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Class 8 Hindi एक टोकरी भर मिट्टी Extra Question Answer
Class 8 Hindi Chapter 6 Extra Question Answer एक टोकरी भर मिट्टी
NCERT Class 8 Hindi Chapter 6 Extra Questions अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
वृद्धा कहाँ रहती थी?
उत्तर:
ज़मींदार के महल के पास एक झोंपड़ी में ।
प्रश्न 2.
ज़मींदार की क्या इच्छा थी ?
उत्तर:
अपने महल का अहाता वृद्धा की झोंपड़ी तक बढ़ाना।
प्रश्न 3.
वृद्धा का एकमात्र सहारा कौन था ?
उत्तर:
वृद्धा का एकमात्र सहारा उसकी पोती थी।
प्रश्न 4.
ज़मींदार ने वृद्धा की झोंपड़ी पर कैसे कब्ज़ा किया ?
उत्तर:
धूर्ततापूर्ण चाल-चलकर अदालत के द्वारा ज़मींदार ने वृद्धा की झोपड़ी पर कब्ज़ा कर लिया।
प्रश्न 5.
वृद्धा ज़मींदार के पास क्या लेकर आई थी?
उत्तर:
एक खाली टोकरी |
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प्रश्न 6.
वृद्धा ने टोकरी में क्या भरा?
उत्तर:
मिट्टी ।
प्रश्न 7.
ज़मींदार टोकरी क्यों नहीं उठा पाया?
उत्तर:
टोकरी में मिट्टी के साथ वृद्धा के साथ की गई नाइंसाफी का भार था, इसलिए ज़मींदार टोकरी नहीं उठा पाया ।
प्रश्न 8.
वृद्धा के वचनों का ज़मींदार पर क्या असर हुआ ?
उत्तर:
उसकी आँखें खुल गईं और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
प्रश्न 9.
कहानी के अंत में ज़मींदार ने क्या किया?
उत्तर:
ज़मींदार ने वृद्धा से क्षमा माँगी और झोंपड़ी वापस दे दी।
प्रश्न 10.
इस कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
माधवराव सप्रे ।
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Hindi Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
वृद्धा के जीवन की त्रासदी का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वृद्धा के जीवन में कई दुख आए। उसने अपने प्रिय पति और इकलौते पुत्र को अपनी झोंपड़ी में ही खो दिया। बाद में उसकी पतोहू भी एक पाँच वर्ष की कन्या को छोड़कर चल बसी, जिससे उसकी पोती ही उसका एकमात्र सहारा रह गई थी। ऐसे में, ज़मींदार ने उसकी एकमात्र संपत्ति, उसकी झोंपड़ी भी छीन ली, जिससे वह पूरी तरह अनाथ और बेसहारा हो गई।
प्रश्न 2.
ज़मींदार ने झोंपड़ी हड़पने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाए?
उत्तर:
ज़मींदार ने पहले तो वृद्धा से झोंपड़ी हटाने के लिए कई बार कहा, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उसने अपनी ‘ज़मींदारी चाल’ चली। उसने वकीलों को रिश्वत देकर या उनका प्रभाव इस्तेमाल करके अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से ज़बरदस्ती निकाल दिया।
प्रश्न 3.
वृद्धा ने ज़मींदार से मिट्टी लेने की अनुमति क्यों माँगी? उसके पीछे क्या भावना थी?
उत्तर:
वृद्धा ने ज़मींदार से मिट्टी लेने की अनुमति इसलिए माँगी, क्योंकि उसकी पोती झोंपड़ी छिन जाने के बाद से भूखी थी और खाना नहीं खा रही थी । वृद्धा को लगा कि यदि वह उसी झोंपड़ी की मिट्टी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाएगी, तो पोती को अपने पुराने घर जैसा महसूस होगा और वह खाना खाने लगेगी। इसके पीछे वृद्धा की अपनी पोती के प्रति गहरी ममता, उसकी भूख मिटाने की छटपटाहट और अपने पुराने घर के प्रति भावनात्मक लगाव की भावना थी।
प्रश्न 4.
ज़मींदार के लिए एक टोकरी मिट्टी उठाना असंभव क्यों हो गया?
उत्तर:
ज़मींदार के लिए एक टोकरी मिट्टी उठाना असंभव इसलिए हो गया, क्योंकि उस टोकरी में केवल भौतिक मिट्टी नहीं थी, बल्कि उसमें वृद्धा के वर्षों के सुख-दुख, उसकी यादें, उसका भावनात्मक जुड़ाव और उसके पूरे जीवन का सार भरा हुआ था। यह भावनाओं का अदृश्य भार था, जो ज़मींदार की शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक भारी था। यह ज़मींदार के लालच और अन्याय का भी प्रतीक था, जिसे वह उठा नहीं पाया।
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प्रश्न 5.
वृद्धा के अंतिम वचन ज़मींदार के हृदय परिवर्तन में कैसे सहायक हुए?
उत्तर:
वृद्धा ने ज़मींदार से कहा कि जब वह एक टोकरी मिट्टी का भार नहीं उठा पा रहा है, तो उस झोपड़ी में मौजूद हज़ारों टोकरियों (वृद्धा के जीवन भर की भावनाओं और दुखों) का भार जन्म भर कैसे उठा पाएगा। ये वचन ज़मींदार के धन – मद को तोड़ने वाले थे। इन्होंने ज़मींदार को उसकी क्रूरता, लालच और मानवीय मूल्यों की अवहेलना का एहसास कराया। इन वचनों ने ज़मींदार की आत्मा को झकझोर दिया, जिससे उसे अपने किए पर गहरा पश्चाताप हुआ और उसका हृदय-परिवर्तित हो गया।
एक टोकरी भर मिट्टी Extra Questions दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के माध्यम से माधवराव सप्रे क्या संदेश देना चाहते हैं? विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के माध्यम से माधवराव सप्रे कई महत्वपूर्ण संदेश देना चाहते हैं।
• भौतिकता पर मानवीय मूल्यों की विजय- कहानी का मुख्य संदेश यह है कि धन और भौतिक संपत्ति का लालच अंततः मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों के सामने तुच्छ हो जाता है। ज़मींदार का धन का मद उसे अंधा बना देता है, लेकिन एक गरीब वृद्धा की मार्मिक विनती और उसके साथ किए गए अन्याय का अदृश्य भार उसके हृदय को परिवर्तित कर देता है ।
• लालच का दुष्परिणाम – ज़मींदार का अपनी संपत्ति बढ़ाने का लालच उसे अनैतिक कार्य करने पर मज़बूर करता है। वह एक बेसहारा वृद्धा से उसकी एकमात्र संपत्ति छीन लेता है। कहानी दिखाती है कि लालच व्यक्ति को क्रूर और अमानवीय बना देता है, लेकिन अंततः उसे अपनी गलती का एहसास होता है ।
• मानवीय संवेदनाओं का महत्व – वृद्धा की झोंपड़ी से जुड़ी उसकी भावनाएँ, उसके परिवार की यादें और उसकी पोती के प्रति ममता ही उसकी असली संपत्ति थी। कहानी दर्शाती है कि ये भावनाएँ किसी भी भौतिक धन से अधिक शक्तिशाली होती हैं और उनका मूल्य अकूत होता है। ज़मींदार का एक टोकरी मिट्टी न उठा पाना इसी भावनात्मक भार का प्रतीक है।
• लालच और अन्याय के विरुद्ध नैतिक विजय- कहानी दिखाती है कि कैसे एक गरीब और कमज़ोर व्यक्ति भी अपनी नैतिक शक्ति और भावनाओं के बल पर अन्याय के विरुद्ध खड़ा हो सकता है और अंततः न्याय प्राप्त कर सकता है। वृद्धा शारीरिक रूप से कमज़ोर होने के बावजूद अपनी बुद्धिमत्ता और भावनात्मक अपील से ज़मींदार को झुका देती है।
• हृदय परिवर्तन की शक्ति- ज़मींदार के हृदय-परिवर्तन के माध्यम से कहानी यह भी बताती है कि मनुष्य कितना भी क्रूर और स्वार्थी क्यों न हो, उसमें पश्चाताप और सुधार की संभावना हमेशा बनी रहती है। एक छोटी सी घटना या कुछ मार्मिक शब्द भी व्यक्ति के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह कहानी मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और नैतिक जीत की कहानी है, जो हमें धन के पीछे अंधी दौड़ की बजाय मानवीय संबंधों और भावनाओं को महत्व देने का संदेश देती है।
प्रश्न 2.
वृद्धा के चरित्र चित्रण पर प्रकाश डालिए। कहानी में उसकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी में वृद्धा का चरित्र अत्यंत मार्मिक और महत्वपूर्ण है। वह कहानी की नायिका है और उसके चरित्र के कई पहलू हैं:
- निराश्रित और अनाथ – वृद्धा एक गरीब, अनाथ और बेसहारा महिला है, जिसने अपने जीवन में बहुत दुख देखे हैं। उसने अपने पति, पुत्र और पतोहू को खो दिया है, और उसकी छोटी पोती ही उसका एकमात्र सहारा है। यह उसकी दयनीय स्थिति को उजागर करता है।
- भावनात्मक और संवेदनशील – वृद्धा अपनी झोंपड़ी से भावनात्मक रूप से बहुत जुड़ी हुई है। यह केवल एक घर नहीं, बल्कि उसके जीवन की सभी यादों का प्रतीक है। झोंपड़ी के भीतर जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण आता है और उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं, जो उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- धैर्यवान और संघर्षशील – ज़मींदार के दबाव और अन्याय के बावजूद वह अपनी झोंपड़ी नहीं छोड़ना चाहती। जब उसे बेदखल कर दिया जाता है, तब भी वह हार नहीं मानती और अपनी पोती के लिए रोटी का जुगाड़ करने की कोशिश करती है। यह उसका धैर्य और जीवन के प्रति संघर्ष को दिखाता है।
- बुद्धिमती और दूरदर्शी – वृद्धा केवल एक असहाय महिला नहीं है, बल्कि वह अत्यंत बुद्धिमती है। उसे पता है कि ज़मींदार को सीधे चुनौती देने से कुछ नहीं होगा। वह अपनी बुद्धिमत्ता का प्रयोग कर ज़मींदार को एक टोकरी मिट्टी उठाने के लिए कहती है, और फिर अपने मार्मिक वचनों से उसे उसकी गलती का एहसास कराती है। उसकी यह युक्ति ही जमींदार का हृदय-परिवर्तन करती है।
- मानवीय मूल्यों की प्रतीक- वृद्धा कहानी में मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, ममता और नैतिक शक्ति का प्रतीक है। वह दर्शाती है कि शारीरिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के बावजूद, एक व्यक्ति अपनी भावनाओं और नैतिक दृढ़ता के बल पर शक्तिशाली को भी सही राह दिखा सकता है।
- कहानी में उसकी भूमिका – वृद्धा की भूमिका कहानी में केंद्रीय और अत्यंत महत्वपूर्ण है। उसी के माध्यम से कहानी का मुख्य संघर्ष (ज़मींदार का अन्याय बनाम वृद्धा का प्रतिरोध) स्थापित होता है । उसी के कारण कहानी का चरमोत्कर्ष (टोकरी उठाने का प्रयास) और हृदय-परिवर्तन (ज़मींदार का अपनी गलती मानना) संभव हो पाता है। वृद्धा के बिना यह कहानी अधूरी है, क्योंकि वही मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का प्रतिनिधि त्व करती है, जिसके सामने अंतत: धन का मद फीका पड़ जाता है। वह अन्याय के विरुद्ध नैतिक जीत की प्रतिमूर्ति है।
प्रश्न 3.
ज़मींदार के चरित्र में आए बदलाव को विस्तार से समझाइए। इस बदलाव के क्या कारण थे?
उत्तर:
ज़मींदार का चरित्र कहानी में एक अहंकारी और लालची व्यक्ति से एक पश्चाताप करने वाले दयालु व्यक्ति में बदलता है। इस बदलाव को निम्न बिंदुओं में समझा जा सकता है:
• प्रारंभिक चरित्र (धन – मद और लालच) – कहानी की शुरुआत में ज़मींदार को एक धनवान, अहंकारी और लालची व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है। वह अपनी संपत्ति और महल का विस्तार करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उसे एक बेसहारा वृद्धा की भावनाओं या उसकी एकमात्र संपत्ति की कोई परवाह नहीं है। वह वकीलों के माध्यम से कानूनी दाव-पेंच अपनाकर उस गरीब की झोंपड़ी हड़प लेता है। वह मानवीय संवेदनाओं से वंचित और कर्तव्यविमुख है।
• पहला मोड़ (अनुमति देना) – जब वृद्धा उससे एक टोकरी भर मिट्टी लेने की अनुमति माँगती है, तो ज़मींदार पहले तो उसे हटाने की बात करता है, लेकिन वृद्धा के गिड़गिड़ाने और उसकी पोती की भूख की बात सुनकर वह शायद थोड़ा नरम पड़ता है या उसे यह एक तुच्छ बात लगती है, और वह अनुमति दे देता है । यह उसके चरित्र में एक सूक्ष्म बदलाव का पहला संकेत हो सकता है, हालाँकि वह अभी भी पूरी तरह से हृदयहीन नहीं है।
• दूसरा मोड़ (टोकरी उठाने का प्रयास) – जब वृद्धा उससे टोकरी उठाने में मदद माँगती है, तो ज़मींदार पहले नाराज़ होता है। लेकिन वृद्धा की लगातार विनती और उसके पैरों पर गिरने से उसके मन में थोड़ी दया आ जाती है। वह स्वयं टोकरी उठाने को तैयार हो जाता है। यह उसके अंदर मानवीय संवेदनाओं के जागृत होने का दूसरा बड़ा संकेत है।
• चरित्र का पूर्ण बदलाव (ज्ञानोदय) – सबसे महत्वपूर्ण बदलाव तब आता है, जब ज़मींदार अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद एक टोकरी भर मिट्टी भी नहीं उठा पाता। इस पर वृद्धा के मार्मिक शब्द “ आपसे एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उनका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” ज़मींदार के हृदय पर गहरा प्रभाव डालते हैं। उसे अचानक एहसास होता है कि वह केवल मिट्टी नहीं उठा रहा, बल्कि वह वृद्धा के जीवन भर के दुखों, यादों और भावनाओं का भार है, जिसे वह अपने लालच के कारण वृद्धा से छीनकर स्वयं पर अन्याय स्वरूप लाद रहा है जो कि अत्यधिक भारी है। इस एहसास से उसकी आँखें खुल जाती हैं तथा उसे अपने किए पर गहरा पश्चाताप होता है।
• अंतिम अवस्था (पश्चाताप और न्याय) – बदलाव के बाद, ज़मींदार अपने ‘कृतकर्म’ के लिए वृद्धा से क्षमा माँगता है और उसकी झोंपड़ी उसे वापस लौटा देता है। वह धन के मद से मुक्त हो जाता है और अपना कर्तव्य पहचानता है।
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बदलाव के कारण
- वृद्धा की भावनात्मक अपील और बुद्धिमत्ता : वृद्धा की मार्मिक कहानी, उसकी पोती का भूखा रहना और अंत में उसके बुद्धिमान और प्रतीकात्मक वचन (‘हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी’) ज़मींदार के हृदय को छू गए।
- अदृश्य भार का अनुभव – टोकरी में मिट्टी के साथ-साथ जो अदृश्य भावनात्मक भार था, उसे ज़मींदार ने शारीरिक रूप से अनुभव किया, जिससे उसे अपने अन्याय का वास्तविक एहसास हुआ।
- मानवीयता का जागरण- ज़मींदार के भीतर कहीं दबी हुई मानवीयता वृद्धा की दयनीय स्थिति और उसकी सच्ची भावनाओं को देखकर जागृत हो गई।
Class 8 Hindi Chapter 6 Extra Questions and Answers अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई । वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी । उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी।
निम्नांकित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर लिखिए या चुनिए-
1 किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई । वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी । उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी।
पर अपना कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
ज़मींदार वृद्धा की झोंपड़ी पर क्यों कब्ज़ा करना चाहता था?
उत्तर:
ज़मींदार अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाना चाहता था, इसलिए वह वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्ज़ा करना चाहता था।
प्रश्न 2.
वृद्धा के लिए उसकी झोंपड़ी इतनी महत्वपूर्ण क्यों थी ?
उत्तर:
वृद्धा के लिए उसकी झोंपड़ी इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि वह कई ज़माने से वहीं बसी थी, उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र उसी झोंपड़ी में मर गए थे, और उसके पतोहू भी एक छोटी कन्या को छोड़कर चल बसी थी। यह झोंपड़ी ही उसका एकमात्र सहारा थी और उससे उसकी कई यादें जुड़ी थीं।
प्रश्न 3.
ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्ज़ा करने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?
उत्तर:
ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्ज़ा करने के लिए अपनी ज़मींदारी चाल चली। उसने वकीलों की थैली गरम कर अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया।
प्रश्न 4.
वृद्धा की वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
वृद्धा अनाथ थी, उसके पास केवल उसकी पोती ही थी। झोंपड़ी. छिन जाने के बाद वह बहुत दुखी और मृतप्राय हो गई थी और पास – पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी थी।
2. एक दिन श्रीमान् उस झोंपड़ी के आस – पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची । श्रीमान् ने उनको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, ‘महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी हो ही गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है ।”
ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, ‘जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत कुछ समझाया, पर वह एक नहीं मानती । यही कहा कहती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी। अब मैंने यह सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊँ! ” श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
वृद्धा ज़मींदार के पास क्यों आई थी?
उत्तर:
वृद्धा चूल्हा बनाने के लिए झोंपड़ी में से एक टोकरी मिट्टी लेने की अनुमति माँगने ज़मींदार के पास आई थी ताकि अपनी पोती के लिए उस पर रोटी बना सके।
प्रश्न 2.
वृद्धा ने ज़मींदार से क्या विनती की?
उत्तर:
वृद्धा ने ज़मींदार से विनती की कि वह उसे अपनी झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी ले जाने की अनुमति दे ताकि वह उस मिट्टी से चूल्हा बनाकर अपनी पोती के लिए रोटी पका सके।
प्रश्न 3.
वृद्धा अपनी पोती को खाना खिलाने के लिए क्या उपाय सोच रही थी ?
उत्तर:
वृद्धा अपनी पोती को खाना खिलाने के लिए अपनी झोंपड़ी की मिट्टी से चूल्हा बनाकर उस पर रोटी पकाने का उपाय सोच रही थी, जिससे पोती को घर जैसा अनुभव हो और वह खाना खाने लगे।
प्रश्न 4.
ज़मींदार ने वृद्धा को क्या प्रतिक्रिया दी।
उत्तर:
ज़मींदार ने पहले तो उसे हटाने के लिए नौकरों से कहा, लेकिन वृद्धा की गिड़गिड़ाहट और विनती सुनने के बाद उसने उसे टोकरी भर मिट्टी ले जाने की आज्ञा दे दी।
3. वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई । वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। अपने आंतरिक दुख को किसी तरह सँभाल कर उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और हाथ से उठाकर बाहर ले आई। फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी कि, “महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए, जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।” ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज़ हुए।
पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है। फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान पर टोकरी रखी थी, वहाँ से वह एक हाथ भी ऊँची न हुई। वह लज्जित होकर कहने लगे कि, “नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी ।”
प्रश्न-
प्रश्न 1.
झोंपड़ी के भीतर जाने पर वृद्धा को कैसा महसूस हुआ?
उत्तर:
झोंपड़ी के भीतर जाते ही वृद्धा को अपनी पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी । उसे आंतरिक दुख महसूस हुआ।
प्रश्न 2.
वृद्धा ने ज़मींदार से क्या मदद माँगी ?
उत्तर:
वृद्धा ने ज़मींदार से प्रार्थना की कि वह उस टोकरी को ज़रा हाथ लगा दे ताकि वह उसे अपने सिर पर धर सके ।
प्रश्न 3.
ज़मींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास क्यों किया?
उत्तर:
ज़मींदार ने टोकरी उठाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि वृद्धा बार-बार हाथ जोड़कर और पैरों पर गिरकर विनती कर रही थी, जिससे उसके मन में दया आ गई।
प्रश्न 4.
ज़मींदार टोकरी उठाने में सफल क्यों नहीं हो पाया?.
उत्तर:
ज़मींदार टोकरी उठाने में सफल नहीं हो पाया क्योंकि वह मिट्टी की एक टोकरी नहीं थी, बल्कि उसमें वृद्धा के वर्षों की यादें, दुख और भावनाएँ भरी हुई थीं, जिनका भार ज़मींदार की सामर्थ्य से कहीं अधिक था।
4. यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज़ न हों… आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए ।”
ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे पर वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
वृद्धा ने ज़मींदार को टोकरी न उठा पाने पर क्या समझाया ?
उत्तर:
वृद्धा ने ज़मींदार को समझाया कि जब उससे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जा रही है, तो वह उस झोंपड़ी में मौजूद हज़ारों टोकरियों का भार ( जो वृद्धा की भावनाओं और यादों का प्रतीक था) कैसे उठा पाएगा, और उसे इस पर विचार करने को कहा।
प्रश्न 2.
वृद्धा के वचनों का ज़मींदार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
वृद्धा के वचन सुनते ही ज़मींदार की आँखें खुल गईं। उसे अपने कृतकर्म का पश्चाताप हुआ और उसने अपनी गलती मानकर वृद्धा की झोंपड़ी उसे वापस कर दी ।
प्रश्न 3.
‘धन – मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इसका अर्थ है कि ज़मींदार अपने धन के घमंड में इतना चूर था कि वह मानवीयता और दूसरों के प्रति अपने दायित्व को भूल गया था।
प्रश्न 4.
कहानी का अंत कैसे होता है?
उत्तर:
कहानी का अंत ज़मींदार के हृदय परिवर्तन के साथ होता है। वह वृद्धा से क्षमा माँगता है और उसकी झोंपड़ी उसे वापस दे देता है, जिससे वृद्धा को न्याय मिलता है।
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Class 8 Hindi Chapter 6 Extra Questions for Practice
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
ज़मींदार टोकरी उठाने में सफल क्यों नहीं हो पाया?
(क) वह बहुत कमज़ोर था ।
(ख) टोकरी बहुत बड़ी थी।
(ग) टोकरी में मिट्टी के साथ भावनाओं का अदृश्य भार था।
(घ) उसके नौकरों ने मना कर दिया।
प्रश्न 2.
वृद्धा के किस कथन ने ज़मींदार की आँखें खोल दीं?
(क) “मुझे भूख लगी है।”
(ख) “आपसे एक टोकरी मिट्टी नहीं उठाई जाती, हज़ारों टोकरियों का भार कैसे उठाएँगे?”
(ग) “मेरी पोती भूखी है।
(घ) “मेरी झोंपड़ी मुझे वापस दे दो।”
प्रश्न 3.
कहानी के अंत में ज़मींदार ने क्या किया?
(क) वृद्धा को पैसे दिए
(ख) वृद्धा को नौकरी दी
(ग) वृद्धा से क्षमा माँगी और झोपड़ी वापस दे दी
(घ) वृद्धा को और परेशान किया
प्रश्न 4.
इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
(क) धन ही सब कुछ है
(ख) लालच अच्छा होता है
(ग) मानवीय संवेदनाएँ और नैतिकता धन से बढ़कर है
(घ) गरीबों को हमेशा सहना चाहिए ।
प्रश्न 5.
‘बाल की खाल निकालना’ मुहावरे का क्या अर्थ है ?
(क) बहुत बारीक काम करना
(ख) अनावश्यक तर्क करना या दोष निकालना
(ग) बाल बढ़ाना
(घ) बहुत मेहनत करना
अति लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
ज़मींदार ने अपने महल का क्या बढ़ाना चाहा था ?
प्रश्न 2.
वृद्धा की झोंपड़ी कहाँ स्थित थी?
प्रश्न 3.
वृद्धा का पति और पुत्र कहाँ मर गए थे?
प्रश्न 4.
पतोहू मरी तब उसकी वृद्धा की पोती कितने वर्ष की थी?
प्रश्न 5.
ज़मींदार के जब प्रयत्न निष्फल होने पर उसने कौन – सी चाल चली?
प्रश्न 6.
अदालत से झोंपड़ी पर किसने कब्ज़ा कर लिया?
प्रश्न 7.
झोंपड़ी से निकाले जाने के बाद वृद्धा कहाँ रहने लगी?
प्रश्न 8.
वृद्धा ने मिट्टी से क्या बनाने का सोचा?
प्रश्न 9.
मिट्टी लेने के लिए वृद्धा झोंपड़ी के भीतर क्यों गई ?
प्रश्न 10.
टोकरी उठाने का काम ज़मींदार की शक्ति के बाहर क्यों था?
प्रश्न 11.
ज़मींदार को किस बात का पश्चाताप हुआ?
लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
ज़मींदार को वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्ज़ा करने के लिए कौन- सी ‘ज़मींदारी चाल’ चलनी पड़ी?
प्रश्न 2.
वृद्धा ने अपनी पोती के खाना-पीना छोड़ देने का क्या कारण बताया और इसके लिए उसने क्या उपाय सोचा?
प्रश्न 3.
टोकरी भर मिट्टी उठाते समय ज़मींदार को कैसा अनुभव हुआ? उसकी क्या प्रतिक्रिया थी?
प्रश्न 4.
कहानी में ‘धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे’ पंक्ति का क्या आशय है? ज़मींदार के संदर्भ में समझाइए |
प्रश्न 5.
वृद्धा के लिए ‘झोंपड़ी’ केवल एक निवास स्थान क्यों नहीं थी ? स्पष्ट कीजिए ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का शीर्षक कितना सार्थक है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए ।
प्रश्न 2.
कहानी में ‘न्याय की अवधारणा’ पर अपने विचार व्यक्त कीजिए | क्या अंत में वृद्धा को सच्चा न्याय मिला?
प्रश्न 3.
इस कहानी को पढ़कर आपको क्या प्रेरणा मिलती है ? वर्तमान समय में इस कहानी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए ।