Reading Class 9 Hindi Notes and Class 9 Hindi Ganga Chapter 4 Summary ऐसी भी बातें होती हैं पाठ का सारांश helps students understand the main plot quickly.
ऐसी भी बातें होती हैं पाठ का सारांश
ऐसी भी बातें होती हैं Class 9 Hindi Summary
Class 9 Hindi Chapter 4 Summary – ऐसी भी बातें होती हैं Summary Class 9
यह साक्षात्कार यतींद्र मिश्र और महान पार्श्वगायिका लता मंगेशकर के बीच संगीत, जीवन के मूल्यों और स्मृतियों पर आधारित एक अत्यंत प्रेरणादायक संवाद है।
लता जी ने अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर को एक अनुशासित और संगीत के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता बिना कुछ कहे सिर्फ़ एक गंभीर दृष्टि से बच्चों की शरारत शांत कर देते थे। लता जी ने उनके ‘म्यूजिकल ड्रामा’ (संगीत नाटक) की बारीकियों को भी साझा किया, जिसमें रागदारी और शास्त्रीय संगीत का अद्भुत संगम होता था। उनके पिता ही मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत लेकर आए थे।

लता जी के अनुसार, उन्होंने अपने पिता से स्वाभिमान से जीना सीखा। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन रही हो, उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। पिता के निधन के बाद भी उन्होंने और उनके भाई-बहनों ने संघर्ष के दिनों में भी इसी संस्कार को अपनाए रखा।
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लता जी बताती हैं कि बचपन में वे और उनके भाई-बहन फिल्मों की नकल करते थे, जिससे उनमें अभिनय और संगीत के प्रति रुचि बढ़ी। हालाँकि उन्होंने शुरुआत में 6-7 फिल्मों में अभिनय किया था, लेकिन उन्हें मेकअप करना और कैमरे के सामने बनावटी भावनाएँ व्यक्त करना कभी पसंद नहीं आया। उन्होंने अपनी पसंद की फिल्म ‘छत्रपति शिवाजी’ के अंत में केवल दो पंक्तियाँ गाने और एक दृश्य में दिखने का अनुरोध स्वयं किया था। लता जी ने 1949-1950 के दौर के संगीतकार (खेमचंद प्रकाश, नौशाद आदि) और आज के संगीतकार ए. आर. रहमान आदि के बीच तुलनात्मक चर्चा की। उन्होंने बताया कि पुराने समय में तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। ‘आएगा आने वाला’ जैसे गीतों के लिए उन्हें माइक तक काफ़ी दूर से चलकर आना पड़ता था ताकि आवाज़ में उतार-चढ़ाव पैदा किया जा सके। वे मानती हैं कि यदि पुराने संगीतकारों के पास आज की तकनीक होती, तो वे और भी अद्भुत संगीत रचते।

त्योहारों के संदर्भ में लता जी ने अपने पारिवारिक रीति-रिवाजों का वर्णन किया; जैसे- होली (जिसे वे ‘गुड़वड़’ और ‘रंग पंचमी’ के रूप में मनाती थीं), दीवाली, महाराष्ट्र के विशेष पर्व ‘गुड़ि पड़वा’ और नवरात्रि को सरल, धार्मिक और पारंपरिक तरीके से मनाना। वे अपने शुरुआती दिनों में दीवाली पर वरिष्ठ संगीतकारों (जैसे-नौशाद साहब) के घर मिठाई लेकर जाने की परंपरा को भी याद करती हैं।
लता जी का कोरस में गाने वाली लड़कियों के साथ बहुत गहरे और पारिवारिक संबंध थे। वे उनके नाम भी याद करती हैं और बताती हैं कि उस समय कोरस के साथ ही गाने रेकॉर्ड किए जाते थे।
तानसेन जैसी प्राचीन कहानियों पर विचार करते हुए वे मानती हैं कि संगीत में असीम शक्ति होती है। उस्ताद अली अकबर खाँ का उदाहरण देते हुए वे कहती हैं कि जब सुर अत्यंत गहरा और पवित्र होता है, तो वाद्य का तार भी उसे सह नहीं पाता। अंत में वे विनम्रता से कहती हैं कि उनका शरीर नश्वर है, परंतु उनका संगीत और नाम लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

Class 9 Hindi Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं Summary
- प्रेरणा और संगीत : लता जी ने अपने पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर को अपना पहला गुरु माना। उनके संगीत नाटकों की ‘रागदारी’ और शास्त्रीय गायन ही उनकी नींव बनी।
- पारिवारिक मूल्य : पिता से विरासत में स्वाभिमान और साहस मिला। उन्होंने सिखाया कि स्थिति चाहे कैसी भी हो, कभी किसी के आगे हाथ नहीं पसारना चाहिए।
- अनुशासन का पाठ : पिता जी का व्यक्तित्व अनुशासित था। वे बिना कुछ कहे, केवल अपनी ‘गंभीर दृष्टि’ से ही बच्चों की शरारतें शांत कर देते थे।
- बचपन की यादें : भाई-बहनों के साथ मिलकर धार्मिक फिल्मों की नकल उतारना और तकियों का ‘स्वर्ग’ बनाकर गीत गाना
- तकनीकी संघर्ष : पुराने समय में रेकार्डिंग आज की तरह आसान नहीं थी। ‘महल’ फिल्म का गाना (आएगा आने वाला) के लिए माइक से दूर से चलकर आना पड़ता था।
- वरिष्ठों और सहकर्मियों के प्रति सम्मान : दीवाली के दिन सुबह 5 बजे ही नौशाद साहब और अन्य संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाना और आशीर्वाद प्राप्त करना। कोरस में गानेवाली लड़कियों के साथ मधुर संबंध।
- सहज मानवीय संबंध : रेकार्डिंग स्टूडियो में कोरस गाने वाली लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करना और उन्हें परिवार जैसा सम्मान देना।
- सांस्कृतिक निष्ठा : महाराष्ट्र के विशेष त्योहार ‘गुड़ि पड़वा’ और ‘मंगलागौर’ (विवाह उत्सव) की परंपराओं को हृदय से निभाना।
- संगीत की दार्शनिकता : उस्ताद अली अकबर खाँ के माध्यम से यह समझना कि जब सुर पूरी शुद्धता और गहराई से लगता है, तो साज का तार भी टूट सकता है।
- विनम्रता और संतोष : अपनी सफलता को प्रशंसकों का प्यार और ईश्वर की देन मानना। उनका उद्देश्य केवल अपने पिता के नाम को गौरवान्वित करना था।
- अमरता का विचार : शरीर नश्वर है, पर संगीत और नाम सदा जीवित रहते हैं।
- अंत और प्रार्थना : अंत में लता जी ने सभी कलाकारों और नेक इनसानों के लिए ईश्वर से कृपा बनाए रखने की मंगलकामना की।
ऐसी भी बातें होती हैं पाठ का लेखक परिचय

जीवन परिचय – यतींद्र मिश्र का जन्म 1977 में अयोध्या में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। उन्हें कविता, संगीत तथा अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में भी गहरी रुचि है। वे स्वतंत्र लेखन के साथ अर्धवार्षिक पत्रिका सहित का संपादन भी कर रहे हैं।
रचनाएँ – यतींद्र मिश्र की प्रमुख कृतियाँ हैं- यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ और ड्योढ़ी पर आलाप । इसके अलावा उन्होंने गिरिजा देवी पर ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक लिखी। उन्होंने द्विजदेव की ग्रंथावली का सह-संपादन (2000) किया तथा कुँवर नारायण पर केंद्रित पुस्तकों का संपादन भी किया।
साहित्यिक विशेषताएँ – यतींद्र मिश्र की साहित्यिक रुचि बहुआयामी है। उनकी रचनाओं में कविता, संगीत और ललित कलाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। वे समाज और संस्कृति के विभिन्न पक्षों को संवेदनशील दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं। उनके लेखन में गहराई, भावनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना स्पष्ट रूप से झलकती है।
भाषा-शैली – यतींद्र मिश्र की भाषा सरल, सहज और भावपूर्ण है। वे अपनी रचनाओं में काव्यात्मकता और संवेदनशीलता का संतुलित प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा में सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक सौंदर्य देखने को मिलता है, जिससे पाठक सहज ही जुड़ जाता है।
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ऐसी भी बातें होती हैं पाठ का शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
पृष्ठ-63
अप्रतिम – बेजोड़ अनुपम। आकंठ – कंठ तक पूर्ण रूप से। समर्पित – समर्पण किया हुआ दिया हुआ सौंपा हुआ। स्मरण – याद, स्मृति, चिंता।
पृष्ठ-64
रागदारी – ठीक राग गाने का ढंग या क्रिया। राग – विशिष्ट ताल – लययुक्त, ध्वनि, मन को प्रसन्न करना, प्रीति, अनुराग। स्वाभिमान – आत्मसम्मान, अपनी प्रतिष्ठा का अभिमान।
पृष्ठ-65
बैकुंठ – स्वर्ग, एक ताल, संगीत। अनुयायी – पीछे चलने वाला, अनुगामी, समान।
पृष्ठ-66
मार्फ़त / मारफ़त – माध्यम, ज्ञान। सबब- कारण, अपादान कारण, हेतु। अलबत्ता – निस्संदेह।
पृष्ठ-67
सूत्रपात – कार्य का आरंभ माप वाले सूत से मापन का कार्य। आमद – आय, आना।
पृष्ठ-68
पार्श्वगायन / पार्श्वगायक – किसी अन्य अभिनेता या अभिनेत्री के बदले में नेपथ्य में बैठकर गाने वाला, स्वरदान करने वाला। परहेज – किसी वस्तु से बचना बीमार का हानिकर पदार्थ न खाना।
पृष्ठ-70
वाकया / वाकिया – घटना दुर्घटना, युद्ध। खैरियत – कुशल, भलाई, नेकी। फाग – फागुन में गाया जाने वाला गीत, फागुन में होने वाला राग-रंग, होली। धमार – फाग का एक भेद (संगीत), एक ताल। सोहर – बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला एक मंगलगीत बधावा – मंगलाचार, बधाई, बच्चे के जन्म आदि के अवसर पर भेजा जाने वाला उपहार।
पृष्ठ-72
मसलन – उदाहरण रूप में। अप्रत्याशित – जिसकी आशा न रही हो, अनसोचा, आकस्मिक।
पृष्ठ-73
अतिरेक – आवश्यकता से अधिक अंतर आधिक्य। वाजिब – उचित, कर्तव्य।