रस्साकशी NCERT Class 3rd Hindi Veena Chapter 10 Question Answer
रस्साकशी Class 3 Question Answer
बातचीत के लिए
प्रश्न 1.
आप कौन-कौन से खेल खेलते हैं?
उत्तर-
छात्र बताएँ कि वे कौन-कौन से खेल खेलते हैं, जैसे- क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल आदि।
प्रश्न 2.
आपका सबसे प्रिय खेल कौन-सा है?
उत्तर-
छात्र अपने मनपसंद खेल का नाम बताएँ।
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प्रश्न 3.
ऐसे खेलों के नाम बताइए जिनमें दो टीमें आमने-सामने होती हैं?
उत्तर-
कबड्डी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल आदि कुछ ऐसे खेल हैं जिनमें दो टीमें आमने-सामने होती हैं।
प्रश्न 4.
आपने रस्सी का प्रयोग करते हुए कौन-कौन से खेल खेले हैं?
उत्तर-
छात्र अपना अनुभव लिखें; जैसे- रस्सी कूद, रस्सी का झूला डालकर झूलना आदि।
प्रश्न 5.
वे कौन से खेल हैं जिन्हें खेलने के लिए हमें अधिक साथियों की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर-
क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल आदि ऐसे खेल हैं जिनके लिए अधिक साथियों की आवश्यकता पड़ती है।
सोचिए और लिखिए
प्रश्न 1.
कविता में “ज़ोर लगाओ, हेई सा! हेई सा! भई, हेई सा!” क्यों कहा गया है?
उत्तर-
रस्साकशी के खेल में अपनी टीम के साथियों का जोश बढ़ाने के लिए ऐसा कहा गया है।
प्रश्न 2.
कविता में शरीर से जुड़े किन-किन अंगों का वर्णन हुआ है? ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर-
कविता में सीना, कमर, पैर, पीठ आदि अंगों का वर्णन हुआ है।
प्रश्न 3.
रस्साकशी के खेल में जीतने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है?
उत्तर-
रस्साकशी के खेल में जीतने के लिए सीना तानकर पैर को गड़ाए रखना होता है। साथियों के उत्साह को बढ़ाते हुए जोश-खरोश को भी बरकरार रखना होता है।
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प्रश्न 4.
चित्र में दिखाया गया खेल रस्साकशी कैसे खेला जाता है, लिखिए-

उत्तर-
छात्र अपने अनुभव के आधार पर इस खेल की प्रक्रिया को लिखें।

प्रश्न 5.
आपने बहुत से खेल खेले होंगे। आइए, चित्र देखकर खेल पहचानिए-

उत्तर-

भाषा की बात
प्रश्न 1.
कविता में अकड़-पकड़ जैसे तुक मिलने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। आप भी तुक मिलने वाले शब्द सोचकर लिखिए-

उत्तर-
| अकड़ | पकड़ |
| सीना | पसीना |
| जोर | शोर |
| मकड़ी | ककड़ी |
| साथी | हाथी |
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए शब्दों की मात्रा हटाइए और उसके सामने नया शब्द लिखते हुए अपना जादू दिखाइए-

इसी प्रकार नीचे दिए गए शब्दों की मात्रा हटाइए और उसके सामने नया शब्द लिखते हुए अपना जादू दिखाइए-

उत्तर-
(क) काम – कम
(ख) बीस – बस
(ग) मेला – मल
(घ) यही – यह
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कविता से आगे
प्रश्न 1.
नीचे कुछ खेलों के नाम दिए गए हैं। इनमें से कुछ खेल घर से बाहर मैदान में खेले जाते हैं और कुछ घर के भीतर खेले जाते हैं। घर से बाहर तथा घर के भीतर खेले जाने वाले खेलों को छाँटते हुए उन्हें अलग-अलग लिखिए-

उत्तर-

प्रश्न 2.
आपका सबसे प्रिय खेल कौन-सा है? उसके बारे में चार पंक्तियाँ लिखिए-

उत्तर-
छात्र अपने प्रिय खेल के बारे में लिखें।
प्रश्न 3.
आओ बताएँ-

उत्तर-
छात्र अपना नाम, मित्र का नाम, खेलने का समय, प्रिय खेल एवं खेल से जुड़े अपने अनुभव लिखकर बातचीत पूरी करें।
बनाइए
खेल खेलते समय प्रायः छोटी-छोटी चोट लग जाती है। जब आपको चोट लगती है, तब आप क्या क्या करते हैं? अपने लिए एक छोटा-सा डिब्बा बनाइए और बताइए कि आप उसमें रुई और पट्टी के अतिरिक्त क्या-क्या रखेंगे?

उत्तर-
डिब्बे में थर्मामीटर, एंटीसेप्टिक क्रीम, डेटॉल, बैंडेज, मास्क इत्यादि वस्तुएँ रखेंगे। छात्र सोचकर कुछ और भी वस्तुओं के नाम लिख सकते हैं।
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कुछ नया करें
प्रश्न 1.
नीचे कुछ खेलों के चित्र दिए गए हैं। आप इनमें से अपने मनभावन खेल को पहचानिए और उस खेल में रुचि होने का कारण भी लिखिए-

उत्तर-
छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 2.
चित्रों में अपनी रुचि के अनुसार रंग भरिए । किसी एक खेल के बारे में अपने विचार लिखिए-

उत्तर-
छात्र पाठ्यपुस्तक में दिए चित्रों में अपनी रुचि के अनुसार रंग भरें। किसी एक खेल के बारे में अपने विचार लिखें।
Class 3 Hindi Chapter 10 रस्साकशी काव्यांशों की व्याख्या
1. जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा!
सीना ताने रहो अकड़ कर,
रस्सा दोनों ओर पकड़ कर,
तिरछे पड़ कर, कमर जकड़ कर,
जोर लगाओ, हेई सा!
ईसा! भई, हेई सा!
खींचो, खींचो, जोर लगाओ,
पैर गड़ा कर, पीठ अड़ाओ,
आड़ी-तिरछी चाल भिड़ाओ,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा!
शब्दार्थ- जोर – दम।
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक वीणा-1 में संकलित कविता रस्साकशी से ली गई हैं। इसके कवि कन्हैया लाल ‘मत्त’ हैं। यहाँ कवि रस्साकशी खेल और उससे जुड़े प्रयासों के बारे में बता रहे हैं।
व्याख्या- कवि प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से रस्साकशी खेल को बच्चों से जोशपूर्वक खेलने को कहते हैं। वे बच्चों से आगे कहते हैं कि सीने को ताने हुए, कमर को जकड़े हुए रस्से को मज़बूती से पकड़े रहो। पैर को ज़्यादा न हिलाते हुए और पीठ को भी स्थिर रखते हुए रस्से को बलपूर्वक अपनी तरफ़ खींचते रहो।

2. रस्सा नहीं फिसलने पाए,
साथी नहीं बिचलने पाए,
जोश-खरोश न ढलने पाए,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा!
हुए पसीने से तर सारे,
सफल हुए सब दाँव करारे,
इधर हमारे, उधर तुम्हारे,
जोर लगाओ, हेई सा!
हेई सा! भई, हेई सा!
शब्दार्थ- बिचलने – इधर-उधर होना, जोश-खरोश – जोर-शोर दाँव – चाल चलना।
प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक वीणा-1 में संकलित कविता रस्साकशी से ली गई हैं। इसके कवि कन्हैया लाल ‘मत्त’ हैं। यहाँ कवि रस्साकशी खेल और उससे जुड़े प्रयासों के बारे में बता रहे हैं।
व्याख्या- जोरपूर्वक खींचने के क्रम में यह ध्यान रहे कि रस्सा हाथों से फिसल न जाए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि साथियों का जोश कमज़ोर न पड़े और वे हतोत्साहित न होने पाएँ। ऐसा करने से दोनों टीमों के बच्चे पसीने से लथपथ हो जाते हैं और उनके दाँव सफल होते हैं। यह कविता हमें सिखाती है कि सफल होने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करते हुए प्रयास करने चाहिए।

Class 3 Hindi Chapter 10 रस्साकशी पाठ का सारांश
कन्हैया लाल ‘मत्त’ द्वारा रचित यह खेल गीत रस्साकशी खेल और इस खेल को खेलने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को बताता है। बच्चे रस्सी को अपनी तरफ़ खींचने के लिए कैसे ज़ोर लगाते हैं, कैसे अपने साथियों का भी उत्साह बढ़ाते हैं, इसको सुंदर तरीके से गीत में कहा गया है। यह गीत समूह भावना और खेल भावना को प्रदर्शित करता हुआ ‘एकता में शक्ति’ को दर्शाता है।