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Class 9 Hindi Chapter 1 दो बैलों की कथा Question Answer
दो बैलों की कथा Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 1 Question Answer – Class 9 Hindi दो बैलों की कथा Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 16-27)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तर:
(ख) एकता और सहयोग
तर्क – पूरी कहानी में हीरा और मोती हर विपत्ति का सामना मिलकर करते हैं। चाहे वह हल या गाड़ी में जोते जाने पर एक-दूसरे का बोझ अपने कंधे पर लेने की कोशिश हो या साँड़ से लड़ते समय एक-दूसरे की मदद करना। उनका आपसी प्रेम और उनकी एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
प्रश्न 2.
हीरा – मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तर:
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
तर्क – बैल अपने मालिक झूरी से बहुत प्रेम करते थे। जब झूरी के साले गया ने उन्हें साथ ले जाना चाहा तो उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। यह विचार उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने वाला था, इसलिए उन्होंने नए घर (गया के घर) को मन से स्वीकार नहीं किया।
प्रश्न 3.
बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तर:
(घ) अपनापन पाने के लिए
तर्क – गया के घर में उन्हें न तो वह प्रेम मिला और न ही वह सम्मान जो झूरी के यहाँ मिलता था। वहाँ उन्हें सूखा भूसा दिया गया और अपमानित किया गया। झूरी के घर की याद और वहाँ मिलने वाले अपनत्व के कारण ही उन्होंने भागकर वापस लौटने का निर्णय लिया।
प्रश्न 4.
गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
उत्तर:
(क) स्वाभिमान
तर्क – मोती स्वभाव से थोड़ा उग्र है। जब गया बिना किसी कारण के उसे डंडे से मारता है, तो उसे अपनी गुलामी और अपमान का एहसास होता है। यह आक्रोश इस बात का प्रतीक है। कि कोई भी आत्मसम्मान वाला प्राणी अन्याय को चुपचाप स्वीकार नहीं करता।
प्रश्न 5.
कहानी में बैलों की ‘मूक- भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किसलिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तर:
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
तर्क – प्रेमचंद ने बैलों के माध्यम से यह दिखाया है कि जानवरों में भी मनुष्यों जैसी भावनाएँ संवेदनाएँ और विचार करने की शक्ति होती है। वे बोल नहीं सकते, लेकिन एक-दूसरे की बात और मन के भावों को पूरी तरह समझते हैं।
प्रश्न 6.
‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेज़ों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तर:
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
तर्क – यह कहानी उस समय लिखी गई थी जब भारत गुलामी की जंज़ीरों में जकड़ा था। हीरा और मोती का बार-बार बंधन से भागना, कष्ट सहना और अंत में अपने घर पहुँचना, भारतीय जनता के उस संघर्ष को दर्शाता है, जो वे अंग्रेज़ों की गुलामी से आजाद होने के लिए कर रहे थे।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
प्रश्न 1.
“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर:
हीरा और मोती ने गया के यहाँ हल चलाने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि वे गया को अपना मालिक नहीं मानते थे। उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है, जिससे उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँची थी। साथ ही, गया का व्यवहार उनके प्रति अत्यंत कठोर और प्रेमहीन था। वे स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे थे। वे अपनी मूक भाषा में यह विरोध जता रहे थे कि जहाँ प्रेम और अपनापन नहीं है, वहाँ वे अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करेंगे।
प्रश्न 2.
“गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
(संकेत – वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर:
हीरा-मोती बिना किसी मार्गदर्शन के अपने पुराने घर पहुँच गए, जो उनकी असाधारण स्मरण शक्ति, समझ और उनके मालिक (झूरी) के प्रति गहरे प्रेम और लगाव को दर्शाता है। गाँव के लोगों के लिए आश्चर्यजनक बन गईं इसलिए गाँव के इतिहास में यह घटना महत्वपूर्ण मानी गई, क्योंकि इसमें बैलों की बुद्धिमत्ता, निष्ठा और भावनात्मक संबंध स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- लौटने का कारण
हीरा और मोती गया के घर में हुए अत्याचार और कठोर व्यवहार से दुखी थे। उन्हें अपने पुराने मालिक झूरी का स्नेह, अपनापन और अच्छा व्यवहार याद आया, इसलिए वे सब कष्ट सहकर वापस लौट आए। - उनके मन के भाव
- झूरी के प्रति स्नेह और लगाव
- गया के प्रति असंतोष और विरोध
- बंधनों से मुक्त होने की चाह
- झूरी के मन के भाव
- बैलों के लौट आने पर अत्यधिक प्रसन्नता
- उनके प्रति स्नेह और दुलार
- गर्व और आश्चर्य
- वास्तविक जीवन से जुड़ाव
हाँ, वास्तविक जीवन में भी ऐसा देखा गया है कि रास्ता भटकने के बाद भी पालतू पशु (कुत्ता, बिल्ली आदि) अपने मालिक के प्रति प्रेम और लगाव के कारण अपने मालिक के पास वापस लौट आते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि पशुओं में भी अपनेपन की भावना और समझ होती है।
प्रश्न 3.
“मोती ने मूक-भाषा में कहा – अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”
‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
“अब तो नहीं सहा जाता हीरा!” यह वाक्य दर्शाता है कि जब सहनशीलता की सीमा समाप्त हो जाए, तो संघर्ष ही
एकमात्र रास्ता बचता है। कहानी में इसके कई उदाहरण हैं। गया के घर से भागना, दुबारा भागने पर पकड़ा जाना, फिर भागना, साँड़ से लड़ाई करना, काँजीहौस में बंदी होना, हफ़्ते भर भूखे-प्यासे रहना फिर काँजीहौस की दीवार तोड़ना, बधिक के हाथों नीलाम होना और अंत में मुक्ति पाना – ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक है।
प्रश्न 4.
“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित] लिखिए।
उत्तर:
हीरा और मोती ‘अपनापन’ की भावना से अधिक प्रेरित थे। हालाँकि वे आजाद होना चाहते थे, लेकिन उनकी पूरी यात्रा का केंद्र ‘झूरी का घर’ था। वे गया के यहाँ से आज़ादी इसलिए चाहते थे क्योंकि वहाँ उन्हें ‘परायापन’ मिला। अंत में जब वे अपने थान पर वापस आते हैं, तो उन्हें जो सुख मिलता है, वह केवल आज़ादी का नहीं बल्कि अपने मालिक के प्रेम का था। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ अपने प्रियजनों के साथ रहना था।
प्रश्न 5.
“बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”
‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर:
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। यदि हम किसी अन्याय को चुपचाप सहते हैं, तो अत्याचार करने वाले का हौसला और बढ़ जाता है। कहानी में भी यदि हीरा मोती गया की मार चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। उसके द्वारा की गई कठोरता का विरोध करना यह संदेश देता है कि हर प्राणी को सम्मान से जीने का हक है और अन्याय के सामने झुकना कायरता है।
प्रश्न 6.
“बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ नामक पाठ में एक नहीं अनेक घटनाएँ हैं, जिनसे पता चलता है कि हीरा मोती अभिन्न मित्र थे;
जैसे-
- हीरा और मोती चाटकर और सूँघकर एक-दूसरे के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते थे।
- हल में जोते जाते समय दोनों की यही कोशिश रहती थी कि ज्यादा से ज्यादा भार अपनी ओर ही रहे।
- गया द्वारा हीरा की पिटाई से दुखी मोती हल लेकर भागा, जिससे हल, जोत, जुआ सब टूट गए।
- साँड़ द्वारा एक पर आक्रमण करते ही दूसरा साँड़ के पेट में सींग घुसेड़ देता था, इस प्रकार दोनों की जान बची तथा साँड़ को भी हारना पड़ा।
- मटर खाते समय मोती के पकड़े जाने पर हीरा भी वापस आ गया और दोनों ही काँजीहौस में बंदी बनाए गए।
- काँजीहौस की दीवार गिराने की कोशिश करने के कारण हीरा को मोटी रस्सियों में बाँध दिया गया। मोती चाहता तो अन्य पशुओं के साथ स्वयं भी भाग सकता था, पर वह हीरा का साथ देने के लिए वहीं रुका रहा।
(विद्यार्थी कोई भी तीन बिंदु चुनकर लिख सकते हैं।)
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प्रश्न 7.
“उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर:
कहानी में इन दोनों पात्रों का व्यवहार शुरुआत में अलग था, लेकिन अंत में एक जैसा हो गया:
| पात्र | प्रारंभिक व्यवहार | कारण / प्रभाव | अंत में व्यवहार |
| मालकिन | शुरुआत में क्रोधित थीं और बैलों को ‘नमक हराम’ कहा। | उन्हें लगाता था कि बैल कामचोर हैं और उनके भाई (गया) का अपमान करके भागे हैं। | अंत में बैलों की स्वामिभक्ति देखकर मालकिन का हृदय पिघल गया और उन्होंने प्रेम से उनके माथे चूम लिए। |
| छोटी लड़की | शुरू से ही बैलों के प्रति सहानुभूति और प्रेम रखती थी। | उसकी अपनी माँ नहीं थी और सौतेली माँ उसे मारती थी, इसलिए वह बैलों का दर्द समझती थी। | बाद में छोटी लड़की बैलों की तकलीफ़ तथा उनकी समस्या को और अच्छी तरह से महसूस करने लगी। फलतः उनको मुक्त कर दिया। |
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
प्रश्न 1.
“उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर:
यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो मैं भी वही करता/ करती जो उस लड़की ने किया, क्योंकि प्रेम और सहानुभूति की भाषा सबसे ऊपर होती है। मैं उनके लिए न केवल चुपके से रोटियाँ लाता / लाती, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता/करती कि उनके भागने का रास्ता सुरक्षित हो। शायद मैं गया के सो जाने का इंतज़ार करता/करती और उनके गले की रस्सियों को इस तरह ढीला कर देता / देती कि वे आसानी से उन्हें तोड़ सकें, ताकि किसी को मुझ पर शक भी न हो और वे सुरक्षित अपने घर पहुँच सकें।
प्रश्न 2.
“दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ।
कहानी का उदाहरण : काँजीहौस में जब हीरा और मोती ने दीवार तोड़ दी और बाकी जानवर भाग गए, तब भी दोनों गधे वहीं खड़े रहे। उन्हें डर था कि अगर वे पकड़े गए, तो फिर से मार पड़ेगी। यह ‘भय’ उन्हें स्वतंत्रता का आनंद लेने से रोक रहा था।
निजी अनुभव : कई बार कक्षा में शिक्षक जब कोई सवाल पूछते हैं, तो हमें उत्तर पता होने पर भी संकोच’ होता है। कि कहीं हमारा उत्तर गलत न हो और सब हँसने न लगें। यह संकोच हमें अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर से दूर रखता है।
मेरे अनुभव मेरे विचार
प्रश्न 1.
“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर:
मैं इस बात से सहमत हूँ। सच्ची दोस्ती में औपचारिकता नहीं होती। जब हम दोस्तों के साथ हँसी-मजाक, छीना-झपटी या हल्की नोकझोंक करते हैं, तो उससे रिश्ता और गहरा होता है। ‘फुसफुसी’ दोस्ती वह है, जहाँ हम बहुत सोच-समझकर और संकोच से बात करते हैं। मेरे अनुभव में, जिस दोस्त से मेरी नोंकझोंक और फिर सुलह हुई, वह रिश्ता उन रिश्तों से ज्यादा मजबूत है, जहाँ कभी कोई मतभेद ही नहीं हुआ।
प्रश्न 2.
“हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर:
मैं इस विषय में हीरा के साथ हूँ। हीरा का यह मानना कि ‘गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करना चाहिए। यह महानता और नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। यदि हम भी अपने शत्रु की तरह ही क्रूर हो जाएँ, तो हममें और उनमें कोई अंतर नहीं रह जाएगा। युद्ध के भी कुछ नियम होने चाहिए। हालाँकि, मोती का तर्क व्यावहारिक है, लेकिन समाज और मानवता को बचाने के लिए हीरा जैसे आदर्शों की आवश्यकता अधिक है।
(विद्यार्थी अपनी समझ से उत्तर लिखेंगे।)
प्रश्न 3.
“हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर:
पिछले वर्ष जब हमारे शहर में भारी वर्षा के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी, तब मेरे एक मित्र का घर निचले इलाके में होने के कारण जलमग्न होने लगा था। उस समय वह अकेला था और बहुत डरा हुआ था। जैसे ही मुझे इसकी सूचना मिली मैं बिना सोचे उसके पास पहुँच गया।
चुनौतियाँ और हमारा प्रयास-
- हीरा और मोती की तरह हमने एक-दूसरे को सहारा दिया। हमने मिलकर भारी सामान को ऊँचाई पर रखा ताकि वह खराब न हो।
- पानी का स्तर बढ़ रहा था, लेकिन हमने धैर्य नहीं खोया। हमने मिलकर मोहल्ले के अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने में मदद की।
- अकेले शायद हम घबरा जाते, लेकिन साथ होने के कारण हम पूरी रात जागकर स्थिति पर नजर रख पाए।
जिस प्रकार हीरा ने मोती को काँजीहौस में अकेला छोड़कर जाने से मना कर दिया था, उसी प्रकार उस दिन मुझे भी यह अहसास हुआ कि सच्ची मित्रता केवल सुख के लिए नहीं, बल्कि संकट में एक-दूसरे का संबल बनने के लिए होती है। एकता और आपसी विश्वास से हम किसी भी ‘साँड़’ जैसी बड़ी मुसीबत को परास्त कर सकते हैं।
विधा से संवाद
कहानी की पड़ताल
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा – विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।
कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।
आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-

उत्तर:
| बिंदु | विवरण |
| शीर्षक और लेखक | ‘असली जीत’ (लेखक: आपका नाम) |
| विषय | अहंकार का पतन और क्षमा की महत्ता। |
| क्रिया / कार्य | एक अभिमानी धावक का प्रतियोगिता के दौरान अपने प्रतिद्वंद्वी को गिरते देख उसे उठाने के लिए रुक जाना। |
| परिवेश / देश – काल और मुख्य विचार | आधुनिक शहर का खेल स्टेडियम; विचार- ‘मानवता पदक से बड़ी है’। |
| चरित्र / पात्र | आदित्य : तेज तर्रार लेकिन घमंडी; रवि : सीधा-सादा और मेहनती। |
| परिणाम | आदित्य दौड़ हार जाता है, लेकिन सबका दिल जीत लेता है और उसे सच्ची शांति का अनुभव होता है। |
कहानी का सौंदर्य
“दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गई।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य – सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-


उत्तर:
| विशेषता | उदाहरण |
| चित्रात्मक भाषा | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। |
| संवादात्मकता | झूरी ने चिढ़ाया- “चारा मिलता तो क्यों भागते?” |
| विरोधाभास | ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं; पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है। |
| व्यंग्य | उसके चेहरे पर एक स्थायी विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है…. |
| संघर्ष | उसने दौड़-दौड़कर दीवार पर चोटें की और हर चोट में थोड़ी-थोड़ी मिट्टी गिराने लगा। |
| अतिशयोक्ति | वे अपनी आँखों से आग की चिनगारियाँ छोड़ रहे थे। |
| संदेह / उलझन | बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच दिया। |
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कहानी की रचना
प्राय : कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत / बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ के विभिन्न पक्षों (समय, पात्र, भाषा और घटना) को समझने के लिए पाठ की कुछ महत्वपूर्ण पंक्तियाँ ‘संकेत बिंदु’ का कार्य करती हैं-
1. पात्रों का परिचय देने वाली पंक्तियाँ
कहानी के प्रारंभ में ही लेखक इनका नाम और कद-काठी बताकर इन्हें मुख्य भूमिका में स्थापित कर देते हैं:
झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती। दोनों पछाईं जाति के थे देखने में सुंदर, काम में चौकस, डील में ऊँचे।
2. पात्रों के स्वभाव का संकेत (हीरा मोती की विचारधारा)
दोनों के बीच का वैचारिक अंतर इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है:
- हीरा (गांधीवादी / धैर्य) : “नहीं। हमारी जाति का यह धर्म नहीं।”
- मोती (क्रांतिकारी / आक्रोश) : “मुझे मारेगा, तो मैं भी एक-दो को गिरा दूँगा।”
3. समय और स्वतंत्रता संग्राम का संकेत
कहानी के समय और गुलामी के विरुद्ध संघर्ष को ये पंक्तियाँ दर्शाती हैं:
“गधे का एक छोटा भाई और भी है, जो उससे कम ही गधा है और वह है बैल। जिस अर्थ में हम गधे का प्रयोग करते हैं, कुछ उसी से मिलते-जुलते अर्थ में ‘बछिया के ताऊ’ का भी प्रयोग करते हैं।”
(संकेत – यह समाज की उस मानसिकता को दिखाता है, जहाँ सीधापन गुलामी का कारण बनता है।)
“आखिर कोई दो घंटे की जोर-आजमाई के बाद दीवार ऊपर से लगभग एक हाथ गिर गई।”
(संकेत – यह ‘दीवार गिराना व्यवस्था की गुलामी की जंजीरें तोड़ने का प्रतीक है।)
“एक बार जब उस निर्दयी ने हीरा की नाक पर खूब डंडे जमाए, तो मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया। हल लेकर भागा।”
(संकेत – ये पंक्तियाँ उस समय की ओर इशारा करती हैं जब भारतीय जनता (बैलों के रूप में) विदेशी शासन (गया के रूप में) के जुल्म सह रही थी और उनके भीतर विद्रोह की ज्वाला सुलग रही थी।)
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
(संकेत – यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि उस समय के समाज में स्त्रियों के प्रति सम्मान एक अनिवार्य नियम या संस्कार के रूप में स्थापित था।)
4. भाषा
“सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा। कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।”
यहाँ ‘सद्गुणों का अनादर’ और ‘सीधापन’ जैसे शब्दों का प्रयोग करके प्रेमचंद ने तत्कालीन चालाक और स्वार्थी समाज पर कड़ा व्यंग्य किया है।
उर्दू और हिंदी का सुंदर समन्वय – “उसे अपनी बेबसी पर क्रोध आया…”
वर्णनात्मक और भावात्मक – “दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूंघकर अपना प्रेम ममता प्रकट करते थे…. कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे, विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से।”
विषयों से संवाद
कहानी का समय और समाज
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | (1) भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में प्रेरणा जगी। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | (2) भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | (3) ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | (4) दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | (5) स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | (6) स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
उत्तर:
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | (6) स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | (5) स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | (4) दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | (2) भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | (1) भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | (3) ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख्तियार है!”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”
प्रश्न 1.
बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर:
अन्याय – काँजीहाउस में बैलों को बंद करना अन्यायपूर्ण था, क्योंकि वहाँ उन्हें भोजन पानी नहीं दिया जा रहा था। वे लावारिस नहीं थे, बल्कि रास्ता भटक गए थे। वहाँ उनके साथ क्रूरता की गई और अंत में उन्हें नीलाम कर दिया गया, जो उनके जीवन के अधिकार का हनन था।
न्याय (प्रक्रियात्मक) – कानूनी रूप से उस समय का नियम था कि यदि कोई जानवर किसी के खेत का नुकसान करता है (जैसे हीरा मोती मटर के खेत में पकड़े गए थे), तो उसे काँजीहाउस में बंद किया जाए। इस दृष्टि से व्यवस्था ने अपना ‘नियम’ निभाया, पर उस नियम में संवेदनशीलता और न्याय का अभाव था।
प्रश्न 2.
यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे अवसर मिले तो मैं बैलों की ओर से पशुओं के लिए निम्नलिखित कानूनी अधिकारों की माँग करूँगा / करूँगी-
- गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार – किसी भी पालतू पशु को भूखा रखना या अत्यधिक शारीरिक प्रताड़ना देना कानूनी अपराध हो।
- क्रूरता से सुरक्षा – काँजीहाउस जैसे स्थानों पर पशुओं को नीलाम करने पर पूर्ण प्रतिबंध हो, जब तक कि उनके मालिक की पहचान पूरी तरह न हो जाए।
- चिकित्सा और आहार – सरकारी संस्थाओं में बंद पशुओं के लिए अनिवार्य रूप से साफ़ पानी, चारा और डॉक्टर की व्यवस्था हो।
- काम के घंटों का निर्धारण – हल चलाने या बोझा ढोने वाले पशुओं के लिए काम के घंटे तय हों और अत्यधिक बोझ लादना दंडनीय हो।
- अपराध के विरुद्ध प्रतिनिधित्व – यदि किसी पशु के साथ अन्याय होता है, तो समाज का कोई भी व्यक्ति उसकी ओर से ‘कानूनी संरक्षक’ बनकर अदालत में केस लड़ सके।
प्रश्न 3.
मान लीजिए कि हीरा मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत- “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…।” )
उत्तर:
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
स्थानीय थाना,
झूरी का गाँव।
दिनांक- 26/04/20XX
विषय : काँजीहौस में हुए अन्याय और अवैध नीलामी के विरुद्ध शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी के पालतू बैल हैं। हम इस पत्र के माध्यम से आपके संज्ञान में अपने साथ हुई क्रूरता और अन्याय की घटनाओं को लाना चाहते हैं।
कुछ समय पूर्व हमें एक दूसरे व्यक्ति के यहाँ भेज दिया गया, जहाँ हमारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया गया। हमें बिना पर्याप्त भोजन और पानी के कठोर परिश्रम करवाया गया तथा कई बार मारपीट भी की गई। इस अत्याचार से दुखी होकर जब हम वहाँ से किसी तरह निकल भागे तो काँजीहौस में हमें पकड़कर बंद कर दिया गया, जहाँ हमारी स्थिति और भी खराब हो गई। हमें उचित देखभाल नहीं मिली और हम भूख-प्यास से तड़पते रहे।
महोदय, हम निर्दोष हैं और केवल अपने पुराने मालिक के पास लौटना चाहते हैं, जहाँ हमें स्नेह और उचित देखभाल मिलती थी। अतः आपसे निवेदन है कि पशुओं के प्रति इस प्रकार की क्रूरता को रोका जाए और काँजीहौस जैसे स्थानों की कार्यप्रणाली की जाँच की जाए। हम अपने घर और अपने मालिक के पास सुरक्षित रहना चाहते हैं।
आशा है कि आप हमारी इस ‘मूक’ पुकार को सुनेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे।
आपकी कृपा के लिए हम सदैव आभारी रहेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय,
हीरा और मोती
(झूरी के बैल)
स्थान: झूरी का थान (द्वार)
हमारी धरोहर और संस्कृति
प्रश्न 1.
“वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!”
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सर्दैव ध्यान रखते थे कि कौन से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर:
“वह अपना धर्म छोड़ दे, लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें?” – हीरा द्वारा कही गई यह पंक्ति उसके उच्च नैतिक चरित्र और सिद्धांतों को दर्शाती है। ‘धर्म’ से यहाँ तात्पर्य ‘कर्तव्य’ और ‘नैतिकता’ से है।
इस पंक्ति के संदर्भ में हीरा और मोती निम्नलिखित काम कभी नहीं करते थे:
- निहत्थे या कमज़ोर पर वार करना – वे कभी भी किसी कमजोर या हार मान चुके प्राणी पर हमला नहीं करते थे। साँड़ से लड़ाई के बाद जब वह बेदम होकर धरती पर गिर पड़ा तो दोनों ने उसे छोड़ दिया।
- नारी जाति का अपमान – वे स्त्रियों पर प्रहार करना अपने धर्म के विरुद्ध मानते थे। कहानी में एक स्थान पर मोती कहता है कि गया की पत्नी (जो उन्हें कम खाना देती थी) को सींग मारकर गिरा देना चाहिए। तब हीरा उसे याद दिलाता है कि “स्त्री जाति पर सींग चलाना मना है।”
- धोखा या विश्वासघात – वे अपने स्वामी झूरी के प्रति हमेशा वफादार रहे। उन्होंने कभी भी काम से जी नहीं चुराया और न ही कभी अपने मालिक के साथ विश्वासघात करने की सोची।
- मित्र को संकट में अकेला छोड़ना – काँजीहौस की घटना के समय, जब दीवार टूट गई थी और हीरा बँधा हुआ था, तब मोती के पास भागने का पूरा मौका था। लेकिन उसने अपने मित्र को अकेला नहीं छोड़ा और वहीं रुक गया। उसने हार मानकर भागने को अपना धर्म नहीं माना।
- अमानवीयता का जवाब अमानवीयता से देना – गया का व्यवहार उनके प्रति बहुत क्रूर था, लेकिन हीरा का मानना था कि यदि सामने वाला अपनी इंसानियत (धर्म) भूल गया है, तो भी हमें अपनी अच्छाई और मर्यादा नहीं छोड़नी चाहिए।
हीरा और मोती केवल जानवर नहीं थे, बल्कि उनमें धैर्य, क्षमा और त्याग जैसे मानवीय गुण थे। वे अन्याय सहते हुए भी अपने ‘नैतिक धर्म’ से कभी विमुख नहीं हुए।
प्रश्न 2.
“गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर:
हीरा के ये दोनों कथन भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति के शाश्वत मूल्यों की ओर संकेत करते हैं।
(i) स्त्री का सम्मान (नारी शक्ति का आदर)
“औरत जात पर सींग चलाना मना है”- यह कथन भारतीय संस्कृति के मूलमंत्र ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ (जहाँ नारी की पूजा / सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है) को दर्शाता है।
यह समाज के उस नैतिक नियम की ओर इशारा करता है जहाँ युद्ध या संघर्ष की स्थिति में भी महिलाओं, बच्चों और निहत्थों को सुरक्षा दी जाती थी। हीरा के माध्यम से प्रेमचंद यह याद दिलाते हैं कि शक्ति का प्रयोग कभी भी कमजोर या पूजनीय वर्ग के विरुद्ध नहीं होना चाहिए।
(ii) युद्ध-नीति और मर्यादा (वीरता के नियम)
“गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए” – यह प्राचीन भारतीय युद्ध – नीति (धर्म – युद्ध) का संकेत है। भारतीय परंपरा में ‘शरण आए हुए’ या ‘घायल’ शत्रु पर प्रहार करना कायरता माना गया है। यह मूल्य सिखाता है कि वीरता केवल शत्रु को हराने में नहीं है, बल्कि जीत के बाद भी अपनी मानवता और दया को जीवित रखने में है।
हीरा और मोती केवल दो बैल नहीं हैं, बल्कि वे “भारतीय संस्कारों के वाहक” हैं। उनके माध्यम से मुंशी प्रेमचंद ने यह संदेश दिया है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें अपनी मर्यादा, दया और संस्कार का त्याग नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 3.
“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
पारंपरिक कृषि उपकरण
ये उपकरण मुख्य रूप से मानव श्रम और पशुओं (बैल, ऊँट) की सहायता से चलाए जाते हैं-
- कुदाल – इसका उपयोग मिट्टी को खोदने, उसे ढीला करने और खरपतवार निकालने के लिए किया जाता है।
- खुरपी – यह एक छोटा हाथ का उपकरण है, जिसका उपयोग निराई-गुड़ाई करने और छोटे पौधों को रोपने के लिए किया जाता है।
- हँसिया – फसल पकने के बाद उसकी कटाई के लिए चाँद के आकार वाले इस दाँतेदार औज़ार का उपयोग होता है।
- पाटा – लकड़ी का एक भारी तख्ता जिसे बैलों के पीछे बाँधकर जोती हुई जमीन को समतल किया जाता है ताकि नमी बनी रहे।
- सुआ / बर्मा – बाँस या धातु की नली जिसके ऊपर एक कीप लगी होती है, इसका उपयोग बीज बोने के लिए किया जाता था।
आधुनिक कृषि उपकरण
ये उपकरण ट्रैक्टर या बिजली से चलते हैं और कम समय में अधिक काम करते हैं-
- कल्टीवेटर – ट्रैक्टर के पीछे लगा यह उपकरण मिट्टी को गहराई से जोतने और उसे भुरभुरा बनाने का काम करता है। यह बैलों वाले हल का आधुनिक विकल्प है।
- सीड ड्रिल – यह मशीन बीजों को मिट्टी में निश्चित गहराई और समान दूरी पर बोती है, जिससे बीजों की बर्बादी कम होती है।
- रोटावेटर – यह मिट्टी को बारीक काटने और पलटने का काम करता है, जिससे फसल के अवशेष मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते हैं।
- कंबाइन हार्वेस्टर – यह एक विशाल मशीन है जो फसल की कटाई, मड़ाई और ओसाई तीनों काम एक साथ कर देती है।
- थ्रेशर – कटी हुई फसल से अनाज के दानों को भूसे से अलग करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- ड्रिप सिंचाई तंत्र – पाइपों के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक बूँद-बूँद पानी पहुँचाने की तकनीक, जिससे पानी की बचत होती है।
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर:
भारतीय गाँवों में बैलों की भूमिका
- खेत की जुताई – यद्यपि ट्रैक्टरों का चलन बढ़ा है, लेकिन छोटे किसानों के लिए आज भी बैल ही खेती का मुख्य सहारा हैं। छोटे और उबड़-खाबड़ खेतों में जहाँ मशीनें नहीं पहुँच पातीं, वहाँ बैल आसानी से जुताई कर लेते हैं।
- परिवहन (बैलगाड़ी) – गाँवों में कच्ची सड़कों पर अनाज की बोरियाँ, चारे का गट्टर या अन्य भारी सामान ढोने के लिए बैलगाड़ी सबसे सस्ता और सुलभ साधन है।
- कुएँ से पानी निकालना (रहट) – कई पारंपरिक क्षेत्रों में आज भी ‘रहट’ के माध्यम से सिंचाई की जाती है। इसमें बैल एक पहिये को घुमाते हैं जिससे कुएँ से पानी बाहर आता है।
- फसल की मड़ाई मशीन आने से पहले और आज भी कुछ क्षेत्रों में अनाज की बालियों से दाने अलग करने के लिए उन्हें बैलों के पैरों तले रौंदा जाता है।
- कोल्हू चलाना शुद्ध सरसों का तेल या गन्ने का रस निकालने के लिए पारंपरिक कोल्हू में बैलों का उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि धीमी गति से चलने वाले इस कोल्हू से पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
भारतीय शहरों में बैलों की उपयोगिता
शहरों का स्वरूप बदलने के बावजूद, बैल यहाँ भी कई रूपों में सहायक होते हैं:
- माल ढुलाई – शहरों की तंग गलियों और पुराने बाजारों (जैसे दिल्ली का चाँदनी चौक या बनारस की गलियाँ) में जहाँ बड़े ट्रक या टेंपो नहीं जा सकते, वहाँ आज भी बैलगाड़ियों का उपयोग भारी सामान; जैसे- लोहा, सीमेंट या बोरियाँ पहुँचाने के लिए किया जाता है।
- अपशिष्ट प्रबंधन – कुछ छोटे कस्बों या नगर पालिकाओं में कचरा ढोने वाली ट्रॉलियों को खींचने के लिए बैलों का सहारा लिया जाता है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव – शहरों में निकलने वाली शोभायात्राओं, रथयात्राओं और मेलों में सजे-धजे बैल आकर्षण का केंद्र होते हैं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं।
- जैविक खाद का स्रोत – शहरों के आसपास स्थित डेयरियों और गौशालाओं से प्राप्त बैल का गोबर बागवानी और नर्सरी के लिए उत्तम खाद का स्रोत बनता है।
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अलग-अलग और साथ-साथ
“दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।”
प्रश्न 1.
कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत- धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर:
‘दो बैलों की कथा’ के दोनों नायक हीरा और मोती, एक-दूसरे के पूरक हैं। हालाँकि दोनों में अटूट मित्रता है, लेकिन उनके स्वभाव और व्यक्तित्व में स्पष्ट अंतर है।
हीरा की विशेषताएँ
हीरा एक धैर्यवान और गंभीर स्वभाव का बैल है। उसके चरित्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- सहनशील और धैर्यवान – हीरा बहुत सहनशील है। जब गया उस पर डंडे बरसाता है, तब भी वह शांत रहकर अपमान सह लेता है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
- नीति और मर्यादा का पालन – वह हमेशा सही और गलत के बीच फर्क करता है। उसका मानना है कि हमें अपने ‘धर्म’ और ‘संस्कारों’ का त्याग नहीं करना चाहिए, चाहे सामने वाला कितना भी बुरा क्यों न हो।
- स्त्री जाति का सम्मान – वह मोती को भी यही सीख देता है कि ” औस्त जात पर सींग चलाना मना है।” यह उसके उच्च नैतिक मूल्यों को दर्शाता है।
- गांधीवादी विचारधारा – हीरा का चरित्र अहिंसा, शांति और सूझबूझ का प्रतीक है। वह शक्ति के बजाय बुद्धि से काम लेने में विश्वास रखता है।
- त्याग की भावना – काँजीहौस में जब वह खुद बँधा हुआ था, तो उसने मोती को भाग जाने के लिए कहा ताकि कम से कम एक की जान तो बच सके।
मोती की विशेषताएँ
मोती एक उत्साही, पराक्रमी और विद्रोही स्वभाव का बैल है। उसके चरित्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- क्रोधी और आक्रामक – मोती अन्याय को देखकर तुरंत भड़क उठता है। वह चुपचाप दुख सहने के बजाय उसका विरोध करना जानता है। वह कहता है- “ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए।”
- विद्रोही स्वभाव – गया के यहाँ जब उन्हें रूखा-सूखा भूसा मिलता है, तो मोती हल लेकर भागने और गया को सबक सिखाने की योजना बनाता है। वह गुलामी को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करता।
- शक्ति और वीरता – साँड़ से मुकाबले के समय मोती ने ही अंत में उसे रगड़-रगड़कर बेदम कर दिया था । वह युद्ध में पीछे हटने वालों में से नहीं है।
- मित्रता के प्रति अटूट निष्ठा – वह हीरा के बिना एक पल भी नहीं रह सकता। काँजीहौस में जब हीरा बँधा था और मोती आज़ाद था, तब भी वह अपने मित्र को संकट में छोड़कर अकेला नहीं भागा।
- क्रांतिकारी विचारधारा – मोती का चरित्र उस भारतीय युवा क्रांतिकारी की याद दिलाता है जो अपनी आज़ादी के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार रहता है।
प्रश्न 2.
हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर:
हीरा और मोती का स्वभाव ‘संतुलन’ बनाता है। जब मोती गुस्से में आकर कुछ गलत करना (जैसे गाड़ी गिराना) चाहता है, तो हीरा का धैर्य उसे सँभाल लेता है। वहीं जब हीरा संकट (जैसे काँजीहौस में बँधा होना) में होता है, तो मोती का साहस और विद्रोह उन्हें रास्ता दिखाता है। एक ‘बुद्धि’ (हीरा) है तो दूसरा ‘शक्ति’ (मोती)। इन दोनों का मेल ही उन्हें हर बाधा को पार करने में सफल बनाता है।
प्रश्न 3.
आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
(संकेत- क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
प्रश्न 4.
“दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक- भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक – भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर:
मेरा अनुमान है कि वे अपनी आँखों के संकेत करके, कानों को फड़फड़ाकर, लंबी साँसें लेकर और शरीर को एक-दूसरे से रगड़कर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते होंगे। आँखों की नमी से दुख और पूँछ हिलाकर प्रेम का आदान-प्रदान करते होंगे।
प्रश्न 5.
आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
यहाँ कुछ स्थितियाँ दी गई हैं जब हम बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं-
- अकसर जब शिक्षक पढ़ा रहे होते हैं, तब किसी प्रश्न का उत्तर न आने पर मित्र की ओर देखकर ‘कंधे उचका देना’ या केवल आँखों के इशारे से उसे नोटबुक दिखाने के लिए कहना।
- क्रिकेट खेलते समय रन लेने के लिए जोर से बोलने के बजाय केवल “सिर हिलाना या हाथ से इशारा करना”। फुटबॉल में गेंद पास करने के लिए आँखों से इशारा करना।
- कभी-कभी मेहमानों के सामने या किसी गंभीर चर्चा के दौरान माता-पिता द्वारा आँखें दिखाने (घूरने) पर चुप हो जाना।
- किसी दुखी मित्र के कंधे पर हाथ रखना या उसे गले लगाना।
मार्ग खोजेंगे कैसे?
“सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा । जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”
प्रश्न 1.
हीरा मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अनुभव से उत्तर देंगे।
प्रश्न 2.
यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए । कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
(संकेत- ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोडों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर:
विद्यार्थी दिए गए संकेत पढ़कर उत्तर देंगे।
प्रश्न 3.
आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने विद्यालय के नक्शे को देखकर स्वयं करें।
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सृजन
प्रश्न 1.
हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
• “आज का दिन…” से आरंभ करें।
• भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)।
• अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत – “आज हमें कॉंजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।”)
उत्तर:
काँजीहाउस
दिनांक : 15 मार्च, 19XX
समय : रात्रि 10 बजे
आज का दिन हमारे जीवन का सबसे अंधकारमय दिन रहा। जब हम उस मटर के खेत में पकड़े गए, तो हमें रस्सियों से जकड़कर इस कालकोठरी ‘काँजीहौस’ में डाल दिया गया। यहाँ की दीवारें ठंडी और बेजान हैं। यहाँ हमारे अलावा कई और बेजुबान घोड़े, गधे, बकरियाँ कई दिनों से कैद हैं। भूख से पेट जल रहा है। सुबह से सूखे तिनके का एक अंश भी हमें नसीब नहीं हुआ। हमें गुस्सा आता है, पर उससे ज्यादा दर्द इस बात का है कि झूरी का वह स्नेहपूर्ण स्पर्श हमसे छीन लिया गया।
पर हमने हार नहीं मानी है। शरीर भले ही भूख से कमज़ोर हो गया हो, पर मन में विश्वास है कि यह रात भी बीत जाएगी। झूरी जरूर हमें वापस ले जाएगा और हम फिर से झूरी के हरे खेतों में दौड़ेंगे।
शुभ रात्रि
हीरा / मोती
प्रश्न 2.
आज के समाचार
मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें-
• शीर्षक दें।
• घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
• परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।
(संकेत – शीर्षक ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ’)
उत्तर:
शीर्षक : दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ कल देर रात स्थानीय काँजीहौस में एक अभूतपूर्व घटना घटी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो लावारिस बताए जाने वाले बैलों ने अपनी काँजीहौस की कच्ची दीवार को सींगों से मार-मारकर गिरा दिया।
दीवार गिरने के बाद वहाँ बंद दर्जनों जानवर आज़ाद होकर भाग निकले। चौकीदार के रोकने के बावजूद दोनों बैल टस से मस नहीं हुए और अंत तक संघर्ष करते रहे। सुबह होने तक वे दोनों बैल वहाँ से गायब थे।
इस घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। जहाँ काँजीहौस प्रशासन अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर शर्मिंदा है, वहीं गाँव के पशु-प्रेमियों में इन बैलों के प्रति भारी सम्मान देखा जा रहा है। लोग इसे पशुओं का ‘विद्रोह’ कह रहे हैं। फिलहाल बैलों का कोई पता नहीं चला है, पर उनकी इस बहादुरी की चर्चा हर जुबान पर है।
प्रश्न 3.
कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें-
• बैलों की नई जगह।
• झूरी की स्थिति।
(संकेत- “हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।”)
उत्तर:
दिए गए संकेतों के आधार पर कहानी का वैकल्पिक अंत कुछ इस प्रकार हो सकता है-
काँजीहौस से छूटने के बाद, दढ़ियल व्यापारी से बचकर भागते हुए हीरा और मोती रास्ता भटक गए। वे झूरी के घर की दिशा भूलकर एक दूर-दराज के गाँव में पहुँच गए। वहाँ उनकी मुलाकात एक “वृद्ध और निर्धन किसान” से हुई, जो अपने खेत के बाहर बैठा उदास था क्योंकि उसके पास खेती के लिए अब कोई सहारा नहीं बचा था।
बूढ़े किसान ने जब इन थके-हारे और भूखे बैलों को देखा, तो उसके मन में दया जाग उठी। उसने अपने हिस्से की रोटी और थोड़ा-सा चारा उन्हें खिला दिया। हीरा और मोती, जो अब तक केवल क्रूरता और स्वार्थ देख चुके थे, इस निस्वार्थ प्रेम से भावुक हो गए। उन्होंने तय किया कि अब वे इसी बूढ़े किसान का सहारा बनेंगे।
हीरा और मोती ने फिर से जी-जान लगाकर उस किसान के बंजर खेत को अपनी मेहनत से सींचना शुरू किया। बूढ़ा किसान उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करता था। अब उन पर न तो गया के डंडे की मार थी और न ही भूखा रहने का दुख । उस छोटे से घर में असीम शांति थी।
उधर झूरी आज भी अपनी दहलीज पर खड़ा होकर रोज़ शाम को अपने बैलों का इंतज़ार करता। उसकी आँखों में पछतावा था कि उसने उन्हें गया के साथ क्यों भेजा। लेकिन हीरा और मोती, जो अब एक बूढ़े बेसहारा इंसान का जीवन सँवार रहे थे, कभी वापस नहीं आए। उन्होंने प्रेम के एक नए बंधन को स्वीकार कर लिया था।
प्रश्न 4.
चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए । प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
• हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
• दृश्य का क्रम- बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।
(संकेत – चित्र 4: “अब हम आजाद हैं।”)

उत्तर:

चित्र 1 – संवाद
मोती- “भैया हीरा! यहाँ तो चारा-पानी का कोई नामोनिशान नहीं है। हम बेजुबानों को भूखा-प्यासा बंद कर दिया गया है। यह घोर अन्याय है!”
हीरा – “हाँ, हमें यहाँ से निकलने का रास्ता ढूँढ़ना होगा।”
घटनाक्रम : जब मटर के खेत में पकड़े जाने के बाद हीरा और मोती को ‘काँजीहौस’ में बंद कर दिया जाता है।
चित्र 2 – संवाद
मोती- “हीरा, अगर हम यहाँ रुके रहे, तो भूख से मर जाएँगे। क्यों न हम अपनी सारी ताकत लगाकर इस कच्ची दीवार को गिरा दें और यहाँ से भाग निकलें?”
हीरा- “हाँ, अगर हम जोर लगाएँ तो इसे तोड़ सकते हैं।”
घटनाक्रमः जब भूख और प्यास से तड़पते हुए हीरा और मोती काँजीहौस से भागने की योजना बनाते हैं।
चित्र 3 – संवाद
हीरा – “हाँ मोती, यह सही समय है! मैं सींग मारता हूँ, तुम भी धक्का दो।… यह देखो! दीवार कमज़ोर है, यह गिर रही है! और जोर लगाओ!”
मोती- “आज हम इस बंधन को तोड़ देंगे!”
घटनाक्रम – दोनों बैल मिलकर अपनी पूरी शक्ति से दीवार पर प्रहार करते हैं। कुछ ही प्रयासों में दीवार गिर जाती है।
चित्र 4 – संवाद
मोती: “देखो, हम बाहर आ गए!”
हीरा: “अब हम आजाद हैं। बाकी सब भी भाग निकले। चलो मोती, अब हम अपने घर वापस चलेंगे।”
घटनाक्रम : दीवार गिरने के बाद, काँजीहौस में बंद सभी जानवर एक-एक करके भाग निकलते हैं। हीरा और मोती भी अपनी आज़ादी का आनंद लेते हैं।
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भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
मेरे शब्द
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने समझ से शब्द चुनकर अर्थ लिखें।
भाषा गढ़ते मुहावरे
“लोग आ आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।”
‘मन फीका करना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी खट्टा होना आदि । ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में कई मुहावरे हैं जिनसे यह कहानी जीवंत हो गई है। ऐसी भाषा को ही मुहावरेदार भाषा कहा जाता है।
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
उत्तर:
1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
वाक्य – पहाड़ की ऊँची चढ़ाई चढ़ने में पर्वतारोहियों को दाँतों पसीना आ गया।
2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
वाक्य – अचानक सामने शेर को देखकर शिकारी का दिल काँप उठा।
3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
वाक्य – पड़ोसी की नई गाड़ी देखकर वह जल उठी।
4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
वाक्य – जब छोटे भाई ने बड़े भाई का अपमान किया, तो वह ऐंठकर रह गया।
5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”
वाक्य – माँ ने कहा कि गृहकार्य न करने पर आज वह राहुल की अच्छी खबर लेंगी।
6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
वाक्य – संवेदनशील इंसान दूसरों की कड़वी बातें सुनकर अकसर गम खा जाता है।
7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
वाक्य – भारतीय सेना सीमा पर घात लगाए दुश्मनों को ईंट का जवाब पत्थर से देना जानती है।
8. “तो फिर वहीं मरो बंदा तो नौ दो ग्यारह होता है।”
वाक्य – पुलिस को आते देखकर चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
प्रश्न 1.
कविता (गीत) और अभिनंदन – पत्र
“बाल – सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।”
(क) मान लीजिए कि बाल सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।

उत्तर:
गीत
“आए हैं दो वीर यहाँ, संकट के रखवाले,
हीरा – मोती नाम हैं इनके साहस के मतवाले।
गया की लाठी सह ली इन्होंने, रस्सी को भी तोड़ दिया,
आज़ादी की खातिर देखो, काँजीहौस को फोड़ दिया।
मानव से बढ़कर है रिश्ता, पशुता को धिक्कारा है,
इन दोनों वीरों ने मिलकर हम सबको ललकारा है।”
(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
उत्तर:
अभिनंदन-पत्र
पशुवीर हीरा और मोती,
प्रिय साथियो, आपकी अटूट मित्रता, साहस और स्वाभिमान ने हम सभी को प्रभावित किया है। अत्याचार के विरुद्ध आपकी एकजुटता और अपने मालिक ‘झूरी’ के प्रति आपकी वफादारी वंदनीय है। आप मात्र पशु नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। आपकी घर वापसी पर समस्त बाल – सभा आपका हार्दिक अभिनंदन करती है।
आपके प्रशंसक
बाल सभा के समस्त सदस्य
प्रश्न 2.
बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपको बाल सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- ‘पशुओं के अधिकार’ अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आदरणीय शिक्षकगण और मेरे सहपाठियो,
आज मैं ‘पशुओं के अधिकार’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करना चाहता/चाहती हूँ। पशु भी हमारे जैसे जीव हैं, उन्हें भी सुख और दुख का अनुभव होता है। हमें उनके साथ दया और प्रेम का व्यवहार करना चाहिए।
वे बोल नहीं सकते, इसका अर्थ यह नहीं कि उनमें भावनाएँ नहीं होतीं। उन्हें पर्याप्त भोजन, प्रेम और स्वतंत्रता का अधिकार है। किसी भी पशु को भूखा रखना या उसे निर्दयता से मारना मानवता के विरुद्ध है। हमें उनके प्रति संवेदनशील बनना चाहिए, जैसा कि झूरी अपने बैलों के प्रति था। धन्यवाद।
प्रश्न 3.
शीर्षक
इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
भाग 1: गया का अन्याय और पलायन
भाग 2: नई जगह नया संघर्ष
भाग 3: काँजीहौस के जेल और साहस
भाग 4: रास्ते की मुश्किलें
भाग 5: घर वापसी और खुशी
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी
उत्तर:
1. हीरा
एक रत्न का नाम हूँ मैं, पर झूरी का हूँ प्यारा,
मोती के संग मिलकर मैंने शत्रुओं को मारा।
2. झूरी
बैलों से करता बहुत प्यार, किसान है सीधा-सादा यार।
जिसके घर लौटे दो वीर बताओ उसका नाम अधीर?
3. मोती
गुस्सा मेरी नाक पर रहता, अड़ियल मेरी चाल,
काँजी हौस की दीवार तोड़कर मैंने किया कमाल।
4. गया
रिश्ते में मैं साला लगता, घर मेरा है दूर,
दोनों बैलों ने रस्ते में, चकनाचूर किया मेरा गुरूर।
5. बैल
खेती का मैं मुख्य आधार, हल खींचना मेरा काम,
गया ने मुझको बहुत सताया, झूरी के घर मिला आराम।
6. मटर
हरे रंग की फली हूँ मैं, दाने मेरे गोल-मटोल,
हीरा-मोती ने खाया मुझको, खेत में मच गया शोर।
7. रस्सी
बाँधने के आती हूँ काम पतली लंबी मेरी शान।
कभी पशु, कभी सामान, बताओ मेरा क्या है नाम?
8. रोटी
आटे से मैं जन्मी हूँ, तवे पर मैं नाची हूँ।
घी लगे तो बनूँ स्वादिष्ट, बताओ मैं कौन विशेष?
भाषा संगम
“कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”
नीचे ‘बैल’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
बैल (हिंदी); वृषभ: (संस्कृत); बओलद, बल्द (पंजाबी); बैल (उर्दू); दोंद (कश्मीरी); ढ़गो (सिंधी); बैल (मराठी); बळद (गुजराती); बैल (कोंकणी); गोरु (नेपाली); बलद (बांग्ला); षाँड़, बलध (असमिया); शन लाबा (मणिपुरी); बलद (ओड़िआ); एंददु (तेलुगु); एरिदु/काळैमाहु (तमिल); काळ (मलयालम); एत्तु (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बैल’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर:
अन्य कोई नहीं।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए ।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
हरियाणवी – कदै कदै अड़ियल बलद भी देखण में आ ज्य सै।
सिरायकी – कडी कडी अड़ियल बैल वी डिक्खण कूँ मेल वेंदे।
खोजबीन
• दो बैलों की कथा
• कथा सम्राट प्रेमचंद्र
https://www.youtube.com/watch?v-3314rJcclul&ab channel – NCERTOFFICIAL
• प्रेमचंद का बचपन और बच्चों की कहानियाँ
https://www.youtube.com/watch?v-bg0MzrE36Dg&t-187s&ab_channel NCERTOFFICIAL