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Class 7 Social Science Chapter 8 Question Answer in Hindi भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं?
भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं? Question Answer in Hindi
कक्षा 7 भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं? पाठ 8 के प्रश्न उत्तर मौसम को समझना
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 183-184)
प्रश्न 1.
प्रसिद्ध पर्यावरणविद डेविड सुजुकी के निम्नलिखित वाक्य पढ़ें – “हम जिस दृष्टि से विश्व को देखते हैं, उसी के अनुसार उसके साथ व्यवहार करते हैं। अगर पर्वत एक देवता है, न कि खनिज का ढेर; अगर नदियाँ पृथ्वी की शिराएँ हैं, न कि केवल सिंचाई का स्रोत; अगर वन पावन निकुंज है, न कि केवल इमारती लकड़ियों का ढेर; अगर अन्य प्रजातियाँ हमारे संबंधी हैं, न कि केवल साधनमात्र या अगर पृथ्वी हमारी माता है, न कि केवल संसाधन; तब हम इन सभी के साथ अत्यंत आदर के साथ व्यवहार करते हैं। अतः यह विश्व को एक अलग परिप्रेक्ष्य में देखने की चुनौती है।”
इस पर छोटे समूह में चर्चा कीजिए। आप उक्त वाक्यों से क्या समझते हैं? इससे हमारे चारों ओर विद्यमान वायु, जल, भूमि, वृक्ष तथा पर्वत के प्रति हमारे व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
डेविड सुजुकी के वाक्य का अर्थ है कि हमें प्रकृति को एक पवित्र और महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। अगर हम पहाड़ों, नदियों, पेड़ों और पृथ्वी को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा समझते हैं, तो हम उनका सम्मान करेंगे। इससे हमारे चारों ओर की वायु, जल. भूमि और वृक्षों के प्रति हमारा व्यवहार सकारात्मक होगा।
- इसका प्रभाव यह होगा कि हम वायु और जल प्रदूषण को कम करेंगे, जल स्रोतों की रक्षा करेंगे।
- भूमि का अति उपयोग नहीं करेंगे और वनों की कटाई को संतुलित करेंगे।
- हमें पहाड़ों का अति दोहन नहीं करना चाहिए और उन्हें प्रदूषण से मुक्त रखना चाहिए।
प्रश्न 2.
अपने क्षेत्र के पावन स्थलों की सूची बनाइए। पता लगाइए कि ये स्थल पावन क्यों माने जाते हैं? क्या इनसे जुड़ी कोई कहानियाँ हैं? इस विषय में 150 शब्दों में एक संक्षिप्त लेख लिखिए। (संकेत-आप अपने परिवार एवं समुदाय के वरिष्ठ लोगों से चर्चा कर सकते हैं। अपने शिक्षक से भी विचार-विमर्श कीजिए। इस प्रकार की सूचनाओं का संग्रह करने के लिए लेख एवं पुस्तक पढ़िए)।
उत्तर:
- हमारे समाज में कई ऐसे स्थलों की मान्यता है, उदाहरण के लिए, गंगा नदी और काशी विश्वनाथ मंदिर।
- गंगा नदी को पवित्र माना जाता है क्योंकि इसे जीवनदायिनी और पवित्र जल का स्रोत माना जाता है। इसके किनारे लोग स्नान करते हैं और पूजा करते हैं, जिससे उन्हें शुद्धि और आशीर्वाद मिलता है। इसके बारे में एक कहानी है कि गंगा देवी स्वर्ग से धरती पर आई थीं, जिससे यह नदी पवित्र हो गई।
- इसी तरह, काशी का विश्वनाथ मंदिर ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक है। कहा जाता है कि यहाँ भगवान शिव का निवास है, और जो भक्त यहाँ आते हैं, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 3.
आपके विचार में प्राकृतिक तत्व, जैसे -नदी, पर्वत और वन आदि लोगों के लिए पावन क्यों माने जाते हैं? वे हमारे जीवन में किस प्रकार योगदान देते हैं?
उत्तर:
- प्राकृतिक तत्व, जैसे-नदियाँ, पर्वत और वन, हमारे लिए पावन माने जाते हैं क्योंकि ये जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इनसे हमें जल, भोजन और आश्रय मिलता है। उदाहरण के लिए, गंगा नदी को पवित्र माना जाता है. जो शुद्धता और जीवन का प्रतीक है।
- नदियाँ हमें पीने का पानी, कृषि के लिए जल और दैनिक उपयोग के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती हैं।
- पर्वत नदियों को जल देते हैं, खनिज प्रदान करते हैं और जलवायु को निर्यंत्रित करते हैं।
- वन हमें औषधियाँ, भोजन, लकड़ी, रेत और पक्षियों तथा जानवरों के लिए आश्रय प्रदान करते हैं।
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प्रश्न 4.
लोग तीर्थ या अन्य पावन स्थलों की यात्रा क्यों करते हैं?
उत्तर:
- आध्यात्मिक शांति : लोग यहाँ प्रार्थना करने और आशीर्वाद पाने आते हैं. जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है।
- संस्कृति और परंपरा : ये यात्रा उनके पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का एक तरीका है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि : लोग लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, खुशियों और धन के लिए भी इन स्थलों पर जाते हैं।
- समस्याओं का समाधान : कई बार लोग यहाँ आकर अपने अनसुलझी समस्याओं का समाधान खोजते हैं।
- तनाव कम करना : तीर्थ यात्रा से मानसिक तनाव कम करने में मदद मिलती है।
प्रश्न 5.
प्राचीन तीर्थयात्रा मार्गों ने उस समय किस प्रकार व्यापार को प्रोत्साहित किया? आपके अनुसार ये पावन स्थल उन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक बने?
उत्तर:
प्राचीन तीर्थयात्रा मार्गों ने व्यापार को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीर्थयात्री यात्रा के दौरान खाद्य सामग्री और अन्य सामान की आवश्यकता महसूस करते थे। इस कारण व्यापारी इन मार्गों के किनारे दुकानें खोलते थे, जिससे वे तीर्थयात्रियों को सामान बेचते थे।
इसके अलावा. कई तीर्थयात्री व्यापारी भी होते थे, जो अपने सामान को तीर्थ स्थलों पर बेचते थे। इस प्रकार, पावन स्थलों ने क्षेत्र के आर्थिक विकास में मदद की। स्थानीय लोग और व्यापारी तीर्थयात्रियों की आवश्यकताओं जैसे भोजन, कपड़े, परिवहन, गाइड, रेस्तरां, होटल और हस्तशिल्प की पूर्ति करते थे।
प्रश्न 6.
पावन स्थल किस प्रकार वहाँ के लोगों की संस्कृति और परंपरा को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
पावन स्थल स्थानीय लोगों की संस्कृति और परंपराओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
- ये स्थल सामुदायिक समारोहों, मेले, त्योहारों और अनुष्ठानों का केंद्र बनते हैं, जिससे सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
- पावन स्थलों से स्थानीय कला, नृत्य, संगीत और कहानी कहने की परंपराएँ विकसित होती हैं, जो समुदाय के विश्वास और मूल्यों को दर्शाती हैं।
- ये स्थल प्रकृति के प्रति सम्मान को बढ़ावा देते हैं और स्थायी प्रथाओं को प्रोत्साहित करते हैं, जैसे कि पवित्र वन और नदियाँ।
प्रश्न 7.
भारत के विविध प्रकार के पावन स्थलों में से अपनी रुचि के अनुसार किन्हीं दो का चयन कीजिए तथा उनका महत्व बताते हुए एक परियोजना बनाइए।
उत्तर:
भारत में दो कई पावन स्थल :
- वाराणसी (काशी) : वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है और इसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है। यह गंगा नदी के किनारे स्थित है, जिसे आत्मा की शुद्धि का स्रोत माना जाता है। यहाँ पर बहुत से तीर्थयात्री आते हैं ताकि वे धार्मिक अनुष्ठान कर सकें और मोक्ष प्राप्त कर सकें। वाराणसी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, जो भारतीय संस्कृति में गहराई सं जुड़ा हुआ है।
- अमरनाथ गुफा : यह पावन स्थल हिमालय में स्थित है और यहाँ अमरनाथ यात्रा का आयोजन होता है, जहाँ भक्त प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग को देखने आते हैं। यह स्थल भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती के बीच की दिव्य संबंध का प्रतीक है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहाँ आते हैं, जो इस गुफा की पवित्रता और आध्यात्मिकता को महसूस करते हैं।
प्रश्न 8.
तीर्थयात्राएँ किस प्रकार दोहरा महत्व रखती हैं?
उत्तर:
तीर्थयात्राएँ दोहरा महत्व रखती हैं:
- आध्यात्मिक महत्व : तीर्थयात्रा एक शारीरिक यात्रा होती है, जो लोगों को पवित्र स्थलों से जोड़ती है। यह यात्रा उनके विश्वास और आध्यात्मिकता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है।
- सांस्कृतिक महत्व : तीर्थयात्रा से लोग एक-दूसरे के साथ मिलते हैं, विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं, कहानियों और विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि बढ़ती है।
भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं? Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 8 Question Answer
महत्वपूर्ण प्रश्न? (पृष्ठ 167)
प्रश्न 1.
‘पावनता’ क्या है?
उत्तर:
‘पावनता’ का अर्थ है वह स्थिति या गुण जो धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़ी होती है। यह स्थान या व्यक्ति को आदर और श्रद्धा योग्य बनाती है।
प्रश्न 2.
भूमि कैसे पावन हो जाती है?
उत्तर:
भूमि पावन होने का अर्थ है कि वह भूमि लोगों की आस्था, विश्वास और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी होती है। जब किसी स्थान को महत्वपूर्ण घटनाओं, देवताओं या आध्यात्मिक अनुभवों से जोड़ा जाता है, तो वह भूमि पावन बन जाती है।
उदाहरण के लिए, भारत में कुछ पर्वत और नदियाँ जैसे गंगा और हिमालय को दिव्य माना जाता है।
प्रश्न 3.
पावन स्थल और तीर्थ स्थल का अंतर्संबंध किस प्रकार मानव जीवन और संस्कृति से जुड़ जाता है?
उत्तर:
पावन स्थल और तीर्थ स्थल मानव जीवन और संस्कृति से गहरे जुड़े होते हैं। ये स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। लोग यहाँ पूजा-अर्चना करने, आस्था प्रकट करने और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करने आते हैं। इससे समाज में एकता बढ़ती है।
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प्रश्न 4.
पावन भूगोल ने भारतीय उपमहाद्वीप के सांस्कृतिक एकीकरण में किस प्रकार की भूमिका निभाई है?
उत्तर:
पावन भूगोल ने भारतीय उपमहाद्वीप के सांस्कृतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहाँ की नदियाँ, पर्वत और अन्य प्राकृतिक स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र बने हैं। लोग इन स्थलों पर श्रद्धा से आते हैं. जिससे सांस्कृतिक एकता बढ़ती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 168)
प्रश्न:
क्या आप इनमें से किसी चित्र से परिचित हैं? क्या आप अपने आस-पास इसी तरह के किसी स्थान का नाम बता सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, हमारे आस-पास ऐसे कई पवित्र स्थान होते हैं, जैसे-मंदिर, मस्जिद या चर्च।
इन स्थलों का अपना-अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। उदाहरण के लिए, मंदिर में लोग पूजा करते हैं, मस्जिद में नमाज अदा की जाती है और चर्च में लोग प्रार्थना करते हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 171)
प्रश्न 1.
इस उद्धरण को पढ़िए। इस विषय में आपका क्या अभिमत है? उस मार्ग को दर्शाइए, जिससे होकर उन यात्रियों ने रामेश्वरम से हरिद्वार तक की यात्रा की होगी। आपके अनुसार, इन यात्रियों ने दिल्ली रूकने के स्थान पर सीधे हरिद्वार की यात्रा क्यों की?
उत्तर:
इस उद्धरण में एक समूह के तीर्थयात्रियों का वर्णन है. जो लखनऊ के उत्तर में अपने दो गाँवों से रामेश्वरम से हरिद्वार तक यात्रा कर रहं हैं। ये लोग पिछले तीन महीनों से तीर्थ यात्रा पर हैं और उनके पास मिट्टी के बर्तन और खाने की चीजें हैं।
यात्रा का मार्ग संभवतः इस प्रकार हो सकता है:
रामेश्वरम → मदुरै → चेन्नई → नागपुर → भोपाल → आगरा → दिल्ली → हरिद्वार।
ये तीर्थयात्री हरिद्वार पहुँचने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। वे दिल्ली में रुकने के बजाय सीधे हरिद्वार की यात्रा करना चाहते हैं।
प्रश्न 2.
प्राचीन काल में जब लोगं तमिलनाडु के मदुरई से उत्तर प्रदेश के वाराणसी की यात्रा करते थे, तो उनका संपर्क किन-किन भाषाओं से होता होगा? उन स्थानों में वे लोगों से कैसे वार्तालाप करते होंगे? वे कहाँ ठहरते होंगे? वे किस प्रकार का भोजन करते होंगे?
उत्तर:
- जब लोग प्राचीन काल में तमिलनाडु के मदुरई से उत्तर प्रदेश के वाराणसी की यात्रा करते थे, तो उनका कई भाषाओं से संपर्क होता होगा जैसे-तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मराठी, हिंदी और संभवतः संस्कृत शामिल होगी।
- यात्रा के दौरान, यदि वे एक ही भाषा नहीं बोलते थे, तो वे सरल वाक्यांशों, हाथ के इशारों या संकेत भाषा का उपयोग करके संवाद करते थे।
- यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशालाएँ, मंदिर या मठ होते थे, या वे स्थानीय परिवारों के साथ भी रह सकते थे।
- उनका भोजन क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों पर निर्भर करता था। तमिलनाडु में वे चावल और दाल का सेवन करते थे, जबकि उत्तर प्रदेश में चपाती और करी का भोजन करते थे।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 173)
प्रश्न:
चार धामों की स्थिति का पता लगाइए। आपके अनुसार जब लोगों ने भारत के उत्तर: दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम की यात्रा की, तब उनके लिए इन धामों का क्या कोई विशेष महत्व था?
उत्तर:
चार धामों की स्थिति निम्नलिखित है :
- उत्तर : बद्रीनाथ (उत्तराखंड)
- दक्षिण : रामेश्वरम (तमिलनाडु)
- पूर्व : पुरी (ओडिशा)
- पश्चिम : द्वारका (गुजरात)
इन धामों की यात्रा का विशेष महत्व है। जब लोग उत्तर: दक्षिण और पूर्व-पश्चिम की यात्रा करते हैं, तो वे विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, और परपराओं से मिलते हैं।
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आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 174)
प्रश्न:
क्या आप ऊपर दिए गए (पाठ्यपुस्तक में) मानचित्र में कुछ पारंपरिक तीर्थों की पहचान कर सकते हैं? आप पुस्तक के अंत में दिए गए राजनैतिक मानचित्र की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
- चार धाम : चार धाम भारत के चार कोनो में स्थित पवित्र तीर्थ स्थल हैं। ये हैं बद्रीनाथ (उत्तर), द्वारका (पश्चिम), पुरी (पूर्व) और रामेश्वरम (दक्षिण)। ये स्थल आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक हैं।
- ज्योतिर्लिंग : भारत में 12 ज्योतिर्लिग हैं, जो भगवान शिव को समर्पित पवित्र स्थल हैं। इनमें सोमनाथ (गुजरात), काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन, मध्य प्रदेश) और केदारनाथ (उत्तराखंड) शामिल हैं।
- शक्ति पीठ : शक्ति पीठ देवी के पवित्र स्थलों को कहते हैं। इनमें कामाख्या (असम), कालीघाट (कोलकाता, पश्चिम बंगाल) और वैष्णो देवी (जम्मू और कश्मीर) शामिल हैं। ये स्थल देवी की शक्ति का प्रतीक हैं।
एसे अनदेखा न करें (पृष्ठ 176)
प्रश्न:
लगभग 66 करोड़ लोगों ने 2025 के कुंभ मेले में भाग लिया था। भारत की पूरी जनसंख्या का यह कितना अनुपात है?
उत्तर:
कुंभ मेले में लगभग 66 करोड़ लोगों ने भाग लिया। अगर भारत की जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, तो यह लगभग 47% है।
आइए विचार करें (पृष्ठ 177)
प्रश्न:
आपके विचार में किस प्रकार ये पावन स्थल लोगों के आर्थिक जीवन और गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। मानस मानचित्र (माइंड मैप) के माध्यम से इन संबंधों का पता लगाएँ। (संकेत-चित्र 8.7 और 8.8 में इस विषय में कुछ जानकारियाँ दी गई हैं।)
उत्तर:
पावन स्थल :

पृष्ठ संख्या 180
प्रश्न:
नीचे दी गई तालिका में भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में पावन निकुंजों के लिए प्रयुक्त नाम दिए गए हैं। क्या आप इसमें कुछ नए नाम जोड़ सकते हैं?
उत्तर:
| भाषा | पावन निकुंज के नाम |
| गुजराती | देवगुड़ी |
| उड़िया | जाहेरा |
| कन्नड़ | देवरा काडु |
| पंजाबी | पवित्र जंगल |
| तमिल | कोवी काडुगल |
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 181)
प्रश्न:
पारदर्शी कागज की एक शीट लीजिए जिसका उपयोग अनुरेखण (टूसिंग) के लिए किया जा सकता हो। ‘साप्राज्यों उदय’ का नामक अध्याय में दिए व्यापारिक मार्गों के मानचित्र का अनुरेखण कीजिए। इसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों के मानचित्र पर रखिए। आप इसके द्वारा क्या अवलोकन कर पा रहे हैं?
उत्तर:
हम देख सकते हैं कि कई व्यापारिक मार्ग तीर्थ यात्रा के रास्तों के साथ ओवरलैप करते हैं। इसका मतलब है कि व्यापारी और तीर्थ यात्री समान रास्तों पर यात्रा करते थे। यह दर्शाता है कि व्यापार और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
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आइए विचार करें (पृष्ठ 182)
प्रश्न:
उन स्थानों और प्राणियों के चित्रों को सावधानीपूर्वक देखिए, जिन्हें पावन माना जाता है। उत्तर में यमुना, पूर्व में महानदी तथा दक्षिण में कावेरी, ये सभी नदियाँ पावन मानी जाती हैं। फिर भी ये इतनी प्रदूषित कैसे हो गईं? क्या आपके आस-पास ऐसे पावन स्थल हैं, जो मानवीय गतिविधियों के कारण इसी तरह प्रदूषित एवं क्षीण हो गए हैं? हमारे पावन स्थलों की पावनता को बनाए रखना किसका दायित्व है? क्या में इस विषय पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
पावन नदियाँ जैसे यमुना, महानदी और कावेरी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये नदियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से पावन मानी जाती हैं, लेकिन मानव गतिविधियों के कारण ये प्रदूषित हो गई हैं। जैसे कि सीवेज, औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक, कपड़े धोना और जनसंख्या वृद्धि।
इन पावन स्थलों की पवित्रता बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। इसमें व्यक्तिगत. सामुदायिक और सरकारी प्रयास शामिल हैं।