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Class 9 Hindi Chapter 3 संवादहीन Question Answer
संवादहीन Class 9 Question Answer
Class 9 Ganga Chapter 3 Question Answer – Class 9 Hindi संवादहीन Question Answer
अभ्यास (पृष्ठ 16-27)
रचना से संवाद
मेरे तर्क मेरे उत्तर
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
प्रश्न 1.
कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?
(क) परोपकार और त्याग
(ख) ममता और स्नेह
(ग) करुणा और क्रोध
(घ) जिज्ञासा और सहायता
उत्तर:
(क) ममता और स्नेह
तर्क – ताई अपने परिवार के अभाव में मिट्ठू को अपनी संतान की तरह मानती थीं। उसके लिए भोजन बनाना और उसकी सुख-सुविधा का ध्यान रखना शुद्ध ममता और स्नेह का परिचायक है।
प्रश्न 2.
जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?
(क) अनुशासन और परंपरा
(ख) उदासीनता और असावधानी
(ग) आत्मगौरव और विद्रोह
(घ) करुणा और नैतिकता
उत्तर:
(घ) करुणा और नैतिकता
तर्क – जगन मास्टर को लगता था कि किसी भी जीव को कैद करना अनैतिक और पाप है। उन्होंने मिट्टू के प्रति दया भाव (करुणा) के कारण ही उसे आज़ाद करने का प्रयास किया।
प्रश्न 3.
मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?
(क) भोजन की खोज
(ख) प्रेम की आकांक्षा
(ग) स्वतंत्रता की चाह
(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
उत्तर:
(ग) स्वतंत्रता की चाह
तर्क – जैसे ही मिट्टू को खुला रोशनदान दिखा, उसकी प्राकृतिक प्रवृत्ति जाग्रत हो गई। यह दर्शाता है कि पिंजरे की सुख-सुविधाओं से बढ़कर आज़ादी की मूल भावना होती है।
प्रश्न 4.
ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?
(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद
उत्तर:
(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
तर्क – ताई के पास वैभव की कमी नहीं थी, पर उनके बच्चे शहर चले गए थे। घर की “भाँय भाँय” और अकेलेपन ने उन्हें दुखी कर रखा था।
प्रश्न 5.
कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?
(क) मजबूरी
(ख) कर्मपरायणता
(ग) अकेलापन
(घ) संवादधर्मिता
उत्तर:
(ग) अकेलापन
तर्क – कहानी यह प्रदर्शित करती है कि कैसे आधुनिक समाज में बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं और उन्हें अपना सुख-दुख बाँटने के लिए मनुष्यों की जगह मूक प्राणियों का सहारा लेना पड़ता है।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
प्रश्न 1.
“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?
उत्तर:
ताई इस कहानी की केंद्रीय पात्र हैं। कभी उनका जीवन विलासिता से लबालब और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण था। किंतु समय की गति ने उनका वैभवपूर्ण जीवन छीन लिया। अब वे एकरसता से भरा नितांत एकाकी जीवन व्यतीत कर रही हैं। अब उनका सुख-दुख सुनने वाला एकमात्र सहचर मिट्ठू नामक तोता है। अनायास ही जब ताई अपनी व्यथा व्यक्त करती हैं- “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” तो इसका तात्पर्य यह है कि उनकी शेष जीवन यात्रा इस अकेलेपन में कैसे पूरी होगी। वृद्धावस्था में शेष जीवन अकेला बिताने की चिंता उनके शब्दों में पीड़ा के रूप में व्यक्त होती है। हालाँकि उनका प्यारा मिट्टू ‘राम राम कहो, सीताराम कहो’ कहकर उन्हें दिलासा होता है कि वे फिक्र न करें, सबकी सुधि लेना वाला ईश्वर है।
प्रश्न 2.
“धीरे – धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?
उत्तर:
अपने स्वर्णिम अतीत की स्मृतियों में डूबी ताई के दर्द भरे उद्गार उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक अवनति की ओर संकेत करते हैं। समय के साथ-साथ उनका रसूख ऐश्वर्य, खेती-बाड़ी और नौकर-चाकर सब छिन गए क्योंकि उन्हें सँभालने वाला कोई नहीं था।
प्रश्न 3.
“ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?
उत्तर:
ताई के पास प्रेम करने के लिए कोई सगा संबंधी नहीं बचा था। तब उनके जीवन में एक पक्षी तोता मिट्ठू आया। उसने उनके जीवन की रिक्ति को भर दिया। जब मिट्टू उनके जीवन में आया, तो उनकी सारी संचित ममता उसके प्रति उमड़ पड़ी।
प्रश्न 4.
“अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चे तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर:
इसके पूर्व ताई का जीवन एकाकी था। उन्हें केवल स्वयं के प्रति ज़िम्मेदारी का निर्वहन करना था। लेकिन मिट्ठू के आने के बाद वे उसके प्रति उत्तरदायी हो गईं। इससे पता चलता है कि ताई अब आत्म- केंद्रित नहीं रहीं। वे मिट्टू की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरों के खेतों और पेड़ों की जानकारी रखने लगीं, जो उनके सक्रिय होने और मिट्टू के प्रति जवाबदेही एवं समर्पण को दर्शाता है।
प्रश्न 5.
“जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जगन मास्टर अपने सिद्धांतों और आदर्शों से बँधे एक युक्तिशीत व्यक्ति थे। वे किसी को भी कष्ट पहुँचाने की कोशिश नहीं करते थे। वे स्वयं तो स्वतंत्र विचारों वाले थे ही दूसरों की स्वतंत्रता के भी पक्षधर थे। वे किसी भी प्राणी की स्वतंत्रता के बाधा डालना ठीक नहीं समझते थे। जब मास्टराइन पिंजड़े में बंद मिट्टू को अपने घर में लाईं. तब जगन मास्टर असहज हो गए और पीड़ा से भर उठे। इसी कारण से मिट्टू को स्वतंत्रता का अहसास करवाने के लिए उन्होंने पिंजड़े को खोलकर अनाज का लालच दिखाकर बाहर निकाला। ऐसा वे इसलिए कर रहे थे, ताकि मिट्ठू को स्वतंत्रता की आबोहवा का बोध हो। इससे जगन मास्टर के बौद्धिक और नैतिक स्तर का बोध होता है।
प्रश्न 6.
कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह शीर्षक ‘नया तोता’ के लिए सबसे अधिक सार्थक है, क्योंकि वह भौतिक रूप से तो वहाँ है, पर ताई के साथ कोई ‘संवाद’ नहीं कर पाता, जिससे ताई का जीवन फिर से मौन हो जाता है। इसे एक प्रतीकात्मक रूप से भी देखा जा सकता है। कोई भी जीव, चाहे वो मनुष्य ही क्यों न हो, यदि एक साथ रहकर भी आपस में संवाद न करे, तो यह संवादहीनता की स्थिति बड़ी त्रासद और दुखदायी हो सकती हैं।
प्रश्न 7.
“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?
उत्तर:
वह घर भौतिक रूप से बड़ा था, लेकिन उसमें रहने वाले लोग (बहु-बेटे) चले गए थे। रौनक के अभाव और पुरानी यादों के बोझ के कारण उसे खंडहर कहा गया। कभी इस घर में हाथी घोड़े होते थे, जहाँ भोज एवं दावतें होती थीं तथा उपकार से दबी प्रजा का जमघट लगता था, वहाँ आज इतने विशाल घर में सिर्फ दो प्राणियों एक ताई और दूसरा पक्षी तोता मिट्टू का ही अस्तित्व था।
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मेरे प्रश्न
नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?
प्रश्न 1.
उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया।
प्रश्न (क) : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न (ख) : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?
उत्तर:
प्रश्न (क) : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
प्रश्न 2.
उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
प्रश्न (क) : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?
प्रश्न (ख) : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
उत्तर:
प्रश्न (क) : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?
प्रश्न 3.
उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
प्रश्न (क) : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न (ख) : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?
उत्तर:
प्रश्न (क) : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
प्रश्न 4.
उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
प्रश्न (क) : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
प्रश्न (ख) : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
उत्तर:
प्रश्न (ख) : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?
मेरे अनुभव मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए।
प्रश्न 1.
“कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते – बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?
उत्तर:
जब हम अपनों से दूर होते हैं, तो एक अनजाना डर मन में रहता है कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। जैसे ताई बार-बार साँकल टोहती थीं, वैसे ही हम भी बार-बार फोन करके अपनों की कुशलता जानना चाहते हैं। जब कोई प्राणी या वस्तु किसी के लिए अत्यंत प्रिय होता है, तो उसके खो जाने या नष्ट हो जाने का संशय हमेशा मन में बना रहता है। यह एक मनोवैज्ञानिक अवधारण है, जो किसी प्राणी या वस्तु के लिए लगाव के अतिरेक को दर्शाती है। मिट्ठू के प्रति ताई का लगाव इसी तरह का था, इसीलिए वे उसे खो देने की आशंका से हमेशा ग्रस्त रहती थीं। हम भी जब अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो अपने निकटतम और प्रिय लोगों की चिंता हमेशा बनी रहती हैं। ऐसे में कई बार, कई तरह की फ़िज़ूल और काल्पनिक आशंकाएँ भी मन में आती हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, किंतु हमें फ़िज़ूल आंशकाओं को मन में नहीं आने देना चाहिए।
प्रश्न 2.
“आखिर वह भी तो बोलता – बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।
उत्तर:
हाँ, मेरा अनुभव है कि पालतू जीव हमारे दुख और खुशी को समझते हैं। उदाहरण स्वरूप जब मैं दुखी होता हूँ, मेरा पालतू कुत्ता चुपचाप आकर मेरे पास बैठ जाता है, जो उसकी संवेदना को दर्शाता है। एक दूसरी घटना भी है जो मेरे साथ घटित हुई। एक बार मैं अपने घर से स्कूल जा रहा था। सड़क के किनारे मैंने देखा कि एक गाय बैठी है, और उसके आसपास एक-दो और गाएँ बैठी हैं। मैनें ध्यान से देखा कि बैठी हुई गाय के पैर में कोई जख्म है। उस ज़ख्म के कारण उसकी आँखों से आँसू निकल रहे हैं। मुझे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उसके आसपास खड़ी और स्वस्थ दिख रही गायों की आँखों से भी आँसू निकल रहे हैं। उन गायों की आँखों से आँसू अपनी प्रिय गाय की पीड़ा के कारण निकल रहे थे। संवेदना के इस स्वरूप से साक्षात्कार मेरे लिए अद्भुत था।
प्रश्न 3.
“गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत – शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
मेरी राय में ताई को भ्रम में रखना उचित नहीं था। सच भले ही कड़वा होता है, लेकिन वह स्वीकार्य होता है। धोखे से उम्मीदें बढ़ती हैं, जो अंत में अधिक दुख देती हैं। अब यदि किसी दूसरे तोते को मिट्टू के रूप में लाया गया है, तो उसका चुप रहना ताई के लिए उसकी अनुपस्थिति से ज़्यादी तकलीफ़देह है। मिट्टू के चले जाने का दुख तो संभवत: ताई झेल लेतीं, किंतु उसकी संवादहीन उपस्थिति उनके लिए और अधिक त्रासद होती।
प्रश्न 4.
“ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।
उत्तर:
कई बार हम किसी यात्रा के लिए बहुत उत्साहित होते हैं। और सोचते हैं कि बहुत मज़ा आएगा, पर कभी – कभी मौसम या परिस्थिति के कारण वह अनुभव वैसा नहीं रहता जैसा सोचा था। एक बार मैं अपने मामा जी के यहाँ मुंबई गया। मेरे जाने का कारण था भारत और आस्ट्रेलिया के खिलाफ क्रिकेट मैच देखना। इसीलिए मेरे ममेरे भाई रमण ने मुझे बुलाया था। हम दोनों अत्यधिक उत्साहित थे कि भारत और आस्ट्रेलिया का निर्णायक मैच वानखड़े स्टेडियम में देखने का अवसर मिलेगा। लेकिन हाय रे दुर्भाग्य! मुंबई में उस दिन मूसलाधार बारिश के कारण मैच स्थगित हो गया और हमारी आशाओं पर तुषारापात हो गया।
प्रश्न 5.
“मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
कोई भी प्राणी पराधीन होकर पिंजरे में नहीं रहना चाहता। अपनी स्वतंत्रता हर किसी को पसंद है चाहे वो मनुष्य हो या कोई भी जीव-जंतु। किंतु यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है। कि जो प्राणी जहाँ लंबे समय तक रह जाता है, तो उसे वह अपनी नियति समझ लेता है। उसे अपनी स्थिति में परिवर्तन करना अनावश्यक और अर्थहीन लगता है। मिट्टू को पिंजड़े की दुनिया ही अपनी और निरापद लग रही थी। इसलिए वह पिंजरे में नहीं निकल रहा था। लेकिन जब उसे यथार्थ का ज्ञान हुआ, मुक्त आकाश से स्वच्छंद उड़ने की प्रतीति हुई तो वह उड़ गया और फिर वापस नहीं आया।
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विधा से संवाद
कहानी का सौंदर्य
संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए-

उत्तर:
| विशेष बिंदु चित्रात्मकता (दृश्य विंब) | अर्थ | कहानी से अन्य उदाहरण |
| संवादात्मकता | जीवंत चित्र बनाना | “बंद पिंजड़े में अपने पंखों को फड़फड़ाता उछल-कूद मचाता मिट्टू उत्तर देता…” |
| पुनरुक्ति | बातचीत का प्रयोग | “मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?” और मिट्टू का उत्तर “कटेगी! कटेगी !!” |
| अतिशयोक्ति | शब्दों की आवृत्ति | “मर जा! मर जा! मर जा!” या “जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ।” |
| लोकधर्मी | बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन | “मिट्टू ‘राम-राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” |
| भाषा | सहज ग्रामीण भाषा | “दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं…” या “खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं।” |
| प्रश्नोत्तर शैली | सवाल-जवाब | “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” |
कहानी का अंत
किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-
1. सुखांत – जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
2. दुखांत – जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
3. मुक्त अंत – जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
4. अप्रत्याशित अंत – जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
5. यथार्थवादी अंत – जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।
6. प्रेरणात्मक अंत – जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
7. व्यंग्यात्मक अंत- जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।
आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?
उत्तर:
मेरे अनुसार, ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को ‘दुखांत’ और ‘यथार्थवादी’ श्रेणियों में रखा जा सकता है।
कारण : दुखांत कहानी का अंत वियोग और सूनेपन के साथ होता है। ताई का एकमात्र सहारा (असली मिट्टू) उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गया है और उसकी जगह एक मौन तोता है, जो उनके अकेलेपन को दूर नहीं कर सकता।
यथार्थवादी : जीवन में अकसर हमारी छोटी-सी भूल दूसरे के जीवन को हमेशा के लिए प्रभावित कर देती है। जगन मास्टर की एक छोटी-सी गलती (तोते को आजाद करना) का परिणाम ताई के जीवन भर के मौन के रूप में सामने आता है, जो जीवन की एक कड़वी सच्चाई है।
कहानी का नया अंत
यदि मैं इस कहानी का नया अंत करना चाहूँ, तो मैं इसे ‘अप्रत्याशित’ और ‘सुखांत’ मोड़ देना चाहूँगा-
“जब ताई जगन मास्टर के घर पर उदास मन से उस मौन तोते को देख रही थीं, तभी अचानक घर के बाहर लगे अमरूद के पेड़ से आवाज़ गूँजी- ‘हर हर गंगे! सीताराम बोल!’ ताई चौंक गई। उन्होंने देखा कि उनका असली मिट्टू, जो बाहर की दुनिया की मुश्किलों से घबरा गया था, अपनी पुरानी ‘ताई’ की आवाज सुनकर वापस लौट आया था। वह उड़कर सीधे ताई के कंधे पर जा बैठा। ताई की आँखों में खुशी के आँसू थे और जगन मास्टर के चेहरे पर संतोष, क्योंकि आजादी का अनुभव करके मिट्टू अब अपनी मर्जी से ताई के पास लौटा था।”
विषयों से संवाद
प्रश्न 1.
“अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।”
कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
कहानी में जगन मास्टर की पत्नी को मास्टराइन या जगन मास्टर की घरवाली कहना उस समय के ग्रामीण परिवेश और सामाजिक ढाँचे को दर्शाता है। अकसर गाँवों में महिलाओं को उनके पति के नाम या उनके पेशे (जैसे मास्टर की पत्नी – मास्टराइन) से पहचाना जाता था। यह लेखक द्वारा पात्र की अपनी पहचान के गौण होने और पितृसत्तात्मक समाज की झलक दिखाने का एक तरीका हो सकता है।
प्रश्न 2.
“गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे”
(क) ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए-
• इसका आयोजन क्यों किया जाता है?
उत्तर:
कुंभ मेले का आयोजन भारत की पवित्र नदियो के तट पर स्थित चार नगरों-प्रयागराज हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूँदें इन्हीं चार स्थानों पर गिरी थीं। यहाँ स्नान करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
• पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
2025 में ‘महाकुंभ’ का आयोजन प्रयागराज में हुआ था।
• अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
उत्तर:
अगला पूर्ण कुंभ 2027 में नासिक ‘महाराष्ट्र’ में गोदावरी तट पर होगा।
(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
(संकेत – कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)
उत्तर:
ताई हमारे मोहल्ले से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन गई होंगी।
वहाँ से उन्होंने ‘प्रयागराज एक्सप्रेस’ पकड़ी होगी। उनके साथ मोहल्ले की तीन-चार वृद्ध महिलाएँ और गनपत जैसा कोई सहायक रहा होगा। खाने में उन्होंने पूड़ी – अचार और लड्डू बाँध कर रखे होंगे। प्रयाग पहुँचकर वे किसी ‘पंडे’ के आवास या टेंट सिटी में ठहरी होंगी, जहाँ सुबह – सुबह कड़कड़ाती ठंड में गंगा आरती और पवित्र स्नान का आनंद लिया होगा। (विद्यार्थी अपनी जानकारी के अनुसार लिखेंगे।)
(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव
या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?
(संकेत – उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों-देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)
उत्तर:
(नोट – इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के आधार पर लिखना चाहिए।) हमारे यहाँ प्रतिवर्ष ‘बैसाखी’ (या स्थानीय मेला) का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
दृश्य और आवाजें : मेले का वातावरण, रंगों और खुशियों से भरा होता है। ढोल की थाप बच्चों के खिलौनों की पीं-पीं और बड़े झूलों की चरमराहट से पूरा आसमान गूँज उठता है।
खान-पान और गंध : हवा में ताजी जलेबियों और समोसों की खुशबू तैरती रहती हैं।
मिट्टी के खिलौनों की सोंधी महक वातावरण को और भी जीवंत बना देती हैं।
जब नदी में स्नान करते हैं तो तन मन में झुरझुरी-सी उठती है। पेड़े और लस्सी का स्वाद लार टपका देता है और एक-एक खिलौने को छूने का स्पर्श-सुख हमेशा याद रहता है।
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सृजन
प्रश्न 1.
“बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।”
अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?
उत्तर:
ताई के बहू-बेटों ने शायद बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोज़गार की तलाश में गाँव छोड़ा होगा। गाँव छोड़ते समय उन्होंने सोचा होगा कि “यहाँ खेती में अब वो बरकत नहीं रही, बच्चों का भविष्य शहर में ही है।” अपना घर छोड़ने के लिए उन्होंने भारी मन से पुरानी यादों को समेटा होगा, खुद को पत्थर जैसा बनाया होगा और शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के लिए मानसिक रूप से तैयार किया होगा।
प्रश्न 2.
“वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की”
ताई सोच रही थीं कि मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्टू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।
(संकेत – प्रारंभ कीजिए- “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)
उत्तर:
असली मिट्टू की वापसी
“एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…” और मिट्ठू सीधे उसी रोशनदान पर आकर बैठ गया जहाँ से वह उड़ा था। पिंजरे में ‘एवजी (नकली) तोते को देखकर उसने गर्दन टेढ़ी की और बोला-
“राम-राम! अरे भाई, तू कौन है जो मेरे घर पर कब्ज़ा जमाए बैठा है? क्या ताई ने तुझे भी सीताराम बोलना सिखा दिया?”
नया तोता चुपचाप उसे देखता रहा । मिट्टू फिर चिल्लाया- “ताई! ताई! देखो तुम्हारा बेटा वापस आ गया, अब ये नकली मिट्टू मर जाएगा!” ताई ने जैसे ही अपनी पुरानी आवाज़ सुनी, उनकी लाठी ज़मीन पर गिर गई और वे दौड़ती हुई आई। उस दिन खंडहर में फिर से असली ‘संवाद’ गूँज उठा। ताई ने असली मिट्टू को पहचान लिया और खुशी से रो पड़ीं। उन्होंने उसे गले लगा लिया। इसके बाद ताई ने पिंजरा खोल दिया और कहा-
“अब तू आजाद होकर रह बेटा!”
मिट्ठू पास ही पेड़ पर रहने लगा और रोज ताई से मिलने आता।
प्रश्न 3.
“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।”
आप घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए – “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि”। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
आज मैंने अपने दादाजी से बात की। उन्होंने बताया कि जब वे मेरी उम्र (14-15 वर्ष) के थे, तब उनके पास मोबाइल या टी. वी. नहीं था। वे अपना समय खेतों में काम करने, पेड़ों पर चढ़ने और दोस्तों के साथ कबड्डी खेलने में बिताते थे। शाम को सभी गाँव के बड़े-बुजुर्ग बरगद के पेड़ के नीचे बैठते थे और किस्से-कहानियाँ सुनाते थे। उस समय लोगों के पास एक-दूसरे के लिए बहुत समय था और ‘संवादहीनता’ जैसा कोई शब्द उनके जीवन में नहीं था।
इसके अलावा गाँव में कोई भी काम लोग मिल-जुलकर किया करते थे- जैसे खेती करना या कोई छोटा-मोटा उद्योग। उसमें भी सभी आपस में बातचीत किया करते थे। अगर किसी घर में कोई अकेला व्यक्ति होता था तो सारा गाँव उसका साथी बन जाता था। उसकी पूरी सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाता था।
प्रश्न 4.
“मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए। वो गए!!” मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्टू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।
(संकेत – आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)
उत्तर:
विज्ञापन
तलाश : खोया हुआ तोता!
पहचान : एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता, गहरे हरे रंग के पंख, गले में लाल कंठी।
विशेषता : बहुत साफ़ आवाज़ में ‘राम-राम’, ‘सीताराम’ और ‘हर-हर गंगे’ बोलता है।
कहाँ से खोया : जगन मास्टर के घर के पास वाले बाग से।
निवेदन : जिस किसी को भी यह दिखे या मिले, कृपया तुरंत सूचित करें। जानकारी देने वाले को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
संपर्क : जगन मास्टर (मोबाइल : 98XXXXXXXX)
भाषा से संवाद
व्याकरण की बात
‘मिट्टू’ शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’।
आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है-
“अकेले मिट्टू क्या उड़े आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
उत्तर:
- ऊँट के मुँह में जीरा : आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना
- भीगी बिल्ली बनना : डर कर दब जाना
- गधे के सिर से सींग गायब होना : पूरी तरह गायब हो जाना
- मगरमच्छ के आँसू बहाना : दिखावटी दुख प्रकट करना
- हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और : कथनी और करनी में अंतर होना
- भेड़ चाल चलना : बिना सोचे दूसरों का अनुसरण करना
- बिल्ली के गले में घंटी बाँधना : कठिन कार्य करना
ध्वन्यात्मकता शब्दों से
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के ‘पंखों की फड़फड़ाहट’ पर गया।”
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि फड़फड़ाहट कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
- चहचहाहट : सुबह होते ही बाग में पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगी।
- भिनभिनाहट : गंदगी पर मक्खियों की भिनभिनाहट चिड़चिड़ापन पैदा करती है।
- खड़खड़ाहट : तेज हवा चलते ही खिड़की के शीशों की खड़खड़ाहट सुनाई देने लगी।
- सरसराहट : सूखे पत्तों पर किसी के चलने की सरसराहट हुई।
- टिक-टिक : घड़ी की टिक-टिक रात में साफ सुनाई दे रही थी।
- भौं भौं : कुत्ता जोर-जोर से भौं भौं कर रहा था।
- छन-छन : चूड़ियों की छन छन बहुत प्यारी लग रही थी।
शब्द-युग्म
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।”
उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द – युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है।
• पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे- बार-बार
• सजातीय शब्द-युग्म, जैसे- उठना-बैठना
• समानार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-प्रतिदिन
• विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-रात
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।

उत्तर:
1. वक्त-बेवक्त
अर्थ – समय-असमय
वाक्य – पड़ोसी वही अच्छा है जो वक्त-बेवक्त काम आए।
2. नियम-सिद्धांत
अर्थ – नियम और आदर्श
वाक्य – जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांत के पक्के व्यक्ति थे।
3. शादी-ब्याह
अर्थ – विवाह के अवसर
वाक्य – गाँव में शादी-ब्याह के मौके पर पूरा घर मेहमानों से भर जाता था।
4. तीज-त्योहार
अर्थ – पर्व-उत्सव
वाक्य – भारतीय संस्कृति में तीज-त्योहार जीवन में खुशियाँ भर देते हैं।
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खोजबीन शब्दों की
“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए
पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”
उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए-
• ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है।
• ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
• ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
• ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
• ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
• ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
• ऐसा शब्द जो एक कारक है।
• ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।
उत्तर:
| • ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है। | ढीली |
| • ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है। | पसीना-पसीना होना |
| • ऐसा शब्द जो एक क्रिया है। | पुकारते रहे, सँभालते |
| • ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है। | धोती, बाग, पेड़, मिट्ठू |
| • ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है। | वह |
| • ऐसा शब्द जो एक विशेषण है। | ढीली, दूसरे |
| • ऐसा शब्द जो एक कारक है। | को (कर्म कारक), में (अधिकरण कारक), से (अपादान करण कारक) |
| • ऐसा शब्द जो एक कर्ता है। | वह (जगन मास्टर के लिए प्रयुक्त |
अर्थ के आधार पर वाक्य
आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।


अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।
उत्तर:
| 1. विधानवाचक वाक्य | ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी। |
| 2. निषेधवाचक वाक्य | ताई को घड़ी भर के लिए भी मिट्टू का वियोग सहन नहीं हो सकता था। |
| 3. प्रश्नवाचक वाक्य | मिट्टू! अब कैसे कटेगी? |
| 4. विस्मयादिबोधक वाक्य | हर हर गंगे! हर हर गंगे!। |
| 5. आज्ञावाचक वाक्य | मिट्टू आ! मिट्टू आ! |
| 6. इच्छावाचक वाक्य | खुश रहो! खुश रहो! |
| 7. संदेहवाचक वाक्य | वह न जाने कहाँ से एक पहाड़ी तोता ले आया था। |
| 8. संकेतवाचक वाक्य | ताई जब कभी पिंजरे को बगल में रखकर सुस्ताने लगती तो अनायास ही मिट्टू से सवाल कर बैठती। |
गतिविधियाँ
नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
प्रश्न 1.
कहानी के रंग
समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
यह प्रश्न विद्यार्थी अपनी योग्यता अनुसार स्वयं करेंगे।
इस हेतु संकेत बिंदु-
मूक अभिनय
इसमें आपको बिना बोले भावनाओं को व्यक्त करना है।
दुःख – कंधों को झुकाकर और चेहरे पर उदासी लाकर।
स्नेह – प्यार भरी मुस्कान या गले लगाने के हाव-भाव से।
आजादी – बाहें फैलाकर और गहरी साँस लेकर, जैसे आप खुले आसमान के नीचे हों।
प्रश्न 2.
पंखों की योजना
छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?
उत्तर:
यह कल्पनाशीलता का प्रश्न है। इसका उत्तर आप इस प्रकार सोच सकते हैं:
कहाँ जाते? – आप कह सकते हैं कि आप हिमालय की चोटियों पर जाते या नीले समुद्र के ऊपर उड़ते, या शायद किसी घने जंगल की सैर करते।
क्यों? – क्योंकि ऊँचाई से दुनिया बहुत सुंदर और शांत दिखती है। वहाँ कोई सीमाएँ नहीं होतीं और आप अपनी मर्जी से कहीं भी आ-जा सकते हैं।
प्रश्न 3.
“पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही”
यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं।
• अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पसंद का भोजन माह में कब-कब बनता है।
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं अपनी योग्यता अनुसार देंगे।
इस प्रश्न हेतु संकेत बिंदु-
यह भाग एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे की ओर इशारा करता है – कैसे घर की महिलाएँ (माताएँ, ताई, दादी) अपनी पसंद को पीछे रखकर पूरे परिवार की पसंद का ध्यान रखती हैं।
इसे पूरा करने के लिए आप यह कर सकते हैं:
अपनी माँ, दादी या ताई से पूछें कि उनकी पसंदीदा डिश क्या है? अक्सर हमें पता ही नहीं होता कि उन्हें क्या पसंद है क्योंकि वे हमेशा वही बनाती हैं जो हमें पसंद होता है।
यह देखें कि महीने में कितनी बार उनकी पसंद का खाना बना?
एक सुझाव : आप आने वाले रविवार को उनकी पसंद का कोई विशेष भोजन बनवा सकते हैं या खुद बनाने में मदद कर सकते हैं।
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-

उत्तर:
1. तोता
- पहेली : हरा हरा है मेरा तन लाल मेरी चोंच का रंग। राम-राम मैं कहता हूँ, बताओ कौन?
- प्रश्न : गनपत ताई के सूनेपन को सहारा देने के लिए कौन सा जीव लाया था?
2. ताई
- पहेली : सूने खंडहर की हूँ वासी अतीत की यादों की हूँ प्यासी। मिट्टू को अपना बेटा माना, ममता की मैं मूरत जानी। बताओ कौन?
- प्रश्न : ‘संवादहीन’ कहानी की मुख्य महिला पात्र कौन हैं?
3. कुंभ
- पहेली : अमृत की बूँदें जहाँ गिरीं भक्तों की वहाँ भीड़ जुटी। प्रयागराज में स्नान कराता, मोक्ष का द्वार मैं कहलाता। बताओ क्या?
- प्रश्न : ताई प्रयागराज किस विशेष आयोजन में स्नान करने गई थीं?
4. पिंजरा
- पहेली : लोहे की सलाखें हैं चारों ओर पंछी का जिसमें चलता न जोर रहने को तो घर है मेरा, पर आज़ादी का दुश्मन घोर। बताओ क्या?
- प्रश्न : मिट्टू को जगन मास्टर के घर में कहाँ कैद रखा गया था?
5. कमरा
- पहेली : चार दीवारें और एक छत रोशनदान से आती धूप। जगन मास्टर ने जहाँ खोला द्वार, ताकि मिट्ठू पाए आजाद रूप। बताओ क्या?
- प्रश्न : जगन मास्टर ने मिट्टू को बाहर निकालने के लिए सबसे पहले किसे बंद किया था?
6. गंगा
- पहेली : हिमालय से मेरा जन्म हुआ, पतित पावनी नाम पड़ा। प्रयाग के संगम में बहती हूँ, ताई ने जिसमें ध्यान धरा। बताओ कौन?
- प्रश्न : ताई किस नदी में स्नान करने के लिए प्रयागराज गई थीं?
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भाषा संगम
“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुं (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटी (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ (शुक); (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)।
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तर:
ओ पता नईं, हेक प्यारा- ज्याँ पहाड़ी तोता किडु घेन आया हई। (सिरायकी)
खोजबीन
शेखर जोशी
https://www.youtube.com/watch?v=Q0fTM4VIPGs
तोता
तोते को गीत सिखाना
https://www.youtube.com/watch?v=1vmwy5JeNe4
तोते की कहानी
https://www.youtube.com/watch?v=4UBNp3e1JjY