Reading Class 8 Hindi Notes Malhar Chapter 8 नए मेहमान Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
नए मेहमान Class 8 Summary in Hindi
नए मेहमान Class 8 Hindi Summary
नए मेहमान का सारांश – नए मेहमान Class 8 Summary in Hindi
उदयशंकर भट्ट द्वारा रचित ‘नए मेहमान’ एकांकी शहरी जीवन की समस्याओं, विशेष रूप से अत्यधिक गरमी और अनचाहे मेहमानों के कारण उत्पन्न होने वाली असुविधाओं का यथार्थवादी चित्रण करती है। यह एक मध्यमवर्गीय परिवार के गृहस्थ विश्वनाथ और उनकी पत्नी रेवती के संघर्षों को दर्शाती है। एकांकी की शुरुआत में विश्वनाथ और रेवती अत्यधिक गरमी से परेशान दिखाई देते हैं।
उनका छोटा-सा घर, जिसमें गरमी से बचाव के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है, उनके लिए एक जेलखाने जैसा बन गया है। रेवती गरमी के कारण लगातार सिर दर्द और शरीर में पीड़ा की शिकायत करती रहती है। गरमी के कारण उनके बच्चे भी परेशान हैं। उनके पड़ोसी अपने घर की छत पर चारपाई नहीं बिछाने देते तथा बेवजह उनसे झगड़ते रहते हैं।

गरमी इतनी भयंकर पड़ रही है कि घर और छत की दीवारें तक तप रही हैं। ऐसे में घर में सोना भी दूभर हो गया है। अपनी आर्थिक स्थिति और अन्य मजबूरियों के कारण वे सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। इसी बीच दो अनचाहे मेहमान – नन्हेमल और बाबूलाल अचानक विश्वनाथ के घर आ पहुँचते हैं। वे दोनों गाँव से आए हैं और शहर में कविराज रामलाल व्यक्ति की तलाश में हैं।
वे बेहद थके हुए, पसीने से लथपथ और भूखे हैं। वे अपने साथ एक बिस्तर तथा एक संदूक भी लाए हैं। इन मेहमानों के आने से विश्वनाथ और रेवती की चिंताएँ और बढ़ जाती हैं। पहले से ही गरमी और असुविधाओं से जूझ रहे इस परिवार के लिए दो अतिरिक्त लोगों का भार उठाना मुश्किल हो जाता है। रेवती मन-ही-मन परेशान होती है कि इस गरमी में अब इन मेहमानों की देखभाल कैसे होगी घर में पर्याप्त खाटें नहीं हैं और सोने की जगह की भी समस्या हैं। रेवती को अपने बच्चों के सोने की जगह की भी चिंता है।

मेहमान उनकी स्थिति से अनजान हैं। वे उसकी अनदेखी करते हुए, पहले तो पानी माँगते हैं और फिर खाना । वे बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जरूरतें बताते हैं । विश्वनाथ और रेवती दोनों ही मन-ही-म – मन उनकी आवभगत को लेकर चिंतित हैं। मेहमानों के आने से घर का माहौल और भी तनावपूर्ण हो जाता है। विश्वनाथ उनसे बातचीत कर पता लगाते हैं कि वे गलत घर में आ गए हैं।
उन्हें कविराज रामलाल वैद्य के घर जाना था। तब जाकर विश्वनाथ और उसकी पत्नी की जान में जान आती है। प्रमोद उन मेहमानों को सही व्यक्ति के घर छोड़ने चला जाता है। इतने में रेवती का भाई उनके घर आ जाता है, जिन्हें देखकर वह बहुत खुश होती है। वह अपनी चिंताएँ भुलाकर उसकी आवभगत में लग जाती है। उसके लिए भोजन बनाने की तैयारी करने लगती है।
एकांकी यह दर्शाती है कि कैसे शहरी जीवन में, जहाँ स्थान और संसाधनों की कमी होती है, अनचाहे मेहमानों का आगमन सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर देता है। यह एकांकी मध्यमवर्गीय परिवारों की विवशताओं, सहनशीलता और अतिथि सत्कार की परंपरा के साथ-साथ आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को बखूबी उजागर करती है।

शब्दार्थ
पृष्ठ संख्या – 105:
एकांकी – एक अंक वाला नाटक, एक ही घटना या स्थिति पर आधारित छोटा नाट्य-रूप।
तट – आर्द्र, गीला ।
खूँटी – दीवार में गड़ी कपड़े आदि टाँगने की कील।
पृष्ठ संख्या – 106 :
भट्टी – बहुत गरम जगह (यहाँ मकान को भट्टी कहा गया है) ।
निर्दयी – जिसमें दया न हो।
खाट – चारपाई।
अतिथि – मेहमान |
पृष्ठ संख्या-107:
संपन्न – सुविधाओं से पूर्ण ।
टाइफाइड – एक तरह का बुखार ।
चल बसी – मृत्यु हो गई।
पृष्ठ संख्या-108:
गरमी में भुनना – तेज़ गरमी के कारण बहुत अधिक परेशान हो जाना या झुलस जाना ।
तपना – बहुत ज़्यादा गरम हो जाना ।
धुन सवार होना – एक बात के पीछे पड़ जाना ।
पगड़ी – सिर पर बाँधे जाने वाली कपड़े की पट्टी ।
बंडी – कुरते के ऊपर पहनने वाला बिना बाजू का पारंपरिक वस्त्र ।
अधकटी – आधा कटी।
पृष्ठ संख्या-109:
आना – पुराने ज़माने की मुद्रा ।
गज – माप की इकाई ।
चौपट – समाप्त ।
संदूक – बड़ा बक्सा या डिब्बा।
पृष्ठ संख्या – 110:
तारीफ – प्रशंसा ।
तकलीफ – परेशानी ।
प्रबंध – इंतज़ार/व्यवस्था।
पृष्ठ संख्या-111:
स्नान – नहाना ।
प्रवेश – आगमन ।
हाथ-पैर सुन्न हो जाना – महसूस करने की क्षमता कम हो जाना ।
भाड़ में भुनना – बहुत अधिक कष्ट सहना ।

पृष्ठ संख्या-114:
हर्ज़ – परेशानी ।
प्रेस – छापाखाना (जहाँ अखबार छापे जाते हैं) ।
मिल – कारखाना ।
पृष्ठ संख्या – 115:
धर्मशाला – यात्रियों के लिए ठहरने का स्थान ।
वैद्य – चिकित्सक ।
तार – समाचार भेजने की एक पुरानी युक्ति ।