देशी राजाओं और नवाबों का अपमान किया जिससे रनिवासों में उनकी रानियाँ और बेगमें दुख से बेहाल होकर रोया करती थीं। उनके गहने और कपड़े कलकत्ते के बाज़ारों में बेचे जाते थे। अंग्रेज़ अपने अखबारों में खुलेआम उनकी नीलामी के विज्ञापन छापते थे कि नागपुर के जेवर ले लो और लखनऊ के नौलख हार खरीदो। इस प्रकार परदे में रहने वाली भारत की इज्जत विदेशियों के हाथों बेची जा रही थी। बुंदेले हरबोलों के मुँह से हमने रानी लक्ष्मीबाई के पौरुष और वीरता की कहानियाँ सुनी हैं।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है। खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• ‘रानी रोई रनिवासों में पंक्ति में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय राजघरानों की महिलाओं की स्थिति में आया बदलाव किस सामाजिक सत्य को दर्शाता है?
(i) राजघरानों में आपसी कलह का बढ़ना।
(ii) अंग्रेजों द्वारा भारतीय मर्यादा और मान-सम्मान पर सीधा प्रहार।
(iii) भारतीय महिलाओं की बढ़ती आर्थिक स्वतंत्रता।
(iv) राजघरानों द्वारा स्वेच्छा से सादगी का जीवन अपनाना।
उत्तर:
(ii) अंग्रेजों द्वारा भारतीय मर्यादा और मान-सम्मान पर सीधा प्रहार।
(ख) अंग्रेजों द्वारा भारतीय रियासतों के गहनों और कपड़ों का खुले बाजार में नीलाम किया जाना, उनकी किस मानसिकता का प्रतीक था?
(i) भारतीय कला और संस्कृति का प्रचार करना।
(ii) जब्त की गई संपत्ति से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और भारतीय शासकों को अपमानित करना।
(iii) भारतीय वस्तुओं को वैश्विक पहचान दिलाना।
(iv) व्यापार में पारदर्शिता लाना।
उत्तर:
(ii) जब्त की गई संपत्ति से अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और भारतीय शासकों को अपमानित करना।
(ग) ‘परदे की इज्जत’ का सरेआम नीलाम होना भारतीय समाज के संदर्भ में क्या प्रभाव डालता था?
(i) इससे जनता के मन में अंग्रेज़ों के प्रति भय और आदर बढ़ा।
(ii) इसने भारतीयों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचाई और उनमें तीव्र आक्रोश पैदा किया।
(iii) इससे लोग आधुनिक फैशन की ओर आकर्षित हुए।
(iv) इससे राजघरानों के प्रति जनता की सहानुभूति समाप्त हो गई।
उत्तर:
(ii) इसने भारतीयों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचाई और उनमें तीव्र आक्रोश पैदा किया।
(घ) तत्कालीन ब्रिटिश समाचार पत्रों की ‘नीलामी की खबरों’ का प्रकाशन किस कूटनीतिक उद्देश्य की ओर संकेत करता है?
(i) आम जनता को सस्ते सामान की जानकारी देना।
(ii) भारतीय सत्ता के पतन का सार्वजनिक प्रदर्शन कर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।
(iii) पत्रकारिता के मूल्यों को बढ़ाना।
(iv) भारत में शिक्षा का स्तर सुधारना।
उत्तर:
(ii) भारतीय सत्ता के पतन का सार्वजनिक प्रदर्शन कर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : 1857 के विद्रोह का एक बड़ा कारण अंग्रेजों द्वारा भारतीय राजवंशों का किया गया ‘आर्थिक और नैतिक’ अपमान था।
कारण (R) : अंग्रेज़ों ने न केवल राज्यों को हड़पा, बल्कि वहाँ की निजी संपत्तियों और पारिवारिक मान-मर्यादा को भी सार्वजनिक रूप से नष्ट किया।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से गलत हैं।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
10. कुटियों में थी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था, अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रणचंडी का कर दिया प्रकट आह्वान,
हुआ यज्ञ प्रारंभ उन्हें तो
सोई ज्योति जगानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 180)
शब्दार्थ – कुटियों – झोपड़ियों। विषम वेदना – गहरा दुख। आहत – घायल। अपमान – बेइज्जती। पुरखों – पूर्वजों। अभिमान – गर्व। जुटाना – इकट्ठा करना। रण-चंडी – युद्ध की देवी। आह्वान – बुलावा। प्रारंभ – शुरू।
भाव सौंदर्य – अंग्रेजों की नीतियों से सभी लोगों में आक्रोश था। झोंपड़ियों में रहने वाले जहाँ गहरा कष्ट झेल रहे थे, वहीं महलों में रहने वाले अपने अपमान से आहत थे। दूसरी ओर, देश के वीर सैनिक अपने पूर्वजों के प्रति अभिमान के भाव से भरे हुए थे। नाना धुंधूपंत पेशवा उसी समय युद्ध के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने में लगे हुए थे। उधर उनकी छबीली बहन लक्ष्मीबाई ने खुलेआम रण – चंडी का रूप धारण करके युद्ध का ऐलान कर दिया। इस प्रकार युद्ध का वह पावन यज्ञ शुरू हुआ, जिससे देश और देशवासियों के हृदय की सोई हुई ज्योति को जगाना था। बुंदेले हरबोलों के मुख से हमने उस महान वीरांगना रानी की कहानी सुनी है।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
• ‘विषम वेदना’, ‘आहत अपमान’ तथा ‘ज्योति जगानी’ में अनुप्रास अलंकार है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “कुटियों में विषम वेदना और महलों में आहत अपमान” – यह स्थिति 1857 के विद्रोह के स्वरूप के बारे में क्या बताती है?
(i) विद्रोह केवल राजाओं तक सीमित था।
(ii) विद्रोह केवल गरीब जनता की समस्या थी।
(iii) यह विद्रोह समाज के अमीर और गरीब, दोनों वर्गों के साझा असंतोष का परिणाम था।
(iv) महलों और कुटियों के बीच आपसी संघर्ष चल रहा था।
उत्तर:
(iii) यह विद्रोह समाज के अमीर और गरीब, दोनों वर्गों के साझा असंतोष का परिणाम था।
(ख) वीर सैनिकों द्वारा ‘पुरखों का अभिमान’ याद करने का विद्रोह की सफलता में क्या महत्व था?
(i) वे केवल पुरानी कहानियाँ सुनना चाहते थे।
(ii) अपने पूर्वजों की वीरता की याद ने उनमें गुलामी के विरुद्ध लड़ने का आत्मसम्मान और साहस जगाया।
(iii) वे अंग्रेजों से अपनी पुरानी पेंशन माँग रहे थे।
(iv) वे आधुनिक हथियारों के बजाय पुराने हथियारों से लड़ना चाहते थे।
उत्तर:
(ii) अपने पूर्वजों की वीरता की याद ने उनमें गुलामी के विरुद्ध लड़ने का आत्मसम्मान और साहस जगाया।
(ग) ‘रण-चंडी का आह्वावान’ करना किस वैचारिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है?
(i) केवल धार्मिक अनुष्ठान करना।
(ii) युद्ध को एक पवित्र कर्तव्य और अन्याय के विरुद्ध धर्मयुद्ध के रूप में स्वीकार करना।
(iii) शांति के लिए प्रार्थना करना।
(iv) युद्ध से पीछे हट जाना।
उत्तर:
(ii) युद्ध को एक पवित्र कर्तव्य और अन्याय के विरुद्ध धर्मयुद्ध के रूप में स्वीकार करना।
(घ) ‘सोई ज्योति जगाना’ और ‘यज्ञ प्रारंभ करना’ जैसे प्रतीकों का प्रयोग यहाँ किस संदर्भ में हुआ है?
(i) मंदिरों में आरती शुरू करने के लिए।
(ii) देशवासियों के भीतर दबी हुई देशभक्ति की भावना को क्रांति के रूप में प्रज्वलित करने के लिए।
(iii) राजमहलों में दीपावली मनाने के लिए।
(iv) भोजन बनाने की तैयारी करने के लिए।
उत्तर:
(ii) देशवासियों के भीतर दबी हुई देशभक्ति की भावना को क्रांति के रूप में प्रज्वलित करने के लिए।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : नाना धुंधूपंत पेशवा और लक्ष्मीबाई जैसे नेता क्रांति के लिए संसाधन और जनमत जुटा रहे थे।
कारण (R) : 1857 का विद्रोह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह एक सुव्यवस्थित और वैचारिक तैयारी का परिणाम था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से गलत हैं।
उत्तर:
(iii) (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
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11. महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थीं,
मेरठ, कानपुर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपुर, कोल्हापुर में भी
कुछ हलचल उकसानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी॥ (पृष्ठ सं०- 180 181)
शब्दार्थ – ज्वाला – लपट। अंतरतम – हृदय। चेती – सावधान हुई। उकसाना – भड़काना।
भाव-सौंदर्य – इस क्रांति में पूरा देश भागीदार था। महलों में रहने वालों ने इस आग को प्रज्वलित किया और झोंपड़ी में रहने वालों ने इसकी लपटों को तेज़ किया। स्वतंत्रता की यह चिनगारी देशवासियों के हृदय से आई थी। क्रांति की इस लहर ने झाँसी और दिल्ली को सावधान कर दिया। लखनऊ को भी इसने अपने लपेटे में ले लिया। मेरठ, कानपुर और पटना में भी क्रांति का जोर था। जबलपुर और कोल्हापुर में भी कुछ चिनगारियाँ भड़क रही थीं। यह कहानी हमने बुंदेले हरबोलों के मुँह से सुनी थी। इस क्रांति में झाँसी की रानी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
‘लखनऊ लपटें’ में अनुप्रास अलंकार है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” – इस पंक्ति के माध्यम से विद्रोह के सामाजिक स्वरूप के बारे में क्या पता चलता है?
(i) समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी संघर्ष चल रहा था।
(ii) यह केवल राजाओं और नवाबों के स्वार्थ की लड़ाई थी।
(iii) नेतृत्व शासक वर्ग ने किया, लेकिन उसे जन आंदोलन की शक्ति आम जनता के असंतोष से मिली।
(iv) गाँवों की अपेक्षा शहरों में विद्रोह अधिक तीव्र था।
उत्तर:
(iii) नेतृत्व शासक वर्ग ने किया, लेकिन उसे जन आंदोलन की शक्ति आम जनता के असंतोष से मिली।
(ख) स्वतंत्रता की चिनगारी का “अंतरतम से आना” किस मनोवैज्ञानिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है?
(i) लोगों ने बाहरी देशों के दबाव में आकर हथियार उठाए थे।
(ii) यह विद्रोह किसी तात्कालिक कारण से नहीं, बल्कि वर्षों से दबे हुए आत्म सम्मान और गुलामी की पीड़ा का परिणाम था।
(iii) क्रांतिकारियों के पास आधुनिक हथियारों की कमी थी।
(iv) लोग केवल अपने धार्मिक विश्वासों को बचाने के लिए लड़ रहे थे।
उत्तर:
(ii) यह विद्रोह किसी तात्कालिक कारण से नहीं, बल्कि वर्षों से दबे हुए आत्म सम्मान और गुलामी की पीड़ा का परिणाम था।
(ग) कविता में झाँसी, दिल्ली, मेरठ से लेकर कोल्हापुर तक के क्षेत्रों का उल्लेख क्या प्रमाणित करता है?
(i) विद्रोह का प्रभाव केवल उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक ही सीमित था।
(ii) यह एक व्यापक राष्ट्रीय लहर थी, जिसने उत्तर से दक्षिण और मध्य भारत के बड़े हिस्से को एकजुट कर दिया था।
(iii) इन सभी शहरों के बीच संचार व्यवस्था बहुत आधुनिक थी।
(iv) अंग्रेजों ने इन सभी शहरों को खुद खाली कर दिया था।
उत्तर:
(ii) यह एक व्यापक राष्ट्रीय लहर थी, जिसने उत्तर से दक्षिण और मध्य भारत के बड़े हिस्से को एकजुट कर दिया था।
(घ) “भारी धूम मचाई थी” – ऐतिहासिक संदर्भ में इस ‘धूम’ का क्या अर्थ निकलता है?
(i) इन शहरों में अंग्रेज़ों का भव्य स्वागत किया गया था।
(ii) इन प्रमुख केंद्रों पर ब्रिटिश सत्ता की जड़ें हिल गई थीं और विद्रोह अत्यंत उग्र रूप ले चुका था।
(iii) इन शहरों में व्यापारिक प्रगति बहुत तेजी से हो रही थी।
(iv) लोग केवल शांति मार्च निकाल रहे थे।
उत्तर:
(ii) इन प्रमुख केंद्रों पर ब्रिटिश सत्ता की जड़ें हिल गई थीं और विद्रोह अत्यंत उग्र रूप ले चुका था।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : 1857 के संग्राम को केवल एक ‘सैनिक विद्रोह’ कहना गलत है।
कारण (R) : महलों से लेकर झोंपड़ियों तक और मेरठ से लेकर कोल्हापुर तक समाज का हर हिस्सा स्वतंत्रता की इस ज्वाला में शामिल हो गया था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से गलत हैं।
उत्तर:
(iii) (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
12. इस स्वतंत्रता – महायज्ञ में कई वीरवर आए काम
नाना, धुंधूपंत ताँतिया, चतुर अजीमुल्ला सरनाम,
अहमद शाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास – गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम,
लेकिन आज जुर्म कहलाती
उनकी जो कुरबानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 181)
शब्दार्थ – महायज्ञ – महान एवं पवित्र कार्य। वीरवर – बहादुर। काम आना – शहीद होना। सरनाम – प्रसिद्ध। अभिराम – सुंदर। गगन – आकाश जुर्म – अपराध। कुरबानी – बलिदान।
भाव – सौंदर्य – स्वतंत्रता के इस महान एवं पुनीत कार्य में कई बहादुर शहीद हुए। इनमें नाना, तात्याँ और चतुर अजीमुल्ला प्रसिद्ध हैं। साथ ही अहमदशाह मौलवी और ठाकुर कुँवरसिंह जैसे आज़ादी के वीर सिपाहियों के नाम भी भारत के इतिहास में हमेशा अमर रहेंगे, परंतु इनका यह बलिदान उस समय अंग्रेज़ों की नज़र में अपराध था। बुंदेले हरबोलों ने हमें वह कथा सुनाई थी जिसमें रानी लक्ष्मीबाई मर्दानी रूप में अंग्रेजों से डटकर लड़ी थीं।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है।
• ‘स्वतंत्रता महायज्ञ’ में रूपक अलंकार है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “भारत के इतिहास-गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम” – इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री आने वाली पीढ़ियों को क्या संदेश देना चाहती हैं?
(i) केवल ऐतिहासिक तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
(ii) इन नायकों का बलिदान राष्ट्रीय पहचान और गौरव का स्थायी हिस्सा है।
(iii) भविष्य में युद्ध की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
(iv) इतिहास केवल राजाओं के बारे में होता है।
उत्तर:
(ii) इन नायकों का बलिदान राष्ट्रीय पहचान और गौरव का स्थायी हिस्सा है।
(ख) अहमद शाह मौलवी, तात्याँ और अजीमुल्ला जैसे नामों का एक साथ उल्लेख विद्रोह की किस विशेषता को रेखांकित करता है?
(i) यह विद्रोह केवल एक विशेष धर्म के लोगों तक सीमित था।
(ii) ये सभी नेता केवल अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए लड़ रहे थे।
(iii) इन सभी नेताओं के बीच आपसी मतभेद थे।
(iv) स्वतंत्रता की लड़ाई में विभिन्न धर्मों और समुदायों की साझा भागीदारी और एकता थी।
उत्तर:
(iv) स्वतंत्रता की लड़ाई में विभिन्न धर्मों और समुदायों की साझा भागीदारी और एकता थी।
(ग) “लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी” – इस पंक्ति में ‘जुर्म’ (अपराध) शब्द का प्रयोग किसके दृष्टिकोण से किया गया है?
(i) भारतीय जनता के दृष्टिकोण से।
(ii) तत्कालीन ब्रिटिश शासकों के दृष्टिकोण से, जो देशभक्ति को राजद्रोह मानते थे।
(iii) आधुनिक इतिहासकारों के दृष्टिकोण से।
(iv) स्वयं उन क्रांतिकारियों के दृष्टिकोण से।
उत्तर:
(ii) तत्कालीन ब्रिटिश शासकों के दृष्टिकोण से, जो देशभक्ति को राजद्रोह मानते थे।
(घ) ‘स्वतंत्रता-महायज्ञ’ में ‘वीरवर आए काम’ का अर्थ क्या है?
(i) देश की स्वतंत्रता के लिए वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी (शहीद हो गए)।
(ii) वीरों ने युद्ध के मैदान में काम करना शुरू कर दिया था।
(iii) वीरों को अंग्रेज़ों ने नई नौकरियाँ दी थीं।
(iv) वीर केवल यज्ञ और पूजा-पाठ कर रहे थे।
उत्तर:
(i) देश की स्वतंत्रता के लिए वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी (शहीद हो गए)।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : 1857 के क्रांतिकारियों के बलिदान को ब्रिटिश सरकार ने ‘अपराध’ घोषित किया था।
कारण (R) : अंग्रेज़ों ने भारत के संविधान का निर्माण किया था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R) इसकी सही व्याख्या नहीं है।
(iii) (A) और (R) दोनों सही हैं और कारण (R) कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से गलत हैं।
उत्तर:
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
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13. इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में,
जख्मी होकर वॉकर भागा,
उसे अजब हैरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी। (पृष्ठ सं०- 181)
शब्दार्थ – गाथा – कहानी। मर्द – पुरुष। मर्दानों – पुरुषों। द्वं – द्वयुद्ध। असमानों में – गैरबराबरी वालों में। जख्मी – घायल। अजब – अजीब, अलग तरह की। हैरानी – आश्चर्य।
भाव-सौंदर्य – अन्य वीरों की कहानी छोड़कर अब हम झाँसी के युद्ध के मैदान में चलते हैं। जहाँ लक्ष्मीबाई पुरुषों के बीच किसी वीर पुरुष की भाँति खड़ी हैं। उसी समय लेफ्टिनेंट वॉकर युद्ध के लिए आ पहुँचा और सैनिकों के बीच से आगे बढ़ने लगा। रानी ने भी तलवार खींच ली और उन दोनों के बीच युद्ध होने लगा, जो पूर्णतः असमान थे। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के सामने वॉकर टिक नहीं सका और घायल होकर हतप्रभ सा भाग खड़ा हुआ। बुंदेले हरबोलों के मुँह से हमने उस वीरांगना की गाथा सुनी है, जो जमकर अंग्रेज़ों से लड़ी थी।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “मर्द बनी मर्दानों में” – इस काव्यांश के माध्यम से कवयित्री लक्ष्मीबाई के किस विशेष गुण को उजागर करना चाहती हैं?
(i) रानी का पुरुषों जैसा पहनावा पहनना।
(ii) रानी का पुरुषों के प्रति क्रोधित स्वभाव।
(iii) रानी का अपनी पहचान बदलकर युद्ध लड़ना।
(iv) उस समय के समाज में प्रचलित लैंगिक रूढ़ियों को तोड़कर युद्ध कौशल में पुरुषों के बराबर या उनसे श्रेष्ठ सिद्ध होना।
उत्तर:
(iv) उस समय के समाज में प्रचलित लैंगिक रूढ़ियों को तोड़कर युद्ध कौशल में पुरुषों के बराबर या उनसे श्रेष्ठ सिद्ध होना।
(ख) “रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वंद्व असमानों में” – यहाँ युद्ध को ‘असमान’ क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि एक तरफ विशाल ब्रिटिश सेना थी और दूसरी तरफ रानी का साहस और सीमित संसाधन।
(ii) क्योंकि रानी और वॉकर की आयु में बहुत अंतर था।
(iii) क्योंकि युद्ध के मैदान की जमीन ऊबड़-खाबड़ थी।
(iv) क्योंकि रानी के पास तलवार थी और वॉकर के पास नहीं।
उत्तर:
(i) क्योंकि एक तरफ विशाल ब्रिटिश सेना थी और दूसरी तरफ रानी का साहस और सीमित संसाधन।
(ग) लेफ्टिनेंट वॉकर के ‘जख्मी होकर भागने और उसकी ‘अजब हैरानी’ का मुख्य कारण क्या था?
(i) उसने पहले कभी युद्ध नहीं देखा था।
(ii) वह रानी लक्ष्मीबाई के असाधारण रण-कौशल और वीरता की कल्पना नहीं कर पाया था।
(iii) उसकी सेना ने उसका साथ छोड़ दिया था।
(iv) वह युद्ध के मैदान में रास्ता भटक गया था।
उत्तर:
(ii) वह रानी लक्ष्मीबाई के असाधारण रण-कौशल और वीरता की कल्पना नहीं कर पाया था।
(घ) “इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में” – यह पंक्ति कविता के प्रवाह में क्या परिवर्तन लाती है?
(i) यह कविता को समाप्त करने की ओर ले जाती है।
(ii) यह अंग्रेजों की प्रशंसा की ओर संकेत करती है।
(iii) यह व्यापक राष्ट्रीय परिदृश्य से ध्यान हटाकर झाँसी के वास्तविक युद्ध क्षेत्र और रानी के पराक्रम पर केंद्रित करती है।
(iv) यह केवल झाँसी के भूगोल का वर्णन करती है।
उत्तर:
(iii) यह व्यापक राष्ट्रीय परिदृश्य से ध्यान हटाकर झाँसी के वास्तविक युद्ध क्षेत्र और रानी के पराक्रम पर केंद्रित करती है।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : लेफ्टिनेंट वॉकर जैसा प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी रानी से युद्ध में जीत गया था।
कारण (R) : रानी लक्ष्मीबाई केवल अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए नहीं लड़ रही थीं, बल्कि वे वीरता का साक्षात् अवतार थीं जिनका संकल्प अटूट था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iv) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर:
(iv) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
14. रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी किया ग्वालियर पर अधिकार,
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया
ने छोड़ी राजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 181-182 )
शब्दार्थ – निरंतर – लगातार। भूमि – धरती। तत्काल – उसी समय। स्वर्ग सिधारना – मृत्यु होना। अधिकार – कब्जा करना। रजधानी – राजधानी।
भाव-सौंदर्य – रानी आगे बढ़ी और लगातार सौ मील तक घोड़ा दौड़ाते हुए कालपी पहुँची। घोड़ा थककर धरती पर गिरा और मर गया। यमुना के किनारे पर रानी ने फिर से अंग्रेजों को हराया। विजयी होकर वह आगे बढ़ी और ग्वालियर पर भी अधिकार कर लिया। वहाँ के राजा सिंधिया अंग्रेज़ों के मित्र थे। वे अपनी राजधानी छोड़कर भाग खड़े हुए। बुंदेलखंड के हरबोलों के मुख से हमने वीरतापूर्वक लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई की कहानी सुनी थी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) रानी लक्ष्मीबाई निरंतर कितनी दूरी तय करके कालपी पहुँची थीं?
(i) दस मील
(ii) पचास मील
(iii) सौ मील
(iv) दो सौ मील
उत्तर:
(iii) सौ मील
(ख) कालपी पहुँचने पर रानी के घोड़े के साथ क्या हुआ?
(i) वह बीमार हो गया
(ii) वह थककर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई
(iii) उसे अंग्रेज़ों ने छीन लिया
(iv) वह भाग गया
उत्तर:
(ii) वह थककर गिर पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई
(ग) यमुना के तट पर रानी का मुकाबला किनसे हुआ?
(i) मराठों से
(ii) सिंधिया की सेना से
(iii) अंग्रेज़ों से
(iv) डाकुओं से
उत्तर:
(iii) अंग्रेज़ों से
(घ) ग्वालियर के उस शासक का नाम क्या था जिसे रानी के डर से अपनी राजधानी छोड़नी पड़ी?
(i) नाना साहब
(ii) तात्या टोपे
(iii) सिंधिया
(iv) डलहौजी
उत्तर:
(iii) सिंधिया
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : रानी लक्ष्मीबाई लगातार संघर्ष करती रहीं।
कारण (R) : उन्होंने लंबी दूरी तय की युद्ध किए और ग्वालियर पर अधिकार किया।
विकल्प-
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता।
(iii) कथन (A) सही है, पर कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, पर कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
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15. विजय मिली पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सन्मुख था, उसने मुँह की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के सँग आई थीं,
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी,
पर पीछे ह्यू रोज आ गया,
हाय! घिरी अब रानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 182)
शब्दार्थ – सन्मुख – सामने। मुँह की खाना – हार जाना। सखियाँ – सहेलियाँ। क्षेत्र – परिसर। मार – मचाना-मारकाट करना। सन्मुख – सम्मुख, जो सामने हो, भिड़ने वाला, अनुकूल।
भाव-सौंदर्य – रानी पीछे से विजयी होकर आगे बढ़ ही रही थीं कि अंग्रेजों की सेना ने उन्हें फिर से घेर लिया। इस बार उनका सामना जनरल स्मिथ से था जिसे उन्होंने परास्त किया। रानी के साथ उनकी सहेलियाँ काना और मंदरा थीं। युद्ध के मैदान में उन दोनों ने भारी तबाही मचाई थी लेकिन तभी पीछे से ह्यू रोज आ गया और रानी चारों ओर से दुश्मनों से घिर गई। बुंदेले हरबोलों के मुँह से हमने उसी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की कहानी सुनी थी कि वह अंग्रेज़ों से मर्दानगी के साथ लड़ी थी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ‘विजय मिली पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी’ – इस पंक्ति में ‘फिर’ शब्द का प्रयोग किस युद्ध-स्थिति को दर्शाता है?
(i) रानी की सैन्य शक्ति बहुत कमजोर थी।
(ii) अंग्रेज़ों के पास असीमित संसाधन थे, जिससे एक टुकड़ी के हारते ही दूसरी तैयार रहती थी।
(iii) रानी युद्ध जीतना नहीं चाहती थीं।
(iv) रानी और अंग्रेज़ मित्र बन गए थे।
उत्तर:
(ii) अंग्रेज़ों के पास असीमित संसाधन थे, जिससे एक टुकड़ी के हारते ही दूसरी तैयार रहती थी।
(ख) जनरल स्मिथ के ‘मुँह की खाने’ और ह्यू रोज के ‘पीछे’ से आने के बीच क्या सामरिक संबंध दिखता है?
(i) अंग्रेज़ रानी को वीरता से नहीं, बल्कि घेराबंदी और कूटनीति से हराना चाहते थे।
(ii) स्मिथ और ह्यू रोज आपस में लड़ रहे थे।
(iii) रानी केवल एक ही दिशा में लड़ना जानती थीं।
(iv) ह्यू रोज रानी की मदद करने के लिए पीछे से आया था।
उत्तर:
(i) अंग्रेज़ रानी को वीरता से नहीं, बल्कि घेराबंदी और कूटनीति से हराना चाहते थे।
(ग) युद्ध क्षेत्र में ‘काना’ और ‘मंदरा’ जैसी सखियों की उपस्थिति क्या सिद्ध करती है?
(i) रानी युद्ध के मैदान में अकेले डरती थीं।
(ii) 1857 का संग्राम केवल पुरुषों का नहीं, बल्कि महिलाओं के भी अदम्य साहस का प्रतीक था।
(iii) वे केवल रानी की देखभाल के लिए वहाँ थीं।
(iv) सेना में सैनिकों की कमी के कारण सखियों को आना पड़ा।
उत्तर:
(ii) 1857 का संग्राम केवल पुरुषों का नहीं, बल्कि महिलाओं के भी अदम्य साहस का प्रतीक था।
(घ) रानी के लिए ‘महारानी’ की जगह ‘मर्दानी’ शब्द का प्रयोग उनके किस पक्ष को अधिक प्रभावी बनाता है?
(i) उनका राजसी ठाट-बाट।
(ii) तत्कालीन समाज में महिलाओं के लिए निर्धारित सीमाओं को तोड़कर युद्ध-कौशल दिखाना।
(iii) उनका कठोर स्वभाव।
(iv) उनका सुंदर वेश-विन्यास।
उत्तर:
(ii) तत्कालीन समाज में महिलाओं के लिए निर्धारित सीमाओं को तोड़कर युद्ध-कौशल दिखाना।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : रानी लक्ष्मीबाई की विजय के तुरंत बाद जनरल स्मिथ और ह्यू रोज की सेनाओं का आ जाना उनकी हार का एक प्रमुख सामरिक कारण बना।
कारण (R) : रानी के पास असीमित सेना और आधुनिक हथियार थे, लेकिन वह अपनी सखियों का साथ पाकर भावुक हो गई थीं।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
उत्तर:
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
16. तो भी रानी मार-काटकर चलती बनी सैन्य के पार,
किंतु सामने नाला आया था यह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था इतने में आ गए सवार,
रानी एक शत्रु बहुतेरे होने लगे वार पर वार,
घायल होकर गिरी सिंहनी
उसे वीर गति पानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 182)
शब्दार्थ – चलती बनी – आगे बढ़ते जाना। सैन्य – सेना। संकट – परेशानी, विपदा। विषम – कठिन। अपार – जिसे पार न किया जा सके। अड़ा – रुक गया। शत्रु – दुश्मन। बहुतेरे – बहुत सारे। वार – हमला सिंहनी – शेरनी। वीर-गति – शहादत, मृत्यु।
भाव-सौंदर्य – अंग्रेज़ों की सेना से घिरी होने पर भी रानी ने अंग्रेजों के बीच भारी मार-काट मचाई और शत्रु सेना को पार करके आगे बढ़ गई। तभी सामने एक नाला आ गया। इस विपत्ति को पार करना अत्यंत कठिन था क्योंकि उनका घोड़ा नया था और उसी जगह अड़ गया था। इतनी देर में अंग्रेज़ घुड़सवार आ पहुँचे । अकेली रानी अनगिनत शत्रुओं से लड़ने लगी । वार पर वार होते रहे और अंततः शेरनी के समान वह वीरांगना स्त्री घायल होकर गिर पड़ी। उसे देश के लिए शहीद होना हीं था। बुंदेले हरबोलों के मुख से हमने यह कहानी सुनी थी कि अंग्रेजों के साथ जमकर लड़ने वाली उस वीरांगना रानी ने अपने प्राणों को देशहित में न्योछावर कर दिया था।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) रानी के सामने ‘नाला’ आने पर ‘नया घोड़ा’ अड़ गया। यह स्थिति क्या दर्शाती है?
(i) रानी को घोड़ा चलाना नहीं आता था।
(ii) युद्ध में केवल साहस ही काफी नहीं होता, योद्धा और उसके साधन (घोड़े) के बीच पुराना तालमेल भी जीत के लिए अनिवार्य होता है। अतः वह घोड़ा नया था।
(iii) घोड़ा पानी देखकर डर गया था।
(iv) नाला बहुत चौड़ा था इसलिए घोड़ा रुक गया।
उत्तर:
(ii) युद्ध में केवल साहस ही काफी नहीं होता, योद्धा और उसके साधन (घोड़े) के बीच पुराना तालमेल भी जीत के लिए अनिवार्य होता है। अतः वह घोड़ा नया था।
(ख) “रानी एक, शत्रु बहुतेरे” इस पंक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है?
(i) रानी के पास सैनिकों की कमी थी।
(ii) यह अंग्रेजों की संख्यात्मक ताकत और रानी के अकेलेपन के बीच के असमान, लेकिन साहसी संघर्ष को दर्शाता है।
(iii) रानी अपनी सेना से बिछड़ गई थीं।
(iv) अंग्रेज़ रानी से बहुत प्यार करते थे इसलिए सब उनके पास आ गए।
उत्तर:
(ii) यह अंग्रेजों की संख्यात्मक ताकत और रानी के अकेलेपन के बीच के असमान, लेकिन साहसी संघर्ष को दर्शाता है।
(ग) रानी को अंत में ‘सिंहनी’ क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि घायल होने के बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय अंत तक एक शिकार करने वाली शेरनी की तरह संघर्ष किया।
(ii) क्योंकि वे जंगल में लड़ रही थीं।
(iii) क्योंकि उनका स्वभाव बहुत गुस्सैल था।
(iv) क्योंकि वे शेर की सवारी कर रही थीं।
उत्तर:
(i) क्योंकि घायल होने के बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय अंत तक एक शिकार करने वाली शेरनी की तरह संघर्ष किया।
(घ) रानी को ‘वीर-गति’ प्राप्त हुई, इसे उनकी पराजय क्यों नहीं माना जा सकता?
(i) क्योंकि वे युद्ध जीत गई थीं।
(ii) क्योंकि अंग्रेज उन्हें मारना नहीं चाहते थे।
(iii) क्योंकि उन्होंने शत्रुओं के सामने घुटने टेकने के बजाय देश के लिए लड़ते हुए मरना चुना, जो एक नैतिक विजय है।
(iv) क्योंकि वे वापस झाँसी चली गई थीं।
उत्तर:
(iii) क्योंकि उन्होंने शत्रुओं के सामने घुटने टेकने के बजाय देश के लिए लड़ते हुए मरना चुना, जो एक नैतिक विजय है।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : रानी का नया घोड़ा उनके लिए एक ‘घातक’ बाधा साबित हुआ।
कारण (R) : संकट के समय नया घोड़ा उस अनुभव और समझ की कमी को पूरा नहीं कर सका जो रानी के पुराने घोड़े में थी।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iii) कथन (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से असत्य हैं।
उत्तर:
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
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17. रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आई बन स्वतंत्रता नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई
हमको जो सीख सिखानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 183)
शब्दार्थ – सिधारना – मृत्यु को प्राप्त होना। दिव्य – अलौकिक, जो इस लोक का नहीं है। तेज – आभा। मनुज – मनुष्य। अवतारी – ईश्वर का रूप। नारी – स्त्री महिला। पथ – रास्ता। सीख – शिक्षा।
भाव-सौंदर्य – अंत में रानी मृत्यु को प्राप्त हो गई। चिता पर ही उसकी अलौकिक यात्रा निकली। उनका तेज अग्नि के तेज में मिल न गया। वह सही अर्थों में तेज की अधिकारी थी। मात्र 23 वर्ष की उम्र में उसने जो किया, वह कोई साधारण मनुष्य नहीं कर सकता। वह अवश्य ही ईश्वर का कोई अवतार थी। स्वतंत्रता की देवी बनकर वह हमारे सोए हुए मस्तिष्क को जगाने आई थी। वह हमें रास्ता 5 दिखाकर चली गई। हमें जो शिक्षा देनी थी, देकर चली गई। बुंदेले हरबोलों ने हमें उसी महान नारी की कथा सुनाई थी जो बड़ी ही मर्दागनी के साथी लड़ी थी।
शिल्प-सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी” पंक्ति में ‘तेज’ का क्या व्यापक अर्थ है?
(i) केवल शारीरिक शक्ति
(ii) केवल सुंदरता
(iii) वीरता, आत्मबल और व्यक्तित्व का तेज
(iv) केवल बुद्धिमत्ता
उत्तर:
(iii) वीरता, आत्मबल और व्यक्तित्व का तेज
(ख) “मनुज नहीं अवतारी थी” कवयित्री ने रानी को साधारण ‘मनुष्य’ न मानकर ‘अवतार’ क्यों कहा है?
(i) क्योंकि वे देवताओं की तरह हवा में उड़ सकती थीं।
(ii) क्योंकि मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो वीरता दिखाई, वह किसी साधारण मानव के बस की बात नहीं थी।
(iii) क्योंकि उनका जन्म किसी मंदिर में हुआ था।
(iv) क्योंकि वे भविष्य देख सकती थीं।
उत्तर:
(ii) क्योंकि मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जो वीरता दिखाई, वह किसी साधारण मानव के बस की बात नहीं थी।
(ग) ‘जीवित करने’ का वास्तविक अर्थ क्या है?
(i) मरे हुए लोगों को दोबारा जिंदा करना।
(ii) गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतीयों के भीतर सोए हुए आत्म-सम्मान और देश भक्ति के भाव को जगाना।
(iii) लोगों को व्यायाम और योग सिखाना।
(iv) युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों का इलाज करना।
उत्तर:
(ii) गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतीयों के भीतर सोए हुए आत्म-सम्मान और देश भक्ति के भाव को जगाना।
(घ) रानी द्वारा दिखाए गए ‘पथ’ (रास्ते) और ‘सीख’ का वर्तमान भारत के लिए क्या महत्व है?
(i) केवल तलवार चलाना सीखना ही सबसे बड़ी सीख है।
(ii) केवल झाँसी शहर को बचाना ही उनका लक्ष्य था।
(iii) अंग्रेज़ों से हमेशा नफरत करना ही उनकी सीख है।
(iv) अन्याय के खिलाफ निडर होकर लड़ना और मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्याग करने का जज़्बा ही उनका असली मार्ग है।
उत्तर:
(iv) अन्याय के खिलाफ निडर होकर लड़ना और मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्याग करने का जज़्बा ही उनका असली मार्ग है।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : रानी लक्ष्मीबाई मात्र 23 वर्ष की आयु में ही इतिहास में अमर हो गई।
कारण (R) : उन्होंने ‘स्वतंत्रता नारी’ बनकर भारतीयों को गुलामी की मानसिक नींद से जगाने का महान कार्य किया था।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iii) कथन (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iv) दोनों ही कथन ऐतिहासिक रूप से असत्य हैं।
उत्तर:
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
18. जाओ रानी याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारत वासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनाशी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी,
तेरा स्मारक तू ही होगी,
तू खुद अमिट निशानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसी वाली रानी थी।। (पृष्ठ सं०- 183)
शब्दार्थ – कृतज्ञ – उपकार को मानने वाले एहसानम। बलिदान देना – स्वयं की आहुति देना। अविनाशी – नाशरहित, अक्षय, नित्य। मदमाती – मस्ती, मदमस्त। स्मारक – किसी की स्मृति रक्षा के अभिप्राय से संस्थापित संस्था, भवन, स्तंभ आदि, याद दिलाने वाला। अमिट – कभी न मिटने वाली निशानी।
भाव-सौंदर्य – कवयित्री रानी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहती हैं कि हम भारतवासी तुम्हारे इस उपकार को सदैव याद रखेंगे। तुम्हारा यह बलिदान कभी न मिटने वाली स्वतंत्रता की भावना को जन्म देगा। भले ही इतिहास में तुम्हारे विषय में कुछ न लिखा जाए, तुम्हारी सच्चाई को मिटाने के प्रयास किए जाएँ, विजय में मस्त अंग्रेज़ भले ही गोलों से झाँसी का निशान मिटा दें लेकिन तू स्वयं कभी न मिटने वाली निशानी है तेरा कोई स्मारक बने या न बने, तू स्वयं ही अपना स्मारक है, क्योंकि तेरी वीरता और तेरी गाथा अतुलनीय है अर्थात हम तुम्हारे इस बलिदान के लिए हमेशा तुम्हारे आभारी रहेंगे। लक्ष्मीबाई की वीरता की यह कथा हमने बुंदेलखंड के हरबोलों के मुँह से सुनी थी।
शिल्प सौंदर्य – कविता ‘कथात्मक शैली’ में लिखी गई है और इसमें ‘गेयता’ का गुण है तथा खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सामंजस्य है
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ‘हम कृतज्ञ भारतवासी’ पंक्तियों से देशवासियों की किस भावना का पता चलता है?
(i) भारतवासी रानी को भूल चुके हैं।
(ii) आने वाली पीढ़ियाँ रानी के इस महान उपकार और बलिदान के प्रति हमेशा ऋणी (आभारी) रहेंगी।
(iii) भारतवासी केवल युद्ध की कहानियाँ पसंद करते हैं।
(iv) लोग अंग्रेज़ों की मदद करना चाहते थे।
उत्तर:
(ii) आने वाली पीढ़ियाँ रानी के इस महान उपकार और बलिदान के प्रति हमेशा ऋणी (आभारी) रहेंगी।
(ख) ‘लगे सच्चाई को चाहे फाँसी’ – यहाँ कवयित्री किस विडंबना की ओर संकेत कर रही हैं?
(i) अंग्रेजों द्वारा क्रांतिकारियों को फाँसी देना।
(ii) ऐसी स्थिति जहाँ शक्तिशाली लोग इतिहास को दबाने या सच को झुठलाने की कोशिश करते हैं, फिर भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता।
(iii) सच बोलना एक अपराध है।
(iv) रानी को फाँसी की सजा हुई थी।
उत्तर:
(ii) ऐसी स्थिति जहाँ शक्तिशाली लोग इतिहास को दबाने या सच को झुठलाने की कोशिश करते हैं, फिर भी बलिदान व्यर्थ नहीं जाता।
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(ग) पंक्ति में ‘झाँसी’ का मिटना और ‘स्वतंत्रता अविनाशी’ का जागना क्या दर्शाता है?
(i) भौतिक वस्तुओं (शहर / किले) का विनाश संभव है, लेकिन आजादी के विचार और जज्बे को कभी खत्म नहीं किया जा सकता।
(ii) अंग्रेज़ों ने झाँसी को पूरी तरह नक्शे से हटा दिया था।
(iii) झाँसी के लोग युद्ध हारना चाहते थे।
(iv) गोले बारूद से केवल इमारतें बनती हैं।
उत्तर:
(i) भौतिक वस्तुओं (शहर / किले) का विनाश संभव है, लेकिन आजादी के विचार और जज्बे को कभी खत्म नहीं किया जा सकता।
(घ) ‘तेरा स्मारक तू ही होगी’ – इस पंक्ति का सबसे गहरा अर्थ क्या है?
(i) रानी के लिए कोई पत्थर का स्मारक नहीं बनाया जाएगा।
(ii) लोग रानी का नाम भूल जाएँगे।
(iii) रानी झाँसी के किले में ही रहेंगी।
(iv) रानी का व्यक्तित्व और उनके कार्य इतने महान हैं कि उन्हें याद रखने के लिए किसी बाहरी ढाँचे की जरूरत नहीं, वे स्वयं अपनी स्मृति हैं।
उत्तर:
(iv) रानी का व्यक्तित्व और उनके कार्य इतने महान हैं कि उन्हें याद रखने के लिए किसी बाहरी ढाँचे की जरूरत नहीं, वे स्वयं अपनी स्मृति हैं।
(ङ) नीचे दिए गए प्रश्न में एक कथन (A) और उसका कारण (R) दिया गया है। कथनों को पढ़िए और सही विकल्प का चयन कीजिए।
कथन (A) : कवयित्री के अनुसार, रानी लक्ष्मीबाई का स्मारक बनाने के लिए किसी विशेष ईंट या पत्थर की आवश्यकता नहीं है।
कारण (R) : महान नायकों का चरित्र और उनके द्वारा किया गया लोक-कल्याण ही उन्हें युगों-युगों तक जीवित रखता है।
विकल्प-
(i) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iv) कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर:
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), कथन (A) की बिल्कुल सटीक व्याख्या करता है।