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The Rise of the Marathas Class 8 Notes in Hindi
मराठा साम्राज्य का उदय Class 8 Notes
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 नोट्स मराठा साम्राज्य का उदय
→ मराठा – महाराष्ट्र क्षेत्र के निवासी जो मराठी भाषा बोलते हैं।
→ मराठी – महाराष्ट्र की क्षेत्रीय भाषा, जिसका प्राचीन साहित्यिक इतिहास है।
→ साहित्यिक इतिहास – वह अध्ययन जो बताता है कि समय के साथ लेखन शैलियाँ और साहित्यिक विधा कैसे विकसित हुईं और समाज, संस्कृति और विचारधारा साहित्य को किस प्रकार प्रभावित करता है।
→ अनुष्ठान – पारंपरिक धार्मिक क्रियाएँ जैसे पूजा-पाठ।
→ भक्तिमय – ईश्वर में विश्वास और श्रद्धा से भरा हुआ।
→ भक्ति आंदोलन – धार्मिक या आध्यात्मिक आंदोलन जिसमें लोग ईश्वर के प्रति प्रेम, निष्ठा और भक्ति को सबसे महत्वपूर्ण मानते थे। महाराष्ट्र में संत तुकाराम, नामदेव रामदास, संत ज्ञानेश्वर जैसे संतों के माध्यम से लोकप्रिय हुआ।
→ भगवद्गीता – हिंदू धर्मग्रंथ।
→ जागीर – भूमि का अनुदान। राजा द्वारा किसी अधिकारी को दिया गया जमीन या क्षेत्र, जिससे वह वहाँ की आय और प्रशासन संभाल सके।
→ एकत्रित – कई चीजों / क्षेत्र / लोगों को एक साथ लाकर मजबूत या स्थिर किया जाए।
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→ स्वराज्य – आत्म-शासन या स्वतंत्र राज्य। अपने देश या राज्य पर खुद का शासन करना। शिवाजी ने सशक्त और स्वतंत्र साम्राज्य बनाने के लिए स्वराज्य की योजना बनाई।
→ संप्रभुता – किसी राज्य या शासक की स्वतंत्र और सर्वोच्च सत्ता, जिसमें वह बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप से शासन करता है।
→ क्रांतिकारी – ऐसा जो बड़े बदलाव या नई व्यवस्था की शुरुआत करे।
→ छापामार / गुरिल्ला युद्ध – तेज गति अचानक हमले और गृप्त रणनीतियों पर आधारित सैन्य युद्ध प्रणाली।
→ सर्जिकल स्ट्राइक – शत्रु पर गुप्त व सटीक तरीके से किया गया हमला।
→ कूटनीति – विदेशी देशों और उनके मामलों से शांतिपूर्ण और बुद्धिमानी से निपटने की कला।
→ राज्याभिषेक – राजा या शासक द्वारा औपचारिक रूप से सत्ता संभालने का समारोह।
→ नया युग – इतिहास में नई अवधि या नए शासन का आरंभ।
→ कारनामे – वीरतापूर्ण कार्य, पराक्रम से कार्य करना।
→ दक्षिण दिग्विजय – छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा शुरू किया गया दक्षिण भारत का सैन्य अभियान।
→ सैन्य अभियान – किसी क्षेत्र / भूमि को जीतने या नियंत्रित करने हेतु संगठित युद्ध।
→ जिंजी दुर्ग – तमिलनाडु में स्थित जिंजी दुर्ग, छत्रपति शिवाजी द्वारा 1677 में जीता गया था। यह मराठों का महत्वपूर्ण गढ़ बन गया।
→ परिवर्तन – किसी चीज़ या व्यक्ति का पूरी तरह से नए रूप में बदल जाना।
→ विकेंद्रीकृत प्रशासन – शासन व्यवस्था जिसमें सत्ता कई अधिकारियों में बाँटी जाती है।
→ पेशवा – मराठा प्रशासन का प्रधानमंत्री, जो आगे चलकर शक्तिशाली शासक बन गए।
→ सँभालना / प्रयोग किया – सत्ता का प्रयोग करना। किसी शक्ति अधिकार या प्रभाव का उपयोग करना।
→ केंद्रीकृत प्रशासन – ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें सत्ता केंद्र सरकार शासक के पास होती है। वेतन प्राप्त करने वाले अधिकारी होते हैं और वंशानुगत अधिकारी नहीं होते।
→ अष्टप्रधान मंडल – आठ मंत्रियों की परिषद।
→ घुड़सवार – घोड़े पर सवार सैनिक।
→ कैवेलरी – घुड़सवार सेना।
→ बारगीर – जिनके घोड़े और हथियार का भुगतान राज्य द्वारा किया जाता था।
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→ शिलेदार – जिनके घोड़ों और उपकरणों (हथियार) का भुगतान स्वयं सैनिक करते थे।
→ मराठा नौसेना – शिवाजी महाराज ने समुद्री तटों की रक्षा के लिए मजबूत नौसेना की स्थापना की।
→ मराठा तलवारें और भाले – मराठाओं द्वारा युद्ध में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक हथियार।
→ मराठा दुर्ग – छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनाए गए, जीते गए या पुनर्निर्मित किले। ये किले रणनीतिक नियंत्रण, सुरक्षा और प्रशासन के लिए अति महत्वपूर्ण थे, जैसे- रायगढ़, सिंहगढ़, प्रतापगढ़ आदि।
→ मराठा रणनीति – शिवाजी महाराज और मराठा सेनाओं की युद्ध रणनीति कुशल और लक्ष्य प्राप्त करने पर आधारित थी।
→ आज्ञापत्र – रामचंद्रपंत अमात्य ने इनमें शिवाजी के प्रशासन, सैन्य और राजनीतिक संधियाँ।
→ मराठी शिलालेख – बृहदेश्वर मंदिर की दीवारों पर भोंसले शासन और परिवार का अंकित इतिहास। (चित्र 3.23 पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ सं. 79 देखें)।
→ गणपति पंत प्रधान रुपया – दुर्लभ मराठा सिक्के जिसमें मराठों ने अपने सांस्कृतिक प्रतीक जोड़े। इसे 19वीं शताब्दी में पटवर्धनों द्वारा ढाला गया।
→ कार्ताज – समुद्री यात्रा के लिए पुर्तगालियों द्वारा जारी किया जाने वाला दस्तावेज।
→ समुद्री प्रभुत्व – समुद्री मार्गों और तटीय क्षेत्रों पर नियंत्रण और प्रभाव।
→ मराठा न्याय व्यवस्था – मराठा न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड का संयमित प्रयोग था।
→ पंचायत – स्थानीय अधिकारियों और प्रमुख लोगों का समूह जो न्याय और समाधान की व्यवस्था बनाता था।
→ कोतवाल – पुणे और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोतवाल या पुलिस अधिकारी की तैनाती की जाती थी।
→ कार्गो – सोना, वस्त्र आदि जैसे माल, जो जहाजों द्वारा परिवहन किए जाते थे।
→ नाव सेवा – मराठा काल में फेरी (नाव) का उपयोग नदी परिवहन के लिए होता था जैसे ओडिशा में।
→ मराठा मुहरें / सिक्के शिवाजी महाराज द्वारा उपयोग की जाने वाली सोने और ताँबे के सिक्कों पर देवनागरी लिपि का प्रयोग हुआ।
→ मोडी लिपि देवनागरी लिपि का एक तिर्यक रूप। यह पत्राचार के लिए उपयोग की जाने वाली मुख्य लिपि थी।

→ तंजावुर शैली – पारंपरिक चित्रकला जिसमें स्वर्ण-पत्र का कोमल प्रयोग होता था। यह शैली मराठों के समय फली फूली।
→ वाघ-नख – एक छोटा अस्त्र जो बाघ के पंजे के समान आकार का होता है। (चित्र 3.2, पृष्ठ सं. 64 देखें)।
→ राज्य-व्यवहार-कोष – भाषाई ग्रंथ जिसका उद्देश्य मराठी भाषा को शुद्ध करना और फारसी प्रभाव को कम करना था।
→ प्रदर्शन – किसी वस्तु को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना या विरोध जताना
→ दृढ़ता – किसी काम में विश्वास रखना और हार न मानना।
→ कर्नाटिक संगीत – दक्षिण भारतीय संगीत शैली, जिसे मराठा शासन के संरक्षण में समृद्ध हुई।
→ भरतनाट्यम – प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यशैली जो मराठा शासनकाल में फली फूली।
→ धन्वंतरि महल – सरफोजी द्वारा स्थापित चिकित्सालय, जिसमें भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह की चिकित्सा निःशुल्क दी जाती थी।
→ बहुभाषी – कई भाषाओं को समझने और बोलने में सक्षम।
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→ सांस्कृतिक पुनरुद्धार – मराठा शासन के दौरान भारतीय परंपराओं, साहित्य, मूल्यों और भाषाओं का पुनर्जागरण।
→ प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध – प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1775 – 1782) भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच लड़ा गया पहला संघर्ष था।
→ राज्याभिषेक शक् – छत्रपति शिवाजी ने नई संवत् प्रणाली का आरंभ किया था। इसका उद्घाटन शिवाजी महाराज नं 1674 को रायगढ़ किले में अपने राज्याभिषेक के समय किया था।
→ रायगढ़ दुर्ग – रायगढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज की शक्ति का प्रमुख प्रतीक है। 1674 में शिवाजी ने इसे अपनी राजधानी बनाया।
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- मराठा दक्कन के पठार में रहने वाला एक समुदाय है, जो मुख्य रूप से आज के महाराष्ट्र में रहता है। ये लोग मराठी भाषा बोलते हैं, जिसका बारहवीं शताब्दी से निरंतर समृद्ध साहित्यिक इतिहास रहा है।
- इस पाठ से हम जानेंगे कि मराठा कैसे एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बने और उन्होंने भारतीय इतिहास को महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया।
- तेरहवीं शताब्दी में महाराष्ट्र के अधिकांश भाग पर यादव वंश का शासन था और उनकी राजधानी देवगिरी (दौलताबाद) थी। चौदहवीं शताब्दी के प्रारंभ में दिल्ली सल्तनत के खिलजी शासकों ने यादव वंश को पराजित कर दिया।
- राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद महाराष्ट्र में सांस्कृतिक परंपराएँ लगातार बनी रहीं। भक्ति से जुड़ी परंपराएँ सातवीं से सत्रहवीं शताब्दी के बीच विकसित हुई। संतों और साधकों ने आध्यात्मिक उत्थान के लिए भक्ति मार्ग को महत्व दिया। समाज के अलग-अलग वर्गों के संतों ने लोकभाषाओं में काव्य-रचना और भक्ति गीतों के माध्यम से अपने विचारों को व्यापक रूप से फैलाया और जनमानस को प्रभावित किया।
- महाराष्ट्र में ज्ञानेश्वर, नामदेव. तुकाराम और रामदास जैसे संत लोकप्रिय हुए। उन्होंने उपनिषदों और भगवद्गीता जैसे महान ग्रंथों का मराठी भाषा में अनुवाद किया, जिससे उनका गूढ़ ज्ञान जनमानस तक आसानी से पहुँच सका । समृद्ध साहित्य और संतों ने लोगों को एकजुट और जागरूक बनने के लिए भी प्रेरित किया। समाज को मजबूत धार्मिक और सांस्कृतिक आधार मिला जिसने आगे चलकर मराठों को संगठित राजनीतिक शक्ति बनने में मदद की।
→ मराठा शक्ति की स्थापना और शिवाजी का उदय
- 1630 में शिवाजी का जन्म भोंसले कुल में शाहजी और जीजाबाई के यहाँ हुआ। शिवाजी का पालन पोषण पुणे में जीजाबाई और विश्व अधिकारियों की देख रेख हुआ, जहाँ उन्हें अच्छे संस्कार और शिक्षा मिली। इस काल में दक्कन के सुल्तानों के लगातार संघर्षों से पुणे गंभीर रूप से प्रभावित था।
- शिवाजी ने 16 वर्ष की आयु में सैन्य अभियान शुरू किया। उन्होंने स्वतंत्र राज्य या ‘स्वराज्य’ की कल्पना की, जो समय के साथ विकसित हुई और संस्कृति, राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई थी।
- शिवाजी का राज्य भारत के पश्चिमी तट तक फैल गया। तटीय क्षेत्रों पर नियंत्रण के लिए उन्होंने नौसेना की स्थापना की। उस समय यह साहसिक और क्रांतिकारी कदम था। मुगल साम्राज्य में नौसेना का उपयोग बहुत कम होता था।

- मराठा नौसेना के उदय की वीरता की कहानियाँ आगे चलकर इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय बन गई।
- शिवाजी ने अपनी प्रजा की रक्षा के लिए और शत्रुओं को परास्त करने हेतु गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाई। छोटे-छोटे दल अपने भू-भाग के गहरे ज्ञान के आधार पर तेज़ और अचानक हमला कर शत्रुओं की बड़ी सेनाओं को हरा देते थे। शिवाजी की सेना व नौसेना की शक्ति से बीजापुर का सुल्तान डर गया। प्रतापगढ़ में शिवाजी ने अफ़ज़ल खाँ का वध किया और मराठों ने उसकी सेना को पराजित कर दिया।
- वाघ नख एक छोटा हथियार है। यह बाघ के पंजे जैसा होता है। शिवाजी महाराज ने इस हथियार से अफ़ज़ल खाँ को मारा था।

- तीन वर्षों तक मुगलों के लगातार हमलों के जवाब में शिवाजी महाराज ने मुगलों के बंदरगाह सूरत (गुजरात) पर आक्रमण किया। वहाँ से उस समय उन्हें एक करोड़ रुपए का बड़ा खजाना मिला। शिवाजी महाराज ने धार्मिक स्थानों पर हमला नहीं किया और मोहनदास पारेख जैसे दानवीर लोगों को सुरक्षित रखा।
- शिवाजी महाराज के सूरत अभियान और पराक्रम की घटनाएँ इतनी प्रसिद्ध हो गई कि उस समय के अंग्रेजी अखबार ‘लंदन गजट’ में छपी।

- सूरत अभियान के बाद शिवाजी को हराने के लिए प्रतिष्ठित राजपूत सेनापति जय सिंह को भेजा गया। शिवाजी को पुरंदर दुर्ग में संधि करनी पड़ी।
- आगरा के मुगल दरबार में औरंगजेब ने शिवाजी के साथ छलपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार किया। अपमान का विरोध करने पर, औरंगजेब ने शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी को नजरबंद कर दिया। शिवाजी ने चतुर रणनीति बनाई। वे फलों और मिठाई के टोकरों में छिपकर मुगल पहरेदारों को चकमा देकर अपने पुत्र संभाजी के साथ सुरक्षित बाहर निकल गए और मुक्त हुए। इसके बाद औरंगजेब फिर कभी शिवाजी महाराज को पकड़ नहीं सका।
- 1674 में रायगढ़ के पर्वतीय दुर्ग में शिवाजी का राज्याभिषेक वैदिक विधि-विधान से हुआ। उन्हें ‘श्री राजा शिव छत्रपति’ की उपाधि मिली। उन्होंने ‘राज्याभिषेक शक्’ नामक नई संवत् प्रणाली की शुरुआत की।
- राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने दक्षिण दिशा में ऐतिहासिक विजय अभियान चलाया जिसे ‘दक्षिण दिग्विजय’ कहा गया। शिवाजी ने तमिलनाडु और कर्नाटक के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की। मराठों का दक्षिण दिशा में विस्तार ने मुगल आक्रमणों के खिलाफ मजबूत और महत्वपूर्ण सैन्य व रणनीतिक सुरक्षा साबित हुआ।
- शिवाजी ने डच और यूरोपीय व्यापारियों द्वारा भारतीयों को दास बनाकर बेचने की अमानवीय प्रथा पर रोक लगाई। उन्होंने दास व्यापार के विरुद्ध कदम उठाए। शिवाजी का यह कदम प्रजा के प्रति संवेदनशीलता, सुरक्षा व संरक्षण का प्रमाण है।
- पचास वर्ष की आयु में शिवाजी का देहावसान हुआ। उनका जीवन पराक्रम और वीरता की गाथाओं से भरा था, जो भारतवर्ष और विदेशों में प्रसिद्ध हुई। शिवाजी से प्रेरित होकर बुंदेला छत्रसाल ने मुगलों के विरुद्ध संघर्ष कर बुंदेलखंड (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का भाग) राज्य की स्थापना की और हिंदी कवि भूषण ने अनेक काव्य रचनाएँ की।
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→ शिवाजी के पश्चात मराठा

- शिवाजी के दो पुत्र थे। शिवाजी के निधन के बाद उनके बड़े पुत्र संभाजी छत्रपति बने । औरंगजेब दक्कन पर मुगलों का पूर्ण नियंत्रण चाहता था, जिसमें संभाजी और वीर मराठे बाधक थे।
- औरंगजेब ने मराठों के खिलाफ युद्ध छेड़ा और संभाजी को बंदी बनाकर क्रूरतापूर्ण तथा असहनीय पीड़ाएँ देकर हत्या की और मराठा राजधानी रायगढ़ पर कब्ज़ा कर लिया।
- संभाजी की मृत्यु के बाद शिवाजी के दूसरे पुत्र राजाराम छत्रपति बने और जिंजी (तमिलनाडु) से मुगलों का विरोध जारी रखा और युद्ध को दक्षिण भारत तक पहुँचाया। मराठों ने अपने दुर्गों की रक्षा की और मुगलों को कई बार पराजित किया। परिणामस्वरूप औरंगजेब की दक्कन में मृत्यु हुई।
- औरंगजेब की मौत के बाद, मराठे फिर मजबूत शक्ति के रूप में उभरे। छत्रपति राजाराम की रानी ताराबाई के नेतृत्व में मराठों ने मुगलों पर बड़े आक्रमण किए और भारतवर्ष के अधिकांश भाग पर विजय हासिल कर अपना अधिकार स्थापित किया।
- शिवाजी द्वारा स्थापित केंद्रित प्रशासन धीरे-धीरे विकेंद्रीकृत हुआ। मराठा शक्ति अलग-अलग अधिकारियों और स्थानों में बँट गई।
- बाजीराव प्रथम और उनके पुत्र नाना साहेब पेशवा के नेतृत्व में मराठों का विस्तार पूरे भारत में हुआ। मराठों ने लाहौर, अटक और पेशावर ( पाकिस्तान) पर अधिकार स्थापित किया और दिल्ली पर भी अधिकार स्थापित किया।
- 1761 में पानीपत के युद्ध में मराठों को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन महादजी शिंदे के नेतृत्व में 1771 में उन्होंने दिल्ली पर फिर से अधिकार प्राप्त किया।
- दिल्ली तीन दशकों तक मराठाओं के नियंत्रण में रही। बाद में अंग्रेजों ने इस पर अधिकार कर लिया।
- 18वीं सदी के अंत में अंग्रेज़ों के मुख्य प्रतिद्वंदी मराठे थे। 1775 से 1818 के बीच मराठों और अंग्रेजों के बीच तीन आंग्ल-मराठा युद्ध हुए।
- मराठों के आपसी झगड़े और विभाजन बढ़े। अंग्रेजों की चालाकी और संगठन शक्ति के कारण मराठा शक्ति कमजोर हुई। अंतत: मराठा शक्ति का पतन हुआ। अंग्रेजों ने भारत को मुगलों या किसी अन्य शक्ति की तुलना में मराठों से अधिक हासिल किया। भारत में अंग्रेजों का शासन स्थापित हो गया।
→ मराठा प्रशासन
- शिवाजी ने केंद्रीकृत प्रशासन की स्थापना की। वंश के आधार पर पद और भूमि देने की प्रक्रिया को समाप्त किया। राजकीय अधिकारियों को राज्य कोष से वेतन दिया जाता था।

- कई अधिकारियों का कम समय में तबादला किया गया ताकि वे अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सकें।
- शिवाजी ने अपने सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का परिचय दिया। युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं को पेंशन और उनके परिवार के सदस्यों को सैन्य पद दिए।
- शिवाजी महाराज ने शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए ‘अष्टप्रधान मंडल’ या ‘आठ मंत्रियों’ की परिषद बनाई । इसमें आठ मंत्री मिलकर प्रशासन, सैन्य, न्यायपालिका, धार्मिक कार्य, राजस्व, विदेश नीति गुप्तचर विभाग और वित्त व्यवस्था संभालते थे।

- मराठे ने उत्तर भारत और दक्कन के प्रांतों से मुगलों से रक्षा करने के बदले में चौध (25%) और सरदेशमुखी (10%) नामक कर वसूलते थे। समय के साथ इनमें से कई प्रांत मराठा साम्राज्य का भाग बन गए।
- 18वीं शताब्दी में मराठों ने मुगल-मुद्राशैली में अपने सांस्कृतिक प्रतीकों को जोड़ा। उदाहरण के लिए ‘गणपति – पंतप्रधान रुपया’ नामक दुर्लभ मराठे सिक्के 19वीं शताब्दी में पेशवा के सेनानायकों (पटवर्धनों) द्वारा ढाला गया था।
→ मराठा सैन्य प्रशासन
- मराठा सेना को मुख्य रूप से पैदल सेना घुड़सवार सेना और नौसेना में बाँटा गया था। घुड़सवार सेना दो प्रकार के सैनिकों से बनी थी।

- बारगीर – जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और हथियार उपलब्ध कराए जाते थे।
- शिलेदार – जिनके घोड़ों और उपकरणों के भुगतान स्वयं सैनिक करते थे।
- 18वीं शताब्दी में महादजी शिंदे ने सेना में सुधार करते हुए यूरोपीय शैली की प्रशिक्षित टुकड़ियों और आधुनिक तोपखाने को अपनाया, जिससे सैन्य अनुशासन और युद्ध कला और क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई।
- मराठों के पारंपरिक हथियार तलवार और भाले थे। वे बंदूकों और रॉकेटों का भी इस्तेमाल करते थे। रॉकेटों का उपयोग छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से हो रहा था और 1770 तक धातु नलिका (मेटल टयूब) वाले रॉकेटों का भी उपयोग होने लगा।
- छत्रपति शिवाजी ने अपने राज्य की रक्षा को मजबूत करने के लिए कई किलों का निर्माण कराया। किले मराठा रक्षा प्रणाली का मुख्य आधार थे। राजनीतिक नियंत्रण और छापामार युद्ध के समय किले सुरक्षा के लिए जरूरी थे।
- मजबूत किलेबंदी (दुर्गबंदी) के कारण मराठा साम्राज्य औरंगजेब जैसे शक्तिशाली व कर शासकों द्वारा आक्रमणों के बावजूद अस्तित्व में बना रहा शिवाजी महाराज के वित्तमंत्री रामचंद्रपंत अमात्य ने अपने ग्रंथ ‘आज्ञापत्र’ में यह स्पष्ट किया कि दुर्ग राज्य (मराठा साम्राज्य) का आधार है।
→ समुद्री वर्चस्व
- शिवाजी ने तटीय सुरक्षा के लिए नौसेना का गठन किया। मराठा नौसेना का तट की सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर नियंत्रण था। 18वीं शताब्दी में कान्होजी आंग्रे ने कुशल भूगोल- ज्ञान और चतुर युद्धनीति से मराठा नौसेना को अत्यंत शक्तिशाली बनाया।
- मराठाओं ने अनेक नौसैनिक युद्धों में जीत प्राप्त की और ब्रिटिश, पुर्तगाली और यूरोपीय शक्तियों को कड़ी चुनौती
दी। - पहले यूरोपीय शक्तियाँ भारतीय जहाजों से कार्ताज (नौसैनिक व्यापार – पत्र) खरीदने के लिए विवश करती थीं। मराठाओं ने इस व्यवस्था को पलट दिया और यूरोपीय जहाज़ों से व्यापार-पत्र (पासपोर्ट) लेना अनिवार्य किया।
- यूरोपीय शक्तियाँ मराठों की शक्ति और नीति से नाराज़ हो गईं और हताशा में यूरोपियों ने कान्होजी आंग्रे को ‘समुद्री डाकू’ कहा।

→ न्याय व्यवस्था
- मराठा न्याय व्यवस्था न्यायपूर्ण थी और इसमें मृत्युदंड का कम उपयोग किया जाता था।
- पंचायत स्थानीय स्तर पर न्याय देने वाली मुख्य संस्था थी। पंचायत में स्थानीय अधिकारी और प्रमुख लोग शामिल थे। कोई व्यक्ति निर्णय से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में मराठा सरदारों के पास अपील कर सकता था।
- पुणे इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोतवाल या पुलिस तैनाती की जाती थी।
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→ सांस्कृतिक पुनरुत्थान

- मराठों ने भारतीय संस्कृति में विशेषकर भाषा और धर्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा संस्कृत में थी, जो प्रचलित फारसी मुहरों से अलग थी। शिवाजी की मुहर से उनका स्वराज्य का दृष्टिकोण स्पष्ट होता है।
- शिवाजी ने ‘राज्य-व्यवहार- कोष’ नामक ग्रंथ तैयार करवाया जिसका उद्देश्य मराठी भाषा और साहित्य का उत्थान था।
- इस ग्रंथ के माध्यम से मराठा कूटनीति में विदेशी शब्दों का प्रयोग कम हुआ।
- शिवाजी के नेतृत्व में सभी मराठों ने भगवा ध्वज अपनाया, जो हिंदू पहचान का प्रतीक बना। उन्होंने हिंदू मूल्यों को बढ़ावा दिया, साथ ही अन्य धर्मों का भी सम्मान किया।
- शिवाजी ने प्राचीन भारतीय संस्कृति, विरासत और मूल्यों के पुनरुत्थान में विशिष्ट योगदान दिया। उन्होंने कई मंदिरों का निर्माण करवाया, जिन्हें पहले आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था। मुगल शासन के समय शिवाजी के प्रयासों से सांस्कृतिक पुनर्जागरण हुआ।
- मराठों की एक और शाखा भोंसले वंश ने नागपुर में शासन स्थापित किया। उन्होंने संस्कृति और परंपराओं को संरक्षण दिया। ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ पूजा का पुनरुद्धार किया, जो मुगलों के समय बाधित हो गई थी।
→ शक्तिशाली मराठा महिलाएँ
- ताराबाई एक साहसी मराठा योद्धा रानी थी। अपने पति राजाराम की मृत्यु के बाद 18वीं शताब्दी के आरंभ में शासन किया। उन्होंने विशाल मराठा सेनाओं का गठन किया और मुगलों पर आक्रमण किया।

- रानी ताराबाई ने अपनी सैन्य रणनीति और संकल्प से मुगल साम्राज्य को परास्त किया। वे मराठा स्वतंत्रता व विस्तार की सूत्रधार बनीं।
→ अहिल्याबाई होलकर
- होलकर वंश ने मराठा साम्राज्य के विस्तार में विशेष भूमिका निभाई। अहिल्याबाई होलकर 18वीं शताब्दी की एक महान शासिका थीं, जिन्होंने मध्य भारत पर शासन किया।

- पति और पुत्र की मृत्यु के बाद भी अहिल्याबाई होलकर ने 30 वर्षों तक सफलतापूर्वक शासन किया। उनका शासन न्याय, धर्म और जनकल्याण पर आधारित था।
- उन्होंने केदारनाथ से रामेश्वरम तक पूरे भारत में घाटों, मंदिरों, कुँओं और सड़क मार्गों का निर्माण करवाया। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर का जिसे औरंगजेब ने नष्ट कर दिया था तथा गुजरात में सोमनाथ मंदिर का, जिसे महमूद गजनी ने ध्वस्त कर दिया था, अहिल्याबाई होलकर के विशेष प्रयासों से पुनर्निर्माण हुआ।
- अहिल्याबाई होलकर ने महेश्वरी बुनाई उद्योग को बढ़ावा दिया। उनके संरक्षण से हथकरघा उद्योग और पारंपरिक शिल्प फिर से जीवित हुए। आज भी महेश्वरी वस्त्र उद्योग भारत की पहचान है और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
→ तंजावुर
- 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शिवाजी के सौतले भाई एकोजी ने दक्षिण में तंजावुर (तमिलनाडु) में मराठा शासन की स्थापना की। तंजावुर के मराठा शासकों ने समन्वित संस्कृति को बढ़ावा दिया। वे कवि विद्वान और कला के संरक्षक थे।

- मराठा शासकों में सरफोजी द्वितीय का योगदान उल्लेखनीय है। वे भारतीय और यूरोपीय भाषाओं में निपुण थे। उनके शासनकाल में कर्नाटक संगीत और भरतनाट्यम नृत्यशैली को संरक्षण मिला। सरफोजी द्वितीय ने मराठी नाटक ‘देवेंद्र कुवजी’ लिखा, जिसमें विश्व भूगोल का वर्णन है।
- सरफोजी द्वितीय ने धन्वंतरी महल की स्थापना की, जहाँ भारतीय और पाश्चात्य चिकित्सा से निःशुल्क इलाज किया जाता था। उन्होंने भारत में पहला मुद्रणालय (प्रिंटिंग प्रेस) भी शुरू किया।
- भोंसले वंश का इतिहास तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर की दीवारों पर अंकित करवाया, जो भारत के सबसे बड़े शिलालेखों में से एक है। तमिल, तेलुगु और मराठा संस्कृतियों के मेल से तंजावुर समृद्ध और बहुभाषी सांस्कृतिक केंद्र बना।
→ मराठा विरासत
- मराठा शासन ने मुगल शासकों को कड़ी चुनौती दी और अंग्रेजों के आने से पहले उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण कर सबसे बड़े भारतीय साम्राज्य की स्थापना की।
- मराठों ने प्रशासन के साथ-साथ युद्ध की नई और प्रभावशाली पद्धति विकसित की। बिना किसी धार्मिक भेदभाव के हिंदू परंपराओं को फिर से जीवित किया। विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और नए विचारों को प्रेरित किया।
- दमनकारी शासन और विदेशी प्रभाव के विरुद्ध मराठों का संघर्ष असीम साहस और स्वराज्य के उच्च आदर्शों से प्रेरित था। उन्होंने भारतीयों में स्वयं शासन करने का विश्वास जगाया और इस प्रकार भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बीज बोए।

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- 1630 : शिवाजी का जन्म।
- 1646 : शिवाजी के शासन का आरंभ
- 1657 : मराठा नौसेना की स्थापना
- 1659 : शिवाजी द्वारा आदिल शाही के सेनापति अफ़ज़ल खाँ को मार दिया।
- 1666 : आगरा में कारावास और शिवाजी की मुक्ति।
- 1674 : छत्रपति शिवाजी का रायगढ़ किले में राज्याभिषेक।
- 1677 : दक्षिण विजय।
- 1680 : शिवाजी महाराज का निधन।
- 1682 – 1707 : मुगल-मराठा युद्ध।
- 1754 : दिल्ली पर मराठा नियंत्रण की शुरुआत।
- 1761 : पानीपत का तीसरा युद्ध (मराठों की हार)।
- 1771 : महादजी शिंदे के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अधिकार।
- 1775 – 1782 : प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध और मराठों की विजय।
- 1803 – 1805 : द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध (मराठा हार)।
- 1818 : तृतीया आंग्ल-मराठा युद्ध (मराठा शक्ति का पतन)।