By going through these Sanskrit Class 6 Notes and NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 14 Hindi Translation Summary Explanation Notes माधवस्य प्रियम् अङ्गम् students can clarify the meanings of complex texts.
Class 6 Sanskrit Chapter 14 Summary Notes माधवस्य प्रियम् अङ्गम्
माधवस्य प्रियम् अङ्गम् Class 6 Summary
प्रस्तुत पाठ में माधव नामक बालक स्वप्न में अपने शरीर के अंगों को आपस में चर्चा करते हुए सुनता है। उसके पैर कहते हैं-हम श्रेष्ठ हैं, हाथ कहते हैं – हम श्रेष्ठ हैं, नेत्र कहते हैं – हम श्रेष्ठ है, कान कहते हैं – हम श्रेष्ठ हैं, मुख कहता है-मैं श्रेष्ठ हूँ। इन सबके वार्तालाप को सुनकर पेट कहता है कि हम सब माधव से ही पूछ लेते हैं कि कौन श्रेष्ठ है? माधव सोच-विचारकर कहता है कि मेरे लिए सभी अंग महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये सभी मेरा उपकार करने वाले हैं।
इस पाठ में शरीर के सभी अंगों को परस्पर वार्तालाप करते हुए दिखाकर यह बताया गया है कि समस्त अंग श्रेष्ठ हैं। शरीर के समस्त अंगों की विभिन्न कार्यों के सम्पादन में विशिष्ट भूमिका रहती है; यथा पैरों से चलना, हाथों से पकड़ना, कान से सुनना, मुँह से बोलना व खाना इत्यादि । पाठ में बताया गया है कि इनमें से कोई एक श्रेष्ठ नहीं है बल्कि समस्त अंगों की सार्थकता एक शरीर के रूप में मिलकर कार्य करने में ही है।
माधवस्य प्रियम् अङ्गम् Class 6 Notes
पाठ – शब्दार्थ एवं सरलार्थ
(1)

माधवनामकः एकः बालकः आसीत् ।
सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान् ।
तानि परस्परं चर्चा कुर्वन्ति स्म ।

पादः वदति – अहं श्रेष्ठः ।
मम कारणेन माधव: चलति ।

हस्तः अनुक्षणं वदति – अरे अरे! मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च । अतः अहम् एव श्रेष्ठः ।
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शब्दार्थाः (Word Meanings):
एक:- एक (One),
स्वप्ने – सपने में (In dreams),
स्वशरीरस्य – अपने शरीर के (Of his own body),
दृष्टवान्-देखा ( Saw),
परस्परम् – आपस में (With each other ),
चर्चाम् – चर्चा को (Discussion ),
पाद: – पैर (Foot),
श्रेष्ठः – उत्तम (Great),
मम – मेरा (My / mine),
अनुक्षणं – उसी समय (Instantly),
गृहकार्यम् – गृहकार्य (Homework)।
सरलार्थ –
माधव नाम का एक बालक था।
उसने सपने में अपने शरीर के अंगों को देखा ।
वे सब आपस में चर्चा कर रहे थे।
पैर बोलता है मैं श्रेष्ठ हूँ।
मेरे कारण से ही माधव चलता है।
हाथ उसी समय बोलता है- अरे अरे! मेरे कारण माधव लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुओं को लाता है। इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।
(2)

मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम् – इति नयनं वदति ।
कर्णः स्मितं कृत्वा कथयति – माधवः यदा मार्गे गच्छति तदा पृष्ठतः यानानां ध्वनिं
यदि न शृणोति सावधानः च न भवति, तर्हि दुर्घटना भवेत् । माधवः मम कारणेन एव शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा
ज्ञानं वर्धयति, सङ्गीतं श्रुत्वा आनन्दं च अनुभवति ।

शब्दार्था: (Word Meanings) :
मां विना – मेरे बिना (Without me),
शक्नोति – समर्थ होना (Able to),
स्मितं थोड़ा हँसकर (With a smile),
मार्गे – रास्ते में (Onroad),
पृष्ठत: – पीछे से (From behind),
यानानां वाहनों का (Of vehicles),
ध्वनिम् – ध्वनि को (Sound),
श्रुत्वा – सुनकर (After listening),
संगीतम् – संगीत (Music)।
सरलार्थ –
मेरे बिना माधव कुछ भी देख सकता है क्या यह आँख कहती है ।
कान थोड़ा हँस कर कहता है – माधव जब मार्ग पर जाता है तब यदि वह पीछे से गाड़ियों की आवाज़ नहीं सुनता है और सावधान नहीं होता है तो दुर्घटना हो सकती है। माधव मेरे कारण से ही शिक्षक के उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है और संगीत सुनकर आनंद का अनुभव करता है।
(3)

झटिति मुखं सूचयति – ‘ भोः ! सर्वे शृण्वन्तु,
माधवः मम कारणेन भोजनं करोति,
भाषणं करोति, शिक्षकस्य प्रश्नस्य उत्तरं वदति।
मम साहाय्येन उदरमपि भोजनं प्राप्नोति ।
भवन्तः सर्वे सबलाः भवन्ति । अतः अहम् एव श्रेष्ठः ।

उदरं सूचयति भवतु भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु ।
वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः’ इति ।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
मुखम् – मुख (Mouth),
शृण्वन्तु – सुनो (Listen),
भोजनं – भोजन (Food),
शिक्षकस्य – शिक्षक के (Of teachers),
साहाय्येन – सहायता से (With help ),
प्राप्नोति – प्राप्त करता है (Gets),
सबलाः – बलवान् (Strong),
कोलाहलं – शोर (Quarrel),
क: – कौन (Who )।
सरलार्थ-
जल्दी से मुख सूचित करता है- ‘हे ! सभी सुनो,
माधव मेरे कारण से भोजन करता है,
भाषण करता है, शिक्षक के प्रश्न का उत्तर देता है।
मेरी सहायता से पेट भी भोजन प्राप्त करता है। आप सभी बलवान होते हैं। इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।
पेट सूचित करता है ‘बस, बस, शोर मत कीजिए ।
हम सभी माधव से ही पूछते हैं कि कौन श्रेष्ठ है।
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(4)

माधवः विचारयति बोधयति च-
‘मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति । अहं नयनाभ्यां पश्यामि,
कर्णाभ्यां शृणोमि मुखेन भाषणं करोमि भोजनं करोमि च उदरेण पाचनात् शक्ति प्राप्नोमि
पादाभ्यां च चलामि। अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः ।
भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः । ‘
शब्दार्था: (Word Meanings) :
विचारयति – विचार करता है (Thinks),
बोधयति – समझाता है (Advises),
सर्वाणि – समस्त (All),
अङ्गानि – अंग (Parts),
उपकारकाणि – सहायता करने वाले (Helpful),
नयनाभ्यां – आँखों से (With eyes),
कर्णाभ्यां – कानों से (With ears),
उदरेण पेट से (With stomach),
शक्तिम् – ताकत (Strength),
पादाभ्याम् – पैरों से (With Feet)।
सरलार्थ-
माधव विचार करता है और समझाता है-
‘मेरे शरीर के सभी अंग मेरे लिए सहायता करने वाले हैं। मैं आँखों से देखता हूँ, कानों से सुनता हूँ, मुख से बोलता एवं भोजन करता हूँ, पेट के द्वारा पाचन से शक्ति पाता हूँ और पैरों से चलता हूँ। इसलिए आप सभी ही श्रेष्ठ हैं। आप सभी ही मेरे प्रिय हैं।’
वयं शब्दार्थान् जानीम:
