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Sanskrit Samas Class 9 – Samas Class 9 Sanskrit
Class 9 Sanskrit Samas
Class 9th Sanskrit Samas – Samas Sanskrit Class 9
समास शब्द की उत्पत्ति
सम् उपसर्गपूर्वक अस् धातु से घञ् प्रत्यय लगने पर समास शब्द निष्पन्न होता है। इसका अर्थ ‘संक्षिप्तीकरण’ है।
समास की परिभाषा
संक्षेप करना अथवा अनेक पदों का एक पद हो जाना ‘समास’ कहलाता है अर्थात् जब अनेक पद मिलकर एक पद हो जाते हैं, तो उसे समास कहा जाता है; यथा – सीतायाः पतिः = सीतापतिः ।
समस्त-पद समास कर लेने पर पूर्व पदों की विभक्तियों का लोप हो जाता है और अन्तिम पद में पाठक (पढ़ने वाला) सन्दर्भ के अनुसार विभक्ति का निर्धारण करता है। इस प्रकार समास के नियम से मिले हुए शब्द समूह को ‘सामासिक पद’ या ‘समस्त पद’ कहते हैं।
समास-विग्रह समास किए गए पदों को अलग-अलग करने की विधि को ‘समास – विग्रह’ कहते हैं अर्थात् समस्त – पद में मिले हुए शब्दों को समास होने से पहले वाली (प्रकृति, प्रत्ययसहित मूल) स्थिति में कर देने को ही समास – विग्रह कहते हैं; यथा – सीतापति: का समास – विग्रह ‘सीताया: पति:’ होगा।
समास के भेद
समास के पद के आधार पर चार भेद होते हैं
1. अव्ययीभाव समास
2. तत्पुरुष समास
3. बहुव्रीहि समास
4. द्वन्द्व समास
नोट हमारे कक्षा IX के पाठ्यक्रमानुसार हम यहाँ तत्पुरुष, तत्पुरुष के भेद, कर्मधारय का ही अध्ययन करेंगे।
1. तत्पुरुष समास
सूत्र “प्रायेण उत्तरपद प्रधानः तत्पुरुषः।”
तत्पुरुष समास में प्राय: उत्तर पद की प्रधानता होती है। वाक्य प्रयोग करते समय लिंग, विभक्ति और वचन का प्रयोग भी उत्तर पद के अनुसार ही होता है; यथा-राज्ञः पुरुषः = राजपुरुष:, यहाँ उत्तर पद पुरुष है तथा उसकी प्रधानता है।
तत्पुरुष समास के भेद
अलग-अलग विभक्तियों के अनुसार तत्पुरुष समास के छ: भेद होते हैं। तत्पुरुष समास में पूर्वपद में जो विभक्ति होती है, प्रायः उसी के नाम से ही समास का नाम होता है।
तत्पुरुष समास के निम्नलिखित भेद होते हैं
(i) द्वितीया तत्पुरुष
द्वितीया तत्पुरुष समास में विग्रह करने पर प्रथम पद द्वितीया विभक्ति का होता है और समास करने पर द्वितीया विभक्ति का लोप हो जाता है ।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- भयप्राप्तः – भयं प्राप्तः – भय को प्राप्त
- कृष्णाश्रितः – कृष्णम् आश्रितः – कृष्ण के आश्रित
- शोकपतितः – शोकं पतितः – शोक में पतित
- सुखप्राप्तः – सुखं प्राप्तः – सुख को प्राप्त
- ग्रामगतः – ग्रामं गतः – गाँव को गया हुआ
- मुहुर्तव्यापी – मुहुर्तं व्यापी – थोड़े समय को
- चिरस्थायी – चिरं स्थायी – लम्बे समय तक स्थायी
- दुःखातीतः – दुःखंअतीतः – दुःख से भरा अतीत
- नरकपतितः – नरकं पतितः – नरक को पतित
- ग्रामगतः – ग्रामं गतः – गाँव को गया हुआ
- सङ्कटापन्नः – सङ्कटम् आपन्नः – आपन्न (निकट) संकट वाला
- मासप्रमितः – मासं प्रमितः – एक मास तक
- क्षणस्थायी – क्षणं स्थायी – क्षणभर स्थित
- भयापन्नः – भयम् आपन्न – आपन्न (निकट) भय वाला
(ii) तृतीया तत्पुरुष
तृतीया तत्पुरुष में विग्रह करने पर प्रथम पद तृतीया विभक्ति में होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- हरित्रातः – हरिणा त्रातः – हरि द्वारा रक्षित
- मासपूर्वः – मासेन पूर्वः – मास से पूर्व
- हस्तलिखितः – हस्तेन लिखित: – हाथ से लिखा हुआ
- विष्णुत्रातः – विष्णुना त्रातः – विष्णु द्वार रक्षित
- असिछिन्नः – असिना छिन्नः – तलवार से काटा हुआ
- शङ्कुलाखण्डः – शङ्कुलया खण्ड: – शंकुल से टुकड़ा किया हुआ
- नखभिन्नः – नखैः भिन्नः – नाखूनों से फाड़ा गया
- गुडमिश्रम् – गुडेन मिश्रम् – गुड़ से मिश्रित
- नेत्रहीनः – नेत्राभ्यां हीनः – आँखों से विहीन
- पादखञ्जः – पादेन खञ्जः – पैर से लँगड़ा
(iii) चतुर्थी तत्पुरुष
चतुर्थी तत्पुरुष में विग्रह करने पर प्रथम पद चतुर्थी विभक्ति में होता है ।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- यूपदारू – यूपाय दारू – खम्भे के लिए लकड़ी
- गोरक्षितम् – गवे रक्षितम् – गो के लिए रक्षित
- नृपसुखम् – नृपायसुखम् – राजा के लिए सुख
- ब्राह्मणरक्षितः – ब्राह्मणाय रक्षितः – ब्राह्मण के लिए रक्षित
- भूतबलिः – भूताय बलिः – भूत के लिए बलि
- पूजापुष्पाणि – पूजाय पुष्पाणि – पूजा के लिए पुष्प
- कुम्भमृत्तिका – कुम्भा मृत्तिका – घड़े के लिए मिट्टी
- गोहितम् – गवे हितम् – गो के लिए हित
(iv) पञ्चमी तत्पुरुष
पञ्चमी तत्पुरुष समास में विग्रह करने पर प्रथम पद में पञ्चमी विभक्ति होती है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- दूरादागतः – दूरात् आगतः – दूर से आया हुआ
- अश्वपतितः – अश्वात् पतितः – घोड़े से गिरा हुआ
- चौरभयम् – चौरात् भयम् – चोर से भय
- स्तोकामुक्तः – स्तोकात् मुक्तः – स्तोक से मुक्त
- सिंहभीत: – सिंहात् भीतः – सिंह से भयभीत
- स्वर्गपतितः – स्वर्गात् पतितः – स्वर्ग से गिरा हुआ
- रोगमुक्तः – रोगात् मुक्तः – रोग से मुक्त
- दुःखापेतः – दुःखात् अपेतः – दुःख से पीड़ित
- मार्गभ्रष्टः – मार्गात् भ्रष्टः – मार्ग से भ्रष्ट
(v) षष्ठी तत्पुरुष
षष्ठी तत्पुरुष समास में विग्रह करने पर प्रथम पद षष्ठी विभक्ति में होता है तथा समास करने पर षष्ठी विभक्ति का लोप जाता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- राजपुरुषः – राज्ञः पुरुषः – राजा का पुरुष
- घटकर्ता – घटस्य कर्ता – घट का कर्ता
- विद्यालयः – विद्यायाः आलयः – विद्या का आलय
- अन्नदाता – अन्नस्य दाता – अन्न का दाता
- सुरेश: – सुराणाम् ईशः – देवों का ईश (राजा)
- राजकुमारः – राज्ञः कुमारः – राजा का कुमार
- धनदाता – धनस्य दाता – धन का दाता
- ग्रामगमनम् – ग्रामस्य गमनम् – गाँव को गमन
- जगतसृष्टा – जगतस्य सृष्टा – जगत का सृष्टा
यह भी जानें….
जब समस्त पद अव्ययी होता है, तो विग्रह करते समय षष्ठी विभक्ति से युक्त शब्दों से पूर्व अव्ययवाचक शब्द, पूर्व, अधर, अर्ध इत्यादि शब्द आते हैं।
(vi) सप्तमी तत्पुरुष
सप्तमी तत्पुरुष समास में विग्रह करने पर प्रथम पद सप्तमी विभक्ति में होता है, वह सप्तमी तत्पुरुष समास होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- कार्यकुशलः – कार्ये कुशलः – कार्य में कुशल
- चक्रबन्धः – चक्रेबन्धः – चक्र में बँधा हुआ
- युद्धनिपुणः – युद्धे निपुणः – युद्ध में निपुण
- कार्यचतुरः – कार्ये चतुरः – कार्य में चतुर
- पाशबन्धः – पाशे बन्धः – पाश में बँधा हुआ
- श्राद्धकालः – श्राद्धे कालः – श्राद्ध का समय
- अनुवादपटुः – अनुवादे पटुः – अनुवाद में चतुर
- कलानिपुणः – कलासु निपुणः – कलाओं में निपुण
- गुरुभक्ति – गुरौ भक्ति – गुरु की भक्ति
- कूप पतितः – कूपे पतितः – कुएँ में गिरा हुआ
- नरोत्तमः – नरेषु उत्तमः – पुरुषों में श्रेष्ठ
तत्पुरुष समास के अन्य भेद
(i) उपपद तत्पुरुष समास
इस समास में उत्तरपद क्रियावाचक शब्द होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- कुम्भकारः – कुम्भं करोति – जो कुम्भ बनाता है
- धर्मज्ञः – धर्मं जानाति – जो धर्म जानता है
- धनदः – धनं ददाति – जो धन देता है
- मर्मज्ञः – मर्मं जानाति – जो मर्म को जानता है
- प्रियंवदः – प्रियं वदति – जो प्रिय बोलता है
- सूत्रकारः – सूत्रं करोति – जो सूत्र बनाता है
- कम्बलदः – कम्बलं ददाति – कम्बल देने वाला
(ii) नञ् तत्पुरुष समास
इस समास के पूर्वपद में निषेधार्थक ‘अ’ अथवा ‘अन्’ शब्द का प्रयोग होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- अनिच्छा – न इच्छा – इच्छा न हो
- अनागतम् – न आगतम् – जो आया न हो
- अगजः – न गजः – जो गज न हो
- अनश्वः – न अश्वः – जो अश्व न हो
- अकृतम् – न कृतम् – जो किया न हो
- अब्राह्मणः – न ब्राह्मणः – जो ब्राह्मण न हो
- अविवेक: – न विवेक: – जो विवेक न हो
- अधर्मः – न धर्म: – जो धर्म न हो
2. कर्मधारय समास
सूत्र “विशेषणं विशेष्येण बहुलम्।”
जब तत्पुरुष समास के दोनों पदों में एक ही विभक्ति अर्थात् समान विभक्ति होती है, तब वह समानाधिकरण तत्पुरुष समास कहलाता है । इसी समास को कर्मधारय नाम से जाना जाता है।
इस समास में साधारणतया पूर्व पद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है; यथा-रक्तम् कमलम् = रक्तकमलम्।
कर्मधारय समास के भेद
कर्मधारय समास के पाँच भेद होते हैं
(i) विशेषण – पूर्वपद कर्मधारय
इस समास में पूर्वपद विशेषण तथा उत्तरपद विशेष्य होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास विग्रह – अर्थ
- रक्तकमलम् – रक्तं कमलम् इति – लाल कमल
- पीताम्बरम् – पीतम् अम्बरम् इति – पीला वस्त्र
- श्वेतवस्त्रम् – श्वेतं वस्त्रम् इति – श्वेत वस्त्र
- नीलोत्पलम् – नीलम् उत्पलम् इति – नीला वस्त्र
- वीरपुरुषः – वीरः पुरुषः इति – वीर पुरुष
- सुन्दरबालकः – सुन्दरः बालकः इति – सुन्दर बालक
- परमपुरुषः – परमः पुरुषः इति – परम पुरुष
- उन्नत वृक्षः – उन्नतः वृक्षः इति – ऊँचा वृक्ष
- महापुरुषः – महान् पुरुषः इति – महान पुरुष
- महाराजः – महान् राजा इति – महान राजा
- एकपुरुषः – एक: पुरुषः इति – एक पुरुष
- दीर्घ रज्जुः – दीर्घा रज्जुः इति – लम्बी रस्सी
(ii) उपमान- पूर्वपद कर्मधारय
इस समास में पूर्वपद उपमान और उत्तरपद उपमेय होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- घनश्यामः – घनः इव श्यामः इति – बादल के समान काला
- कुसुमकोमलम् – कुसुमम् इव कोमलम् इति – पुष्प के समान कोमल
- चन्द्रमुखम् – चन्द्रः इव मुखम् – चन्द्र के समान मुख
- शैलोन्नतः – शैल इव उन्नतः इति – पर्वत के समान ऊँचा
- वज्रकठोरम् – वज्रम् इव कठोरम् इति – वज्र के समान कठोर
(iii) उपमानोत्तरपद कर्मधारय
जिस समास में पूर्वपद उपमेय और उत्तर पद उपमान होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- पुरुषसिंहः – पुरुषः सिंहः इव – पुरुषरूपी व्याघ्र
- पुरुषनागः – पुरुषः नागः इव – पुरुषरूपी नाग
- करकिसलयम् – कर: किसलयम् इव – किसलयरूपी हाथ
- मुखकमलम् – मुखं कमलम् इव – कमलरूपी मुख
- पुरुषर्षभः – पुरुषः ऋषभः इव – ऋषभरूपी पुरुष
(iv) विशेष्य-उभयपद कर्मधारय
जहाँ दो विशेष्य पदों में से एक पद का प्रयोग विशेषण के समान होता है।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- आम्रवृक्षः – आम्रश्चासौ वृक्षः – आम का है जो वृक्ष
- वायसदम्पती – वायसौ च तौ दम्पती – वायस दम्पती है जो
(v) विशेषण-उभयपद कर्मधारय
जहाँ पूर्वपद और उत्तरपद दोनों विशेषण होते हैं।
उदाहरण
- समस्त पद – समास-विग्रह – अर्थ
- शीतोष्णम् – शीतं च उष्णम् – शीत और उष्ण
- रक्तपीतः – रक्तश्च पीतः – रक्त और पीत
- कृताकृतम् – कृतं च अकृतं च – किया हुआ और न किया हुआ
अभ्यासप्रश्नाः
नवीनतम् परीक्षा पैटर्न पर आधारित प्रश्न
बहुविकल्पीयप्रश्नाः
प्रश्न 1.
समास कहा जाता है
(क) पदों के मेल को
(ख) पदों के संक्षिप्तीकरण को
(ग) पदों के विस्तारीकरण को
(घ) पदों के दीर्घीकरण को
उत्तर:
(ख) पदों के संक्षिप्तीकरण को
प्रश्न 2.
पदों के आधार पर समास के भेद होते हैं
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छ:
उत्तर:
(ख) चार
प्रश्न 3.
पूर्वपद की प्रधानता और उसकी विभक्ति के लोप वाला समास कहलाता है
(क) तत्पुरुष
(ख) बहुव्रीहि
(ग) कर्मधारय
(घ) द्विगु
उत्तर:
(क) तत्पुरुष
प्रश्न 4.
‘शरणागतः’ का समास-विग्रह होगा
(क) शरणे आगत:
(ख) शरणेषु आगत:
(ग) शरणम् आगत:
(घ) शरणाय आगतः
उत्तर:
(ग) शरणम् आगत:
प्रश्न 5.
जब समस्त-पद में पूर्वपद नकारात्मक भाव व्यक्त करता है, तब समास होता है
(क) कर्मधारय
(ख) उपपद तत्पुरुष
(ग) नञ् तत्पुरुष
(घ) अलुक् तत्पुरुष
उत्तर:
(ग) नञ् तत्पुरुष
प्रश्न 6.
‘दिवंगतः’ का समास विग्रह होगा
(क) दिवं गतः
(ख) दिवः गतः
(ग) दिवसात् गतः
(घ) दिवाय गतः
उत्तर:
(क) दिवं गतः
प्रश्न 7.
जब समस्त पद के प्रथम पद की विभक्ति का लोप नहीं होता, तब होता है
(क) नञ् तत्पुरुष
(ख) तृतीया तत्पुरुष
(ग) उपपद तत्पुरुष
(घ) अलुक् तत्पुरुष
उत्तर:
(घ) अलुक् तत्पुरुष
प्रश्न 8.
उपपद तत्पुरुष समास में होता है
(क) प्रथम पद नकारात्मक
(ख) पूर्वपद की विभक्ति का लोप नहीं
(ग) समस्त – पद में उपपद क्रिया का प्रयोग
(घ) सम्बोधन का लोप
उत्तर:
(ग) समस्त – पद में उपपद क्रिया का प्रयोग
प्रश्न 9.
‘धनहीनः’ में तत्पुरुष समास का कौन – सा भेद है?
(क) तृतीया तत्पुरुष
(ख) पञ्चमी तत्पुरुष
(ग) चतुर्थी तत्पुरुष
(घ) षष्ठी तत्पुरुष
उत्तर:
(क) तृतीया तत्पुरुष
प्रश्न 10.
‘भूतबलिः’ का समास विग्रह है
(क) भूतं बलिः
(ख) भूतेन बलि:
(ग) भूतात् बलि
(घ) भूतेभ्यः बलिः
उत्तर:
(घ) भूतेभ्यः बलिः
प्रश्न 11.
पञ्चमी तत्पुरुष का उदाहरण नहीं है
(क) सर्पभीत:
(ख) दूरादगत:
(ग) रक्षापुरुषः
(घ) धर्मभ्रष्टः
उत्तर:
(ग) रक्षापुरुषः
प्रश्न 12.
षष्ठी तत्पुरुष का उदाहरण है
(क) धनहीन:
(ख) पुत्रहितम्
(ग) दुःखमुक्तः
(घ) देवालयः
उत्तर:
(घ) देवालयः
प्रश्न 13.
‘विद्यायाम् कुशलः’ में समस्त पद बनेगा
(क) विद्ययाकुशलः
(ख) विद्याकुशल:
(ग) विद्यां कुशल:
(घ) विद्येकुशल:
उत्तर:
(ख) विद्याकुशल:
प्रश्न 14.
जब समस्त पद के दोनों पदों में विशेषण – विशेष्य का सम्बन्ध पाया जाता है, तब समास होता है
(क) तत्पुरुष समास
(ख) कर्मधारय समास
(ग) बहुव्रीहि समास
(घ) अव्ययीभाव समास
उत्तर:
(ख) कर्मधारय समास
प्रश्न 15.
कर्मधारय समास के भेद होते हैं
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छः
उत्तर:
(ग) पाँच
प्रश्न 16.
‘नर इव सिंहः’ में समास करने पर समस्त पद बनेगा
(क) नरसिंह:
(ख) नरैवसिंह
(ग) नरेवसिंह
(घ) नरिवसिंह
उत्तर:
(क) नरसिंह:
प्रश्न 17.
‘हरिश्च हरश्च’ इत्यत्र समस्तपदं वर्तते
(क) हरहरी
(ख) हरिहरौ
(ग) हरिहर:
(घ) न कोऽपि
उत्तर:
(ख) हरिहरौ
प्रश्न 18.
‘वनदेवता’ इत्यत्र समास
(क) कर्मधारयः
(ख) अव्ययीभावः
(ग) बहुव्रीहि:
(घ) तत्पुरुषः
उत्तर:
(घ) तत्पुरुषः
प्रश्न 19.
‘भाषामन्दाकिनी’ इत्यत्र समासः वर्तते
(क) तत्पुरुषः
(ख) बहुव्रीहिः
(ग) अव्ययीभावः
(घ) कर्मधारयः
उत्तर:
(क) तत्पुरुषः
प्रश्न 20.
‘कृष्णसखः’ इत्यत्र समासः अस्ति
(क) द्विगु:
(ख) तत्पुरुषः
(ग) कर्मधारयः
(घ) द्वन्द्वः
उत्तर:
(ख) तत्पुरुषः
प्रश्न 21.
‘गृहलक्ष्मीः’ इत्यत्र समासः अस्ति
(क) द्वन्द्वः
(ख) अव्ययीभावः
(ग) तत्पुरुषः
(घ) बहुव्रीहि:
उत्तर:
(ग) तत्पुरुषः
प्रश्न 22.
‘विहारवनम्’ इत्यत्र समासविग्रहो विद्यते
(क) विहाराय वनम्
(ख) विहारं वनम्
(ग) विहारस्य वनम्
(घ) विहारं वन्म
उत्तर:
(क) विहाराय वनम्
प्रश्न 23.
‘मूल्यहीनम्’ इत्यत्र समासः वर्तते
(क) तृतीया तत्पुरुष:
(ख) षष्ठी तत्पुरुष:
(ग) सप्तमी तत्पुरुषः
(घ) कर्मधारयः
उत्तर:
(क) तृतीया तत्पुरुष:
प्रश्न 24.
बर्बरीकवचनम् इत्यत्र समासः वर्तते
(क) तृतीया तत्पुरुषः
(ख) चतुर्थी तत्पुरुष:
(ग) पञ्चमी तत्पुरुषः
(घ) षष्ठी तत्पुरुषः
उत्तर:
(घ) षष्ठी तत्पुरुषः
प्रश्न 25.
‘वीरराज:’ इत्यत्र समासविग्रहः वर्तते
(क) वीराणां राजा
(ख) वीरस्य राज्ञः
(ग) वीराणां राज्ञः
(घ) वीरेषु राज्ञा
उत्तर:
(क) वीराणां राजा
प्रश्न 26.
तत्पुरुष समासस्य उदाहरणमस्ति
(क) शिवकेशवौ
(ख) उपकृष्णम्
(ग) जलजाक्ष:
(घ) अक्षशौण्डः
उत्तर:
(घ) अक्षशौण्डः
प्रश्न 27.
अपण्डितः इत्यत्र समासः वर्तते
(क) तत्पुरुषः
(ख) कर्मधारयः
(ग) नञ्-तत्पुरुष:
(घ) सर्ग
उत्तर:
(ग) नञ्-तत्पुरुष:
प्रश्न 28.
यूपदारू इत्यत्र कः समासः ?
(क) तत्पुरुषः
(ख) बहुव्रीहिः
(ग) अव्ययीभावः
(घ) कर्मधारयः
उत्तर:
(क) तत्पुरुषः
लघु-उत्तरीय प्रश्ना:
प्रश्न 1.
समास किसे कहते हैं?
उत्तर:
संक्षेप करना अथवा अनेक पदों का एक पद हो जाना समास कहलाता है।
प्रश्न 2.
समास के पद के आधार पर कितने भेद होते हैं?
उत्तर:
समास के पद के आधार पर चार भेद होते हैं।
प्रश्न 3.
समास के भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर:
अव्ययीभाव तत्पुरुष, बहुव्रीहि, द्वन्द्व समास ।
प्रश्न 4.
तत्पुरुष समास में प्रायः किस पद की प्रधानता होती है?
उत्तर:
तत्पुरुष समास में प्रायः उत्तरपद की प्रधानता होती है।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित का समास विग्रह करके समास का नाम भी लिखिए ।
(i) कृष्णाश्रितः
(ii) हरित्रात:
(iii) भूतबलि:
(iv) अश्वपतित:
(v) राजपुरुष:
(vi) नरोत्तम
उत्तर:
समास-विग्रह – समास का नाम
(i) कृष्णम् आश्रितः – द्वितीया तत्पुरुष समास
(ii) हरिणा त्रातः – तृतीया तत्पुरुष समास
(iii) भूताय बलिः – चतुर्थी तत्पुरुष समास
(iv) अश्वात् पतितः – पञ्चमी तत्पुरुष समास
(v) राज्ञः पुरुषः – षष्ठीतत्पुरुष समास
(vi) नरेषु उत्तमः – सप्तमी तत्पुरुष समास
प्रश्न 6.
उपपद तत्पुरुष समास की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जिस समास में उत्तरपद क्रियावाचक शब्द होता है, उपपद तत्पुरुष समास कहलाता है।
प्रश्न 7.
निम्नलिखित का समस्त पद लिखते हुए समास का नाम भी लिखिए ।
(i) धनं ददाति
(ii) सूत्रं करोति
(iii) न आगतम्
(iv) न धर्म:
(v) परस्मै पदम्
उत्तर:
समस्त पद – समास का नाम
(i) धनदः – उपपद तत्पुरुष समास
(ii) सूत्रकारः – उपपद तत्पुरुष समास
(iii) अनागतम् – नञ् तत्पुरुष समास
(iv) अधर्मः – नञ् तत्पुरुष समास
(v) परस्मैपदम् – अलुक् तत्पुरुष समास
प्रश्न 8.
निम्नलिखित पदों का समास विग्रह करते हुए समास का नामोल्लेख भी कीजिए ।
(i) नीलोत्पलम्
(ii) शैलोन्नतः
(iii) पुरुषसिंह:
(iv) कृताकृतम्
(v) पीताम्बरम्
(vi) चन्द्रमुखम्
(vii) मुखकमलम्
उत्तर:
समास विग्रह – समास का नाम
(i) नीलम् उत्पलम् इति – विशेषण – पूर्वपद कर्मधारय
(ii) शैल इव उन्नतः इति – उपमानो-पूर्वपद कर्मधारय
(iii) पुरुषः सिंहः इव – उपमानोत्तरपद कर्मधारय
(iv) कृतं च अकृतं च – विशेषण – उभयपद कर्मधारय
(v) पीतम् अम्बरम् इति – विशेषण-पूर्वपद कर्मधारय
(vi) चन्द्र इव मुखम् – उपमानो-पूर्वपद कर्मधारय
(vii) मुखं कमलम् इव – उपमानोत्तरपद कर्मधारय
प्रश्न 9.
निम्नलिखित पदों में समास कीजिए।
- रक्तम् कमलम् इति
- महान् पुरुष: इति
- घनः इव श्यामः इति
- पुरुष: नाग: इव
- आम्रश्चासौ वृक्ष:
- रक्तश्च पीतः
उत्तर:
- रक्तकमलम्
- महापुरुष:
- घनश्यामः
- पुरुषनागः
- आम्रवृक्षः
- रक्तपीतः