Reading Class 4 Hindi Notes Veena Chapter 8 ओणम के रंग Onam Ke Rang Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Onam Ke Rang Class 4 Summary in Hindi
Onam Ke Rang Class 4 Hindi Summary
ओणम के रंग का सारांश – Onam Ke Rang Summary in Hindi
इस पाठ में ओणम के त्योहार का बड़ा ही सुंदर ढंग से वर्णन किया गया है। इस त्योहार में बच्चे सुबह-सुबह नहा-धोकर बाग-बगीचों में विभिन्न प्रकार के फूल तोड़ने के लिए निकल पड़ते हैं। सूर्योदय होते ही बच्चे अपने घर के आँगन को गोबर से लीपकर वहाँ फूलों की रंगोली (पूक्कलम) बनाते हैं। इनका त्योहार ‘ओणम’ यहीं से शुरू होता है।
इस दिन केरल का प्राकृतिक सौंदर्य भी निखर उठता है । हल्की-हल्की बयार के झोंके, नदी का निर्मल जल वातावरण को और अधिक सुंदर बना देता है। ऐसा मनोरम दृश्य देखकर लगता है कि मानो प्रकृति खुद इस महोत्सव ‘ओणम’ की तैयारी कर चुकी है।

कहा जाता है कि यह त्योहार एक पौराणिक कथा पर आधारित है। प्राचीन काल में महाबली नाम के एक राजा थे, जिनका यश पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल लोक में फैला हुआ था और प्रजा पूरी तरह खुश थी। एक दिन विष्णु भगवान ने वामन का रूप धारण करके राजा महाबली से तीन पग भूमि माँगी। जब उसने दान की स्वीकृति दे दी, तो त्रिविक्रम रूप धारण कर दो पग से ही स्वर्ग, भूमि और पाताल को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए महाबली ने अपना सिर झुका लिया।
इससे महाविष्णु ने खुश होकर महाबली को पाताल लोक सौंप दिया तब महाबली ने याचना करके कहा कि- वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आने की अनुमति दें । महाबली ने यह स्वीकार कर लिया। तब से यह त्योहार प्रतिवर्ष ‘ओणम’ के रूप में मनाया जाता है। घर का हर सदस्य परिवार के मुखिया के हाथों से नए कपड़े लेकर पहनता है।
इस त्योहार में विष्णु और महाबली की मूर्तियों को चावल के आटे और सफेद द्रोण- पुष्पों से सजाकर ऊँचे-ऊँचे दीपदान जलाकर रखते हैं। इस उपलक्ष्य में प्रीतिभोज आयोजित किए जाते हैं जिसमें चावल, सब्जियाँ, खीर, पापड़ और स्वादिष्ट फल होते हैं।
लोग अपनी-अपनी रुचि के अनुसार खेल – कूद, संगीत-नृत्य इत्यादि में हिस्सा लेते हैं। ‘तलपंतुकलीं’ या ‘किलिंतट्टुकली’, शतरंज – ताश में रुचि रखने वाले पुरुष खेलते हैं। आरन्मुला स्थान पर नौका-दौड़ प्रतियोगिता होती है, जिसे दूर-दूर से लोग देखने आते हैं। यहाँ की सुप्रसिद्ध नृत्य ‘कथकली’ तो बहुत प्रसिद्ध है। तीन दिन बाद महाबली के लौट जाने पर आँगन की कलाकृतियाँ हटा दी जाती हैं।

ओणम केरल का एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार राजा महाबली की याद में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। कहानी के अनुसार, राजा महाबली के राज में सभी लोग खुश और सुखी थे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से देवता घबरा गए। तब भगवान विष्णु ने वामन रूप में आकर महाबली से तीन कदम जमीन माँगी। राजा महाबली ने खुशी से यह दान दे दिया।
वामन भगवान ने अपने दो कदमों में पूरी धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरे कदम के लिए महाबली ने अपना सिर झुका दिया। उनकी भक्ति और दान देखकर भगवान विष्णु खुश हुए और उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही वादा किया कि हर साल एक बार महाबली अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकते हैं। इसी खुशी में ओणम मनाया जाता है।
ओणम के समय केरल बहुत सुंदर दिखता है। बच्चे रंग-बिरंगे फूलों से आँगन में फूलों की रंगोली (पूक्कलम) बनाते हैं। सब लोग नए कपड़े पहनते हैं और घर सजाते हैं। पूजा होती है और स्वादिष्ट भोजन बनता है, जिसमें चावल, सब्जियाँ, पापड़ और खीर होती है। लोग खेलते-कूदते हैं, नाव दौड़ देखते हैं और कथकली जैसे नृत्य करते हैं। ओणम खुशी, प्रेम और एकता का त्योहार है, जिसे सभी मिलकर बड़े प्यार से मनाते हैं।
ओणम के रंग शब्दार्थ
आकर्षण – लुभावना ।
बयार – हवा ।
खलिहान – कटे हुए धान के रखने का स्थान ।
याचना – माँगी ।
दृष्टि – निगाह ।

ओणम – केरल का प्रसिद्ध त्योहार ।
पूक्कलम – फूलों से बनाई गई रंगोली;
त्रिविक्रम – भगवान विष्णु का विराट रूप;
प्रीतिभोज – प्रेमपूर्वक दिया जाने वाला भोज,
अठखेलियाँ – हँसी-मजाक करते हुए खेलना ;
सह्य पर्वत – पश्चिमी घाट की पहाड़ियाँ (केरल के पूर्वी भाग में स्थित);
महोत्सव – बड़ा पर्व या उत्सव;
निर्मल – बिल्कुल स्वच्छ और शुद्ध;
छल-कपट – धोखा या फरेब;
प्रपंच- बनावटी व्यवहार या झूठा दिखावा ।