Reading Class 5 Hindi Notes Veena Chapter 10 तीन मछलियाँ Teen Machliya Summary in Hindi helps students understand the main plot quickly.
Teen Machliya Class 5 Summary in Hindi
Teen Machliya Class 5 Hindi Summary
तीन मछलियाँ का सारांश – Teen Machliya Summary in Hindi
प्रस्तुत पाठ में तीन मछलियों के माध्यम से जीवन जीने के विभिन्न तरीकों और उसके परिणामों को स्पष्ट किया गया है। कहानी में बताया गया है कि तीन मछलियों की बहुत गहरी मित्रता होती है और एक ही तालाब में मिल-जुलकर रहती हैं। जहाँ एक तरफ तीनों में बहुत प्रेम होता है वहीं दूसरी तरफ वे तीनों ही स्वभाव से बहुत भिन्न होती हैं। पहली मछली का नाम अनागतविधाता होता है वह अपने नाम के ही अनुरूप भविष्य में होने वाली घटनाओं का अंदाजा लगा लेती थी और समय रहते ही समस्या से बाहर निकलने का रास्ता भी खोज लेती थी। दूसरी मछली प्रत्युत्पन्नपति थी; जिसकी बुद्धि इतनी अधिक तीव्र थी कि वह भविष्य में घटित किसी भी समस्या का निदान तुरंत ही कर देती थी। इसके लिए उसे पहले से ही किसी समाधान की आवश्यकता नहीं होती थी। वह समय रहते ही निर्णय लेने की क्षमता रखती थी।
तीसरी मछली का नाम यद्भविष्य था और वह अपने नाम के ही अनुरूप भाग्यवादी थी। उसका कहना था कि जो होना है वह तो होकर ही रहेगा तो फिर उसके लिए पहले से ही परेशान होने की क्या आवश्यकता है? इसी कारण वह जीवन को बिना किसी चिंता के आनंद से जीती थी। एक बार वहाँ सरोवर के पास शाम के वक्त दो मछुआरे निकले। उन्होंने सरोवर में तैरती मछलियों और वहाँ के सुंदर वातावरण को देखा। वे दोनों बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने निर्णय लिया कि वे अगले दिन प्रातः जाल लेकर आएँगे और तालाब की सारी मछलियों को पकड़कर ले जाएँगे। जब अनागतविधाता और उसकी दोनों मित्रों ने यह बात सुनी तो उन्होंने सरोवर की सभी मछलियों की सभा बुलाई और उन्हें सारी बात बताई।

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अनागतविधाता ने खतरा जानकर सभी मछलियों को रात में ही दूसरे सरोवर की तरफ चलने का आग्रह किया, उसकी यह बात कुछ मछलियों ने सहर्ष स्वीकार कर ली और वे दूसरे सरोवर की तरफ चली गईं। प्रत्युत्पन्नमति ने समय आने पर स्वयं ही बचने का निर्णय लिया और यद्भविष्य के साथ वहीं रुक गई। अन्य मछलियाँ भी जो प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य से सहमत थीं वो भी वहीं रुक गईं क्योंकि यद्भविष्य का मानना था कि भविष्य में लिखे को बदला नहीं जा सकता, तो व्यर्थ ही चिंता की क्या आवश्यकता है। अगले दिन जब प्रातः दोनों मछुआरे जाल लेकर आए तो उन्होंने तालाब की सारी मछलियों को पकड़ लिया। प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य भी अन्य मछलियों के साथ पकड़ी गई । प्रत्युत्पन्नमति ने तत्काल ही अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और निर्जीव बनकर पड़ गई। मछुआरों ने उसे मृत समझकर सरोवर में वापस फेंक दिया और इस प्रकार प्रत्युत्पन्नमति के प्राण बच गए जबकि दूसरी तरफ यद्भविष्य और अन्य मछलियाँ मछुआरों के जाल में फंसकर जान से हाथ धो बैठी।
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि यदि समय रहते ही हम उचित निर्णय नहीं लेते, तो बाद में पछताना पड़ता है। क्योंकि भाग्य के भरोसे बैठने वाले के सपने कभी पूरे नहीं होते ।

समय रहते ही हमें सोच-विचार कर कार्य करना चाहिए।
तीन मछलियाँ शब्दार्थ
पृष्ठ 117
- सरोवर – तालाब ।
- गाढी – गहरी ।
- विनोद – मनोरंजन ।
- अनागतविधाता – जो भविष्य की कठिनाइयों का पहले ही हल निकाल ले।
- संभावित – जिसका पहले से अनुमान लगाया जा सके।
- प्रत्युत्पन्नमति – तेज बुद्धि वाली ।
- तीक्ष्ण- तेज ।
- आशंकित – जिसकी शंका हो ।
- समाधान – हल निकालना ।
- सूझ-बूझ – समझदारी ।
- पैनी – तेज।
- उलझन – समस्या ।
- क्षण – पल ।
- यद्भविष्य – भाग्यवादी ।
- सार्थक – जिसका कुछ अर्थ हो ।
- श्रम – परिश्रम ।
- चिंतन – सोच-विचार ।
- मत – राय ।
- यत्न- प्रयास।
पृष्ठ 118
- अकस्मात्-अचानक।
- रमणीय – सुंदर, मन को भाने वाला ।
- विश्राम – आराम।
- सहर्ष – खुशी-खुशी ।
- सम्मति-सहमति।
- उत्साह – जोश |
- संबोधित करना – जिसे पुकारा गया हो ।
- भयभीत – डर जाना ।
- संकट – मुसीबत |
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पृष्ठ 119
- परिस्थिति- स्थिति, अवस्था ।
- आलस्यमयी – आलस से भरी हुई ।
- निवास स्थान- रहने का स्थान ।
- पश्चात- बाद में।
- कदाचित् – शायद ।
- ध्वनियाँ – आवाजें ।
- प्रसन्न – खुश ।
- तीव्रता – तेजी से ।
- सूझ गया – समझ आ गया।
पृष्ठ 120
- सिकोड़ना – एकत्रित करना ।
- निर्जीव- मृत, जिसमें जान ना हो।
- विशिष्ट – विशेष ।