Reading Class 9 Hindi Notes and Class 9 Hindi Ganga Chapter 12 Summary Explanation घर की याद कविता का सारांश helps students understand the main plot quickly.
घर की याद कविता का सारांश
घर की याद Class 9 Summary Explanation
Class 9 Hindi Chapter 12 Summary – घर की याद Summary Class 9
इस कविता में घर के मर्म का उद्घाटन है। कवि को जेल प्रवास के दौरान घर से विस्थापन की पीड़ा सालती है। कवि के स्मृति संसार में उसके परिजन एक-एक कर शामिल होते चले जाते हैं। घर की अवधारणा की सार्थक और मार्मिक याद कविता की केंद्रीय संवेदना है।

सावन के बादलों को देखकर कवि को घर की याद आती है। वह घर के सभी सदस्यों को याद करता है। उसे अपने भाइयों व बहनों की याद आती है। उसकी बहन भी मायके आई होगी। कवि को अपनी अनपढ़, पुत्र के दुख से व्याकुल, परंतु स्नेहमयी माँ की याद आती है। वह पत्र भी नहीं लिख सकती।
कवि को अपने पिता की याद आती है जो बुढ़ापे से दूर हैं। वे दौड़ सकते हैं, खिलखिलाते हैं। वो मौत या शेर से नहीं डरते। उनकी वाणी में जोश है। आज वे गीता का पाठ करके, दंड लगाकर जब नीचे परिवार के बीच आए होंगे, तो अपने पाँचवे बेटे को न पाकर रो पड़े होंगे। माँ ने उन्हें समझाया होगा। कवि सावन से निवेदन करता है कि तुम खूब बरसो, किंतु मेरे माता-पिता को मेरे लिए दुखी न होने देना। उन्हें मेरा संदेश देना कि मैं जेल में खुश हूँ। मुझे खाने-पीने की दिक्कत नहीं है। मैं स्वस्थ हूँ। उन्हें मेरी सच्चाई मत बताना कि मैं निराश, दुखी व असमंजस में हूँ। हे सावन! तुम मेरा संदेश उन्हें देकर धैर्य बँधाना। इस प्रकार कवि ने घर की अवधारणा का चित्र प्रस्तुत किया है।
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Class 9 Hindi Chapter 12 घर की याद Summary
- इस कविता में घर के मर्म का उद्घाटन है। कवि को जेल प्रवास के दौरान घर से विस्थापन की पीड़ा सालती है।
- कवि के स्मृति – संसार में उसके परिजन एक-एक कर शामिल होते चले जाते हैं। घर की अवधारणा की सार्थक और मार्मिक याद कविता की केंद्रीय संवेदना है।
- सावन के बादलों को देखकर कवि को घर की याद आती है। वह घर के सभी सदस्यों को याद करता है। उसे अपने भाइयों व बहनों की याद आती है।
- कवि को अपनी अनपढ़, पुत्र के दुख से व्याकुल, परंतु स्नेहमयी माँ की याद आती है। वह पत्र भी नहीं लिख सकती।
- कवि को अपने पिता की याद आती है। जो बुढ़ापे से दूर हैं। वे दौड़ सकते हैं, खिलखिलाते हैं। वो मौत या शेर से नहीं डरते। उनकी वाणी में जोश है।
- कवि सावन से निवेदन करता है कि तुम खूब बरसो, किंतु मेरे माता-पिता को मेरे लिए दुखी न होने देना।
घर की याद कविता का कवि परिचय

जीवन परिचय – भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म 1913 ई० में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के टिगरिया गाँव में हुआ। इन्होंने जबलपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इनका हिंदी, अंग्रेज़ी व संस्कृत भाषाओं पर अधिकार था। इन्होंने शिक्षक के रूप में कार्य किया। फिर वे कल्पना पत्रिका, आकाशवाणी व गांधी जी की कई संस्थाओं से जुड़े रहे। इनकी कविताओं में सतपुड़ा-अंचल, मालवा आदि क्षेत्रों का प्राकृतिक वैभव मिलता है। इन्हें साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन का शिखर सम्मान और दिल्ली प्रशासन का गालिब पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया। इनका देहावसान 1985 ई० में हुआ।
रचनाएँ – भवानीप्रसाद मिश्र की प्रमुख रचनाएँ हैं – गीतफ़रोश, चकित है दुख, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख अनाम तुम आते हो, इदं न मम आदि। गीतफ़रोश इनका पहला काव्य संकलन है। गांधी पंचशती की कविताओं में कवि ने गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। बुनी हुई रस्सी कविता संग्रह पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
काव्यगत विशेषताएँ – सहज लेखन और सहज व्यक्तित्व का नाम है- भवानीप्रसाद मिश्र। वे कविता के माध्यम से आमजन की बात उनकी भाषा में ही रखते थे। उनकी कविताओं का प्रमुख गुण कथन की सादगी है। वे राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख कवियों में से एक रहे हैं। गांधीवाद में इनका अटूट विश्वास था। इन्होंने गांधी वाङ्मय के हिंदी खंडों का संपादन कर कविता और गांधी जी के बीच सेतु का काम किया।
इनकी कविता हिंदी की सहज लय की कविता है। इस सहजता का संबंध गांधी के चरखे की लय से भी जुड़ता है, इसलिए उन्हें ‘कविता का गांधी’ भी कहा गया है। इनकी कविताओं में बोलचाल के गद्यात्मक से लगते – विन्यास को ही कविता में बदल देने की अद्भुत क्षमता है। इसी कारण इनकी कविता सहज और लोक के करीब है।