Students prefer Class 8 Hindi Extra Question Answer Malhar Chapter 2 दो गौरैया Extra Questions and Answers that are written in simple and clear language.
Class 8 Hindi दो गौरैया Extra Question Answer
Class 8 Hindi Chapter 2 Extra Question Answer दो गौरैया
NCERT Class 8 Hindi Chapter 2 Extra Questions अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
पिताजी ने पहली बार गौरैया को कैसे भगाने की कोशिश की?
उत्तर:
पिताजी ने पहली ज़ोर से ताली बजाकर और मुँह से आवाज़ निकलकर के भगाने की कोशिश की।
प्रश्न 2.
गौरैया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया था?
उत्तर:
गौरैया ने अपना घोंसला पंखे के ऊपर बनाया था।
प्रश्न 3.
माँ ने गौरैया के बारे में क्या कहा कि उन्हें बाहर क्यों नहीं निकालना चाहिए?
उत्तर:
माँ ने कहा कि उन्हें अपने बच्चों के लिए जगह चाहिए।
प्रश्न 4.
अंत में पिताजी का क्या रवैया बदला ?
उत्तर:
अंत में पिताजी ने गौरैयों को अपना लिया और उनके प्रति स्नेह दिखाने लगे।
प्रश्न 5.
लेखक को अपना घर किसके समान लगता था?
उत्तर:
लेखक को अपना घर सराय के समान लगता था।
प्रश्न 6.
बूढ़ा चूहा कहाँ बैठना पसंद करता था?
उत्तर:
बूढ़ा चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता था।
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प्रश्न 7.
लेखक के घर में चमगादड़ क्या करते हुए दिखाई देते थे?
उत्तर:
लेखक के घर में चमगादड़ पंख फैलाकर कसरत करते हुए दिखाई देते थे।
प्रश्न 8.
पहली बार दोनों गौरैयाँ लेखक के घर में क्यों आई थीं?
उत्तर:
लेखक के घर में दोनों गौरैयाँ इसलिए आई थीं. ताकि घोंसला बनाने की जगह ढूँढ़ सकें।
प्रश्न 9.
पिताजी के हाथ में लाठी देखकर गौरैयों ने क्या किया?
उत्तर:
पिताजी के हाथ में लाठी देखकर एक गौरैया किचन के दरवाजे पर जबकि दूसरी सीढ़ियों वाले दरवाजे पर जा बैठी।
दो गौरैया Class 8 Hindi Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
पिताजी गौरैयों के घर में आने से इतने परेशान क्यों थे?
उत्तर:
पिताजी को लगता था कि गौरैयाँ घर में शोर मचाती हैं और घर को गंदा करती हैं, जिससे उन्हें बहुत परेशानी होती थी । उन्हें लगता था कि उनका घर एक सराय बन गया है जहाँ कोई भी पक्षी आकर ठहर सकता है।
प्रश्न 2.
माँ का गौरैयों के प्रति क्या दृष्टिकोण था ? यह पिताजी से कैसे भिन्न था ?
उत्तर:
माँ का गौरैयों के प्रति दयालु और समझदार दृष्टिकोण था। वह समझती थीं कि गौरैयों को अपने बच्चों के लिए जगह चाहिए और उन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। यह पिताजी के दृष्टिकोण से भिन्न था, जो उन्हें घर से भगाने पर तुले हुए थे।
प्रश्न 3.
गौरैयों को घर से भगाने के लिए पिताजी ने क्या-क्या प्रयास किए?
उत्तर:
पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए ताली बजाने से लेकर लाठी का इस्तेमाल करने तक अनेक प्रकार के प्रयास किए।
प्रश्न 4.
कहानी के अंत में पिताजी का हृदय परिवर्तन कैसे होता है?
उत्तर:
जब पिताजी “चीं-चीं-चीं !!!” की आवाज़ सुनते हैं और देखते हैं कि घोंसले में गौरैयों के बच्चे हैं तो उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है। वे उन बच्चों को कोई क्षति नहीं पहुँचाना चाहते हैं और अंत में गौरैयों को अपना लेते हैं।
प्रश्न 5.
पक्षियों के बारे में लेखक के पिताजी का क्या कहना था?
उत्तर:
पक्षियों के बारे में लेखक के पिताजी का यह कहना था कि जो भी पक्षी पहाड़ियों घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।
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प्रश्न 6.
लेखक के घर में बिल्ली अन्य जंतुओं से किस तरह अलग थी?
उत्तर:
लेखक के घर में अन्य जीव-जंतु डेरा जमाकर रहते थे, जबकि बिल्ली को घर तो पसंद था, पर वह रहती नहीं थी। वह मन होने पर दूध पी जाती थी और मन न होने पर बाहर से ही झाँककर चली जाती थी।
प्रश्न 7.
चिड़ियों को निकालने के लिए पिताजी ने पहली बार क्या-क्या प्रयास किए?
उत्तर:
चिड़ियों को निकालने के लिए पिताजी ने पहली बार पंखे के नीचे खड़े होकर ताली बजाई। उन्होंने मुँह से ‘शू-शू’ कहा, अपनी बाँहें ऊपर उठाई और खड़े-खड़े ही कूदने लगे।
प्रश्न 8.
‘अब तो रोज यही कुछ होने लगा।’-के आधार पर बताइए कि लेखक के घर में क्या होने लगा था?
उत्तर:
लेखक के घर में प्रतिदिन गौरैयों को दिन में बाहर कर दिया जाता था। वे दिनभर बाहर रहती थीं, परंतु रात में जब सब लोग सो रहे होते थे, तब पता नहीं कहाँ से, किस रास्ते से घर में आ जाती थीं।
दो गौरैया Extra Questions दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
“दो गौरैया” कहानी में मानवीय और प्राकृतिक दुनिया के सह-अस्तित्व को कैसे दर्शाया गया है ? विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर:
“दो गौरैया” कहानी मानवीय और प्राकृतिक दुनिया के सह-अस्तित्व को बड़े ही मार्मिक ढंग से दर्शाती है। शुरुआत में, पिताजी पक्षियों को अपने घर में आने से रोकना चाहते हैं, उन्हें उपद्रव का कारण मानते हैं और उन्हें भगाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। यह मानव की प्रकृति को नियंत्रित करने की इच्छा और स्वार्थ को दर्शाता है। हालाँकि, माँ और लेखक जैसे अन्य सदस्य पक्षियों के प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं, जो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता को दर्शाता है।
कहानी में गौरैयों के बार-बार घर में लौटने और घोंसला बनाने की जिद्द, प्रकृति की अपनी जगह बनाने की क्षमता को दर्शाती है। अंततः, जब पिताजी को गौरैयों के बच्चों के प्रति अपनी गलती का एहसास होता है, तो वे उन्हें स्वीकार कर लेते हैं। यह दर्शाता है कि मानव को प्रकृति के साथ सहयोग करना चाहिए, न कि उसे दबाना चाहिए। कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति के जीवों को भी अपना स्थान और जीवन जीने का अधिकार है और हमें उनके साथ सद्भावपूर्वक रहना सीखना चाहिए।
प्रश्न 2.
कहानी में पिताजी के चरित्र में किस प्रकार का विकास होता है? उनके प्रारंभिक और अंतिम व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर:
कहानी में पिताजी के चरित्र में एक महत्वपूर्ण विकास देखने को मिलता है। कहानी की शुरुआत में, पिताजी एक कठोर, जिद्दी और प्रकृति के प्रति असहिष्णु व्यक्ति के रूप में चित्रित किए गए हैं। वे गौरैया को अपने घर में घुसपैठिया मानते हैं और उन्हें भगाने के लिए कई आक्रामक तरीके अपनाते हैं।
वे उन्हें केवल उपद्रव और शोर मचाने वाले जीव मानते हैं। उनका शुरुआती व्यवहार बताता है कि वे अपने घर को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते।
हालाँकि, कहानी के अंत तक, उनका हृदय परिवर्तन होता है। जब वे गौरैया के बच्चों को घोंसले में देखते हैं और उनकी असहाय ‘चीं-चीं-चीं !!! ‘ की आवाज़ सुनते हैं, तो उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है।
यह घटना उन्हें एहसास कराती है कि ये सिर्फ पक्षी नहीं, बल्कि असहाय जीव हैं जिन्हें सुरक्षा और आश्रय की आवश्यकता है। उनका गुस्सा पिघल जाता है। इसके बाद, वे गौरैयों को परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकार कर लेते हैं और उनके प्रति स्नेह दिखाते हैं। यह विकास दर्शाता है कि कैसे सहानुभूति और समझ व्यक्ति के दृष्टिकोण को बदल सकती है और उन्हें प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है।
प्रश्न 3.
“दो गौरैया” कहानी से हमें क्या नैतिक शिक्षा मिलती है? अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
“दो गौरैया” कहानी हमें कई महत्वपूर्ण नैतिक शिक्षाएँ देती है। सबसे पहले, यह हमें प्रकृति और उसके जीवों के प्रति दयालुता और सहानुभूति रखने की सीख देती है। हमें समझना चाहिए कि पृथ्वी पर हर जीव का अपना स्थान है और उन्हें भी जीने का अधिकार है। कहानी बताती है कि हमें स्वार्थ और अपनी सुविधा से ऊपर उठकर अन्य जीवों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए ।
दूसरी बात, कहानी हमें यह सिखाती है कि अकसर हमारे शुरुआती विचार या धारणाएँ गलत हो सकती हैं। जैसे पिताजी शुरुआत में गौरैयों को केवल एक परेशानी मानते थे, लेकिन बाद में उन्हें उनकी मासूमियत और जरूरतों का एहसास हुआ। यह हमें खुले विचारों वाला बनने और चीजों को दूसरे के नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है ।
तीसरी नैतिक शिक्षा यह है कि कभी-कभी हमें अपने अहंकार और जिद को छोड़कर दूसरों की जरूरतों को समझना चाहिए। पिताजी का अपनी जिद छोड़ना और गौरैया को स्वीकार करना, यह दर्शाता है कि आपसी समझ और प्रेम से ही सद्भाव स्थापित हो सकता है। संक्षेप में, कहानी हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना, दूसरों के प्रति दयालुता दिखाना और अपनी गलतियों से सीखना सिखाती है।
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प्रश्न 4.
कहानी में लेखक ने किस प्रकार की भाषा शैली का प्रयोग किया है? उदाहरण सहित समझाइए |
उत्तर:
कहानी में लेखक ने सरल, सहज और बोलचाल की हिंदी भाषा शैली का प्रयोग किया है, जिससे कहानी पाठक के लिए आसानी से बोधगम्य और आकर्षक बन जाती है।
- सरलता और सहजता : लेखक ने जटिल वाक्यों या कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया है। भाषा रोजमर्रा के जीवन में उपयोग की जाने वाली है, जो कहानी को एक घरेलू और आत्मीयतापूर्ण माहौल देती है। उदाहरण के लिए, “पिताजी ने फिर लाठी उठाई और गौरैयों पर हमला बोल दिया। या माँ तालियाँ बजाने लगीं।” ये वाक्य सीधे और समझने में आसान हैं।
- संवादात्मक शैली: कहानी में संवादों का भरपूर उपयोग किया गया है, जो पात्रों के स्वभाव और भावनाओं को स्पष्ट करते हैं। माँ और पिताजी के बीच के संवाद कहानी को जीवंत बनाते हैं और उनके विचारों के टकराव को दर्शाते हैं; जैसे ” आज दरवाजे बंद रखो” पिताजी का आदेश और माँ का कटाक्षपूर्ण जवाब, “तुम तो बड़े समझदार हो जी… “।
- चित्रोपमताः लेखक ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया है जो पाठक के मन में चित्र बना देती है। “घोंसले में से अनेक तिनके बाहर की ओर लटक रहे थे, गौरैया ने सजावट के लिए मानो झालर टाँग रखी हो।” यह वाक्य घोंसले का सजीव चित्रण करता है।
- भावनात्मक अभिव्यक्तिः भाषा भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है। पिताजी का गुस्सा, माँ की सहानुभूति और अंत में पिताजी का पश्चाताप – ये सभी भाव भाषा के माध्यम से स्पष्ट रूप से उजागर होते हैं।” किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए” पिताजी का गुस्सा दर्शाता है, जबकि “चीं-चीं-चीं!!!” बच्चों की असहायता दर्शाती है।
- हास्य का पुटः माँ के संवादों में कभी-कभी हास्य का पुट भी मिलता है, जैसे जब वह कहती हैं, “अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे ! ” यह भाषा को रोचक बनाता है। कुल मिलाकर, लेखक की भाषा शैली कहानी को पाठक से जोड़ने में सफल रहती है, जिससे कहानी का संदेश प्रभावी ढंग से पहुँचता है।
प्रश्न 5.
आपके विचार में, क्या पिताजी का प्रारंभिक व्यवहार उचित था? यदि नहीं, तो उन्हें किस प्रकार प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी ?
उत्तर:
मेरे विचार में, पिताजी का प्रारंभिक व्यवहार बिल्कुल उचित नहीं था। उनका व्यवहार क्रूरतापूर्ण, असंवेदनशील और जिद्दी था। पक्षियों को लाठी से डराना, उनके घोंसले तोड़ना और उन्हें घर से भगाने के लिए हर संभव प्रयास करना, यह सब दर्शाता है कि उनमें प्रकृति और उसके जीवों के प्रति सहिष्णुता की कमी थी। उनका यह मानना कि पक्षी केवल “उपद्रव” करते हैं और घर को गंदा करते हैं, उनके संकीर्ण विचारों को दर्शाता है।
उन्हें अलग तरह से प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी-
- धैर्य और समझदारी: सबसे पहले, उन्हें धैर्य रखना चाहिए था और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए थी कि गौरैया अपने बच्चों के लिए सुरक्षित जगह तलाश रही थी।
- सह-अस्तित्व का भावः उन्हें यह समझना चाहिए था कि घर केवल इंसानों का ही नहीं, बल्कि अन्य जीवों का भी हो सकता है, विशेष रूप से जब वे कोई नुकसान नहीं पहुँचा रहे हों।
- विकल्पों पर विचार : अगर उन्हें सचमुच असुविधा हो रही थी, तो उन्हें गौरैयों को नुकसान पहुँचाए बिना, किसी अन्य तरीके से समाधान खोजना चाहिए था, जैसे कि उन्हें घर के किसी ऐसे हिस्से में सुरक्षित स्थान देना जहाँ उनकी मौजूदगी से कम परेशानी हो, या उन्हें धीरे-धीरे किसी अन्य स्थान पर जाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- सहानुभूतिः सबसे महत्वपूर्ण बात, उन्हें उन नन्हें जीवों के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए थी, जो सिर्फ एक आश्रय की तलाश में थे। माँ का दृष्टिकोण यहाँ अधिक मानवीय और समझदार था, जिसे पिताजी को अपनाना चाहिए था।
प्रश्न 6.
दोनों गौरैयाँ अपना घोंसला उजड़ते असहाय देख रही थीं। इस समय गौरैयों में लेखक ने क्या-क्या बदलाव महसूस किया?
उत्तर:
लेखक के पिताजी लाठी की सहायता से घोंसला उजाड़ने का प्रयास कर रहे थे। दो-चार तिनके गिर भी गए थे। उसी समय लेखक ने बाहर देखा। उसे दोनों गौरैयाँ अपना घोंसला उजड़ते असहाय देख रही थीं।
प्रश्न 7.
लेखक के पिताजी ने गौरैयों का घोंसला तोड़ने का फैसला क्यों किया?
उत्तर:
लेखक के पिताजी ने गौरैयों का घोंसला तोड़ने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वे चाहते थे कि गौरैयाँ उनके घर में आना-जाना बंद कर दें। इसके लिए उन्होंने हर संभव प्रयास भी किया, पर वे असफल रहे। इससे उनकी सहनशीलता खत्म हो गई। उन्हें लगा कि इन चिड़ियों का घोंसला तोड़ने से वे यहाँ नहीं आएँगी और उन्होंने इसका फैसला कर लिया।
प्रश्न 8.
जो काम दोनों गौरैयाँ न कर सकीं, उन दोनों नन्हीं चिड़ियों ने कैसे कर दिखाया?
उत्तर:
लेखक के पिताजी नहीं चाहते थे कि उनके घर में चिड़ियाँ (गौरैयाँ) आ जाएँ। इसके बाद भी जब दोनों वहाँ आकर घोंसला बनाकर रहने लगीं तो पिताजी ने घोंसले को नष्ट करना शुरू कर दिया। दोनों गौरैयाँ असहाय देख रही थीं। उसी समय दोनों नन्हीं गौरैयाँ, जो घोंसले में थीं, चीं-चीं करके चीख उठीं। उनकी चीख सुनते ही पिताजी ने घोंसला तोड़ने का विचार छोड़ ही दिया। इस तरह जो दोनों गौरैयाँ न कर सकीं, उन दोनों नन्हीं चिड़ियों ने कैसे कर दिखाया।
Class 8 Hindi Chapter 2 Extra Questions and Answers अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. “घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं- माँ, पिताजी और मैं । पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है। हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं। आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डालते रहते हैं। जो भी पक्षी पहाड़ियों – घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पर पहुँच जाता है।
जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो। यहाँ कभी तोते पहुँच जाते हैं, तो कभी कौवे और कभी तरह-तरह की गौरैया । वह शोर मचाता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं !”
प्रश्न-
प्रश्न 1.
घर में कौन-कौन से सदस्य रहते हैं ?
उत्तर:
घर में माँ, पिताजी और लेखक रहते हैं।
प्रश्न 2.
पिताजी अपने घर को क्या कहते हैं और क्यों?
उत्तर:
पिताजी अपने घर को सराय कहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि घर में तरह-तरह के पक्षी (तोते, गौरैया आदि) आकर डेरा डालते रहते हैं और वे खुद को वहाँ मेहमान समझते हैं।
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प्रश्न 3.
आँगन में किस पेड़ का जिक्र है ?
उत्तर:
आँगन में आम के पेड़ का जिक्र है।
प्रश्न 4.
पिताजी को पक्षियों का शोर कैसा लगता है?
उत्तर:
पिताजी को पक्षियों का शोर अप्रिय लगता है। वे कहते हैं कि इससे तो कानों के पर्दे फट जाएँ”
प्रश्न 5.
लोग पक्षियों के शोर के बारे में क्या कहते हैं?
उत्तर:
लोग पक्षियों के शोर के बारे में कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं।
2. “पिताजी लाठी उठाए पर्दे के डंडे की ओर लपके। एक गौरैया उड़कर किचन के दरवाजे पर जा बैठी। दूसरी सीढ़ियों वाले दरवाजे पर।
माँ फिर हँस दीं। ‘तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैया को बाहर निकाल रहे हो! एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
अब पिताजी ने मुझे झिड़ककर कहा, ‘तू खड़ा क्या देख रहा है? जा, दोनों दरवाजे बंद कर दे !”
प्रश्न-
प्रश्न 1.
पिताजी ने लाठी उठाकर किस ओर प्रहार किया ?
उत्तर:
पिताजी ने लाठी उठाकर पर्दे के डंडे की ओर प्रहार किया ।
प्रश्न 2.
प्रहार के बाद गौरैयाँ कहाँ-कहाँ जाकर बैठीं ?
उत्तर:
एक गौरैया उड़कर किचन के दरवाजे पर और दूसरी सीढ़ियों वाले दरवाजे पर जाकर बैठी ।
प्रश्न 3.
माँ ने पिताजी से हँसते हुए क्या कहा?
उत्तर:
माँ ने पिताजी से हँसते हुए कहा, “तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुलें हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो। एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
प्रश्न 4.
पिताजी ने लेखक को क्या आदेश दिया कि गौरैयाँ बाहर न निकलें?
उत्तर:
पिताजी ने लेखक को आदेश दिया कि तू खड़ा क्या देखा रहा है ? जा, दोनों दरवाजे बंद कर दे !
प्रश्न 5.
इस घटना से पिताजी का कौन-सा स्वभाव प्रकट होता है?
उत्तर:
इस घटना से पिताजी का जिद्दी स्वभाव प्रकट होता है, जो गौरैयों को किसी भी तरह घर से निकालना चाहते हैं।
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Class 8 Hindi Chapter 2 Extra Questions for Practice
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक के घर में चूहों के बारे में क्या बताया गया है?
(क) वे केवल रात में भागते हैं।
(ख) वे दिन-भर धमा- – चौकड़ी मचाते हैं और कभी रुकते नहीं।
(ग) वे सिर्फ किचन में रहते हैं।
(घ) पिताजी उन्हें पकड़ने की कोशिश करते हैं।
प्रश्न 2.
पिताजी को पक्षियों का शोर कैसा लगता था ?
(क) मधुर संगीत जैसा
(ख) बहुत प्रिय
(ग) इतना कि कानों के पर्दे फट जाएँ
(घ) सामान्य
प्रश्न 3.
पिताजी ने घोंसला तोड़ने के लिए किस चीज पर चढ़कर लाठी का प्रयोग किया?
(क) कुर्सी पर
(ख) सीढ़ी पर
(ग) स्टूल पर
(घ) मेज पर
प्रश्न 4.
कहानी के अंत में पिताजी का हृदय – परिवर्तन कैसे हुआ ?
(क) बच्चों को घोंसले में चीं-चीं-चीं चिल्लाते देखकर
(ख) लेखक के कहने से
(ग) निरर्थक प्रयास से
(घ) माँ की बातों से
अति लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
घर में कौन-कौन से पक्षी डेरा डालते रहते थे?
प्रश्न 2.
पिताजी को घर को क्या कहने में आपत्ति थी ?
प्रश्न 3.
आँगन में कौन – सा पेड़ था ?
प्रश्न 4.
घर में किस जानवर का जिक्र है जो रात भर धमा- चौकड़ी मचाता था ?
प्रश्न 5.
पिताजी ने गौरैयों को भगाने के लिए कौन-सा घरेलू सामान उठाया था?
लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
पिताजी को घर में गौरैयों का आना सराय बनने जैसा क्यों लगता था ?
प्रश्न 2.
माँ पिताजी के गौरैयों को भगाने के प्रयासों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती थीं?
प्रश्न 3.
गौरैयों ने घोंसला कहाँ बनाया था और वह कैसा दिख रहा था ?
प्रश्न 4.
कहानी में बिल्ली का क्या कार्य था ? क्या वह गौरैया को भगाने में सहायक थी ?
प्रश्न 5.
पिताजी ने दरवाजे बंद करने का आदेश क्यों दिया था ?
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
कहानी में माँ और लेखक की भूमिका पिताजी के चरित्र विकास में किस प्रकार सहायक होती है? पाठ से उदाहरण देते हुए समझाइए।
प्रश्न 2.
कहानी किस प्रकार यह दर्शाती है कि प्रकृति स्वयं अपना रास्ता खोज लेती है, भले ही मनुष्य उसे रोकने का कितना भी प्रयास करे? इस संदर्भ में गौरैयों के व्यवहार का वर्णन कीजिए।
प्रश्न 3.
कहानी में पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण में बदलाव को कैसे चित्रित किया गया है? यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रश्न 4.
कहानी में ‘घर’ की अवधारणा किस प्रकार विकसित होती है? यह सिर्फ एक भौतिक संरचना न होकर एक भावनात्मक स्थान कैसे बनता है?
प्रश्न 5.
कहानी में संघर्ष का समाधान किस प्रकार होता है? क्या यह समाधान पूर्ण और स्थायी प्रतीत होता है? यह मानव-प्रकृति संबंध के बारे में क्या दर्शाता है?
प्रश्न 6.
कहानी में “सहनशीलता” और “अहंकार” के गुणों को पात्रों के माध्यम से कैसे दर्शाया गया है? इन गुणों का कहानी के संदेश से क्या संबंध है?