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Class 8 Social Science Chapter 3 Question Answer in Hindi मराठा साम्राज्य का उदय
मराठा साम्राज्य का उदय Question Answer in Hindi
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान पाठ 3 के प्रश्न उत्तर मराठा साम्राज्य का उदय
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 81)
प्रश्न 1.
विश्लेषण करें कि किस प्रकार भूगोल (विशेषकर पर्वत और समुद्र तट) ने मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण को निर्धारित किया।
उत्तर:
मराठा सैन्य रणनीति और राज्य निर्माण पर भौगोलिक प्रभाव-मराठा शक्ति के उदय और उनके सैन्य संगठन में भूगोल, विशेष रूप से पश्चिमी घाट के पर्वत और भारत के पश्चिमी तट की विशेष भूमिका रही।
- पश्चिमी घाट के पर्वतों ने मराठाओं को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान की। ऊँचे-नीचे पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों में शत्रु सेनाओं के लिए आक्रमण करना कठिन था। इन पर्वतीय क्षेत्रों में मराठाओं के द्वारा अनेक मजबूत दुर्ग बनवाए गए जैसे-रायगढ़, प्रतापगढ़, राजगढ़ आदि।
- मराठाओं को गुरिल्ला युद्ध पद्धति में सहायता मिली।पहाड़ी दर्रों और गुप्त मार्गों का उपयोग कर मराठा सेना शत्रुओं को परास्त कर देती थी।
- पश्चिमी तट और समुद्र तट का प्रभाव-मराठा राज्य का विस्तार भारत के पश्चिमी समुद्र तट तक था। समुद्र तट की निकटता के कारण उन्होंने सशक्त नौसेना का गठन और विकास किया।
- छत्रपति शिवाजी ने समुद्री किलों जैसे-सिंधु दुर्ग और विजय दुर्ग का निर्माण करवाया।
- मराठा नौसेना ने विदेशी शक्तियों (पुर्तगाली, डच आदि) से समुद्री व्यापार की रक्षा की। इससे मराठाओं की सैन्य व अर्थिक स्थिति दृढ़ हुई और समुद्री मार्गों पर उनका नियंत्रण बढ़ा।
प्राकृतिक भौगोलिक विशेषताओं ने मराठा साम्राज्य के विस्तार में सहायता प्रदान की।
प्रश्न 2.
कल्पना कीजिए कि आप विद्यार्धियों के लिए किसी मराठा नेता की संक्षिप्त जीवनी लिख रहे हैं। किसी एक व्यक्तित्व (कान्होजी आंग्रे, बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे, अहिल्याबाई होलकर या ताराबाई) का चयन कीजिए और उनकी प्रेरणादायक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए तीन-चार अनुच्छेद लिखिए। किसी एक चुनौती का वर्णन कीजिए जिस पर उन्होंने विजय प्राप्त की।
उत्तर:
महारानी अहिल्याबाई होलकर: मराठा साम्राज्य की प्रेरणादायक शासिका महारानी अहिल्याबाई का जन्म 1725 ई. में महाराष्ट्र के चोंड़ी गाँव में हुआ। वे होलकर वंश की उत्तराधिकारी थीं, जो उत्तर भारत में मराठा साम्राज्य के विस्तार में विशेष भूमिका निभाने वाले प्रमुख कुलों में से एक थीं। उन्होंने वर्तमान इंदौर के आस-पास विशाल क्षेत्र पर शासन किया।
अहिल्याबाई ने अपने पति और पुत्र को खोने के बाद भी तीस वर्षों तक धैर्य और साहसपूर्वक शासन किया। उनकी विशेषता न्यायप्रिय, संवेदनशील और लोक-कल्याणकारी प्रशासन था। वे स्वयं प्रजा की शिकायतें सुनती थीं और बिना पक्षपात के निर्णय देती थीं। उन्होंने उत्तर में केदारनाथ से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम तक संपूर्ण भारत में अनेक मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं और सड़क मार्गों का निर्माण और जीर्णोद्धार करवाया। वाराणसी में काशी विश्वनाथ का पुनर्निर्माण कराया, जिसे मुगल शासक औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था। इसी प्रकार, गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में योगदान दिया।
अहिल्याबाई साहसी और दूरदर्शी शासिका थीं। पति, पुत्र और ससुर के निधन के बाद राज्य संचालन उनके जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी। एक महिला शासक होने के कारण विरोध हुआ, किंतु अपने धैर्य और सूझबूझ से कुशल नेतृत्व संभाला और बाधाओं पर विजय प्राप्त की। अहिल्याबाई होलकर ने मध्य प्रदेश के महेश्वर बुनाई उद्योग को बढ़ावा दिया और पारंपरिक हथकरघा शिल्प को आगे बढ़ाया जो आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध कर रहा है।
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प्रश्न 3.
यदि आपको आज किसी एक मराठा दुर्ग (जैसे-रायगढ़, सिंधुदुर्ग, जिंजी या प्रतापगढ़) को देखने का अवसर मिले तो आप किसे चुनेंगे और क्यों? उसके इतिहास, वास्तुकला और सामरिक महत्व का अध्ययन कीजिए। कक्षा में अपने निष्कर्षों को डिजिटल या पोस्टर रूप में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
यदि मुझे मराठा काल के किसी एक किले को देखने का अवसर मिले, तो मैं रायगढ़ दुर्ग को देखना चाहूँगी।

चित्र 3.17. महाराष्ट्र के रायगढ़ दुर्ग के महल का भव्य प्रवेश द्वार, जहाँ वर्ष 1674 में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के साथ मराठा साम्राज्य का औपचारिक आरंभ हुआ
रायगढ़ दुर्ग छत्रपति शिवाजी महाराज के साम्राज्य की राजधानी थी। यह दुर्ग महाराष्ट्र में ऊँची पहाड़ी पर स्थित है और चारों ओर गहरी घाटियों से घिरा है, जिससे यह शत्रुओं के लिए चुनौती था। वर्ष 1674 में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ और उनकी औपचारिक उपाधि ‘श्री राजा शिव छत्रपति’ स्थापित हुई। इसलिए यह दुर्ग बहुत विशेष माना जाता है।
इस दुर्ग में मज़बूत दीवारें, भव्य प्रवेश द्वार, गुप्त रास्ते और सुंदर इमारते हैं। यहाँ रानी महल, शिवाजी महाराज का सिंहासन और बाज़ार क्षेत्र जैसे ऐतिहासिक स्थल हैं। दुर्ग के शीर्ष तक पहुँचने के लिए 1737 सीढ़ियाँ हैं। रायगढ़ दुर्ग इतिहास में अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मराठा साम्राज्य का केंद्र था और शिवाजी महाराज ने यहीं से साहस, न्यायपूर्ण और कुशल शासन के साथ राज्य चलाया और मराठा साम्राज्य को विस्तार दिया। रायगढ़ दुर्ग के भ्रमण से हमें अपने गौरवशाली इतिहास और छत्रपति शिवाजी के महान नेतृत्व और शासन को और गहराई से जानने का मौका मिलेगा।
प्रश्न 4.
अध्याय में लिखा है कि अंग्रेजों ने भारत को मुगलों या किसी भी अन्य शक्ति से अधिक मराठों से छीना। आपके विचार में इसका क्या अर्थ है? अध्याय में दिए गए कौन-से प्रमाण इस विचार का समर्थन करते हैं?
उत्तर:
अंग्रेजों ने भारत को मुगलों या किसी अन्य शक्ति की तुलना में मुख्य रूप से मराठों से लिया। जब अंग्रेज भारत पर शासन जमाना चाहते थे, तो मराठे मुख्य शक्ति थे। मुगल मुख्य शक्ति नहीं रह गए थे। मुगल साम्राज्य पहले ही काफी कमज़ोर हो चुका था। मराठों ने भारत के ज्यादात्तर हिस्सों जैसे-दिल्ली, गुजरात और मालवा आदि पर नियंत्रण कर लिया था।
अंग्रेजों के लिए मराठा बड़ी चुनौती और प्रतिद्वंदी थे। मुगलों का राजनीतिक और सैन्य प्रभाव बहुत कम था। तीन आंग्ल-मराठा युद्ध, मराठा साम्राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच लड़े गए थे।
- पहला आंग्ल-मराठा युद्ध (1775-1782)
- दूसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1803-1805)
- तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध (1817-1818)
भारत पर अंग्रेजों को नियंत्रण पाने के लिए मराठों को परास्त करना पड़ा न कि मुगलों को। यह दर्शाता है कि मराठों ने कितनी शक्ति और प्रभुत्व प्राप्त कर लिया था। भारत पर अंग्रेजों का कब्जा धीरे-धीरे और मराठा संघर्ष के बाद ही संभव हो पाया।
प्रश्न 5.
तुलना कीजिए कि शिवाजी और उत्तरवर्ती मराठों ने धार्मिक स्थलों और विभिन्न धर्म के लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया। इस अध्याय में कौन-सा प्रमाण धार्मिक विविधता के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है?
उत्तर:
शिवाजी महाराज और बाद में मराठाओं में धार्मिक सहिष्णुता थी। उन्होंने सभी धर्मों और आस्थाओं के लोगों का सम्मान किया और समानता के साथ व्यवहार किया। शिवाजी हिंदू थे परंतु उन्होंने मस्जिदों पर हमला नहीं किया और धार्मिक स्थलों को नहीं तोड़ा। उनकी सेना में मुस्लिम सैनिक और अधिकारी भी शामिल थे। उन्होंने धार्मिक समरसता को प्रोत्साहन दिया। तंजावुर मराठाओं के समय मुस्लिम कवि अंबर हुसैन को भगवद्गीता के विषय में लिखने की अनुमति दी गई। मराठा सभी धर्मों का सम्मान करते थे और सह-अस्तित्व में विश्वास रखते थे।
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प्रश्न 6.
इस अध्याय में वर्णित है कि मराठों के लिए दुर्ग ‘राज्य की आधारशिला’ थे। वे इतने महत्वपूर्ण क्यों थे? उन्होंने मराठों को शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध खड़े रहने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तर:
- मराठा सम्राज्य में दुर्ग केवल सैन्य ठिकाने नहीं थे, बल्कि प्रशासनिक, सामरिक और सांकृतिक आधारशिला थे। इनकी सहायता से मराठा सेना शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध लंबा और सफल प्रतिरोध कर सकी।
- दुर्गों का रणनीतिक महत्व-दुर्ग पहाड़ी क्षेत्रों और दुर्गम स्थानों पर बनाए जाते थे, जिससे दुश्मन की घुसपैठ कठिन हो जाती थी।
- उदाहरण-रायगढ़ और सिंहगढ़ दुर्ग मराठाओं को मुगलों के खिलाफ डटकर युद्ध करने में सहायक थे।
- सैन्ग प्रशिक्षण-दुर्ग सेना के प्रशिक्षण और रणनीतिक योजना बनाने के केंद्र थे। सैनिकों को घेराबंदी, हमला करना और रक्षा युद्ध तकनीक सिखाई जाती थी।
- सामरिक और राजनीतिक नियंत्रण केंद्र-दुर्गों के माध्यम से क्षेत्रीय प्रशासन और राजकीय गतिविधियों का संचालन किया जाता था। दुर्ग शत्रुओं के लिए चेतावनी का प्रतीक था कि मराठा युद्ध में जीतना अत्यंत कठिन है। पुरंदर दुर्ग मुगलों के विरुद्ध मराठा साम्राज्य की सुरक्षा और सामरिक योजना का प्रमुख केंद्र था। अहमदनगर दुर्ग मुगलों के आक्रमण के समय मराठाओं के लिए मुख्य रक्षा केंद्र बने।
- दुर्गों ने सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक महत्व को बनाए रखा। दुर्ग मराठाओं में वीरता और साहस का प्रतीक बन गए। आम जनता में भी शत्रुओं के विरुद्ध आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा करते थे।
प्रश्न 7.
आपको मराठा सिक्कों का मुख्य अभिकल्पक (डिजाइनर) नियुक्त किया गया है। एक ऐसे सिक्के का रूपांकन कीजिए, जो मराठा उपलब्धियों और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करे। अपने द्वारा चुने गए प्रतीकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मैं अभिकल्पक (डिजाइनर) के रूप में ऐसा मराठा सिक्का तैयार करूँगी, जो मराठा साम्राज्य की वीरता, संस्कृति और मूल्यों को दर्शाए। मेरे द्वारा डिजाइन किया गया सिक्का भारतीय इतिहास, धर्म और सामाजिक मूल्यों को सरल और सुंदर रूप में प्रस्तुत करेगा।
- सिक्के का अग्र भाग (सामने की ओर) शिवाजी महाराज का चेहरा होगा जो उनके कुशल नेतृत्व और असीम साहस का प्रतीक बनेगा।
- पीछे की ओर दुर्ग की छवि रक्षा और शक्ति को इंगित करेगा।
- तलवार और केसरिया ध्वज वीरता, एकता और हिंदू संस्कृति का प्रतीक होगा।
- सिक्के का पृष्ठ (पीछे) भाग संस्कृत में लिखे शब्दों को उजागर करेगा। सिक्कों में जहाज और पुस्तक के चित्र अंकित होंगे, जो मराठा नौसेना शक्ति और शिक्षा, न्याय और ज्ञान का प्रतीक होगा।
- सिक्के सोने, चाँदी और ताँबे का उपयोग करके बनाए जाएँगे।
प्रश्न 8.
मराठा काल की इस भूमिका अध्ययन करने के पश्चात आपके विचार में भारतीय इतिहास में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था? अध्याय से उदाहरण लेकर अपने विचार का समर्थन करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए। अपने विचारों को सहपाठियों के साथ साझा कर उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जब विदेशी शक्तियाँ जैसे मुगल और अंग्रेज भारत पर शासन करने की कोशिश कर रहे थे, तब मराठों ने भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा की। शिवाजी महाराज ने सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण राज्य की स्थापना की। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया। शिवाजी की ‘स्वराज्य’ की सोच ने क्रांतिकारी परिवर्तन किए। उनके विचारों, कार्यक्षमता और देशभक्ति ने आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया। मराठा सेना ने शिवाजी के देहावसान के बाद भी वीरता का परिचय दिया और मुगलों को भारत पर पूर्ण नियंत्रण करने से रोका। ताराबाई और अहिल्याबाई होलकर जैसी शक्तिशाली मराठी महिलाएँ आज भी भारत की संस्कृति, नेतृत्व कौशल, धैर्य और सशक्तिकरण की प्रतीक हैं। उनका जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और गौरव का जीवंत उदाहरण है। मराठा साम्राज्य और उसके शासकों ने भारत में स्वराज, राजनीतिक स्थिरता और सांस्कृतिक संरक्षण सुनिश्चित किया।
मराठा साम्राज्य का उदय Class 8 Question Answer in Hindi
Class 8 Samajik Vigyan Chapter 3 Question Answer
प्रश्न 1.
मराठा कौन थे? वे ब्रिटिश शासन स्थापित होने से पूर्व भारतवर्ष की सबसे बड़ी अखिल भारतीय शक्ति कैसे बने? (पृष्ठ 61)
उत्तर:
मराठा महाराष्ट्र और दक्कन क्षेत्र के साहसी और शक्तिशाली लोग थे। वे मराठी भाषा बोलते थे और हिंदू परपराओं का पालन करते थे। छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में उन्होंने मुगलों के विरुद्ध एक मज़बूत साम्राज्य की स्थाधना की। मराठाओं ने भारतीय संस्कृति की रक्षा की और ब्रिटिश शासन से पहले भारत के विशाल भाग पर शासन किया। मराठाओं ने अंग्रेजों के साथ तीन युद्ध लड़े और वे ब्रिटिश शासन की स्थापना से पहले भारत के अंतिम शक्तिशाली स्वदेशी शासक सिद्ध हुए। मराठा शासकों ने जनकल्याण और संस्कृति उत्थान के लिए कार्य किया। कला और संस्कृति को संरक्षण दिया और उनके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे धार्मिक रूप से सहिष्णु थे और प्रजा पर अत्याचार नहीं किया। उन्होंने व्यापार को समृद्ध किया और उस समय की परिवहन प्रणालियों में से एक को विकसित किया। मराठा भारत की सबसे प्रभावशाली शक्तियों के रूप में उभरे। जब अंग्रेजों ने भारत में प्रवेश किया, उस समय मराठा स्वराज्य अपने उत्कर्ष पर था। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा राज्य आगे चलकर एक विशाल साम्राज्य में बदल चुका था। 18 वीं शताब्दी के मध्य तक मराठा सत्ता उत्तर में दिल्ली से लेकर दक्षिण में तंजावुर तक और पश्चिम में अरब सागर से लेकर पूर्व में उड़ीसा तक फैल चुकी थी। पर आगे चलकर आंतरिक कलह, पेशवाओं और सरदारों के बीच सत्ता संघर्ष तथा पानीपत की तीसरी लड़ाई ने मराठा शक्ति को नुकसान पहुँचाया। इस कमज़ोरी का फायदा उठाकर अंग्रेजों ने धीरे-धीरे व्यापार से राजनीति और फिर शासन तक अपना प्रभाव बढ़ाया।
प्रश्न 2.
उनके शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं? (पृष्ठ 61)
उत्तर:
मराठों ने सुसंगठित प्रणाली अपनाई। शिवाजी महाराज ने सुनिश्चित किया कि उनके अधिकारी ईमानदार और निष्ठावान हों। उन्होंने अन्यायपूर्ण नियमों को समाप्त किया और रणनीतिक योजना और सुरक्षा के लिए मजबूत किले बनवाए।
शिवाजी ने सुचारु शासन के लिए आठ मंत्रियों का समूह बनाया जिसे ‘अष्टप्रधान मंडल’ कहा गया। कई अधिकारियों की शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी स्थानांतरण की प्रणाली लागू की। इससे शोषण रोकने में भी मदद मिली। शिवाजी महाराज ने युद्ध में मृत्यु को प्राप्त सैनिकों की पत्नियों और पुत्रों को पेंशन दी और सेना में भर्ती का अवसर दिया।
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प्रश्न 3.
भारतीय इतिहास पर मराठा साम्राज्य का क्या प्रभाव पड़ा? (पृष्ठ 61)
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी ने भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मुगलों को कड़ी चुनौती दी और सशक्त मराठा साम्राज्य की स्थापना की। शिवाजी के सुशासन में भारतीय संस्कृति का उत्थान हुआ। उन्होंने जनता की सुरक्षा की और सभी धर्मों का सम्मान किया। उनकी वीरता और अद्वितीय नंतृत्व क्षमता ने आगे चलकर भारतीयों को अंग्रेजी शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरित किया। मराठों ने पूरे भारत में अपनी शक्ति का विस्तार किया, क्षेत्रीय राजनीति को आकार दिया और औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष किया। मराठों का योगदान देशभक्ति और साहस का मिसाल है। मराठा शासन व्यवस्था आज भी भारत की राजनैतिक सोच और प्रशासन में प्रभाव डालती है।
आइए पत्ता लगाएँ (पृष्ठ 63)
प्रश्न 1.
क्या आपने कभी ‘भक्ति’ शब्द सुना है? आपके लिए इसका क्या अर्थ है? भारत के किसी भी भक्ति संत का चयन कर उनके जीवन, उपदेशों और संदेशों का अध्ययन कीजिए। आप उनकी कोई कविता या भजन ढूँढ़कर उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर:
भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज’ (सेवा करना) धातु से आया है, जिसका अर्थ ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण है। भक्ति आध्यात्मक मार्ग की ओर प्रेरित करती है। सच्ची भक्ति भावना शांति, संतुष्टी और निस्वार्थ सेवा का अनुभव कराती है।
गोस्वामी तुलसीदास (1532-1623) भक्तिकाल के महान संत और कवि हैं। इनकी भक्ति आदर्श, मानव जीवन की मर्यादा, नैतिकता और लोकमंगल की भावना से ओत-प्रोत हैं। वे मर्यादापुरुषोत्तम राम को अपना स्वामी मानते हैं और एक आदर्श समाज (रामराज्य) के विचार काव्य के माध्यम से रखते हैं। वे भगवान के प्रति समर्पण और मन के अंहकार को त्यागने की शिक्षा देते हैं। तुलसीदास जी ने सरल और जनभाषा का प्रयोग किया। अवधी और ब्रजभाषा के प्रयोग से भक्ति को आम जनता तक पहुँचाया।
लोक कल्याण भावना पर आधारित तुलसीदास जी द्वारा रचित दोहा-
परहित लागी तजई जो देही।
संतत संत प्रसंसहि तेही।।
इसका अर्थ है कि जो मनुष्य दूसरों की भलाई के लिए अपने शरीर या मोह का त्याग करता है, उसकी संत लोग प्रशंसा करते हैं।
प्रश्न 2.
यदि आप भूतकाल में यात्रा करके शिवाजी से मिल सकें तो आप उनसे कौन-से तीन प्रश्न पूछेंगे और क्यों? (पृष्ठ 65)
उत्तर:
यदि एक छात्र के रूप में मुझे समय-यात्रा पर जाने का अवसर मिले और मैं महान छत्रपति शिवाजी महाराज से मिल सकूँ तो निम्नलिखित तीन सवाल पूछूँगी-
- “महाराज, आपने सीमित संसाधनों और अनेक शक्तिशाली शत्रुओं के बीच भी स्वराज्य की नींव कैसे रखी? आज हम युवाओं को इससे क्या सीख लेनी चाहिए?”
क्यों पूछूँगी-आज के समय कई छात्र सीमित संसाधन या कठिन प्रतिस्पर्धा का तर्क देते हैं। शिवाजी महाराज ने विशाल धन और बिना बड़ी सेना के मराठा साम्राज्य को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इससे छात्रों को प्रेरणा मिलेगी। - “महाराज, आप युद्ध में कठोर थे परंतु प्रजा और महिलाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील-यह संतुलन आपने कैसे और किससे सीखा?”
क्यों-आज समाज में नैतिकता और मानवीय भावनाओं को जागृत करना है। हमें सीख मिलेगी कि नैतिकता के बिना सफलता अधूरी है। - “महाराज! आपने परंपरा और नवाचार के बीच संतुलन कैसे बनाया?”
क्यों-आज छात्र आधुनिक तकनीक और संस्कृति के बीच उलझे रहते हैं। शिवाजी महाराज से सीख मिलती है कि एक ओर हिंदवी स्वराज्य, प्राचीन संस्कृति और भाषा का जागरण किया, दूसरी ओर संगठित नौसेना, नई युद्ध रणनीति व नवीन प्रशासनिक प्रणालियाँ अपनाईं।
प्रश्न 3.
गुरिल्ला युद्ध के बारे में अधिक जानने का प्रयास करें। दुनिया के अन्य किन देशों में यह पद्धति अपनाई गई? उन्होंने इसके लिए किन भौगोलिक लाभों का उपयोग किया? अपने निष्कर्षों पर समूहों में चर्चा करें। (पृष्ठ 66)
उत्तर:
गुरिल्ला युद्ध एक प्राचीन युद्ध तकनीक है, जिसमें सैनिक छोटे-छोटे समूह बनाकर अचानक हमले करते, जाल और गड्ढे लगाते और तेजी से पीछे हट जाते थे। अफग़ानिस्तान, वियतनाम में इस युद्ध तकनीक का उपयोग किया गया। सैनिक अपने दुश्मनों को हराने के लिए घने जंगलों, पहाड़ों और कठिन भू-भाग का लाभ उठाते थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने गुरिल्ला युद्ध रणनीतियों का भरपूर इस्तेमाल किया। उन्होंने किलों, पहाड़ी मार्गों और जंगलों में छापामार हमलों से दुश्मनों को परास्त किया।
प्रश्न 4.
शिवाजी के जीवन की किसी एक घटना का चयन कीजिए और अपने सहपाठियों के साथ मिलकर नाटक के रूप में उसका मंचन कीजिए।
उत्तर:
- विषय – तोरणा विजय (प्रचंडगढ़ का उदय)
- सूत्रधार – 1646 में, मात्र 16 वर्ष की आयु में शिवाजी ने बीजापुर सल्तनत के नियंत्रण वाले ‘तोरणा किले’ पर विजय प्राप्त की और हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी।
- पात्र – शिवाजी महाराज (युवां), तानाजी मालुसरे (साथी) येसाजी (सैनिक), बीजापुरी किलादार, मावले सैनिक।
- दृश्य 1 – संकल्प (पुणे के पास पहाड़ी, रात का समय)
- शिवाजी – अब समय आ गया है, मावलों! हम हिंदवी स्वराज्य की नींव रखेंगे।
- तानाजी – तोरणा पहला कदम है, महाराज।
- येसाजी – किला ऊँचाई पर है, बहुत शत्रु सैनिक हैं।
- शिवाजी – संकल्प से कोई कार्य मुश्किल नहीं है। तोरणा हमारा ‘प्रचंडगढ़’ होगा!
- दृश्य 2 – चढ़ाई।
- तानाजी – साथियो! शत्रु सैनिक नींद में हैं। किले में प्रवेश करो।
- शिवाजी – किले के शत्रु सैनिक हथियार लिए आ रहे हैं-मराठा सैनिको इन पर टूट पड़ो।
- दृश्य 3 – विजय।
- तानाजी – महाराज! तोरणा अब मराठों का है।
- शिवाजी – आज से सह्याद्री की पहाड़ियों पर स्थित तोरणा किला सिर्फ पत्थरों का किला नहीं बल्कि मराठा साम्राज्य की नींव का पहला पत्थर है।
- सैनिक – शिवाजी महाराज की जय! जय भवानी।
- शिवाजी – लड़ाई तो अब शुरू हुई है, मुगलों सावधान हो जाओ….और भी किले जीतने हैं! जय भवानी!
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प्रश्न 5.
क्या आपने ‘भरतनाट्यम’ नृत्यशैली के विषय में सुना है? क्या आप जानते हैं कि इस नृत्यशैली का मराठाओं से गहरा संबंध है? क्या आप यह ज्ञात कर सकते हैं कि यह संबंध क्या था? (पृष्ठ 79)
उत्तर:
जी हाँ, मराठा काल में ‘भरतनाट्यम’ नृत्यशैली मंदिर की चहारदीवारी से निकलकर राजदरबारों तक पहुँची और अपने आधुनिक रूप की नींव रखी। मराठा शासकों ने तमिल, तेलुगु, संस्कृत और मराठी संस्कृतियों का अनूठा मिश्रण तैयार किया। आज हम भरतनाट्यम का प्रदर्शन जैसे-जतिस्वरम, शब्दम, अल्लारिपु, वर्णम, पदम और तिलाना देखते हैं, वह अधिकांशतः तंजौर के मराठा दरबार की देन है।
आइए विचार करें (पृष्ठ 72)
प्रश्न 1.
शिवाजी ने अपने अधिकारियों को कठोर निर्वेश दिए थे कि वे अपनी प्रजा के साथ दुर्व्यवहार न करें और न ही उनसे बलपूर्वक घास का एक तिनका भी छीनें। अपने अधिकारियों को लिखे एक पत्र में शिवाजी कहते हैं-
“नौसेना के लिए सागौन जैसे बड़े वृक्षों की लकड़ियाँ आवश्यक हैं। आवश्यकता हो तो जंगल से पेड़ काटने की अनुमति ले लो और आगे बढ़ो। आम और कटहल जैसे अन्य वृक्ष भी उपयोगी हैं, किंतु उन्हें मत छुओ क्योंकि ऐसे पेड़ों को बढ़ने में कई वर्ष लगते हैं और लोग उनकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करते हैं। यदि तुम उन्हें काट दोगे, तो क्या उनका दुःख कभी समाप्त होगा? अगर तुम दूसरों पर अत्याचार करके कुछ प्राप्त करते हो, तो वह अत्याचारी के साथ-साथ शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। ऐसे वृक्षों के अभाव में हानि भी होती है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में बल का प्रयोग मत करो।”
शिवाजी के पत्र के आधार पर आप एक शासक के रूप में उनके मूल्यों के बारे में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
दिए गए पत्र के आधार पर कहा जा सकता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज करुणा, न्याय और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्यों के प्रति समर्पित थे। वे नैतिक और आदर्श शासन व्यवस्था पर जोर देते थे। प्रजा के प्रति जिम्मेदारी, संवेदना महसूस करते थे और सदा जन समाज के विकास, अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देते थे।
उन्होंने अन्याय, अत्याचार और अनैतिक आचरण से दूरी बनाए रखी। युद्ध के समय महिलाओं, बच्चों और निर्दोष नागरिकों को हानि न पहुँचाने के कड़े निर्देश दिए। वे अपनी प्रजा की आवश्यकताओं और विचारों को समझते थे। किसानों की रक्षा के लिए कर व्यवस्था को न्यायसंगत बनाया और प्रजा का मनोबल बनाए रखा। योद्धा होने के साथ-साथ, वे कुशल शासक भी थे।
पत्र से यह भी स्पष्ट होता है कि शिवाजी महाराज प्रकृति, कला और साहित्य से गहन लगाव रखते थे। उन्होंने जल संरक्षण, दुर्गों के आस-पास हरियाली बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन पर बल दिया। शिवाजी ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति जागरूकता उत्पन्न की। मराठी भाषा, कला और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।