By going through these Sanskrit Class 6 Notes and NCERT Class 6 Sanskrit Chapter 10 Hindi Translation Summary Explanation Notes त्वम् आपणं गच्छ students can clarify the meanings of complex texts.
Class 6 Sanskrit Chapter 10 Summary Notes त्वम् आपणं गच्छ
त्वम् आपणं गच्छ Class 6 Summary
प्रस्तुत पाठ में माता और उसके पुत्र राकेश के मध्य वार्तालाप के माध्यम से लोट् लकार के प्रयोग को दर्शाया गया है। माता अपने पुत्र को वस्तुओं की सूची और कुछ पैसे देकर बाजार से सामान लाने का निर्देश देती है। राकेश सामान के साथ चॉकलेट लेने की इच्छा प्रकट करता है, तभी उसकी माता चॉकलेट की हानियों को बताती है। राकेश पैसे, वस्तुओं की सूची तथा थैला लेकर बाजार जाता है । वहाँ दुकानदार से सूची में दी गई वस्तुओं को तोल के अनुसार लेता है; जैसे-आधा किलो मूँग, एक किलो गुड़, पॉव भर सरसों, एक किलो चीनी व एक किलो दाल आदि। इसके अतिरिक्त राकेश एक चॉकलेट व पेन भी लेता है। कुल मिलाकर 490 रुपए का सामान होता है। अत: वह 500 का नोट दुकानदार को देता है तथा दस रुपये और सामान लेकर घर वापस आ जाता है।
इस पाठ में माता-पुत्र संवाद के माध्यम से ‘लोट् लकार’ को समझाया गया है। लोट् लकार का प्रयोग संस्कृत में आज्ञा और प्रार्थना को व्यक्त करने के लिए किया जाता है; जैसे – त्व आपणं गच्छ । इस वाक्य में बाज़ार जाने की आज्ञा दी जा रही है। यहाँ ‘गच्छ’ क्रियारूप में लोट् लकार का प्रयोग किया गया है।
इस पाठ में अनेक लोट् लकार के क्रियापदों का प्रयोग किया गया है, इन्हें समझिए और जानिए |
त्वम् आपणं गच्छ Class 6 Notes
पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ

(1)
अम्बा – राकेश ! कुत्र असि ? अत्र आगच्छ ।
राकेश: – आम् अम्ब! कथय किं कार्यं करवाणि?
अम्बा – अद्य तव तातः कार्यालयात् विलम्बेन आगमिष्यति ।
त्वम् आपणं गच्छ। वस्तूनि आनय ।
वस्तूनां नामावली अपि अत्र अस्ति ।
राकेश: – अस्तु। स्यूतं ददातु। वस्तूनां नामावलीम् अहं स्वीकरोमि।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
कार्यालयात् – कार्यालय से (From office),
विलम्बेन – देरी से (Late),
आपणं – दुकान को (To shop),
आनय – लाओ (Bring),
नामावली – सूची (List),
स्यूतम् – थैला (Bag)।
सरलार्थ-
माता – राकेश ! कहाँ हो ? यहाँ आओ।
राकेश – हाँ माँ ! बताओ क्या कार्य करूँ?
माता – आज तुम्हारे पिता जी कार्यालय से देरी से आएँगे। तुम बाज़ार जाओ। वस्तुओं को ले आओ। वस्तुओं की सूची (नामावली) भी यहाँ है।
राकेश – अच्छा। थैला दो। वस्तुओं की सूची मैं रख लेता हूँ।

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(2)
अम्बा – स्वीकुरु । धनम् अपि नय ।
राकेशः – अम्ब! इतोऽपि एकं वस्तु स्वीकरवाणि?
अम्बा – चाकलेहम् इच्छति खलु वत्स ! जानातु, अधिकं चाकलेह – खादनं स्वास्थ्याय हानिकरं भवति।
राकेशः – केवलम् अद्य एव स्वीकरोमि ।
अम्बा – अस्तु । मार्गे यानानां गतिं पश्यतु । अनन्तरं सावधानं पारं गच्छतु ।
राकेशः – आम्। अहं गच्छामि ।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
धनम् – धन (Money),
नय – ले जाओ (Take away),
चाकलेहम् – चॉकलेट (Chocolate),
हानिकरं – हानि पहुँचाने वाली (Harmful),
अद्य – आज (Today),
मार्गे – रास्ते पर (On the way),
यानानां – गाड़ियों की (Of vehicles),
गतिं – गति को (Speed)।
सरलार्थ-
माता – लो। धन भी ले जाओ।
राकेश – माँ एक वस्तु और भी ले लूँ?
माता – चॉकलेट चाहते हो न बेटा ! ध्यान रखना, अधिक चॉकलेट खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
राकेश – केवल आज ही लूँगा ।
माता – ठीक है। सड़क पर गाड़ियों की रफ़्तार को देखना। उसके बाद ही सावधानी से सड़क पार करना।
राकेश – हाँ। मैं जाता हूँ।

(3)
राकेशः – महोदय ! कृपया एतां नामावलीं पश्यतु, वस्तूनि च ददातु।
आपणिकः – पश्यामि ।
मुद्गः – अर्धकिलोमितः
गुडः – एककिलोमितः
सर्षपः – पादकिलोमितः
शर्करा – एककिलोमिता
द्विदलम् – एककिलोमितम्
सर्वं सिद्धम् अस्ति। स्यूतं ददातु तत्र स्थापयामि ।
राकेशः – अस्तु, कति रुप्यकाणि यच्छानि ?
आपणिकः चत्वारि शतानि षष्टिं (४६०) च रुप्यकाणि ददातु।
राकेशः – महोदय ! नीलवर्णा लेखनी अस्ति किम् ?
शब्दार्था: (Word Meanings) :
पश्यतु – देखो (See),
मुद्ग : – मूँग (Green gram),
शर्करा – चीनी (Sugar),
गुडः – गुड़ (Jaggery),
द्विदलम् – दाल (Pulses),
सर्षपः – सरसों (Mustard seeds),
नीलवर्णा – नीले रंग की (Of blue colour),
लेखनी – कलम (Pen) ।
सरलार्थ-
राकेश – महोदय! कृपया इस नामावली (सूची) को देखिए और ये वस्तुएँ दीजिए।
विक्रेता – देखता हूँ।
मूँग – आधा किलो
गुड़ – एक किलो
चीनी – एक किलो
दाल – एक किलो
सरसों – 1/4 किलो
सब कुछ हो गया है। थैला दीजिए, उसमें रखता हूँ ।
राकेश – ठीक है, कितने रुपये दूँ?
विक्रेता – चार सौ साठ (460.00) रुपये दीजिए।
राकेश – महोदय ! नीले रंग की कलम है क्या?
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(4)
आपणिकः – आम्, अस्ति।
राकेशः – एकं चाकलेहम् एकां लेखनीं च ददातु । तस्य मूल्यम् अपि योजयतु ।
आपणिकः – अस्तु । लेखन्याः विंशतिं रुप्यकाणि चाकलेहस्य दश रुप्यकाणि च योजयामि । आहत्य नवत्यधिकानि चत्वारि शतानि (४९०) रुप्यकाणि ददातु।
राकेशः – आम्, पञ्च शतानि (५००) रुप्यकाणि सन्ति । स्वीकरोतु, अवशिष्टं च ददातु।
आपणिकः – सर्वं स्यूते स्थापितम् अस्ति । दश (१०) रुप्यकाणि अवशिष्टानि स्वीकरोतु ।
राकेश: – अस्तु। धन्यवादः।
आपणिकः – पुनरपि आगच्छतु ।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
स्वीकरोतु – लीजिए (Take),
अवशिष्टम् – बाकी (Remaining),
पुन: – फिर से (Again),
आगच्छतु – आइए (Come) ।
सरलार्थ-
विक्रेता – हाँ है।
राकेश – एक चॉकलेट और एक लेखनी दीजिए। उनके मूल्य भी जोड़ दीजिए।
विक्रेता – ठीक है। लेखनी के बीस रुपये और चॉकलेट के दस रुपये जोड़ता हूँ। सब मिलाकर चार सौ नब्बे रुपये दीजिए।
राकेश – हाँ, पाँच सौ रुपये हैं। लीजिए और बाकी (पैसे) दीजिए।
विक्रेता – सब कुछ थैले में रख दिया है। दस रुपये बचे हैं, ये लीजिए।
राकेश – ठीक है। धन्यवाद।
विक्रेता – फिर आइएगा।
पठन्तु अवगच्छन्तु

नीचैः लिखितानि पदानि पश्यन्तु ।
एतानि क्रियापदानि लोट्लकारे आज्ञा / प्रार्थना इति अर्थयोः सन्ति ।
लोट्लकारः भावसूचक : (Mood) भवति ।
तस्य रूपाणि पश्यन्तु –
यहाँ मोटे अक्षरों में दिए गए शब्दों को देखिए ।
ये सभी क्रिया- पद लोट्लकार के हैं, जिसका प्रयोग आज्ञा / प्रार्थना के अर्थ में होता है।
यह लोट् लकार भाव (Mood) को बताने का काम करता है।
उसके रूपों को देखिए-
पठ् – धातुः (लोट्लकारः)
