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Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी Question Answer
रीढ़ की हड्डी Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 6 Question Answer – Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 113-127)
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
एकांकी रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर:
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
तर्क – जिस प्रकार शरीर को सीधा रखने के लिए रीढ़ की हड्डी जरूरी है, उसी प्रकार व्यक्ति के चरित्र में आत्म-सम्मान और नैतिक मजबूती अनिवार्य है। इस एकांकी में उमा अपने आत्मसम्मान के लिए खड़ी होती है।
प्रश्न 2.
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर:
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
तर्क – यह एकांकी स्त्री-शिक्षा के प्रति समाज की संकीर्ण सोच और विवाह के नाम पर लड़कियों को वस्तु समझने की कुरीति पर कड़ा प्रहार करती है। यह उस मानसिकता पर भी चोट करती है जहाँ उच्च शिक्षा केवल पुरुषों का अधिकार समझा जाता है और स्त्रियों का काम केवल घर सँभालना।
प्रश्न 3.
“घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर:
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
तर्क – शंकर का अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं है। वह न केवल शारीरिक रूप से झुककर चलता है, बल्कि चारित्रिक रूप से भी दुर्बल है क्योंकि वह अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं कर पाता और लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए पकड़ा गया था।
प्रश्न 4.
“जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी. ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर:
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
तर्क – उमा के लिए शिक्षा का मतलब केवल कागज की डिग्री हासिल करना नहीं है, बल्कि वह शिक्षा है जो उसे सही और गलत में भेद करना सिखाए और उसे इतना साहसी बनाए कि वह अपमानजनक व्यवहार के विरुद्ध अपनी आवाज उठा सके।
प्रश्न 5.
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर:
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
तर्क – रामस्वरूप आधुनिक होकर भी बेटी की शिक्षा छिपाते हैं, जबकि गोपालप्रसाद अपनी दकियानूसी सोच को श्रेष्ठ दिखाते हैं। दोनों ही आधुनिकता का दिखावा करते हैं, पर अंदर से रूढ़िवादी सोच रखते हैं।
प्रश्न 6.
इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यत: कैसी है?
(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर:
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
तर्क – संवाद सहज, बोलचाल की भाषा में है जो आम जीवन की स्वाभाविकता को दर्शाता है। समाज के दोगलेपेन पर व्यंग्य
के माध्यम से सामाजिक सच्चाई उजागर की गई है।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
प्रश्न 1.
बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
(संकेत – उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर:
रामस्वरूप अपनी बेटी को बी.ए. पढ़ाते हैं। वे उसे उच्च शिक्षा दिलवाना अपना पवित्र कर्तव्य मानते हैं। परंतु जब उसके विवाह का समय आता है तो वे समाज की पिछड़ी मनोभावना का शिकार हो जाते हैं। लोग शिक्षित बहू को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। लड़के तथा सास-ससुर को ऐसा लगता है कि पढ़ी-लिखी बहू उनके नियंत्रण में नहीं रहेगी। वह बात-बात पर नखरे करेगी, विरोध करेगी, प्रश्न करेगी तथा उन्हें चुनौती देगी। वे इस बात को बिलकुल सहन नहीं करना चाहते। इसलिए वे कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं। इस कारण रामस्वरूप और उमा की स्थिति विचित्र हो जाती है। उन्हें विवाह के लिए उमा की उच्च शिक्षा को छिपाने के लिए मज़बूर होना पड़ता है।
प्रश्न 2.
‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
एकांकी में यह शब्द दो पात्रों के लिए अलग-अलग अर्थ रखता है-
- उमा के लिए – यहाँ यह ‘आत्म सम्मान’ और ‘दृढ़ता’ का प्रतीक है। उमा समाज की रीढ़ है जो शिक्षित है और गलत का विरोध करने की शक्ति रखती है। वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करती।
- शंकर के लिए – यहाँ इसका अर्थ ‘व्यक्तित्वहीनता’ और ‘शारीरिक कमजोरी’ है। शंकर न तो शारीरिक रूप से सीधा तनकर खड़ा हो पाता है और न ही उसका अपना कोई नैतिक व्यक्तित्व है।
प्रश्न 3.
“मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर:
प्रेमा का यह कहना कि “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं” उस समय की सामाजिक मानसिकता को दर्शाता है:
- सीमित शिक्षा – उस समय स्त्रियों के लिए केवल साक्षर होना (गिनती और अक्षर ज्ञान) ही पर्याप्त माना जाता था।
- घरेलू भूमिका – माना जाता था कि स्त्रियों का मुख्य काम घर सँभालना है, इसलिए ‘स्त्री-सुबोधिनी’ जैसी किताबें, जो घरेलू उपदेश देती थीं, उन्हें उच्च शिक्षा से बेहतर माना जाता था।
- डर – समाज को लगता था कि अधिक पढ़ने-लिखने से लड़कियाँ ‘सिर चढ़ जाएँगी यानी अपने हक के लिए बोलने लगेंगी, जो पुरुष प्रधान समाज को कतई स्वीकार नहीं था।
प्रश्न 4.
लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर:
लेखक जगदीशचंद्र माथुर ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह समाज और व्यक्ति दोनों की आधारभूत मजबूती का प्रतीक है। जिस समाज में युवाओं का चरित्र (शंकर की तरह) कमजोर हो और स्त्रियों को मान न मिले, वह समाज बिना रीढ़ की हड्डी के शरीर जैसा है।
वैकल्पिक शीर्षक – ‘उमा का विद्रोह’ या ‘खोखला समाज’। कारण- ‘उमा का विद्रोह’ शीर्षक इसलिए उपयुक्त है क्योंकि पूरी एकांकी का केंद्र उमा द्वारा सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ना है। ‘खोखला समाज’ इसलिए क्योंकि यह समाज के शिक्षित वर्ग के भीतर छिपे दोगलेपन और रीढ़विहीन (बिना आधार के) विचारों को दर्शाता है।
विधा से संवाद
एकांकी की पड़ताल
आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।
आगे रीढ़ की हड्डी एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
1. एकांकी का नाम
2. लेखक का नाम
3. पात्र
4. परिवेश / देश-काल
5. रंग-निर्देश / मंच – निर्देश
6. संवाद- निर्देश
7. समस्या
8. संवाद
9. मुख्य विचार
10. समाधान / परिणाम
उत्तर:
1. एकांकी का नाम : रीढ़ की हड्डी
2. लेखक का नाम : जगदीशचंद्र माथुर
3. पात्र : उमा (मुख्य पात्र), रामस्वरूप (पिता), प्रेमा (माता), गोपालप्रसाद और शंकर (अतिथि)।
4. परिवेश / देश – काल : मध्यवर्गीय भारतीय परिवार का बैठक का कमरा (समय लगभग 1950-60 के दशक का सामाजिक परिवेश।
5. रंग-निर्देश / मंच निर्देश : (तख्त पर दरी बिछी है, उसके ऊपर चादर। मेजपोश भी बिछा हुआ है।) यह दृश्य की सजावट का निर्देश देता है।
6. संवाद-निर्देश : (रामस्वरूप की तरफ मुखातिब होकर) या (खड़े होकर गुस्से में)- यह पात्र के बोलने के ढंग और हाव-भाव का निर्देश है।
7. समस्या : विवाह के बाजार में स्त्री की शिक्षा को छिपाना और उसे एक ‘वस्तु’ की तरह प्रस्तुत करने की सामाजिक कुरीति।
8. संवाद : उमा -“जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी. ए. पास किया है। कोई पाप नहीं किया, कोई चोरी नहीं की….”
9. मुख्य विचार : नारी की गरिमा, शिक्षा का महत्व और समाज के दोहरे चरित्र (विशेषकर शिक्षित वर्ग का खोखलापन) पर प्रहार करना।
10. समाधान / परिणाम : उमा द्वारा अपनी शिक्षा का सच बताकर गोपालप्रसाद का डटकर मुकाबला करना और शंकर की असलियत सामने लाकर शादी से इनकार कर देना।
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रंग निर्देश
एकांकी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है-
(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वह अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)
इस रंग-निर्देश द्वारा एकांकी की पृष्ठभूमि की रचना की गई है, जहाँ से एकांकी आगे बढ़ती है। एकांकी में स्थान, परिवेश, सामाजिक स्थिति आदि के विषय में पाठक और निर्देशक को सटीक जानकारी देने के लिए एकांकीकार / नाटककार प्राय: ऐसे रंग-निर्देशों का प्रयोग करता है। मंचन के समय निर्देशक के पास यह छूट होती है कि वह देश-काल और वातावरण के अनुसार मंच सज्जा, प्रकाश, पात्रों के वस्त्र आदि में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है।
अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत – (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए।
(ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)
उत्तर:
विद्यार्थी समूह बनाकर कक्षा में नाटक खेलें।
मेरी टिप्पणी
“जी हाँ, जाइए, ज़रूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं – यानी बैकबोन, बैकबोन!”
उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है।
‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। यह किसी के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देने, किसी मुद्दे पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने या किसी संदर्भ पर विचारों की अभिव्यक्ति होती है, जो पाठक को उस विषय पर एक नया दृष्टिकोण देती है।
टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं-
• संक्षिप्तता – इसमें विषय के मुख्य बिंदुओं को कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है।
• स्पष्टता – भाषा सरल, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होनी चाहिए।
• व्यक्तिपरकता – इसमें व्यक्ति के विचारों और सुझावों को शामिल किया जाता है।
अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उमा द्वारा शंकर पर की गई यह टिप्पणी केवल एक शारीरिक स्थिति का बयान नहीं है, बल्कि उसके व्यक्तित्व के खोखलेपन पर एक तीखा प्रहार है। यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ का अर्थ आत्म-सम्मान स्वतंत्र विचार और नैतिक साहस से है।
1. स्पष्टता और तर्क – उमा का यह कहना तार्किक है। क्योंकि शंकर का अपना कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं है। न वह अपने पिता की गलत और दकियानूसी बातों का विरोध करने में सक्षम।
2. व्यक्तित्वपरकता – मेरी राय में उमा ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द का चुनाव बहुत सटीक किया है। जिस प्रकार बिना रीढ़ के शरीर सीधा खड़ा नहीं हो सकता, उसी प्रकार बिना नैतिक साहस के कोई व्यक्ति समाज में गरिमा के साथ नहीं जी सकता। शंकर न केवल शारीरिक रूप से झुककर चलता है, बल्कि उसका चरित्र भी तब झुक गया था जब वह लड़कियों के हॉस्टल के बाहर अपमानित हुआ था।
3. निष्कर्ष – यह टिप्पणी समाज के उन युवाओं को आईना दिखाती है जो उच्च शिक्षा तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन उनमें सही और गलत के बीच फर्क करने का साहस और अपना स्वाभिमान नहीं होता। उमा की यह बेबाकी उसकी सच्ची शिक्षा का प्रमाण है।
विषयों से संवाद
तुलना और विचार
प्रश्न 1.
“गोपालप्रसादः भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रे के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर:
गोपालप्रसाद – भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है। अरे, मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना। अगर औरतें भी वही करने लगीं, अंग्रेज़ी अखबार पढ़ने लगीं और ‘पॉलिटिक्स’ वगैरह पर बहस करने लगीं तब तो हो चुकी गृहस्थी।
रामस्वरूप – जी हाँ, और मर्द के दाढ़ी होती है, औरत के नहीं!
मैं समझता हूँ कि लड़कों और लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा में अंतर करना सरासर अन्याय है। यह अंतर तर्कहीन है या पुरुषों की मनमानी है। इसे रोका जाना चाहिए। लड़का-लड़की दोनों को शिक्षा पाने का पूरा अधिकार है।
प्रश्न 2.
“मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का ख्याल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
(संकेत – शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उत्तर:
जब उमा कहती है, “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।” तो उसके व्यक्तित्व की निम्नलिखित बातें सामने आती हैं:
व्यक्तित्व की विशेषताएँ-
- निर्भीकता – वह समाज के तथाकथित ठेकेदारों के सामने सच बोलने से नहीं डरती।
- आत्म-सम्मान – उसे अपनी शिक्षा और अपने चरित्र पर गर्व है। वह ‘बिकने वाली वस्तु’ बनकर चुप रहना स्वीकार नहीं करती।
- तार्किकता – वह केवल भावुक नहीं होती, बल्कि ठोस तर्क देती है कि यदि लड़कों की कमियाँ नजरअंदाज की जाती हैं, तो लड़कियों की शिक्षा पर सवाल क्यों?
ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
- उच्च शिक्षा – कॉलेज की पढ़ाई और बी.ए. करने के दौरान उसे दुनिया की समझ मिली और उसके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।
- परिवार का व्यवहार – उसके परिवार ने उसे शिक्षित तो किया, लेकिन उसकी अपनी नैतिकता ने उसे सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाया।
- समाज का व्यवहार – संभवत: समाज में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को करीब से देखकर उसके भीतर अन्याय के खिलाफ लड़ने की भावना पैदा हुई होगी।
उमा का पात्र हमें सिखाता है कि असली शिक्षा वह नहीं है जो केवल डिग्री दे, बल्कि वह है जो व्यक्ति को अपनी गरिमा के लिए लड़ना सिखाए। वहीं गोपालप्रसाद का पात्र समाज के उस दोगलेपन का प्रतीक है जो अपनी कमियों को छिपाकर दूसरों को कमतर आँकता है।
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सृजन
एकांकी का विस्तार
“रतन: बाबूजी, मक्खन!
(सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)”
प्रश्न 1.
एकांकी के अंत में रतन कहता है- “बाबूजी, मक्खन…” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
(संकेत – हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
उत्तर:
“बाबूजी, मक्खन…” यह अंत दूर तक व्यंग्य करता है। यह रामस्वरूप और उसकी पत्नी के दिल में तीर की तरह चुभता है और लगाओ मक्खन! और बोलो झूठ! और खिलाओ इन नालायकों को मक्खन, भोजन ! झूठ पर बनी तुम्हारी दुनिया बेकार है। इससे कुछ नहीं होने वाला।
परिस्थिति का यह व्यंग्य हँसी के साथ-साथ सारे झूठ की पोल खोल देने वाला है।
प्रश्न 2.
एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
यदि परदा दोबारा उठे तो दृश्य कुछ ऐसा हो सकता है-
- दृश्य : गोपालप्रसाद और शंकर पैर पटकते हुए बाहर निकल रहे हैं। रामस्वरूप सिर पकड़कर तख्त पर बैठ जाते हैं। प्रेमा रोने लगती है।
- अगला संवाद :
रामस्वरूप : (दुखी होकर) यह क्या कर दिया उमा? सब खत्म हो गया।
उमा : (दृढ़ता से) कुछ खत्म नहीं हुआ पिताजी, बल्कि एक गलत शुरुआत होने से बच गई। ऐसे लोग जो हमारी शिक्षा को पाप समझते हैं, उनके घर जाकर मैं कभी सुखी नहीं रह सकती थी।
रतन : (भोलेपन से ) बाबूजी, मक्खन मेज पर रख दूँ क्या?
रामस्वरूप : (धीमी मुस्कान के साथ) हाँ रतन, अब हम ही इसे खाएँगे। आज बेटी ने मेरी भी ‘रीढ़ की हड्डी’ सीधी कर दी।
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
मेरे शब्द
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
| नए शब्द | वाक्य प्रयोग (एकांकी से) | अनुमानित अर्थ | शब्दकोश के अनुसार अर्थ |
| तख़्त | “बिछा दो साहब, यह तख़्त जरा उधर मोड़ दो।” | लकड़ी की चौकी | लकड़ी का बना बड़ा ढाँचा या मंच। |
| करीने | “उमा से कह देना कि ज़रा करीने से आए।” | अच्छे से | सलीके से, ढंग से या उचित तरीके से। |
| दकियानूसी | “गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर।” | पुराने विचार | पुरातनपंथी, रूढ़िवादी |
| निहायत | “लड़की का खूबसूरत होना निहायत जरूरी है।” | बहुत | अत्यंत या बिल्कुल। |
| तालीम | “शादी का सवाल दूसरा है, तालीम का दूसरा।” | पढ़ाई | शिक्षा या प्रशिक्षण। |
भाषा में मुहावरे
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
1. “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है – खाली हाथ।”
2. “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
3. “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
4. “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
5. “मगर तुम तो अभी से सब कुछ उगले देती हो।”
6. “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
8. “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
उत्तर:
1. “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है-खाली हाथ।”
नया वाक्य : गलती करने के बाद वह शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली बन गया।
2. “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
नया वाक्य : छोटी बहन को खिलौना नहीं मिला तो वह मुँह फुलाकर बैठ गई।
3. “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
नया वाक्य : यदि तुम समय पर मेरी मदद नहीं कर सकते, तो फिर तुम किस मर्ज की दवा हो?
4. “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
नया वाक्य : माता-पिता को चाहिए कि बच्चों की हर जिद पूरी करके उन्हें सिर न चढ़ाएँ।
5. “मगर तुम तो अभी से सब कुछ उगल देती हो।”
नया वाक्य : पुलिस की थोड़ी-सी सख्ती होते ही चोर ने सारा सच उगल दिया।
6. “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
नया वाक्य : पुराने झगड़ों की बात छेड़कर आप मुझे व्यर्थ ही काँटों में घसीट रहे हैं।
7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
नया वाक्य : भरी सभा में मित्र की कमियाँ गिनाना उसकी इज्जत उतारने के समान है।
8. “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
नया वाक्य : चोरी पकड़े जाने पर नौकर वहाँ से मुँह छिपाकर भाग निकला।
संदर्भ में शब्द
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेरा”
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर:
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
अर्थ – जब पुत्र अपने पिता से भी अधिक योग्य या गुणी निकले।
सकारात्मक वाक्य – “पंडित जी बहुत बड़े विद्वान थे, लेकिन उनके बेटे ने विदेश से स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
गतिविधियाँ
आप भी संवाददाता
प्रश्न 1.
मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आज हम आपको कॉलेज की सबसे होनहार लड़की उमा के घर लिए चल रहे हैं। यह देखिए उसका घर… और यह रहा ड्राइंगरूम, जहाँ उमा अपने होने वाले रिश्तेदारों पर टूट पड़ी थी। आइए आपको मिलवाते हैं। उमा से ……………………
पत्रकार – उमा जी! सुना है, आपने घर में ही हलचल मचा दी!
उमा – जब घर में बदतमीजी की जाए तो वहीं उत्तर देना पड़ेगा न!
पत्रकार – ऐसा क्या हो गया था उमा जी!
उमा – देखिए! हम पढ़ी-लिखी लड़कियाँ हैं। हमने पढ़-लिखकर पाप तो नहीं किया है! हमसे कहा जा रहा है अनपढ़ बनकर रहो। केवल सजो-सँवरो और हमारी सेवा करो। मैं पूछती हूँ क्यों?
पत्रकार – बात तो आप ठीक कह रही हैं। इसमें तो कोई बुराई नहीं है।
उमा – फिर कोई मेरे ही घर आकर मुझसे अनपढ़ों जैसे सवाल-जवाब करेगा और उसका अपना दामन दागी होगा तो आपको गुस्सा नहीं आएगा?
पत्रकार – हाँ, वो तो है।
उमा – बस इतना ही हुआ ! मैंने कोई लक्ष्मीबाई की तरह तलवार नहीं उठाई थी।
तो यह थी उमा! आपको उसके विचार और व्यवहार कैसा लगा? आप सोचिए।
प्रश्न 2.
मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
स्थान : बाबू रामस्वरूप का बैठक कक्ष
(कैमरा शुरू होता है, पृष्ठभूमि में उमा के घर की सजावट और तनावपूर्ण माहौल दिख रहा है)
रिपोर्टर – नमस्कार! मैं इस वक्त खड़ा हूँ बाबू रामस्वरूप जी के घर के अंदर। यहाँ एक बहुत ही अजीबोगरीब और महत्वपूर्ण घटनाक्रम चल रहा है। आज यहाँ गोपालप्रसाद जी अपने बेटे शंकर के लिए उमा का हाथ माँगने आए थे। लेकिन दर्शकों, जिसे हम एक सामान्य रस्म ‘लड़की देखना ‘ समझ रहे थे, वह अब एक वैचारिक युद्ध में बदल चुका है!
अंदर का नजारा देखिए! गोपालप्रसाद जो स्वयं को बहुत बड़ा वकील और समझदार मानते हैं, उमा से ऐसे सवाल कर रहे हैं जैसे वह कोई सजीव इंसान न होकर बाजार में बिकाऊ कोई सजावटी सामान हो।
लेकिन ठहरिए! अब उमा ने अपना मौन तोड़ दिया है। उमा ने शंकर की पोल खोल दी है कि कैसे वह पिछले साल लड़कियों के हॉस्टल के बाहर पकड़ा गया था और बेइज्जत होकर भागा था।
दर्शकों, आप देख सकते हैं। गोपालप्रसाद आग-बबूला होकर बाहर निकल रहे हैं। उमा ने अपनी पढ़ाई (B.A.) की बात सबके सामने स्वीकार कर ली है। रामस्वरूप जी हक्के-बक्के रह गए हैं। यह आज के समाज के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि लड़कियाँ अब और ‘भेड़-बकरी’ बनकर चुप नहीं रहेंगी। वे अपनी ‘रीढ़ की हड्डी’ और अपना आत्म सम्मान पहचान चुकी हैं।
कैमरामैन के साथ, मैं [आपका नाम] इस विशेष कवरेज के लिए। समाज को बदलने वाली इस आवाज के साथ, वापस चलते हैं स्टूडियो।
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भाषा संगम
“मक्खन वाले की दुकान दूर है”
नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
मक्खन (हिंदी); नवीनतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू) ; टॅन्य ( कश्मीरी ); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन ननी ( बांग्ला); माखन (असमिया ) ; माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िआ ) ; वेन्नै (तेलुगु); वेर्णय् (तमिल) ; वेण्ण (मलयालम); वेण्णे (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
मक्खण वाले दी दुकान दूर है। (पंजाबी)
माक्खण आले की दुकाण दूर सै। (हरियाणवी)
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नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप एकांकी विधा और रीढ़ की हड्डी एकांकी के विषय में और अधिक जान-समझ सकते हैं-
उत्तर:
• एकांकी
• रीढ़ की हड्डी
https://www.youtube.com/watch?v=6T6Tnn3Eglw