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NCERT Class 8th Hindi Chapter 3 एक आशीर्वाद Question Answer
एक आशीर्वाद Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 3 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi एक आशीर्वाद Question Answer
पाठ से प्रश्न – अभ्यास
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
कविता में किसे संबोधित किया गया है ?
- युवा वर्ग को
- नागरिकों को
- बच्चों को
- श्रमिकों को
उत्तर:
- युवा वर्ग को
प्रश्न 2.
“तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है?
- कल्पना की उड़ान भरना
- आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना
- बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना
- बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
उत्तर:
- बड़े लक्ष्य निर्धारित करना

प्रश्न 3.
“उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है-
- चुनौतियों को स्वीकार करना
- प्रकाश का प्रसार करना
- अग्नि के ताप का अनुभव करना
- कष्टों से नहीं घबराना
उत्तर:
- चुनौतियों को स्वीकार करना
प्रश्न 4.
“अपने पाँवों पर खड़े हों ” पंक्ति से क्या आशय है?
- अपने पैरों पर खड़े होना
- सफलता प्राप्त करना
- कठिनाइयों का सामना करना
- आत्मनिर्भर होना
उत्तर:
- आत्मनिर्भर होना

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग- अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने ?
उत्तर:
(1) कविता में (युवा वर्ग) को ही संबोधित किया गया है। यह कविता स्वतंत्रता से पहले की है। दुष्यंत कुमार जैसे अनेक देशभक्त कवि एवं लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जनता को इस आज़ादी की लड़ाई के लिए प्रेरित कर रहे थे। युवा वर्ग में जोश की भावना अधिक होती है। यदि किसी भी देश का युवा वर्ग किसी कार्य को करने की ठान लेता है तो कार्य अधिक तीव्र गति और जोश के साथ संपन्न होता है। आज़ादी की लड़ाई में योगदान तो सभी नागरिकों का आवश्यक है, किंतु जीत हासिल करने के लिए युवा वर्ग का जोश आवश्यक है।
(2) ‘तेरे स्वप्न बड़े हों’ पंक्ति में ‘स्वप्न’ से आशय है- ‘बड़े लक्ष्य निर्धारित करना’। केवल कल्पना की उड़ान भरकर अनेक लोग केवल दिवास्वप्न देखकर ही रह जाते हैं। उनमें कार्य सिद्ध करने का साहस नहीं होता । आकांक्षाएँ और रुचियाँ तो सभी रखते हैं; पाना तो बहुत कुछ सभी चाहते हैं, किंतु केवल इच्छा रखकर । जबकि जी-तोड़ परिश्रम के बिना कुछ नहीं प्राप्त होता। बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना भी इसका सटीक उत्तर नहीं हो सकता क्योंकि कभी-कभी बहुत कुछ हमारे पूर्वजों के प्रयत्न या भाग्य के कारण भी मिल जाता है। लक्ष्य वही निर्धारित करता है, जिसमें कुछ “कर गुजरने की इच्छा होती है और ऐसा व्यक्ति अपना लक्ष्य अवश्य प्राप्त करता है।
(3) “उँगली जलाए” का भाव चुनौतियों को स्वीकार करना है। हम दीये की रोशनी देखकर ललचाएँगे तभी अथक प्रयत्न करेंगे और सफलता प्राप्त कर पाएँगे।
(4) “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति का आशय है कि हमें आत्मनिर्भर बनना है। अपने देश में सब कुछ उत्पन्न करें/निर्माण करें। किसी भी विदेशी उत्पाद पर निर्भर न हों। परतंत्रता से मुक्ति पाने के लिए यह बहुत आवश्यक है। सफलता तो बहुत लोग प्राप्त कर लेते हैं। जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना तो बहुत लोग करते हैं। आत्मनिर्भर देश ही विश्व में नाम कमाता है।
(विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ चर्चा करके बताएँगे कि उनके द्वारा विकल्प चुनने के क्या कारण हैं ।)
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मिलकर करें मिलान
• कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं।
पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए-

उत्तर:
1. – 3
2. – 1
3. – 4
4. – 2
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-
(क) “जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों”
उत्तर:
कवि दुष्यंत कुमार जी द्वारा रचित ‘एक आशीर्वाद’ कविता की इन पंक्तियों में कवि सभी को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि तुम जाओ और अपने बड़े – बड़े स्वप्नों को पूरा करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ हो जाओ। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कुछ बड़ा सोचना, बड़ा स्वप्न देखना आवश्यक होता है। किंतु कवि यहाँ केवल स्वप्न देखने को नहीं कह रहा अपितु बड़ी सफलताएँ प्राप्त करने के लिए पूरे परिश्रम, क्षमता और बुद्धि का प्रयोग करने के लिए कह रहा है। यह कविता आज़ादी से पूर्व की है और उस समय ‘बड़े स्वप्न’ अर्थात् देश को स्वतंत्र कराना था।

(ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”
उत्तर:
कवि दुष्यंत कुमार जी द्वारा रचित ‘एक आशीर्वाद’ कविता की इस पंक्ति में कवि सभी को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”। इस पंक्ति से पहले की पंक्ति में कवि ने “ भावना की गोद से उतरकर ” लिखा है क्योंकि उस समय के इन सभी रचनाकारों ने स्वतंत्रता की अलख जगाने का बीड़ा उठाया हुआ था।
इसलिए कहा है कि अपने परिवार की जो मोह-माया है, जिम्मेदारियाँ हैं, उन्हें त्याग कर आज़ादी की लड़ाई में कूद जाओ – जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें अर्थात् उस समय की वास्तविक आवश्यकता यही थी कि अपने परिवार के प्रति प्रेम, कर्तव्य को भूलकर भारत माता के प्रति प्रेम, कर्तव्य और बलिदान को महत्व दें। चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, राजगुरु जैसे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने पृथ्वी अर्थात भारत माता का कर्ज चुकाने के लिए प्राणों की बाजी लगा दी। परिवार के प्रति प्रेम, कर्तव्य को त्यागने के कारण ही वे ऐसा अदम्य साहस दिखा पाए।
(ग) “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना – मचलना सीखें”
उत्तर:
यह पंक्ति ‘एक आशीर्वाद’ कविता में से ली गई है। इसके रचयिता ‘श्री दुष्यंत कुमार जी’ हैं। इनके समकालीन अधिकांश रचनाकार अपनी कविताओं और लेखों के माध्यम से जनता में स्वतंत्रता का मूल मंत्र फूँककर देश में आज़ादी का बिगुल बजा रहे थे। जनता इन लेखों, कविताओं से प्रभावित होकर इस रण का हिस्सा बन रही थी। इस कविता की इस पंक्ति में भी कवि ने कहा है कि तुम चाँद-तारों के समान कभी न प्राप्त होने वाली सच्चाइयों/वास्तविक लक्ष्यों को भी प्राप्त करने के लिए हठ और प्रयत्न करना सीखो।
यहाँ चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाई ‘देश की आज़ादी’ को कहा गया है क्योंकि अंग्रेज़ों से देश को आज़ाद करवाना आसमान से चाँद-तारे तोड़ने के समान कठिन कार्य था। जब तक भारतीय उस आज़ादी के लिए जिद करने और अड़ जाने का साहस नहीं करते तब तक आज़ादी को वास्तविकता की धरातल पर उतारना कठिन कार्य था।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
उत्तर:
कविता में उस समय की आवश्यकता ‘देश की स्वतंत्रता’ थी, अर्थात अंग्रेजों से देश को स्वाधीन करवाना था। देश की आज़ादी से बड़ा स्वप्न उस परतंत्र भारत में हो ही नहीं सकता था। परतंत्र देश में साँस लेना और आज़ाद देश में साँस लेना इसका वास्तविक अंतर तो उन्हीं देशवासियों ने जाना था, जिन्होंने अंग्रेजों और उनके पिट्टुओं या ज़मींदारों के अत्याचारों को भोगा था; गरीबी और अत्याचारों को सहन किया था।
समय और आवश्यकताओं के अनुसार बड़े सपने भी बदलते रहते हैं। हमारे अनुसार कुछ बड़े स्वप्न निम्नलिखित हैं-
• आज लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला इन्हीं बड़े स्वप्नों को देखने के कारण अंतरिक्ष में 14 दिनों के लिए गए हैं, वहाँ वे जो भी अनुसंधान करेंगे, वे पूरे विश्व की उन्नति में सहायक होंगे। बड़े स्वप्न उन्हीं के साकार होते हैं जो प्राण-पण से अपने स्वप्नों को पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।
कुछ अन्य बड़े सपने इस प्रकार है-
- हमारा देश सुरक्षा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बने।
- भारत पूर्ण शिक्षित हो ।
- उद्योग-धंधे बढ़ें और कोई बेरोज्गार न रहे।
- गरीबी समाप्त हो और धर्म व जातिगत भेदभाव समाप्त हो जाएँ।
- राष्ट्रीय एकता सर्वोपरि हो ।
- स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार हो और सभी को सुविधाएँ आसानी से मिलें ।
- भ्रष्टाचार समाप्त, अपराध रहित भारत हो ।
- आत्मनिर्भर भारत आदि हमारे बड़े स्वप्न हैं।
(ख) “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ / उँगली जलाएँ” पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों ? (संकेत योजना, प्रयास आदि)
उत्तर:
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ / उँगली जलाएँ पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ललक की बात कही गई है। ललक के साथ-साथ लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाकर दृढ़ता और लगन के साथ काम करना चाहिए। आप जो भी काम करना चाहते हैं उस क्षेत्र के ज्ञान और कौशल के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए। आत्म-अनुशासन के साथ-साथ आप क्या करना चाहते हैं वह लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। स्वयं पर विश्वास एवं प्रेरणादायक लोगों का साथ होना चाहिए । लक्ष्य प्राप्ति के लिए समय प्रबंधन भी आवश्यक है। लक्ष्य एक दिन में प्राप्त नहीं होते हैं, किंतु एक दिन अवश्य प्राप्त होते हैं।
(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है । आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
उत्तर:
मैं (स्वयं) मित्र, आ गए तुम !
स्वप्न (डॉक्टर बनने का स्वप्न) हाँ! मैं आ गया।
मैं – आज बहुत दिन बाद मिलना हुआ। मैं भी काफी समय से व्यस्त चल रहा था। इसलिए नींद भी पूरी नहीं हो पा रही थी। शायद इसलिए स्वप्न भी नहीं आ पा रहे थे। तुमसे मिलकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई।
स्वप्न – हाँ, मैं भी तुमसे मिलने के लिए बहुत लालायित था। तुम्हारा बाहरवीं का परिणाम बहुत अच्छा आया है और तुम जी-जान से अपनी मेडिकल की परीक्षा की तैयारी में लगे हुए हो। अब तुम एक दिन में कितने घंटे पढ़ाई करते हो?
मैं – मैं प्रतिदिन लगभग अठारह घंटे पढ़ाई करता हूँ । चार घंटे सोता हूँ और दो घंटे अन्य कामों के लिए रखता हूँ। प्रतिदिन मैं आधा घंटा योगाभ्याम भी करता हूँ। इससे मुझे स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक बल भी मिलता है।
स्वप्न – अच्छा मित्र! मुझे यह बताओ कि तुमने अपना लक्ष्य डॉक्टर बनना ही क्यों निर्धारित किया है ? मेरे दादा जी गाँव में रहते थे। उचित चिकित्सा के अभाव में उनकी मृत्यु हो गई थी । मेरे दादाजी मुझे बहुत प्यार करते थे। उनकी मृत्यु के पश्चात् मेरे पिताजी बहुत उदास रहने लगे थे। बस तभी से मैंने निश्चय कर लिया कि मैं एक दिन बहुत बड़ा डॉक्टर बनूँगा। अपने गाँव में जाकर अस्पताल खोलूँगा। उस अस्पताल में जरूरतमंद गरीबों का निःशुल्क उपचार करूँगा । इसीलिए मैं दिन-रात मेहनत करते हुए ईश्वर से प्रार्थना भी करता हूँ कि मैं अपने लक्ष्य में अवश्य सफल होऊँ ।
स्वप्न – वाह! मित्र, तुम्हारे विचार जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। तुम्हारी जैसी विचारधारा वाले व्यक्ति समाज के लिए बहुत उपयोगी होते हैं।
तभी माँ ने आवाज़ देकर पुत्र को उठा दिया और यहीं पर यह बातचीत समाप्त हो गई।
(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हो तो आप किसे और क्या आशीर्वाद देंगे और क्यों?
उत्तर:
आशीर्वाद आम तौर पर बड़े बुजुर्ग, माता-पिता गुरु या धार्मिक नेता देते हैं। कुछ लोग स्वयं को भी आशीर्वाद देते हैं और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखते हैं। आशीर्वाद एक ऐसी क्रिया है जो सकारात्मक ऊर्जा; शुभकामनाएँ और अच्छी भावनाओं को व्यक्त करती है। आशीर्वाद एक शक्ति है जो अदृश्य रूप से हमारा कल्याण करती है।
मैं हमेशा अपनी छोटी बहन को आशीर्वाद देना चाहता हूँ । उसे आशीर्वाद देते हुए मैं कहता हूँ ” यशस्वी भव”, सदा निरोगी रहते हुए प्रसन्न और संतुष्ट रहो। अपने इस मानव जीवन का सदुपयोग करते हुए देश की सेवा करते हुए कल्याणकारी कार्य करो।
कविता की रचना
• इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुस्कराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए ।
उत्तर:
‘एक आशीर्वाद’ कविता में बहुत बड़े ऐसे स्वप्न देखने के लिए कहा है जो जन कल्याणकारी हो । मुस्कराना, हँसना, गाना ये सभी सुख-समृद्धि से ओत-प्रोत होने पर ही संभव होता है। स्वप्न कई बार सच्चाई से बहुत दूर होते हैं। जीवन यथार्थ पर आधारित होता है। इसलिए जन कल्याण, देश-प्रेम से संबंधित ऊँची ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयत्न और संघर्ष आवश्यक है। जहाँ से भी कुछ अच्छा कार्य होने की उम्मीद हो उस आशा की किरण को व्यर्थ न जाने दें। अपने अथक परिश्रम से अपना लक्ष्य प्राप्त करें।
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सृजन
• इस कविता के आरंभ में ही एक संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’ । इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे-चलना, कूदना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है । आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए ।

उत्तर:
चंद्रमा
चंद्रमा हर रात चाँदनी बरसाता है ।
वह चमकता है,
तारों संग बतियाता है।
अपनी चाँदनी में नहलाता है
सुबह छिप जाता है।
रात को अपनी रोशनी बिखराता है।
ऐसे चंद्रमा सृष्टि को सजाता है।
पत्ता
पत्ता पेड़ से गिरता है ।
पत्ता हवा में उड़ता है।
थरथराता और लहराता है
सड़कर मिट्टी में मिल जाता है।
कविता का शीर्षक
• इस कविता का शीर्षक ‘एक आशीर्वाद’ है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों ?

उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं करें।
भाषा की बात
(क) नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-

उत्तर:

(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ न देते हों-

उत्तर:

आना-जाना
• ‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं । कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
उत्तर:
| आना | जाना |
| 1. आज तुम्हें परीक्षा देने आना है। | 1. आज तुम्हें परीक्षा देने जाना है। |
| 2. वह कल अवश्य आएगा। | 2. वह कल अवश्य जाएगा। |
| 3. उसका आना अनिश्चित है। | 3. उसका वहाँ जाना निश्चित है। |
| 4. तुम कल आओगे न ? | 4. तुम कल वहाँ जाओगे क्या? |
| 5. मंत्री जी ने कल आना स्वीकार कर लिया है। | 5. मुझे कल मंत्री जी से मिलने जाना है। |
(विद्यार्थी इस तरह से कुछ और वाक्य बनाने का प्रयास करें।)
डायरी
• हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले ?
उत्तर:
06/08/20××
आज सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैं आश्चर्यचकित रह गया। सुबह – सुबह दादी जी को अपने पास देखकर में प्रसन्न हो उठा। माँ ने कहा क्या बात है, आज तो दिन की शुरुआत तुमने मुस्कुराहट से की है, आज रविवार का दिन है। माँ ने मेरी पसंद का नाश्ता बनाया था। अपना मनपंसद नाश्ता खाकर अनजाने में ही मैं कोई गीत गुनगनाने लगा। इसके पश्चात दादा जी और दादी जी ने हमें उपहार दिए।
अपनी बहन के लिए लाए गए उपहार मुझे अधिक अच्छे लगे इसलिए मैं उनसे रूठ गया। माँ और दादी ने मुझे मनाने की बहुत कोशिश की, किंतु मैं मचलने लगा। फिर जैसे-तैसे करके मैं मान गया। इसके पश्चात हम सब बैठकर आपस में बातचीत करने लगे। बातचीत करते-करते पिता जी अपने बचपन के किस्से सुनाने लगे। तभी माँ ने एक चुटकुला सुनाया और हम सभी खिलखिला कर हँस पड़े।
ऐसे ही पूरा दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला।

पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
आशीर्वाद में बहुत शक्ति होती है। ये हमारे मार्गदर्शन में सहायक होते हैं। कोई भी व्यक्ति जो दूसरों के भले के लिए सोचता है वह उसे आशीर्वाद दे सकता है।
आशीर्वाद मौखिक, गैर मौखिक या लिखित किसी भी रूप में दिया जाता है।
- मौखिक – मौखिक शब्दों के उच्चारण के माध्यम से
- ग़ैर मौखिक – सिर पर हाथ रख कर ।
- लिखित – संदेश लिखकर भेजना।
• माता-पिता तथा परिजनों द्वारा दिए जाने वाले आशीर्वाद-
सदा सुखी रहो, निरंतर तरक्की करो, यशस्वी भव, परिवार का नाम रोशन करो, मिल-जुलकर रहो, ईश्वर की कृपा दृष्टि हमेशा बनी रहे, सफलता हमेशा तुम्हारे कदम चूमे, रिद्धि-सिद्धि के साथ-साथ निरोगी काया के साथ परिवार का सुख भोगो ।
अध्यापकों द्वारा दिए जाने वाले आशीर्वाद- भगवान तुम्हें खुश रखे, तुम कार्य में सफल हो, तुम्हारे सारे सपने पूरे हों, ईश्वर का आशीर्वाद तुम पर बना रहे, ईमानदारीपूर्वक अपने कर्तव्य पूरे करो, विद्या का प्रकाश बना रहे, विद्यालय का नाम रोशन करो।
(ख) आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।
उत्तर:
अपने से छोटों के प्रति शुभेच्छा
- मन लगाकर पढ़ाई करो ।
- अपने परिवार का नाम रोशन करो।
- पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी नाम कमाओ।
- परिवार को संस्कारों का पालन करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करो।
- सभी जीवों के प्रति दया, करुणा भाव रखें।
- जरूरतमंदों की सहायता का भाव रखो।
- देश, समाज व परिवार के प्रति कर्तव्य निभाओ ।
- देशभक्त और जिम्मेदार नागरिक बनो ।
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सपनों की बातें
(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें । परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें | अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ । सभी विद्यार्थी अपने – अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए-
- किस तरह के प्रयत्न होंगे?
- किस तरह से योजना बनानी होगी?
- किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
लक्ष्य – प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?

उत्तर:
छात्र के अरमान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हो सकते हैं- यथा शिक्षा, खेल, विज्ञान, समाज एवं शोध आदि । सपने पूरे करने के लिए सुझाव-
लक्ष्य निर्धारित करने से पहले वह आपस में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा करेंगे।
- किस तरह के प्रयत्न होंगे?
सर्वप्रथम तो हमें अपनी रुचियों को देखते हुए निश्चित करना होगा कि हम क्या बनना चाहते हैं फिर उसी दिशा में प्रयत्न शुरू करने होंगे-जैसे कि क्या बनने के लिए किस प्रकार की शैक्षिक योग्यताएँ शारीरिक फिटनेस, मानसिक दक्षता आदि की आवश्यकता होती है। तत्पश्चात किस प्रकार के कौन से विषय लेने होंगे आदि।
- किस तरह से योजना बनानी होगी?
अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योजना बनानी होगी कि किस विषय को कितना समय देना होगा। पाठ एवं पाठेतर अभ्यासों, दैनिक क्रियाओं में सामंजस्य हुए सभी विषयों का समायोजन करना होगा।
- किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
आजकल अलग-अलग लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अलग-अलग प्रकार के शिक्षण संस्थानों एवं कोचिंग संस्थानों की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। अतः उचित संस्थान और अध्यापकों से उनके ज्ञान, अनुभव और दिशा निर्देश संबंधी सहयोग लिया जा सकता है। अपने मित्रों, माता-पिता आदि से भी यथायोग्य सहयोग प्राप्त कर सकते हैं।
- लक्ष्य – प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
लक्ष्य-प्राप्ति में आने वाली चुनौतियों की जानकारी हम उन व्यक्तियों के इंटरव्यू आदि पढ़कर प्राप्त कर सकते हैं जो इन चुनौतियों को पार करके अपने लक्ष्य तक पहुँचे हैं। इसके अतिरिक्त अपने मित्रों, इंटरनेट आदि के द्वारा भी चुनौतियों की जानकारी और उनका सामना करने के उपायों के बारे में जाना जा सकता है।
हमारे सपने

आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं की जानते-समझते हैं। वे उन्हें पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं।

उत्तर:
| घर के सदस्यों के सपने | |
| माता | अध्यापिका |
| पिता | पत्रकार |
| दादा | डॉक्टर |
| नाना | पुलिस अधिकारी |
| नानी | गृहिणी |
| बहन | आई.पी.एस |
| भाई | राजनेता |
सबके सपने
• प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं, जैसे- शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए । साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए ।
उत्तर:
शाक विक्रेता से उसके सपने के विषय में जानने के लिए साक्षात्कार के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न और उसके काल्पनिक उत्तर-
प्रश्न – चाचा! आप कब से यह सब्ज़ी बेचने का कार्य कर रहे हैं।
शाक विक्रेता – बेटा, मैं लगभग पच्चीस वर्ष से सब्ज़ी बेचने का कार्य कर रहा हूँ।
प्रश्न – पर आपकी आयु तो ज्यादा नहीं लगती।
शाक विक्रेता – हाँ बेटा, जब मैं पंद्रह वर्ष का था तभी मेरे पिता जी का देहांत हो गया। हम चार भाई-बहन थे। माँ लोगों के घर काम करती थीं। गुजारा करना कठिन हो गया था तो मुझे पढ़ाई छोड़कर यह काम करना पड़ा।
प्रश्न – आपने बहुत जल्दी कमाना शुरू कर दिया।
शाक विक्रेता – क्या करें बेटा, मजबूरी सब कुछ करवा देती है।
प्रश्न – आपके पिता आपको क्या बनाना चाहते थे।
शाक विक्रेता – मेरे पिता जी मुझे अध्यापक बनाना चाहते थे और मेरी भी यही इच्छा थी। पर होता वही है जो भाग्य में लिखा होता है।
प्रश्न – इस बात से आप बहुत दुखी हुए होंगे।
शाक विक्रेता – हाँ, शुरू मैं बहुत दुखी होता था परंतु मेरी और मेरी माँ की मेहनत रंग लाई आज मेरे भाई-बहन पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी कर रहे हैं।
प्रश्न – फिर आप अब भी सब्जी क्यों बेचते हैं?
शाक विक्रेता – बेटा आत्मनिर्भर होना अच्छा है। मैं अपनी मेहनत के बल पर अपने बच्चों को पढ़ा रहा हूँ। यह मेरे लिए बहुत संतुष्टि की बात है।
प्रश्न – चाचा, आपकी सोच से मैं बहुत प्रभावि हुआ हूँ। बातचीत के लिए धन्यवाद !
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झरोके से
• आपने पढ़ा कि ‘एक अशीर्वाद’ कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढ़िए, सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद्बोधन जिसमें वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं, बल्कि सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया के विषय में भी बताते हैं-

सपनों की उड़ान
सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है।
आज जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं। इक्कीसवीं सदी ऐसे अनुभव पैदा कर रही है जिन्हें मानव के विकास की पिछली बीस शताब्दियों में असंभव समझा जाता था। ऐसे माहौल में जब प्रौद्योगिकी और नित नई खोजों के बल पर मानव सभ्यता तरक्की करती जा रही है, इंसान में छिपी संभावनाओं का भी तेजी से विस्तार होता जा रहा है। लेकिन इन अवसरों का अनुभव करने के लिए हमारे पास जो समय है वह उतना का उतना ही है और आज के युवा इसी दुविधा में हैं।
युवा चाहते हैं कि उन सामने जितने किस्म के अनुभव उपलब्ध हैं, वह सबका फायदा उठा सकें, जो कि उन्हें मिलना भी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हमें खुद को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित कर लेना पड़ रहा है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करना सही है। मेरा सपना है कि संसार के हर युवा को संसार के वह सारे अनुभव मिल सकें जिसकी उन्हें चाह हो। लेकिन इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है?
इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं। एक तो यह कि हम कुछ ऐसा करें कि हमारे पास जो समय उपलब्ध है उसे हम बढ़ा सकें। दूसरा यह कि हमारे पास जो समय है हम उतने ही समय में जितना काम कर सकते हैं, जितना कुछ हासिल कर सकते हैं उसकी मात्रा बढ़ा दें। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को कैसे प्राप्त किया जाए, यह समझ लेने से दूसरी हर चीज तक पहुँचने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएँगे। यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतजार था और जो हमें विकास क्रम के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।
– डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
उत्तर:
(विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या-42 पर दिए गए डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के प्रेरक उद्बोधन को पढ़ें।)
साझी समझ
• आपने ‘एक आशीर्वाद’ कविता पढ़ी और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी स्वयं चर्चा करें।
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• कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या- क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।

उत्तर:
विद्यार्थी स्वाध्याय करें।