Reading Class 4 Hindi Notes Veena Chapter 12 शतरंज में मात Shatranj Me Maat Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Shatranj Me Maat Class 4 Summary in Hindi
Shatranj Me Maat Class 4 Hindi Summary
शतरंज में मात का सारांश – Shatranj Me Maat Summary in Hindi
(पहला दृश्य)
विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय का दरबार सजा हुआ है। अभी राजा जी दरबार में आए नहीं थे। उन्हीं के प्रमुख परामर्शदाता एवं विदूषक ‘तेनालीरामन’ भी अभी तक दरबार में उपस्थित नहीं हुए थे। कुछ दरबारी जो तेनालीरामन से जलते थे और उन्हें राजा की नज़रों से हमेशा गिराने की सोचते रहते थे आज वे सभी फिर से तेनालीरामन के विरुद्ध बातें करने लगे। कोई कहता कि राजा के मुँह से तेनाली की प्रशंसा सुनकर तो हमारे कान पक गए, तो दूसरा कहता कि तेनाली ने तो महाराज को मुट्टी में कर रखा है ऐसे में भला राजा जी हमें क्यों पूछेंगे? वे कहने लगे कि महाराज के सिर से तेनाली का भूत उतारना पड़ेगा ।

यही सब बातें करते हुए उन सबने मिलकर तेनाली को नीचा दिखाने की तरकीब सोची उन्होंने राजा जी के दरबार में आने पर बताया कि तेनालीरामन शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं इसलिए महाराज एक बार उसके साथ मुकाबला अवश्य करें। महाराज तो शतरंज के शौकीन थे ही, उन्होंने तेनाली के आते ही उससे शतरंज के मुकाबले की बात कर डाली, दरबारियों को हँसता देख तेनाली समझ गए कि उन्हें फँसाया गया है क्योंकि वास्तव में तेनाली को तो शतरंज का बिलकुल भी ज्ञान नहीं था ।
(दूसरा दृश्य)
राजा कृष्णदेव राय और तेनालीरामन के बीच शतरंज का खेल सजा दिया जाता है और दरबारी चारों तरफ बैठ जाते हैं। राजा चाल चलते हैं और फिर तेनाली, परंतु तेनाली को तो खेलना आता ही नहीं था। इसी कारण वो बिना सोचे समझे चाल चल रहे थे और राजा से मात खा रहे थे जिसे देखकर राजा को बहुत क्रोध आ रहा था क्योंकि दरबारी तेनाली को फंसाने के लिए बोल रहे थे कि तेनाली जानबूझकर हार रहे हैं।
यह बात राजा को अच्छी नहीं लगी, उन्होंने गुस्से में शतरंज और मोहरे फेंक दिए और अपना अपमान करने के जुर्म में तेनाली का दरबार में सिर के मुंडन की सजा सुनाई। तेनाली की सजा सुनकर सभी दरबारी प्रसन्न हो गए क्योंकि उनकी चाल सफल हो गई थी।
(तीसरा दृश्य)
अगले दिन दरबार में नाई को बुलाया गया और तेनाली के बाल उतारने को कहा गया। सभी दरबारी जिन्होंने यह चाल चली थी वे सभी आज बहुत खुश थे। तभी तेनाली ने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए राजा से कहा कि उसके बालों पर पाँच हजार अशर्फियाँ उधार हैं ऐसे में बिना उधार के भुगतान किए वह कैसे बाल उतरवाए ? यह बात सुनकर राजा ने राजकोष से उसे पाँच हजार अशर्फियाँ दिलवाई और फिर बाल उतारने का कार्यक्रम शुरू हुआ। इस बार तेनाली ईश्वर का जाप करने बैठ गए, तो राजा ने कारण जानना चाहा।
तेनाली ने कहा हमारे यहाँ माता-पिता के जीवित रहते मुंडन नहीं करवाते क्योंकि मुंडन से पहले उनकी मृत्यु हो सकती है और मेरे माता – पिता तो आप ही हैं इसलिए आपके लिए प्रार्थना कर रहा हूँ । यह सुनकर -राजा डर गए और उन्होंने तेनाली की सजा माफ़ कर दी। इस प्रकार तेनाली ने अपनी चतुराई से फिर से दरबारियों को मात दी।

यह नाटक तेनालीराम की चतुराई और बुद्धिमत्ता को दर्शाता है। कहानी की शुरुआत राजा कृष्णदेव राय के दरबार से होती है, जहाँ कुछ दरबारी तेनालीराम से ईर्ष्या करते हैं, क्योंकि राजा तेनाली की प्रशंसा करते रहते हैं। वे तेनाली को नीचा दिखाने के लिए एक योजना बनाते हैं और राजा को यह यकीन दिलाते हैं कि तेनाली शतरंज का बड़ा खिलाड़ी है। राजा तेनाली को शतरंज खेलने के लिए चुनौती देते हैं | तेनाली मना करता है कि वह शतरंज खेलना नहीं जानता, लेकिन फिर भी वह राजा के साथ खेल में भाग लेता है ।
तेनाली की गलत चालें राजा को परेशान कर देती हैं। राजा इसे अपना अपमान समझते हैं और क्रोधित होकर तेनाली को सजा देने का निर्णय लेते हैं कि उसका दरबार में मुंडन (सिर मुंडवाना) किया जाएगा। मुंडन के समय तेनाली अपनी चतुराई से स्थिति को सँभालता है। वह राजा से कहता है कि हमारे यहाँ माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर ही मुंडन होता है। महाराज अब आप ही मेरे माता-पिता हैं। आप सामने विराजमान हैं। फिर मुंडन कैसे कराऊँ? इधर मेरा मुंडन हो, उधर आप स्वर्ग सिधार गए तो। यह सुनकर राजा ने घबराकर अपना दंड वापस लिया और उसे इनाम भी दिया।
शतरंज में मात शब्दार्थ
(पहला दृश्य)
परामर्शदाता – सलाह देने वाला ।
विदूषक – हँसी-मजाक करने वाला ।
विरूद्ध – विरोध में।
मुट्ठी में करना – वश में करना ।
सिर से भूत उतारना – नशा उतारना ।
नीचा दिखाना – अपमानित करना ।
तरकीब – योजना ।
(दूसरा दृश्य)
मात खाना- हारना ।
चाल-चलना – शतरंज की बाजी चलना।
जुर्म – अपराध ।
चाल सफल होना – चालाकी काम आना।
(तीसरा दृश्य)
राजकोष – राजा का खजाना।
मुंडन – बाल उतारना ।
दरबार – राजा का न्याय और सभा का स्थान;
दरबारी – राजा की सभा में बैठने वाला व्यक्ति;
शरारत – मज़ाक या चालाकी से की गई हरकत ;
चाल – शतरंज में मोहरे को चलाने का तरीका;
मुकाबला – खेल या लड़ाई में एक-दूसरे से भिड़ना;
न्योता – बुलावा या आमंत्रण;

अस्वीकार – मना करना;
असमंजस – सोच में पड़ जाना, समझ न आना;
अनाड़ी – जो काम ठीक से न करता हो;
मूढ़ता – बेवकूफी;
अपमान – बेइज़्ज़ती;
मुंडन – सिर के बाल कटवाना;
अस्त्र-शस्त्र – हथियार;
दंड – सज़ा,
क्षमा – माफ करना;
चतुराई – समझदारी और होशियारी;
दीर्घायु – लंबी उम्र वाला;
अशर्फी – पुराने समय का सोने का सिक्का;
मात देना – हराना ।