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NCERT Class 8th Hindi Chapter 8 नए मेहमान Question Answer
नए मेहमान Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 8 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi नए मेहमान Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
आइए, अब हम इस एकांकी को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भ हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?
- अतिथियों की सेवा करने के कारण
- किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
- आज्ञाकारिता के भाव के कारण
- गरमी को चुपचाप सहने के कारण
उत्तर:
- अतिथियों की सेवा करने के कारण
- आज्ञाकारिता के भाव के कारण
प्रश्न 2.
“एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी… ” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
- उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
- पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
- लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
- अतिथियों का अपमान करते हैं।
उत्तर:
- उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
- पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
- लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं

प्रश्न 3.
“ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
- मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
- रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
- अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
- उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
उत्तर:
- मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
- रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
- अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
प्रश्न 4.
“हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए ।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है ?
- पानी की कमी होने की
- पड़ोसियों के चिल्लाने की
- मेहमानों के आने की
- गरमी के कारण बीमारी की
उत्तर:
- मेहमानों के आने की

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प्रश्न 5.
इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
- संवाद
- कथा
- वर्णन
- मंचन
उत्तर:
- संवाद
- मंचन

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
- मेरे द्वारा इन विकल्पों का चयन करने का कारण यह है कि विश्वनाथ के बच्चे आज्ञाकारी हैं तथा अतिथियों की सेवा करते हैं, उन्हें ठंडा पानी पिलाते हैं, इसलिए मेहमानों ने उन्हें सीधे लड़के कहा था।
- मेरे द्वारा इन विकल्पों का चयन करने का कारण यह है कि विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं, उन्हें कष्ट में देखकर खुश होते हैं और अकसर लड़ने-झगड़ने का मौका ढूँढ़ते रहते हैं। इसलिए विश्वनाथ ने उन्हें निर्दयी भी कहा है।
- मेरे द्वारा इन विकल्पों का चयन करने का कारण यह है कि रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक नहीं चल रहा था। मेहमानों के आने से घर का काम भी बढ़ जाता था। साथ ही मेहमानों के ठहरने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी । इसलिए रेवती ईश्वर से कामना कर रही है कि इन दिनों कोई मेहमान न आए। यदि मेहमान आएँगे, तो उन्हें असुविधा होगी।
- मेरे द्वारा इस विकल्प का चयन करने का कारण यह है। कि रेवती मेहमानों के आने को मुसीबत मानती है, क्योंकि गरमी अधिक है और सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में मेहमान उसे मुसीबत लगते हैं।
- मेरे द्वारा इन विकल्पों का चयन करने का कारण यह है कि संवाद और मंचन ही ऐसे तत्व हैं, जो किसी रचना को नाटक या एकांकी का रूप देते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए ।
- “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
- “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो ।”
- “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं ।”
- “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है ।”
उत्तर:
- काफी गरमी पड़ रही है। इस कारण शरीर में पानी की कमी हो रही है और बार- बार प्यास लग रही है। प्यास बुझाने के लिए विश्वनाथ बार-बार पानी पी रहा है। इससे उसका पेट पानी भरने से फूलता जा रहा है, मगर उसकी प्यास नहीं बुझ पा रही है। गरमी की अधिकता के कारण उसे बार- बार प्यास लग रही है।
- काफी गरमी पड़ रही है। विश्वनाथ का घर छोटा है। उसके पास गरमी से राहत देने वाली संतोषजनक चीजें नहीं हैं। उसके पास पानी की भी अच्छी सुविधा नहीं है। इस कारण उसको काफी गरमी लग रही है तथा उसे ऐसा लग रहा है, मानो सारे शहर में आग बरस रही हो।
- विश्वनाथ की पत्नी रेवती अपने घर की स्थिति से असंतुष्ट है। गरमी से राहत देने के लिए उनके यहाँ ढंग से चलने वाला बिजली का एक पंखा तक नहीं है। पीने के लिए ठंडा पानी भी नहीं मिल पाता है। घर की दीवारें भट्टी की तरह जल रही हैं। घर की छत पर खुले में सोने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। घर में पानी की भी कमी है। इस स्थिति में वह अपने को भाड़ में भुने जा रहे चने की तरह समझ रही है। इस स्थिति में वह अपने-आप को बड़ी भाग्यहीन मान रही है।
- विश्वनाथ के घर रात में दो मेहमान आए हैं। उनमें चाचा-भतीजे का रिश्ता है । वे बड़ी कठिनाई से वहाँ पहुँचे हैं तथा गरमी से परेशान हैं। उन्हें बड़े ज़ोर की प्यास लगी है। उन्हें बरफ का पानी दिया जाता है। दोनों पानी पीते हैं। उन्हें गरमी से थोड़ी राहत मिलती है। उनकी जान में जान आती है। चाचा नन्हेमल प्रस्तुत बात कहता है। उसके अनुसार गरमी में पानी ही तो जान है और यह बात सत्य भी है।
मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए-

उत्तर:
1. – 3
2. – 4
3. – 5
4. – 1
5. – 2
सोच-विचार के लिए

एकांकी को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं। ” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
उत्तर:
नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से आशय शहर के उन मकानों-से है, जिनमें बमुश्किल 2-3 कमरे, एक छोटी छत तथा एक आँगन होता है। ऐसे ही मकानों में शहर की ज़्यादातर जनसंख्या रहती है। ऐसे मकान गाँव के मकानों की तुलना में काफ़ी छोटे होते हैं। ऐसे मकान शहर (बड़े शहर) की शोचनीय तथा दयनीय स्थिति को दर्शाते हैं। ऐसे मकान गाँव या छोटे कस्बों के लोगों के लिए अजूबे की तरह होते हैं।

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(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार में पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
उत्तर:
पड़ोसी को विश्वनाथ से इस बात की शिकायत है कि उनके यहाँ हमेशा मेहमान आते रहते हैं तथा उसके घर पर गंदा पानी फैला देते हैं। उसकी खाट का उपयोग करने लगते हैं। इन मेहमानों पर विश्वनाथ का कोई नियंत्रण नहीं है। वे उन्हें ऐसा करने से रोक नहीं पाते हैं। मेहमानों द्वारा गलती करने पर वे केवल क्षमा माँगते हैं। इस क्षमा याचना से पड़ोसी उब-सा गया है। वह उनके मेहमानों से परेशान है।
मेरे विचार से पड़ोसी का ऐसा व्यवहार अनुचित है। मेरे विचार से उसे विश्वनाथ की मदद करनी चाहिए। उसे मेहमानों द्वारा अनजाने में की गई बातों को महत्व नहीं देना चाहिए। उसे विश्वनाथ से झगड़ा नहीं करना चाहिए।
उसे मेहमानों को कुछ गलत करने पर प्यार से समझाना चाहिए। उसे मेहमानों को अपनी अतिरिक्त खाट सोने के लिए देनी चाहिए और उसे मेहमानों के आने का बुरा नहीं मानना चाहिए। उसे विश्वनाथ के मेहमानों को भी अपने मेहमानों जैसा मानना चाहिए। उसे विश्वनाथ को क्षमा माँगने का मौका ही नहीं देना चाहिए। ऐसा करके ही वह एक अच्छे पड़ोसी का धर्म निभा पाएगा।
(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर:
यहाँ विश्वनाथ के मन में यह विचार होगा कि घर के दरवाज़े पर आया हुआ कोई भी अपरिचित अतिथि के समान होता है। पहले उसका स्वागत-सत्कार करना चाहिए, फिर और कुछ करना चाहिए। हो सकता है कि विश्वनाथ को लगा हो कि वे मेरे ही अतिथि हैं, जो काफ़ी दिनों बाद आए हैं, जिन्हें वह एकाएक पहचान नहीं पा रहा है। वह बातचीत करके उन्हें आराम से पहचान लेगा। वह उन्हें पहले घर के अंदर ले जाकर उनका यथोचित स्वागत-सत्कार करना चाहता है। इसलिए नन्हेमल तथा बाबूलाल को नहीं जानते हुए भी उन्हें घर में आने देता है।
(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर:
इनका उत्तर विद्यार्थी एकांकी को पुनः पढ़कर स्वयं देने की कोशिश करें।
(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए, जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर:
विद्यार्थी एकांकी से ऐसे वाक्य खुद ढूँढ़कर लिखें।

अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाज़ार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
उत्तर:
यह एकांकी जिस कालखंड को प्रस्तुत कर रही है। उस काल में परिवार में खाना आदि बनाने का काम प्रायः घर की औरतें ही किया करती थीं । विश्वनाथ के घर में स्त्री के रूप में उसकी पत्नी तथा बेटी थीं। बेटी छोटी थी, जो खाना नहीं बना सकती थी।
अब इस काम के लिए बची उसकी पत्नी, जो अस्वस्थ थी । इसलिए विश्वनाथ ने खाना न बना पाने की स्थिति में अपनी पत्नी को बाज़ार से भोजन मँगाने का सुझाव दिया। उसने सामाजिक चलन के अनुसार खाना स्वयं बनाने के बारे में नहीं सोचा, बल्कि इसकी सारी ज़िम्मेदारी पत्नी पर डाल दी।
(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर:
अपने छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखना तथा अतिथियों की ज़रूरतों का ख्याल रखना अच्छे संस्कार के अंतर्गत आता है। यह संस्कार विश्वनाथ ने अपने बच्चों में डाला था। इसी कारण प्रमोद अपनी छोटी बहन तथा अतिथियों की ज़रूरतों का ध्यान रखता है तथा उनकी सेवा करता है। वह अपना उत्तरदायित्व सही से निभाता है।
(ग) “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?
उत्तर:
विश्वनाथ की पत्नी रेवती भीषण गरमी और सिर दर्द के बावजूद आगंतुक के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए तैयार हो गई, क्योंकि वह (आगंतुक) उसका अपना भाई था, जबकि पूर्व के दोनों अतिथि उसके अपने कुछ भी नहीं लगते थे। इसलिए उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए वह तैयार नहीं हुई ।
(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए-

उत्तर:
| सर्दी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ | वर्षा की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ |
| 2. पर चाय भी कोई कहाँ तक पिए। | 2. पर चाय-पकौड़े कोई कहाँ तक खाए। |
| 3. सारे शहर को जैसे पाला मार रहा हो। | 3. सारा शहर जैसे डूब-सा रहा हो। |
| 4. ठंड है कि जाने का नाम नहीं लेती। | 4. वर्षा है कि रुकने का नाम नहीं लेती। |
| 5. चारों तरफ़ दीवारें बरफ़ – सी हो रही हैं। | 5. चारों तरफ़ दीवारें तर-बतर हो रही हैं। |
| 6. गरमा-गरम चाय पिलाओ दोस्त, ठंड से बुरा हाल हो रहा है। | 6. गरमा-गरम चाय पिलाओ दोस्त, भीगने से बुरा हाल हो रहा है। |
| 7. सचमुच सर्दी में चाय-कॉफी ही तो जान है। | 7. सचमुच बरसात में चाय-कॉफी ही तो जान है। |
| 8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि बरफ़ की तरह जमते रहते हैं। | 8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि छतरी की तरह भीगते रहते हैं। |
| 9. फिर भी ठंड से थर-थर काँप रहा हूँ। | 9. फिर भी पानी में भीग कर थर-थर काँप रहा हूँ। |
एकांकी की रचना

इस एकांकी के आरंभ में पात्र – परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि—
- “गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय। कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…”
- विश्वनाथ— उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है। मकान है कि भट्टी!
(पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है) - रेवती— (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।
एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच-निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।
एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)
(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषतओं की सूची बनाइए ।
उत्तर:
- संवाद प्रधान रचना – यह एकांकी पूरी तरह संवाद (डायलॉग्स) पर आधारित है, जिसमें पात्रों के बीच की बातचीत से कहानी आगे बढ़ती है।
- सामाजिक व्यंग्य – इसमें सामाजिक रूढ़ियों, लोगों के व्यवहार और शिष्टाचार की कड़वी हकीकतों पर व्यंग्य किया गया है।
- मध्यमवर्गीय जीवन का चित्रण – एकांकी में मध्यमवर्गीय परिवार की समस्या, जीवनशैली और उसकी मानसिक दशा को बखूबी दर्शाया गया है।
- सरल और प्रभावशाली भाषा-भाषा सरल, सहज और संवादात्मक है, जो दर्शक या पाठक को आसानी से समझ में आ जाती है।
- हास्य और गंभीरता का मिश्रण – इसमें हास्य के साथ-साथ गंभीर सामाजिक विषयों को भी उठाया गया है, जो मनोवैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करता है।
- सीमित पात्र और स्थान – एकांकी की खासियत है कि इसमें पात्रों की संख्या कम है और घटना सीमित स्थान में घटती है, जिससे एकाग्रता बनी रहती है।
- जीवंत पात्र-पात्रों की भावनाएँ, संकोच, झुंझलाहट और सामाजिक मर्यादाओं के बीच संघर्ष को सजीव रूप में .. प्रस्तुत किया गया है।
- प्रस्तुति का सहज ढंग – यह एकांकी बिना किसी अतिरिक्त सजावट के सीधे मुद्दे पर केंद्रित है और दर्शकों को सोचने पर मज़बूर करती है।
(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।

उत्तर:
| वाक्य | हाँ / नहीं |
| 1. ‘नए मेहमान’ एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। | हाँ |
| 2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। | नहीं |
| 3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। | हाँ |
| 4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। | नहीं |
| 5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। | नहीं |
| 6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। | हाँ |
| 7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। | हाँ |
अभिनय की बारी
(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है ? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या – क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए – इस एकांकी में आप क्या – क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर:
हाँ, हमने मंच पर अनेक एकांकी या नाटक देखे हैं। अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करने के लिए हम लोग शिक्षकों के मार्गदर्शन में इसकी तैयारी करेंगे। सर्वप्रथम हम लोग पात्रों का चयन करेंगे। उसके बाद एकांकी का पूर्वाभ्यास शुरू कर देंगे। हम एकांकी में दिए गए रंगमंच-निर्देश, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश का पालन करते हुए इस एकांकी का सफल मंचन करेंगे।
हमारे हिसाब से इस एकांकी को और अधिक रोचक बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह पहले से ही काफ़ी रोचक है। इसमें और कुछ जोड़ने की ज़रूरत नहीं है।
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(ख) अब आपको अपने – अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे ( जैसे 10 मिनट या 15 मिनट ।) आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा।
सुझाव-
- आप एकांकी को जैसा दिया गया है, बिलकुल वैसा भी प्रस्तुत कर सकते हैं या इसमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं।
- एकांकी के लिए आस-पास की वस्तुओं का ही उपयोग कर लेना है, जैसे- कुर्सी, मेज़ आदि ।
- स्थान की कमी हो तो अभिनेता बच्चे अपने स्थान पर खड़े-खड़े भी संवाद बोल सकते हैं।
- आप चाहें तो अपने अभिनय को अपने शिक्षक की सहायता से रिकॉर्ड करके उसे अपने परिवार या संबंधियों के साथ साझा भी कर सकते हैं।
उत्तर:
- विद्यार्थी अपने – अपने समूह में दिए गए निर्देशानुसार इस एकांकी को प्रस्तुत करें।
भाषा की बात
“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
“ चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
‘यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुन रहते हैं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
मुहावरे
“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”
“लाखों के आदमी खाक में मिल गए।”

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘ रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए ।
उत्तर:
आग बरसना (सख्त गरमी पड़ना) – मौसम का पूर्वानुमान है कि इस साल मई-जून में आग बरसेगी ।
खाक में मिलना (बरबाद होना) – आग लगने से लाला जी की पूरी दुकान खाक में मिल गई।
जान में जान आना (इतमीनान होना) – ठंडा पानी पीने के बाद लाला जी की जान में जान आई।
बात पर बल देना

“वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा ।”
उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ‘ही’ हटाकर पढ़िए-
‘वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा ”
(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई ?
उत्तर:
विद्यार्थी दो-दो के जोड़े में चर्चा करें।
(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-

“तुमं नहाने तो जाओ।”
उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-
“तुम तो नहाने जाओ।”
“तुम नहाने जाओ तो।”
‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए ।
उत्तर:
- विश्वनाथ के ही अतिथि यहाँ रुकेंगे।
- विश्वनाथ के अतिथि तो यहीं रुकेंगे।
- विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही।
(प्रस्तुत अंश के आधार पर विद्यार्थी ‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके अन्य वाक्य बनाएँ।)

पाठ से आगे
आपकी बात
(क) “ रेवती – ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।
विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठाक उत्तर ही नहीं देते।”
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जब वह दुविधा में होता है। हाँ, मेरे सामने भी कई बार ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है। एक बार मुझे एक प्रोजेक्ट में दो सहकर्मियों के साथ काम करना था, लेकिन उनकी कार्यशैली बहुत अलग थी और एक-दूसरे से मेल नहीं खाती थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं किसका समर्थन करूँ या कैसे उन्हें एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करूँ। मैं दुविधा में था कि क्या मुझे किसी एक का पक्ष लेना चाहिए या एक तटस्थ स्थिति बनाए रखनी चाहिए और उन्हें खुद ही समस्या हल करने देनी चाहिए।
मैंने काफी समय तक सोचा और अंतत: यह तय किया कि सबसे अच्छा तरीका यह है कि मैं दोनों से अलग-अलग बात करूँ, उनकी चिंताओं को समझँ और फिर एक ऐसा समाधान करूँ जो दोनों के लिए स्वीकार्य हो। इस प्रक्रिया में मुझे समय लगा, लेकिन अंततः यह सही साबित हुआ और हम सब मिलकर प्रोजेक्ट पूरा कर पाए ।
(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर:
एकांकी में नन्हेमल और बाबूलाल के बीच की बातचीत और व्यवहार से लगता है कि वे सिर्फ़ संबंधी ही नहीं बल्कि अच्छे दोस्त भी हैं। वे एक-दूसरे का मज़ाक उड़ाते हैं, एक-दूसरे को समझते हैं और मुश्किल में एक-दूसरे का साथ भी देते हैं।
मेरे कई अच्छे मित्र हैं, लेकिन उनमें कुछ खास इस प्रकार हैं- रोहित – वह मेरा सबसे पुराना दोस्त है। हम बचपन के साथी हैं। वह हमेशा मेरे सुख – दुख में मेरे साथ खड़ा रहता है और मुझे सही सलाह देता है। उसकी ईमानदारी और वफ़ादारी मुझे बहुत पसंद है।
प्रिया – वह मेरी कॉलेज की दोस्त है। वह बहुत ही मज़ाकिया और सकारात्मक विचार वाली है। जब भी मैं उदास होती हूँ, वह मुझे हँसा देती है और मेरा मूड ठीक कर देती है । उसकी जीवंतता और उत्साह मुझे प्रिय हैं।
अमित – वह बहुत ही शांत और समझदार है । जब भी मुझे – कोई मुश्किल निर्णय लेना होता है, तो मैं उससे सलाह लेती हूँ। वह हर चीज़ को बहुत तार्किक रूप से देखता है और उसकी सलाह हमेशा मददगार होती है। उसकी बुद्धिमत्ता और धैर्य मुझे बहुत पसंद हैं।
ये सभी मित्र मुझे इसलिए प्रिय हैं, क्योंकि ये मुझे जैसी मैं हूँ, वैसी ही स्वीकार करते हैं, मेरे साथ सच्चे और ईमानदार हैं और हमेशा मेरा समर्थन करते हैं।
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(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर:
जब मैं किसी संबंधी या मित्र के घर जाता हूँ, तो मैं आमतौर पर निम्नलिखित तैयारियाँ करता हूँ-
- समय की पुष्टि – सबसे पहले, मैं उन्हें फ़ोन करके या मैसेज करके यह सुनिश्चित करता हूँ कि उनके लिए मेरा उनके यहाँ जाना सुविधाजनक है या नहीं और मैं किस समय पहुँचूँ।
- उपहार – यदि मेरा उनके यहाँ जाना पहली बार है या कोई अवसर है, तो मैं उनके लिए कोई छोटा-मोटा उपहार ले जाने की सोचता हूँ, जैसे मिठाई, फूल या बच्चों के लिए कुछ खिलौने आदि ।
- यात्रा की योजना – मैं यह पता लगाता हूँ कि उनके घर तक कैसे पहुँचना है-सार्वजनिक परिवहन से, अपनी गाड़ी से या कैब से। मैं रास्ते में लगने वाले समय का अनुमान भी लगाता हूँ।
- व्यक्तिगत सामान- मैं सुनिश्चित करता हूँ कि मैंने अपना फ़ोन, चार्जर, वॉलेट और कोई भी ज़रूरी व्यक्तिगत सामान पैक कर लिया है या नहीं। यदि रात रुकना हो, तो कपड़े और टॉयलेट्रीज़ भी पैक करता हूँ।
- मानसिक तैयारी – मैं यह सोचता हूँ कि उनसे मिलकर किन विषयों पर बात करनी है और उनके साथ समय कैसे बिताना है, ताकि सब कुछ आरामदायक और सुखद रहे।
(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर:
एकांकी में विश्वनाथ के पड़ोसी उनकी समस्या को समझते नहीं हैं और सहयोग करने की बजाय शिकायत करते हैं। यह एक विपरीत स्थिति है।
मैं अपने पड़ोसियों का कई प्रकार से सहयोग करने का प्रयास करता हूँ-
- मदद के लिए उपलब्ध रहना – यदि उन्हें कभी किसी चीज़ की आवश्यकता होती है, जैसे कोई उपकरण उधार लेना हो या किसी चीज़ को उठाने में मदद चाहिए हो, तो मैं हमेशा उपलब्ध रहता हूँ ।
- खुशी और गम में साथ देना- उनके सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहता हूँ। यदि उनके घर में कोई उत्सव हो, तो मैं बधाई देता हूँ और यदि कोई दुखद घटना हो, तो सांत्वना देता हूँ।
- आपसी समझ – यदि कोई शोर या अन्य परेशानी होती है, तो मैं सीधे शिकायत करने की बजाय उनसे बात करने का प्रयास करता हूँ और समाधान ढूँढ़ता हूँ ।
- सामुदायिक कार्य – यदि कॉलोनी में कोई सामूहिक कार्यक्रम या सफ़ाई अभियान होता है, तो मैं उसमें भाग लेता हूँ और सहयोग करता हूँ।
(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार वास्तव में सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। वे बिना बताए आते हैं, खाने-पीने और आराम की इच्छा प्रकट करते हैं और अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करते हैं। यह उन्हें कुछ हद तक बोझिल बना देता है।
मेरे अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार इस प्रकार का होना चाहिए-
- पूर्व सूचना – अतिथियों को हमेशा आने से पहले मेज़बान को सूचित करना चाहिए, ताकि मेज़बान तैयारी कर सके।
- समय की पाबंदी – यदि कोई निश्चित समय दिया गया है, तो उसका पालन करना चाहिए।
- स्वतंत्रता और सुविधा – अतिथियों को मेज़बान की दिनचर्या में अनावश्यक बाधा डाले बिना अपनी सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें यह समझना चाहिए कि मेज़बान के अपने काम और ज़िम्मेदारियाँ भी होती हैं।
- माँग न करना – अतिथियों को मेज़बान से चीज़ों की अनावश्यक माँग नहीं करनी चाहिए। उन्हें जो भी दिया जाए, उसे स्वीकार करना चाहिए।
- शिष्टता और सम्मान – बातचीत में शिष्टाचार बनाए रखना चाहिए और मेज़बान के घर के नियमों का सम्मान करना चाहिए।
सावधानी और सुरक्षा
(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं विश्वनाथ की जगह होता तो पहले नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय पूछता और संतुष्ट होने पर ही उन्हें घर के भीतर लाता ।
(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर:
अपने माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आएगा तो मैं पहले उसका परिचय पूछूंगा । फिर माता-पिता से मोबाइल पर बात करके उस अपरिचित की जानकारी दूँगा, फिर उनके निर्देशानुसार काम करूँगा ।
सृजन

(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए ।
(जैसे – एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए…)
उत्तर:
विद्यार्थी एकांकी में निहित कहानी स्वयं लिखने का प्रयास करें।
गरमी का प्रकोप
“तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है ।”
एकांकी में भीषण गरमी का वर्णन किया गया है। आप गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानी बरतेंगे? पाँच-पाँच में चर्चा करें। मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ और इन्हें व्यवहार में लाएँ । उत्तर – विद्यार्थी गरमी के प्रकोप से बचने के लिए की जाने वाली सावधानियों पर समूह में चर्चा करें। फिर मुख्य बिंदुओं को चार्ट पेपर पर लिखकर बुलेटिन बोर्ड पर लगाएँ तथा उन्हें अपने व्यवहार में लाएँ।
तार से संदेश
“क्या मेरा तार नहीं मिला?”
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।
टेलीग्राफ
किसी भौतिक वस्तु के विनिमय के बिना ही संदेश को दूर तक संप्रेषित करना टेलीग्राफी कहलाता है। विद्यु धारा की सहायता से, पूर्व निर्धारित संकेतों द्वारा, संवाद एवं समाचारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजनेवाला तथा प्राप्त करने वाला यंत्र तारयंत्र (टेलीग्राफ) कहलाता है। वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी अप्रचलित हो गई है।

(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर:
यह एकांकी 2013 से पहले 1898 -1966 के बीच लिखी गई होगी, क्योंकि 2013 में भारत में टेलीग्राफ आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया तथा 1898-1966 एकांकी लेखक का जीवन काल रहा है।
(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर:
आजकल संदेश भेजने के लिए पत्र, समाचार-पत्र, एस. एम. एस., व्हाट्सएप, ई-मेल, टेलीफोन, मोबाइल फोन आदि साधन सुलभ हैं।
(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर:
मैं संदेश भेजने के लिए व्हाट्सएप तथा मोबाइल फोन का सर्वाधिक उपयोग करता हूँ।
(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने किसी प्रिय व्यक्ति को पत्र लिखें तथा उसे भारतीय डाक द्वारा भेजें।
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नाप तौल और मुद्राएँ

“जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।”
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘गज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।

(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर:
एक रुपये में 16 आने होते हैं।
(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर:
चार आने में 25 पैसे होते हैं।
(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
मेरे आस-पास गज शब्द का प्रयोग लंबाई नापने के मापक तथा हाथी के पर्यायवाची के रूप में किया जाता है।
(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं ?
उत्तर:
एक गज में तीन फीट होते हैं।
झरोखे से
कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे । महादेवी वर्मा की पुस्तक पथ के साथी से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा सा अंश पढ़िए-
…… ऐसे अवसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँच कर कहने लगे…… “मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।”
उनके अतिथि यहाँ भोजन करने आ जावें, सुनकर उनकी दृष्टि में बालकों जैसा विस्मय छलक आता है। जो अपना घर समझकर आए हैं, उनसे यह कैसे कहा जाए कि उन्हें भोजन के लिए दूसरे घर जाना होगा।
भोजन बनाने से लेकर जूठे बर्तन माँजने तक का काम वे अपने अतिथि देवता के लिए सहर्ष करते हैं। तैंतीस कोटि देवताओं के देश में इस वर्ग के देवताओं की संख्या कम नहीं, पर आधुनिक युग ने उनकी पूजा विधि में बहुत कुछ सुधार कर लिया है।
अब अतिथि-पूजा के अवसर वैसे कम ही आते हैं और यदि आ भी पड़े तो देवता के और अभिषेक, शृंगार आदि संस्कार बेयरा, नौकर आदि ही संपन्न करा देते हैं। पुजारी गृहपति को तो भोग लगाने की मेज पर उपस्थित रहने भर का कर्तव्य सँभालना पड़ता है। कुछ देवता इस कर्तव्य से भी उसे मुक्ति दे देते हैं।
ऐसे युग में आतिथ्य की दृष्टि से निराला जी में वही पुरातन संस्कार है जो इस देश के ग्रामीण किसान में मिलता है।
उनके भाव की अतल गहराई और अबाध वेग भी आधुनिक सभ्यता के छिछले और बँधे भाव-व्यापार से भिन्न हैं।
• इससे संबंधित अंश पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या – 125 पर देखें।
उत्तर:
विद्यार्थी दिए गए पृष्ठ पर निराला के आतिथ्य भाव का अंश पढ़ें।
साझी समझ
• भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन – सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर:
मेरे घर जब अतिथि आते हैं तो मैं उनका स्वागत प्रणाम, नमस्कार या नमस्ते बोलकर दोनों हाथ जोड़कर तथा आगे की तरफ थोड़ा झुककर करता हूँ। इस स्थिति में चेहरे पर प्रसन्नता तथा मुसकान भी होती है। मैं बड़े-बुजुर्गों का अभिवादन उनके चरण-स्पर्श करके करता हूँ। विद्यार्थी अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें तथा पता लगाएँ कि वे सभी अपने अतिथियों को अपने राज्य या क्षेत्र का कौन – सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना पसंद करेंगे।
खोजबीन के लिए
• इस एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए । इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की मदद से ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ के विषय में विस्तृत जानकारी एकत्रित करें।