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NCERT Class 8th Hindi Chapter 7 मत बाँधो Question Answer
मत बाँधो Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 7 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi मत बाँधो Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
- सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
- सपनों को भूल जाना चाहिए
- सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
- सपने देखना अच्छी बात है
उत्तर:
- सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
प्रश्न 2.
‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
- प्रेम की
- सपनों की
- शिक्षा की
- अधिकारों की
उत्तर:
- सपनों की
प्रश्न 3.
“इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
- सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
- सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
- सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
- सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
उत्तर:
- सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
- सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं

प्रश्न 4.
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं ?
- जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
- जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
- जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
- जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
उत्तर:
- जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
- जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
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प्रश्न 5.
यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है ?
- वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
- वह और गहरा हो सकता है
- उसकी उड़ान रुक सकती है
- वह बढ़कर पौधा बन सकता है
उत्तर:
- उसकी उड़ान रुक सकती है

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने ?
उत्तर:
मैंने यह उत्तर इसलिए चुना क्योंकि –
- कवयित्री ने सपनों के महत्व को अनेक दृष्टिकोणों से वर्णित किया है और मेरी दृष्टि में भी उनके ये विचार सही प्रतीत होते हैं।
- ‘मत बाँधो’ कविता में सपनों की स्वतंत्रता एवं उससे होने वाले सुखद भविष्य को उजागर किया गया है, जो कि एक आशावादी विचार है।
- हर व्यक्ति में अलग-अलग क्षमताएँ एवं दक्षताएँ होती हैं, अतः अपने विचार, अपनी योग्यता एवं क्षमता के अनुसार व्यक्ति यदि जीवन जीना चाहता है तो ये स्वप्न उसे जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं और उसे सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं। कविता में सपनों के पंख होने की कल्पना की गई है क्योंकि कल्पना की उड़ान हौसला रूपी पंखों से ही संभव हो पाती है।
- जहाँ पर भी परस्पर प्रेम, सहयोग एवं सद्भाव के कारण सुखद स्थिति होती है, उसे स्वर्ग से कम नहीं आँका जा सकता। वस्तुत: जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों, यह सुखद स्थिति स्वर्ग के समान होती है।
- बीज रूपी सपने को यदि उचित परिस्थितियाँ नहीं मिलें तो वह अपनी इच्छित उड़ान नहीं भर पाता है। उसका विकास रुक जाता है। इस कारण मैंने यह उत्तर चुना।
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं।)
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है ?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?”
उत्तर:
इस काव्यांश में कवयित्री प्रकृति के दो अलग-अलग उदाहरणों के माध्यम से ‘गति’ और ‘स्थिति’ के स्वाभाविक परिणामों को स्पष्ट कर रही हैं।
” सौरभ उड़ जाता है नभ में, फिर वह लौट कहाँ आता है?” यहाँ ‘सौरभ’ का अर्थ सुगंध से है। जिस प्रकार एक बार फूल से निकली हुई सुगंध हवा में मिलकर आकाश में फैल जाती है और फिर वापस फूल में नहीं लौटती, उसी प्रकार कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिनकी गति उन्हें एक बार आगे बढ़ा देती है तो वे अपनी मूल स्थिति में वापस नहीं आतीं। अर्थात कुछ गतियों को रोका नहीं जा सकता और वे अपरिवर्तनीय होती हैं।
“बीज धूलि में गिर जाता जो, वह नभ में कब उड़ पाता है?” इसके विपरीत, एक बीज रूपी स्वप्न जो धूल में गिर जाता है, अर्थात उसे मनोनुकूल परिस्थितियाँ या अवसर नहीं मिल पाते, तो उसका विकास रुक जाता है तथा उसकी उड़ान समाप्त हो जाती है।
यह दर्शाता है कि हर वस्तु के विकास की अपनी एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। जो वस्तु जिस जगह के लिए बनी है, वह वहीं अपना अस्तित्व पाती है। इसी प्रकार सपनों और आकांक्षाओं की भी अपनी एक स्वाभाविक गति होती है, जिसे रोका नहीं जाना चाहिए। यह काव्यांश हमें प्रकृति के नियमों के माध्यम से सपनों को उनकी स्वाभाविक उड़ान भरने देने का महत्व समझाता है।

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(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”
उत्तर:
यह काव्यांश सपनों के व्यापक प्रभाव और उनके धरती पर वापस आकर सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता पर केंद्रित है।
“मुक्त गगन में विचरण कर यह, तारों में फिर मिल जायेगा “, यहाँ ‘यह’ सपनों को इंगित करता है। कवयित्री कहती हैं कि जब सपनों को खुले आकाश (मुक्त गगन) में स्वतंत्र रूप से घूमने (विचरण करने) दिया जाता है, तो वे अपनी ऊँची उड़ान में तारों तक पहुँचते हैं। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि सपने जब बिना किसी रोक-टोक के विकसित होते हैं, तो वे उच्चतम आदर्शों और आकांक्षाओं को छूते हैं। वे आकाश की ऊँचाइयों और उसकी विशालता को समाहित कर लेते हैं।
“मेघों से रंग औ’ किरणों से, दीप्ति लिए भू पर आयेगा ” के माध्यम से कवयित्री आगे कहती हैं कि ये सपने जब उच्च स्तर पर पहुँच जाते हैं, तो वे केवल अमूर्त नहीं रहते । वे आंकाश से ‘मेघों’ (बादलों) से रंग और ‘किरणों’ से दीप्ति (चमक) लेकर वापस धरती पर आते हैं। ‘मेघों का रंग’ का अर्थ है कि सपने विभिन्न अनुभवों, भावनाओं और विविधताओं से समृद्ध हो जाते हैं। ‘किरणों से दीप्ति’ का अर्थ है कि वे ज्ञान, आशा और प्रेरणा का प्रकाश लेकर आते हैं। जब ऐसे समृद्ध और प्रकाशवान सपने धरती पर साकार होते हैं, तो वे जीवन में सुंदरता, प्रेरणा और ज्ञान का संचार करते हैं।
सारांश रूप में, यह काव्यांश बताता है कि सपनों को पूरी आज़ादी देनी चाहिए ताकि वे अपनी उच्चतम संभावनाओं तक पहुँच सकें। जब ऐसा होता है, तो वे केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आकाश से ज्ञान, रंग और प्रकाश बटोरकर धरती पर लौटते हैं। यह वापसी समाज में सकारात्मक बदलाव लाती है, जीवन को सुंदर बनाती है और लोगों में आशा व प्रेरणा भरती है। यह काव्यांश सपनों की शक्ति और उनके सामूहिक कल्याण में योगदान देने की क्षमता पर प्रकाश डालता है।
मिलकर करें मिलान
• कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से गए मिलाइए ।

उत्तर:
1. – 3
2. – 5
3. – 1
4. – 2
5. – 4
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
उत्तर:
ऐसे संबोधन उन सभी लोगों के लिए किए गए होंगे जो बच्चों के भविष्य निर्माण के दायित्व से जुड़े हैं।
(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
उत्तर:
कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात इसलिए कही होगी गई क्योंकि सपनों की गति को बाधित करने पर उसकी कल्पनाशीलता की संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी।
(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं ?
उत्तर:
कविता में सौरभ, बीज, धुआँ और अग्नि जैसे उदाहरणों का उपयोग यह समझाने के लिए किया गया है कि एक बार इनका स्वाभाविक मार्ग बाधित हो जाए तो ये अपनी मूल स्थिति में नहीं लौट पाते, जबकि सपने ऐसे नहीं होते। मेरी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और विशेषताएँ इस प्रकार हो सकती हैं:
- पुनरुत्थानशीलताः सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि एक बार अपनी दिशा से भटक जाएँ तो शायद ही लौट पाएँ, लेकिन सपने कई बार असफलताओं के बाद भी दोबारा देखे जा सकते हैं और उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जा सकता है।
- प्रेरणा का स्रोत : सपने केवल कल्पना नहीं होते बल्कि वे व्यक्ति को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे व्यक्ति को कठिन समय में भी आशावादी बनाए रखते हैं।
- परिवर्तनकारी शक्ति : सपनों में व्यक्ति और समाज को बदलने की शक्ति होती है। वे नए विचारों, आविष्कारों और सामाजिक सुधारों की नींव रख सकते हैं।
- निजी और सामूहिक पहलू : सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि के उदाहरण व्यक्तिगत हैं, लेकिन सपने व्यक्तिगत होने के साथ-साथ सामूहिक भी हो सकते हैं, जो पूरे समुदाय या राष्ट्र के लिए प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा है ?
उत्तर:
कविता में ‘आरोहण’ (ऊपर उठना, प्रगति करना) और ‘अवरोहण’ (नीचे आना, स्थिरता या आधार से जुड़ाव) दोनों के महत्व की बात की गई है। कविता में उल्लिखित ये बातें यह बताती हैं कि सपने केवल ऊँचाइयों को छूने के लिए नहीं होते, बल्कि उनका आधार से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
‘रोहण’ को सार्थक होते देखना :
मैंने ‘आरोहण’ को तब सार्थक होते देखा है जब कोई छात्र कड़ी मेहनत करके अपनी परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करता है और अपने पसंदीदा कॉलेज में प्रवेश पाता है। यह उसके सपनों की उड़ान है। इसी प्रकार, किसी वैज्ञानिक द्वारा वर्षों के शोध के बाद कोई नई खोज करना या किसी उद्यमी का अपना स्टार्टअप सफल बनाना भी ‘आरोहण’ का उदाहरण है। यह सब प्रगति और उन्नति की ओर बढ़ते कदम हैं।
‘अवरोहण’ को सार्थक होते देखना:
‘अवरोहण’ को मैंने तब सार्थक होते देखा है जब कोई व्यक्ति अपनी सफलता के बाद भी अपनी जड़ों, अपने परिवार और अपने मूल्यों से जुड़ा रहता है। उदाहरण के लिए, एक प्रसिद्ध कलाकार जो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने के बाद भी अपने गाँव और अपने गुरु को नहीं भूलता और उनके लिए कुछ करता है। यह ‘अवरोहण’ है, जहाँ वह अपनी ऊँचाइयों को अपनी धरती से जोड़ता है। इसी तरह, कोई समाज सुधारक जो गरीबों और वंचितों के लिए काम करता है, वह भी अपनी सफलताओं को धरती से जोड़ता है ताकि वे वास्तविक और स्थायी परिवर्तन ला सकें। सपने तभी पूरे होते हैं जब उनका आरोहण हो, लेकिन उन्हें अवरोहण के द्वारा ठोस आधार भी मिले।
(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है / उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
हाँ, मैं पूरी तरह सहमत हूँ कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि जो सपने हम देखते हैं, वे केवल कल्पना नहीं होते, बल्कि जब हम उन्हें पूरा करने के लिए प्रयास करते हैं, तो वे हमारी आँखों के सामने मूर्त रूप ले लेते हैं।
उदाहरण :
मेरे एक मित्र का सपना था कि वह एक सफल फोटोग्राफर बने। शुरू में यह केवल एक सपना था, लेकिन उसने इस पर लगातार काम किया। उसने फोटोग्राफी के कोर्स किए, छोटे-मोटे इवेंट्स में फ्री में तस्वीरें खींचीं, और अपनी कला को निखारने के लिए बहुत समय दिया। कई सालों की कड़ी मेहनत के बाद, आज वह एक प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर है, जिसके काम की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती है।
उसका यह सपना, जो कभी केवल उसकी कल्पना में था, अब उसकी ‘आँखों में लौटकर’ एक शानदार वास्तविकता बन गया है। उसने अपने सपने को ज़मीन पर उतारा और उसे साकार किया। यह दर्शाता है कि सपने केवल तभी सच होते हैं जब उनके साथ अथक प्रयास, समर्पण और दृढ़ता हो ।
शीर्षक
- कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर:
कवयित्री का शीर्षक ‘मत बाँधो’ विषय के अनुरूप सार्थक एवं सटीक है। फिर भी यदि मुझे कोई अन्य शीर्षक देना हो, तो मैं इसका शीर्षक देता – ‘सपनों को उड़ जाने दो।’ वस्तुतः कवयित्री के कथन से सहमत होते हुए यह शीर्षक दिया जा सकता है।
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अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या – क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए ।
उत्तर:
मैं नए संसार में आशा और विश्वासयुक्त वातावरण बनाना चाहूँगा, जहाँ सभी परस्पर सद्भाव से रह सकें। वहाँ निराशा, भय, हिंसा, नकारात्मकता का नामोनिशान नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेमपूर्ण सकारात्मक वातावरण नए स्वप्नों, आशाओं, उड़ानों को पूर्ण करने में सहायक होता है। किंतु नकारात्मक वातावरण इसके विपरीत माहौल बनाता है, जिसमें नागरिकों का विकास नकारात्मक दिशा में होता है।
(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी
हैं। कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए।
उत्तर:
मैं अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए चित्रकला सीखना चाहूँगा, जिसमें मैं अपनी कल्पनाओं के सुंदर चित्र बना सकूँ और उसमें अपने मनपसंद रंग भरकर अपनी घर की दीवारों को सजा सकूँ, साथ ही उसे उन्हें भी सिखा सकूँ जो चित्रकला में रुचि रखते हैं।
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो मैं अपने बचपन में लौटना चाहूँगा। मैं उन सभी अध्यापकों के साथ बिताए हुए पलों में से उन पलों में परिवर्तन करना चाहूँगा जो उस समय अपनी अज्ञानतावश मैं सही समझता था और अध्यापकों के द्वारा बार-बार समझाने पर भी नहीं मानता था, सज़ा मिलने पर सुधार करने की बजाय नाराज़ हो जाता था। आज भी मुझे बचपन की उन घटनाओं को याद करके पछतावा होता है।
(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी ? (संकेत- धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि ।
उत्तर:
बीज रूपी सपने को उगने यानी अपने इच्छित रूप को प्राप्त करने के लिए धूप रूपी मेहनत, पानी रूपी लगन और निष्ठा, खाद रूपी आत्मबल और इच्छा-शक्ति के साथ-साथ उपयुक्त माहौल, उचित अवसर, सामाजिक सहयोग, प्रोत्साहन तथा उसे पाने की आज़ादी जैसी चीज़ों की आवश्यकता होगी।
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा !” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा ? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर:
स्वस्थ एवं सकारात्मक विचारों के द्वारा बुरे सपनों और विचारों से बचा जा सकता है। बुरे सपनों और विचारों का शिल्प अपने स्वभाव और प्रकृति के अनुसार ही कार्य करता है, इसलिए बुरे सपनों और विचारों के पनपने और पोषित होने से नकारात्मक सपने और विचार जन्म लेते हैं।
(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो !” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
उत्तर:
निश्चय ही यह कल्पना अत्यंत उत्साहवर्धन करने वाली है कि यदि सबको सपने देखने और उन्हें पूरा करने की आज़ादी मिल जाए तो शायद सब खुश होंगे, सभी सुखी होंगे, किंतु उस समय यह समझना, विचार करना, निर्णय करना भी अधिक महत्वपूर्ण होगा कि कौन से स्वप्न पूर्ण… होकर सभी के लिए उपयोगी और कल्याणकारी होंगे। कहीं ऐसा तो नहीं कि सभी अपनी अपनी ढपली, अपना अपना राग अलापने लगेंगे। इसलिए सपनों के साकार होने के साथ ही लोक कल्याण की बातें अत्यधिक महत्वपूर्ण होंगी ।
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो !” आपके विचार से यह सुझाव है ? आदेश है ? प्रार्थना है? या कुछ और है ? यह बात किससे कही जा रही है?
उत्तर:
यह कवयित्री का एक सुझाव है। यह बात समाज, परिवार और राष्ट्र के उन ज़िम्मेदार लोगों से कही जा रही है जो इस बात को नहीं समझते कि किसी भी बच्चे को स्वप्न देखने से रोकना गलत है। सभी बच्चों की मनोवृत्ति और क्षमता एक जैसी नहीं होती, वे अलग-अलग होती हैं। उनके जीवन के लक्ष्य और दिशाएँ भी भिन्न-भिन्न होती हैं। हम अनकी आँखों से उनके सपने छीनकर उन पर अपनी इच्छाएँ-आकांक्षाएँ और अपने सपने थोप देते हैं। यह उनके साथ सरासर अन्याय है।
कविता की रचना

- “सौरभ उड़ जाता है नभ में…”
- “बीज धूलि में गिर जाता जो….
- “अग्नि सदा धरती पर जलती….
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द – चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है, जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर उन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए ।
उत्तर:
सरल और सुबोध भाषा : कविता की भाषा अत्यंत सरल और समझने में आसान है। इसमें क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे पाठक इसे आसानी से पढ़ और समझ सकता है।
- लाक्षणिकता का प्रयोगः कविता में लाक्षणिकता का सुंदर प्रयोग किया गया है, विशेषकर उन पंक्तियों में जहाँ अमूर्त भावनाओं और विचारों को मूर्त रूप दिया गया है। उदाहरण के लिए, “सपनों के पंख न काटो” और “सपनों की गति मत बाँधो” में सपनों को पंखों और गति से जोड़कर उनकी उड़ान और प्रगतिशीलता को दर्शाया गया है।
- भावानुकूल शब्द चयन: कवयित्री ने ऐसे शब्दों का चयन किया है जो कविता के मूल भाव, यानी स्वतंत्रता और प्रगति के महत्व को सशक्त रूप से व्यक्त करते हैं। ‘मुक्त गगन’, ‘विचरण’, ‘आरोहण’, ‘अवरोहण’, ‘दीप्ति’ जैसे शब्द इसी ओर इशारा करते हैं ।
- गेयता और प्रवाह : कविता में एक स्वाभाविक गेयता और प्रवाह है, जो इसे पढ़ने में आनंददायक बनाता है । पंक्तियों का विन्यास और शब्द संयोजन इसे एक संगीतमयता प्रदान करता है।
- पुनरावृत्ति का प्रयोग : कुछ वाक्यांशों जैसे ‘मत रोको’, ‘मत बाँधो’ की पुनरावृत्ति कविता के मुख्य संदेश को सुदृढ़ करती है और उस पर जोर डालती है। यह पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
- बिंब: कविता में कई सुंदर बिंबों का प्रयोग किया गया है जो पाठक के मन में चित्र खींचते हैं। जैसे ‘तारों में फिर मिल जाएगा’, ‘मेघों से रंग ओ’, ‘किरणों से दीप्ति लिए भू पर आएगा’, ‘पंख न काटो’, ‘गति मत बाँधो’ आदि।
- संस्कृतनिष्ठ शब्दावली का प्रयोगः यद्यपि भाषा सरल है, तथापि इसमें कुछ संस्कृतनिष्ठ शब्दों जैसे ‘आरोहण’, ‘अवरोहण’, ‘विचरण’, ‘दीप्ति’, ‘शिल्प’ आदि का प्रयोग हुआ है जो भाषा को गरिमा प्रदान करते हैं। संस्कृतनिष्ठ ये शब्द बिलकुल सरल हैं तथा आसानी से समझने योग्य हैं।
कुल मिलाकर, कविता की भाषा सहज, प्रवाहमयी, लाक्षणिक और भावपूर्ण है, जो इसके संदेश को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं । विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए ।

उत्तर:
1. – 2
2. – 5
3. – 6
4. – 1
5. – 3
6. – 4
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शब्दों की बात

“इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!”
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है— नीचे से ऊपर की ओर जाना
या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ है — ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना ।
(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए ।
- पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर ………….. “आरोहण कर विजय प्राप्त की ।
- नदियाँ विशाल पर्वतों से ………….. अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
- अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया ………… अवरोहण क्रम कहलाती है।
इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।
उत्तर:
- आरोहण, अवरोहण जीवन का स्वाभाविक क्रम है।
- झंडारोहण के उपरांत सभी ने खुश होकर तालियाँ बजाईं।
- पर्वतारोहण एक साहसिक और रोमांचक कृत्य है।
- पर्वतारोहियों के लिए अवरोहण भी एक महत्वपूर्ण चरण है।
(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए-

“वह नभ में कब उड़ पाता है?”
‘धूम गगन में मँडराता है ।”
‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है ?
उत्तर:
आसमान में लाली छाई,
व्योमेश ने ली अँगड़ाई।
किरणें उतर धरा पर आईं,
अंबर संग धरती मुस्काई ||
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत – ‘मत डरो ।’)
उत्तर:
मत लड़ो।
मत रोको।
मत छुओ।
मत भागो।
मत मारो।
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत- जोड़ना)
उत्तर:
जकड़ना – कुश्ती मैच में पहलवान ने प्रतिद्वंद्वी को बाँहों में बुरी तरह जकड़ लिया।
कसना – वह रस्सी से लकड़ी के लट्ठों को कसने लगा।
मिलाना – दूध और पानी आपस में मिलकर एक हो गए।
लपेटना – छोटी बच्ची ने दुपट्टे से अपने को लपेट लिखा ।
(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं ।
उत्तर:
काटो – टोका (टोकना, हस्तक्षेप करना)
नभ – भन (भन भन की आवाज)
सदा – दास (सेवक)
कब – बक (बक-बक करना)
जाता – ताजा (जो मुर्झाया न हो)
काल परिवर्तन
“सौरभ उड़ जाता है नभ में”
उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए । इस पंक्ति की क्रिया ‘ जाता है ‘ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी-
भूतकाल – सौरभ उड़ गया है नभ में
भविष्य काल – सौरभ उड़ जाएगा नभ में कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।
(क)
- धूम गगन में मँडराता था । (भूत काल)
- धूम गगन में मँडराएगा। (भविष्यत काल)
(ख)
- सपनों में दोनों ही गति थीं। (भूत काल)
- सपनों में दोनों ही गति होंगी। (भविष्यत काल)
(ग)
- उड़ कर आँखों में आता था । (भूत काल)
- उड़ कर आँखों में आएगा। (भविष्यत काल)
शब्दकोश से
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प”
शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं –
- हाथ से कोई चीज बनाकर तैयार करने का काम – दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे-बरतन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि।
- कला संबंधी व्यवसाय ।
- दक्षता, कौशल।
- निर्माण, सर्जन, सृष्टि रचना।
- आकार, आवृत्ति ।
- अनुष्ठान, क्रिया, धार्मिक कृत्य।

अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए-
- शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी शिल्पकारक, शिल्पक या शिल्पकारी
- शिल्पकला
- शिल्पकौशल
- शिल्पगृह या शिल्पगेह
- शिल्पविद्या
- शिल्पशाला या शिल्पालय
उत्तर:
- कारीगर, दस्तकार
- कारीगरी, दस्तकारी
- किसी कार्य को कुशलतापूर्वक, कलात्मक ढंग से करना
- शिल्पशाला, जहाँ विभिन्न प्रकार के शिल्प / मिट्टी के बर्तन (बुनाई, कढ़ाई, लकड़ी का काम) बनाए जाते हैं या प्रदर्शित किए जाते हैं या बेचे जाते हैं।
- हाथों और औजारों या रंगों के उपयोग द्वारा सुंदर सजावटी, उपयोगी वस्तुओं को बनाने की कला शिल्पविद्या कहलाती है।
- कला या शिल्प का स्थान या शिल्पकारों की कार्यशाला ।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं। बताइए । (संकेत – गाँठ बाँधना)
उत्तर:
- सामान बाँधना
- डोरी बाँधना
- फीता बाँधना
- बंडल बाँधना
- टाई बाँधना
- लड्डू बाँधना
- बंधन बाँधना
- चोटी बाँधना
(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’ । अर्थात वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो । अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
हम अपने आस – पास और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए साफ-सफ़ाई और हरियाली का ध्यान रखेंगे। इसके साथ ही बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सहायता तथा सभी का सहयोग करने का भाव रखेंगे, परस्पर मिल-जुलकर एक दूसरे का सुख – दुख बाँटेगे, जिससे सब सुख, शांति, समृद्धि और आनंद से जीवन जी सकें।
(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए ।
उत्तर:
कभी-कभी हम चाहकर भी कुछ ऐसे लोगों की सहायता नहीं कर पाते, जिन्हें वास्तव में सहायता की आवश्यकता होती हैं, क्योंकि प्रायः लोग झूठ बोलते हैं। मेरा सपना है कि मैं जब किसी ज़रूरत वाले या धन माँगने वाले व्यक्ति से बात करूँ तो यह समझ सकूँ कि वह सच बोल रहा है या झूठ। अगर मेरा यह सपना सच हो जाए तो मैं वास्तव में अनेक लोगों की सहायता कर सकूँगा और इसका लाभ अन्य लोग भी उठा सकेंगे।
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चर्चा-परिचर्चा

- “सपनों में दोनों ही गति है / उड़कर आँखों में आता है ।” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है, जैसे- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।
उत्तर:
विद्यार्थी इस विषय पर साथियों के साथ चर्चा करें।
सृजन

(क) विराम चिह्न का फेरबदल –
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्व होता है । विराम चिह्नों के प्रयोग से वाक्य या पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हो जाता है और परिवर्तित भी हो जाता है, जैसे- ‘रोको मत, जाने दो’ में रोको मत के बाद अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिना रोके जाने दिया जाए। वहीं ‘रोको, मत जाने दो’ में रोको के बाद अल्पविराम (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि जाने से रोका जाए। नीचे कुछ चित्र दिए गए है। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों का शीर्षक भी दीजिए।


उत्तर:
क्रमश:
रोको, मत जाने दो। रोको, मत जाने दो।
रोको, मत जाने दो। रोका मत, जाने दो।
रोको मत, जाने दो। रोको, मत जाने दो।
(ख) कविता आगे बढ़ाएँ
नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक कविता तैयार कीजिए ।

इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो ।

उत्तर:
उड़ने दो उन्मुक्त गगन में
उनके नन्हे कदमों को साधो ।
(ग) खोया-पाया
मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी ऐसा पत्र स्वयं लिखें।
वाद-विवाद
(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है- “ व्यक्ति को बाँध सकतें हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं ।”
एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे-
समूह 1 – व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।
समूह 2- स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी समूह बनाकर वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन करें।

(ख) विद्यार्थी वाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनच्छेद भी लिख सकते हैं।
उत्तर:
‘व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं’, विषय पर दोनों पक्षों के विद्यार्थियों ने अपने-अपने विचार रखें। प्रथम समूह ने विषय के विपक्ष में अपनी बात रखी। इस समूह के विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति के मूल में यही विचार प्रमुख रहा कि यदि व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण न रखा जाए तो अनुशासनहीनता पैदा होती है।
व्यक्ति स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच का अंतर भूलकर अनैतिक आचरण करने लगता है, जैसे कि’ अभिव्यक्ति की आजादी’ कानून का दुरुपयोग करते हुए लोग किसी सम्मानित राष्ट्र, व्यक्ति के प्रति नकारात्मक एवं अशोभनीय टिप्पणी करने से नहीं चूकते।
इसलिए कल्पना एवं विचारों के साथ ही अभिव्यक्ति पर भी कुछ सीमा तक नियंत्रण की परम आवश्यकता है। दूसरे समूह ने विषय के पक्ष में अपने विचार रखे। इस समूह के विद्यार्थियों के अनुसार स्वतंत्र विचार और कल्पना की आजादी सभी को मिलनी ही चाहिए क्योंकि जिस प्रकार सभी की अपनी स्वाभाविक गति और प्रकृति होती है, उसी प्रकार सपनों और आकांक्षाओं की भी अपनी स्वाभाविक गति होती है, उसे रोका नहीं जाना चाहिए ।
प्रकृति के नियमों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को उसकी स्वाभाविक उड़ान भरने देने की स्वतंत्रता होनी ही चाहिए। दोनों ही पक्षों के विचार महत्वपूर्ण हैं तथा दोनों के अपने-अपने तर्क भी उचित हैं। दोनों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विषय की सार्थकता सिद्ध की जानी चाहिए।
देखना-सुनना-समझना…
(क) “ धूम गगन में मँडराता है ।”
सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो ।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं हैं, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं-
उत्तर:
वर्षा की बूँदों का – स्पर्श एवं श्रवण द्वारा
धुएँ के उड़ने का – गंध द्वारा सूँघकर
खेल के रोमांच का – श्रवण द्वारा (आसपास के लोगों की प्रतिक्रियाओं, तालियों, सीटियों, चिल्लाने आदि के द्वारा)

(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव
विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए। दलों के नाम रखें- कल्पना और आकांक्षा । ‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय (हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करे । ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए । निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
आपदा प्रबंधन
“अग्नि सदा धरती पर जलती/धूम गगन में मँडराता है !” आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है।
(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि-
- कहीं अचानक आग लग जाए
- आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए
- भूकंप आ जाए
उत्तर:
कहीं अचानक आग लगने पर –
- सर्वप्रथम 101 नंबर पर कॉल करके अग्निशमक विभाग को सूचित करें।
- यदि आग का प्रकोप अधिक नहीं है और आस-पास कहीं अग्निशामक यंत्र है तो उसका प्रयोग करें।
- यदि स्थिति आपके नियंत्रण में नहीं है तो इमारत से बाहर निकल जाएँ।
- धुएँ से बचें।
अपने क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ जाने पर –
- सर्वप्रथम अपनी सुरक्षा निश्चित करें।
- ऊँचे स्थान, पहाड़ी क्षेत्र या बहुमंजिली इमारत में चले जाएँ ।
- बहते पानी से दूर रहें।
- पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क करें ।
- अपने घर में हमेशा आपातकालीन किट तैयार रखें, जिसमें पानी, भोजन, दवाएँ, टॉर्च और अन्य आवश्यक सामान शामिल हों ।
- बिजली के उपकरणों को बिजली से अलग कर दें, स्विच ऑफ कर दें।
भूकंप आने पर –
- सर्वप्रथम घबराएँ नहीं और शांत रहें।
- किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे छिप जाएँ। उसे मजबूती से पकड़ लें।
- यदि आप बाहर हैं तो खुले स्थान पर आ जाएँ। इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों से दूर रहें।
- किसी आंतरिक दीवार के पास बैठ जाएँ। अपने सिर और गरदन को हाथों से ढकें।
- लिफ्ट का प्रयोग न करें, सीढ़ियों का करें।
- यदि गाड़ी चला रहे हैं तो सुरक्षित स्थान पर रोकें और सीटबेल्ट बाँधकर कंपन बंद होने तक रुके रहें ।
(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूंगा या करूँगी ?” – एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
उत्तर:
- मैं प्रभावित क्षेत्र से जल्दी से जल्दी दूर जाने का प्रयास करूँगी।
- संबंधित विभाग को सहायतार्थ सूचित करूँगी।
- अपनी आपात किट को सदैव साथ रखूँगी।
- बिजली, गैस आदि के कनेक्शन को बंद करूँगी।
- आपदा के स्वरूप, तीव्रता तथा उसके कुप्रभाव को ध्यान में रखकर यथोचित कदम उठाऊँगी।
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शिल्प
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा !’
हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बार में कक्षा में चर्चा कीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी ऐसी चर्चा का आयोजन करें।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए-

उत्तर:
1. – 4
2. – 5
3. – 6
4. – 1
5. – 2
6. – 3
7. – 13
8. – 12
9. – 11
10. – 14
11. – 9
12. – 8
13. – 7
14. – 10
(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई वेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों उसके विषय में लिखिए । https://nationalcraftsmuseum.nic.in/
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
झरोखे से
• अभी आपने जो कविता पढ़ी उसे लिखा है महादेवी वर्मा ने । अब पढ़िए इन्हीं के द्वारा लिखी कहानी ‘गिल्लू’ का अंश-
(प्रश्न पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ संख्या – 103 पर देखें।)
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
साझी समझ

‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरी पढ़िए और अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
खोजबीन के लिए
- नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से आप महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं के विषय में जान, समझ सकते हैं-
- महादेवी वर्मा | कवयित्री | जीवन और लेखन | हिंदी | भाग – 1
https://www.youtube.com/watch?v=stQL9KgVZHg - महादेवी वर्मा | कवयित्री | जीवन और लेखन | हिंदी | भाग – 2
https://www.youtube.com/watch?v=_uqB5M9ZX6o - कविता मंजरी, बारहमासा
https://www.youtube.com/watch?v=bjgVp0W-Muw - गिल्लू – महादेवी वर्मा
https://www.youtube.com/watch?v=uxpOlfd05K8 - महादेवी वर्मा, भारतीय कवयित्री
https://www.youtube.com/watch?v=mWwpjf5YNT4
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।