Reading Class 7 Hindi Notes Malhar Chapter 1 माँ, कह एक कहानी Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
माँ, कह एक कहानी कविता Class 7 Summary in Hindi
माँ, कह एक कहानी Class 7 Hindi Summary
माँ, कह एक कहानी कविता का सारांश
कविता का सार
यह कविता एक छोटे बच्चे और उसकी माँ के बीच के संवाद को प्रस्तुत करती है। बच्चा अपनी माँ से बार-बार कहता है- “माँ, कह एक कहानी ।” माँ कई बार व्यस्त रहती हैं, कभी घर के काम में, कभी खाना पकाने में, तो कभी साफ – सफाई में, लेकिन बच्चा अपनी जिद पर अड़ा रहता है और बार – बार एक कहानी सुनाने को कहता है।
कविता में माँ की दिनचर्या और उनकी जिम्मेदारियाँ बहुत ही सहज और सजीव ढंग से दिखाई गई हैं। अंतत: माँ को एहसास होता है कि उसका बच्चा केवल कहानी नहीं, बल्कि उसके प्यार, समय और साथ की तलाश कर रहा है। माँ सब काम छोड़कर उसे कहानी सुनाने बैठ जाती हैं।
माँ, कह एक कहानी Class 7 Summary in Hindi
‘माँ, कह एक कहानी’ कविता ‘मैथिलीशरण गुप्त ‘ द्वारा रचित है। यशोधरा, जो गौतम बुद्ध की पत्नी थी, अपने पुत्र राहुल के कहानी सुनाने हेतु आग्रह करने पर उसे नैतिक शिक्षा पर आधारित कहानी सुनाना चाहती है। कहानी में एक शिकारी द्वारा घायल किए गए हंस की रक्षा करने की घटना है जिसमें करुणा, दया एवं न्याय के भाव उजागर होते हैं।

राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहता है कि माँ मुझे एक कहानी सुनाओ। राजा या रानी किसी की भी कहानी सुनाओ। माँ कहती है कि पुत्र तू हठ करता है तो सुन ! एक दिन सुबह-सवेरे तुम्हारे पिता बगीचे में घूम रहे थे। फूलों की सुंगध चारों ओर फैली थी। इतना सुनते ही राहुल की जिज्ञासा बढ़ जाती है, वह कहता है माँ यही कहानी सुननी है। माँ कहती है कि वहाँ रंग-बिरंगे फूल थे, उन पर ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। हवा के हल्के-हल्के झोंके बह रहे थे।

तालाबों में पानी लहरा रहा था। राहुल फिर कहता है, हाँ माँ! मुझे यही कहानी सुनाओ। माँ आगे सुनाती हैं। कि पक्षियों का कल-कल का स्वर सुनाई दे रहा था। उसी समय अचानक नुकीले तीर से घायल होकर एक हंस नीचे गिरा। उसके पंख घायल हो गए थे। तुम्हारे पिता ने चौंककर उसे उठा लिया और उसे बचाने का निर्णय लिया, इतने में ही आखेटक (शिकारी) आ गया। उसे अपने अचूक निशाने
पर बहुत घमंड था। उसने आते ही घायल पक्षी पर अधिकार जताया। अब आखेटक और उसके पिता में तर्क-वितर्क होने लगा कि उसे कौन लेगा? दयालु और निर्दय में कहा-सुनी होने लगी। यह बात इतनी बढ़ गई कि राज्य के न्यायालय तक पहुँच गई। तब सभी लोगों ने इस कथा को सुना और जाना जिससे यह कहानी व्यापक हो गई। अंत में यशोधरा ने राहुल से कहा कि तुम ही निर्णय करो कि न्याय किस तरफ़ का होना चाहिए। यह तुम निर्भय अर्थात बिना किसी डर भय के बताओ।

राहुल ने कहा माँ ! मैं क्या बताऊँ? मैं तो कहानी सुन रहा हूँ। राहुल फिर भी यह कहता है कि यदि कोई अकारण बिना अपराध के किसी को मारे तो क्या दूसरे को उसकी रक्षा नहीं करनी चाहिए? मारने वाले से रक्षा करने वाला महान होता है। न्याय सदैव दया का पक्ष लेता है। इस पर माँ यशोधरा खुश हो जाती है। वह समझ जाती है कि उसका पुत्र दया से परिपूर्ण न्याय चाहता है और कहानी के मर्म को ठीक से समझ गया है।