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Class 9 Hindi झाँसी की रानी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 11 झाँसी की रानी Extra Question Answer
झाँसी की रानी Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रानी लक्ष्मीबाई के बचपन के खेल सामान्य बालिकाओं से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
सामान्य बालिकाएँ जहाँ गुड़िया और घर- घर जैसे खेलों में रुचि लेती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना, सैन्य घेराबंदी करना और दुर्ग तोड़ना थे। उन्हें बरछी, ढाल और कटार जैसे हथियार प्रिय थे।
प्रश्न 2.
राजा की मृत्यु के बाद डलहौजी क्यों प्रसन्न हुआ?
उत्तर:
लॉर्ड डलहौजी ‘हड़प नीति’ के माध्यम से उन राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाना चाहता था जिनका कोई उत्तराधि कारी न हो। राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु के कारण उसे झाँसी पर अधिकार करने का सुनहरा अवसर मिल गया, इसलिए वह प्रसन्न हुआ।
प्रश्न 3.
‘नागपूर के ज़ेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’ – पंक्ति कविता में किस संदर्भ में कही गई है?
उत्तर:
“नागपुर के जेवर ले लो, लखनऊ के नौलख हार” का अर्थ है कि अंग्रेजों ने भारतीय रियासतों की संपत्ति लूटकर उसे खुलेआम बेचने के लिए बाजार में भेज दिया था। इस पंक्ति में कवयित्री ने बताया है कि कैसे विदेशी शासकों ने भारतीय राजाओं और रानियों की कीमती वस्तुओं (जेवर, हार आदि) को नीलाम कर दिया।
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प्रश्न 4.
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
इसका आशय यह है कि 1857 की क्रांति में समाज के सभी वर्गों ने हिस्सा लिया था। जहाँ राजाओं और नवाबों (महलों) में असंतोष था, वहीं सामान्य जनता (झोंपड़ियों) में भी अंग्रेजों के विरुद्ध भारी आक्रोश था। आजादी की यह लड़ाई पूरे देश की एकजुट शक्ति का परिणाम थी।
प्रश्न 5.
क्रांति की आग भारत में किस प्रकार फैली?
उत्तर:
जब हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन था तथा उनके अत्याचारों से साधारण जनता कष्ट में थी और उनकी हरकतों से राजाओं तथा नवाबों का सम्मान मिट्टी में मिल रहा था। उनके प्रति देश भर में गहरा आक्रोश था। यह आक्रोश 1857 की क्रांति बनकर चारों ओर फूट पड़ा, जिसमें राजा-रंक सभी भागीदार रहे। महलों से लगी यह आग झोपड़ियों तक पहुँचकर भड़क उठी। हर देशवासी, चाहे वह गरीब रहा हो या अमीर, उसके हृदय से क्रांति की यह ज्वाला निकली थी।
प्रश्न 6.
रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों का सामना किस प्रकार किया? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई ने किसी वीर पुरुष की तरह डटकर अंग्रेजों का सामना किया। झाँसी के मैदान में उन्होंने लेफ्टिनेंट वॉकर को हराया। वह जख्मी होकर भाग खड़ा हुआ। उसके बाद 100 मील लगातार घोड़ा दौड़ाते हुए रानी लक्ष्मीबाई कालपी पहुँचीं। उनका घोड़ा थककर गिर पड़ा और मर गया। यमुना किनारे उन्होंने फिर से अंग्रेजों को हराया। विजयी रानी आगे बढ़ीं और उन्होंने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। इस बार जनरल स्मिथ सेना लेकर पहुँचा। रानी ने उसे भी हराया, पर पीछे से ह्यू रोज ने आकर उन्हें घेर लिया। रानी लड़ती हुई आगे बढ़ीं और दुश्मन की सेना पार कर गई लेकिन तभी सामने एक नाला आ गया। उनका नया घोड़ा उसे पार न कर सका और अंग्रेज़ घुड़सवारों ने उन्हें घेर लिया। अकेली रानी उनसे लड़ती रहीं। अंततः वे घायल होकर गिर पड़ीं और वीरगति को प्राप्त कर गई।
Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता का प्रतिपाद्य / मूल संवेदना अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता की मूल संवेदना देशभक्ति, वीरता, आत्मसम्मान और बलिदान की भावना से ओत-प्रोत है। रानी लक्ष्मीबाई के माध्यम से कवयित्री ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और अंग्रेजों के विरुद्ध उठ खड़े होने के साहस को दर्शाया है। कविता में रानी के अदम्य साहस, युद्ध कौशल और देश के लिए प्राण न्योछावर करने की भावना का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया गया है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि कैसे विदेशी शासन ने भारत के सम्मान और स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया, जिससे जन-जन में क्रांति की भावना जाग उठी। रानी लक्ष्मीबाई इस संघर्ष का प्रतीक बनकर सामने आती हैं, जो अन्याय के खिलाफ डटकर लड़ती हैं और अंततः वीरगति प्राप्त करती हैं। यह कविता पाठकों के हृदय में राष्ट्रप्रेम, त्याग और साहस की भावना जगाती है। साथ ही यह संदेश देती है कि स्वतंत्रता बहुत मूल्यवान है और इसे पाने तथा बनाए रखने के लिए बलिदान और संघर्ष आवश्यक है।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए, जिन्होंने उन्हें भारतीय इतिहास में अमर बना दिया?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व साहस, त्याग और देशभक्ति का अद्भुत मिश्रण है। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- साहसी और युद्ध-कुशल-लक्ष्मीबाई बचपन से ही शस्त्र संचालन और व्यूह रचना में निपुण थीं। उन्होंने केवल पुरुषों के समान युद्ध ही नहीं लड़ा, बल्कि अपनी सूझबूझ से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। लेफ्टिनेंट वॉकर जैसे कुशल योद्धा भी उनके सामने से घायल होकर भागने पर मजबूर हो गए।
- अजेय इच्छाशक्ति – राजा की मृत्यु और झाँसी पर अंग्रेज़ों के अधिकार के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शून्य से अपनी शक्ति संचित की और ‘मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी’ के संकल्प के साथ अंत तक संघर्ष किया।
- प्रेरणादायी नेतृत्व – उन्होंने न केवल स्वयं युद्ध किया, बल्कि अपनी सखियों (काना और मंदरा) और झाँसी की अन्य महिलाओं को भी सैन्य प्रशिक्षण देकर युद्ध के लिए तैयार किया। उनके आह्वान पर पूरी झाँसी उनके पीछे खड़ी हो गई।
- बलिदान की भावना – मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन गया, जिससे वे भारतीय इतिहास की एक अविस्मरणीय और अमर नायिका बन गईं।
प्रश्न 3.
‘झाँसी की रानी’ कविता के काव्य-सौंदर्य (भाव पक्ष और कला पक्ष) की सोदाहरण विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह कविता वीर रस की एक कालजयी रचना है। इसका काव्य-सौंदर्य निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-
1. भाव पक्ष-
- वीर रस की प्रधानता – पूरी कविता में उत्साह और वीरता का संचार है। रानी के युद्ध कौशल का वर्णन पाठकों के मन में जोश भर देता है।
उदाहरण – ‘चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी।’ - राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति – कवयित्री ने 1857 के संग्राम के माध्यम से देशप्रेम की भावना को जगाया है। कविता में केवल रानी ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की आजादी की तड़प दिखाई देती है।
- नारी शक्ति का चित्रण – रानी लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ कहकर कवयित्री ने नारी के सशक्त और साहसी रूप को प्रस्तुत किया है।
2. कला पक्ष-
- भाषा – कविता की भाषा सरल, सुबोध और ओजपूर्ण (शक्तिशाली) खड़ी बोली हिंदी है। इसमें तत्सम शब्दों (जैसे- भृकुटी, आराध्य, पुलकित) के साथ-साथ ओज गुण का सुंदर मिश्रण है।
- शैली – यह एक ‘आख्यानक गीत’ है, जिसमें रानी के जीवन की घटनाओं को कहानी के रूप में पिरोया गया है। इसकी लय और तुकबंदी इसे गेय (गाने योग्य) बनाती है।
- अलंकार – अनुप्रास अलंकार: “मुँह हमने सुनी कहानी” (म और ह वर्ण की आवृत्ति)।
- उपमा और रूपक – रानी को ‘वीरता की अवतार’ और ‘लक्ष्मी या दुर्गा’ कहकर उनकी तुलना दैवीय शक्तियों से की गई है।
- मानवीकरण – “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी” में भारत का मानवीकरण किया गया है।
- प्रतीक योजना – ‘काली घटा’ दुख और संकट का प्रतीक है, जबकि ‘तलवार’ वीरता का प्रतीक है। इस कविता का सौंदर्य इसकी सरलता और इसमें निहित ओज में है, जो आज भी हर भारतीय को प्रभावित करता है।
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Class 9 Ganga Chapter 11 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी’- यदि उस समय भारत की सभी रियासतें और राजा एक साथ मिलकर रानी लक्ष्मीबाई की तरह अंग्रेजों का विरोध करते, तो क्या भारत 1857 में ही आज़ाद हो सकता था? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
यह एक अत्यंत विचारणीय विषय है। यदि 1857 में सभी भारतीय रियासतें एकजुट हो जातीं, तो इतिहास की तसवीर कुछ और ही होती।
कविता में उल्लेख है कि कुछ राजवंशों ने “भृकुटी तानी थी”, लेकिन सच्चाई यह थी कि उस समय भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में बँटा था। कुछ राजा अंग्रेज़ों के डर से या अपने निजी स्वार्थ के कारण तटस्थ रहे या उनका साथ दिया। यदि रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरता और संकल्प सभी राजाओं में होता, तो अंग्रेजों की सैन्य शक्ति भारतीयों की विशाल जनसंख्या और एकता के सामने नहीं टिक पाती।
अंग्रेजों की जीत का मुख्य कारण उनकी ‘बाँटो और राज करो’ की नीति थी। यदि सभी वर्ग और शासक एक ही समय पर विद्रोह करते, तो अंग्रेज़ों को सँभलने का मौका नहीं मिलता और भारत 1947 के बजाय 1857 में ही स्वतंत्र हो सकता था।
भले ही वह विद्रोह सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने सिद्ध कर दिया कि रानी लक्ष्मीबाई जैसा निस्वार्थ नेतृत्व और सामूहिक संकल्प किसी भी बड़ी शक्ति को हिला सकता है।
अतः एकता की कमी ही वह मुख्य कारण थी जिसने आजादी को 90 साल आगे बढ़ा दिया। रानी का संघर्ष हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
प्रश्न 2.
‘झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष केवल एक राज्य को बचाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि वह औपनिवेशिक सत्ता (ब्रिटिश शासन) के विरुद्ध आत्म-सम्मान और राष्ट्रीय पहचान की घोषणा थी।’ इस कथन का विश्लेषण कविता में वर्णित उदाहरणों के माध्यम से कीजिए।
Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन् सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
(क) ‘बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी’ पंक्ति का क्या आशय है?
(i) भारत के सभी लोग युवा हो गए थे
(ii) गुलामी के कारण हताश हो चुके भारतीयों में आजादी के लिए नया जोश और उत्साह भर गया था
(iii) भारत की जनसंख्या अचानक बढ़ गई थी
(iv) भारत में नई सुख-सुविधाएँ आ गई थीं
(ख) पद्यांश के अनुसार, भारतवासियों ने मन में क्या संकल्प लिया था?
(i) अंग्रेजों (फिरंगियों) को भारत से बाहर निकालने का
(ii) व्यापार को बढ़ाने का
(iii) नए हथियार खरीदने का
(iv) अंग्रेज़ों से संधि करने का
(ग) ‘सन् सत्तावन’ (1857) की तलवार को ‘पुरानी’ क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि वह लोहे की बनी थी
(ii) क्योंकि वह बहुत जंग लगी हुई थी
(iii) क्योंकि भारत की वीरता और शौर्य की परंपरा बहुत प्राचीन (पुरानी) है
(iv) क्योंकि वह तलवार रानी के पूर्वजों की थी
(घ) कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ कहकर क्यों संबोधित किया है?
(i) क्योंकि वे पुरुषों के कपड़े पहनती थीं
(ii) क्योंकि उन्होंने युद्ध के मैदान में पुरुषों के समान अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था
(iii) क्योंकि वे पुरुषों से बात करती थीं
(iv) क्योंकि उनके पास बहुत बड़ी सेना थी
(ङ) यह कविता मुख्य रूप से किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत करती है?
(i) असहयोग आंदोलन
(ii) भारत छोड़ो आंदोलन
(iii) 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
(iv) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
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निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में
प्रश्न 1.
लक्ष्मीबाई बचपन में कौन-कौन से खेल खेलती थीं?
प्रश्न 2.
डलहौजी को झाँसी हड़पने का मौका कैसे मिला?
प्रश्न 3.
अंग्रेजी शासन में बेगमों और रानियों की क्या दशा हो गई थी?
प्रश्न 4.
‘मनुज नहीं अवतारी थी’ – रानी लक्ष्मीबाई के बारे में ऐसा क्यों कहा गया है?