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Class 9 Hindi झाँसी की रानी Extra Question Answer
Class 9 Hindi Chapter 11 झाँसी की रानी Extra Question Answer
झाँसी की रानी Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
रानी लक्ष्मीबाई के बचपन के खेल सामान्य बालिकाओं से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
सामान्य बालिकाएँ जहाँ गुड़िया और घर- घर जैसे खेलों में रुचि लेती थीं, वहीं लक्ष्मीबाई के प्रिय खेल नकली युद्ध करना, व्यूह की रचना करना, सैन्य घेराबंदी करना और दुर्ग तोड़ना थे। उन्हें बरछी, ढाल और कटार जैसे हथियार प्रिय थे।
प्रश्न 2.
राजा की मृत्यु के बाद डलहौजी क्यों प्रसन्न हुआ?
उत्तर:
लॉर्ड डलहौजी ‘हड़प नीति’ के माध्यम से उन राज्यों को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाना चाहता था जिनका कोई उत्तराधि कारी न हो। राजा गंगाधर राव की निःसंतान मृत्यु के कारण उसे झाँसी पर अधिकार करने का सुनहरा अवसर मिल गया, इसलिए वह प्रसन्न हुआ।
प्रश्न 3.
‘नागपूर के ज़ेवर ले लो’ ‘लखनऊ के लो नौलख हार’ – पंक्ति कविता में किस संदर्भ में कही गई है?
उत्तर:
“नागपुर के जेवर ले लो, लखनऊ के नौलख हार” का अर्थ है कि अंग्रेजों ने भारतीय रियासतों की संपत्ति लूटकर उसे खुलेआम बेचने के लिए बाजार में भेज दिया था। इस पंक्ति में कवयित्री ने बताया है कि कैसे विदेशी शासकों ने भारतीय राजाओं और रानियों की कीमती वस्तुओं (जेवर, हार आदि) को नीलाम कर दिया।
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प्रश्न 4.
“महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी” पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर:
इसका आशय यह है कि 1857 की क्रांति में समाज के सभी वर्गों ने हिस्सा लिया था। जहाँ राजाओं और नवाबों (महलों) में असंतोष था, वहीं सामान्य जनता (झोंपड़ियों) में भी अंग्रेजों के विरुद्ध भारी आक्रोश था। आजादी की यह लड़ाई पूरे देश की एकजुट शक्ति का परिणाम थी।
प्रश्न 5.
क्रांति की आग भारत में किस प्रकार फैली?
उत्तर:
जब हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन था तथा उनके अत्याचारों से साधारण जनता कष्ट में थी और उनकी हरकतों से राजाओं तथा नवाबों का सम्मान मिट्टी में मिल रहा था। उनके प्रति देश भर में गहरा आक्रोश था। यह आक्रोश 1857 की क्रांति बनकर चारों ओर फूट पड़ा, जिसमें राजा-रंक सभी भागीदार रहे। महलों से लगी यह आग झोपड़ियों तक पहुँचकर भड़क उठी। हर देशवासी, चाहे वह गरीब रहा हो या अमीर, उसके हृदय से क्रांति की यह ज्वाला निकली थी।
प्रश्न 6.
रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ों का सामना किस प्रकार किया? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई ने किसी वीर पुरुष की तरह डटकर अंग्रेजों का सामना किया। झाँसी के मैदान में उन्होंने लेफ्टिनेंट वॉकर को हराया। वह जख्मी होकर भाग खड़ा हुआ। उसके बाद 100 मील लगातार घोड़ा दौड़ाते हुए रानी लक्ष्मीबाई कालपी पहुँचीं। उनका घोड़ा थककर गिर पड़ा और मर गया। यमुना किनारे उन्होंने फिर से अंग्रेजों को हराया। विजयी रानी आगे बढ़ीं और उन्होंने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया। इस बार जनरल स्मिथ सेना लेकर पहुँचा। रानी ने उसे भी हराया, पर पीछे से ह्यू रोज ने आकर उन्हें घेर लिया। रानी लड़ती हुई आगे बढ़ीं और दुश्मन की सेना पार कर गई लेकिन तभी सामने एक नाला आ गया। उनका नया घोड़ा उसे पार न कर सका और अंग्रेज़ घुड़सवारों ने उन्हें घेर लिया। अकेली रानी उनसे लड़ती रहीं। अंततः वे घायल होकर गिर पड़ीं और वीरगति को प्राप्त कर गई।
Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Questions and Answers दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘झाँसी की रानी’ कविता का प्रतिपाद्य / मूल संवेदना अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कविता की मूल संवेदना देशभक्ति, वीरता, आत्मसम्मान और बलिदान की भावना से ओत-प्रोत है। रानी लक्ष्मीबाई के माध्यम से कवयित्री ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और अंग्रेजों के विरुद्ध उठ खड़े होने के साहस को दर्शाया है। कविता में रानी के अदम्य साहस, युद्ध कौशल और देश के लिए प्राण न्योछावर करने की भावना का अत्यंत प्रभावशाली चित्रण किया गया है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि कैसे विदेशी शासन ने भारत के सम्मान और स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास किया, जिससे जन-जन में क्रांति की भावना जाग उठी। रानी लक्ष्मीबाई इस संघर्ष का प्रतीक बनकर सामने आती हैं, जो अन्याय के खिलाफ डटकर लड़ती हैं और अंततः वीरगति प्राप्त करती हैं। यह कविता पाठकों के हृदय में राष्ट्रप्रेम, त्याग और साहस की भावना जगाती है। साथ ही यह संदेश देती है कि स्वतंत्रता बहुत मूल्यवान है और इसे पाने तथा बनाए रखने के लिए बलिदान और संघर्ष आवश्यक है।
प्रश्न 2.
रानी लक्ष्मीबाई के चरित्र की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए, जिन्होंने उन्हें भारतीय इतिहास में अमर बना दिया?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व साहस, त्याग और देशभक्ति का अद्भुत मिश्रण है। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- साहसी और युद्ध-कुशल-लक्ष्मीबाई बचपन से ही शस्त्र संचालन और व्यूह रचना में निपुण थीं। उन्होंने केवल पुरुषों के समान युद्ध ही नहीं लड़ा, बल्कि अपनी सूझबूझ से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। लेफ्टिनेंट वॉकर जैसे कुशल योद्धा भी उनके सामने से घायल होकर भागने पर मजबूर हो गए।
- अजेय इच्छाशक्ति – राजा की मृत्यु और झाँसी पर अंग्रेज़ों के अधिकार के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने शून्य से अपनी शक्ति संचित की और ‘मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी’ के संकल्प के साथ अंत तक संघर्ष किया।
- प्रेरणादायी नेतृत्व – उन्होंने न केवल स्वयं युद्ध किया, बल्कि अपनी सखियों (काना और मंदरा) और झाँसी की अन्य महिलाओं को भी सैन्य प्रशिक्षण देकर युद्ध के लिए तैयार किया। उनके आह्वान पर पूरी झाँसी उनके पीछे खड़ी हो गई।
- बलिदान की भावना – मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन गया, जिससे वे भारतीय इतिहास की एक अविस्मरणीय और अमर नायिका बन गईं।
प्रश्न 3.
‘झाँसी की रानी’ कविता के काव्य-सौंदर्य (भाव पक्ष और कला पक्ष) की सोदाहरण विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह कविता वीर रस की एक कालजयी रचना है। इसका काव्य-सौंदर्य निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-
1. भाव पक्ष-
- वीर रस की प्रधानता – पूरी कविता में उत्साह और वीरता का संचार है। रानी के युद्ध कौशल का वर्णन पाठकों के मन में जोश भर देता है।
उदाहरण – ‘चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी।’ - राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति – कवयित्री ने 1857 के संग्राम के माध्यम से देशप्रेम की भावना को जगाया है। कविता में केवल रानी ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की आजादी की तड़प दिखाई देती है।
- नारी शक्ति का चित्रण – रानी लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ कहकर कवयित्री ने नारी के सशक्त और साहसी रूप को प्रस्तुत किया है।
2. कला पक्ष-
- भाषा – कविता की भाषा सरल, सुबोध और ओजपूर्ण (शक्तिशाली) खड़ी बोली हिंदी है। इसमें तत्सम शब्दों (जैसे- भृकुटी, आराध्य, पुलकित) के साथ-साथ ओज गुण का सुंदर मिश्रण है।
- शैली – यह एक ‘आख्यानक गीत’ है, जिसमें रानी के जीवन की घटनाओं को कहानी के रूप में पिरोया गया है। इसकी लय और तुकबंदी इसे गेय (गाने योग्य) बनाती है।
- अलंकार – अनुप्रास अलंकार: “मुँह हमने सुनी कहानी” (म और ह वर्ण की आवृत्ति)।
- उपमा और रूपक – रानी को ‘वीरता की अवतार’ और ‘लक्ष्मी या दुर्गा’ कहकर उनकी तुलना दैवीय शक्तियों से की गई है।
- मानवीकरण – “बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी” में भारत का मानवीकरण किया गया है।
- प्रतीक योजना – ‘काली घटा’ दुख और संकट का प्रतीक है, जबकि ‘तलवार’ वीरता का प्रतीक है। इस कविता का सौंदर्य इसकी सरलता और इसमें निहित ओज में है, जो आज भी हर भारतीय को प्रभावित करता है।
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Class 9 Ganga Chapter 11 Extra Question Answer दक्षता आधारित प्रश्नोत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रश्न 1.
‘दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी’- यदि उस समय भारत की सभी रियासतें और राजा एक साथ मिलकर रानी लक्ष्मीबाई की तरह अंग्रेजों का विरोध करते, तो क्या भारत 1857 में ही आज़ाद हो सकता था? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
यह एक अत्यंत विचारणीय विषय है। यदि 1857 में सभी भारतीय रियासतें एकजुट हो जातीं, तो इतिहास की तसवीर कुछ और ही होती।
कविता में उल्लेख है कि कुछ राजवंशों ने “भृकुटी तानी थी”, लेकिन सच्चाई यह थी कि उस समय भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में बँटा था। कुछ राजा अंग्रेज़ों के डर से या अपने निजी स्वार्थ के कारण तटस्थ रहे या उनका साथ दिया। यदि रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरता और संकल्प सभी राजाओं में होता, तो अंग्रेजों की सैन्य शक्ति भारतीयों की विशाल जनसंख्या और एकता के सामने नहीं टिक पाती।
अंग्रेजों की जीत का मुख्य कारण उनकी ‘बाँटो और राज करो’ की नीति थी। यदि सभी वर्ग और शासक एक ही समय पर विद्रोह करते, तो अंग्रेज़ों को सँभलने का मौका नहीं मिलता और भारत 1947 के बजाय 1857 में ही स्वतंत्र हो सकता था।
भले ही वह विद्रोह सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने सिद्ध कर दिया कि रानी लक्ष्मीबाई जैसा निस्वार्थ नेतृत्व और सामूहिक संकल्प किसी भी बड़ी शक्ति को हिला सकता है।
अतः एकता की कमी ही वह मुख्य कारण थी जिसने आजादी को 90 साल आगे बढ़ा दिया। रानी का संघर्ष हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
प्रश्न 2.
‘झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष केवल एक राज्य को बचाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि वह औपनिवेशिक सत्ता (ब्रिटिश शासन) के विरुद्ध आत्म-सम्मान और राष्ट्रीय पहचान की घोषणा थी।’ इस कथन का विश्लेषण कविता में वर्णित उदाहरणों के माध्यम से कीजिए।
झाँसी की रानी Extra Questions काव्यबोध पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी’ पंक्ति के माध्यम से कवयित्री क्या कहना चाहती हैं?
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय है कि लंबे समय की गुलामी, निराशा और शिथिलता के कारण भारत एक ऐसे वृद्ध के समान हो गया था, जिसमें शक्ति शेष नहीं थी। किंतु 1857 के विद्रोह ने भारतीयों के भीतर स्वतंत्रता की सोई हुई चेतना को पुनः जीवित कर दिया।
रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं के साहस ने पूरे देश में नए उत्साह, जोश और ऊर्जा का संचार कर दिया, जिससे भारत पुनः संघर्ष के लिए खड़ा हो उठा। यह पंक्ति राष्ट्रीय पुनर्जागरण का प्रतीक है।
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई के बचपन की ‘सहेलियाँ’ सामान्य बालिकाओं से भिन्न कैसे थीं?
उत्तर:
साधारण बालिकाएँ बचपन में गुड़िया, घर-घर और कोमल खिलौनों के साथ खेलती हैं, किंतु लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व बचपन से ही शौर्यपूर्ण था। उनकी सहेलियाँ सखियाँ नहीं बल्कि बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे अस्त्र-शस्त्र थे। वे युद्ध कला के खेल खेलती थीं और व्यूह रचना में निपुण थीं। यह दर्शाता है कि उनका पालन-पोषण एक कोमल राजकुमारी के बजाय एक वीर योद्धा के रूप में हुआ था, जिसने उनके भविष्य के नेतृत्व की नींव रखी।
प्रश्न 3.
राजा गंगाधर राव की मृत्यु पर डलहौजी की प्रसन्नता का क्या राजनैतिक कारण था?
उत्तर:
डलहौजी की प्रसन्नता का कारण उसकी कुटिल ‘हड़प नीति’ थी। उस समय के ब्रिटिश नियम के अनुसार, यदि कोई राजा बिना उत्तराधिकारी (निःसंतान) मर जाता था, तो उसका राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था।
राजा गंगाधर राव निःसंतान मरे थे, जिसे डलहौजी ने झाँसी पर कब्जा करने का एक सुनहरा अवसर माना। उसकी यह प्रसन्नता उसकी साम्राज्यवादी भूख और संवेदनहीनता को प्रकट करती है।
प्रश्न 4.
‘परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी’ पंक्ति किस सामाजिक और मानसिक पीड़ा को व्यक्त करती है?
उत्तर:
यह पंक्ति उस समय की भारतीय नारी की मान मर्यादा और स्वाभिमान पर हुए आघात को व्यक्त करती है। भारतीय संस्कृति में राजघरानों की स्त्रियाँ परदे (मर्यादा) में रहती थीं।
जब अंग्रेजों ने उनके कीमती आभूषण और कपड़े कलकत्ता के बाजारों में सरेआम नीलाम किए तो वह केवल संपत्ति की लूट नहीं थी, बल्कि पूरे राष्ट्र के सम्मान की नीलामी थी। यह अंग्रेजों की अत्यंत क्रूर और अपमानजनक मानसिकता का चित्रण है।
प्रश्न 5.
लेफ्टिनेंट वॉकर को ‘अजब हैरानी’ क्यों हुई?
उत्तर:
वॉकर को हैरानी इसलिए हुई, क्योंकि उसने एक महिला (रानी लक्ष्मीबाई) के इतने प्रचंड युद्ध कौशल और पराक्रम की कल्पना नहीं की थी। युद्ध के मैदान में रानी ने ‘मर्दों’ के बीच एक वीर योद्धा बनकर जिस गति से तलवार चलाई और वॉकर को घायल कर भागने पर मजबूर किया, वह उसके लिए अविश्वसनीय था। उसकी हैरानी रानी की अद्वितीय सैन्य निपुणता और उनके अजेय साहस की स्वीकृति थी।
प्रश्न 6.
रानी के अंतिम युद्ध में ‘नया घोड़ा’ अड़ जाना नियति की क्रूरता को कैसे दर्शाता है?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस दिखाते हुए अंग्रेज सेना को चीर दिया था,
किंतु अंत में एक नाला सामने आने पर उनका नया घोड़ा अड़ गया। पुराना घोड़ा पहले ही वीरगति पा चुका था। यदि घोड़ा नाला पार कर जाता, तो रानी सुरक्षित निकल सकती थीं। नियति की क्रूरता यहाँ स्पष्ट है कि जिस वीरांगना को शत्रु सेना नहीं हरा सकी, उसे एक छोटी सी भौगोलिक बाधा और एक अनजान पशु की अड़चन ने शत्रुओं के घेरे में डाल दिया। यह घटना अत्यंत मार्मिक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
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प्रश्न 7.
‘तेरा स्मारक तू ही होगी’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का आशय है कि रानी लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व और उनके कार्य इतने महान हैं कि उन्हें याद रखने के लिए पत्थर या ईंटों से बने किसी निर्जीव स्मारक की आवश्यकता नहीं है। उनकी वीरता की गाथाएँ और उनका बलिदान ही उनका सबसे बड़ा और अमिट स्मारक है। वे स्वयं अपनी पहचान हैं। जब तक इतिहास में साहस और देशभक्ति का नाम लिया जाएगा, रानी का नाम स्वतः जीवित रहेगा।
प्रश्न 8.
कविता में ‘बुंदेले हरबोलों’ की क्या भूमिका है?
उत्तर:
‘बुंदेले हरबोले’ बुंदेलखंड के वे लोक गायक हैं, जो घर-घर जाकर वीरों की गाथाएँ सुनाते थे। कवयित्री ने उनका उल्लेख यह बताने के लिए किया है कि रानी की वीरता केवल इतिहास की पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आम जनता की मौखिक परंपरा और लोक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। इनके माध्यम से रानी की वीरता की कहानी जन-जन तक पहुँची और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
प्रश्न 9.
रानी लक्ष्मीबाई को ‘स्वतंत्रता अविनाशी’ जगाने वाली क्यों कहा गया है?
उत्तर:
रानी का बलिदान एक ऐसी ज्योति है, जो कभी बुझ नहीं सकती (अविनाशी)। यद्धपि वे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुई, किंतु उनका साहस भारतीयों के मन में आजादी की ऐसी भूख जगा गया, जिसे अंग्रेज दमन से नहीं मिटा सके। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, बल्कि उसने आने वाले स्वतंत्रता संग्राम के लिए करोड़ों भारतीयों को मर मिटने की प्रेरणा दी। इसीलिए उन्हें कभी न नष्ट होने वाली स्वतंत्रता की चेतना का प्रतीक माना गया है।
प्रश्न 10.
रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध भूमि में ‘सिंहनी’ की भाँति व्यवहार किया, उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जिस प्रकार एक सिंहनी अकेले ही शिकारियों के झुंड से भिड़ जाती है, वैसे ही रानी ने अंतिम युद्ध में अकेले होते हुए भी सैकड़ों अंग्रेज सैनिकों का सामना किया। ‘वार पर वार’ सहते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी और शत्रुओं को मार-काटकर पार निकल गईं। गिरते समय भी उनकी गरिमा और साहस एक शेरनी की तरह अजेय बना रहा, जो वीरगति को भी उत्सव मानती है।
प्रश्न 11.
रानी लक्ष्मीबाई की ‘वीर-गति’ को गौरवशाली क्यों माना गया है?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई की ‘वीरगति’ को गौरवशाली इसलिए माना गया है, क्योंकि उन्होंने अपने प्राणों की चिंता किए बिना मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष किया। वे केवल तेइस वर्ष की अल्पायु में ही अदम्य साहस, नेतृत्व और देशभक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए रणभूमि में शहीद हुईं। उनका बलिदान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए था। उन्होंने भारतीयों के भीतर स्वतंत्रता की चेतना जगाई और आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष का मार्ग दिखाया। इसलिए उनका बलिदान प्रेरणा, साहस और राष्ट्रप्रेम का अमर प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न 12.
‘मदमाती विजय’ शब्द के माध्यम से अंग्रेजों पर क्या कटाक्ष किया गया है?
उत्तर:
‘मदमाती विजय’ शब्द के माध्यम से कवयित्री ने अंग्रेजों के अहंकार और क्रूरता पर तीखा कटाक्ष किया है। इसका आशय है कि अंग्रेज अपनी सैन्य शक्ति और लगातार मिल रही सफलताओं के कारण घमंड में चूर हो गए थे।
वे अपनी विजय के नशे में इतने डूब गए थे कि भारतीयों की भावनाओं, संस्कृति और सम्मान की परवाह नहीं करते थे। वे राज्यों पर अधिकार करके और अत्याचार करके स्वयं को अजेय समझने लगे थे। इस प्रकार, यह शब्द अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण नीति और उनके अहंकारी व्यवहार की आलोचना करता है।
प्रश्न 13.
रानी के बलिदान ने ‘इतिहास’ और ‘सच्चाई’ के बीच क्या संबंध स्थापित किया?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान ने इतिहास और सच्चाई के बीच गहरा और स्थायी संबंध स्थापित किया। कवयित्री का आशय है कि भले ही तत्कालीन इतिहासकारों या विजेताओं (अंग्रेजों) ने उनके त्याग को दबाने या गलत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया हो, फिर भी उनकी वीरता और राष्ट्रप्रेम की सच्चाई कभी मिट नहीं सकती। उनका बलिदान इतना महान था कि वह जनमानस की स्मृति में अमर हो गया। इस प्रकार, इतिहास चाहे मौन हो जाए, पर सत्य सदैव जीवित रहता है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहता है।
प्रश्न 14.
लक्ष्मीबाई के ‘नेतृत्व’ में विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोग कैसे एकजुट हुए?
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई के प्रभावशाली नेतृत्व, साहस और राष्ट्रप्रेम ने विभिन्न धर्मों
और वर्गों के लोगों को एकजुट कर दिया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को केवल झाँसी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन-जन का संघर्ष बना दिया। उनके साथ हिंदू, मुसलमान, सैनिक, किसान, राजपूत, मराठा तथा सामान्य जनता सभी ने मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया।
नाना साहब, ताँत्या टोपे, अज़ीमुल्ला खाँ जैसे वीरों का सहयोग इस एकता का प्रमाण है। लक्ष्मीबाई ने अपने साहस और त्याग से लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाई और सबको एक सूत्र में बाँधकर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
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प्रश्न 15.
‘स्वतंत्रता की अविनाशी लौ’ से कवयित्री का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘स्वतंत्रता की अविनाशी लौ’ से तात्पर्य उस कभी न मिटने वाली वैचारिक चेतना से है, जिसे रानी ने अपने बलिदान से प्रज्वलित किया था। यद्यपि रानी वीरगति को प्राप्त हुईं, परंतु उनके द्वारा जगाई गई आजादी की भूख को भी नहीं दबाया जा सकता। यह लौ एक ऐसी अमिट प्रेरणा बनी, जिसने आने वाले समय में करोड़ों भारतीयों को संगठित किया और अंततः वर्ष 1947 में भारत की पूर्ण स्वतंत्रता का आधार बनी।
प्रश्न 16.
कविता के अंत में कवयित्री ने ‘कृतज्ञ भारतवासी’ क्यों कहा?
उत्तर:
कविता के अंत में कवयित्री ने भारतीयों को ‘कृतज्ञ भारतवासी’ इसलिए कहा है, क्योंकि रानी लक्ष्मीबाई ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना अमूल्य जीवन बलिदान कर दिया था। उनका त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
उनके बलिदान ने देशवासियों में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और राष्ट्रीय स्वाभिमान को मजबूत किया। इसलिए भारतवासी उनके इस महान योगदान के प्रति सदैव ऋणी और आभारी रहेंगे। इस भाव को व्यक्त करने के लिए कवयित्री ने ‘कृतज्ञ भारतवासी’ शब्द का प्रयोग किया है।
प्रश्न 17.
क्या रानी लक्ष्मीबाई को केवल एक ‘विद्रोही’ कहना उचित है? ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई को केवल एक ‘विद्रोही’ कहना उचित नहीं है, क्योंकि उनका संघर्ष व्यक्तिगत सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, स्वाभिमान और न्याय की रक्षा के लिए था। ‘झाँसी की रानी’ कविता में उनका व्यक्तित्व एक वीरांगना, राष्ट्रनायिका और स्वतंत्रता चेतना की प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है।
जब अंग्रेजों ने “लावारिस का वारिस बनकर” झाँसी पर अधिकार कर लिया, तब रानी ने इस अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का रास्ता अपनाया । उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध साहसपूर्वक युद्ध किया और विभिन्न वर्गों के लोगों को संगठित कर राष्ट्रीय संघर्ष का नेतृत्व किया। इसलिए उन्हें केवल विद्रोही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की महान नायिका और प्रेरणास्रोत कहना अधिक उचित है।
प्रश्न 18.
‘झाँसी की रानी’ कविता का ‘शीर्षक’ उसकी पूरी कथावस्तु को कैसे न्याय प्रदान करता है?
उत्तर:
‘झाँसी की रानी’ शीर्षक पूरी कविता का केंद्रबिंदु है। यह शीर्षक सुनते ही एक ऐसी वीरांगना की छवि उभरती है, जिसका संपूर्ण जीवन अपनी मिट्टी (झाँसी) को समर्पित था।
यह शीर्षक उनके व्यक्तिगत नाम से ऊपर उठकर उनके कर्त्तव्य, त्याग और शौर्य को प्रधानता देता है। यह झाँसी के उत्थान, पतन और फिर रानी के माध्यम से उसके गौरवशाली संघर्ष की पूरी गाथा को एक सूत्र में पिरोकर पूर्ण न्याय प्रदान करता है।
प्रश्न 19.
‘वीरता की वैभव के साथ सगाई’ पंक्ति के माध्यम से कवयित्री क्या संकेत देना चाहती हैं?
उत्तर:
यहाँ ‘वीरता’ रानी लक्ष्मीबाई का प्रतीक है और ‘वैभव’ झाँसी के राजा गंगाधर राव का। कवयित्री का संकेत यह है कि लक्ष्मीबाई का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि यह सामर्थ्य और सत्ता का एक अद्भुत संगम था। यह विवाह झाँसी के गौरव को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला था, जहाँ एक साहसी योद्धा का जुड़ाव एक समृद्ध राज्य के साथ हुआ था।
प्रश्न 20.
‘झाँसी की रानी’ इस कविता का प्रतिपाद्य क्या है?
उत्तर:
‘झाँसी की रानी’ कविता का प्रतिपाद्य रानी लक्ष्मीबाई की अदम्य वीरता, राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमर योगदान का प्रभावशाली चित्रण करना है। इस कविता में कवयित्री ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए यह बताया है कि किस प्रकार अंग्रेजों के अत्याचारों के विरुद्ध पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना जाग उठी। रानी लक्ष्मीबाई को केवल एक शासक के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की प्रेरणास्रोत वीरांगना के रूप में चित्रित किया गया है, जिन्होंने अल्पायु में ही मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। कविता में उनके साहस, नेतृत्व, त्याग और संघर्षशील व्यक्तित्व को अत्यंत प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही यह कविता देशवासियों में देशभक्ति, आत्मगौरव और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की भावना जागृत करने का संदेश देती है।
प्रश्न 21.
लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व में ‘पारंपरिक’ और ‘आधुनिक’ नारी का समन्वय कैसे दिखाई देता है?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व में ‘पारंपरिक’ और ‘आधुनिक’ नारी का सुंदर समन्वय स्पष्ट दिखाई देता है। एक ओर वे पारंपरिक भारतीय नारी की तरह धार्मिक, कर्त्तव्यनिष्ठ, पतिव्रता और कुल परंपराओं का सम्मान करने वाली थीं। वे कुलदेवी भवानी की उपासक थीं तथा पति और राज्य के प्रति पूर्ण समर्पित रहीं।
दूसरी ओर, उनमें आधुनिक नारी के गुण भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। वे साहसी, आत्मनिर्भर, नेतृत्व क्षम और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने वाली थीं। उन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए युद्धभूमि में उतरकर अंग्रेजों का सामना किया और स्त्री शक्ति का नया आदर्श प्रस्तुत किया।
इस प्रकार, लक्ष्मीबाई ने यह सिद्ध किया कि नारी केवल घर की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर वह राष्ट्र की रक्षा के लिए शस्त्र भी उठा सकती है। उनका व्यक्तित्व परंपरा और प्रगतिशीलता का प्रेरणादायक संगम है।
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प्रश्न 22.
‘अविनाशी स्वतंत्रता’ शब्द का प्रयोग रानी के लिए क्यों उपयुक्त है?
उत्तर:
‘अविनाशी स्वतंत्रता’ शब्द का प्रयोग रानी लक्ष्मीबाई के लिए इसलिए उपयुक्त है, क्योकि उनका बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की अमर प्रेरणा बन गया। उन्होंने मातृभूमि की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, जिससे भारतीयों के मन में स्वतंत्रता की चेतना स्थायी रूप से जागृत हुई। उनका साहस, त्याग और संघर्ष समय के साथ नष्ट नहीं हुआ, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को प्रेरित करता रहा। इस प्रकार, रानी लक्ष्मीबाई स्वयं स्वतंत्रता की उस भावना का प्रतीक बन गई, जो कभी समाप्त नहीं होती। इसलिए उन्हें ‘अविनाशी स्वतंत्रता’ का रूप कहा गया है।
प्रश्न 23.
1857 की क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या था? ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार बताइए।
उत्तर:
1857 की क्रांति का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों के अत्याचारपूर्ण शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था। अंग्रेजों की हड़प नीति, आर्थिक शोषण, धार्मिक हस्तक्षेप और सामाजिक अपमान से भारतीय शासक, सैनिक तथा सामान्य जनता अत्यंत असंतुष्ट थे।
इस कारण पूरे देश में स्वतंत्रता की भावना जागृत हुई। कविता में भी वर्णन है कि ‘बूढ़े भारत में नई जवानी’ आ गई थी अर्थात् लोगों में स्वतंत्रता प्राप्त करने का नया उत्साह उत्पन्न हो गया था। यह क्रांति केवल सैनिक विद्रोह नहीं थी, बल्कि राजाओं, नवाबों और आम जनता का संयुक्त प्रयास था। इस प्रकार, इसका उद्देश्य विदेशी शासन से मुक्ति और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा करना था।
प्रश्न 24.
मराठा वीर लक्ष्मीबाई को देखकर क्यों पुलकित होते थे?
उत्तर:
मराठा वीर लक्ष्मीबाई की अद्भुत युद्ध-कुशलता, साहस और तेजस्वी व्यक्तित्व को देखकर अत्यंत पुलकित होते थे। वे बचपन से ही तलवार चलाने, घुड़सवारी करने, व्यूह-रचना करने और शिकार खेलने जैसे वीरतापूर्ण कार्यों में दक्ष थीं। जब वे युद्धभूमि में अपनी तलवार चलाती थीं, तो उनके प्रहारों में अद्वितीय शक्ति और फुर्ती दिखाई देती थी।
इससे मराठा सैनिकों का उत्साह बढ़ता था और वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते थे। कविता में वर्णित है कि उनके शौर्य को देखकर मराठा वीर प्रसन्न हो उठते थे। इस प्रकार, लक्ष्मीबाई का साहस केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि पूरी सेना के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया था।
प्रश्न 25.
लक्ष्मीबाई किस देवी की उपासक थीं?
उत्तर:
लक्ष्मीबाई महाराष्ट्र की कुलदेवी भवानी की उपासक थीं। भवानी देवी शक्ति, साहस और पराक्रम की प्रतीक मानी जाती हैं और लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व में भी ये सभी गुण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
कविता में उल्लेख है कि वे अपनी कुलदेवी भवानी की आराधना करती थीं, जिससे उन्हें मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और युद्ध के लिए प्रेरणा मिलती थी। उनकी भक्ति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके जीवन और कर्मों में भी प्रकट होती थी।
देवी भवानी की कृपा से ही उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने का साहस प्राप्त किया। इस प्रकार उनकी धार्मिक आस्था और वीरता का सुंदर समन्वय उनके व्यक्तित्व को और भी महान बनाता है।
प्रश्न 26.
‘वीरता की वैभव के साथ सगाई’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘वीरता की वैभव के साथ सगाई’ पंक्ति का आशय लक्ष्मीबाई और झाँसी के राजा गंगाधर राव के विवाह से है। यहाँ लक्ष्मीबाई को वीरता का प्रतीक और झाँसी के राजघराने को वैभव का प्रतीक माना गया है। कवयित्री ने इस विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन न मानकर साहस और राजसत्ता के संगम के रूप में प्रस्तुत किया है।
लक्ष्मीबाई के झाँसी आगमन से राज्य में खुशियाँ फैल गई और चारों ओर उत्सव का वातावरण बन गया। इस प्रकार, यह विवाह झाँसी के लिए सौभाग्य और गौरव का प्रतीक बन गया। यह पंक्ति रानी के व्यक्तित्व की गरिमा और उनके ऐतिहासिक महत्त्व को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।
प्रश्न 27.
राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद क्या संकट उत्पन्न हुआ?
उत्तर:
राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद झाँसी पर अंग्रेजों की हड़प नीति का संकट उत्पन्न हो गया। राजा की निःसंतान मृत्यु के कारण अंग्रेजों ने झाँसी को ‘लावारिस’ घोषित कर उस पर अधिकार करने का प्रयास किया। इससे झाँसी की स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई और रानी लक्ष्मीबाई गहरे शोक में डूब गई।
उनके सामने व्यक्तिगत दुःख के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा की चिंता भी थी। अंग्रेजों ने इस अवसर का लाभ उठाकर झाँसी पर अपना अधिकार जमाने की योजना बनाई। इस प्रकार, यह घटना रानी के जीवन का सबसे कठिन समय था, जिसने आगे चलकर उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न 28.
नाना साहब का क्रांति में क्या योगदान था?
उत्तर:
नाना साहब 1857 की क्रांति के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित विद्रोह का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत दिशा प्रदान की। वे मराठा साम्राज्य के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े हुए। उन्होंने सैनिकों और जनता को एकजुट कर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
कविता में उनका उल्लेख उन वीर नेताओं में किया गया है, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों से क्रांति को व्यापक रूप मिला और देशभर में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार हुआ। इस प्रकार, नाना साहब स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख प्रेरक और नेतृत्वकर्ता थे।
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प्रश्न 29.
सिंधिया के पलायन की घटना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जब रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी वीरता और साहस के बल पर ग्वालियर की ओर बढ़कर वहाँ आक्रमण किया, तो अंग्रेजों के सहयोगी सिंधिया उनके पराक्रम से भयभीत हो गए। वे रानी की शक्ति और नेतृत्व से इतने प्रभावित और आतंकित हुए कि अपनी राजधानी छोड़कर भाग खड़े हुए।
इससे स्पष्ट होता है कि रानी लक्ष्मीबाई केवल अंग्रेजों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके समर्थकों के लिए भी चुनौती बन गई थीं। ग्वालियर पर अधिकार प्राप्त करना उनकी रणनीतिक सफलता का प्रमाण था।
इस घटना ने उनके अद्भुत नेतृत्व और युद्ध कौशल को सिद्ध कर दिया तथा क्रांतिकारियों का मनोबल और अधिक बढ़ाया।
प्रश्न 30.
रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम युद्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई ने अपने अंतिम युद्ध में अत्यंत साहस और वीरता का परिचय दिया। उन्होंने अंग्रेजों की शक्तिशाली सेना का सामना करते हुए अंतिम क्षण तक युद्ध किया।
वे युद्धभूमि में सिंहनी की भाँति लड़ीं और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी आयु उस समय केवल तेइस वर्ष थी, फिर भी उन्होंने अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया।
उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर हो गया। उनके त्याग ने देशवासियों के मन में स्वतंत्रता की भावना को और प्रबल किया तथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम और संघर्ष का संदेश दिया।
प्रश्न 31.
लक्ष्मीबाई के बचपन के व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लक्ष्मीबाई का बचपन अत्यंत साहसी, उत्साही और तेजस्वी था। वे बचपन से ही घुड़सवारी, तलवार चलाना, व्यूह-रचना करना और शिकार खेलना जैसे वीरतापूर्ण कार्यों में रुचि रखती थीं। उनका स्वभाव निर्भीक और आत्मविश्वासी था । वे नाना साहब के साथ पढ़ती और खेलती थीं तथा वीर शिवाजी की गाथाएँ सुनकर प्रेरित होती थीं। इन गतिविधियों ने उनके भीतर देशभक्ति, साहस और नेतृत्व के गुण विकसित किए। बचपन से ही उनके व्यक्तित्व में वीरता और आत्मसम्मान के गुण स्पष्ट दिखाई देते थे। यही गुण आगे चलकर उन्हें एक महान स्वतंत्रता सेनानी और आदर्श वीरांगना बनने में सहायक बने।
प्रश्न 32.
भारतीय राजघरानों के अपमान का चित्रण कविता में कैसे किया गया है?
उत्तर:
कविता में अंग्रेजों द्वारा भारतीय राजघरानों के अपमान का अत्यंत मार्मिक
चित्रण किया गया है। बताया गया है कि अंग्रेजों ने रानियों और बेगमों के गहने और वस्त्र छीनकर उन्हें कलकत्ता के बाजारों में सरेआम नीलाम किया। अंग्रेजों के अखबारों में इन नीलामियों के विज्ञापन प्रकाशित होते थे, जैसे- ‘नागपुर के जेवर ले लो’ और ‘लखनऊ का नौलखा हार ले लो।’ इससे स्पष्ट होता है कि अंग्रेजों ने न केवल भारतीय राज्यों पर अधिकार किया, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा और संस्कृति का भी अपमान किया। इस घटना से भारतीय समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ और स्वतंत्रता संग्राम की भावना और अधिक प्रबल हो गई।
प्रश्न 33.
रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का राष्ट्र पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का राष्ट्र पर अत्यंत गहरा और प्रेरणादायक प्रभाव पड़ा। उनके साहस, त्याग और देशभक्ति ने भारतीयों के मन में स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया।
उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान भी छोटा नहीं होता। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी। उनका जीवन और बलिदान राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता संग्राम के अनेक सेनानियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की।
इस प्रकार, रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान भारतीय इतिहास में अमर हो गया और आज भी देशवासियों को साहस और देशभक्ति का संदेश देता है।
Class 9 Hindi Chapter 11 Extra Question Answer for Practice
दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर विकल्पों से चुनिए।
1. सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन् सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
(क) ‘बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी’ पंक्ति का क्या आशय है?
(i) भारत के सभी लोग युवा हो गए थे
(ii) गुलामी के कारण हताश हो चुके भारतीयों में आजादी के लिए नया जोश और उत्साह भर गया था
(iii) भारत की जनसंख्या अचानक बढ़ गई थी
(iv) भारत में नई सुख-सुविधाएँ आ गई थीं
(ख) पद्यांश के अनुसार, भारतवासियों ने मन में क्या संकल्प लिया था?
(i) अंग्रेजों (फिरंगियों) को भारत से बाहर निकालने का
(ii) व्यापार को बढ़ाने का
(iii) नए हथियार खरीदने का
(iv) अंग्रेज़ों से संधि करने का
(ग) ‘सन् सत्तावन’ (1857) की तलवार को ‘पुरानी’ क्यों कहा गया है?
(i) क्योंकि वह लोहे की बनी थी
(ii) क्योंकि वह बहुत जंग लगी हुई थी
(iii) क्योंकि भारत की वीरता और शौर्य की परंपरा बहुत प्राचीन (पुरानी) है
(iv) क्योंकि वह तलवार रानी के पूर्वजों की थी
(घ) कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई को ‘मर्दानी’ कहकर क्यों संबोधित किया है?
(i) क्योंकि वे पुरुषों के कपड़े पहनती थीं
(ii) क्योंकि उन्होंने युद्ध के मैदान में पुरुषों के समान अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था
(iii) क्योंकि वे पुरुषों से बात करती थीं
(iv) क्योंकि उनके पास बहुत बड़ी सेना थी
(ङ) यह कविता मुख्य रूप से किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत करती है?
(i) असहयोग आंदोलन
(ii) भारत छोड़ो आंदोलन
(iii) 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
(iv) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
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2. कानपूर के नाना की मुँहबोली बहन ‘छबीली’ थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी,
वीर शिवाजी की गाथाएँ
उसको याद ज़बानी थीं।
प्रश्न
(i) प्रस्तुत काव्यांश के अनुसार, लक्ष्मीबाई के बचपन की ‘सहेलियाँ’ कौन थीं?
(क) गुड़िया और खिलौने
(ख) बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी
(ग) कानपुर की अन्य बालिकाएँ
(घ) कहानियों की पुस्तकें
(ii) कथन (A) : लक्ष्मीबाई को वीर शिवाजी की गाथाएँ मुँहजुबानी याद थीं।
कारण (R) : इन गाथाओं ने उनके भीतर बचपन से ही वीरता और देशभक्ति के संस्कार विकसित कर दिए थे।
कूट
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iii) ‘नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी’ पंक्ति से लक्ष्मीबाई के विषय में क्या पता चलता है?
(क) वे केवल पढ़ाई में रुचि रखती थीं।
(ख) उनका पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा नाना साहब के सान्निध्य में वीरतापूर्ण वातावरण में हुई।
(ग) वे बहुत आलसी थीं।
(घ) उन्हें खेलना पसंद नहीं था।
(iv) लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ कहकर कौन पुकारते थे?
(क) वीर शिवाजी
(ख) झाँसी के राजा
(ग) कानपुर के नाना साहब
(घ) बुंदेलखंड के हरबोले
(v) काव्यांश के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती संतान थीं।
2. लक्ष्मीबाई को बचपन में अस्त्र-शस्त्र चलाना बिल्कुल पसंद नहीं था।
3. लक्ष्मीबाई का बचपन सामान्य लड़कियों से भिन्न शौर्यपूर्ण था।
4. ‘छबीली’ लक्ष्मीबाई का प्यार का नाम था।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(क) 1, 2 और 3
(ख) 2, 3 और 4
(ग) 1, 3 और 4
(घ) उपर्युक्त सभी
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में
प्रश्न 1.
लक्ष्मीबाई बचपन में कौन-कौन से खेल खेलती थीं?
प्रश्न 2.
डलहौजी को झाँसी हड़पने का मौका कैसे मिला?
प्रश्न 3.
अंग्रेजी शासन में बेगमों और रानियों की क्या दशा हो गई थी?
प्रश्न 4.
‘मनुज नहीं अवतारी थी’ – रानी लक्ष्मीबाई के बारे में ऐसा क्यों कहा गया है?
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काव्यबोध पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
लक्ष्मीबाई को ‘छबीली’ क्यों कहा गया?
प्रश्न 2.
लक्ष्मीबाई बचपन में किन खेलों में रुचि रखती थीं?
प्रश्न 3.
झाँसी में लक्ष्मीबाई के आगमन पर कैसा वातावरण था?
प्रश्न 4.
‘काली घटा घेर लाई’ किस घटना का संकेत है?
प्रश्न 5.
अंग्रेजों ने झाँसी पर अधिकार कैसे किया? ‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए।
प्रश्न 6.
भारतीय रानियों के गहनों की नीलामी कहाँ की जाती थी?
प्रश्न 7.
‘झाँसी की रानी’ कविता के आधार पर बताइए कि ‘परदे की इज्जत’ से क्या आशय है?
प्रश्न 8.
स्वतंत्रता की चिनगारी कहाँ से उत्पन्न हुई थी?
प्रश्न 9.
रानी लक्ष्मीबाई ने हमें कौन-सी सीख दी?