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Class 7 Social Science Chapter 11 Question Answer in Hindi वस्तु विनिमय से मुद्रा तक
वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Question Answer in Hindi
कक्षा 7 वस्तु विनिमय से मुद्रा तक पाठ 11 के प्रश्न उत्तर मौसम को समझना
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 244-245)
प्रश्न 1.
वस्तु विनिमय प्रणाली कैसे कार्य करती थी और इस प्रणाली में किस प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग विनिमय हेतु किया जाता था?
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली तब कार्य करती थी जब लोग सीधे वस्तुओं या सेवाओं का आदान-प्रदान करते थे, बिना पैसे का उपयोग किए। इस प्रणाली में कौड़ी, नमक, चाय, कपड़ा, मवेशी. तंबाकू और बीज जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जाता था।
प्रश्न 2.
वस्तु विनिमय प्रणाली की क्या सीमाएँ थीं?
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली की कई सीमाएँ थीं :
- आवश्यकताओं का द्विसंयोग : इस प्रणाली में दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे की वस्तु की आवश्यकता होती थी. जिससे व्यापार करना कठिन हो जाता था।
- वस्तुओं के मूल्य को मापने का कोई सामान्य तरीका नहीं था, जिससे आदान-प्रदान में भ्रम उत्पन्न होता था।
- बड़ी मात्रा में वस्तुओं को ले जाना आसान नहीं था, जिससे परिवहन की समस्या उत्पन्न होती थी।
- कुछ वस्तुएँ जैसे अनाज, भंडारण के दौरान खराब हो जाती थीं।
- कुछ वस्तुएँ विभाज्य नहीं होती थीं, जैसे बड़े सामान को छोटे हिस्सों में नहीं बाँटा जा सकता था।
प्रश्न 3.
प्राचीन भारतीय सिक्कों की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर:
प्राचीन भारतीय सिक्कों की मुख्य विशेषताएँ:
- ये सिक्के सोने, चाँदी और ताँबे के मिश्र धातुओं से बनाए जाते थे, वलस, जो मजबूत और टिकाऊ होते थे।
- सिक्कों के दो पक्ष होते थे-एक पक्ष पर शीर्ष (मुख्यचित्र) और दूसरे पर पृष्ठ (पट्ट) होता था। इन पर विभिन्न प्रतीक और चित्र उकेरे जाते थे, जैसे जानवर, वृक्ष, पहाड़ और राजाओं या देवी-देवताओं के चित्र।
- ये सिक्के व्यापार में मदद् करते थे और उस समय की संस्कृति और मूल्यों को दर्शाते थे।
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प्रश्न 4.
समय के साथ मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कैसे परिवर्तित हुई?
उत्तर:
समय के साथ मुद्रा विनिमय के माध्यम में कई परिवर्तन हुए हैं :
- पहले लोग सीधे वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते थे, जिसे वस्तु विनिमय प्रणाली कहा जाता है।
- इसके बाद, व्यापार को सरल बनाने के लिए धातु के सिक्कों का उपयोग शुरू हुआ।
- फिर, सरकार द्वारा कागजी मुद्रा जारी की गई, जिससे पैसे को ले जाना आसान हो गया।
- आजकल, हम डिजिटल मुद्रा जैसे डेबिट और क्रेडिट कार्ड, और क्यू.आर.कोड का उपयांग करते हैं, जिससे भुगतान करना और भी सरल और तेज हो गया है।
प्रश्न 5.
प्राचीन काल में कौन-से कदम उठाए गए होंगे जिससे भारतीय सिक्के विभिन्न देशों में विनिमय वा माध्यम बन सकें?
उत्तर:
- मानकीकरण : शासकों ने सुनिश्चित किया कि सिक्कों का वजन और धातु की गुणवत्ता समान हो, जिससे लोग उन पर विश्वास कर सकें।
- व्यापार समझौते : पड़ोसी राज्यों के साथ व्यापार समझौते स्थापित किए गए, जिससे भारतीय सिक्कों का लेन-देन बढ़ा।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान : त्योहारों और व्यांपार मेलों के माध्यम से सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा दिया गया, जिससे सिक्कों की स्वीकृति बढ़ी।
- व्यापार के लिए सिक्कों का निर्माण : विशेष रूप से व्यापार के लिए सिक्के बनाए गए. जिन पर ऐसे प्रतीक थे जो अन्य क्षेत्रों में पहचाने जाते थे।
- सैन्य सुरक्षा : व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान की गई. जिससे वे भारतीय सिक्कों का उपयोग करने में सुरक्षित महसूस करें।
प्रश्न 6.
अर्थशास्त्र की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़ें’ 60 पणों. का एक वर्ष का वेतन प्रतिदिन एक अधक अनाज से प्रतिस्थापित हो सकता था, जो चार बार के भोजन के लिए पर्याप्त था…’ (एक अधक लगभग 3 किलोग्राम के बराबर होता है)। यह एक पण के मूल्य के विषय में क्या बताता है? पड़ोसी की सहायता न करने की दंड 100 पण था। इसकी तुलना वार्षिक वेतन से करें। इससे आप मानवीय मूल्यों के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं, जो इसके माध्यम से प्रोत्साहित किए जा रहे थे?
उत्तर:
यह पंक्ति बताती है कि एक पण का मूल्य दैनिक आवश्यकताओं सं जुड़ा है। यदि 60 पणों का वार्षिक वेतन चार बार के भोजन के लिए अनाज खरीदने में सक्षम है. तो यह दर्शाता है कि हर एक पण जीवन के लिए महत्वपूर्ण और मूल्यवान है।
100 पण का दंड वार्षिक बतन (60 पण) से अधिक है. जो दर्शाता है कि समाज में दूसरों की मद्द करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह दंड यह बताता हैं कि सहयोग और समर्थन मानव मूल्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इससे यह प्रोत्साहित होता है कि लोंग एक-दूसरे की मद्द करे, क्योंकि यह समाज में एकता और सहानुभूति को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 7.
एक नाटक लिखिए और उसका मंचन कीजिए जिसमें यह दिखाया जाए कि लोग एक-दूसरे को कौड़ी, कवच ( और ऐसी अन्य वस्तुओं) को विनिमय के माध्यम के रूप में प्रयोग करने के लिए कैसे तैयार कर सके होंगे?
उत्तर:
- नाटक : वस्तुओं का विनिमय
- पात्र : रामू (उगपारी) श्यामृ, सीता
- दृश्य : (गाँव का बाजार)
- राफू : (कौड़ी दिखात हुए) दंखो. ये कौड़ी वहुत मूल्यवान हैं। मैं इसे अच्छं सामान के लिए बदल सकता हूँ।
- श्यामू : (कव्च दिखाते हुए) मझे तुम्हारी कौड़ी चाहिए। क्या तुम मुझे यह कवच दोगे?
- रामू : हाँ, मैं तुर्में यह कवच दुँगा। (दोनों वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं)
- सीता : (आकर) भुझ भी कुछ चाहिए। क्या तुम मुझे कौड़ी में कुछ अनाज दोगे?
- रामू : (हँसते हुए) हाँ, मैं तुम्म काँड़ी के बदले अनाज दूँगा। (सभी पात्र खुश होने हैं ओर एक-दसरे से वम्नुआों का विनिमय करते हैं।)
- समापन : इस नाटक से यह दिखाया गया हैं कि लाग कैसे एक-दूसरे के साथ वस्तुओं का विनिमय कर सकते है. जैसे कौड़ी और कवच।
प्रश्न 8.
भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) ही कागजी मुद्रा को छापने व वितरण करने का एकमात्र वैधानिक स्रोत है। नोटों की अवैध छपाई और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई सुरक्षा कदम उठाए हैं। पता लगाइए कि ऐसे कुछ उपाय कौन से हैं और अपनी कक्षा में उनक्की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
भारतीय रिजर्व बैंक (आर बी.आई.) भारत में कागजी मुद्रा को छापने और वितरित करने का एकमात्र वैधानिक स्रोत है। अवैध मुद्रा छपाई और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए आर. बी.आई. ने कई सुरक्षा उपाय किए हैं।
यहाँ कुछ प्रमुख उपाय दिए गए हैं :
- जल चिह्न : नोट को प्रकाश में देखने पर एक राष्ट्रीय प्रतीक का जल चिह्द दिखाई देता है।
- सुरक्षा धागा : नोट में एक रंगीन धागा डाला गया है, जो नोट को झुकाने पर दिखाई देता है।
- रंग बदलने वाला स्याही : कुछ नंबर अलग-अलग कोणों से देखने पर रंग बदलते हैं।
- उभरा मुद्रण : नोट को छूने पर उभरे हुए अक्षर महसूस होते हैं।
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प्रश्न 9.
अपने परिवार के कुछ सदस्यों और स्थानीय दुकानदारों का साक्षात्कार लीजिए और उनसे पूछिए कि वे भुगतान करने या प्राप्त करने में नकद या यू.पी.आई. में किसको व्ररीयता देंगे और क्यों?
उत्तर:
परिषार के सदम्य और दुकानदार यू.पी.आई. (यूनिफाडड पेमेंट्स इंटरफेस) को अधिक पसंद करते हैं। इसका कारग यह है कि यह तेज और मविधाजनक है। लोग अपने स्मार्टफोन के बिना नकद्र का भुगतान कर सकते हैं। दुकानदारों को भी गह पसंद है क्योंकि इससं नकद संभालने की जरूरत कम होती है, जिससे लंन-दन सुर्गक्षत रहता है।
वस्तु विनिमय से मुद्रा तक Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 11 Question Answer
महत्वपूर्ण प्रश्न? (पृष्ठ 229)
प्रश्न 1.
मुद्रा प्रचलन से पहले विनिमय कैसे होता था?
उत्तर:
जब मुद्रा नहीं थी, तब लोग वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग करते थे। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास अनाज था और उसे कपड़े चाहिए थे. तो वह अपने अनाज को कपड़े वाले के साथ बदल सकता था। इसी तरह, यदि कपड़ा बनाने वाले को नमक चाहिए था, तो वह कपड़े या अनाज के बदले नमक ले सकता था। इस प्रकार, दोनों पक्ष अपनी आवश्यकताओं को बिना पैसे के पूरा कर लेते थे।
प्रश्न 2.
मुद्रा प्रचलन में क्यों आई?
उत्तर:
मुद्रा का प्रचलन इसलिए हुआ क्योंकि वस्तु विनिमय प्रणाली में कई समस्याएँ थीं।
- यह कठिन था कि कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो आपके पास जो वस्तु है, उसके बदले में आपको वही वस्तु दे सके जिसकी आपको आवश्यकता थी।
- कुछ वस्तुएँ जल्दी खराब हो जाती थीं या उनका वजन इतना अधिक होता था कि उन्हें ले जाना मुशिकल होता था।
- मुद्रा ने इन समस्याओं का समाधान किया। जिससे व्यापार करना आसान और अधिक प्रभावी हो गया।
प्रश्न 3.
समय के साथ मुद्रा विभिन्न रूपों में कैसे परिवर्तित हुई?
उत्तर:
समय के साथ मुद्रा के विभिन्न रूपों में कई परिवर्तन हुए हैं। पहले मुद्रा के रूप में साधारण वस्तुएँ जैसे शंख और अनाज का उपयोग होता था। इसके बाद, धातु के सिक्के जैसे सोना, चाँदी और ताँबा का प्रयोग शुरू हुआ। फिर कागजी मुद्रा आई, जो ले जाने में आसान थी। आजकल, हम ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल मुद्रा का उपयोग करते हैं, जैसे क्रेडिट-डेबिट कार्ड और मोबाइल भुगतान, जिससे लंन-देन और भी तंज और सुविधाजनक हो गया है।
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आइए विचार करें (पृष्ठ 232)
प्रश्न:
ऊपर (पाठ्यपुस्तक में) दी गई स्थिति में आपको किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर:
इन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा :
- मुझे किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ना होगा जो बैल चाहता हो। यह आसान नहीं है क्योंकि सभी को बैल की आवश्यकता नहीं होती। इस स्थिति को ‘आवश्यकताओं का द्विसंयोग’ कहा जाता है।
- बैल का मूल्य बहुत अधिक होता है, इसलिए इसे छोटे सामान जैसे जूते, कपड़े और दवाइयों के लिए बदलना मुश्किल होता है। मुझे यह सुनिश्चित करना होगा कि मैं सही मूल्य पर वस्तुएँ प्राप्त कर रहा हूँ, जो कि एक चुनौती है।
आइए विचार करें (पृष्ठ 233)
प्रश्न 1.
उपर्युक्त उदाहरण में आवश्यकताओं के द्विसंयोग के क्या दृष्टांत हैं?
उत्तर:
उपर्युक्त उदाहरण में आवश्यकताओं के द्विसंयोग का अर्थ है कि जब किसान को ऐसा व्यक्ति मिलता है जिसे बैल की जरूरत है और वह कुछ ऐसा देना चाहता है जो किसान को चाहिए, जैसे जूते या दवाइयाँ। लेकिन, दोनों पक्षों को अपने सामान के मूल्य पर सहमत होना आवश्यक है।
प्रश्न 2.
उपर्युक्त स्थिति में वे कौन-से मामले हैं जहाँ आपको मूल्य के सामान्य मानक माप की कमी का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर:
जब एक किसान अपने बैल का व्यापार विभिन्न वस्तुओं के लिए करता है. तो उसे मूल्य के सामान्य मानक माप की कमी का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, एक जोड़ी जूतों के लिए कितने बोंरे गेहूँ का आदान-प्रदान होगा, यह स्पष्ट नहीं होता।
इस स्थिति में, किसान और जूते बनाने वाला दोनों की वस्तुओं का मूल्य अलग-अलग हो सकता है। इससे भ्रम उत्पन्न हांता है और व्यापार करना कठिन हो जाता है।
आइए विचार करें (पृष्ठ 233)
प्रश्न:
ऐसे कुछ उपाय सुझाइए जिससे मुद्रा के प्रयोग द्वारा किसान का स्थिति को सरल बनाया जा सके ?
उत्तर:
भंडारण : गेहूँ की तरह मुद्रा सड़ती नहीं है, इसलिए किसान इसे लंबे समय तक रख सकता है।
- सुविधा : किसान को भारी गेहूँ के बोरे लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती।
- मूल्य तुलना : वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य निश्चित होते हैं, जिससे किसान को व्यापार करना आसान हो जाता है।
- समय की बचत : मुद्रा के माध्यम से लेन-देन जल्दी और सरलता से होता है. जिससे समय बचता है।
- स्थगित भुगतान : यदि किसान के पास अभी पर्याप्त मुद्रा नहीं है, तो वह बाद में भुगतान कर सकता है। इससे उसे तुरंत खरीदारी करने का द्वाव नहीं होता।
- चुनाव की स्वतंत्रता : किसान अपनी पसंद की वस्तुएँ और संवाएँ किसी भी विक्रेता से खरीद सकता है, जिससे उसे अधिक विकल्प मिलते हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 236)
प्रश्न:
पहले दिए गए चित्रणों में वस्तु विनिमय प्रणाली के कुछ तरीके दर्शाए गए हैं। क्या आपने अपने क्षेत्र में इस तरह के प्रयोगों का अवलोकन किया है? इस प्रक्रिया में लोगों को किस-किस प्रकार के अनुभव होते हैं?
उत्तर:
हाँ, सकारात्मक अनुभव:
- लोग बिना पैसे खर्च किए अनावश्यक वस्तुओं को उपयोगी वस्तुओं के लिए बदलते हैं।
- जो व्यक्ति अनावश्यक वस्तु बेचता है, उसे भी लाभ होता है।
- वस्तुओं का पुनः उपयोग करने से संसाधनों का बोझ कम होता है और कचरा भी घटता है।
नकारात्मक अनुभव :
- वस्तु विनिमय की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।
- कभी-कभी लोग वस्तुओं के मूल्य पर सहमत नहीं होते, जिससे विनिमय का मूल्य असमान हो सकता है।
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आइए विचार करें (पृष्ठ 237)
प्रश्न:
मान लीजिए कि आपको एक पुस्तक खरीदनी है। आपकी जेब में ₹ 50 हैं। आप अपने पड़ोस की पुस्तक की दुकान पर जाते हैं और वहाँ दुकानदार आपको पुस्तक की कीमत ₹ 100 बताता है। आपके पास आज पुस्तक खरीदने के क्या विकल्प हैं? क्या आप दुकानदार को शेष भुगतान बाद में करने की अनुमति देने का अनुरोध करेंगे?
उत्तर:
आपके पास आज पुस्तक खरीदने के कुछ विकल्प हैं :
- आप घर जाकर अपने माता-पिता से कह सकते हैं कि वे आपको ₹ 100 दें।
- आप अपने पिता से कह सकते हैं कि वे शेष ₹ 50 डिजिटल भुगतान, दुकानदार को करें।
- आप किसी दोस्त या रिश्तेदार से ₹ 50 उधार ले सकते हैं ताकि आप पुस्तक खरीद सकें।
हाँ, आप दुकानदार से अनुरोध कर सकते हैं कि वे आपको बाकी का भुगतान बाद में करने की अनुमति दें।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 237)
प्रश्न:
(पाठ्यपुस्तक में) चित्र 11.10 में दी गई समय-रेखा को देखें। आपने मुद्रा में क्या-क्या बदलाव देखें?
उत्तर:
समय-रेखा में मुद्रा के बदलाव :
- वस्तु विनिमय (6000 सा.स.पृ.) : लोग सीधे वस्तुओं का आदान-प्रदान करते थे, बिना किसी मुद्रा के।
- कौड़ी (1000 सा.सं.पू.) : कौड़ियाँ मुद्रा के रूप में उपयोग की जाने लगीं।
- धातु सिक्के (600 सा.सं.पू.) : सोने, चाँदी और ताँबे जैसे धातुओं से बने सिक्के प्रचलित हुए।
- कागजी मुद्रा (1861) : लेन-देन के लिए आधिकारिक कागजी नोट़ों का उपयोग शुरू हुआ।
- डिजिटल मुद्रा (1980) : डेबिट और क्रेडिट कार्डों ने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को संभव बनाया।
- यू.पी.आई (2016) : यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने स्मार्टफोन के माध्यम से डिजिटल लेन-देन को और आसान बना दिया।
इस प्रकार लेन-देन सुरक्षित, सुविधाजनक और तेज हो गया है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 239)
प्रश्न:
(पाठ्यपुस्तक में) चित्र 11.12 में दर्शाए गए सिक्के तमिलनाडु में स्थित पुड्डूकोटाई में उत्खनन के समय मिले हैं। उनके ‘शीर्ष’ पर रोमन राजाओं की आकृति उकेरी हुई है। इस तरह की जानकारियों के द्वारा हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर:
रोमन सिक्कों का मिलना यह दर्शाता है कि भारत और रोमन साम्राज्य के बीच समुद्री व्यापार हुआ करता था। इससे यह पता चलता है कि दक्षिण भारत में मसाले, कपड़े और कीमती पत्थरों का आदान-प्रदान होता था।
इसका अर्थ है कि दक्षिण भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत थी और वहाँ के लोग विश्व के अन्य हिस्सों के साथ व्यापार कर रहे थे।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 241)
प्रश्न:
आपके विचार में क्या हुआ होगा जब सिक्कों का प्रयोग हर प्रकार के लेन-देन के लिए शुरू हुआ होगा, चाहे वह सज्जियाँ हों या जमीन खरीदना हो? ऐसी क्या समस्याएँ उत्पन्न हुई होंगी?
उत्तर:
जब सिक्कों का प्रयांग हर प्रकार के लेन-देन के लिए शुरू हुआ, तो इससे व्यापार करना आसान, तेज और मानकीकृत हो गया। इससे वस्तु विनिमय प्रणाली की कई समस्याएँ हल हो गई। हालाँकि, कुछ समस्याएँ अभी भी बनी रहीं :
- जैसे जमीन खरीदने के लिए बहुत सारे सिक्के चाहिए होते थे, जा ले जाना कठिन था।
- सिक्के सुरक्षित रखने में मुश्किल होती थी, जिससे चोरी का डर रहता था।
- कुछ लोग नकली सिक्के बनाकर उपयोग करते थे, जिससे आर्थिक नुकसान होता था।
- सिक्कों का गिनने और संभालने में समय लगता था, जिससे लेन-दन में देरी होती थी।
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आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 242)
प्रश्न:
₹ 50 और ₹ 100 के नोटों को देखिए। क्या आप नोटों के पृष्ठ भाग पर दर्शाई गई भारत की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित आकृतियों को पहचान पा रहे हैं? इनके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
→ नोटों की सतह को छूकर महसूस कीजिए। क्या दृष्टिबाधित लोगों के लिए नोटों पर अंकित मूल्य को पहचानने हेतु कोई विशेष लक्षण हैं?
उस्तर:
हाँ, ₹50 के नोट पर हम “हंपी का पत्थर रथ” देख सकते हैं, जो भारत की समृद्ध वास्तुकला को दर्शाता है। ₹ 100 के नोट पर “रानी की वाव” है, जो गुजरात में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी है। ये आकृतियाँ हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर को दिखाती हैं।
हाँ, दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारतीय मुद्रा ।में कुछ खास लक्षण हैं। जैसे-
- नोटों पर उभरी हुई छाप होती है, जिसे छूकर महसूस किया जा सकता है।
- हर नोट पर अलग पहचान चिह्न होते हैं।
- नोटो के रंग और आकार भी अलग होते हैं।
ये विशेषताएँ दृष्टिबाधित लोगों के लिए नोटों को पहचानना आसान बनाती हैं