Reading Class 8 Hindi Notes Malhar Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Summary in Hindi
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Hindi Summary
एक टोकरी भर मिट्टी का सारांश – एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Summary in Hindi
यह कहानी एक गरीब, अनाथ वृद्धा और एक धनी ज़मींदार के बारे में है । वृद्धा एक छोटी-सी झोंपड़ी में रहती थी जो ज़मींदार के महल के पास थी। ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए उस वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्ज़ा करना चाहता था। वृद्धा की पूरी संपत्ति और परिवार उसके हाथ से निकल चुका था, और अब उसकी झोंपड़ी ही उसका एकमात्र सहारा थी ।
उसने अपने पति, पुत्र और पतोहू (बहू) को उसी झोंपड़ी में खोया था और अब उसकी पोती ही उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी । ज़मींदार ने अपनी धूर्ततापूर्ण चाल चली और अदालत से आदेश प्राप्त कर उस झोंपड़ी को हड़प लिया और वृद्धा को बेदखल कर दिया।
एक दिन, जब ज़मींदार अपनी नई संपत्ति (झोंपड़ी) का निरीक्षण कर रहा था तथा लोगों को काम बता रहा था, वृद्धा एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। उसने ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी से एक टोकरी मिट्टी ले जाने की अनुमति माँगी ताकि वह अपनी पोती के लिए रोटी पकाने के लिए एक चूल्हा बना सके, जो अपने घर से निकाले जाने के बाद से कुछ न खाने-पीने की जिद पर अड़ी थी।

भूखी थी। ज़मींदार ने अनुमति दे दी। वृद्धा ने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली, लेकिन वह उसे उठा नहीं पा रही थी। उसने ज़मींदार से उसे उठाने में मदद करने का अनुरोध किया।
पहले तो ज़मींदार हिचकिचाया, लेकिन वृद्धा के बार-बार अनुरोध करने पर वह टोकरी उठाने के लिए आगे बढ़ा। वह अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद उस एक टोकरी मिट्टी को एक हाथ भी ऊपर नहीं उठा पाया। इस पर वृद्धा ने कहा, “महाराज, आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं। उसका भार जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे। आप ही इस बात पर विचार कीजिएगा ।”
वृद्धा के इन मार्मिक वचनों से ज़मींदार की आँखें खुल गईं। उसे धन के मद में किए गए अपने अन्याय का एहसास हुआ। उसने अपने कृत्य पर पश्चाताप किया, वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी उसे वापस लौटा दी । यह कहानी दर्शाती है कि भौतिक चीज़ों का मोह कितना भारी हो सकता है और मानवीय भावनाओं का महत्व धन से कहीं अधिक है।

शब्दार्थ
अहाता – परिसर, बाड़ा ।
बहुतेरा – बहुत बार |
ज़माना – समय, युग ।
इकलौता – अकेला ।
पतोहू – पुत्र की स्त्री।
कन्या – लड़की।
मृतप्राय – मरने जैसी स्थिति में ।
निष्फल – व्यर्थ, बेकार |
ज़मींदारी चाल – ज़मींदारों की धूर्ततापूर्ण चालें।
बाल की खाल निकालना – बहुत बारीकी से दोष निकालना, अनावश्यक तर्क करना ।
थैली गरम करना – रिश्वत देना ।
कब्ज़ा करना – अधिकार कर लेना।
अनाथ – जिसका कोई मालिक या रक्षक न हो ।
गिड़गिड़ाना – अत्यंत विनम्रता से प्रार्थना करना।
विनती – प्रार्थना।
पृष्ठ संख्या-77:
स्मरण – याद |
आंतरिक दुख – भीतरी पीड़ा ।
सँभाल कर – सहेजकर ।
ज़रा – थोड़ा।
नाराज़ – क्रोधित ।
लज्जित – शर्मिंदा ।
धन-मद – धन का घमंड ।
गर्वित – गर्वयुक्त, घमंडी।
कर्तव्य – फ़र्ज, दायित्व ।
उपर्युक्त – ऊपर कहा गया ।
कृतकर्म – किए गए कार्य ।
पश्चाताप – पछतावा ।
क्षमा – माफ़ी ।