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Class 9 Hindi Chapter 7 मैं और मेरा देश Question Answer
मैं और मेरा देश Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 7 Question Answer – Class 9 Hindi मैं और मेरा देश Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 128-137)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
“एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
(क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
(ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
(घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
उत्तर:
(ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार।
तर्क – लेखक को पहले भ्रम था कि उसका जीवन पूर्ण है, लेकिन लाला लाजपत राय के अनुभव ने इस भ्रम को तोड़ दिया
और उन्हें अपनी अपूर्णता का अहसास कराया।
प्रश्न 2.
निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
(ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
(ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
(घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
उत्तर:
(क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।
तर्क – लेखक का मानना है कि ऐसे प्रश्न विषय को गहराई से समझाने और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रश्न 3.
“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में-
(क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
(ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
(घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
उत्तर:
(ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
तर्क – गुलामी में मनुष्य के पास भौतिक साधन हो सकते हैं, लेकिन अपनी पहचान और आत्मसम्मान का अभाव उसे ‘दीन’ (बेचारा) बना देता है।
प्रश्न 4.
निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि-
(क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
(ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
(घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
उत्तर:
(ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
तर्क – व्यक्ति की पहचान उसके देश से जुड़ी होती है; यदि देश हीन है, तो व्यक्ति का व्यक्तिगत वैभव भी कलंकित माना जाता है।
प्रश्न 5.
“पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?
(क) देश और नागरिक
(ख) देश और संविधान
(ग) देश और विदेश
(घ) व्यवसाय और आजीविका
उत्तर:
(क) देश और नागरिक।
तर्क – लेखक ने स्पष्ट किया है कि नागरिक का हर अच्छा या बुरा काम सीधे उसके देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है।
प्रश्न 6.
प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
(क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
(घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
उत्तर:
(ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।
तर्क – पूरा निबंध इसी बात पर केंद्रित है कि व्यक्ति और देश दो अलग इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
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मेरी समझ मेरे विचार
नन नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
उत्तर:
स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध हो गए क्योंकि उस जापानी युवक ने फलों के मूल्य के बदले धन नहीं बल्कि अपने देश की प्रतिष्ठा की रक्षा माँगी थी।
प्रश्न 2.
जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।
उत्तर:
युवक ने मूल्य के रूप में माँगा – “आप अपने देश में जाकर यह न कहिएगा कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते।” इससे मेरे मन में उस युवक की छवि एक स्वाभिमानी, देशभक्त और जागरूक नागरिक के रूप में उभरती है, जो अपने देश की छवि के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
प्रश्न 3.
“बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यक्ति और देश का संबंध अविभाज्य होता है। व्यक्ति का अस्तित्व, सम्मान और पहचान देश से जुड़ी होती है। व्यक्ति जो कुछ भी करता है, उसका प्रभाव केवल उसी पर नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ता है।
मुख्य तर्कः
1. व्यक्ति को संसार में पहचान उसकी व्यक्तिगत विशेषताओं से नहीं, बल्कि उसके देश के नाम से मिलती है।
उदाहरण – विदेश में कोई भारतीय नागरिक जाता है, तो उसकी पहचान पहले “भारतीय” के रूप में होती है।
2. यदि देश सम्मानित है, तो उसके नागरिक भी सम्मान पाते हैं; और यदि देश अपमानित होता है, तो नागरिक भी अपमान अनुभव करता है।
उदाहरण – गुलाम भारत के समय शिक्षित और साधन संपन्न लोग भी गर्व का अनुभव नहीं कर पाते थे।
3. एक व्यक्ति का अच्छा या बुरा आचरण पूरे देश की छवि को प्रभावित कर सकता है।
उदाहरण –
- जापान में फल देने वाले युवक ने अपने व्यवहार से अपने देश का गौरव बढ़ाया।
- वहीं पुस्तक चुराने वाले छात्र ने अपने देश को बदनाम किया।
4. देश के कानून, संसाधन और सम्मान ही व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
उदाहरण – विदेश में किसी भारतीय को संकट आने पर भारत सरकार उसकी सहायता करती है।
मेरे अनुभव मेरे विचार
प्रश्न 1.
“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस पंक्ति का भाव यह है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। एक नागरिक का आचरण, उसकी सफलता या विफलता केवल उसकी निजी पहचान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उससे पूरे देश की छवि बनती या बिगड़ती है।
इसे हम अपने आस-पास के इन उदाहरणों से समझ सकते हैं:
1. खेल और खिलाड़ियों का उदाहरण – जब कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक या किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतता है, तो केवल उस व्यक्ति की तारीफ नहीं होती बल्कि पूरी दुनिया में भारत का मस्तक ऊँचा होता है। यहाँ एक व्यक्ति के गौरव का फल पूरे देश को मिला। इसके विपरीत, यदि कोई खिलाड़ी खेल के दौरान अनुशासनहीनता करता है या गलत तरीके अपनाता है, तो बदनामी केवल उसकी नहीं, बल्कि उसके देश की भी होती है।
2. विज्ञान और तकनीक – जब हमारे वैज्ञानिक ‘चंद्रयान’ जैसे मिशन में सफलता प्राप्त करते हैं, तो दुनिया भर में भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा माना जाता है। वैज्ञानिकों की इस व्यक्तिगत मेहनत और गौरव का फल आज हर भारतीय को मिल रहा है, क्योंकि दुनिया अब भारतीयों को विज्ञान के क्षेत्र में सम्मान की दृष्टि से देखती है।
3. पर्यटन और व्यवहार – यदि हमारे देश में आए किसी विदेशी पर्यटक के साथ कोई व्यक्ति दुर्व्यवहार करता है, तो वह पर्यटक जाकर अपने देश में यह नहीं कहता कि ‘एक व्यक्ति ने मेरे साथ बुरा किया, बल्कि वह कहता है कि वह देश सुरक्षित नहीं है।’ एक व्यक्ति की हीनता पूरे देश के पर्यटन और सम्मान को चोट पहुँचाती है।
अतः यह स्पष्ट है कि हम जो भी छोटा या बड़ा काम करते हैं, उसका सीधा असर हमारे देश के सम्मान पर पड़ता है। यदि हम श्रेष्ठ कार्य करेंगे तो देश का गौरव बढ़ेगा, और यदि हम गलत कार्य करेंगे तो हमारे साथ-साथ देश को भी हीनता का सामना करना पड़ेगा।
प्रश्न 2.
“मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”
(क) प्रातः काल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर:
हमारा जीवन आपसी सहयोग की एक कड़ी है। मेरे अनुभव इस प्रकार हैं-
• दूसरों से मिलने वाला सहयोग – सुबह उठते ही मुझे परिवार का सहयोग मिलता है जो मेरे खान-पान और अन्य जरूरतों का ध्यान रखते हैं। स्कूल या कार्यस्थल पर शिक्षकों और मित्रों का सहयोग मिलता है। समाज के अन्य लोग जैसे सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी और दुकानदार भी अप्रत्यक्ष रूप से मेरे दैनिक जीवन को सुगम बनाने में सहयोग देते हैं।
• दूसरों को दिया जाने वाला सहयोग – मैं घर के कामों में हाथ बँटाकर अपने परिवार की मदद करता/करती हूँ। स्कूल में अपने सहपाठियों को उनकी पढ़ाई या किसी विषय को समझने में सहायता करता/करती हूँ। रास्ते में किसी जरूरतमंद या बुजुर्ग की मदद करना और सार्वजनिक नियमों का पालन करना भी मेरा समाज के प्रति सहयोग है।
(ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
लेखक द्वारा प्रयोग किए गए ‘बहुतों’ शब्द में वे सभी लोग शामिल हैं जो हमारे जीवन चक्र को चलाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं:
- परिवार – माता-पिता, भाई-बहन और अन्य सदस्य जो हमारी बुनियादी जरूरतों को पूरा करते हैं।
- मित्र और सहपाठी – जो हमारे मानसिक विकास और सुख-दुख में साथ देते हैं।
- सहायक वर्ग – किसान (जो अन्न उगाते हैं), सफाई कर्मचारी, दूधवाले, डाकिया और वे सभी श्रमिक जो समाज की व्यवस्था बनाए रखते हैं।
- गुरु और मार्गदर्शक – जो हमें ज्ञान और सही दिशा प्रदान करते हैं।
- अनजान नागरिक – वे लोग जिनके साथ हम सड़क, बस या रेल में सफर करते हैं और एक-दूसरे के प्रति शिष्टाचार दिखाकर व्यवस्था बनाए रखते हैं।
संक्षेप में, ‘बहुतों में पूरा समाज समाहित है, क्योंकि हम अपनी हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए किसी न किसी पर निर्भर हैं।
(ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
रचनाकार को प्रकाशक, पाठक और समाज की समस्याओं के ज्ञान के लिए लोगों के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी। वह अपने विचारों और लेखन से समाज को नई दिशा और प्रेरणा देकर सहयोग देता होगा।
प्रश्न 3.
“सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”
(क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।
उत्तर:
पंक्ति “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” का अर्थ है कि देश की सेवा केवल सीमाओं पर हथियार उठाकर ही नहीं की जाती। नागरिक के रूप में हमारे निम्नलिखित दायित्व हैं:
- अनुशासन और नियम पालन – यातायात के नियमों का पालन करना, समय पर कर भरना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।
- शिक्षा और कौशल – स्वयं को शिक्षित बनाना ताकि हम देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।
- स्वच्छता और पर्यावरण – अपने आस-पास सफाई रखना और प्रदूषण कम करना भी देश सेवा है।
- सामाजिक सद्भाव – समाज में शांति बनाए रखना और आपसी भेदभाव को मिटाना।
एक ईमानदार डॉक्टर, इंजीनियर या किसान भी अपने काम को निष्ठा से करके देश की सुरक्षा और विकास में उतना ही बड़ा योगदान देते हैं जितना एक सैनिक।
(ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?
(संकेत – आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी दो बैलों की कथा के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।)
उत्तर:
आस-पास के पशु-पक्षियों (जैसे- आवारा कुत्ते, बिल्लियाँ या गौरैया) का जीवन निरंतर संघर्ष का उदाहरण है:
- भोजन की तलाश – उन्हें हर दिन भोजन और पानी के लिए लंबी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं और कई बार भूखा भी रहना पड़ता है।
- प्राकृतिक चुनौतियाँ – भीषण गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड में उनके पास सुरक्षित आश्रय का अभाव होता है।
- मानवीय खतरा – तेजी से कटते पेड़ और वाहनों की आवाजाही उनके जीवन के लिए बड़ा खतरा है।
- ‘दो बैलों की कथा’ का संदर्भ – जिस प्रकार हीरा और मोती ने अपनी आजादी के लिए कांजीहौस और दढ़ियल व्यावसायी से संघर्ष किया, उसी प्रकार पशु भी अपनी स्वतंत्रता और अस्तित्व के लिए संघर्ष करते दिखते हैं।
(ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
निबंध में जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि जन्म से मृत्यु तक मनुष्य को कठिनाइयों, अभावों और विपरीत परिस्थितियों से लड़ना पड़ता है। हमें अपने भीतर के आलस्य, डर और स्वार्थ जैसे शत्रुओं से हर पल लड़ना होता है। सफलता पाने के लिए जो मेहनत और त्याग करना पड़ता है, वह किसी रणक्षेत्र से कम नहीं है।
जीवन एक परीक्षा है जहाँ केवल धैर्य और साहस से ही जीत हासिल की जा सकती है।
(घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, लेकिन समाज के भीतर भी कई लोग हमारे जीवन को बेहतर बनाते हैं:
| सेवा प्रदाता | उनका कार्य | हम क्या कर सकते हैं? |
| सफाई कर्मचारी | गलियों और नालियों को साफ रखना। | कचरा सड़कों पर न फेंकें और उनसे सम्मानपूर्वक बात करें। |
| किसान | देश का पेट भरने के लिए अन्न उगाना। | भोजन की बर्बादी न करें। |
| डॉक्टर / नर्स | बीमारियों से हमारी रक्षा करना। | स्वास्थ्य नियमों का पालन कर उनका बोझ कम करें। |
| शिक्षक | ज्ञान देकर हमें काबिल बनाना। | उनका आदर करें और मन लगाकर पढ़ाई करें। |
| पुलिस | आंतरिक कानून और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना। | नियमों का पालन करके एक जिम्मेदार नागरिक बनें। |
प्रश्न 4.
“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता- -दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
(क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?
उत्तर:
इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि उस समय पड़ोसियों के बीच अत्यंत ‘आत्मीय और पारिवारिक संबंध’ रहे होंगे। पड़ोस केवल मकानों का समूह न होकर एक ‘विस्तारित परिवार’ जैसा था। लोग एक-दूसरे के बच्चों को अपने बच्चों के समान ही प्यार (ममता-दुलार) देते थे। उनमें आपसी भरोसा सुख-दुख में साथ खड़े होने की भावना और सामुदायिक जुड़ाव बहुत गहरा था।
(ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
वर्तमान में ये संबंध ‘औपचारिक और सीमित’ हो गए हैं। लोग अब ‘फ्लैट कल्चर’ या ‘निजता’ को अधिक महत्व देते हैं। इसके मुख्य कारण हैं-
- व्यस्त जीवनशैली – काम के बढ़ते बोझ के कारण लोगों के पास बातचीत का समय नहीं है।
- डिजिटल संबंध – लोग प्रत्यक्ष मिलने के बजाय सोशल मीडिया और मोबाइल पर अधिक समय बताते हैं।
- सुरक्षा और अविश्वास – अजनबियों के प्रति डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
- एकाकी परिवार – संयुक्त परिवार टूट रहे हैं और लोग केवल अपने हित तक सीमित हैं।
प्रश्न 5.
“क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर / विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?
उत्तर:
स्वच्छता और सुरुचि बनाए रखने के लिए मैं और मेरे सहपाठी निम्नलिखित प्रयास करते हैं-
- जागरूकता अभियान – हम समय-समय पर स्कूल और मोहल्ले में ‘स्वच्छता रैलियाँ निकालते हैं।
- कचरा प्रबंधन – सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फैलाने और डस्टबिन का उपयोग करने के लिए सबको प्रेरित करते हैं।
- स्मारकों का सम्मान – ऐतिहासिक इमारतों की दीवारों पर कुछ न लिखना और वहाँ लगे निर्देशों का पालन करना।
- श्रमदान – महीने में एक बार समूह बनाकर पास के पार्क या सार्वजनिक स्थान की सफाई करते हैं।
- पौधारोपण – पर्यावरण की सुंदरता बढ़ाने के लिए खाली जगहों पर पेड़ लगाकर उनकी देखभाल करते हैं।
प्रश्न 6.
“मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातः कालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
उत्तर:
देश के सम्मान को बनाए रखने के लिए समूह चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
| क्या करें (करणीय) | क्या न करें (अकरणीय) |
| राष्ट्रीय प्रतीकों (तिरंगा, राष्ट्रगान) का पूरा सम्मान करें। | सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ। |
| देश के कानूनों और संविधान का पालन करें। | विदेशों में या सोशल मीडिया पर देश की छवि खराब न करें। |
| विदेशी मेहमानों के साथ ‘अतिथि देवो भव’ का व्यवहार करें। | समाज में जाति, धर्म या भाषा के नाम पर नफरत न फैलाएँ। |
| अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से काम कर देश की उन्नति में योगदान दें। | भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसे कृत्यों में शामिल न हों। |
| स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को बढ़ावा दें और जल- बिजली की बचत करें। | अफवाहें न फैलाएँ जिससे देश की शांति भंग हो। |
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मेरे प्रश्न
“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है”
निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं-
(क) रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
(ख) आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।
यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी | नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब | नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उत्तर:
- देश की प्रगति में केवल संपन्न व्यक्तियों का योगदान मानना क्यों ‘निराधार’ है?
- एक नागरिक का गलत आचरण देश की छवि को किस प्रकार प्रभावित करता है?
- “हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं” – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
विधा से संवाद
आपने अब तक अपनी पाठ्यपुस्तकों और अन्य पुस्तकों में बहुत से निबंध पढ़े होंगे और लिखे भी होंगे। निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं? आइए, इस विधा से संबंधित कुछ विचार-विमर्श करते हैं-
प्रश्न 1.
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है ‘बाँधना’ (निबंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

उपर्युक्त बिंदुओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।
उत्तर:
निबंध की विशेषताओं के संदर्भ (‘मैं और मेरा देश’ के आलोक में) :
- विषय-केंद्रीयता : पूरा निबंध इस एक मुख्य विचार पर टिका है कि नागरिक और देश का अटूट संबंध है।
- वैयक्तिकता : लेखक ने अपने निजी अनुभवों, जैसे-बचपन की स्मृतियाँ और लाला लाजपत राय के प्रति अपने विचारों को साझा किया है।
- विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता : निबंध में देशभक्ति, सम्मान और जिम्मेदारी के विचार भावनात्मक रूप में व्यक्त किए गए हैं।
- सजीवता / चित्रात्मकता : स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक के प्रसंग को पढ़ते समय पूरा दृश्य आँखों के सामने जीवंत हो उठता है।
- तार्किकता : लेखक ने ‘शक्ति- बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ के माध्यम से तर्क दिया है कि कूड़ा फेंकना या देश की बुराई करना किस तरह राष्ट्र को कमजोर करता है।
- प्रेरणात्मकता : यह निबंध पाठकों को एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
- संक्षिप्तता और स्पष्टता : विचार स्पष्ट और सीधे तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं।
- साहित्यिक सौंदर्य : भाषा सरल, प्रभावशाली और आकर्षक है (जैसे “मानस में भूकंप”)।
प्रश्न 2.
“क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?
बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है, तो उत्तर यह है आपके प्रश्न का….”
निबंध के उपर्युक्त अंश को ध्यान से देखिए। इसकी पहली पंक्ति में एक प्रश्न है और बाद के अंश में उसका उत्तर दिया गया है। आपने ध्यान दिया होगा कि यह पूरा निबंध इसी तरह की प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। यह प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस निबंध की संरचना को विशेष बनाती है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए। उत्तर:
निबंध की अन्य संरचनात्मक विशेषताएँ – लेखक ने इस निबंध में प्रश्नोत्तर (संवादात्मक) शैली का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया है। इसके अलावा निबंध की अन्य प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- आत्मीयता और सहजता – लेखक पाठक से सीधे बात करते हुए प्रतीत होते हैं, जिससे विषय बोझिल नहीं लगता और पाठक जुड़ाव महसूस करता है।
- जिज्ञासा और कौतूहल – निबंध में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ जैसे शब्दों का प्रयोग करके पाठक के मन में निरंतर जिज्ञासा बनाए रखी गई है।
- सरल और प्रवाहमयी भाषा – निबंध की भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है, जो गंभीर दार्शनिक या सामाजिक विषयों को भी आसानी से समझा देती है।
- उदाहरणों का प्रयोग – अपनी बात को सिद्ध करने के लिए दैनिक जीवन के छोटे-छोटे उदाहरणों (जैसे दीवार में दरार) का प्रयोग किया गया है।
- चिंतनपरक शैली – यह निबंध केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं के पीछे क्या गहरे अर्थ छिपे हैं।
प्रश्न 3.
नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए-

• मेरा भारत मेरा गौरव
• चाँद के साथ गपशप
• जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि
• गागर में सागर
• यथा नाम तथा गुण
• दूध का दूध और पानी का पानी
उत्तर:
दिए गए विकल्पों में से कुछ प्रमुख विषयों के चयन का कारण यहाँ दिया गया है। आप अपनी पसंद के अनुसार किसी एक का चुनाव कर सकते हैं-
• मेरा भारत मेरा गौरव
यह विषय देशभक्ति और भारत की सांस्कृतिक विविध ता को दर्शाने का अवसर देता है। इसमें हम अपने देश की गौरवशाली विरासत और वर्तमान प्रगति के बारे में गर्व के साथ लिख सकते हैं।
• चाँद के साथ गपशप
यह विषय कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। इसमें हम विज्ञान के साथ-साथ अपनी भावनाओं और कल्पनाओं को जोड़कर एक रोचक संवाद लिख सकते हैं।
• जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि
यह विषय कवियों और कलाकारों की सूक्ष्म दृष्टि को स्पष्ट करता है। यह समझने में मदद करता है कि साहित्यकार किस प्रकार उन भावनाओं या स्थितियों को देख लेते हैं जो सामान्य आँखों से ओझल रह जाती हैं।
• दूध का दूध और पानी का पानी
यह एक नैतिक और न्यायपूर्ण विषय है। इस पर निबंध लिखने से हमें निष्पक्षता, सत्य और न्याय के महत्व को समझने और समझाने का अवसर मिलता है।
सुझाव : यदि आप कुछ हटकर लिखना चाहते हैं, तो ‘चाँद के साथ गपशप’ एक बहुत ही प्यारा विषय है जैसा कि किताब के पेज पर दिए गए चित्र (चाँद और बच्ची के बीच फोन पर बात ) से भी स्पष्ट हो रहा है।
विषयों से संवाद
चुनाव एवं आपके अनुभव
“क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?”
रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर है- निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया।
प्रश्न 1.
जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है। तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
उत्तर:
चुनाव प्रक्रिया के दौरान गतिविधियाँ : जब हमारे क्षेत्र में चुनाव शुरू होते हैं, तो हर जगह उत्साह का माहौल होता है। दीवारों पर पोस्टर लगते हैं; उम्मीदवार घर-घर आकर जनसंपर्क करते हैं; चुनावी सभाएँ और रैलियाँ आयोजित होती हैं; लाउडस्पीकर पर घोषणाएँ सुनाई देती हैं और समाचार पत्रों व टीवी पर चर्चाएँ बढ़ जाती हैं। लोग आपस में उम्मीदवारों के कार्यों और वादों पर बहस करते नजर आते हैं।
प्रश्न 2.
“जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
उत्तर:
एक अच्छे और योग्य उम्मीदवार में मेरे विचार से निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है-
- ईमानदारी और सत्यनिष्ठा – उम्मीदवार का चरित्र साफ होना चाहिए और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
- शिक्षित और जागरूक – वह समाज की समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए पर्याप्त शिक्षित और समझदार हो।
- सेवा भाव – उसका मुख्य लक्ष्य सत्ता पाना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना और क्षेत्र का विकास करना होना चाहिए।
- सुगम और मिलनसार – वह ऐसा व्यक्ति हो जिससे आम जनता आसानी से मिल सके और अपनी समस्याएँ बता सके।
- दूरदर्शी सोच – उसके पास भविष्य के लिए एक स्पष्ट योजना हो, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में सुधार लाने की इच्छाशक्ति।
- पक्षपात रहित – वह जाति, धर्म या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव न करके सभी नागरिकों के हित में काम करने वाला हो।
प्रश्न 3.
चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए।
(संकेत – विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
उत्तर:
चुनाव से जुड़ा अनुभव (विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
मेरे विद्यालय में पिछले वर्ष हुआ ‘कक्षा प्रतिनिधि’ का चुनाव मेरे लिए बहुत ही रोमांचक अनुभव था। इसकी प्रक्रिया बिल्कुल असली चुनावों जैसी थी-
शिक्षक ने उन छात्रों के नाम माँगे जो मॉनिटर बनना चाहते थे। मैंने भी अपना नाम दिया। प्रचार हमें दो दिनों का समय दिया गया ताकि हम अपनी कक्षा के सहपाठियों को बता सकें कि हम उनके लिए क्या करेंगे। मैंने वादा किया कि मैं कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ पढ़ाई में सबकी मदद करूँगा।
चुनाव के दिन सभी छात्रों को कागज की एक छोटी पर्ची दी गई जिस पर उन्हें अपने पसंदीदा उम्मीदवार का नाम लिखना था।
जब मतों की गिनती हुई, तो मुझे सबसे अधिक वोट मिले। उस समय मुझे समझ आया कि चुनाव का अर्थ केवल जीतना नहीं है, बल्कि एक ‘बड़ी जिम्मेदारी’ को निभाना है।
प्रश्न 4.
यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या- क्या मुद्दे होंगे?
उत्तर:
- यदि मैं किसी क्लब या सभा के चुनाव में खड़ा होता होती हूँ, तो समाज या समूह के कल्याण के लिए मेरे मुख्य मुद्दे निम्नलिखित होंगे:
- पारदर्शिता – सभा या क्लब के फंड और निर्णयों की जानकारी सभी सदस्यों को स्पष्ट रूप से दी जाएगी।
- समान भागीदारी – यह सुनिश्चित हो कि हर सदस्य को अपनी बात रखने का मौका मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो।
- नवाचार – सभा या क्लब की गतिविधियों को आधुनिक और रोचक बनाने के लिए नई तकनीक और रचनात्मक विचारों का समावेश करना।
- समस्या समाधान – सदस्यों की शिकायतों को सुनने के लिए एक विशेष ‘हेल्प डेस्क’ या समय तय करना ताकि उनकी समस्याओं का तुरंत निवारण हो सके।
- स्वच्छता और अनुशासन – सभा या क्लब के परिसर को स्वच्छ बनाए रखना और एक अनुशासित वातावरण तैयार करना।
- सामुदायिक सेवा – सभा या क्लब के माध्यम से सामाजिक कार्यों (जैसे गरीब बच्चों की शिक्षा या पौधारोपण) को बढ़ावा देना।
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अधिकार और कर्तव्य
इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करेंगे।
सृजन
हमारा पुस्तकालय
आप अपने विद्यालय एवं सार्वजनिक पुस्तकालय में जाते हैं। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों-
• ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
• ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है?
• आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है? इस पर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
पुस्तकों की खराब स्थिति के कारणः
- विद्यार्थियों द्वारा लापरवाही
- पन्ने फाड़ लेना या खो देना
- पेन / पेंसिल से निशान लगाना
- पुस्तकों का सही रख-रखाव न होना
- असावधानी से पन्ने पलटना या बैग में बिना कवर के रखना।
सुधार के उपाय:
- पुस्तकें सावधानी से पढ़ें
- उन पर कुछ न लिखें
- समय पर वापस करें
- लाइब्रेरियन की निगरानी हो
- नियमों का सख्ती से पालन
- पुस्तकालय में प्रवेश से पहले ‘स्वच्छ हाथ’ और ‘सावधानी’ का संकल्प दिलाना।
- फटी पुस्तकों की तुरंत मरम्मत की व्यवस्था करना।
- डिजिटल ट्रैकिंग रखना ताकि पता चल सके कि पुस्तक किस स्थिति में किसके पास थी।
पुस्तकालय के नियम और अनिवार्यताः
- नियम – शांति बनाए रखना, समय पर पुस्तक लौटाना, पन्ने न मोड़ना।
- अनिवार्यता – नियम इसलिए अनिवार्य हैं क्योंकि पुस्तकालय एक साझा संसाधन है। यदि हम पुस्तक खराब करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा।
ब्रेल लिपि में पुस्तकें
आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
[अपने विद्यालय का नाम], दिल्ली।
दिनांक : 14 अप्रैल 2026
विषय : पुस्तकालय हेतु ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय का पुस्तकालय ज्ञान का अद्भुत केंद्र है। परंतु, मुझे यह बताते हुए अत्यंत खेद हो रहा है कि हमारे विद्यालय के ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी इन रोचक पुस्तकों का आनंद नहीं उठा पाते हैं क्योंकि पुस्तकालय में ब्रेल लिपि वाली पुस्तकों का अभाव है। अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की समावेशी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए पुस्तकालय में ब्रेल लिपि में कहानियाँ, महापुरुषों की जीवनी और शब्दकोश मँगवाने की कृपा करें। इससे वे भी अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी छात्र,
[आपका नाम]
कक्षा – [आपकी कक्षा]
कृतज्ञता ज्ञापन
“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए…”
देश के विकास में सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं, जैसे- अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि। इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।
उत्तर:
“राष्ट्र के नायकों को नमन”
आज हम जिस स्वतंत्र और विकसित भारत में साँस ले रहे हैं, वह करोड़ों हाथों की मेहनत का परिणाम है।
- हम सैनिकों के प्रति कृतज्ञ हैं, जो बर्फबारी और तपती धूप में सीमाओं की रक्षा करते हैं।
- हम किसानों के ऋणी हैं, जो मिट्टी से सोना उगाकर हमारा पेट भरते हैं।
- हम शिक्षकों का आभार मानते हैं, जो देश के भविष्य का निर्माण करते हैं।
- हम वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और श्रमिकों को सलाम करते हैं, जिनकी बुद्धि और पसीने से देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।
आप सभी का देश के विकास में योगदान अमूल्य है। आपके बिना ‘मेरा देश’ अधूत है।
सादर धन्यवाद!
विज्ञापन
“ठीक मनुष्य को अपना मत दें।”
उपर्युक्त पंक्ति में चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दिया गया है। आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर:
विज्ञापन (योग्य उम्मीदवार का चुनाव)

स्वच्छता और आचरण
“क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं…”
निबंध के इस अंश को पुनः पढ़िए। इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है? इस विषय पर अपने अभिभावकों, सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए।
(संकेत – ऐतिहासिक या सार्वजनिक स्थानों पर अपना नाम आदि लिखना।)
उत्तर:
ऐसे अशोभनीय कार्य कई हो सकते हैं। उनमें से कुछ निम्न हैं-
- सार्वजनिक स्थानों पर अपना नाम या गंदी भाषा लिखना।
- सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फैलाना।
- कहीं भी मल-मूत्र त्याग कर देना।
- सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुँचाना, फर्नीचर तोड़ना आदि।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
संदर्भ में शब्द
नीचे लिखे वाक्यों पर ध्यान दीजिए-

• एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई।
• क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई।
दीवार में पैदा हुई चटक / तरेड़ / फाँक /टूटन के लिए ‘दरार’ शब्द का प्रयोग करते हैं। भूकंप आने पर अथवा किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर भवनों की छतों और दीवारों में दरार पड़ जाती है। इस शब्द का प्रयोग ऐसे भी किया जाता है-
• वे बहुत अच्छे मित्र थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उनके संबंधों में दरार पड़ गई।
• भेदभाव की भावना सामाजिक एकता में दरार डालती है।
अब इसी प्रकार ‘गाँठ’ शब्द के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
• “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है।”
• माला गूँथते समय धागे के एक सिरे पर गाँठ बाँध दीजिए।
इसी प्रकार ‘पानी’ शब्द का प्रयोग देखिए-
• बहुत प्यास लगी है, पानी दीजिए।
• जब उस लड़के की पुस्तक से पन्ने फाड़ने की बात सामने आई तो वह पानी-पानी हो गया।
• इतनी अधिक वर्षा हुई कि चारों ओर पानी-पानी हो गया।
• अब इनके कामों के बारे में और क्या कहा जाए, इनका तो पानी ही उतर चुका है।
अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
उत्तर:
1. कलंक
- दाग या धब्बा – बर्तन पर लगा कलंक साफ हो गया।
- बदनामी या लांछन – गुलामी का कलंक मिटाए नहीं मिटता।
2. पर
- पंख – मोर के पर सुंदर होते हैं।
- परंतु / लेकिन – पर संसार के देशों में घूमकर वह लौटे।
3. अर्थ
- मतलब / अभिप्राय – “इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है… ”।
- धन / संपत्ति-आज का समय अर्थ प्रधान है।
4. भाग
- हिस्सा – “अपने देश के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मिले… ”।
- सम्मिलित होना – उसे सामाजिक कार्यों में भाग लेना पसंद है।
5. फल
- खाने वाला फल – “जापान में शायद अच्छे फल नहीं मिलते!”।
- परिणाम / प्रभाव – “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता… ”।
6. लाल
- एक रंग – मुझे लाल रंग पसंद है।
- पुत्र / अनमोल रत्न – “… जिसने उसे सौ लालों का एक लाल बना दिया।”
7. दल
- दाल – मेरी माँ दलभुजिया बहुत स्वादिष्ट बनाती हैं।
- समूह / पक्ष – “जब भी कर्ण अपने पक्ष (दल) के विजय की घोषणा करता…”।
8. मत:
- वोट – “ … चुनाव में किसे अपना मत देना चाहिए और किसे नहीं… ”।
- विचार/ राय – “यह आपकी राय (मत) है और मैं इससे बहुत ही खुश हूँ…”
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मिलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’
• “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता- दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
• “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर मैं खड़ा हुआ था।”
पहले वाक्य में ‘ममता- दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। शब्द-युग्म प्रायः दो शब्दों के समूह होते हैं। ये कई प्रकार से बनते और बनाए जाते हैं। कभी अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, कभी उच्चारण की दृष्टि से समान होते हैं परंतु अर्थ में अंतर होता है, कभी विपरीत भाव भी देते हैं। इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।
आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
उत्तर:
(क) मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म –
- घूम-फिरकर
- भरा-पूरा
- होटल-धर्मशालाओं
- उपहार-साधन
- ममता-दुलार
- मोती-हीरे
- दया-प्रार्थना
- दाल-रोटी
(क) पुनरुक्त शब्द-युग्म (एक ही शब्द की आवृत्ति) –
- छोटी-छोटी
- खील-खील
- पूरा-पूरा
- बड़ी-बड़ी
- बार-बार
- चलते-चलते
शब्दों की कड़ियाँ / श्रृंखला
“मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।”
उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता‘ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए-

(आपकी पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लिखूँ ?’ पाठ में भी उपसर्ग और प्रत्यय के प्रयोग के विषय में जानकारी दी गई है।)
उत्तर:
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
| अपूर्णता | अ | पूर्ण | ता |
| अलौकिक | अ | लोक | इक |
| निरक्षरता | निर् | अक्षर | ता |
| सम्मानित | सम् | मान | इत |
| अनावश्यक | अन् | अवश्य | अक |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| अभिमानी | अभि | मान | ई |