By going through these Sanskrit Class 6 Notes and NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 9 Hindi Translation Summary Explanation Notes यो जानाति सः पण्डितः students can clarify the meanings of complex texts.
Class 6 Sanskrit Chapter 9 Summary Notes यो जानाति सः पण्डितः
यो जानाति सः पण्डितः Class 6 Summary
संस्कृत साहित्य में पहेलियों का विशिष्ट स्थान है। पहेलियाँ बच्चों की तार्किक शक्ति, चिंतन क्षमता व मानसिक शक्ति को विकसित करती हैं। प्रस्तुत पाठ में विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से रोचक पहेलियाँ दी गईं हैं।
संस्कृत साहित्य में पहेलियों का एक विशेष स्थान है। पहेलियाँ बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक के मन में एक विशेष उल्लास पैदा कर देती हैं। पहेलियाँ पूछने से बुद्धि की तर्क करने की क्षमता बढ़ जाती है। और बुद्धि की सोचने की क्षमता व शक्ति का विकास होता है। पहेलियाँ हमारे पूर्वजों की और कवियों की बुद्धिमत्ता और कल्पना शक्ति को दिखाती है।
यो जानाति सः पण्डितः Class 6 Notes
पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ
(1)

भोजनान्ते च किं पेयं जयन्तः कस्य वै सुतः ।
कथं विष्णुपदं प्रोक्तं तक्रं शक्रस्य दुर्लभम् ॥१॥
शब्दार्था: (Word Meanings):
भोजनान्ते – भोजन के अंत में (In the end of meal),
पेयम् – पीना चाहिए (Should drink),
वै- निश्चित रूप से (Definitely),
कस्य – किसका (Whose),
सुत: – पुत्र (Son),
प्रोक्तम् – कहा गया है (Said),
कथम् – कैसे (How),
तक्रम् – छाछ (Butter milk),
शक्रस्य – इन्द्र का (Of Indra)
दुर्लभम् – मुश्किल से प्राप्त होने वाला (Difficult to find),
किम् – क्या (What)।
विवरण –
- तक्रम्
- शक्रस्य
- दुर्लभम्।
अन्वयः –
भोजनान्ते च किं पेयम् वै जयन्तः कस्य सुतः विष्णुपदं कथं प्रोक्तं, तक्रं शक्रस्य दुर्लभम् ।
सरलार्थ-
भोजन के अन्त में क्या पीना चाहिए – (छाछ) । निश्चित ही जयन्त किसका पुत्र है – ( इन्द्र का ) । विष्णु भगवान की समीपता को क्या गया है- (दुर्लभ) अर्थात् मुश्किल से प्राप्त होने वाला सान्निध्य ।
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(2)

न तस्यादिर्न तस्यान्तो मध्ये यस्तस्य तिष्ठति ।
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यदि जानासि तद्वद ॥ २ ॥
शब्दार्था: (Word Meanings) :
तस्य – उसके (His),
आदि: – प्रारंभ (Beginning),
अन्त: – आखिर (The end),
मध्ये – बीच में (In the middle),
तिष्ठति – रहता है (Stays),
तव – तुम्हारे, (Yours),
अपि – भी (Also),
मम – मेरे (Mine),
अस्ति – है (Is),
जानासि – जानते हो (Know),
तद् – तो (Then),
वद् – बोलो (Speak)।
विवरण – नयन
अन्वयः – तस्य आदि (प्रारम्भः) न अस्ति, तस्य अन्तः अपि न अस्ति, यस्य मध्ये ‘य’ तिष्ठति तव अपि अस्ति मम अपि अस्ति यदि जानासि तद् वद ।
सरलार्थ –
उसके प्रारंभ में ‘न’ है, उसके आखिर में ‘न’ है। उसके बीच में ‘य’ रहता है। वह तुम्हारे पास भी है और मेरे पास भी है। यदि जानते हो तो बोलो। उत्तर है – नयन ।
(3)

वृक्षस्याग्रे फलं वृष्टं फलाग्रे वृक्ष एव च ।
अकारादि सकारान्तं यो जानाति स पण्डितः ॥३॥
शब्दार्था: (Word Meanings) :
वृक्षस्य पेड़ के (Of tree),
दृष्टं – (दृश् + क्त प्रत्यय) देखा गया (Have seen),
एव – ही (Only), च-और (And),
अन्तं – अन्त (End),
य:- जो (Who),
जानाति जानता है (Knows),
पण्डित – विद्वान (Knowledgeable),
स: – वह (He) |
विवरण – (1) अनानास :
अन्वयः – वृक्षस्य अग्रे फलं दृष्टम् फलाग्रे वृक्ष एव च। (सः) अकारादिं सकारान्तं । यः जानाति सः पण्डितः ।
सरलार्थ-
पेड़ के आगे फल है और फल के आगे पेड़ है जिसके प्रारंभ में ‘अ’ है और अन्त में ‘स’ है। जो-जो यह जानता है वही पण्डित है। उत्तर है – नयन ।
(4)

किमिच्छति नरः काश्यां भूपानां को रणे हितः ।
को वन्द्यः सर्वदेवानां दीयतामेकमुत्तरम् ॥४॥
शब्दार्था: (Word Meanings) :
इच्छति – चाहता है (Wants),
नर: – आदमी (Men),
काश्याम् – काशी नगरी में (In the city Kashi),
भूपानां – राजाओं को (To the king),
रणे – युद्ध भूमि में (In the battlefield),
सर्वदेवानां – सारे देवताओं में (In all the Gods),
उत्तरम् – उत्तर (Answer ) ।
विवरण – (1) मृत्युञ्जयः
अन्वयः – नरः काश्यां किम् इच्छति ? रणे भूपानां कः हितः ? सर्वदेवानाम् कः वन्धः ? एकम् उत्तरं दीयताम् ।
सरलार्थ-
एक व्यक्ति काशी नगरी में किसकी इच्छा करता है? राजाओं के लिए युद्ध भूमि में क्या हितकर होता है तथा सभी देवताओं में सबसे अधिक वन्दनीय कौन हैं? इन सबका एक ही उत्तर दो। उत्तर – मृत्युञ्जय, जीत लिया है मृत्यु को जिसने अर्थात् महादेव ।
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(5)

कुलालस्य गृहे ह्यर्थं तदर्थं हस्तिनापुरे ।
द्वयं मिलित्वा लङ्कायां यो जानाति स पण्डितः ॥५ ॥
शब्दार्था: (Word Meanings) :
कुलालस्य – कुम्हार का (Of potter),
गृहे – घर में (In the house),
हि निश्चित ही (Definitely),
अर्ध: – आधा (Half),
हस्तिनापुरे – हस्तिनापुर में (In the city of Hastinapura),
द्वयं – दोनों (Both),
जानाति जानता है (Knows) ।
विवरण – कुम्भकर्णः
अन्वयः – कुलालस्य गृहे हि अर्धम्, हस्तिनापुरे तत् ( अपरं) अर्धम्, द्वयं मिलित्वा लङ्कायां (किम् अस्ति ), यः जानाति सः पण्डितः ।
सरलार्थ –
कुम्हार के घर में पहला आधा भाग है। (कुम्भ) । हस्तिनापुर में उसका दूसरा आधा भाग है। (कर्ण)। दोनों को मिलाकर उनका पूर्ण रूप लंका में है। जो यह जानता है वही विद्वान है। उत्तर है- कुम्भकर्ण (रावण के भाई का नाम) ।
वयं शब्दार्थान् जानीम:
