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NCERT Class 8th Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 6 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi एक टोकरी भर मिट्टी Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए । कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
- झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
- झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी
- वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
- वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
उत्तर:
- वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
प्रश्न 2.
वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी ?
- क्रोध और झगड़ा करके
- अदालत से अनुमति लेकर
- विनती और नम्रता से
- चुपचाप उठाकर ले गई
उत्तर:
- विनती और नम्रता से

प्रश्न 3.
वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
- दया
- लगाव
- गुस्सा
- डर
उत्तर:
- लगाव
प्रश्न 4.
कहानी का अंत कैसा है?
- दुखद
- सुखद
- प्रेरणादायक
- सकारात्मक
उत्तर:
- प्रेरणादायक
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने ?
उत्तर:
सभी उत्तर कहानी के कथानक के अनुसार चुने गए हैं। कहानी का अंत मुझे प्रेरणादायक लगा जिसने स्वयं के मूल्यांकन के लिए प्रेरित किया इसलिए उत्तर ‘प्रेरणादायक ‘ लिखा।
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मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए ।


उत्तर:
1. – (i)
2. – (ii)
3. – (ii)
4. – (i)
5. – (ii)
6. – (i)
7. – (ii)
8. – (i)
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(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों ?
उत्तर:
कथानक के अनुसार निष्कर्षों का चुनाव किया गया है।
पंक्तियों पर चर्चा
• पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
उत्तर:
इन पंक्तियों का अर्थ मेरे अनुसार इस प्रकार है- वृद्धा की झोंपड़ी को ज़मींदार ने अन्यायपूर्ण तरीके से हथिया लिया है। यह घटना उसे जीवन भर शांति से नहीं जीने देगी। यह अनैतिक कदम है।
वृद्धा इस कथन के माध्यम से यह कहना चाहती है कि एक टोकरी मिट्टी का बोझ जब आप उठा नहीं सकते अर्थात एक टोकरी मिट्टी से मिलने वाली अशांति का बोझ आप नहीं उठा पा रहे हैं तो झोंपड़ी में जो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी भरी हुई है, आप इस अन्याय, अशांति, अधर्म का बोझ कैसे उठा सकेंगे अर्थात आपको जीवन भर इस अनैतिक कार्य का बोझ उठाना भारी पड़ेगा । वृद्धा प्रतीकात्मक रूप से ज़मींदार को उसके अन्यायपूर्ण कर्मों के अनैतिक और आध्यात्मिक बोझ का एहसास कराती है।
(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ‘ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
उत्तर:
इन पंक्तियों का आशय है कि प्रारंभ में ज़मींदार वृद्धा पर क्रोधित हुए किंतु वृद्धा की अनुनय-विनय के पश्चात उनका हृदय कुछ पिघला तो वे अपने नौकरों से वृद्धा की मदद करने को न कहकर स्वयं ही मदद के लिए आगे बढ़े और टोकरी उठाने का प्रयास किया किंतु उन्हें तुरंत इस बात का एहसास हो गया कि टोकरी उठाना उनके लिए संभव नहीं है क्योंकि वह बहुत भारी है अर्थात अन्याय का बोझ उठाना बहुत कठिन है। उनके भीतर एक बदलाव की झलक इन पंक्तियों से मिलती है।
सोच-विचार के लिए

• पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।
(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर:
वृद्धा इस कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र है, क्योंकि उसी के आसपास कहानी का कथानक रचा गया है। उसी के द्वारा बोले गए शब्दों से कहानी का मूलमंत्र, शिक्षा, अभिप्राय, उद्देश्य पूर्ण होता है।
(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर:
वृद्धा की पोती को अपनी झोंपड़ी से लगाव था, क्योंकि उसमें उसके माता-पिता की मधुर स्मृतियाँ थीं, अतः ज़मींदार द्वारा झोंपड़ी हथिया लिए जाने पर दुखी होकर उसने खाना छोड़ दिया था।
(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्ज़ा कैसे किया ?
उत्तर:
तेज़-तर्रार वकीलों को पैसे की रिश्वत देकर, धूर्तता और चालाकी से ज़मींदार ने वृद्धा की झोंपड़ी पर कानूनी रूप से कब्ज़ा कर लिया।
(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा” । यहाँ ज़मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
यहाँ ज़मींदार के सिर हिलाने की क्रिया का अर्थ वृद्धा को अपनी बात कहने की स्वीकृति देना है।
(ङ) “ किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
पहले ज़मींदार स्वभाव अहंकार से पूर्ण था, किंतु वृद्धा द्वारा बार-बार विनम्रतापूर्ण आग्रह किए जाने पर उनके मन में दया का भाव पैदा हुआ और तत्पश्चात उन्हें अपने कार्य पर पश्चाताप भी हुआ।
(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर:
वृद्धा द्वारा कहे गए शब्दों से उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ, इसलिए उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी उसे वापस देने में ही भलाई समझी। वे किसी अनैतिक, अन्यायपूर्ण कर्म के फलस्वरूप मिलने वाली मानसिक बोझ से दूर रहना चाहते थे।
अनुमान और कल्पना से

(क) यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो क्या कहती?
उत्तर:
वंह कहती, “मालिक, मेरे माता-पिता इसी झोंपड़ी में रहते थे। यहाँ उनकी यादें हैं । मेरा और दादी का इस झोंपड़ी से लगाव है। हम कहीं और नहीं जाना चाहते। यही हमारा घर है। यहाँ रहने पर ऐसा लगता है कि मैं अपने माता-पिता के साथ हूँ।
आपको भी तो अपने घर से प्यार होगा, अगर कोई आपको आपके घर से हटा दे, तो आपको कैसा लगेगा? आपसे विनती है कि आप हमें हमारी झोंपड़ी में रहने दें, हम आपको कभी परेशान नहीं करेंगे, हम आपसे कुछ भी नहीं माँगेंगे, कभी आपके घर के सामने सामान आदि नहीं फैलाएँगे।”
(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?
उत्तर:
यदि मैं ज़मींदार की जगह होता तो वृद्धा की झोंपड़ी हटाने का दुर्विचार कभी अपने मन में न लाता बल्कि यथाशक्ति उसकी सहायता करने का प्रयास करता। यदि किसी कारण वश अपना आहाता बड़ा करने की आवश्यकता जान पड़ती तो मैं वृद्धा से बात करता, अपनी बात बताता, उसकी सहमति होने पर ही कोई निर्णय लेता ।
(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
उत्तर:
ज़मींदार को शारीरिक श्रम की आदत नहीं होगी, इस कारण उसे मिट्टी से भरी टोकरी उठाने में सफलता नहीं मिली होगी।
(घ) “झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है…” । यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत-मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है ?)
उत्तर:
इस वाक्य में केवल मिट्टी की बात नहीं, बल्कि किसी निर्दोष गरीब व्यक्ति के साथ छल-कपटपूर्ण व्यवहार करने, उसका घर छीनने जैसे अनैतिक आचरण के फलस्वरूप मिलने वाली ईश्वरीय सजा की बात की जा रही है।
मिट्टी कर्मफल का प्रतीक है। मिट्टी की टोकरी के बोझ का अभिप्राय, किए जा रहे अन्यायपूर्ण कर्मफल के बोझ से है। वृद्धा मिट्टी की टोकरी के बोझ के बहाने ज़मींदार को उसके अन्यायपूर्ण कर्मों के फलस्वरूप आगे मिलने वाले पाप, अशांति, कष्ट आदि का एहसास कराना चाहती है।
(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
उत्तर:
उस काल में भारत में स्त्रियों को अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा – यदि स्त्री अकेली होती होगी तो उसकी ज़मीन, जायदाद, खेत आदि छीन लिया जाता होगा। उसे दबाया जाता होगा। उसके पक्ष में बोलने वाले, उसे समझने और सहारा देने वाले लोग प्रायः नहीं मिलते होंगे। स्त्रियाँ अपने लिए न्याय और अपने अधिकारों को माँगने का भी साहस नहीं कर पाती होंगी।
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बदली कहानी

कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-
- यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता
- यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार एक स्त्री होती
- यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
उत्तर:
- यदि ज़मींदार मिट्टी से भरी टोकरी उठाने से मना कर देता, तो वृद्धा उसे अन्य प्रकार से समझाने का प्रयास करती।
हो सकता है कि वह गाँववालों को बुलाती तथा उनको अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताकर न्याय करने को कहती, जिससे ज़मींदार पर सामाजिक दबाव बनता और उसे अपनी गलती का एहसास होता, वह शर्मिंदा होता और अपनी गलती मानने के लिए बाध्य होता ।
- यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता तो भी उसे टोकरी के भारी होने का एहसास होता और वह वृद्धा उसे समझाती कि यह तो सिर्फ एक टोकरी मिट्टी है जब तुम एक टोकरी मिट्टी का बोझ बड़ी मुश्किल से उठा पा रहे हो तो झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरी मिट्टी पड़ी है, उसका बोझ अर्थात उसके परिणामस्वरूप मिलने वाले दुख, कष्ट, अशांति आदि का बोझ भला तुम कैसे उठा सकोगे।
अर्थात जन्म-जन्म तक नहीं उठा सकोगे, इसलिए अपने अनैतिक आचरण और अन्याय के प्रति सजग हो जाओ तथा गरीबों, बेसहारों को सताना छोड़ दो। इसका परिणाम जन्म-जन्मांतर तक भुगतना पड़ सकता है। यह कथन हो सकता है उसकी आत्मा को झझझोरता और उसे सोचने मजबूर करता ।
- यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता, तो वृद्धा शायद उससे कहती कि मेरी ही झोंपड़ी की मिट्टी देने में तुम्हें कष्ट हो रहा है।
अपने महल की मिट्टी देनी पड़ती तो पता नहीं क्या हो जाता या वह कहती आपने तो मेरा पूरा घर हथिया लिया, क्या मुझे एक टोकरी मिट्टी लेने का भी अधिकार नहीं। वह दुखी होती और ज़मींदार को शर्मिंदा करती। जिससे वह वास्तविकता को समझने का प्रयास करता।
- यदि ज़मींदार एक स्त्री होती, तो शायद कहानी किसी और दिशा की ओर मुड़ती और कहानी में दया, करुणा, सहानुभूति की मात्रा अधिक होती ।
शायद स्त्री होने के कारण वह वृद्धा का कष्ट समझ पाती और उसे गलती का एहसास जल्दी हो जाता।
- यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती, तो यह एक मासूम बच्ची की प्रार्थना होती । एक बच्ची की बातें शायद ज़मींदार के हृदय को पिघला पातीं या फिर बच्ची समझकर वह उसकी बातें बिना सुने ही चला जाता या उसकी बातों को कोई महत्व नहीं देता ।
(उपर्युक्त में से किसी भी स्थिति को चुनकर आप कहानी को बदल सकते हैं। उसे एक नया कलेवर दे सकते हैं।)
‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-

अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए—
प्रश्न 1.
वृद्धा ने कहा ………….. वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
उत्तर:
वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
प्रश्न 2.
वह अपनी पोती ………… चिंता में दुखी हो गई थी।
उत्तर:
वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।
प्रश्न 3.
वृद्धा ने प्रार्थना …………. ………….. टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
उत्तर:
वृद्धा ने प्रार्थना की, कि टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए ।
प्रश्न 4.
पोती हमेशा कहती थी ………….. वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
उत्तर:
पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
प्रश्न 5.
झोंपड़ी ………….. -मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
उत्तर:
झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
प्रश्न 6.
उसे विश्वास था …………. मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
उत्तर:
उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
प्रश्न 7.
वृद्धा …………… आँखों से आँसुओं ………… धारा बहने लगी।
उत्तर:
वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी ।
प्रश्न 8.
उसने यह सोचा ………… झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
उत्तर:
उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
प्रश्न 9.
वृद्धा के मन …………. पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी ।
उत्तर:
वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी ।
प्रश्न 10.
ज़मींदार इतने लज्जित हुए ………….. टोकरी उठाने की बात मान ली।
उत्तर:
ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
प्रश्न 11.
उस झोंपड़ी ………. हर दीवार वृद्धा …………. यादों से भरी थी।
उत्तर:
उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी ।
मुहावरे
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए ।
उत्तर:
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया ।”
(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
- बाल बाँका न होना— कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना । पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
- बाल बराबर — बहुत सूक्ष्म । बहुत महीन या पतला।
- बाल बराबर फर्क होना— ज़रा सा भी भेद होना । सूक्ष्मतम अंतर होना ।
- बाल-बाल बचना— कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।

उत्तर:
- हनुमान इतने शक्तिशाली थे कि कोई उनका बाल- बाँका न कर सका।
- बाल बराबर काँटा मेरे पैरों में चुभा है, पर दर्द बहुत अधिक है।
- मेरे और मेरे भाई के बीच मेरी माँ बाल बराबर भी फर्क नहीं करतीं ।
- हवाई जहाज़ दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गया।
काल
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई ।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं। काल के तीन भेद होते हैं-
- भूतकाल – यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
- वर्तमान काल – यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
- भविष्य काल – यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।
• नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए-

(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली ।
उत्तर:
वह गिड़गिड़ाकर बोल रही है। – वर्तमान काल
वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी। – भविष्य काल
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
उत्तर:
श्रीमान् आज्ञा दे रहे हैं। – वर्तमान काल
श्रीमान् आज्ञा देंगे। – भविष्य काल
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ।
उत्तर:
उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही हैं। – वर्तमान काल
उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी। – भविष्य काल
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
उत्तर:
ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हो रही है। – वर्तमान काल
ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी। – भविष्यत काल
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
उत्तर:
वे वृद्धा से क्षमा माँग कर उसकी झोंपड़ी वापस दे रहे हैं। – वर्तमान काल
वे वृद्धा से क्षमा माँग कर उसकी झोंपड़ी वापस कर देंगे। – भविष्य काल
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वचन की पहचान

• नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए-
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई । (गई/गई)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली । (बोली/ बोलीं)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। (है/हैं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी। (थी / थीं)
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई। (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं। (गई/गई)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं। (है/हैं)
उत्तर:
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई ।
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली ।
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी।
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई।
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं।
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं।
कहानी की रचना
“यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो….
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों ओर प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है । अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए ।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
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(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-

(पूरा प्रश्न पढ़ने के लिए पृष्ठ संख्या-84 देखें।)
उत्तर:
कहानी से उदाहरण-
(1) प्रश्नोत्तर शैली – वृद्धा ने कहा “महाराज, नाराज न हों…आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हज़ारों टोकरी मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए ।”
(वृद्धा द्वारा किया गया यह प्रश्न पाठक को सोचने पर विवश कर देता है।)
(2) वर्णनात्मकता –
- एक दिन श्रीमान् उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान् ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो।
(इन प्रसंगों में भावनाओं का अद्भुत चित्र खींचा गया है।) - वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई । वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
(3) भावात्मकता – यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों… आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए ।”
(यह कहानी का सर्वाधिक भावात्मक पक्ष है।)
(4) संवादात्मकता – वह गिड़गिड़ाकर बोली, “महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, “जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत समझाया, पर वह एक नहीं मानती । यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।
अब मैंने सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊँ!” श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
(5) नाटकीयता-
- वह हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी कि “महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए, जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।” ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए। पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों गिरने लगी तो उनके मन में कुछ दया आ गई।
- ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति से बाहर है। फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान पर वह टोकरी रखी थी, वहाँ से वह एक हाथ भी ऊँची न हुई । वह लज्जित होकर कहने लगे कि, ” नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी ।”
(6) चरित्र-चित्रण –
- वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी इसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब यही उसकी पोती इस वृद्धावस्था में एकमात्र आधार थी। जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। पाठ के अंतर्गत किया गया यह वर्णन गरीब बूढ़ी स्त्री की निर्धनता, लाचारी और वस्तुस्थिति को दर्शाता है। किंतु कहानी आगे बढ़ने पर स्त्री की दृढ़ता और बुद्धिमत्ता ही उसकी चरित्र की विशेषता बनकर उभरती है।
- श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए, तब वे अपनी ज़मींदारी चाल चलने लगे। बाल की खाल निकालने वाली वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना … कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया।
(पाठ के अंतर्गत किया गया यह वर्णन ज़मींदार के घमंडी, घटिया, चालबाज चरित्र की ओर इंगित करता है |)
शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। । इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए –

उत्तर:
| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
| 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए | धनी, शोभायुक्त, शोभावान्, संपत्तिशील, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द | |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम लड़की, बड़ी इलायची। |
| 3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह । |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं काल, बहुत अधिक समय, बसी थी। | काल, बहुत अधिक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल । |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय | देने वाला, पालन करनेवाला। |
भावों की पहचान
“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…”
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-


उत्तर:
| पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
| 1. वे लज्जित होकर कहने लगे- ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | लज्जा/पछतावा |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। | बोध/आत्मज्ञान |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | करुणा/दया |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | आस्था/विश्वास |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है । | विनम्रता / विनय |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | ममता/स्नेह |
| 7. ज़मींदार साहब धन – मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | अहंकार/घमंड |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | जुड़ाव/मोह |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | दुख/पीड़ा |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया। | क्रूरता/अन्याय |
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वाक्य विस्तार

‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं-
‘वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची ।’
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे—’थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।’ अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए । प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
एक झोंपड़ी थी।
उत्तर:
किसी गाँव में ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ, बेसहारा वृद्धा की एक झोंपड़ी थी।

प्रश्न 2.
श्रीमान् टहल रहे थे।
उत्तर:
प्रात:काल की सुखद बेला में श्रीमान् धीरे-धीरे टहलते हुए उपवन में खिले सुंदर-सुंदर फूलों, फलों और वृक्षों का आनंद ले रहे थे।
प्रश्न 3.
वह खाने लगेगी।
उत्तर:
वृद्धा को भरोसा है कि झोंपड़ी से ली गई मिट्टी के बने चूल्हे पर पकी रोटी वह (पोती) खाने लगेगी।
प्रश्न 4.
वृद्धा भीतर गई ।
उत्तर:
वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई और पुरानी बातों का स्मरण होते ही उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
प्रश्न 5.
आगे बढ़े।
उत्तर:
मन में कुछ दया आते ही ज़मींदार साहब किसी नौकर से न कहकर स्वयं ही टोकरी उठाने को आगे बढ़े।
संवाद फोन पर
(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
उत्तर:
ज़मींदार – तुम्हारी दादी ने बताया कि तुम भोजन नहीं कर रही हो।
पोती – जी, मुझे कहीं और नहीं खाना। मैं अपनी झोंपड़ी में ही खाना खाऊँगी।
ज़मींदार – लेकिन झोंपड़ी तो बिलकुल टूटी-फूटी हैं। उसके लिए तुम्हें दुखी नहीं होना चाहिए।
पोती – वह कैसी भी हो, वह मेरा घर है। मुझे अपने घर से प्यार है। मैं उसमें रहना चाहती हूँ।
ज़मींदार – बेटा, खाना छोड़ना अच्छी बात नहीं ।
पोती – क्या किसी का घर छीनना अच्छी बात है ? (रोते हुए) आप ही बताइए ।
ज़मींदार – (थोड़ा झिझकते हुए) हाँ, बात तो तुम ठीक कह रही हो।
पोती – तो प्लीज़ मेरी बात मान जाइए, हमारी झोंपड़ी हमें वापस दे दीजिए, हम उसी में खुश हैं।
ज़मींदार – (अपनी गलती का एहसास करते हुए) ठीक है बेटी! तुम यहाँ आकर रहो, तुम्हारी झोंपड़ी मैं नहीं लूँगा।
पोती – (खुश होकर) धन्यवाद ! आप सचमुच दयालु व्यक्ति हैं।
(ख) कल्पना कीजिए कि ज़मींदार और उसका कोई मित्र
वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे । उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
उदाहरण-
- मित्र – इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है?

- ज़मींदार –
मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।

उत्तर:
मित्र – तुम्हारा घर तो वैसे ही इतना बड़ा है। वृद्धा की झोंपड़ी तुम्हें नहीं हड़पनी चाहिए। ![]()
ज़मींदार –
मैंने तुमसे राय नहीं माँगी, सिर्फ़ बताया है।
मित्र – तुम वृद्धा से बात करके कोई हल भी निकाल सकते हो। ![]()
ज़मींदार –
कैसा हल?
मित्र – उसे कहीं आस-पास एक कमरा देने का प्रस्ताव दो। ![]()
ज़मींदार –
हाँ, यह बात तुम सही कह रहे हो, मैं कल ही उससे बात करता हूँ ।
मित्र – हाँ मित्र ! अगर ऐसा हो जाए तो अच्छा होगा। ![]()
पोती की भावनाएँ

“मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।”
(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
आगरा, उत्तर प्रदेश ।
विषय : घर को हड़पने से बचाने हेतु प्रार्थना ।
महोदय,
मेरा एक छोटा-सा घर खंदारी कॉलोनी में है। जिसका पता 6/387 है। उसमें मैं अपनी दादी के साथ रहती हूँ। हमारे पड़ोस में रहने वाले ज़मींदार श्री सुरेंद्र ठाकुर हमारा घर जबरदस्ती हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर का अहाता मेरे घर के सामने तक बढ़ा लिया है। मना करने पर वे अपशब्द कहते हैं और हमें वहाँ से चले जाने को कहते हैं। वह घर मेरे माता-पिता की इकलौती निशानी है। जिसे उन्होंने बड़ी मेहनत से बनाया था हमारे पास उस घर के अतिरिक्त और कोई ठिकाना नहीं है।
महोदय आपसे प्रार्थना है कि आप वस्तुस्थिति का अवलोकन कर हमें न्याय दिलाने की कृपा करें।
धन्यवाद
भवदीया
क. ख. ग
6/387, खंदारी कॉलोनी
आगरा, उत्तर प्रदेश
दिनांक – 25-05-20XX
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(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए-

उत्तर:
कि ज़मींदार जी की नीयत ठीक नहीं लग रही है। वे अपना अहाता बड़ा करने के लिए हमारी झोंपड़ी पर कब्ज़ा करना चाहते हैं। दादी की बात सुनकर मैं बहुत दुखी हूँ, किसी से मदद की आशा नज़र नहीं आती। गरीबों का साथ कोई नहीं देता है। हे ईश्वर ! आप हमारी मदद कीजिए, कुछ ऐसा कीजिए कि ज़मींदार को दया आ जाए, उनका विचार बदल जाए।
हे ईश्वर कुछ समाधान निकालो। हमें बस आपका ही सहारा है। आज शायद घर में बाबा और पिता जी होते तो ज़मींदार की इतनी हिम्मत नहीं होती । इस दुनिया में स्त्रियों का जीना कितना मुश्किल है। सब उन्हें दबाना चाहते हैं। सताना चाहते हैं। वैसे मेरी दादी बहुत हिम्मती हैं, कुछ न कुछ रास्ता तो निकालेंगी ही । हे ईश्वर ! दादी की मदद करो! हमारा घर बचा लो !
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
उत्तर:
मुझे अपने घर के प्रत्येक कोने से बहुत लगाव है। घर के पेड़-पौधे तो जैसे घर के ही सदस्य हैं। बालकनी पर लगे हुए मालती के फूल बहुत प्यारे लगते हैं । मेरे घर के बगीचे में रखे बर्तन में छोटे-बड़े सभी जीव पानी पीते हैं और रखी हुई रोटी, दाना आदि खाते हैं। बिल्ली अपने बच्चों के साथ एक कुर्सी पर कब्ज़ा करके बैठ जाती है। उसे हमसे बिलकुल भी डर नहीं लगता।
घर के आँगन में लगी तुलसी तो घर की शोभा है। माँ जब शाम को वहाँ दीपक जलाती हैं, तो पूरा आँगन खिल उठता है। मेरे कमरे की मेज़ पर सरस्वती माँ का एक चित्र लगा हुआ है। पाठ शुरू करने से पूर्व मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ। मुझे अपने घर से बहुत लगाव है। वह मेरे लिए दुनिया का सबसे अच्छा घर है।
(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो ? अपना अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
हाँ, जब मैं छोटी थी तो हम दिल्ली कैंट एरिया में रहते थे। वहाँ से मेरा स्कूल बस इतना ही दूर था कि पैदल जाया जा सके। वहाँ हम बहुत ही सहेलियाँ मिलजुल कर बहुत से खेल खेलते थे। छुट्टियों की दोपहरी में एक दूसरे के घर जाते थे। आँधी चलने पर बिना डरे आम और जामुन के पेड़ के नीचे चले जाते थे। बाद में माँ-पिता जी से डाँट पड़ती थी, तो गलती का एहसास होता था। जब मेरे पिता जी का ट्रांसफर हुआ और हमें वह जगह छोड़नी पड़ी, तो मुझे बहुत बुरा लगा, मैं बहुत रोई । सचमुच उस जगह तथा अपनी सहेलियों को छोड़ना बहुत मुश्किल लगा था।
(ग) कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए | यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला ?
उत्तर:
हाँ, मैंने अपने दोस्त को अपनी गलती पर पछताते देखा है। एक बार उसने अपनी छोटी बहन को अपना नया पेन खो देने के कारण बहुत बुरा-भला कहा और कई दिनों तक बात नहीं की। उसकी बहन बहुत रोई, माफी भी माँगी, किंतु मेरे दोस्त ने उसकी कोई बात नहीं सुनी। कुछ दिनों बाद उसकी बहन दूसरे शहर पढ़ने के लिए चली गई ।
वहाँ वह हॉस्टल में रहने लगी। उसने वहाँ से माँ-पिता जी को फोन किया। किंतु अपने भाई (मेरे दोस्त) से बात नहीं की। ऐसा जब कई बार हुआ, तो मेरे दोस्त को अपनी भूल का एहसास हुआ, वह बहुत पछताया। उसने पत्र लिखकर अपनी बहन से माफी माँगी। बहन आखिर बहन होती है, उसने अपने भाई को माफ कर दिया। जब वह हॉस्टल से घर आई, तो भाई-बहन दोनों एक-दूसरे के गले लगकर रोने लगे । इस घटना के बाद मेरे मित्र ने अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण करना सीख लिया। दोनों भाई बहन में पहले से भी ज़्यादा प्यार हो गया था।
(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हो ? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा ?
उत्तर:
हाँ, एक बार मैंने गुस्से में आकर अपने एक सहपाठी को कुछ अप्रिय बातें बोल दी थीं, क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि उसने जान-बूझकर मेरे काम में बाधा डाली है – किंतु बाद में मुझे पता चला कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था । अनजाने में ही उससे वह कार्य हो गया था । उसका उद्देश्य मुझे बाधित करना नहीं था। परेशान करना नहीं था। मुझे अपनी गलती पर पछतावा हुआ। मैंने उससे क्षमा माँगी और उसे बताया कि मुझे क्रोध क्यों आया था। बात करने के बाद हमारे बीच की गलतफ़हमी दूर हो गई।
इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व स्थिति को पूरी तरह समझना आवश्यक होता है। गुस्से में प्रतिक्रिया देने के बाद प्रायः पछताना ही पड़ता है। शांत दिमाग से सोचने और निर्णय लेने से सुखद परिणाम मिलता हैं।
न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।
(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए ।
उत्तर:
मेरे घर पर काम करने वाले एक मज़दूर के साथ इस प्रकार का अन्याय हुआ था।
हम उन्हें जागेश्वर चाचा कहते थे। उनके पास आम के चार पेड़ थे। जिसकी वे बड़ी जतन से देखभाल करते थे। उनके पेड़ हर साल फलों से लद जाते थे। पास में ही एक धनी व्यक्ति का बगीचा था। एक बार रातों-रात उस धनी व्यक्ति ने अपने बगीचे की दीवार को आगे बढ़ाकर जागेश्वर चाचा के पेड़ों पर कब्ज़ा कर लिया और कह दिया कि ये पेड़ मेरी बाउंड्री के अंदर हैं, अतः मेरे हैं । तुम्हारा कोई पेड़ यहाँ था ही नहीं।
जागेश्वर चाचा रोते-रोते मेरे घर आए और सारी बात मेरे बाबा को बताई। मेरे बाबा पत्रकार, शिक्षक और समाजसेवी थे। वे सदैव स्थानीय लोगों की यथासंभव मदद किया करते थे। वे उस धनी व्यक्ति के पास गए। उसे अनेक प्रकार से समझाया। अंततः वह व्यक्ति शर्मिंदा हुआ और अपनी गलती स्वीकार की। इस प्रकार जागेश्वर चाचा के आम के पेड़ों को उस धनी व्यक्ति के कब्ज़े से छुड़ाया जा सका।
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक है कि आपको और आपके आस-पास के लोगों को न्याय के पक्ष में बोलना और हस्तक्षेप करना चाहिए। ‘मुझे क्या मतलब’ ऐसी भावना मन से निकाल देनी चाहिए। समाज के प्रति हमारा जो भी कर्तव्य है, यथाशक्ति पूरा करने, साथ देने का प्रयास करना चाहिए। खासकर उन लोगों के पक्ष में ज़रूर बोलना चाहिए, जो गरीब और लाचार हों, जिनकी बात को प्रायः दबा दिया जाता है और धमकियाँ देकर उन्हें चुप रहने के लिए बाध्य किया जाता है। आस-पास के लोगों को मिलकर ऐसे अन्याय का विरोध करना चाहिए।
(ग़) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
इस कथन में अत्यधिक गहराई और सच्चाई है । प्रायः लोग शक्ति को धन, बल या पद के साथ जोड़ते हैं। लेकिन सच्ची शक्ति वास्तव में दया और न्याय में ही निहित है। जब कोई व्यक्ति दयालु होता है, तो वह दूसरों के प्रति सहानुभूति रखता है और उनकी मदद करने की इच्छा रखता है। यह एक व्यक्ति को भावनात्मक रूप से मज़बूत करता है और दूसरों के साथ संबंध बनाता है।
दयालुता से लोगों का विश्वास जीता जा सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकता है। इसी प्रकार न्याय का अर्थ है – निष्पक्षता और सभी के लिए समानता । जब कोई व्यक्ति या समाज न्यायपूर्ण होता है, तो वह सभी को अवसर प्रदान करता है और किसी के साथ भेद-भाव नहीं करता है। न्याय से समाज में शांति, सद्भाव और स्थिरता आती है। यह लोगों – को सुरक्षित महसूस करवाता है और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने का साहस देता है।
इसके विपरीत वह शक्ति जो केवल बल, धन या अहंकार पर आधारित होती है, अस्थायी होती है और अकसर विनाशकारी होती है। ऐसी शक्ति लोगों में भय पैदा करती है, लेकिन उन्हें प्रेरणा नहीं देती। अंतत: ऐसी शक्ति पतन की ओर ले जाती है।
इसलिए सच्ची और स्थायी शक्ति वह है जो दया और न्याय पर आधारित हो। ये गुण न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि सामाजिक और वैश्विक स्तर पर भी शांति, समृद्धि और सम्मान लाते हैं।
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घर – घर की कहानी
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए । कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी अभिभावकों की मदद से स्वयं करें।
न्याय और करूणा से जुड़ी सहायता
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया । ” कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उदाहरण-
- सार्वजनिक शिकायत सुविधा – भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https://pgportal.gov.in - जनसुनवाई— प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभ किया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
https://jansunwai.up.nic.in/ - सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ— भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है—
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
उत्तर:
- विद्यार्थी स्वयं करें।
आज की पहेली
• नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए-

- ट् क र् ई ओ = टोकरी
- य् आद = ……………..
- ई ल व क् = ……………..
- झ् ओ ई पडू अं = ……………..
- ज द् आ म् ई र अं = ……………..
- त् आ इ औ क ल् = ……………..
उत्तर:
- ट् क र् ई ओ = टोकरी
- य् आद = दया
- ई ल व क् = वकील
- झ् ओ ई पडू अं = झोंपड़ी
- ज द् आ म् ई र अं = ज़मींदार
- त् आ इ औ कल् = इकलौता