Students prefer Class 8 Hindi Extra Question Answer Malhar Chapter 10 तरुण के स्वप्न Extra Questions and Answers that are written in simple and clear language.
Class 8 Hindi तरुण के स्वप्न Extra Question Answer
Class 8 Hindi Chapter 10 Extra Question Answer तरुण के स्वप्न
NCERT Class 8 Hindi Chapter 10 Extra Questions अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लेखक ने किस नेता के स्वप्न का उल्लेख किया है?
उत्तर:
लेखक ने स्वर्गीय देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न का उल्लेख किया है।
प्रश्न 2.
लेखक अपने स्वप्न की प्रेरणा से कौन-से कार्य करते हैं?
उत्तर:
लेखक अपने स्वप्न की प्रेरणा से उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं, लिखते हैं, भाषण देते हैं और काम-काज करते हैं।
प्रश्न 3.
लेखक कैसा समाज चाहता है ?
उत्तर:
लेखक एक नया सर्वांगीण स्वाधीन, संगठित समाज चाहता है।
प्रश्न 4.
आदर्श समाज में नारी को पुरुषों के समान क्या मिलना चाहिए?
उत्तर:
आदर्श समाज में नारी को पुरुषों की तरह समान अधिकार मिलने चाहिए और उन्हें समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा लेना चाहिए ।
प्रश्न 5.
लेखक युवाओं को उपहार में क्या देता है?
उत्तर:
लेखक युवाओं को अपना स्वप्न उपहार में देता है।
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तरुण के स्वप्न Class 8 Hindi Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
“वह मरण है स्वर्ग समान” – इस कथन का क्या आशय है? सुभाषचंद्र बोस इस पंक्ति से क्या प्रेरणा देना चाहते हैं?
उत्तर:
इस कथन का आशय है कि अपने महान आदर्शों और राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने के लिए यदि मृत्यु भी आ जाए, तो वह स्वर्ग के समान पवित्र और गौरवपूर्ण है। सुभाषचंद्र बोस इस पंक्ति से यह प्रेरणा देना चाहते हैं कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटना चाहिए, यहाँ तक कि अपने जीवन का त्याग करने से भी नहीं। यह पंक्ति सर्वोच्च बलिदान और निस्स्वार्थ राष्ट्रप्रेम की भावना को दर्शाती है।
प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस के आदर्श समाज की कल्पना आज के भारतीय समाज से कितनी भिन्न है? अपने विचार व्यक्त करें।
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस के आदर्श समाज की कल्पना आज के भारतीय समाज से काफी भिन्न है, हालाँकि कुछ समानताएँ भी हैं। वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और श्रम व कर्म की पूरी मर्यादा हो। आज भी भारतीय समाज में जातिभेद, आर्थिक विषमता और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, हालाँकि संविधान में सभी को समान अधिकार दिए गए हैं और शिक्षा तथा उन्नति के अवसर बढ़े हैं। बोस का स्वप्न एक पूर्णत: आदर्श समाज का था, जिसे प्राप्त करने के लिए आज भी बहुत प्रयास करने होंगे।
प्रश्न 3.
लेखक ने अपने स्वप्न को “नित्य एवं अखंड सत्य” क्यों कहा है? इसका क्या महत्व है?
उत्तर:
लेखक ने अपने स्वप्न को “ नित्य एवं अखंड सत्य” इसलिए कहा है क्योंकि यह कोई क्षणिक कल्पना या व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि एक शाश्वत और अटल आदर्श है जिसके लिए वे पूर्णत: समर्पित हैं। इसका महत्व यह है कि यह स्वप्न केवल उनके जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सार्वभौमिक और कालातीत लक्ष्य है जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा। यह दर्शाता है कि उनके लिए यह स्वप्न केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक अटल विश्वास और जीवन का परम उद्देश्य है, जिसकी प्राप्ति के लिए वे किसी भी त्याग को तैयार हैं।
तरुण के स्वप्न Extra Questions दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
सुभाषचंद्र बोस द्वारा परिकल्पित आदर्श समाज की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस द्वारा परिकल्पित आदर्श समाज की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- सर्वांगीण स्वाधीनता: समाज पूर्ण रूप से स्वतंत्र और संगठित होगा, जहाँ व्यक्ति किसी भी प्रकार के बाहरी या आंतरिक दबाव से मुक्त होगा ।
- व्यक्तिगत मुक्तिः प्रत्येक व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त होगा और समाज के अनावश्यक दबावों से प्रभावित नहीं होगा।
- जातिभेद का अभाव: समाज में जाति या किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होगा, सभी समान होंगे।
- नारी सशक्तीकरणः नारी को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त होंगे और वे समाज तथा राष्ट्र की सेवा में पुरुषों के समान ही हिस्सा लेंगी।
- आर्थिक समानता: समाज में आर्थिक विषमता नहीं होगी, जिससे सभी को समान रूप से जीवनयापन के अवसर मिले।
- शिक्षा और उन्नति के समान अवसरः प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करने और उन्नति करने के समान अवसर मिलेंगे, जिससे कोई भी अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके।
- श्रम और कर्म की मर्यादाः समाज में श्रम और कर्म का पूरा सम्मान होगा, जिससे कार्य करने वालों को उचित प्रतिष्ठा मिले।
- आलस्य और अकर्मण्यता का अभाव : आलसी और अकर्मण्य व्यक्तियों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं होगा, जिससे सभी कर्मठ और सक्रिय रहें।
संक्षेप में बोस एक ऐसे समतावादी, प्रगतिशील और स्वतंत्र समाज की कल्पना करते हैं जहाँ हर व्यक्ति को गरिमा और अवसर मिले।
प्रश्न 2.
लेखक एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना करता है। जो “विश्व-मानव के समक्ष आदर्श समाज और आदर्श – राष्ट्र के रूप में गण्य होगा।” इस कथन का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
इस कथन से सुभाषचंद्र बोस की दूरदर्शिता और वैश्विक दृष्टिकोण स्पष्ट होता है। वे केवल भारत की स्वतंत्रता क सीमित नहीं थे, बल्कि एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जो अपनी आंतरिक शक्ति और आदर्शों के बल पर विश्व पटल पर एक मिसाल बने।
- विजातीय प्रभाव से मुक्तिः उनका राष्ट्र किसी भी विदेशी या पराये प्रभाव से पूर्णत: मुक्त होगा, जो उसकी अपनी पहचान और संस्कृति को बनाए रखेगा।
- स्वदेशी समाज का यंत्रः राष्ट्र अपने स्वदेशी मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित होगा, जो भारतवासियों की समस्याओं को दूर करेगा और उनके आदर्शों को साकार करेगा।
- वैश्विक आदर्श: यह राष्ट्र केवल अपनी समस्याओं को हल करने या अपने आदर्शों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह विश्व मानव के समक्ष एक ‘ आदर्श – समाज’ और ‘आदर्श – राष्ट्र’ के रूप में गिना जाएगा।
- मानवतावादी दृष्टिकोण: यह दर्शाता है कि बोस का राष्ट्रवाद संकीर्ण नहीं था, बल्कि उसमें एक व्यापक मानवतावादी दृष्टिकोण था । वे चाहते थे कि स्वतंत्र भारत विश्व शांति और मानव कल्याण में भी योगदान दे। यह कल्पना भारत को केवल एक स्वतंत्र देश के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में देखती है जो विश्व को सही दिशा दिखा सके।
प्रश्न 3.
सुभाषचंद्र बोस ने अपने स्वप्न को साकार करने के लिए किन-किन त्यागों और कठिनाइयों को सहने की बात कही है? विस्तार से समझाइए |
उत्तर:
सुभाषचंद्र बोस अपने आदर्श समाज और राष्ट्र के स्वप्न को साकार करने के लिए किसी भी कीमत को चुकाने के लिए तैयार थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस सत्य की प्रतिष्ठा के लिए-
- सबकुछ किया जा सकता है: इसका अर्थ है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है, कोई भी प्रयास अपर्याप्त नहीं होगा ।
- हर प्रकार का त्याग किया जा सकता है: इसमें व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं, धन-संपत्ति, परिवार और यहाँ तक कि जीवन का भी त्याग शामिल है। वे अपने लक्ष्य के लिए किसी भी बलिदान से पीछे हटने को तैयार नहीं थे ।
- हर संकट को सहा जा सकता है: इस मार्ग में आने वाली हर प्रकार की विपत्ति, मुसीबत, विरोध और कठिनाई को सहन करने की क्षमता होनी चाहिए। चाहे वह शारीरिक कष्ट हो, मानसिक पीड़ा हो, या सामाजिक बहिष्कार हो, वे सब कुछ सहने के लिए तत्पर थे।
- ‘मरण है स्वर्ग समान’: यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदू है। वे कहते हैं कि इस स्वप्न को सार्थक बनाने के दौरान यदि मृत्यु भी आ जाए, तो वह स्वर्ग के समान पवित्र और गौरवपूर्ण है। यह उनकी सर्वोच्च निष्ठा और निस्स्वार्थ बलिदान की भावना को दर्शाता है।
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प्रश्न 4.
यह पाठ युवाओं को क्या संदेश देता है? उनके लिए इस स्वप्न का क्या महत्व है?
उत्तर:
यह पाठ विशेष रूप से युवाओं को एक शक्तिशाली संदेश देता है-
- स्वप्न देखने और उसे साकार करने की प्रेरणाः लेखक युवाओं को अपने पूर्वज देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न का उत्तराधिकारी मानते हुए उन्हें भी एक महान स्वप्न देखने और उसे साकार करने के लिए प्रेरित करते हैं।
- कर्मठता और सक्रियता का महत्वः यह पाठ युवाओं को आलस्य और अकर्मण्यता त्यागकर श्रम और कर्म की मर्यादा को समझने तथा सक्रिय रूप से राष्ट्र निर्माण में भाग लेने का आह्वान करता है।
- बलिदान और निस्स्वार्थता की भावनाः लेखक उन्हें बताता है कि बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए त्याग और संकट सहने पड़ते हैं, और इस मार्ग में मृत्यु भी ‘स्वर्ग समान’ हो सकती है। यह उन्हें निस्स्वार्थ भाव से देश सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।
- आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धताः युवाओं को एक सर्वांगीण स्वाधीन, संगठित और समतावादी समाज तथा राष्ट्र के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया गया है।
- जीवन को सार्थक बनानाः लेखक कहते हैं कि सही स्वप्न उनके क्षुद्र जीवन को भी सार्थक बनाता है। यह युवाओं को सिखाता है कि महान आदर्शों के लिए जीना ही जीवन का वास्तविक अर्थ है।
युवाओं के लिए इस स्वप्न का महत्व यह है कि यह उन्हें एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने, राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने और एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है। यह उन्हें व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सामूहिक कल्याण के लिए कार्य करने की दिशा दिखाता है।
प्रश्न 5.
पाठ के शीर्षक ‘तरुण के स्वप्न’ की सार्थकता पर प्रकाश डालिए और बताइए कि यह शीर्षक पाठ के मूल भाव को कैसे व्यक्त करता है।
उत्तर:
पाठ के शीर्षक ‘तरुण के स्वप्न’ अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है, जो पाठ के मूल भाव को गहराई से व्यक्त करता है। तरुण का शाब्दिक अर्थ युवा या नौजवान होता है । यह परिवर्तन, गतिशीलता, ऊर्जा और निरंतरता का प्रतीक है। जिस प्रकार समुद्र में एक तरंग उठती है और आगे बढ़ती है, उसी प्रकार विचार भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है और समाज में परिवर्तन लाता है।
‘स्वप्न’ यहाँ केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि एक महान आदर्श, एक लक्ष्य और एक दूरदृष्टि का प्रतीक है जिसे साकार करने की प्रबल इच्छा है।
शीर्षक की सार्थकताः शीर्षक ‘तरुण के स्वप्न’ यह दर्शाता है कि सुभाषचंद्र बोस का स्वप्न कोई स्थिर या जड़ विचार नहीं हैं, बल्कि एक जीवंत, गतिशील और परिवर्तनकारी शक्ति थी। यह स्वप्न एक तरंग की तरह समाज में फैला, लोगों को प्रेरित किया और उन्हें स्वतंत्रता तथा एक आदर्श राष्ट्र के निर्माण के लिए एकजुट किया।
यह स्वप्न एक व्यक्ति (चित्तरंजन दास) से शुरू हुआ, फिर सुभाषचंद्र बोस ने उसे आगे बढ़ाया और अंततः इसे युवाओं तक पहुँचाया गया, जिससे यह एक निरंतर प्रवाहित होने वाली प्रेरणा बन गई। यह शीर्षक पाठ के मूल भाव को पूरी तरह से व्यक्त करता है, जो एक ऐसे आदर्श समाज और राष्ट्र की कल्पना है जिसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास, ऊर्जा और बलिदान की आवश्यकता है यह शीर्षक पाठ में वर्णित आशा, प्रेरणा और गतिशीलता की भावना को भी दर्शाता है।
Class 8 Hindi Chapter 10 Extra Questions and Answers अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. वह स्वप्न ‘या आदर्श क्या है? हम चाहते हैं, एक नया सर्वांगीण स्वाधीन, संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र । उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं। उस समाज में जातिभेद का स्थान नहीं हो, उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे और समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा ले, उस समाज में अर्थ की विषमता न हो, उस समाज में प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा और उन्नति का समान सुअवसर पाए । जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
गद्यांश में वर्णित आदर्श समाज की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गद्यांश में वर्णित आदर्श समाज की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं : भेदभाव रहित समाज : इस समाज में जातिभेद का कोई स्थान नहीं है और व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त होता है। समान अधिकार और अवसरः नारी पुरुषों के समान अधिकार का उपयोग करती है और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा तथा उन्नति के समान अवसर प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 2.
गद्यांश के अनुसार, नारी की मुक्ति और भूमिका को किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकारों का उपभोग करती है। वह पुरुषों के समान ही समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा लेती है।
प्रश्न 3.
गद्यांश आदर्श समाज में आर्थिक विषमता के संबंध में क्या कहा गया है और इसका क्या महत्व है?
उत्तर:
गद्यांश में आदर्श समाज में आर्थिक विषमता के संबंध में कहा गया है कि समाज में अर्थ की विषमता न हो। इसका महत्व यह है कि आर्थिक समानता या न्यूनतम विषमता एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है जहाँ सभी को समान अवसर मिलें और कोई भी व्यक्ति केवल आर्थिक स्थिति के कारण पीछे न छूटे।
प्रश्न 4.
‘श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा’ से लेखक का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा’ से लेखक का अभिप्राय है कि समाज में परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा को पूरा सम्मान दिया जाए। यह दर्शाता है कि आदर्श समाज में व्यक्ति अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार कर्मशील होगा और कोई भी आलसी या अकर्मण्य नहीं रहेगा।
प्रश्न 5.
गद्यांश में वर्णित राष्ट्र के निर्माण के लिए किस प्रकार के व्यक्तियों की आवश्यकता पर बल दिया गया है?
उत्तर:
गद्यांश में वर्णित राष्ट्र के निर्माण के लिए ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता पर बल दिया गया है जो हर दृष्टि से मुक्त हों, भेदभाव से परे हों, समान अधिकारों का उपभोग करते हों, शिक्षा और उन्नति के समान अवसर पाते हों तथा परिश्रमी एवं कर्मठ हों। आलसी और अकर्मण्य व्यक्तियों के लिए इस राष्ट्र में कोई स्थान नहीं है।
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Class 8 Hindi Chapter 10 Extra Questions for Practice
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
सुभाषचंद्र बोस ने देश की आज़ादी के लिए किस विदेशी देश से मदद ली थी?
(क) जापान
(ख) ब्रिटेन
(ग) फ्रांस
(घ) रूस
प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस का जन्म कब हुआ था?
(क) 23 जनवरी 1889
(ख) 15 अगस्त 1900
(ग) 2 अक्टूबर 1869
(घ) 26 जनवरी 1950
प्रश्न 3.
सुभाषचंद्र बोस को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है ?
(क) नेताजी
(ख) महात्मा
(ग) सरदार
(घ) बाबू
प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस ने किस पार्टी का नेतृत्व किया था?
(क) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
(ख) कम्युनिस्ट पार्टी
(ग) मुस्लिम लीग
(घ) भाजपा
प्रश्न 5.
‘तरुण के स्वप्न’ में बोस का कौन-सा पहलू मुख्य रूप से दर्शाया गया है ?
(क) उनका बचपन
(ख) उनकी युवावस्था और देशभक्ति
(ग) उनका राजनीतिक करियर
(घ) उनका परिवार
प्रश्न 6.
सुभाषचंद्र बोस ने किस आंदोलन का नेतृत्व किया?
(क) असहयोग आंदोलन
(ख) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(ग) आज़ाद हिंद फौज
(घ) दांडी मार्च
प्रश्न 7.
सुभाषचंद्र बोस का मंत्र क्या था?
(क) “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है ”
(ख) “देश के लिए कुछ भी करें”
(ग) “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”
(घ) “शांति से लड़ो”
अति लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
नेताजी सुभाषचंद्र बोस किस प्रकार के समाज और राष्ट्र का सपना देखते थे?
प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस ने युवाओं को कब और कहाँ संबोधित किया था ?
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प्रश्न 3.
देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न को सुभाषचंद्र बोस कैसे देखते थे?
प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस के अनुसार, उनका स्वप्न उन्हें क्या देता है?
लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
सुभाषचंद्र बोस द्वारा परिकल्पित आदर्श समाज कैसा था ?
प्रश्न 2.
नारी मुक्ति और समान अवसर के विषय में नेताजी के क्या विचार थे?
प्रश्न 3.
नेताजी सुभाषचंद्र बोस अपने स्वप्न को साकार करने के लिए क्या-क्या करने को तैयार थे ?
प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस ने युवाओं से अपने स्वप्न को स्वीकार करने का आह्वान क्यों किया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
‘तरुण के स्वप्न’ पाठ के आधार पर सुभाषचंद्र बोस के आदर्श समाज और राष्ट्र की विस्तृत परिकल्पना का वर्णन कीजिए। इसमें शिक्षा, अवसर, जातिभेद, नारी समानता और आर्थिक विषमता के संदर्भ में उनके विचारों को स्पष्ट कीजिए ।
प्रश्न 2.
सुभाषचंद्र बोस ने अपने स्वप्न को युवाओं को क्यों सौंपा ? इस स्वप्न को उन्होंने अपनी शक्ति और आनंद का स्रोत क्यों बताया है? विस्तृत रूप से समझाइए ।
प्रश्न 3.
देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न का उल्लेख करते हुए, सुभाषचंद्र बोस ने अपने स्वप्न और उसकी प्रेरणा के बारे में क्या कहा है? इस पाठ के संदर्भ में उनके विचारों का विश्लेषण कीजिए ।
प्रश्न 4.
सुभाषचंद्र बोस के अनुसार, एक राष्ट्र को किस प्रकार के प्रभावों से मुक्त होना चाहिए और उसे कैसे कार्य करने चाहिए? आदर्श राष्ट्र के संबंध में उनके विचारों का विस्तार से विश्लेषण करें।