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Class 8 Social Science Chapter 1 Question Answer in Hindi प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग
प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग Question Answer in Hindi
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान पाठ 1 के प्रश्न उत्तर प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 19)
प्रश्न 1.
आज जो संसाधन नवीकरणीय है, उसे कल अनवीकरणीय कैसे बनाया जा सकता है? कुछ ऐसे उपायों का वर्णन कीजिए जिनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है।
उत्तर:
नवीकरणीय संसाधन निम्न परिस्थितियों में अनवीकरणीय जैसे व्यवहार करने लगते हैं-
- यदि उनका उपयोग प्राकृतिक पुनर्जनन की गति से अधिक किया जाए।
- वनों की अंधाधुंध कटाई।
- भूजल का अत्यधिक दोहन।
- मछलियों का प्रजनन काल में अत्यधिक शिकार।
- प्रदूषण से प्राकृतिक चक्रों का बाधित होना।
इसे रोकने के उपाय:
- वृक्षारोपण और वन संरक्षण।
- वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण।
- संसाधनों का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग।
- पारंपरिक संरक्षण पद्धतियों को अपनाना।
- सतत् विकास की नीतियाँ लागू करना।
प्रश्न 2.
पाँच पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के नाम बताइए जो मानव के लिए उपयुक्त हैं।
उत्तर:
- वृक्षों द्वारा ऑक्सीजन प्रदान करना।
- जल का प्राकृतिक शुद्धिकरण
- मिट्टी का संरक्षण और अपरदन रोकना।
- जल चक्र को संतुलित रखना।
- जैव-विविधता को बनाए रखना।
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प्रश्न 3.
नवीकरणीय संसाधन क्या हैं? ये अनवीकरणीय संसाधनों से कैसे भिन्न हैं? लोग यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि नवीकरणीय संसाधन हमारे और आने वाली पीढ़ियों के उपयोग के लिए उपलब्ध रहें? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
- नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं से पुनः उत्पन्न हो सकते हैं। उदाहरण-जल, वन, सौर ऊर्जा।
- अनवीकरणीय संसाधन लंबे समय में बनते हैं और सीमित होते हैं। उदाहरण-कोयला, पेट्रोलियम।
भिन्नताएँ-
- नवीकरणीय संसाधन पुनः उत्पन्न हो सकते हैं, अनवीकरणीय नहीं।
- नवीकरणीय संसाधनों का सतत् उपयोग संभव है, जबकि अनवीकरणीय संसाधन समाप्त हो सकते हैं।
उपलब्ध बनाए रखने के उपाय-
- जल संरक्षण (वर्षा जल संचयन)।
- वृक्षारोपण और वन संरक्षण।
- सौर एवं पवन ऊर्जा का उपयोग।
- प्रदूषण नियंत्रण।
प्रश्न 4.
अपने घर और पड़ोस में ऐसी सांस्कृतिक प्रथाओं की पहचान कीजिए जो प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की ओर इंगित करती हैं।
उत्तर:
- पेड़ों की पूजा (जैसे तुलसी, पीपल)।
- जल का सम्मानपूर्वक उपयोग (नल खुला न छोड़ना)।
- त्योहारों में प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग।
- वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक व्यवस्था।
- भोजन की बर्बादी न करना।
प्रश्न 5.
वर्तमान उपयोग के लिए वस्तुओं के उत्पादन में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
- संसाधनों का सतत् और सीमित उपयोग।
- प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों का उपयोग।
- पर्यावरण अनुकूल सामग्री का चयन।
- अपशिष्ट का पुनर्चक्रण।
- भविष्य की पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखना।
- स्थानीय रोजगार और सामाजिक प्रभावों का विचार।
प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग Class 8 Question Answer in Hindi
Class 8 Samajik Vigyan Chapter 1 Question Answer
प्रश्न 1.
हम प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण कैसे करते हैं? (पृष्ठ 1)
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधन वे वस्तुएँ हैं जो हमें प्रकृति से प्राप्त होती हैं और जिनसे हमारी जीवन की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं। इनका वर्गीकरण अनेक आधारों पर किया जाता है जैसे-
(i) जीवन के लिए आवश्यक संसाधन-वह प्राकृतिक संसाधन जिनके बिना मानव जीवन असंभव है जैसे-
- जल
- वायु
- मृदा
(ii) सामग्री के लिए संसाधन-मानव प्राकृतिक संसाधनों से अपने विकास एवं आवश्यकताओं के लिए विभिन्न वस्तुओं का निर्माण करता है। अतः वह प्राकृतिक संसाधन जिनसे वह दूसरी उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करता है इस वर्ग में आते हैं जैसे-
- जैविक संसाधन
- अजैविक संसाधन
(iii) ऊर्जा के लिए संसाधन-वह सभी प्राकृतिक संसाधन जो ऊर्जा का स्रोत हैं इस वर्ग में आते हैं जैसे-
- नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन (जलविद्युत, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि)
- अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन (कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस)
प्रश्न 2.
जीवन के विभिन्न पक्षों और प्राकृतिक संसाधनों के वितरण के मध्य क्या संबंध है? (पृष्ठ 1)
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का वितरण पृथ्वी पर समान नहीं है। कहीं यह अधिक मात्रा में उलब्ध है जबकि कहीं कम मात्रा में उपलब्ध है। इसका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है जो इस प्रकार है-
- जनसंख्या वितरण-लोग वहीं अधिक बसते हैं जहाँ जल, भोजन और रोजगार के साधन उपलब्ध होते हैं।
- कृषि-जहाँ उपजाऊ मृदा और जल की उपलब्धता होती है वहाँ कृषि अधिक विकसित होती है।
- उद्योग-जहाँ खनिज, ऊर्जा स्रोत और परिवहन सुविधाएँ होती हैं वहाँ उद्योग स्थापित होते हैं।
- आर्थिक विकास-संसाधनों की उपलब्धता से क्षेत्र का विकास तेज होता है और जीवन स्तर बेहतर होता है।
- संघर्ष और सहयोग-संसाधनों की कमी या असमान वितरण प्राय: देशों और समुदायों के बीच संघर्ष का कारण बनते हैं। जबकि साझा संसाधन सहयोग बढ़ाने में सहायक होते हैं।
- इस प्रकार मानव जीवन के सभी पक्ष (भोजन, आवास, रोजगार, व्यापार और विकास) प्राकृतिक संसाधनों के वितरण से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित हैं।
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प्रश्न 3.
प्राकृतिक संसाधनों के असंधारणीय उपयोग/ अतिशोषण से क्या आशय है? (पृष्ठ 1)
उत्तर:
असंधारणीय उपयोग/अतिशोषण-जब प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग उनकी पूर्ति अथवा पुनः पूर्ति की क्षमता से अधिक और बिना भविष्य की चिंता किए किया जाता है, तो उसे असंधारणीय उपयोग या अतिशोषण कहते हैं।
अतिशोषण के मुख्य लक्षण-
- संसाधनों का अधिक मात्रा में अधिक तेजी से उपयोग
- प्राकृतिक संतुलन का बिगड़ना और जैव-विविधता में कमी
- पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन।
उदाहरण-
वनों की अत्यधिक कटाई
भूमिगत जल का अधिक दोहन
अनवीकरणीय खनिजों एवं ऊर्जा संसाधनों का अनिर्यंत्रित उपयोग
अनियंत्रित मानवीय क्रियाकलापों से भूमि का क्षरण एवं कृषि भूमि का घटना।
समाधान-
- संसाधनों का विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना और वैकल्पिक स्रोतों की खोज करना।
- संसाधन संरक्षण और पुनर्चक्रण।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 7)
प्रश्न 1.
अपने आस-पास के उन मानवीय कार्यकलापों की पहचान करें जिनके परिणामस्वरूप प्रकृति अपनी पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की क्षमता खो रही है। प्रकृति के चक्र को पुनर्स्थापित करने के लिए किस प्रकार के हस्तक्षेप किए जा सकते हैं?
उत्तर:
हमारे आस-पास के हानिकारक मानवीय क्रियाकलाप-
- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
- प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग
- नदियों व तालाबों में कचरा फेंकना
- भूजल का अत्यधिक दोहन
- परिवहन तथा उद्योगों से प्रदूषण
- रसायनिक खाद व कीटनाशकों का अधिक प्रयोग।
उपरोक्त मानवीय कार्यकलापों के कारण प्रकृति अपनी पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की क्षमता खो रही है।
प्रकृति के चक्र को पुनर्स्थापित करने के उपाय-
- वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देकर
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर
- प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करके
- कचरे के पुनः उपयोग व पुनर्चक्रण के द्वारा
- जैविक कृषि को प्रोत्साहन देकर
- पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाकर।
इस प्रकार यदि हम संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और संरक्षण के उपाय अपनाएँ, तो प्रकृति का चक्र पुनस्थापित किया जा सकता है।
प्रश्न 2.
अपने क्षेत्र में नवीकरणीय संसाधनों के प्रकारों का आकलन करने के लिए एक छोटा शोध-अध्ययन करें। आप अपने शिक्षक के साथ अपने अध्ययन के भौगोलिक क्षेत्र और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के स्रोतों पर चर्चा कर सकते हैं। समय के साथ उनकी स्थिति में क्या परिवर्तन आया है? एक छोटी-सी रिपोर्ट बनाएँ जिसमें परिवर्तन के कारणों तथा आगे क्या किया जा सकता है, इसका उल्लेख हो। (पृष्ठ 8)
उत्तर:
दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ-साथ एक बड़ा महानगर भी है। यहाँ जनसंख्या, उद्योग और वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण प्राकृतिक और नवीकरणीय संसाधनों का अत्यधिक दबाव है। इस शोध अध्ययन का उद्देश्य दिल्ली में उपलब्ध नवीकरणीय संसाधनों की वर्तमान स्थिति तथा समय के साथ आए परिवर्तनों का अध्ययन करना है।
विल्ली में पाए जाने वाले नवीकरणीय संसाधन-
1. जल संसाधन
- यमुना नदी
- वर्षा जल
- भूमिगत जल (ट्यूबवेल, बोरवेल)
2. सौर ऊर्जा
- घरों, स्कूलों एवं सरकारी भवनों पर सोलर पैनल
- सोलर स्ट्रीट लाइट
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3. वन एवं हरित संसाधन
- रिज क्षेत्र
- पार्क, सड़कों के किनारे वृक्ष, सरकारी भवनों में वृक्ष
- जैव-विविधता पार्क
4. मृदा (भूमि संसाधन)
कृषि भूमि (दिल्ली के बाहरी क्षेत्र)
समय के साथ संसाधनों की स्थिति में परिवर्तन-

वर्तमान स्थिति (परिवर्तन) के मुख्य कारण-
- तीव्र शहरीकरण वृद्धि दर
- यमुना नदी में घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह
- भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन
- अधिकांश भू-भाग पर सड़कों, मैट्रो, भवनों का निर्माण
- वाहनों और उद्योगों से प्रदूषण

चित्र 1.6. उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट को प्रायः उचित उपचार के बिना ही प्रवाहित कर दिया जाता है।
आगे क्या किया जा सकता है (उपाय)
- वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करना, जल संरक्षण और पुनः उपयोग पर बल देना।
- यमुना नदी की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण
- सौर ऊर्जा को अधिक प्रोत्साहन देना
- यमुना के साथ तथा अन्य खाली स्थानों पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहन
- पर्यावरण शिक्षा और जन-जागरूकता अभियान चलाना।
निष्कर्ष-दिल्ली में नवीकरणीय संसाधन अभी भी उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी स्थिति चिताजनक है। यदि सही नीतियाँ और जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए तो संसाधन संरक्षण संभव है। दिल्ली को एक सतत् एवं हरित क्षेत्र बनाया जा सकता है।
प्रश्न 3.
वे कौन-से अनवीकरणीय संसाधन हैं जिनका आप प्रतिदिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हैं? उनके संभावित नवीकरणीय विकल्प क्या हैं? नवीकरणीय ऊर्जा की ओर अग्रसर होने के लिए हम कौन-से उपाय कर सकते हैं? (पृष्ठ 8)
उत्तर:
हमारे द्वारा प्रतिदिन उपयोग किए जाने वाले अनवीकरणीय संसाधन-
1. कोयला
- बिजली उत्पादन में – उद्योगों में।
2. पेट्रोल/डीजल
- परिवहन साधनों में – उद्योगों में।
3. प्राकृतिक गैस (सी.एन.जी./पी.एन.जी./एल.पी. जी.)
- परिवहन साधनों में
- घरेलू कार्यों में
- उद्योगों में।
4. खनिज संसाधन
लोहा, ताँबा, पीतल, सोना, चाँदी
मशीनें, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, आभूषण इत्यादि।
अनवीकरणीय संसाधनों के नवीकरणीय विकल्प-
| अनवीकरणीय संसाधन | नवीकरणीय विकल्प |
| कोयला | सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ऊर्जा |
| पेट्रोल/डीजल | इलैक्ट्रिक वाहन, बायोफ्यूल |
| सी.एन. जी./एल.पी.जी. | बायोगैस, सोलर कुकर |
| खनिज | पुनःचक्रण |
नवीकरणीय ऊर्जा की ओर अग्रसर होने के उपाय-
1. व्यक्तिगत स्तर पर
- सोलर पैनल, सोलर हीटर का उपयोग
- सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या ई-वाहन अपनाना
- बिजली की बचत करना
- गैस की जगह बायोगैस, या सोलर कुकर का उपयोग।
2. सामाजिक स्तर पर
- वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाना
- पर्यावरण जागरूकता अभियान
- कचरे का उचित निपटान।
3. सरकारी स्तर पर
- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार
- ई-वाहनों को प्रोत्साहन
- सख्त प्रदूषण नियम
- वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना।
निष्कर्ष-अनवीकरणीय संसाधन सीमित हैं और एक दिन समाप्त हो सकते हैं। जबकि नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की आवश्यकता है। यदि हम आज से छोटे-छोटे प्रयास करें तो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
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प्रश्न 4.
चित्र 1.7 में दिए गए मानचित्र को ध्यान से देखिए। महत्वपूर्ण खनिजों के असमान वितरण पर ध्यान दीजिए। आपके क्षेत्र में किस प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं? उनका वितरण कैसे हुआ है? (पृष्ठ 9)

उत्तर:
भारत के मानचित्र में खनिजों का असमान वितरण-दिए गए मानचित्र में खनिजों का वितरण दिखाया गया है। भारत में खनिज मुख्यतः प्रायद्वीप पठार के उत्तर: पश्चिम, उत्तर: पूर्व तथा दक्षिण-पश्चिम भाग में पाए जाते हैं। जैसे-
(i) कोयला-भारत में कोयला मुख्यतः झरिया, रानीगंज, कोरबा, सिंगरेनी तथा नेवेली में पाया जाता है।
(ii) खनिज तेल-पश्चिम में मुंबई हाई, अंकलेश्वर, कलोल, बसीन तथा पूर्व में डिगबोई तथा नाहरकटिया प्रमुख खनिज तेल क्षेत्र हैं।
(iii) लौह अयस्क-
- मध्य भारत में दुर्ग, चंद्रपुर
- दक्षिण में रत्नागिरी, गोवा, बेल्लारी, कुद्रेमुख
- दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व में मयूरभंज, केंदुझार, बैलाडिला
(iv) बॉक्साइट-
- बॉक्साइट के निक्षेप मुख्यतः मध्य और पूर्वी भाग में स्थित है।
- मध्य भारत-कटनी, बिलासपुर, अमरकंटक पूर्व-कोरापुट।
- मेरे क्षेत्र (दिल्ली) में उपलब्ध खनिज-दिल्ली मुख्यत: एक मैदानी क्षेत्र है। इसलिए यहाँ बड़े खनिज भंडार नहीं पाए जाते हैं फिर भी कुछ सीमित खनिज उपलब्ध हैं।
1. निर्माण से जुड़े खनिज
- रेत
- बजरी
2. क्वाटज़ और सिलिका
- अरावली की शेष पहाड़ियों में सीमित मात्रा में।
- खनिजों का वितरण कैसे हुआ है?
1. भौगोलिक संरचना के कारण
- दिल्ली गंगा-यमुना के मैदानी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ अवसादी (तलछटी) चट्टानें पाई जाती हैं।
- इसलिए यहाँ धात्विक खनिजों का अभाव है।
2. अरावली पर्वतमाला का प्रभाव
- दिल्ली का रिज क्षेत्र अरावली का विस्तार है।
- इसी कारण यहाँ कुछ अधात्विक खनिज जैसे क्वार्टज़ मिलते हैं।
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3. नदीय जमाव
- यमुना द्वारा लाई गई रेत और बजरी का जमाव
- इसी से निर्माण खनिज उपलब्ध है।
प्रश्न 5.
किन्हीं दो प्राकृतिक संसाधनों का चयन कीजिए। भारत के विभिन्न भागों में उनकी उपलब्धता के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए। उन्हें मानचित्र पर अंकित कीजिए। आप उनके वितरण के बारे में क्या देखते हैं? उनसे जुड़ी आर्धिक गतिविधियाँ किस प्रकार की हैं? (पृष्ठ 10)
उत्तर:
हम कोयला और लौह अयस्क का दो प्राकृतिक संसाधन के रूप में चयन कर सकते हैं।
1. कोयला
(i) भारत में कोयले की उपलब्धता-भारत में कोयला मुख्यतः झारखंड, ओडिसा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश में पाया जाता है।
- झारखंड-झरिया, बोकारो
- पश्चिम बंगाल-रानीगंज
- छत्तीसगढ़-कोरबा
- ओडिसा-तालचेर

(ii) कोयले के वितरण के बारे में अवलोकन-
- कोयला मुख्यतः पूर्वी और मध्य भारत में केंद्रित है।
- यह क्षेत्र प्राचीन गोंडवाना भू-भाग से संबंधित है।
- दक्षिण और उत्तर भारत में इसकी मात्रा कम है।
(iii) कोयले से संबंधित आर्थिक गतिविधियाँ-
- ताप विद्युत का उत्पादन
- इस्पात उद्योग में
- सीमेंट उद्योग में
- रेल परिवहन में
- खनन उद्योग में रोजगार
2. लौह-अयस्क
(i) भारत में उपलब्धता-भारत में लौह-अयस्क मुख्यतः ओडिसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गोवा में मिलता है।
- ओडिसा-केंदुझार, मयूरभंज
- छत्तीसगढ़-बस्तर
- झारखंड-दुर्ग
- कर्नाटक-बेल्लारी
- गोवा-समुद्र तट के निकट

(ii) लौह-अयस्क के वितरण के बारे में अवलोकन-
- लौह-अयस्क मुख्यतः पूर्वी-दक्षिणी और मध्य भारत में पाया जाता है।
- ये क्षेत्र खनिज संपन्न पट्टी कहलाते हैं।
- कई स्थानों पर लौह-अयस्क और कोयला साथ-साथ मिलते हैं, जिससे वहाँ उद्योगों की स्थापना करना आसान होता है।
(iii) संबंधित आर्थिक गतिविधियाँ-
- इस्पात उद्योग
- मशीन निर्माण उद्योग
- ऑटोमोबाइल उद्योग
- लौह-अयस्क निर्यात
- खनन और परिवहन कार्य
- भवन निर्माण।
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प्रश्न 6.
उन भागों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के वर्तमान और भावी पीढ़ियों पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा कीजिए। प्रकृति के उपहारों का विवेकपूर्वक उपयोग करने की विधियाँ सुझाइए। (पृष्ठ 10)
उत्तर:
उन भागों में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे-कोयला, लौह-अयस्क आदि) के अत्यधिक दोहन का प्रभाव वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ियों पर भी पड़ता है।
1. वर्तमान पीढ़ी पर प्रभाव-
(i) सकारात्मक प्रभाव
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि
- उद्योगों और व्यापार में वृद्धि
- क्षेत्रीय विकास के अवसर
- देश के आर्थिक विकास में सहायक
(ii) नकारात्मक प्रभाव
- पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि
- वनों की कटाई तथा जैव-विविधता में कमी
- भूमि क्षरण और कृषि योग्य भूमि का नुकसान
- स्थानीय लोगों का विस्थापन
2. भावी पीढ़ी पर प्रभाव-
- संसाधनों की कमी या समाप्ति
- पर्यावरण असंतुलन और जलवायु परिवर्तन
- पर्यावरण प्रदूषण
- प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाओं में वृद्धि
- आर्थिक असमानता और सामाजिक समस्याओं में वृद्धि।
3. प्राकृतिक उपहारों के विवेकपूर्ण उपयोग की मुख्य विधियाँ-
- सतत् विकास को अपनाना
- खनन के पश्चात भूमि पुनर्वास और वृक्षारोपण को अपनाकर
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर
- संसाधनों का पुनः चक्रण एवं पुनः उपयोग
- प्रदूषण नियंत्रण के सख्त नियम लागू करना
- ऊर्जा और जल की बचत को बढ़ावा देना।
प्रश्न 7.
अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में ऐसे किसी संघर्ष के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। अपने अन्वेषण पर कक्षा में चर्चा करें। (पृष्ठ 10)
उत्तर:
ऐसे संघर्ष के अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ के रूप में हम ‘कांगो का खनिज संघर्ष’ विषय चुन सकते हैं।
1. कांगो का खनिज संघर्ष-
(i) संघर्ष के कारण-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डी.आर.सी.) में कोल्टन, सोना, हीरा, कोबाल्ट और ताँबा जैसे बहुमूल्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन खनिजों की माँग मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैटरियों के निर्माण में होती हैं। इन संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए स्थानीय विद्रोही समूहों, सरकारी सेनाओं, विदेशी कंपनियों तथा पड़ोसी देशों के मध्य निरंतर संघर्ष चलता रहता है।
(ii) संघर्ष के सामाजिक प्रभाव-
- लाखों लोगों का अपने घरों से विस्थापन
- मानवाधिकार उल्लंघन
- बाल मज़दूरी
(iii) संघर्ष के आर्थिक प्रभाव-
- संसाधनों का लाभ आम जनता तक नहीं पहुँचता
- अवैध खनन और तस्करी में वृद्धि
(iv) पर्यावरणीय प्रभाव-
- वनों की बड़े पैमाने पर कटाई
- पर्यावरण प्रदूषण
- वन्य जीवों को नुकसान
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2. अंतर्राष्ट्रीय प्रयास-
- संयुक्त राष्ट्र की देख-रेख में शांति सेना तैनात की गई है।
- ‘संघर्ष रहित खनिज’ की पहल शुरू की गई है जिससे कंपनियाँ केवल वैध स्रोतों से ही खनिज खरीद सकें।
- कई देशों ने खनिज आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी के कानून बनाए हैं।
इस प्रकार कांगो का उदाहरण हमें सिखाता है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का न्यायपूर्ण और पारदर्शी प्रबंधन न हो तो वे विकास के स्थान पर संघर्ष और अस्थिरता का कारण बन सकते हैं।
3. कक्षा में चर्चा के बिंदु-
- प्राकृतिक संसाधन विकास का साधन है या संघर्ष का कारण?
- क्या अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए?
- भारत जैसे देशों को इस अनुभव से क्या सीख लेनी चाहिए?
प्रश्न 8.
आपके विचार से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को सक्षम बनाने के लिए कौन-कौन से इनपुट आवश्यक हैं? (पृष्ठ 11)
उत्तर:
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी और सतत् उपयोग करने के लिए केवल संसाधन होना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें उपयोगी बनाने के लिए कई इनपुट (आवश्यक तत्व) की आवश्यकता होती है जैसे-
- पूँजी
- श्रम
- तकनीकी
- परिवहन तथा संचार
- शिक्षा और कौशल विकास
- शक्ति के साधन
- प्रबंधन और सरकारी नीतियाँ
- बाजार
प्राकृतिक संसाधनों का उचित एवं न्यायपूर्ण उपयोग तभी संभव है जब उपरोक्त सभी इनपुट एक साथ मिलकर कार्य करें।
आइए विचार करें (पृष्ठ 3)
प्रश्न 1.
थोड़ा ठहरिए। स्वयं और अपने आस-पास की वस्तुओं को देखिए। इनमें से प्रत्येक का उद्गम-स्रोत क्या है? किसी-न-किसी मोड़ पर ये सभी प्रकृति की ओर ले जाती हैं, यहाँ तक कि आपके वस्त्र पर लगा प्लास्टिक का बटन भी। (पृष्ठ 3)
उत्तर:
हमारे आस-पास की प्रत्येक वस्तु का उद्गम-स्रोत किसी-न-किसी रूप में प्रकृति ही है। आइए कुछ सामान्य वस्तुओं के उदाहरण देखकर उनके उद्गम-स्रोत समझते हैं।
1. लकड़ी के फर्नीचर
उद्गम-स्रोत-पेड़ (वन)
लकड़ी पेड़ों से प्राप्त होती है, जो प्राकृतिक संसाधन हैं।

चित्र 1.10. यदि हम वनों को पुनर्जीवित होने दें, तो सीमित मात्रा में लंबे समय तक उनसे लकड़ी प्राप्त कर सकते हैं।
2. कॉपी/किताब/कागज
- उद्गम-स्रोत-पेड़
- कागज लकड़ी से बनता है जो एक प्राकृतिक संसाधन है।
3. लोहे का दरवाजा/मशीनें
- उद्गम-स्रोत-लौह-अयस्क (खनिज)
- लौह एक प्राकृतिक खनिज है जो धरती की खानों से निकाला जाता है।
4. काँच की बोतल/काँच के सामान
- उद्गम-स्रोत-रेत (सिलिका)
- रेत प्राकृतिक रूप से नदियों और समुद्र तटों पर मिलती है।
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5. सूती कपड़े
- उद्गम-स्रोत-कपास का पौधा
- यह एक कृषि उत्पाद है।
6. प्लास्टिक का बटन/टेरीकॉट के कपड़े/ प्लास्टिक से बना सामान-
- उद्गम-स्रोत-पेट्रोलियम (खनिज तेल)
- यह धरती के भीतर से निकाला जाने वाला जीवाश्म ईंधन है।
- हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली समस्त वस्तुओं का मूल स्रोत प्राकृतिक संस्थन ही है। अतः हमें प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
प्रश्न 2.
प्राकृतिक संसाधनों को वर्गीकृत करने के लिए हम कौन-से विभिन्न मानदंडों का उपयोग कर सकते हैं? (पृष्ठ 4)
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों को वर्गीकृत करने के लिए हम कई अलग-अलग मानदंडों का उपयोग कर सकते हैं। जैसे-
1. उत्पत्ति के आधार पर-
- जैव संसाधन-वह संसाधन जो जीवित स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
- अजैव संसाधन-वह संसाधन जो निर्जीव स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
2. नवीकरणीयता के आधार पर-
- नवीकरणीय संसाधन-वह संसाधन जो प्राकृतिक रूप से पुन: उत्पन्न हो सकते हैं।
- अनवीकरणीय संसाधन-वह संसाधन जो सीमित रूप से उपलब्ध है और पुनः बनने में लाखों वर्ष का समय लगता है।
3. उपयोग के आधार पर-
- जीवित रहने के लिए आवश्यक संसाधनवह संसाधन जिनके बिना जीवन असंभव है।
- सामग्री के लिए आवश्यक संसाधन-वह संसाधन जिनसे मानव अपनी इच्छा एवं आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करता है।
- शक्ति (ऊर्जा) के लिए संसाधन-मानव द्वारा आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निर्मित सभी प्रकार की मशीनों, उपकरणों, परिवहन साधनों को गतिशीलता प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाने वाले संसाधन।
इस प्रकार प्राकृतिक संसाधनों को हम उपरोक्त आधारों पर वर्गीकृत कर सकते हैं। यह वर्गीकरण हमें संसाधनों के संतुलित उपयोग और संरक्षण की योजना बनाने में सहायता करता है।
इसे अनदेखा न करें (पृष्ठ 3)
प्रश्न 1.
विश्व की अनेक स्थानीय परंपराओं में प्रकृति को पवित्र माना जाता है। आपने इसके बारे में पढ़ा है। ऐसी परंपराओं में प्रकृति को पालनकर्ता और पोषणकर्ता के रूप में देखा जाता है।
क्या आप ऐसी प्रथाओं के बारे में जानते हैं जो इसे प्रतिबिंबित करती है?
उत्तर:
हाँ, विश्व की अनेक स्थानीय परंपराओं में प्रकृति को पालनकर्ता और पोषणकर्ता के रूप में माना गया है। ये परंपराएँ हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश देती हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं-
1. भारत की परंपराएँ-
- बिश्नोई समुदाय-राजस्थान का यह समुदाय मुख्यतः खेजड़ी वृक्षों और वन्य जीवों (विशेषकर हिरण) की रक्षा को अपना धर्म मानता है।
- पवित्र उपवन-भारत के अधिकांश राज्यों में जंगल के कुछ हिस्सों को देवताओं से जोड़ा जाता है। इन क्षेत्रों में पेड़ काटना वर्जित होता है। इसके अतिरिक्त भी भारत में बरगद, पीपल और तुलसी आदि को पूजनीय माना जाता है तथा इनको काटना धार्मिक रूप से वर्जित माना जाता है। गाय को माँ के समान महत्व दिया जाता है तथा गंगा की पवित्र नदी के रूप में पूजा की जाती है।

2. विश्व की अन्य परंपराएँ-
- शिन्तो (जापान)-यह नदी, पर्वतों, वृक्ष आदि को पवित्र मानते हैं और प्रकृति की शक्तियों को ‘कामी’ (देवत्व) के रूप में पूजा जाता है।
- स्थानीय अमरीकी परंपराएँ-यह धरती को ‘मदर अर्थ’ मानते हैं तथा शिकार और संसाधन उपयोग में संतुलन की भावना रखते हैं।
- माओरी धर्म (न्यूजीलैंड)-माओरी लोग वहाँ के पर्वतों और नदियों को अपना पूर्वज मानते हैं। वर्ष 2017 में वहाँ की व्हांगानूई नदी को कानूनी रूप से “जीवित इकाई” का दर्जा दिया गया है।
उपरोक्त सभी परंपराओं में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं अपितु जीवनदायिनी शक्ति माना गया है।