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Class 9 Hindi Chapter 10 MCQ भारति, जय, विजयकरे
Class 9 Hindi भारति, जय, विजयकरे MCQ
भारति, जय, विजयकरे MCQ Questions – Class 9 Hindi Chapter 10 MCQ Online Test
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘भारति, जय, विजयकरे!’ कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(ग) महादेवी वर्मा
(घ) जयशंकर प्रसाद
उत्तर:
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
प्रश्न 2.
कविता में प्रयुक्त ‘कनक- शस्य’ का क्या अर्थ है?
(क) सोने के गहने
(ख) सुनहरी फसलें
(ग) कमल का फूल
(घ) सोने का पर्वत
उत्तर:
(ग) कमल का फूल
प्रश्न 3.
भारत माता के गले में ‘धवल धार हार’ किसे कहा गया है?
(क) मोतियों की माला को
(ख) हिमालय की बर्फ़ को
(ग) गंगा के ज्योतिर्मय जल को
(घ) फूलों के हार को
उत्तर:
(ग) गंगा के ज्योतिर्मय जल को
प्रश्न 4.
‘मुकुट शुभ्र हिम-तुषार’ पंक्ति में मुकुट किसे माना गया है?
(क) आकाश को
(ख) दक्षिण के सागर को
(ग) रत्नों को
(घ) हिमालय की बर्फ़ को
उत्तर:
(घ) हिमालय की बर्फ़ को
प्रश्न 5.
भारत माता के वस्त्र के रूप में किसे चित्रित किया गया है?
(क) रेशमी कपड़ों को
(ख) तरु, तृण, वन और लताओं को
(ग) बादलों को
(घ) गंगा की लहरों को
उत्तर:
(ख) तरु, तृण, वन और लताओं को
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दिए गए पद्यांशों और उन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरों को पढ़िए।
1. भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!
लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे! (पृष्ठ सं०- 167)
शब्दार्थ – भारत – सरस्वती, वाणी, वाणी की अधिष्ठात्री, भारतमाता, कनक – सोना, पलाश, चंपा। शस्य – फसल, खेती, अन्न धान्य, वृक्षों का फल, नई घास, कोमल तृण, सद्गुण। पदतल – तलवा, पैरों के नीचे। शतदल – कमल। गर्जितोर्मि – बादलों का गर्जन, गरजती तरंगों का शुचि – पवित्र, शुद्ध, निर्मल, साफ, निश्छल, निष्कपट, श्वेत, उजला। युगल – जोड़ा, युग्म। स्तव – प्रशंसा, स्तुति और स्तोत्र, एक पदार्थ।
भाव-सौंदर्य – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित इन पंक्तियों में भारत माता के वैभवशाली और दिव्य स्वरूप की स्तुति की गई है। कवि भारत माता (भारती) की वंदना करते हुए कहते हैं कि हे माँ! आपकी जय हो। आप अपनी संतानों को विजय प्रदान करने वाली हैं। आपके हाथों में ‘कनक शस्य’ यानी सोने के समान सुनहरी फसलें हैं। आपने अपने हाथों में कमल धारण किया हुआ है। यह पंक्ति भारत की कृषि संपन्नता और शांतिपूर्ण वैभव को दर्शाती है। भारत के भौगोलिक मानचित्र का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं कि दक्षिण दिशा में स्थित लंका आपके चरणों के नीचे एक ‘शतदल’ (सौ पंखुड़ियों वाले कमल) के समान सुशोभित है। विशाल समुद्र की गरजती हुई लहरें (गर्जितोर्मि) निरंतर उमड़ रही हैं, जबकि सागर की गरजती हुई लहरें निरंतर उनके पवित्र चरणों को धो रही हैं। यह संपूर्ण दृश्य ऐसा प्रतीत होता है कि मानो विशाल समुद्र अपनी गंभीर ध्वनि के माध्यम से माता की महिमा का बहु- अर्थपूर्ण और श्रद्धापूर्ण स्तुति गान कर रहा हो।
शिल्प-सौंदर्य-
1. तत्सम शब्दावली का प्रयोग किया गया है; जैसे- शस्य, पदतल, गर्जितोर्मि, शुचि।
2. अलंकार:
• मानवीकरण भारत माता को एक सजीव देवी के रूप में चित्रित किया गया है जिसके चरण समुद्र धो रहा है।
• रूपक – पदतल शतदल’ (चरणों के नीचे लंका को कमल के समान बताया गया है)।
• अनुप्रास – ‘कनक- शस्य कमलधरे’ (क वर्ण की आवृत्ति)।
3. प्रतीक – कनक शस्य (देश की समृद्धि का प्रतीक), सागर-जल (अटूट श्रद्धा और सेवा का प्रतीक)।
4. गेय (लयबद्ध) और संबोधन शैली का प्रयोग किया गया है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) ‘कनक-शस्य कमलधरे’ के माध्यम से कवि भारत माता की किस विशेषता को बता रहे हैं?
(i) भारत माता का स्नेह
(ii) भारत की कृषि समृद्धि और संपन्नता
(iii) भारत की धार्मिक कट्टरता
(iv) कमल के फूलों का व्यापारिक महत्त्व
उत्तर:
(ii) भारत की कृषि समृद्धि और संपन्नता
(ख) भारत माता के पवित्र चरणों को निरंतर कौन धो रहा है?
(i) गंगा का जल
(ii) हिमालय की बर्फ
(iii) समुद्र की गरजती हुई लहरें
(iv) लंका का जल
उत्तर:
(iii) समुद्र की गरजती हुई लहरें
(ग) ‘लंका पदतल शतदल’ में ‘पदतल’ और ‘शतदल’ के प्रयोग से क्या व्यंजित होता है?
(i) मानचित्र का आकार
(ii) सेना के सौ दल
(iii) चरणों में स्थित लंका
(iv) पैरों के नीचे की धूल
उत्तर:
(iii) चरणों में स्थित लंका
(घ) ‘शुचि चरण युगल’ में ‘शुचि’ शब्द का अर्थ और उसका संदर्भ क्या है?
(i) सफेद रंग – झाग
(ii) पवित्रता – चरणों का प्रक्षालन
(iii) लंबाई – तटरेखा
(iv) शीतलता – तापमान
उत्तर:
(ii) पवित्रता – चरणों का प्रक्षालन
(ङ) नीचे एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है। सही विकल्प चुनिए:
कथन (A) : निराला जी ने भारत माता के चरणों की स्थिति को भौगोलिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों में प्रस्तुत किया है।
कारण (R) : समुद्र की लहरें भारत माता के चरणों का प्रक्षालन (धोना) कर रही हैं और लंका उनके चरणों के नीचे कमल के समान सुशोभित है।
विकल्प-
(i) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
(iv) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर:
(i) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
2. तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन;
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले। (पृष्ठ सं०- 167)
शब्दार्थ – तरु – वृक्ष, पेड़। तृण – तिनका घास, खर-पात। लता – जमीन या किसी आधार पर फैलने वाला पौधा, वल्लरी, बेल । वसन – वस्त्र, आवरण, निवास, मूर्ति प्रतिमा। अंचल – देश का प्रांत – भाग, आँचल, कोना, तट, किनारा वस्त्र का छोर। खचित – चिह्नित अंकित, जड़ा हुआ, आबद्ध। सुमन – पुष्प, फूल, गेहूँ, मनोहर, सुंदर। धवल – सफेद श्वेत, स्वच्छ, निर्मल, सुंदर। ज्योतिर्जल – प्रकाश, रोशनी, लौ, सूर्य नक्षत्र, अग्नि। धार – जोर की वर्षा धारा के रूप में बरसना।
भाव-सौंदर्य – इन पंक्तियों में कवि ने भारत माता की सुंदरता और पवित्रता का अत्यंत मनोहारी चित्र प्रस्तुत किया है । कवि कहते हैं कि भारत भूमि पर फैले हुए अनगिनत वृक्ष (तरु), तिनके या घास (तृण), सघन जंगल और बेलें (लता) भारत माता के वस्त्र (वसन) के समान हैं। पूरी हरियाली माँ के शरीर को ढँकने वाले सुंदर परिधान की तरह सुशोभित है। उनके इस विशाल प्राकृतिक आँचल में खिले हुए रंग-बिरंगे फूल (सुमन) ऐसे प्रतीत होते हैं, मानो वे वस्त्र पर जड़े हुए (खचित) कीमती रत्न या सितारे हों। वहीं माँ के गले में बहती हुई गंगा की पवित्र धारा एक दिव्य हार के समान है। गंगा का वह प्रकाशमय जल (ज्योतिर्जल) और उसकी सफ़ेद धारा (धवल धार) ऐसी लगती है मानो माँ ने अपने गले में मोतियों का चमकता हुआ हार धारण कर रखा हो। इस प्रकार, कवि ने भारत को एक सजी-धजी देवी के रूप में चित्रित करते हुए उसकी प्राकृतिक संपदा और पवित्रता का सुंदर वर्णन किया है।
शिल्प-सौंदर्य-
1. पद्यांश में ‘तरु’, ‘तृण’, ‘वसन’, ‘खचित’, ‘ज्योतिर्जल’ और ‘धवल’ जैसे तत्सम शब्दों का सुंदर प्रयोग है।
2. शब्दों के चयन से आँखों के सामने भारत माता का एक भव्य चित्र अंकित हो जाता है।
3. अलंकार
• मानवीकरण अलंकार पूरी प्रकृति (वृक्ष, लता, गंगा) को भारत माता के वस्त्रों और आभूषणों के रूप में दिखाया गया है।
• रूपक अलंकार – ‘वन लता वसन’ (वन और लताओं रूपी वस्त्र)। ‘धवल धार हार’ (गंगा की श्वेत धारा रूपी हार)।
• अनुप्रास अलंकार – ‘धवल धार’ में ‘ध’ वर्ण की आवृत्ति से भाषाई लय उत्पन्न हुई है।
4. यह एक गेय पद है। इसमें तुकांतता (सुमन वसन, कण-क्षण) और निश्चित लयबद्धता है, जिसके कारण इसे सुगमता से गाया जा सकता है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) “तरु-तृण-वन-लता वसन” पंक्ति में ‘वसन’ शब्द का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(i) भारत के नागरिकों के वस्त्र
(ii) वनों में उगने वाले विशेष पौधे
(iii) धरती पर फैली हरियाली जो वस्त्र के समान प्रतीत होती है
(iv) ऋषि-मुनियों के वस्त्र
उत्तर:
(iii) धरती पर फैली हरियाली जो वस्त्र के समान प्रतीत होती है
(ख) कवि ने भारत माता के गले का ‘हार’ किसे माना है?
(i) हिमालय की पर्वतमाला को
(ii) फूलों की माला को
(iii) गंगा की धवल धारा को
(iv) दक्षिण के समुद्र को
उत्तर:
(iii) गंगा की धवल धारा को
(ग) ‘अंचल में खचित सुमन’ का भावार्थ क्या है?
(i) आँचल में फूल रखे हुए हैं
(ii) धरती रूपी आँचल में फूल जड़े हुए प्रतीत होते हैं
(iii) फूल केवल जंगलों में उगते हैं
(iv) आँचल फूलों से भर गया है
उत्तर:
(ii) धरती रूपी आँचल में फूल जड़े हुए प्रतीत होते हैं
(घ) इस काव्यांश में मुख्य रूप से किसका वर्णन है?
(i) भारत की आर्थिक स्थिति का
(ii) भारत माता के प्राकृतिक श्रृंगार का
(iii) विदेशी आक्रमणों का
(iv) भारत की आधुनिक तकनीक का
उत्तर:
(ii) भारत माता के प्राकृतिक श्रृंगार का
(ङ) नीचे एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है। सही विकल्प चुनिए।
कथन (A) : निराला जी ने भारत भूमि की हरियाली को भारत माता के आभूषणों के रूप में चित्रित किया है।
कारण (R) : कवि ने ‘तरु-तृण-वन-लता’ जैसे प्राकृतिक तत्वों का मानवीकरण किया है।
विकल्प-
(i) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(iii) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
(iv) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर:
(iv) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
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3. मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतुमख-शतरव-मुखरे! (पृष्ठ सं०- 167)
शब्दार्थ – शुभ्र – उज्ज्वल, चमकीला, सफेद, श्वेतवर्ण, सफेद रंग, चाँदी, हिम – शीतल बर्फ, पाला, हिमालय पर्वत, चंदन चंद्रमा। तुषार – बर्फ, हिम, हवा में मिली भाप जो जमकर श्वेत कणों के रूप में पृथ्वी पर गिरती है। प्राण – वायु, साँस, बल, जीवन। प्रणव – ओंकार, परमेश्वर, ढोल। ओंकार – ‘ओम्’ मंत्र या इसका उच्चारण, आरंभ। उदार – दानशील, दयालु। शतमुख – सौ मुख। शतरव – सौ की संख्या में ध्वनि, शब्द शोर, गुँजार। मुखरे – बजता, शब्द करता हुआ, शोर करने वाला।
भाव-सौंदर्य – इन पंक्तियों में कवि भारत माता की महानता और आध्यात्मिक गौरव का चित्रण करते हैं। वे कहते हैं कि भारत माता के मस्तक पर हिमालय की सफेद और निर्मल बर्फ ( शुभ्र हिम-तुषार) एक दिव्य मुकुट के समान चमक रही है। हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत माता के गौरव का प्रतीक (मुकुट) है। ‘प्राण प्रणव ओंकार’ से आशय है कि भारत के ‘प्राण’ यानी उसकी आत्मा ‘प्रणव ओंकार’ है। ओंकार (ॐ) की ध्वनि समस्त ज्ञान और ब्रह्मांड का सार है, जो भारत की संस्कृति और यहाँ के जन-जीवन के कण-कण में व्याप्त है। आगे कवि कहते हैं कि भारत के ज्ञान, धर्म और उदारता की गूँज चारों दिशाओं में सुनाई दे रही है। भारत ने सदैव ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश दिया है, जिससे समस्त दिशाएँ गुंजायमान हैं। यहाँ की महानता का गान सौ-सौ मुखों से और सैकड़ों ध्वनियों (शतरव) के माध्यम से हो रहा है। पूरा विश्व भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता का बखान कर रहा है। इस प्रकार, इन पंक्तियों में भारत की भौगोलिक महानता और आध्यात्मिक श्रेष्ठता का सुंदर वर्णन किया गया है।
शिल्प-सौंदर्य –
1. ‘शुभ्र’, ‘हिम-तुषार’, ‘प्रणव’, ‘मुखरे’ जैसे शुद्ध तत्सम शब्दों का प्रयोग भाषा को गरिमापूर्ण और गंभीर बनाता है।
2. अलंकार
• मानवीकरण अलंकार – हिमालय को भारत माता के ‘मुकुट’ के रूप में और ओंकार की ध्वनि को उनके ‘प्राण’ के रूप में चित्रित कर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है।
• रूपक अलंकार – ‘हिम-तुषार मुकुट’ (बर्फ और ओस रूपी मुकुट)। ‘प्राण प्रणव ओंकार’ (ओंकार की ध्वनि ही जिनके प्राण हैं)।
• अनुप्रास अलंकार – ‘प्राण प्रणव’ और ‘शतमुख- शतरव’ में वर्णों की आवृत्ति से संगीतात्मकता आई है।
3. ‘ओंकार’ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जिसे भारत का प्राण बताया गया है।
4. पद गेय है और ‘ओंकार- उदार’ तथा ‘तुषार- ओंकार’ जैसे तुकांत शब्दों के प्रयोग से इसमें सुंदर प्रवाह है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
(क) कवि ने भारत माता के ‘मुकुट’ की उपमा किससे दी है?
(i) रत्नों से जड़े सोने के मुकुट से
(ii) गंगा की लहरों से
(iii) हिमालय की शुभ्र बर्फ से
(iv) दक्षिण के समुद्र से
उत्तर:
(iii) हिमालय की शुभ्र बर्फ से
(ख) ‘प्राण प्रणव ओंकार’ पंक्ति का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
(i) भारत में बहुत शोर होता है
(ii) भारत की आत्मा में ओंकार (ॐ) का पवित्र नाद समाया है
(iii) ओंकार केवल एक शब्द
(iv) भारत के लोग बहुत तेज बोलते हैं।
उत्तर:
(ii) भारत की आत्मा में ओंकार (ॐ) का पवित्र नाद समाया है
(ग) ‘उदार’ विशेषण का प्रयोग किसके लिए किया गया है और क्यों?
(i) दिशाओं के लिए, क्योंकि भारत का ज्ञान और संदेश सबके लिए कल्याणकारी है।
(ii) राजाओं के लिए, क्योंकि वे दान देते हैं
(iii) हिमालय के लिए, क्योंकि वह बहुत बड़ा है
(iv) समुद्र के लिए, क्योंकि उसका जल असीमित है
उत्तर:
(i) दिशाओं के लिए, क्योंकि भारत का ज्ञान और संदेश सबके लिए कल्याणकारी है।
(घ) इन पंक्तियों में भारत के किस स्वरूप का वर्णन किया गया है? –
(i) केवल भारत की प्राकृतिक सुंदरता का
(ii) भारत की सैन्य शक्ति का
(iii) भारत के आध्यात्मिक और गौरवशाली सांस्कृतिक स्वरूप का
(iv) भारत की गरीबी का
उत्तर:
(iii) भारत के आध्यात्मिक और गौरवशाली सांस्कृतिक स्वरूप का
(ङ) नीचे एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है। सही विकल्प चुनिए।
कथन (A) : हिमालय पर्वत भारत के गौरव का प्रतीक है।
कारण (R) : भारत की आत्मा में ‘ओंकार’ का नाद व्याप्त है और हिमालय की शुभ्रता उनके मुकुट के समान वैश्विक गौरव का प्रतीक है।
विकल्प-
(i) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है
(iii) (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
(iv) (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर:
(ii) (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है