We have given detailed Sharda Sanskrit Book Class 9 Solutions and Class 9 Sanskrit Sandhi Questions with Answers सन्धयः come in handy for quickly completing your homework.
Sandhi Class 9 Sanskrit – Sandhi Sanskrit Class 9
Class 9 Sanskrit Sandhi Questions with Answers
Class 9 Sanskrit Sandhi – Sanskrit Sandhi Class 9
संधि शब्द की व्युत्पत्ति
सम् उपसर्ग पूर्वक डुधाञ् (धा) धातु से ‘उपसर्गो धो: कि’ सूत्र से ‘कि’ प्रत्यय करने पर ‘सन्धि’ शब्द निष्पन्न होता है।
संधि की परिभाषा
वर्ण संधान को संधि कहते हैं अर्थात् दो वर्णों के परस्पर मेल को संधि कहा जाता है। (वर्ण-सन्धानं सन्धि:)
पाणिनीय परिभाषा
‘परः सन्निकर्षः संहिता’ अर्थात् वर्णों में अत्यधिक निकटता को संहिता कहा जाता है। जैसे— ‘सुधी + उपास्य’ यहाँ ‘ई’ तथा ‘र्’ वर्णों में अत्यंत निकटता है। इसी प्रकार वर्णों की निकटता को संस्कृत व्याकरण में संहिता कहा जाता है।
संधि के कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं
गिरि + ईश: = गिरीश: → इ + ई = ई
नर + ईश: = नरेश: → अ + ई = ए
सु + आगतः = स्वागतः → उ + आ = वा
उत् + लास: = उल्लासः → त् + ल् = ल्ल्
सन्धि-विच्छेदः
यदि मिले हुए वर्णों को अलग-अलग करके संधि से पूर्व की स्थिति में पहुँचा दिया जाए, तो यह प्रक्रिया ‘संधि-विच्छेद’ कहलाती है; जैसे-
- जगन्नाथ: = जगत् + नाथ:
- निर्द्वद्व: = निः + द्वंद्वः
- हिमालय: = हिम + आलय:
- निश्चल: = निः + चल:
- निष्पाप: = निः + पापः
- निषेधः = निः + सेधः
- उच्चारण: = उत् + चारण:
- गणेश: = गण + ईश:
- संलापः = सम् + लाप:
संधि के भेद
संधि के तीन भेद हैं
1. स्वर सन्धिः
2. व्यञ्जन सन्धिः
3. विसर्ग सन्धिः
1. स्वर सन्धि: (अच् सन्धि)
दो स्वरों के परस्पर मेल होने के परिणामस्वरूप उनमें से किसी एक या दोनों स्वरों में जो परिवर्तन अथवा विकार उत्पन्न होता है, उसे ‘स्वर संधि’ कहते हैं। स्वर संधि को अच् संधि भी कहते हैं।
इसके छ: भेद होते हैं
(i) दीर्घ स्वर संधि
(ii) गुण स्वर संधि
(iii) वृद्धि स्वर संधि
(iv) यण् स्वर संधि
(v) अयादि संधि
(vi) पूर्वरूप संधि
(i) दीर्घ स्वर सन्धि: (अकः सवर्णे दीर्घः)
यदि ह्रस्व अथवा दीर्घ ‘अ’, ‘आ’, ‘इ’, ‘ई’, ‘उ’, ‘ऊ’ एवं ‘ऋ’ ‘ऋ’ के बाद समान ह्रस्व या दीर्घ स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ स्वर ‘आ’, ‘ई’, ‘ऊ’ और ‘ऋ’ हो जाते हैं; जैसे-
अ + अ = आ
- राम + अवतारः = रामावतार:
- वेद + अन्तः = वेदान्तः
- रस + अयन: = रसायनः
अ + आ = आ
- मरण + आसन्नः = मरणासन्नः
- गज + आननः = गजाननः
- प्राण + आयाम: = प्राणायामः
आ + अ = आ
- दीक्षा + अन्तः = दीक्षान्त:
- यथा + अर्थः = यथार्थः
- सीमा + अन्तः = सीमान्तः
- शिक्षा + अर्थी = शिक्षार्थी
आ + आ = आ
- महा + आत्मा = महात्मा
- वार्ता + आलापः = वार्तालाप:
- विद्या + आनन्दः = विद्यानन्दः
- चिकित्सा + आलय: = चिकित्सालयः
इ + इ = ई
- कवि + इन्द्रः = कवीन्द्रः
- कवि + इच्छा = कवीच्छा
- अभि + इष्ट: = अभीष्टः
- अति + इव = अतीव
इ + ई = ई
- मुनि + ईश्वर: = मुनीश्वर:
- क्षिति + ईश: = क्षितीश:
- गिरि + ईश: = गिरीश:
- अधि + ईश्वरः = अधीश्वरः
ई + इ = ई
- नारी + इष्ट: = नारीष्टः
- मही + इन्द्रः = महीन्द्रः
- शची + इन्द्रः = शचीन्द्रः
- सती + इच्छा = सतीच्छा
ई + ई = ई
- मही + ईश: = महीश:
- रजनी + ईश: = रजनीश:
- मही + ईश्वर: = महीश्वर:
उ + उ = ऊ
- भानु + उदयः = भानूदयः
- सु + उक्ति: = सूक्ति:
- गुरु + उपदेश: = गुरूपदेश:
- लघु + उत्तर: = लघूत्तर:
उ + ऊ = ऊ
- सिन्धु + ऊर्मिः = सिन्धूर्मि:
- लघु + ऊर्मिः = लघूर्मि:
ऊ + उ = ऊ
- वधू + उत्सवः = वधूत्सवः
- भू + उद्धारः = भूद्धार:
ऊ + ऊ = ऊ
- भू + ऊर्ध्वः = भूर्ध्व:
- भू + ऊर्जा: = भूर्जा:
- वधू + ऊर्मि: = वधूर्मि:
ऋ + ऋ = ॠ
- पितृ + ऋणम् = पितॄणम्
- मातृ + ऋणम् = मातॄणम्
(ii) गुण स्वर सन्धि: (आद्गुणः)
जब पूर्वपद (पहले शब्द) के अंत में ‘अ’ या ‘आ’ में से कोई एक वर्ण हो और उत्तरपद (दूसरे शब्द) के प्रारंभ में इ/ई, उ/ऊ, ऋ/ॠ और लृ हो, तो वहाँ गुण संधि होती है; जैसे-
अ + ई = ए
- नर + इन्द्रः = नरेन्द्रः
- देव + इन्द्रः = देवेन्द्रः
- शुभ + इच्छा = शुभेच्छा
- स्व + इच्छा = स्वेच्छा
आ + ई = ए
- परम + ईश्वर: = परमेश्वरः
- सोम + ईश: = सोमेश:
- गण + ईश: = गणेश:
- राम + ईश्वरः = रामेश्वरः
आ + इ = ए
- राजा + इन्द्रः = राजेन्द्रः
- यथा + इष्टः = यथेष्टः
अ + इ = ए
- लंका + ईश: = लंकेश:
- महा + ईश: = महेश:
- महा + ईश्वरः = महेश्वरः
अ + उ = ओ
- सूर्य + उदयः = सूर्योदयः
- रोग + उपचारः = रोगोपचारः
- पर + उपकारः = परोपकारः
- वार्षिक + उत्सवः = वार्षिकोत्सवः
अ + ऊ = ओ
- नव + ऊढा = नवोढा
- समुद्र + ऊर्मिः = समुद्रोर्मिः
आ + उ = ओ
- महा + उत्सवः = महोत्सवः
- महा + उदधिः = महोदधिः
- गङ्गा + उदकम् = गङ्गोदकम्
आ + ऊ = ओ
- गङ्गा + ऊर्मिः = गङ्गोर्मिः
- महा + ऊर्मिः = महोर्मिः
अ + ऋ = अर्
- सप्त + ऋषि: = सप्तर्षिः
- ब्रह्म + ऋषिः = ब्रह्मर्षिः
आ + ऋ = अर्
- राजा + ऋषि: = राजर्षिः
- महा + ऋषिः = महर्षिः
गुण स्वर संधि के अपवाद
- प्र + ऊढ: = प्रौढ:
- पिपासा + ऋतः = पिपासार्तः
- सुख + ऋत: = सुखार्तः
(iii) वृद्धि स्वर सन्धि: (वृद्धिरेचि)
जब पूर्वपद (पहले शब्द) के अंत में ‘अ’ या ‘आ’ हो और उत्तरपद (दूसरे शब्द) के प्रारंभ में ‘ए’ / ‘ऐ’, ‘ओ’ या ‘औ’ आए, तो वहाँ वृद्धि संधि होती है; जैसे-
अ + ए = ऐ
- जन + एकता = जनैकता:
- एक + एक: = एकैक:
- लोक + एषणा = लोकैषणा
अ + ऐ = ऐ
- मत + ऐक्य: = मतैक्यः
- भाव + ऐक्य: = भावैक्यः
- देव + ऐश्वर्यम् = देवैर्श्यम्
आ + ए = ऐ
- सदा + एव = सदैव
- तथा + एव = तथैव
आ + ऐ = ऐ
- महा + ऐश्वर्य: = महैश्वर्य:
- रमा + ऐश्वर्य: = रमैश्वर्यः
अ + ओ = औ
- वन + ओषधिः = वनौषधिः
- जल + ओघः = जलौघः
- परम + ओजः = परमौज:
अ + औ = औ
- परम + औषध: = परमौषध:
- परम + औदार्यः = परमौदार्यः
आ + ओ = औ
- महा + ओजस्वी = महौजस्वी
- महा + ओजः = महौज:
आ + औ = औ
- महा + औषधः = महौषध:
- महा + औघः = महौघः
वृद्धि स्वर संधि के अपवाद
- प्र + एजते = प्रेजते (पररूप
- प्र + एषयति = प्रेषयति (पररूप)
- अधर + औष्ठः = अधरौष्ठः
(iv) यण् स्वर सन्धि: (इकोयणचि)
जब इक् स्वर (इ, उ, ऋ, लृ ) के साथ कोई भी
अन्य स्वर जोड़ा जाए, तो वहाँ ‘इक्’ के स्थान पर ‘यण’ होता है।
इ + अ = य्
- यदि + अपि = यद्यपि
- अति + अंत = अत्यंत
- अति + अधिक = अत्यधिक
- अभि + अर्थी = अभ्यर्थी
ई + अ = य्
- नदी + अर्पण = नद्यर्पण
इ + आ = या
- अति + आनंद = अत्यानंद
- इति + आदि = इत्यादि
- वि + आप्तः = व्याप्तः
ई + आ = या
- नदी + आगम = नद्यागम
- सखी + आगमन = सख्यागमन
इ + उ = यु
- उपरि + उक्त = उपर्युक्त
- प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
इ + ऊ = यू
- नि + ऊन = न्यून
- वि + ऊह = व्यूह
ई + ऊ = यू
- नदी + ऊर्मि = नद्यूर्मि
इ + ए = ये
- प्रति + एक = प्रत्येक
- अधि + एषणा = अध्येषणा
ई + ऐ = यै
- देवी + ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्य
- सखी + ऐश्वर्य = सख्यैश्वर्य
- नदी + ऐश्वर्य = नदयैश्वर्य
उ + अ = व
- अनु + अयः = अन्वयः
- मधु + अरिः = मध्वरि:
- सु + अल्पः = स्वल्पः
उ + आ = वा
- सु + आगतः = स्वागत:
- मधु + आलय: = मध्वालयः
ऊ + आ = वा
- वधू + आगमनम् = वध्वागमनम्
- भू + आदिः = भ्वादि:
उ + इ = वि
- अनु + इति = अन्विति
- अनु + इत = अन्वित
उ + ई = वी
- अनु + ईक्षण = अन्वीक्षण
उ + ए = वे
- अनु + एषण = अन्वेषण
- प्रभु + एषणा = प्रभ्वेषणा
ऊ + ऐ = वै
- वधू + ऐश्वर्य: = वध्वैश्वर्यः
ऊ + ओ = वो
- सरयू + ओधः = सरवोधः
ऊ + औ = वौ
- वधू + औदार्य = वध्वौदार्य
ऋ + अ = र
- पितृ + अनुमति = पित्रनुमति
- धातृ + अंश = धात्रंश
ऋ + आ = रा
- पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
- मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
- मातृ + आनंद = मात्रानंद
ऋ + इ = रि
- मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा
- पितृ + इच्छा = पित्रिच्छा
(v) अयादि सन्धिः (एचोऽयवायावः)
यदि ए, ओ, ऐ, औ के बाद कोई भी असमान स्वर आए, तो क्रमशः ‘ए’ का ‘अय्’, ‘ओ’ का ‘अव्’, ऐ का ‘आय्’, ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है; जैसे-
- ने + अनम् = नयनम् (ए + अ = अय्)
- कवे + ए = कवये (ए + ए = अय्)
- नै + अकः = नायकः (ऐ + अ = आय्)
- पो + अन: = पवन: (ओ + अ = अव्)
- पौ + अकः = पावक: (औ + अ आव्)
- शे + अनम् = शयनम्
- भौ + उकः = भावुकः
- अग्नौ + इह = अग्नाविह
- गै + अन्ति = गायन्ति
- विष्णो + इह = विष्णविह
(vi) पूर्वरूप सन्धि:
यदि पद के अंत में ‘ए’ या ‘ओ’ हो और उसके बाद ह्रस्व ‘अ’ आए, तो ‘अ’ का लोप होकर उसके स्थान पर अवग्रह (ऽ) का चिह्न लग जाता है।
इसमें बाद वाला वर्ण पहले वाले (पूर्वरूप) के समान हो जाता है?
जैसे-
- हरे + अत्र = हरेऽत्र
- सो + अहम् = सोऽहम्
- विष्णो + अव = विष्णोऽव
- नमो + अस्तु = नमोऽस्तु
- वृक्षे + अस्मिन् = वृक्षेऽस्मिन्
- को + अस्ति = कोऽस्ति
- ते + अपि = तेऽपि
- प्रभो + अनुग्रह = प्रभोऽनुग्रह
- लोके + अस्मिन् = लोकेऽस्मिन्
- लोको + अयम् = लोकोऽयम्
2. व्यञ्जन सन्धिः
व्यंजन संधि में व्यंजन का स्वरों के साथ या व्यंजन का व्यंजन के साथ मेल होता है। इसके निम्न प्रकार हैं।
(i) अनुस्वार सन्धिः (मोऽनुस्वारः)
यदि पूर्वपद का अंतिम वर्ण ‘म्’ हो तथा उत्तरपद का प्रथम वर्ण कोई व्यंजन हो, तो ‘म्’ का अनुस्वार \((\dot{-})\) हो जाता है;
जैसे –
- अहम् + पठामि = अहं पठामि
- त्वम् + लिखसि = त्वं लिखसि
- वेदम् + पठ = वेदं पठ
- धर्मम् + चर = धर्मं चर
- हरिम् + वन्दे = हरिं वन्दे
- सत्यम् + वद = सत्यं वद
यदि र्, ष् के बाद न् हो, तो न् का ण हो जाता है तथा र्, ष् के बाद स्वर, ह्, य्, व्, र्, ल्, क वर्ग, प वर्ग हो, तो भी न का ण हो जाता है, किंतु अंतिम न् हो, तो यह नियम नहीं लगेगा;
जैसे – रामानाम् (र्, आ, म्, आ, नू, आ, म्) रामाणाम्।
(ii) जश्त्व सन्धिः (वर्गीय प्रथमाक्षराणां तृतीया वर्णे परिवर्तनम्)
यदि पूर्वपद के अंत में किसी वर्ग का प्रथम अक्षर क्, च्, ट्, त्, प्, हो और उत्तरपद के आरंभ में कोई भी स्वर या किसी वर्ग का तीसरा, चौथा या पाँचवाँ वर्ण हो, तो प्रथम अक्षर उसी वर्ग का तीसरा अक्षर बन जाता है; जैसे-
- वाक् + ईश: = वागीश: (क् + ई = गी)
- अच् + अन्तः = अजन्त: (च् + अ = ज)
- षट् + आननः = षडानन: (ट् + आ = डा)
- दिक् + गज: = दिग्गज: (क् + ग = ग)
- सम्राट् + आगतः = सम्राडागत: (ट् + आ = डा)
- जगत् + ईश: = जगदीश: (त् + ई = दी)
- सुप् + अन्तः = सुबन्तः (प् + अ = ब)
• ‘त्’ स्थाने ‘च्’ यदि त् के बाद च् छ् ज् झ् ञ्, श् में से कोई वर्ण हो, तो त् का च् हो जाता है;
जैसे –
- तत् + च = तच्च (त् + च = च्च)
- सत् + चित् = सच्चित् (त् + च = च्च)
• ‘त्’ स्थाने ‘ल्’ यदि त् के बाद ल हो, तो त् का ल् हो जाता है; जैसे—
- तत् + लीनः = तल्लीन: (त् + ल = ल्ल)
• ‘र्’ पूर्वस्य रेफस्य लोपः दीर्घस्वरत्वं च यदि अ, इ, उ के पश्चात् र् हो तथा उस र् के बाद र हो, तो पूर्व वाले र् का लोप हो जाता है तथा जिस र् का लोप हुआ है, उससे पूर्व यदि अ, इ, उ में से कोई वर्ण हो, तो उसका दीर्घ (आ, ई, ऊ) हो जाता है; जैसे-
- निर् + रोग: = नीरोग:
- निर् + रस: = नीरस:
(iii) तुगागम: सन्धि:
यदि किसी ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) के पश्चात् ‘छ’ वर्ग आए, तो ‘छ’ से पहले ‘च’ का आगम हो जाता है अर्थात् इसमें ‘च’ जुड़कर ‘च्छ’ बन जाता है; जैसे –
- तरु + छाया = तरुच्छाया
- वट + छाया = वटच्छाया
- परि + छेद = परिच्छेद
- अनु + छेद = अनुच्छेद
- सु + छंद = स्वच्छंद
- वि + छेद = विच्छेद
- वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
विशेष यदि पद के अंत में दीर्घ स्वर हो, तो ‘च’ का आगम विकल्प से होता है; जैसे-
- लक्ष्मी + छाया = लक्ष्मीच्छाया/लक्ष्मीछाया
- आ + छादन = आच्छादन / आछादन
3. विसर्ग सन्धिः
विसर्गों (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर होने वाले परिवर्तन को विसर्ग संधि कहते हैं। पाठ्यक्रम में निम्न संधि निर्धारित हैं
(i) विसर्गस्य उत्वम्
यदि ‘अ’ के बाद विसर्ग हो और उसके बाद किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ अक्षर अथवा य, र, ल, व, ह हो, तो विसर्ग का ‘उ’ परिवर्तित होकर ‘ओ’ हो जाता है; जैसे-
- अ + उ = ओ
- कः + असि = कोऽसि
- बाल: + हसति = बालो हसति
- नरः + गच्छति = नरो गच्छति
- सः + गच्छति = सो गच्छति
- एषः + नमति = एषो नमति
(ii) विसर्गस्य शत्वम्
यदि विसर्ग के बाद च्, छ्, श् हो, तो विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है; जैसे-
- कः + चौर: = कश्चौर:
- कः + चित् = कश्चित्
- शावक: + चलति = शावकश्चलति
- निः + छलः = निश्छल:
- छात्र: + छादयति = छात्रश्छादयति
- भक्त: + शोभते = भक्तश्शोभते
- राम: + च = रामश्च
(iii) विसर्गस्य षत्वम्
यदि विसर्ग के बाद ट् ठ्, ष हो, तो विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता है;
जैसे-
- रामः + टीकते = रामष्टीक
- रामः + ठक्कुरः = रामष्ठक्कुरः
- धनु: + टङ्कारः = धनुष्टङ्कारः
- रूप्यकैः + ठनठनायते = रूप्यकैष्ठनठनायते।
(iv) विसर्गस्य सत्वम्
यदि विसर्ग के बाद क्, त्, थ, स् हो, तो विसर्ग का ‘स्’ हो जाता है;
जैसे—
- नमः + कार: = नमस्कारः
- कृष्णः + तदा = कृष्णस्तदा
- गोपालः + तथैव = गोपालस्तथैव
- नमः + ते = नमस्ते
- बाल: + तत्र = बालस्तत्र
- भक्त: + सेवते = भक्तस्सेवते
(v) विसर्गस्य रत्वम्
यदि विसर्ग से पूर्व अ को छोड़कर कोई स्वर तथा विसर्ग के बाद स्वर, ह्, य्, व्, र्, ल्, ञ्, म्, ङ्, ण्, न्, झ्, भ्, घ्, ढ्, ध्, ज्, ब्, ग्, ड्, द् (वर्गों का 3, 4, 5वाँ वर्ण) में से कोई वर्ण हो, तो विसर्ग का र् होता है तथा बाद वाला वर्ण यथावत् रहता है;
जैसे—
- मुनि: + अवदत् = मुनिरवदत्
- हरि: + हसति = हरिहसति
- मुनि: + गच्छति = मुनिर्गच्छति
- धेनुः + धावति = धेनुर्धा
निर्देश उपर्युक्त संधि के नियमों को भली-भाँति समझकर तथा संधि-विच्छेद करते समय दोनों पदों के अर्थ का भी अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
अभ्यासप्रश्न्नाः
नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित प्रश्न्न
बहुविकल्पीय प्रश्न्नाः
अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितपदानां समुचितं सन्धिं/सन्धि-विच्छेदं वा चिनुत ।
(निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों की उचित संधि अथवा संधि-विच्छेद चुनिए ।)
प्रश्न 1.
प्रातः काले भानूदयः भवति ।
(अ) भानु + उदयः
(ब) भानू + उदयः
(स) भानो + दय:
(द) भान् + ओदयः
उत्तर:
(अ) भानु + उदयः
प्रश्न 2.
अद्य वधूत्सवः अस्ति ।
(अ) बधू + उत्सवः
(ब) वधु + उत्सवः
(स) वधू + उत्सवः
(द) वधू + उत्सव
उत्तर:
(स) वधू + उत्सवः
प्रश्न 3.
पितॄणम् न विस्मरणीयम् ।
(अ) पितु + ऋणम्
(ब) पिता + ऋणम्
(स) पितृ + ऋणं
(द) पितृ + ऋणम्
उत्तर:
(द) पितृ + ऋणम्
प्रश्न 4.
कालिदास्येयं सूक्तिः प्रसिद्धा ।
(अ) सु + उक्ति:
(ब) सू + क्तिन:
(स) सु + उक्ति
(द) सु + उक्तः
उत्तर:
(अ) सु + उक्ति:
प्रश्न 5.
‘हितोपदेशः ‘नामकः ग्रन्थः प्रसिद्धः जातः। मणिकातः
(अ) हितो + उपदेश
(ब) हित + उपदेशः
(स) हितः + उपदेश
(द) हितु + उपदेश:
उत्तर:
(ब) हित + उपदेशः
प्रश्न 6.
तथैव अस्तु ।
(अ) तथा + एव
(ब) तथो + एव
(स) तथा: + एव
(द) तथ + एवम्
उत्तर:
(अ) तथा + एव
प्रश्न 7.
अत्रैकः बालः पठन् आसीत्
(अ) अत्र + एकः
(ब) अत्र + एका
(स) अत्र + एकः
(द) अत्र + एकम्
उत्तर:
(अ) अत्र + एकः
प्रश्न 8.
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनं।
(अ) पर् + उपकार
(ब) पर + उपकारः
(स) पर: + उपकार
(द) परं + उपकार
उत्तर:
(ब) पर + उपकारः
प्रश्न 9.
भूर्जा अतिविशाला अकल्पनीया च ।
(अ) भूः + ऊर्जा
(ब) भू + उर्जा
(स) भू + ऊर्जा
(द) भु + ऊर्जा:
उत्तर:
(स) भू + ऊर्जा
प्रश्न 10.
विवेक: अद्यैव उद्यानं गमिष्यति ।
(अ) अद्य + एव
(ब) अद्यः + एवं
(स) अद्यं + एव
(द) अद्य + एवः
उत्तर:
(अ) अद्य + एव
प्रश्न 11.
सः बालश्शेते ।
(अ) बाल् + शेते
(ब) बालु + शेते:
(स) बाल: + शेते
(द) बाल + शेते
उत्तर:
(स) बाल: + शेते
प्रश्न 12.
नमस्ते
(अ) नम + ते:
(ब) नम + स्ते
(स) नमस् + ते
(द) नमः + ते
उत्तर:
(द) नमः + ते
प्रश्न 13.
सद्भिस्तु लीलया प्रोक्तम् ।
(अ) प्र + उक्तम्
(ब) प्र + उक्त
(स) प्र + उक्तम्
(द) प्रश्न+ उक्तमः
उत्तर:
(अ) प्र + उक्तम्
प्रश्न 14.
चतुर्विंशति वर्षः ।
(अ) चतु: + विंशति
(ब) चतु + विंशति
(स) चतुवः + शीति
(द) चतुः + विंशति
उत्तर:
(अ) चतु: + विंशति
प्रश्न 15.
जीवने उल्लासः आवश्यकः।
(अ) उत् + लास्
(ब) उत् + लास:
(स) उत् + लास:
(द) उत: + लास्
उत्तर:
(स) उत् + लास:
प्रश्न 16.
जगदीशः कम् न रक्षति ?
(अ) जगत + ईश:
(ब) जगद + ईश
(स) जगत् + ईश:
(द) जगत: + ईश
उत्तर:
(स) जगत् + ईश:
प्रश्न 17.
बालस्तत्र अस्ति ।
(अ) बाल: + तत्र्
(ब) बालः + तत्र
(स) बाल + तत्र
(द) बाल + तत्र:
उत्तर:
(ब) बालः + तत्र
प्रश्न 18.
स जातो येन जातेन ।
(अ) जातः + येन
(ब) जातु + येन:
(स) जात + येन्
(द) जातः + येन:
उत्तर:
(अ) जातः + येन
प्रश्न 19.
अस्य उल्लेखः करणीयः ।
(अ) उत् + लेख
(ब) उतः + लेख
(स) उत् + लेख:
(द) उत: + लेख:
उत्तर:
(स) उत् + लेख:
प्रश्न 20.
मुनीन्द्राः वने वसन्ति ।
(अ) मुनि + ईन्द्रा :
(ब) मुनी + इन्द्राः
(स) मुनि + इन्द्र:
(द) मुनि + इन्द्रा:
उत्तर:
(द) मुनि + इन्द्रा:
प्रश्न 21.
अधुना वागीशः विद्यालये अस्ति ।
(अ) वाग् + ईश:
(ब) वाक् + ईश:
(स) वाक + ईश:
(द) वाग + ईश:
उत्तर:
(ब) वाक् + ईश:
प्रश्न 22.
मूर्खेण पुत्रेण कोऽर्थः ?
(अ) को + अर्थ
(ब) कः + अर्थ
(स) कः + अर्थः
(द) क + अर्थ:
उत्तर:
(स) कः + अर्थः
प्रश्न 23.
यथोचितं क्रियताम् ।
(अ) यथा + ओचितम्
(ब) यथा + उचितम्
(स) यथा + औचितम्
(द) यथ + ओचितम्
उत्तर:
(ब) यथा + उचितम्
प्रश्न 24.
सदाचारः सदैव आचरणीयः
(अ) सत् + आचार:
(ब) सद् + आचार
(स) सद् + आचार:
(द) सतः + आचार
उत्तर:
(अ) सत् + आचार:
प्रश्न 25.
बालः + अपि गच्छति ।
(अ) बालऽपि
(ब) बालः अपि
(स) बालोऽपि
(द) बालअपि
उत्तर:
(स) बालोऽपि
प्रश्न 26.
हास्यं जीवने महौषधिः इव भवति ।
(अ) महा + औषधिः
(ब) मह+ औषधि
(स) महा + ओषधि
(द) महत् + ओषधि
उत्तर:
(अ) महा + औषधिः
प्रश्न 27.
अविवेकः परमापदां पदम्।
(अ) परम् आपदां
(ब) परम + आपदाम्
(स) परमा + पदाम्
(द) परमा + आपदाम
उत्तर:
(ब) परम + आपदाम्
प्रश्न 28.
सत् + जनाः विनम्राः भवन्ति ।
(अ) सच्जना:
(ब) सजजना:
(स) सज्जना:
(द) सत्जना:
उत्तर:
(स) सज्जना:
प्रश्न 29.
अस्य पदस्य सम् + धिम् लिखत ।
(अ) सन्धिम्
(ब) सन्धिं
(स) सनिधम्
(द) सम्धिम्
उत्तर:
(अ) सन्धिम्
प्रश्न 30.
एतत् + चिन्तयित्वा नृपः पण्डितसभां कारितवान् ।
(अ) एतत्विन्तयित्वा
(ब) एतचिचन्तयित्वा
(स) एतत् चिन्तयित्वा
(द) एतच्चिन्तयित्वा
उत्तर:
(द) एतच्चिन्तयित्वा
प्रश्न 31.
कालः पिबति तद्रसम् ।
(अ) तच्छ + रसम्
(ब) तत् + रसम्
(स) तन् + रसम्
(द) तद + रसम्
उत्तर:
(ब) तत् + रसम्
प्रश्न 32.
स तरुच्छाया + उपविष्टः आसीत् ।
(अ) तरुच्छायोपविष्टः
(ब) तरुच्छायापविष्टः
(स) तरुच्छायेपविष्टः
(द) तरुच्छायुपविष्टः
उत्तर:
(अ) तरुच्छायोपविष्टः
प्रश्न 33.
पिताऽस्य किं तपस्तेपे ?
(अ) तपः + तेपे
(ब) तप + तेपे
(स) तपस् + तेपे
(द) तपो + तेपे
उत्तर:
(अ) तपः + तेपे
प्रश्न 34.
तदेवाहुः महात्मानः समत्वमिति तथ्यतः ।
(अ) तद् + एवाहुः
(ब) तदे + वाहु:
(स) तत् + देवाहुः
(द) तत् + एवाहुः
उत्तर:
(द) तत् + एवाहुः
लघु उत्तरीय प्रश्नाः
अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलपदानां समुचितं संन्धिं / सन्धि-विच्छेदं वा लिखत |
(निम्नलिखित वाक्यों में स्थूल शब्दों की उचित संधि अथवा संधि-विच्छेद लिखिए।)
प्रश्न 1.
गुरूपदेशः सर्वदा अनुकरणीयः ।
उत्तर:
गुरु + उपदेश: सर्वदा अनुकरणीयः ।
प्रश्न 2.
जन्मोत्सवे लघूत्सवः आयोज्यते ।
उत्तर:
जन्मोत्सवे लघु + उत्सवः आयोज्यते ।
प्रश्न 3.
पूर्णिमायां विधूदयः दर्शनीयः।
उत्तर:
पूर्णिमायां विधु + उदयः दर्शनीयः ।
प्रश्न 4.
वधूपरि शेते ।
उत्तर:
वधू + उपरि शेते।
प्रश्न 5.
सर्वत्र सिन्धूर्मयः सन्ति ।
उत्तर:
सर्वत्र सिन्धु + ऊर्मयः सन्ति ।
प्रश्न 6.
अत्र लघूर्णा अस्ति ।
उत्तर:
अत्र लघु + ऊर्णा अस्ति ।
प्रश्न 7.
मनुष्यस्योपरि मातॄणम् अस्ति।
उत्तर:
मनुष्यस्योपरि मातृ + ऋणम् अस्ति।
प्रश्न 8.
इदानीं नीतिशास्त्रोपदेशेन पुनर्जन्म कारयितुं समर्थः ।
उत्तर:
इदानीं नीतिशास्त्र + उपदेशेन पुनर्जन्म कारयितुं समर्थः ।
प्रश्न 9.
पुरुषोत्तमः भगवान् श्रीरामः आदर्शनृपः आसीत् ।
उत्तर:
पुरुष उत्तमः भगवान् श्रीरामः आदर्शनृपः आसीत् ।
प्रश्न 10.
खे सप्तर्षिः संज्ञकाः नक्षत्राः सन्ति ।
उत्तर:
खे सप्त + ऋषिः संज्ञका नक्षत्राः सन्ति ।
प्रश्न 11.
ग्रीष्मर्तौ जलं अधिकं पानीयम् ।
उत्तर:
ग्रीष्म ऋतौ जलं अधिकं पानीयम् ।
प्रश्न 12.
महर्षिः दयानन्दः गुजरात वास्तव्यः आसीत्।
उत्तर:
महा + ऋषि दयानन्दः गुजरात वास्तव्यः आसीत् ।
प्रश्न 13.
विश्वामित्रः राजर्षिः आसीत् ।
उत्तर:
विश्वामित्रः राज + ऋषिः आसीत् ।
प्रश्न 14.
देवर्षिः नारदः परमभक्तः आसीत्।
उत्तर:
देव + ऋषि नारदः परमभक्तः आसीत् ।
प्रश्न 15.
वर्षर्तौ रोगाः जायन्ते ।
उत्तर:
वर्षा + ऋतौ रोगाः जायन्ते ।
प्रश्न 16.
ब्रह्मर्षि वशिष्ठः कुलगुरुः आसीत् ।
उत्तर:
ब्रह्मा + ऋषि वशिष्ठः कुलगुरुः आसीत् ।
प्रश्न 17.
पश्यैतं बालकम्।
उत्तर:
पश्य + एतम् बालकम् ।
प्रश्न 18.
तस्मै तण्डुलौदनं रोचते ।
उत्तर:
तस्मै तण्डुल + ओदनं रोचते ।
प्रश्न 19.
एषा महौषधिः अस्ति ।
उत्तर:
एषा महा + औषधिः अस्ति ।
प्रश्न 20.
अत्र जलौघः वर्तते ।
उत्तर:
अत्र जल + औघः वर्तते।
प्रश्न 21.
रामाय गुडौदनं रोचते ।
उत्तर:
रामाय गुड + ओदनं रोचते ।
प्रश्न 22.
सांसारिकाः जगल्लीनाः एव भवन्ति ।
उत्तर:
सांसारिका: जगत् + लीनाः एव भवन्ति ।
प्रश्न 23.
नियमः न उल्लङ्घनीयः ।
उत्तर:
नियमः न उत् + लङ्घनीयः ।
प्रश्न 24.
तल्लाङ्गूलं विस्तृतं भूतम्।
उत्तर:
तत् + लाङ्गूलं विस्तृतं भूतम् ।
प्रश्न 25.
पत्युर्गृहं गच्छति ।
उत्तर:
पत्युः + गृहम् गच्छति ।
प्रश्न 26.
रोगा दहन्ति देहम् ।
उत्तर:
रोगाः + दहन्ति देहम् ।
प्रश्न 27.
ते जना हसन्ति ।
उत्तर:
ते जनाः + हसन्ति।
प्रश्न 28.
बालकः एषलिखति ।
उत्तर:
बालकः एष: + लिखति ।
प्रश्न 29.
रामश्चलति गृहम् ।
उत्तर:
रामः + चलति गृहम् ।
प्रश्न 30.
स एव वरस्ता एव चैत्र क्षपाः ।
उत्तर:
सः + एव वरस्ता एव चैत्र क्षपाः ।
प्रश्न 31.
ता एव चैत्र क्षपाः ।
उत्तर:
ताः + एव चैत्र क्षपाः ।
प्रश्न 32.
कश्चित् कान्ता विरह गुरुणा ।
उत्तर:
कः + चित् कान्ता विरह गुरुणा ।
प्रश्न 33.
बालष्षष्ठो वर्तते ।
उत्तर:
बालः + षष्ठः वर्तते।
प्रश्न 34.
विद्यालये अद्यावकाशः नास्ति ।
उत्तर:
विद्यालये अद्यावकाशः न + अस्ति।
प्रश्न 35.
बालः तच्चित्रं पश्यति ।
उत्तर:
बालः तत् + चित्रं पश्यति ।
प्रश्न 36.
ग्रीष्मर्तौ जनाः पर्वतेषु गच्छन्ति ।
उत्तर:
ग्रीष्म ऋतौ जनाः पर्वतेषु गच्छन्ति ।
प्रश्न 37.
नवाम्बुभिर्भूरि विलम्बिनो घनाः ।
उत्तर:
नवाम्बुभिर्भूरि विलम्बिनः + घनाः ।
प्रश्न 38.
काष्ठादग्निर्जायते ।
उत्तर:
काष्ठादग्निः + जायते ।
प्रश्न 39.
स्वभाव एवैष परोपकारिणाम् ।
उत्तर:
स्वभाव + एव + एष परोपकारिणाम् ।
प्रश्न 40.
मनसि च परितुष्टे कोऽर्थवान् को दरिद्रः ।
उत्तर:
मनसि च परितुष्टे कः + अर्थवान् को दरिद्रः ।
प्रश्न 41.
यः सम्यगनुतिष्ठति ।
उत्तर:
यः सम्यक् + अनुतिष्ठति ।
प्रश्न 42.
स समाः शतमव्याधिरायुषा न वियुज्यते ।
उत्तर:
स समाः शतम् + अव्याधिः + आयुषा न वियुज्यते ।
प्रश्न 43.
यावद् भविष्यति ।
उत्तर:
यावत् + भविष्यति ।
प्रश्न 44.
त्वदागमनं आर्याय निवेदयामि |
उत्तर:
त्वत् + आगमनम् आर्याय निवेदयामि ।
प्रश्न 45.
मान हेतोर्मातेव ।
उत्तर:
मान हेतोः + मातेव ।
प्रश्न 46.
तावद् भविष्यामि अनयोर्विधेयः ।
उत्तर:
तावद् भविष्यामि अनयोः + विधेयः ।
प्रश्न 47.
महद्भिः सुप्रतिष्ठितः ।
उत्तर:
महत् + भिः सुप्रतिष्ठितः ।
प्रश्न 48.
सङ्गादारोहति सतां शिरः ।
उत्तर:
सङ्गात् + आरोहति सतां शिरः ।
प्रश्न 49.
मृत: कोवा जायते ।
उत्तर:
मृत कः + वा जायते ।
प्रश्न 50.
न च तारागणैरपि ।
उत्तर:
न च तारागणैः + अपि ।
प्रश्न 51.
जय जगदीश हरे |
उत्तर:
जय जगत् + ईश हरे |
प्रश्न 52.
शारदा अस्माकम् वदनाम्बुजे निवासं क्रियात्।
उत्तर:
शारदा अस्माकम् वदन + अम्बुजे निवासं क्रियात् ।
प्रश्न 53.
आश्रमे उभौ + अपि अतिथिः तिष्ठतः ।
उत्तर:
आश्रमे उभावपि अतिथिः तिष्ठतः ।
प्रश्न 54.
सः प्रतिज्ञां करोति दास्यामीति ।
उत्तर:
सः प्रतिज्ञां करोति दास्यामि + इति ।
प्रश्न 55.
स्वाध्यायाभ्यसनं चैव तपः उच्यते।
उत्तर:
स्वाध्यायाभ्यसनं च + एव तप उच्यते ।
प्रश्न 56.
कालिदासः अद्यापि सर्वत्र प्रसिद्धः ।
उत्तर:
कालिदासः अद्य + अपि सर्वत्र प्रसिद्धः ।
प्रश्न 57.
अहं चिकित्सा + अर्थं गमिष्यामि ।
उत्तर:
अहं चिकित्सार्थं गमिष्यामि ।
प्रश्न 58.
मदोद्धताः कपयः प्रहस्य अवदन्।
उत्तर:
मद + उद्धताः कपयः प्रहस्य अवदन् ।
प्रश्न 59.
बालकाः नतोन्नते मार्गे क्रीडन्ति ।
उत्तर:
बालकाः नत + उन्नते मार्गे क्रीडन्ति ।
प्रश्न 60.
चन्द्र + उदयः निशायां भवति ।
उत्तर:
चन्द्रोदयः निशायां भवति ।
प्रश्न 61.
महर्षिः सर्वत्र पूज्यः ।
उत्तर:
महा + ऋषिः सर्वत्र पूज्यः ।
प्रश्न 62.
जलागमे मयूराः प्रसन्नाः भवन्ति ।
उत्तर:
जल + आगमे मयूराः प्रसन्नाः भवन्ति ।
प्रश्न 63.
शिक्षकस्य प्रश्नस्य + उत्तरं देहि |
उत्तर:
शिक्षकस्य प्रश्नस्योत्तरं देहि ।
प्रश्न 64.
तत् + एव भवति ।
उत्तर:
तदैव भवति ।
प्रश्न 65.
न + अहं स्वर्गं कामये ।
उत्तर:
नाहं स्वर्गं कामये ।
प्रश्न 66.
नास्ति विद्या समं चक्षुः ।
उत्तर:
न + अस्ति विद्या समं चक्षुः ।
प्रश्न 67.
अभीष्टानि वस्तूनि प्राप्य सन्तुष्टः अभवत्।
उत्तर:
अभि + इष्टानि वस्तूनि प्राप्य सन्तुष्टः अभवत् ।
प्रश्न 68.
परं शक्तिः दर्प + उन्मत्तः नकुलः जलम् अपिबत् ।
उत्तर:
परं शक्तिः दर्षोन्मत्तः नकुलः जलम् अपिबत् ।
प्रश्न 69.
मातॄणम् सर्वऋणेषु प्रधानम्।
उत्तर:
मातृ + ऋणम् सर्वऋणेषु प्रधानम् ।
प्रश्न 70.
नर + ईशः प्रजां पालयति ।
उत्तर:
नरेशः प्रजां पालयति ।
प्रश्न 71.
परम + ईश्वरः एकः एव भवति।
उत्तर:
परमेश्वरः एकः एव भवति ।
प्रश्न 72.
लता + उक्तिः कथयति ।
उत्तर:
लतोक्तिः कथयति ।
प्रश्न 73.
एकम् अनु + छेदं लिखत ।
उत्तर:
एकम् अनुच्छेदं लिखत ।
प्रश्न 74.
तच्छ्रुत्वा तेषु एकः बालकः उवाच – अयि भोः ।
उत्तर:
तत् + श्रुत्वा तेषु एकः बालकः उवाच – अयि भोः ।
प्रश्न 75.
पर्वतीय वातावरणं स्व + छं भवति
उत्तर:
पर्वतीय वातावरणं स्वच्छं भवति ।
प्रश्न 76.
तच्छ्रेण तरुशाखा छिन्ना अभवत्।
उत्तर:
तत् + शरेण तरुशाखा छिन्ना अभवत् ।
प्रश्न 77.
पश्य एतच्चित्रं लिखत ।
उत्तर:
पश्य एतत् + चित्रं लिखत ।
प्रश्न 78.
त्यागात् + शान्तिः भवति ।
उत्तर:
त्यागाच्छान्तिः भवति ।
प्रश्न 79.
गम् + गा गङ्गेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपि ।
उत्तर:
गङ्गा गङ्गेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपि ।
प्रश्न 80.
तर्हि मत् + शिरः ददामि ।
उत्तर:
तर्हि मच्छिरः ददामि।
प्रश्न 81.
जमदीश्वरः बालकान् रक्षति ।
उत्तर:
जगत् + ईश्वरः बालकान् रक्षति ।
प्रश्न 82.
सम् + रक्षकः कुत्र गतः ?
उत्तर:
संरक्षकः कुत्र गत: ?
प्रश्न 83.
सकलं + जगद् ध्वस्तं भविष्यति ।
उत्तर:
सकलञ्जगद् ध्वस्तं भविष्यति ।
प्रश्न 84.
तत् + शक्यम् अस्ति ।
उत्तर:
तच्छक्यम् अस्ति ।
प्रश्न 85.
त्वम् एकम् अनुच्छेदं लिख ।
उत्तर:
त्वम् एकम् अनु + छेदम् लिख ।
प्रश्न 86.
अयं शिवस्य धनुष्टङ्कारः अस्ति।
उत्तर:
अयं शिवस्य धनुः + टङ्कारः अस्ति ।
प्रश्न 87.
आर्य! अयथाकालं समागतः + असि ।
उत्तर:
आर्य ! अयथाकालं समागतोऽसि ।
प्रश्न 88.
भारति! तव अयम् अपूर्वः कः + अपि कोषः विद्यते ।
उत्तर:
भारति ! तव अयम् अपूर्वः कोऽपि कोषः विद्यते ।
प्रश्न 89.
कोऽनर्थः फलः ? मानः ।
उत्तर:
कः + अनर्थः फलः ? मानः ।
प्रश्न 90.
कोऽनर्थफलः संसारे भवति ।
उत्तर:
कः + अनर्थफलः संसारे भवति।
I.
प्रश्न 1.
अधोलिखितेषु समुचितं सन्धिपदं चित्वा लिखत
यथा- चन्द्र + उदयः = चन्द्रोदयः/ चन्द्रौदयः/ चन्द्रुदयः
उत्तर:
चन्द्रोदयः
![]()

उत्तर:
(i) मातृणम्
(ii) यद्यपि
(iii) मतैक्यम्
(iv) भानूदयः
(v) गङ्गव
(vi) सर्वेऽत्र
प्रश्न 2.
अधोलिखितेषु सन्धिविच्छेदं रूपं पूरायित्वा सन्धेः नाम अपि लिखत

उत्तर:
(i) तव + एव — वृद्धि संधि
(ii) नदी + इव — दीर्घ संधि
(iii) अति + आचारः — यण संधि
(iv) यथा + उचितम् — गुण संधि
प्रश्न 3.
अधोलिखितेषु स्थूलपदेषु सन्धिविच्छेदं कृत्वा लिखत
(i) कवीन्द्रः अथ नवीनां कविता श्रावयति।
(ii) करनः सर्वेषु अत्याचारम् करोति स्म।
(iii) गंगा गंगेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपि सः पापेभ्यः विमुच्यते।
(iv) यथा रामः पठति तथैव श्यामः पठति।
उत्तर:
(i) कवि + इन्द्रः
(ii) अति + आचारम्
(iii) गंगा + इति
(ii) तथा + एव
II. समुचितं सन्धिविच्छेदं रूपं पूरयत
(i) दिगम्बरः – ……….. + अम्बरः (दिक/दिग्)
(ii) जगदीशः – …….. + ईशः (जगत्/जगद्)
(iii) अयं गच्छति – ………..+ गच्छति (अयं/अयम्)
उत्तर:
(i) दिक्
(ii) जगत्
(iii) अयम्
III. समुचितं सन्धिपदं चित्वा लिखत
(i) शिवः + अवदत — शिवावदत्/शिवोऽवदत्
(ii) छात्रः + अयम् – छात्रोऽयम्/छात्रायम्
उत्तर:
(i) शिवोऽवदत्
(ii) छात्रोऽयम्
IV . सन्धिं कृत्वा लिखत
(i) अहः + अहः = …………..
(ii) जीविति + अनाथः + अपि = …………..
(iii) गृहे + अपि = …………..
(iv) जगत् + माता = …………..
(v) यत् + भविष्यः = …………..
उत्तर:
(i) अहोऽह:
(ii) जीवत्यनाथोऽपि
(iii) गृहेऽपि
(iv) जगन्माता
(v) यद्भविष्यो
अतिरिक्त कार्यम्
प्रश्न 1.
अधोलिखितेषु स्थूलपदेषु सन्धि अधौदतैः पदैः अवचित्य लिखत
(निम्नलिखित स्थूल पदों की सन्धि दिए गए पदों में से चुनकर लिखिए।) (Choose the correct join bold words from the given options.)
(i) द्रोणाचार्यः प्रीतः भूत्वा कं ब्रह्म + अस्त्रम् अशिक्षत्?
(क) ब्रह्मअस्त्रम्
(ख) ब्रह्मास्त्रम्
(ग) बास्त्रम्
(घ) बह्मास्त्रम्
उत्तर:
(ख) ब्रह्मास्त्रम्
(ii) अये! किमयः देव + आलयः?
(क) देआलय
(ख) दैवआलय
(ग) देवालयः
(घ) दैआलय
उत्तर:
(ग) देवालयः
(iii) चक्रस्य प्रति + एकम् अरमपि उत्कीर्णम्।
(क) प्रतीकम्
(ख) प्रतिकम्
(ग) प्रत्यिकम्
(घ) प्रत्येकम्
उत्तर:
(घ) प्रत्येकम्
(iv) न + एव! तर्ति शृणुत ध्यानेन।
(क) नेव
(ख) नैव
(ग) नएव
(घ) एंव
उत्तर:
(ख) नैव
(v) चदुर्दश मनु + अन्तराणाम् समूह कल्पः।
(क) मनोन्तराणाम्
(ख) मन्वन्तराणाम्
(ग) मनवन्तराणाम्
(घ) मनुअन्तरणाम्
उत्तर:
(घ) मनुअन्तरणाम्
(vi) तदा + एव समारोहारम्भे कश्चन विद्वान् सङ्कल्पवाचन करोति।
(क) तदाव
(ख) तदेव
(ग) तदैव
(घ) तदव
उत्तर:
(ग) तदैव
(vii) राज्ञः नेत्रदान + अर्थम् निश्चयं ज्ञात्वा अमात्याः विषण्णाः भूत्वा अवदन्।
(क) नेत्रदानार्थम्
(ख) नेत्रदानर्थम्
(ग) नेत्रदाअर्थम्
(घ) नेत्रदानार्थम्
उत्तर:
(घ) नेत्रदानार्थम्
(viii) यथा + उचितम् क्रियताम्।
(क) यथाचितम्
(ख) यथोचितम्
(ग) यथोचीतम्
(घ) यथुचितम्
उत्तर:
(ख) यथोचितम्
प्रश्न 2.
अधोलिखितेषु रेखाङ्किकतपदेषु सन्धिच्छेदं अधोलिखितैः शुद्धपदैः चित्वा लिखत
(निम्नलिखित रेखांकित पदों का सन्धि-विच्छेद नीचे लिखे पदों में से शुद्ध पद चुनकर लिखिए।)
(Choose the correct answer words from the given options.)
(i) राजवैद्यः प्रोवाच।
(क) प्र + ओवाच
(ख) प्रो + वाच
(ग) प्र + उवाच
(घ) प्राव + वाच
उत्तर:
(ग) प्र + उवाच
(ii) स बाल्यात् एव वृद्धोपसेवी, विनयशीलः शास्त्रपारङ्गतः च आसीत्।।
(क) वृद्ध + अपसेवी
(ख) वृद्ध + उपसेवी
(ग) वृद्धा + सेवा
(घ) वद्धाय + सेवी
उत्तर:
(ख) वृद्ध + उपसेवी
(iii) तस्य उपदेशस्यैव एकम् अंशम् अद्य वयं पठामः किल।
(क) उपदेश + अस्यैव
(ख) उपदेश्य + ऐव
(ग) उपदेशस्य + एव
(घ) उप + देशस्य
उत्तर:
(ग) उपदेशस्य + एव
(iv) प्रत्यक्षं किं प्रमाणम्?
(क) प्रति + अक्ष
(ख) प्रति + यक्ष
(ग) प्रति + अक्षम्
(घ) प्र + अत्यक्षम्
उत्तर:
(ग) प्रति + अक्षम्
(v) अत्र अनेके प्रमुखोत्सवाः।
(क) प्रमुख + उत्सवाः
(ख) प्रमुख + उत्सवः
(ग) प्रमुख + अतिशय
(घ) प्रमुख + ओत्सवाः
उत्तर:
(क) प्रमुख + उत्सवाः
प्रश्न 3.
अधोलिखितेषु स्थूलपदेषु सन्धिविच्छेदम् अथवा सन्धि कृत्वा लिखत
(नीचे लिखे स्थूल शब्दों का सन्धि-विच्छेद अथवा सन्धि लिखिए।)
(Join or Separate the given bold words and write.)
(i) लते! पश्य, सूर्य + उदयः भवति।
(ii) मातृ + आज्ञा सर्वदा पालनीया।
(iii) अहम् वनोत्सव द्रष्टुम् गच्छामि।।
(iv) त्वमपि देवालयम् गच्छ।
(v) अद्य + अवकाशः अस्ति।
(vi) अहम् + वाटिकां गमिष्यामि।
(vii) रमेशः छात्राणाम् नायकः अस्ति।
(viii) तत्र + एव मम मित्रम् आगमिष्यति।
(ix) अम्ब! अद्याहम् मित्रेण सह शुक्रतालम् गतवान्।
(x) तरुच्छायां सुघना अस्ति।
(xi) राष्ट्रपते भो + अनम् द्रष्टुम् गमिष्यति।
(xii) सहसा + एव वृष्टिः आगता।
(xiii) पर + उपदेशे पाण्डित्यं सर्वेषां सुकरं नृणाम्।
(xiv) विद्यालये वार्षिकोत्सवः अस्ति।
(xv) गणेशः शंकरः सुतः अस्ति।
(xvi) केऽपि जनाः केवलं सुखम् इच्छन्ति परं।
(xvii) इदं एव भवति।
(xviii) विशालौ पर्वताविव।
(xix) सह नाववतु।
(xx) नाहं स्वर्ग कामये।
(xxi) सः विशालं भवनम् दृष्ट्वाविस्मितः अभवत्।
(xxii) मुनीन्द्राः वने वसन्ति।
(xxiii) अस्माकं कक्षाया नायकः अतिस्निग्धः अस्ति।
(xxiv) द्वावेव मुनी आसने तिष्ठतः।
(xxv) त्वम् इन्द्रियाण्मादौ नियम्य कामं जहि।
(xxvi) त्वाम् अत्र प्राप्य अतीव प्रसन्न + अस्मि।
(xxvii) सा प्रात: देव + आलयं गच्छति।
(xxviii) कामात् क्रोधाऽभिजायते।
(xxix) अनिच्छन् अपि वायेंय! बलादिव नियोजितः।
(xxx) सर्वथा जागरूकोऽहं छात्राणां कृते आदर्शः।
(xxxi) सः चिन्निरर्थक नीतिः।
उत्तर:
(i) सूर्योदयः
(ii) मात्राज्ञा
(iii) वन + उत्सव
(iv) देव + आलयम्
(v) अद्यावकाशः
(vi) अहंवाटिका
(vii) नै + अकः
(viii) तत्रैव
(ix) अद्य + अहम्
(x) तरु + छाया
(xi) भवनम्
(xii) सहसैव
(xiii) परोपदेशे
(xiv) वार्षिक + उत्सवः
(xv) गण + ईशः
(xvi) के + अपि
(xvii) भो + इति
(xviii) पर्वतौ + इवं
(xix) नौ + अपतु
(xx) न + अहम्
(xxi) भौ + अनम्
(xxii) मुनि + इन्द्राः
(xxiii) नै + अकः
(xxiv) द्वौ + एव
(xxv) इन्द्रियाणि + आदौ
(xxvi) प्रसन्नोऽस्मि
(xxvii) देवालयं
(xxviii) क्रोधो + अभिजायते
(xxix) बलात् + इव
(xxx) जागरूको + अहं
(xxxi) चेत् + निरर्थकं
प्रश्न 4.
शुद्धं सन्धिपदं (✓) इति चिह्नन अङ्कयत

उत्तर:


प्रश्न 5.
अधोलिखितेषु वाक्येषु स्थूलाक्षरपदेषु सन्धिं कृत्वा लिखत।
(i) अहम् + वाटिका गमिष्यामि।
(ii) सः + अपि महा सहगमिष्यति।
(iii) तेन सह श्यामः + अपि अस्ति।
(iv) मुखात् + अमृतं वचः श्रोतुं जनाः आगच्छन्ति।
(v) तेन सह जगत् + ईश अपि अस्ति।
(vi) त्वाम् अत्र प्राप्य अहम् अतीव प्रसन्न + अस्मि।
(vii) सुधे! कथं त्वं विलम्बात् + आगतः।
(viii) भवेत् अत्र नित्यं प्रभो + अनुग्रहः ते।
(ix) प्रभो + अत्र स्वानुग्रहं करोतु।
(x) हे प्रभो! मह्यं सत् + मतिं देहि।
(xi) केचन जनाः विद्याम् इच्छन्ति केचन धनम् + च।
(xii) सन्तोषः एव सत् + निधानम्।
उत्तर:
(i) अहंवाटिकां।
(ii) सोऽपि।
(iii) श्यामोऽपि।
(iv) मुखादमृत।
(v) जगदीशः
(vi) प्रसन्नोऽस्मि।
(vii) विलम्बादागता।
(viii) प्रभोऽनुग्रहः।
(ix) प्रभोऽत्र।
(x) सन्मतिम्।
(xi) धनञ्च अथवा धनं च।
(xii) सन्निधानम्।
प्रश्न 6.
उदाहरणानुसारम् सन्धिं कुरुत। (उदाहरण के अनुसार सन्धि करें)

उत्तर:
(iii) ए + अ = पुस्तकेऽत्र
(iv) ए + अ = देशेऽभावः
(v) ओ + अ = विज़्णोऽत्र
(vi) ओ + अ = विभोऽस्मान्
(vii) ए + अ = सेवेतेऽधुना
(viii) ए + अ = मोदेऽहम्
(ix) ए + अ = लज्जतेऽयम
प्रश्न 7.
उदाहरणम् अनुसृत्य सन्धि-विच्छेदः क्रियताम्। (उदाहरण के अनुसार सन्धि-विच्छेद करें)

प्रश्न 8.
स्थूलपदेषु सन्धिच्छेदम् दत्तेभ्यः विकल्पेभ्यः शुद्ध चित्त्वा उत्तरपुस्तिकायां लिखत
(स्थूल पदों में सन्धिच्छेदयुक्त पद को दिए गए विकल्पों में से शुद्ध चुनकर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।
Separate bold words and choose the appropriate answer from the options given below and write the answer in the answer sheet.)
1. पश्य पश्य तत् रमणीयं भवनम्।
(क) भव + अनम्
(ख) भौ + अनम्
(ग) भू + अनम्
(घ) भो + अनम्।
उत्तर:
(घ) भो + अनम्।
2. विशालौ पर्वताविव। ___
(क) पर्वतौ + इव
(ख) पर्वतो + इव
(ग) पर्वताः + विव
(घ) पर्वत + आविव।
उत्तर:
(क) पर्वतौ + इव
3. राज्ञः स्वेषु गात्रेष्वपि निरासक्तिं विज्ञाय ब्रह्माण्ड व्याकुलम् अभवत्।
(क) गात्रे + ष्वपि
(ख) गात्रेष् + वपि
(ग) गात्रेः + वपि
(घ) गात्रेषु + अपि।
उत्तर:
(घ) गात्रेषु + अपि।
4. त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य।
(क) इन्द्रियाणी + आदौ
(ख) इन्द्रियाणि + आदौ
(ग) इन्द्रियाणी + यादौ
(घ) इन्द्रियाण्य + आदौ।
उत्तर:
(ख) इन्द्रियाणि + आदौ
5. त्वम् तथैव कार्यं कुरु।
(क) तथ + एव
(ख) तथा एव
(ग) तथा ऐव
(घ) तथा + ऐव।
उत्तर:
(ख) तथा एव
6. नाहं स्वर्गं कामये।
(क) न + आहं
(ख) न + अहं
(ग) ना + हं
(घ) ना + आहे।
उत्तर:
(ख) न + अहं
7. मुनीन्द्राः वने वसन्ति।
(क) मुनि + ईन्द्राः
(ख) मुनी + इन्द्राः
(ग) मुनि + इन्द्रः
(घ) मुनि + इन्द्राः।
उत्तर:
(घ) मुनि + इन्द्राः।
8. अहो सत्त्वहितैषिता!
(क) सत्त्वहित + एषिता
(ख) सत्त्वहित + ऐषिता
(ग) सत्त्वहित + इषिता
(घ) सत्त्वहित + ईषिता।
उत्तर:
(क) सत्त्वहित + एषिता
9. गुरूपदेशेन इव मम चक्षुषी समुन्मीलिते।
(क) गुरु + उपदेशेन
(ख) गुरु + ऊपदेशेन
(ग) गुरु + ओपदेशेन
(घ) गुरु + पदेशेन।
उत्तर:
(क) गुरु + उपदेशेन
10. सुप्तोत्थितः प्रछन्नभाग्यः अवदत्।
(क) सुप्त + ओत्थितः
(ख) सुप्तो + त्थिताः
(ग) सुप्त + उत्थितः
(घ) सुप्ता + उत्थिताः।
उत्तर:
(ग) सुप्त + उत्थितः
11. पापिनाम् च सदैव दु:खं भवति।
(क) सद् + ऐव
(ख) सदा + एव
(ग) सत् + एव
(घ) सत् + ऐव।
उत्तर:
(ख) सदा + एव
12. यथोचितं क्रियताम् इति नृपः अवदत् ।
(क) यथा + ओचितम्
(ख) यथ + ओचितम्
(ग) यथा + औचितम्
(घ) यथा + उचितम्।
उत्तर:
(घ) यथा + उचितम्।
13. आगच्छतु + अत्र मोहन!
(क) आगच्छत्वत्र
(ख) आगच्छत्वात्र
(ग) आगच्छतुऽत्र
(घ) आगच्छतु अत्र।
उत्तर:
(क) आगच्छत्वत्र
14. उभौ + एव तत्र आगमिष्यतः।
(क) उभावैव
(ख) उभौवेव
(ग) उभावेव
(घ) उभौवैव।
उत्तर:
(ग) उभावेव
15. आश्रमे उभौ + अपि अतिथी तिष्ठतः।
(क) उभवपि
(ख) उभवापि
(ग) उभावपि
(घ) उभौअपि।
उत्तर:
(ग) उभावपि
16. यः इच्छति + आत्मनः श्रेयः।
(क) इच्छत्यत्मनः
(ख) इच्छत्यात्मनः
(ग) इच्छतिआत्मनः
(घ) इच्छत्यात्मानः।
उत्तर:
(ख) इच्छत्यात्मनः
17. यद्यपि सः पाठं पठति तथा + अपि स्मरणं न भवति।
(क) तथपि
(ख) तथाऽपि
(ग) तथापि
(घ) तथाअपि।
उत्तर:
(ग) तथापि
18. हित + उपदेश: नारायणपण्डितस्य कृतिः ।
(क) हितोपदेशः
(ख) हितापदेशः
(ग) हितपोदेशः
(घ) हितुपदेशः।
उत्तर:
(क) हितोपदेशः
19. याचक: अभि + इच्छितानि वस्तूनि प्राप्य सन्तुष्टः अभवत्।
(क) अभीच्छतानि
(ख) अभीच्छितानि
(ग) अभिच्छतानि
(घ) अभिच्छितानि।
उत्तर:
(ख) अभीच्छितानि
20. अभि + इष्टानि वस्तूनि प्राप्य सन्तुष्टः अभवत्।
(क) अभीष्टानि
(ख) अभिष्टानि
(ग) अभ्यिष्टानि
(घ) अभ्युष्टानि।
उत्तराणि-
(क) अभीष्टानि
सन्धि के उदाहरण



