Reading Class 9 Hindi Notes and Class 9 Hindi Ganga Chapter 6 Summary रीढ़ की हड्डी पाठ का सारांश helps students understand the main plot quickly.
रीढ़ की हड्डी पाठ का सारांश
रीढ़ की हड्डी Class 9 Hindi Summary
Class 9 Hindi Chapter 6 Summary – रीढ़ की हड्डी Summary Class 9
रामस्वरूप की पुत्री उमा को देखने लड़के वाले आने वाले हैं। उनके स्वागत की तैयारी चल रही है। रामस्वरूप अपने नौकर के साथ तख्त और उस पर बिछाई जाने वाली चादर को ठीक करते हैं। प्रेमा रामस्वरूप से कहती है कि उमा मुँह फुलाए बैठी है। तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर सिर पर चढ़ा रखा है। इससे तो अच्छा हमारा ही ज़माना था जब लड़कियाँ कम पढ़ा-लिखा करती थीं। उमा को देखने आने वालों के स्वागत का रामस्वरूप ने पूरा प्रबंध कर रखा है। वे अपनी पत्नी प्रेमा से कहते हैं कि गोपाल प्रसाद को हरगिज यह पता नहीं चलना चाहिए कि उमा बी०ए० पास है, उसे मैट्रिक पास बताना। लड़के वाले दकियानूसी विचारों वाले हैं। उन्हें अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। वे बताते हैं कि उमा को देखने गोपाल प्रसाद और उनका बेटा शंकर आ रहे हैं। गोपाल प्रसाद पेशे से वकील हैं तथा सभा सोसाइटियों में अच्छी इज्जत रखते हैं और उनका बेटा बी०एस०सी० कर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है, फिर भी वह अधिक पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते हैं। वे अपनी पत्नी से कहते हैं कि तुम उमा को ठीक से समझा देना। प्रेमा उनसे कहती है कि मुझे तो विश्वास नहीं कि उमा झूठ बोल सकेगी फिर भी वे कोशिश करेंगी।
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गोपाल प्रसाद अपने बेटे शंकर के साथ समय पर आते हैं। रामस्वरूप विनम्रतापूर्वक उनका स्वागत करते हैं और दोनों अपने-अपने जमाने की बातों में खो जाते हैं। इसी बीच नाश्ता लाया जाता है। बातें जारी रहती हैं, जिनका सार यह है कि लड़कियों को अधिक पढ़ा-लिखा नहीं होना चाहिए। उनका अधिक पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं होता है। लड़कियाँ घर के लिए तथा लड़के बाहर के लिए होते हैं। आखिर लड़कियाँ घर में काम करने के लिए ही तो होती हैं। उन्हें अपने बेटे शंकर के लिए कम पढ़ी-लिखी यानी मैट्रिक पास लड़की चाहिए। रामस्वरूप भी गोपाल प्रसाद की बात का समर्थन करते हैं कि ऊँची शिक्षा सिर्फ पुरुषों को ही प्राप्त करनी चाहिए।
इस बीच उमा तश्तरी में पान रखकर उस कमरे में आती है। गोपाल प्रसाद अब तक लड़कियों के विरुद्ध बातें करते रहते हैं। वे उमा की चाल और चेहरा देखने की बात करते हैं। उमा जब अपना चेहरा उठाती है तो चश्मा लगा हुआ चेहरा देख गोपाल प्रसाद चौंक जाते हैं। अब गोपाल प्रसाद को उमा की शिक्षा पर संदेह होता है। वे दुबारा उससे उसकी शिक्षा के विषय में जानना चाहते हैं। अब उमा सब नहीं कर पाती है। वह उनसे कहती है कि वह फर्नीचर से भी बदतर है क्योंकि फर्नीचर खरीदने आनेवाला फर्नीचर को देखता है। वह फर्नीचर से कोई प्रश्न नहीं पूछता है। अब गोपाल प्रसाद का उमा की शिक्षा के प्रति संदेह विश्वास में बदल जाता है। वे समझ जाते हैं कि उमा कम पढ़ी-लिखी नहीं है। वह पुन: रामस्वरूप से उमा की शिक्षा के बारे में पूछते हैं।

रामस्वरूप कुछ कहें उससे पहले ही उमा जवाब देती है कि वह बी०ए० पास है। वह शंकर के बारे में कहती है कि यह लड़का (शंकर) पिछली फरवरी में लड़कियों के होस्टल के आस-पास घूमते हुए पकड़ा गया था और अपमानित करते हुए भगाया गया था। उस समय इसने अपने प्राण बचाने के लिए नौकरानी के भी पैर पकड़े थे। मैंने बी०ए० किया है, कोई पाप नहीं। मुझे अपनी इज्ज़त का खयाल है। गोपाल प्रसाद क्रोधित होकर स्वयं को अपमानित किए जाने की बात कहते हैं और अपने बेटे के साथ दरवाज़े की ओर बढ़ जाते हैं। उमा कहती है कि घर जाकर पता कर लीजिएगा कि आपके बेटे की बैकबोन अर्थात रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं। क्रोधित गोपालदास रुआँसा चेहरा लिए शंकर को लेकर चले जाते हैं।
Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी Summary
- प्रस्तुत एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ लड़की के विवाह की एक सामाजिक समस्या पर आधारित है। इस एकांकी में कुल छह पात्र हैं- -रामस्वरूप, पत्नी प्रेमा, नौकर रतन, बेटी उमा, गोपाल प्रसाद तथा उसका बेटा शंकर।
- उमा को देखने के लिए गोपाल प्रसाद और शंकर आने वाले हैं। रामस्वरूप और उनका नौकर कमरे को सजाने में लगे हुए हैं।
- प्रेमा रामस्वरूप को बताती है कि उनकी बेटी उमा नाराज है। इस पर वे कहते हैं कि तुम्हीं ने पढ़ा-लिखाकर उसे सिर पर चढ़ा रखा है। उसे इंट्रेन्स तक पढ़ाते तो अच्छा रहता।
- रामस्वरूप अपनी पत्नी से कहते हैं कि गोपाल प्रसाद और शंकर दकियानूसी विचारों वाले हैं। गोपाल खुद वकील हैं पर लड़की ऐसी चाहते हैं जो कम पढ़ी-लिखी हो।
- रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद और उनके पुत्र शंकर का स्वागत करते हैं। रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद दोनों कुशल क्षेम की बातें करते हैं। रामस्वरूप चाय की ट्रे लाते हैं तथा उनसे नाश्ता करने का आग्रह करते हैं।
- गोपाल प्रसाद कहते हैं कि अधिक आमदनी करने के लिए सरकार को महिलाओं की खूबसूरती पर टैक्स लगाकर उन्हें अपनी खूबसूरती के हिसाब से टैक्स देने के लिए कह देना चाहिए।
- गोपाल प्रसाद लड़की की पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछते हुए कहते हैं कि उन्हें अधिक पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। पढ़ना और काबिल होना मर्दों का काम है। औरतें पढ़-लिखकर बहस करने लगीं, पॉलिटिक्स करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।
- इसी बीच उमा सोने की रिम वाला चश्मा लगाए, पान की तस्तरी लिए आती है। गोपाल प्रसाद और शंकर उसे देखते हैं तथा चौंक उठते हैं।
- गोपाल प्रसाद उमा से कुछ गाना-बजाना सीखने के बारे में पूछते हैं। उमा मीरा का मशहूर भजन ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई’ गाना शुरू कर देती है।
- रामस्वरूप गोपाल प्रसाद को उमा द्वारा बनाई गई तसवीरें दिखाते हैं और सिलाई सीखने की बात बताते हैं। साथ ही उमा को गोपाल प्रसाद जी की बात का जवाब देने के लिए कहते हैं।
- उमा धीमी किंतु दमदार आवाज में जवाब देती है। इससे गोपाल प्रसाद को अपनी बेइज्जती महसूस होती है।
- गोपाल प्रसाद ने उमा से पूछा “क्या तुम कॉलेज में पढ़ी हो?” उमा ने दृढ़ता से जवाब दिया, “जी हाँ, कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी०ए० पास किया है। कोई पाप नहीं किया है, कोई चोरी नहीं की है और न आपके पुत्र की तरह कायरता ही दिखाई है। ये तो नौकरानी के पैरों पड़कर अपना मुँह छिपाकर भागे थे। पता कीजिए इनकी रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं।”

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रीढ़ की हड्डी पाठ का लेखक परिचय

जीवन-परिचय – हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार और एकांकीकार जगदीशचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था। उनकी उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुई। वे अत्यंत प्रतिभाशाली थे, जिसका प्रमाण यह है कि वे इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए। अपने प्रशासनिक जीवन के दौरान उन्होंने बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। प्रशासनिक दायित्वों के बीच भी उनका साहित्य के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ और वे आजीवन लेखन में सक्रिय रहे। सन् 1978 में इस महान साहित्यकार का निधन हो गया।
रचनाएँ – माथुर जी ने नाटक और एकांकी के क्षेत्र में मील के पत्थर स्थापित किए हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्नलिखित हैं : कोणार्क, शारदीया, पहला राजा, भोर का तारा, ओ मेरे सपने, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना।
साहित्यिक विशेषताएँ – जगदीशचंद्र माथुर के लेखन की शुरुआत प्रयाग में उनके छात्र जीवन के दौरान ही हो गई थी। उनके नाटक और एकांकी तत्कालीन प्रसिद्ध पत्रिकाओं ‘चाँद’ और ‘रूपाभ’ में प्रकाशित होते थे। हिंदी रंगमंच के विकास में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने जहाँ एक ओर ऐतिहासिक नाटकों के माध्यम से गौरवशाली अतीत को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समस्याओं पर आधारित एकांकी लिखकर समाज को नई दिशा दी। उनके नाटकों में शिल्प और संवेदना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है, जिसके कारण उनके नाटक मंचन की दृष्टि से अत्यंत सफल रहे हैं।
भाषा-शैली – माथुर जी की भाषा अत्यंत परिष्कृत, समर्थ और भावानुकूल है। उन्होंने अपने नाटकों में पात्रों के व्यक्तित्व और परिवेश के अनुसार भाषा का प्रयोग किया है। उनके लेखन में तत्सम शब्दों के साथ-साथ व्यावहारिक शब्दावली का भी समावेश है। उनकी शैली में एक प्रकार की काव्यात्मकता और प्रवाह है, जो पाठक और दर्शक को अंत तक बाँधे रखता है। वे गंभीर विषयों को भी अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की कला में निपुण थे।
रीढ़ की हड्डी पाठ का शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
पृष्ठ-101
अधेड़ – आधी उम्र का, ढलती उम्र का। तख्त – लकड़ी की बड़ी चौकी, सिंहासन। गंदुमी – गेहुँए रंग का।
पृष्ठ-102
डाट – टेक, अटकाव । जंजाल – झंझट, झमेला, संसार का बखेड़ा
पृष्ठ-103
ठठोली – हँसी, परिहास।
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पृष्ठ-104
करीने / करीना – ढंग, क्रम, मेल, समानता। दकियानूसी – पुराने विचार का पुराना। तालीम – शिक्षा। चौपट – नष्ट, चारों ओर से खुला हुआ।
पृष्ठ-105
दस्तक – खटखटाना, हाथ का हलका आघात या धक्का, ताली। फितरती – चालबाज, प्रकृतिगत। खीस निपोरना / खीस निकालना – इस तरह हँसना कि दाँत दिखाई दें, बेढंगी हँसी हँसना। खासियत / खासीयत – विशेषता, गुण, प्रभाव, प्रकृति, स्वभाव। तशरीफ – आदर, सम्मान, महत्व। मार्जिन – सीमा, किनारा। मुखातिब – संबोधन करने वाला, बात करने वाला।
पृष्ठ-106
बालाई – ऊपर का हिस्सा। तकल्लुफ – बनावट, शिष्टाचार।
पृष्ठ-108
माफिक – अनुकूल, अनुसार निहायत – अत्यधिक, अत्यंत, बहुत ज्यादा जायचा – जन्मपत्री।
पृष्ठ-110
अर्ज – निवेदन, प्रार्थना, चौड़ाई।
पृष्ठ-111
अधीर – धैर्य रहित, उतावला, आकुल, दृढ़ता रहित।