Reading Class 4 Hindi Notes Veena Chapter 3 नीम कविता Neem Kavita Poem Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Neem Kavita Class 4 Summary in Hindi
Neem Class 4 Hindi Summary
नीम कविता का सारांश – Neem Summary in Hindi
कवि श्री हरीश निगम ने अपनी कविता ‘नीम’ के माध्यम से पेड़ की खूबियों को दर्शाया है कि नीम का पेड़ दिन भर झूमते और सर – सर का गीत गाते हुए किस तरह से पक्षियों के प्रति अपना स्नेह एहसास कराता है। वह खुद डॉक्टर नहीं है पर कई रोगों को दूर कर देता है। इतना ही नहीं, जब कभी प्रदूषित हवाएँ चलती हैं तो वह उसे शुद्ध भी बना देता है।
यह नीम का ही पेड़ है जो कड़वा होते हुए भी जब झूम झूमकर इसकी हवाएँ चलती हैं तो मन में मीठा अर्थात शीतलता का भाव हमें सिखाती है और सबके मन को खुश भी कर देती है। अंत में कवि यह कहता है कि यह नीम का पेड़ किसी से कुछ नहीं लेता, मगर औषधि और शीतल वायु के रूप में बहुत कुछ देता है।

यह कविता नीम के गुणों का सुंदर वर्णन करती है। नीम एक ऐसा पेड़ है, जो लहराता और बलखाता है तथा दिनभर मुस्कुराता और गाता रहता है। वह चिड़िया, कौआ, तोता जैसे पक्षियों से प्यार करता है और उन्हें सहारा देता है। नीम बिना डॉक्टर के भी कई बीमारियाँ दूर करता है और प्रदूषित हवा को शुद्ध बनाता है। यह तन और मन दोनों को मधुर बनाए रखने की सीख भी देता । जब हवा चलती है, तो नीम झूम-झूमकर सबका मन प्रसन्न कर देता है। वह बिना कुछ लिए बहुत कुछ दे जाता है, इसलिए नीम का स्थान बहुत खास और प्रेरणादायक है।
नीम कविता हिंदी भावार्थ Pdf Class 4
Neem सप्रसंग व्याख्या
लहराता-बलखाता नीम,
दिनभर हँसता-गाता नीम ।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम ।
शब्दार्थ :
बलखाता – लचकता हुआ ।
हँसता-गाता – सरसराहट की आवाज़ होना ।
नेह – स्नेह ।
जताता – अनुभव कराना।
व्याख्या–कवि कहता है कि नीम का पेड़ जब लचकता हुआ झूमता है तो ऐसा लगता है जैसे सरसराहट की आवाज़ करते हुए यह खुश होकर गा रहा है और चिड़िया, कौआ, तोता इत्यादि से अपना स्नेह भी जता रहा है।
2. नहीं डॉक्टर फिर भी देखो,
कितने रोग भगाता नीम ।
चले प्रदूषित वायु कभी तो,
उसको शुद्ध बनाता नीम ।
शब्दार्थ :
भगाता – दूर करना ।
प्रदूषित – अशुद्ध।
शुद्ध – स्वच्छ।
व्याख्या – कवि कहता है कि नीम का पेड़ डॉक्टर नहीं है फिर भी पता नहीं कितने रोगों को दूर कर देता है । यदि कभी भी धूल-धुँआ युक्त वायु भी चलती है तो यह उन अशुद्धियों को स्वच्छ कर शीतल – स्वास्थ्यप्रद बना देता है।

3. कड़वे तन में मन को मीठा,
रखना हमें सिखाता नीम ।
हवा चले तो झूम-झूमके,
सब का मन बहलाता नीम |
शब्दार्थ :
कंड़वा – कसैला ।
तन – यहाँ पेड़ के तने को कहा गया है।
मीठा – मन की शुद्धता का भाव ।
व्याख्या – कवि कहता है कि नीम का कसैला तना होने के बावजूद भी यह हमें मन की शुद्धता का भाव रखना सिखाता है और जब इसकी हवाएँ मस्ती में झुमकर चलती हैं तो सभी का मन आनंदित हो उठता है।
4. लेता नहीं किसी से कुछ भी,
पर कितना दे जाता नीम ।
शब्दार्थ :
लेता नहीं – बिना लिए।
कितना – अनगिनत ।
व्याख्या- यहाँ कवि कहता है कि यद्यपि नीम का पेड़ किसी से कुछ लेता नहीं है फिर भी शुद्ध वायु और औषधि के रूप में हमें बहुत कुछ दे जाता है।
काव्यांश 1
लहराता – बलखाता नीम,
दिनभर हँसता-गाता नीम ।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम ।
शब्दार्थ :
लहराता बलखाता – हल्के-हल्के हिलते रहना;
नेह – प्रेम या अपनापन ।
संदर्भ / प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वीणा’ में संकलित कविता ‘नीम’ से ली गई है। इसके कवि ‘हरीश निगम’ जी हैं। इस काव्यांश में कवि ने नीम के वृक्ष के अनेक गुणों और उसके महत्त्व को बहुत ही प्यारे और सरल शब्दों में प्रस्तुत किया है। काव्यांश में नीम को एक ऐसा मित्र बताया गया है, जो हर किसी से स्नेह करता है।
व्याख्या – इस काव्यांश में कवि हरीश निगम जी ने नीम के पेड़ को एक जीवत और सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। नीम का पेड़ हवा में हिलता डुलता, जैसे नाचता हुआ प्रतीत होता है। उसकी शाखाएँ और पत्तियाँ लहरों की तरह बलखाती हैं । यहाँ नीम को मानो एक प्रसन्न जीव के रूप में दिखाया गया है, जो दिनभर खुशी से झूमता, मुस्कुराता और जैसे कोई गीत गाता हो । नीम का पेड़ सभी पक्षियों का प्यारा होता है। चिड़िया, कौआ और तोता जैसे पक्षी उसकी डालियों पर बैठते हैं, गाते हैं और खेलते हैं। नीम सबके प्रति प्यार और अपनापन दिखाता है। वह सबको छाया, फल-फूल, शीतलता और स्नेह प्रदान करता है।
काव्यांश 2
नहीं डॉक्टर फिर भी देखो,
कितने रोग भगाता नीम !
चले प्रदूषित वायु कभी तो,
उसको शुद्ध बनाता नीम ।
शब्दार्थ :
रोग – बीमारी,
प्रदूषित – गंदा, अस्वच्छ,
शुद्ध – पवित्र, स्वस्थ ।
प्रसंग – इन पंक्तियों के माध्यम से कवि नीम के प्राकृतिक औषधीय और पर्यावरणीय महत्त्व को दर्शाता है।
व्याख्या – यहाँ कवि कहता है कि नीम कोई डॉक्टर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यह कई बीमारियों को दूर करने में सहायता करता है। इसकी पत्तियाँ, फल, छाल और टहनियाँ औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। नीम के प्रयोग से बुखार, चर्म रोग, दाँतों की समस्याएँ और कई अन्य रोग ठीक हो सकते हैं। नीम का पेड़ गंदी और प्रदूषित हवा को साफ करने में सहायता करता है। यह वातावरण को शुद्ध बनाता है और ताजगी फैलाता है। इसलिए नीम को पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
काव्यांश 3
कड़वे तन में मन को मीठा,
रखना हमें सिखाता नीम ।
हवा चले तो झूम-झूमके,
सबका मन बहलाता नीम।
लेता नहीं किसी से कुछ भी,
पर कितना दे जाता नीम ।
शब्दार्थ :
बहलाता – मन को खुश करना ।
प्रसंग – इन पंक्तियों में कवि नीम की सादगी, सेवा और शिक्षाप्रद स्वभाव को उजागर कर रहे हैं।
व्याख्या – इस पंक्ति में नीम हमें सिखाता है कि शरीर स्वस्थ हो, तो मन भी प्रसन्न रहता है। नीम के गुण हमारे तन को स्वस्थ रखते हैं, जिससे मन भी शुद्ध और शांत बना रहता है। यह हमें शरीर और मन की सफाई का महत्त्व समझाता है। जब हवा चलती है, तो नीम की शाखाएँ और पत्तियाँ झूमने लगती हैं। उनका यह झूमना ऐसा लगता है, मानो वह नाच रहा हो और लोगों का मन बहला रहा हो। यह दृश्य मन को आनंद और शांति देता है।
यह पंक्ति नीम के नि:स्वार्थ स्वभाव को दर्शाती है। वह किसी से कुछ नहीं लेता, लेकिन बदले में सबको छाया, फल, औषधियाँ, स्वच्छ हवा, सुंदरता और सुकून देता है । यह हमें सेवा और त्याग का पाठ पढ़ाता है।