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Class 9 Hindi Chapter 2 क्या लिखूँ? Question Answer
क्या लिखूँ? Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 2 Question Answer – Class 9 Hindi क्या लिखूँ? Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 35-43)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
“ हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तर:
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना।
तर्क – लेखक के अनुसार, निबंध लिखने के लिए मन के भाव ही वास्तविक वस्तु (हैट) हैं, जबकि विषय केवल एक सहारा (खूँटी) है। इस प्रकार, यदि मन में भाव हों, तो विषय कोई भी हो, लेख प्रभावशाली ही बनेगा।
प्रश्न 2.
“उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है….. उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तर:
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना।
तर्क – मानटेन की शैली में जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसे ही लिपिबद्ध कर दिया जाता है। लेखक ने भी अंततः इसी पद्धति को चुना क्योंकि उनके पास सामग्री का अभाव था और वे अपने निजी अनुभवों को ही सच्चाई से व्यक्त करना चाहते थे।
प्रश्न 3.
“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?

(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तर:
(घ) अभिलाषा और अनुभव।
तर्क – तरुणों (युवाओं) के पास भविष्य की अभिलाषा और सपने होते हैं, जबकि वृद्धों के पास उनके बीते समय के अनुभव और यादें होती हैं। दोनों ही वर्तमान की कठोरता से बचकर क्रमशः आगे और पीछे देखना पसंद करते हैं।
प्रश्न 4.
निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तर:
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए।
तर्क – लेखक के पास दो अलग-अलग विषय थे। खुसरो की कहानी से उन्हें यह प्रेरणा मिली कि कैसे एक ही रचना
(निबंध) में बुद्धिमानी से अलग-अलग विषयों को पिरोया जा सकता है।
प्रश्न 5.
निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तर:
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्क – लेखक स्पष्ट करते हैं कि दोष और सुधार का चक्र निरंतर चलता रहता है। जो आज सुधार है, वह कल दोष बन जाता
है, इसलिए सुधारों की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
निबंध लेखन के विषय में ए. जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तर:
ए. जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में अंतर :
गार्डिनर का मानना है कि लेखन एक विशेष मानसिक स्थिति और हृदय के आवेग से उत्पन्न होने वाली सहज प्रक्रिया है। इसके विपरीत, लेखक कहते हैं कि उन्हें निबंध लिखने के लिए अत्यधिक सोचना, चिंता करना और परिश्रम करना पड़ता है। उनके लिए लेखन सहज नहीं, बल्कि एक श्रमसाध्य कार्य है। अतः गार्डिनर सहज और स्वाभाविक लेखन तथा लेखक मेहनत और सोच-विचार से सामग्री जुटाकर और रूपरेखा बनाकर किए जाने वाले लेखन के पक्षधर हैं।
प्रश्न 2.
लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
लेखक के अनुसार, वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट हैं क्योंकि उनके देखने का दृष्टिकोण दो विपरीत दिशाओं की ओर है। तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल होता है और वे क्रांति के माध्यम से उसे वर्तमान में लाना चाहते हैं। इसके विपरीत, वृद्धों के लिए अतीत सुखद होता है और वे अतीत गौरव के सरंक्षक बनकर उसे वर्तमान में देखना चाहते हैं। चूँकि तरुण भविष्यवादी और वृद्ध अतीतवादी होते हैं इसलिए वर्तमान सदैव क्षुब्ध रहता है और विचारों का केंद्र बना रहता है।
प्रश्न 3.
नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आई?
उत्तर-
नमिता दूर के ढोल सुहावने’ और अमिता ‘समाज-सुधार’ विषयों पर निबंध चाहती थीं। इन्हें लिखने में लेखक को कई कठिनाइयाँ आईं। सबसे पहले लेखक के पास उस समय सामग्री जुटाने के लिए कोई पुस्तकालय या संदर्भ ग्रंथ (विश्वकोश) जैसा कोई साधन उपलब्ध नहीं था। उनके अनुसार ये दोनों विषय बहुत व्यापक थे और उन्हें मात्र 5 पृष्ठों में समेटना बहुत कठिन था। उन्हें दो घंटे के भीतर ही ये ‘आदर्श’ निबंध तैयार करने थे।
प्रश्न 4.
निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
उत्तर:
आचार्यों ने कहा कि निबंध छोटा होना चाहिए, उसकी भाषा में प्रवाह हो, वाक्य छोटे और संबद्ध हों और लिखने से पहले रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए।
निबंध लेखन के विज्ञ विद्वानों के कथनानुसार, मैं सबसे पहले संबंधित विषय के निबंध की रूपरेखा बनाता हूँ, तत्पश्चात निबंध के प्रयुक्त बिंदुओं का चयन कर अपनी भाषा और शैली का प्रयोग कर निबंध को आकार देता हूँ। उसके बाद एक उपयुक्त शीर्षक का चुनाव कर उसे पूर्णता प्रदान करता है।
प्रश्न 5.
मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तर:
निबंध लेखन में देखने, सुनने और अनुभव करने की अत्यंत उपयोगिता है क्योंकि यह केवल किताबी ज्ञान नहीं है। जब हम स्वयं कुछ देखते या अनुभव करते हैं, तो लेखन में सच्चाई और मौलिकता आती है। मानटेन की यह पद्धति लेखक को पाठकों से सीधे जोड़ती है क्योंकि अनुभव की भाषा हृदय तक पहुँचती है। इसलिए अनुभव आधारित लेखन अधिक जीवंत होता है।
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विधा से संवाद
निबंध लिखने की कला
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है ‘बाँधना’ (नि + बंध), अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं।
शैली का अर्थ अभिव्यक्ति का ढंग होता है। निबंधकार विभिन्न प्रकार से विषय को प्रस्तुत करता है। इस पाठ में निबंध लेखन की प्रक्रियाओं के विषय में चर्चा की गई है। दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?

उत्तर:
निबंध : डिजिटल शिक्षा का नया दौर
आज के युग में शिक्षा केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल शिक्षा ने ज्ञान के द्वार हर उस व्यक्ति
के लिए खोल दिए हैं, जिसके पास इंटरनेट की सुविधा है।
लाभ और माध्यम : ऑनलाइन कक्षाएँ, शैक्षिक ऐप्स और यूट्यूब जैसे माध्यमों ने कठिन से कठिन विषयों को सरल बना दिया है। विद्यार्थी अपनी गति से सीख सकता है और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से जुड़ सकता है। यह विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए एक वरदान सिद्ध हुआ है।
चुनौतियाँ : जहाँ इसके अनेक लाभ हैं, वहीं चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। लगातार स्क्रीन के सामने बैठने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और एकाग्रता में कमी देखी जा रही है । साथ ही, भारत जैसे देश में ‘डिजिटल डिवाइड’ (तकनीकी असमानता) एक बड़ी बाधा है, जहाँ हर बच्चे के पास लैपटॉप या अच्छा इंटरनेट उपलब्ध नहीं है।
समापन : डिजिटल शिक्षा भविष्य की आवश्यकता है। यदि हम तकनीक का सही संतुलन के साथ उपयोग करें और सरकार बुनियादी ढाँचा मजबूत करे, तो यह भारत को शिक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
निबंध लेखन का वैकल्पिक ढंग ‘स्वच्छंद या आत्मीय शैली’ हो सकती है। आरेख-

यह ढंग इसलिए बेहतर हो सकता है क्योंकि इसमें लेखक को पहले से ‘रूपरेखा’ के बंधन में नहीं बँधना पड़ता । विचार जिस प्रवाह में आते हैं, उसी प्रवाह में लिखे जाते हैं। इसमें किताबों से ‘सामग्री संग्रह’ करने के बजाय लेखक अपने निजी अनुभवों को प्राथमिकता देता है। इससे पाठक लेखक से अधिक जुड़ाव महसूस करता है। यह पद्धति किसी परीक्षा के उत्तर की तरह न होकर एक बातचीत की तरह होती है। इसमें ‘आवेग’ और ‘उमंग’ को शब्दों में ढालना आसान होता है, जैसा कि ए. जी. गार्डिनर ने भी सुझाया है। जहाँ गंभीर और शोधपरक विषयों के लिए शास्त्रीय ढंग अनिवार्य है, वहीं ललित निबंधों और व्यक्तिगत विचारों के लिए स्वच्छंद शैली अधिक प्रभावी और रोचक होती है।
भाव-विस्तार
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”
यदि उपर्युक्त वाक्य का भाव विस्तार किया जाए तो कहा जा सकता है कि – युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश की भावना प्रबल होती है। वह किसी भी समस्या के समाधान के लिए बैठकर बातचीत करने के बजाय उस पर त्वरित निर्णय लेना चाहते हैं जबकि वृद्ध पीढ़ी किसी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है। पाठ में से चुनकर कुछ ऐसे और वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का अपने शब्दों में भाव विस्तार कीजिए-
• “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
उत्तर:
इस पंक्ति का भाव यह है कि वास्तविकता की कठोरता का अनुभव केवल निकटता से होता है। जब तक युवा व्यावहारिक जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों का सामना नहीं करते, तब तक उन्हें यह दुनिया एक खूबसूरत सपने जैसी लगती है। वे केवल भविष्य की सुखद कल्पनाओं में ही खोए रहते हैं। इसी कारण वे वर्तमान से असंतुष्ट होकर उत्साह के साथ उज्ज्वल भविष्य के स्वप्न देखते रहते हैं।
• “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
उत्तर:
समाज एक जीवित इकाई है जिसमें समय के साथ रूढ़ियाँ और बुराइयाँ पैदा होती रहती हैं। इसलिए हर युग में नए विचारकों और सुधारकों की जरूरत पड़ती है ताकि सामाजिक विसंगतियों-बुराइयों को साफ कर उसे गतिशील बनाया जा सके।
• “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
उत्तर-
समय परिवर्तनशील है और मनुष्य का दृष्टिकोण उसकी अवस्था के साथ बदलता रहता है। आज का आधुनिक युवा कल वृद्ध हो जाएगा। तब उसे अपने समय की बातें और परंपराएँ श्रेष्ठ लगेंगी और वह नई पीढ़ी के बदलावों को स्वीकार करने के बजाय अपने बीते कल को याद करेगा।
• “निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
उत्तर:
लेखन की गुणवत्ता उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि विचारों की
सघनता और स्पष्टता में होती है। एक छोटा निबंध पाठक को बाँधकर रखता है और अपनी बात को सीधे शब्दों में प्रभावशाली ढंग से कह देता है। इसके विपरीत, बड़े निबंध में भटकाव की संभावना रहती है, जिससे मूल भाव भी धूमिल हो सकता है।
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मेरा अनुभव
इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
उत्तर:
कक्षा आठवीं में हमें कई विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखने का अवसर मिला। कुछ विषयों पर लिखना सरल लगा परंतु कुछ विषय कठिन प्रतीत हुए। जिन विषयों से हमारा दैनिक अनुभव और ज्ञान जुड़ा होता है, वे सरल लगते हैं। उदाहरण के लिए ‘मेरा प्रिय खेल’ या ‘मेरा परिवार’ जैसे विषयों पर बहुत अधिक सोचने या शोध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इन विषयों पर हम देखी, सुनी बातों, अनुभव और भावनाओं को आसानी से व्यक्त कर सकते हैं। वहीं कुछ विषयों के लिए गहन शोध साम्रगी, अधिक समय और बहुत सोच-विचार की आवश्यकता होती है, इसलिए वे कठिन लगते हैं। इससे हम यह सीखते हैं कि समय के सही उपयोग, अभ्यास और पढ़ाई से हम हर विषय को सरल व सहज बना सकते हैं।
विषयों से संवाद
प्रश्न 1.
निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
संभावित उत्तर
- बुद्धदेव – अहिंसा और करुणा का संदेश दिया
- महावीर स्वामी – सत्य और अहिंसा का प्रचार किया
- कबीर – अंधविश्वास और भेदभाव का विरोध किया
- गुरु नानक – समानता और भाईचारे का संदेश दिया
- शंकराचार्य – हिंदू धर्म का पुनर्जागरण किया
- नागार्जुन – बौद्ध दर्शन का विकास किया
प्रश्न 2.
निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं, जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
संभावित उत्तर
- पर्यावरण : ‘चिपको आंदोलन’ (सुंदरलाल बहुगुणा) या ‘तरुण भारत संघ’ (राजेंद्र सिंह)।
- स्त्री-शिक्षा : ‘सेल्फ एम्प्लॉयड विमेन एसोसिएशन’ (SEWA)।
- दिव्यांगजन : ‘हेल्पेज इंडिया’ या ‘राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ’।
प्रश्न 3.
आपको ‘समाज-सुधार करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
संभावित उत्तर
- शिक्षा का प्रसार : रटने वाली शिक्षा के स्थान पर कौशल आधारित शिक्षा पर बल देकर।
- समानता : भेदभाव को मिटाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाकर।
- पर्यावरण चेतना : प्रत्येक नागरिक को कम-से-कम एक पेड़ लगाने और जल संरक्षण के लिए प्रेरणा देकर।
प्रश्न 4.
भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
इन बिंदुओं के आधार पर चर्चा की जा सकती है-
- नैतिक जीवन : ईमानदारी और सच्चाई हमें आत्मिक शांति देती है।
- आध्यात्मिक जीवन : यह हमें कठिन समय में धैर्यवान और सकारात्मक बनाए रखने में सहायता करता है।
- व्यावहारिक जीवन : यह दुनिया में जीवित रहने और प्रगति करने के लिए आवश्यक है।
सृजन
प्रश्न 1.
‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है।
आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी ‘आम के आम गुठलियों के दाम’। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
संक्षिप्त लेख : ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास।’
प्रकृति हमें जो कुछ देती है, उसका पूर्ण उपयोग ही बुद्धि मानी है। अकसर हम फलों और सब्जियों के छिलकों को कचरा समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यदि हम इन्हें सड़ाकर ‘जैविक खाद तैयार करें, तो यह ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ वाली बात होगी। हमने फल तो खाया ही, साथ ही उसके अवशेषों से मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाला अमृत (खाद) भी प्राप्त कर लिया। इससे पर्यावरण की रक्षा होती है और रासायनिक खाद का खर्च भी बचता है। जैविक खाद बनाने में भी यही बात लागू होती है। हम घर के कचरे से खाद बनाते हैं, जिससे कचरा भी कम होता है और खेतों के लिए उपयोगी खाद भी मिलती है। इससे पर्यावरण की रक्षा होती है और किसानों को लाभ होता है। इस प्रकार जैविक खाद बनाना ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ जैसा है।
प्रश्न 2.
“जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
उत्तर:
डायरी लेखन (मेरा अनुभव):
तिथि : 25, मई, 2026
समय : रात 9:30 बजे
प्रिय डायरी,
आज मुझे ‘क्या लिखूँ ?’ पाठ की वही बात याद आ रही है कि ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं। मेरे साथ भी एक ऐसी ही घटना घटी जिसने पहाड़ों के प्रति मेरा नजरिया बदल दिया। पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में जब मैं पहाड़ों पर घूमने गया, तो दूर से बर्फ से ढकी चोटियाँ और हरा-भरा वातावरण देखकर मुझे लगा कि वहाँ का जीवन कितना शांत और सुखद होगा। दूर से मेरा अनुमान था कि वहाँ रहने वाले लोग हमेशा खुश रहते होंगे क्योंकि उन्हें इतनी सुंदर प्रकृति निकट से देखने को मिलती है।
लेकिन जब मैं वहाँ कुछ दिन रुका, तो मेरा अनुभव बिलकुल अलग रहा। पास से देखने पर समझ आया कि पहाड़ी जीवन कितना कठिन है। पानी भरने के लिए मीलों पैदल चलना, कड़ी धूप और ठंड में खेती करना और साधारण सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना वहाँ के ‘यथार्थ की कठोरता’ है। जो पहाड़ दूर से मनमोहक लगते थे, निकट से देखने पर वहाँ के जीवन की मुश्किलें समझ आई।
सच ही कहा गया है कि जब तक हम किसी स्थिति के निकट नहीं जाते, हम सिर्फ उसकी सुंदर कल्पना ही करते रहते हैं। आज मुझे एहसास हुआ कि दूर से जो चीज सुहानी लगती है, ज़रूरी नहीं कि उसका असली रूप भी उतना ही आसान हो।
अब सोने का समय हो गया है, कल फिर मिलेंगे।
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भाषा से संवाद
समास
“मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध’ और ‘रचना’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।
उत्तर:
समास
समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है, जैसे-गंगा+जल गंगाजल, देश+भक्ति = देशभक्ति। इस प्रकार समास वह शब्द रचना है, जिसमें दो (या दो से अधिक), अर्थ की दृष्टि से परस्पर स्वतंत्र संबंध रखने वाले, स्वतंत्र शब्द रचना के अंग होते हैं।
समास-रचना में प्राय: दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। जैसे-गंगाजल में ‘गंगा’ पूर्वपद और ‘जल’ उत्तरपद है। इसी तरह देशभक्ति शब्द में ‘देश’ को पूर्वपद और ‘भक्ति’ को उत्तरपद कहेंगे। समास-रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं; जैसे- गंगाजल, देशभक्ति।
यदि समास-रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। जैसे यदि ‘गंगाजल’ समस्त पद के अंग अलग-अलग (समास विग्रह) करें, तो दो पद निकलेंगे समास विग्रह इस प्रकार लिखते हैं- गंगाजल = गंगा + जल (गंगा का जल)।
समास के छह प्रमुख भेद हैं-


निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर:
समास
| सामासिक पद | समास विग्रह | समास का नाम |
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष समास |
| मनोभाव | मन के भाव | तत्पुरुष समास |
| विवाहोत्सव | विवाह का उत्सव | तत्पुरुष समास |
| जीवन-संग्राम | जीवन का संग्राम | तत्पुरुष समास |
| विश्वकोश | विश्व का कोश | तत्पुरुष समास |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष समास |
| नव-वधू | नई है जो वधू | कर्मधारय समास |
| नगर-नगर | नगर और नगर (प्रत्येक नगर) | अव्ययीभाव समास |
| पुस्तकालय | पुस्तक का आलय | तत्पुरुष समास |
| महात्मा | महान है जो आत्मा | कर्मधारय समास |
| गाँव-गाँव | गाँव और गाँव (प्रत्येक गाँव) | अव्ययीभाव समास |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
• “सेनापति ने भी अपनी कविता दुर्बोध कर दी है।”
• “समाज-सुधार की चर्चा अनादि काल से लेकर आज तक होती आ रही है।”
दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। दोनों रेखांकित शब्दों में मूल शब्द के पहले ‘दुर्’ उपसर्ग और ‘आदि’ के पहले ‘अन’ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। उपसर्ग भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं जिनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता है। ये शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को देखिए-
• “आज तक कितने ही सुधारक हो गए हैं।”
• “लेखों का शीर्षक बनाने में ही सबसे अधिक कठिनाई होती है।”
रेखांकित शब्दों में मूल शब्द ‘सुधार’ के बाद में ‘क’ प्रत्यय और ‘कठिन’ शब्द के बाद में ‘आई’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाए गए हैं। प्रत्यय भाषा के ऐसे सार्थक और लघुतम खंड हैं। जिनका प्रयोग स्वतंत्र रूप में नहीं होता और जो शब्दों के अंत में लगकर नए शब्दों का निर्माण करते हैं।
प्रश्न 1.
निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
उपसर्ग
• अनु + भव = अनुभव
• वि + शेष = विशेष
• अ + संतोष = असंतोष
• प्र + गति = प्रगति
• उप + युक्त = उपयुक्त
• निर + अंतर = निरंतर
प्रत्यय
• यथार्थ + ता = यथार्थता
• मानस + इक = मानसिक
• साहित्य + इक = साहित्यिक
• विद्वान + ता = विद्वत्ता
• मधुर + ता = मधुरता
• कठिन + आई = कठिनाई
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए-
• निबंध लिखना बड़ी ………………………….. (कठिन….) की बात है।
• वर्तमान से दोनों को ……………………… (……..संतोष) होता है।
• वाक्यों में कुछ ……………………. (…..स्पष्ट…..) भी चाहिए, क्योंकि यह …………………. (…..स्पष्ट…..) या ………………………. (……बोध……) गांभीर्य ला देती है।
उत्तर:
• निबंध लिखना बड़ी कठिनाई (कठिन…) की बात है।
• वर्तमान से दोनों को असंतोष (…संतोष) होता है।
• वाक्यों में कुछ स्पष्टता (….स्पष्ट…) भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता (…स्पष्ट…) या दुर्बोधता (…बोध…) गांभीर्य ला देती है।
प्रश्न 3.
नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

उदाहरण – मधुर → मधुरता, माधुर्य, सुमधुर
उत्तर:
- मधुर – मधुरता, मधुरमय, सुमधुर
- सुधार – परिसुधार, सुधारना, सुधारक
- सुंदर – सुंदरता, असुंदर, सुंदरी
- गति – प्रगति, गतिशील, गतिमान
- समाज – असमाज, सामाजिक, समाजवाद
भाव एक शब्द अनेक
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने -मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूंढिए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(क) विचार – मनन – चिंतन
अर्थः तीनों सोचने की प्रक्रिया से संबंधित हैं।
वाक्य प्रयोगः
- मुझे नए विषय पर विचार करना होगा।
- गुरुजी की बातों पर मनन करने से ज्ञान बढ़ता है।
- दार्शनिक एकांत में गहन चिंतन करते हैं।
(ख) सुहावने – मधुर – मनमोहक
अर्थः जो देखने या सुनने में प्रिय लगे।
वाक्य प्रयोगः
- दूर के ढोल सुहावने होते हैं।
- कोयल की बोली बहुत मधुर होती है।
- कश्मीर का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत मनमोहक है।
(ग) उमंग – स्फूर्ति – आवेग
अर्थ : मन का उत्साह या जोश।
वाक्य प्रयोगः
- उमंग (उत्साह) : त्योहार के अवसर पर बच्चों के मन में एक विशेष उमंग होती है।
- स्फूर्ति ( ताजगी) : सुबह की सैर करने से शरीर में दिनभर के लिए स्फूर्ति आ जाती है।
- आवेग (तीव्र मानसिक जोश) : क्रोध के आवेग में आकर व्यक्ति अक्सर अपना नियंत्रण खो देता है।
(घ) आदेश – आग्रह
अर्थ : ये शब्द किसी से कुछ करने के लिए कहने के संदर्भ में हैं।
वाक्य प्रयोगः
- आदेश (अधिकार के साथ कहना) : नमिता का आदेश था कि मैं ‘दूर के ढोल सुहावने’ पर निबंध लिखूँ।
- आग्रह (विनम्रतापूर्वक अनुरोध) : अमिता का आग्रह था कि मैं समाज सुधार पर अपने विचार व्यक्त करूँ।
(ङ) अनुभव – अनुभूति
अर्थ : किसी स्थिति या भाव को मन से जानना।
वाक्य प्रयोगः
- अनुभव – जीवन का अनुभव हमें सही निर्णय लेना सिखाता है।
- अनुभूति – प्रकृति की सुंदरता की अनुभूति मन को शांति देती है।
(च) विज्ञ – विद्वान – आचार्य
अर्थ : ये शब्द ज्ञानी व्यक्तियों के लिए प्रयुक्त हुए हैं।
वाक्य प्रयोगः
- विज्ञ – प्राचीन लिपियों को पढ़ने के लिए हमें भाषा विज्ञों की सहायता लेनी पड़ती है।
- विद्वान – सच्चा विद्वान वही है जो अपने ज्ञान का प्रयोग समाज कल्याण के लिए करें।
- आचार्य – दोणाचार्य पांडवों और कौरवों के आचार्य थे।
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गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
प्रश्न 1.
“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।”
पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेली आई है। अनमेली एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
उत्तर:
‘अमीर खुसरो द्वारा रचित अनमेलियों, पहेलियों और मुकरियों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
अनमेलियाँ-
- पथिक प्यासा क्यों? गधा उदास क्यों?
- घर अंधियारा क्यों? फकीर बिगड़ा क्यों?
पहेलियाँ-
- एक जानवर रंग रंगीला, बिना मारे वह रोवे।
उसके सिर पर तीन तिलाके, बिन बताए सोवे। - एक थाल मोतियों से भरा, सबके सर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।
मुकरियाँ-
- रात समय वह मेरे आवे, भोर भये वह घर उठि जावे,
यह अचरज है सबसे न्यारा, ऐ सखि साजन? ना सखि तारा! - लिपट लिपट के वा के साई।
छाती से छाती लगा के रोई।।
दाँत से दाँत बजे तो ताड़ा
ऐ सखि साजन ? ना सखि जाड़ा ।।
प्रश्न 2.
कक्षा में ‘युवा और वृद्ध-दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद के नियमों के लिए आप कक्षा 7 और 8 की पाठ्पुस्तक मल्हार के कुछ पाठों का अभ्यास देखकर अपनी प्रतियोगिता के नियम निर्धारित कर सकते हैं।
उत्तर:
वाद-विवाद
विषय – ‘युवा और वृद्ध- दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’
नियम – प्रत्येक वक्ता को 2 मिनट का समय मिलेगा।
– भाषा शिष्ट और सरल होनी चाहिए।
– पहले पक्ष और फिर विपक्ष अपनी बात रखेंगे।
– अंत में शिक्षक (निर्णायक) परिणाम घोषित करेंगे।
संचालक – ‘आदरणीय शिक्षकगण और प्रिय सहपाठियो ! आप सभी का आज कक्षा वाद-विवाद गतिविधि में स्वागत है। आज का विषय है- ‘युवा और वृद्ध पीढ़ियों के बीच पीढ़ीगत अंतर’।
अब मैं, पक्ष के वक्ता को मंच पर प्रस्तुतीकरण के लिए आमंत्रित करती हूँ।
वक्ता (समर्थन) आदरणीय शिक्षकगण और प्यारे सहपाठियो ! मैं इस विषय के समर्थन में विचार प्रस्तुत करना चाहती हूँ।
- पीढ़ीगत अंतर आवश्यक है। युवा नई सोच और क्रांति यानी बदलाव लाते हैं। वृद्धजन अनुभव व ज्ञान देते हैं। दोनों के विचारों का मेल समाज/ देश को आगे बढ़ाता है।
- युवा तकनीकी प्रगति और नए विकास में विश्वास रखते हैं, वहीं वृद्धों, बड़े-बुजुर्गों का मार्गदर्शन सही दिशा प्रदान करने में सहायक है। यह संतुलन जरूरी है। वक्ता (विपक्ष)- आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथियो! मैं इस विषय के पक्ष में नहीं हूँ। आशा है आप मेरे विचार समझेंगे।
- पीढ़ीगत अंतर से दूरियाँ बढ़ती हैं। युवा भविष्य की बातें करते हैं तो वृद्ध अपने अतीत में जीते हैं। यह संघर्ष का कारण बनता है।
- कई बार युवा और वृद्ध एक-दूसरे की बात समझ नहीं पाते। इससे दूरी बढ़ती है। युवा परंपराओं को रुकावट मान लेते हैं और वृद्ध आधुनिक सोच को स्वीकार नहीं कर पाते।
निष्कर्ष – संचालक दोनों पक्षों के विचार सुनने के बाद हम कह सकते हैं कि हम इस अंतर को समझदारी और धैर्य से संभाले। हमें उज्ज्वल भविष्य और गौरवशाली अतीत दोनों का सम्मान करना चाहिए। तभी समाज में संतुलन व विकास बना रहेगा। अब मैं निर्णायक मंडल से परिणाम घोषित करने का अनुरोध करती हूँ।
धन्यवाद।
भाषा संगम
“निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”
नीचे ‘निबंध’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
निबंध (हिंदी); निबंध: (संस्कृत); निबंध (पंजाबी); मजमून (उर्दू); ); मजमून (कश्मीरी ); मज्मूनु, निबंधु (सिन्धी); निबंध (मराठी); निबंध (गुजराती); निबंध (कोंकणी); निबंध (नेपाली); निबंध, प्रबंध (बांग्ला); निबंध – रचना (असमिया ) ; निबंध, वाड्ङ् (मणिपुरी); प्रबंध, रचना (ओड़िआ); व्यासमु (तेलुगु); कटटुरै (तमिल); उपन्यासम् (मलयालम); लेख, प्रबंध (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
निबंध शब्द का विदेशी भाषाओं में प्रयोग
- अंग्रेजी – ऐसे
- फ्रेंच – एसे
- स्पेनिश – एनसयो
- रूसी – एस्से
- जापानी – एसेई
- चीनी – जुओवेन
- “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।।” इस वाक्य को पंजाबी में लिखें (गुरुमुखी लिपि का प्रयोग करें)
झरोखे से
पाठ में आदर्श निबंध लेखन के विषय में विस्तार से बताया गया है। अब आप सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?” पढ़िए—
उत्तर:
मैं क्यों लिखता हूँ?
मैं क्यों लिखता हूँ? यह प्रश्न बड़ा सरल जान पड़ता है पर बड़ा कठिन भी है, क्योंकि इसका सच्चा उत्तर लेखक के आंतरिक जीवन के स्तरों से संबंध रखता है। उन सबको संक्षेप में कुछ वाक्यों में बाँध देना आसान तो नहीं ही है, न जाने संभव भी है या नहीं? इतना ही किया जा सकता है कि उनमें से कुछ का स्पर्श किया जाए- विशेष रूप से ऐसों का जिन्हें जानना दूसरों के लिए उपयोगी हो सकता है।
एक उत्तर तो यह है कि मैं इसीलिए लिखता हूँ कि स्वयं जानना चाहता हूँ कि क्यों लिखता हूँ लिखे बिना इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता है। वास्तव में सच्चा उत्तर यही है। लिखकर ही लेखक उस आभ्यंतर विवशता को पहचानता है जिसके कारण उसने लिखा और लिखकर ही वह उससे मुक्त हो जाता है। मैं भी उस आंतरिक विवशता से मुक्ति पाने के लिए तटस्थ होकर उसे देखने और पहचान लेने के लिए लिखता हूँ। मेरा विश्वास है कि सभी कृतिकार- क्योंकि सभी लेखक कृतिकार नहीं होते, न उनका सब लेखन ही कृति होता है- इसीलिए लिखते हैं। यह ठीक है कि कुछ ख्याति मिल जाने के बाद कुछ बाहर की विवशता से भी लिखा जाता है- संपादकों के आग्रह से, प्रकाशक के तकाजे से, आर्थिक आवश्यकता से। पर एक तो कृतिकार हमेशा अपने सम्मुख ईमानदारी से यह भेद बनाए रखता है कि कौन-सी कृति भीतरी प्रेरणा का फल है, कौन-सा लेखन बाहरी दबाव का, दूसरे यह भी होता है कि बाहर का दबाव वास्तव में दबाव नहीं रहता, वह मानो भीतरी उन्मेष का निमित्त बन जाता है।
-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
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खोजबीन
पाठ में आए साहित्यकारों बाणभट्ट श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए. जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर, मानटेन के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:
- बाणभट्ट – सातवीं शताब्दी के प्रसिद्ध संस्कृत गद्यकार और कवि थे। उनके द्वारा रचित दो प्रमुख ग्रंथ हैं- हर्षचरितम् तथा कादम्बरी । वे राजा हर्षवर्धन के आस्थावान कवि थे।
- श्रीहर्ष – 12वीं सदी के संस्कृत के प्रसिद्ध कवि तथा दार्शनिक। उनमें उच्चकोटि की काव्यात्मक प्रतिभा थी और वे अलंकृत शैली के कवि माने जाते हैं। महान कवि होने के साथ-साथ बड़े दार्शनिक भी थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- पियादासिका, रत्नावली और नागानंद।
- अमीर खुसरो – खड़ी बोली हिंदी के प्रसिद्ध कवि। उन्होंने खड़ी बोली का सूत्रपात ‘हिंदवी’ के रूप में किया था। उन्होंने पहेलियाँ, मुकरियाँ, दोहे और गजलें लिखीं।
- सेनापति (1616) – हिंदी साहित्य के भक्ति काल और रीतिकाल के संधिकाल के एक महान कवि थे, जो अपनी उत्कृष्ट ब्रजभाषा रचनाओं विशेषकर प्रकृति चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका प्रसिद्ध ग्रंथ ‘कवि रत्नाकर’ है।
- ए. जी. गार्डिनर 20वीं सदी के प्रारंभ के एक प्रसिद्ध अंग्रेज निबंधकार और संपादक थे। इनकी लेखन शैली अत्यंत स्पष्ट, सरल और मानवीय थी। ये गंभीर सामाजिक मुद्दों को आम भाषा में समझाने की क्षमता रखते थे।
- मानटेन – मानटेन का निबंध साहित्य पर प्रभाव वैश्विक है। उन्हें निबंध-विधा का जनक और आधुनिक संशयवाद का संस्थापक माना जाता है।
शेक्सपियर ये अंग्रेजी भाषा के महान कवि, नाटककार और अभिनेता माने जाते हैं। इन्होंने रोमियो जूलिएट, हैमलेट और मैकबेथ जैसे प्रसिद्ध नाटक और सॉनेट लिखे, जो मानवीय भावनाओं और प्रेम पर आधारित हैं। - महात्मा गांधी एक ओजस्वी लेखक, पत्रकार और विचारक थे। अपनी सरल और प्रभावकारी भाषा-शैली के माध्यम से सत्य, अहिंसा के दर्शन को दुनिया भर में फैलाया। ‘यंग इंडिया’ ‘नवजीवन’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जागरण का कार्य किया।