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Understanding Markets Class 7 Notes in Hindi
बाजारों की समझ Class 7 Notes
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान अध्याय 12 नोट्स बाजारों की समझ
→ मूलभूत आवश्यकताएँ : वे बुनियादी वस्तुएँ जो किसी भी व्यक्ति के जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं, जैसे भोजन, पानी, वस्त्र और आवास।
→ आवश्यकता : किसी व्यक्ति की उन इच्छाओं से तात्पर्य है, जो जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं हैं, जैसे मनोरंजन यात्रा आदि।
→ व्यापार : व्यक्तियों या देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय या विनिमय।
→ कीमत : वह राशि जो विक्रेता किसी विशेष वस्तु या सेवा को बेचने के लिए तैयार होता है और एक खरीदार उसे खरीदने के लिए तैयार होता है।
→ निर्माता : एक व्यक्ति या उद्योग जो विक्रय के लिए वस्तुएँ निर्मित करता है।
→ उत्पादन के आगत : वे सामग्रियाँ या संसाधन जिनका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में किया जाता है।
→ निर्यात : किसी देश में उत्पादित वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देश के खरीदार को विक्रय करना।
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→ आयात : अन्य देशों से वस्तुओं या सेवाओं का क्रय करना और उन्हें अपने देश में लाना।
→ शीतागार : शीघ्र सड़ने वाली वस्तुओं के संरक्षण के लिए समुचित निम्न तापमान बनाए रखने हेतु विशेष गोदाम।
→ वितरक : ऐसे व्यक्ति या व्यवसाय जो निर्माताओं और थोक विक्रेताओं से खुदरा विक्रेताओं को वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं।
→ संग्राहक : वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन जो अनेक विक्रेताओं के प्रस्तावों को व्यवस्थित और संयोजित करते हैं तथा उन्हें एक ही स्थान पर उपभोक्ताओं को विक्रय करते हैं।
→ माँग : सेवाओं या वस्तुओं की वह मात्रा, जिसे उपभोक्ता किसी निश्चित समय पर किसी विशेष मूल्य पर क्रय करने के लिए इच्छुक और सक्षम हैं।
→ आपूर्ति : सेवाओं या वस्तुओं की वह मात्रा, जिसे विक्रेता किसी निश्चित समय पर किसी विशेष मूल्य पर विक्रय के लिए इच्छुक और सक्षम हैं।
→ सार्वजनिक वस्तुएँ : वस्तुएँ या सेवाएँ, जो समाज के सभी सदस्यों को उपलब्ध हैं। उनका वर्तमान उपयोग भविष्य में उनकी उपलब्धता को कम नहीं करता है।
→ बाजार क्या है?
- एक भौतिक स्थान या ऑनलाइन बाजार है जहाँ खरीददारी और बिक्री होती है।
- वस्त्र और सेवाएँ प्रदान करता है। (व्यक्तियों, परिवारों, व्यवसायों के लिए)।
- लोगों, परंपराओं और विचारों को जोड़ता है।
- सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान का मंच है।
- आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक है।
- सभी के लिए वस्त्र और सेवाओं तक पहुँच बनाता है।
- इसमें शामिल हैं- प्राथमिक गतिविधियाँ (कच्चा माल) द्वितीयक गतिविधियाँ (निर्माण) तृतीयक गतिविधियाँ (सेवाएँ)।
→ हंपी बाजार :
- विजयनगर साम्राज्य में समृद्ध बाजार।
- सामानों की समृद्धि और संपन्नता के लिए जाना जाता है।
- विदेशी यात्रियों ने अनाज, रेशम, और रत्नों का विवरण दिया।
- कारीगरों और उत्पादों की विविधता-मजबूत अर्थव्यवस्था का प्रतीक।
→ बाजारों में मूल्य गतिशीलता :
- लेन-देन में क्रेता और विक्रेता के बीच सहमति शामिल होती है।
- मूल्य दोनों क्रेता और विक्रेता द्वारा निर्धारित होता है।
- मूल्य पर बातचीत और मोलभाव होता है।
- मूल्य खरीदारों और विक्रेताओं की संख्या से प्रभावित होता है।
- बातचीत के बाद मूल्य स्वीकार्य स्तर पर स्थिर होता है (दोनों के लिए)।
→ उत्पाद प्रमाणन :
- एफ.एस.एस.ए.आई. – चिह्न उत्पाद की गणवत्ता तथा इसके सुरक्षित होने का सूचक है।
- आई. एस. आई. – विद्युत उपकरण निर्माण सामग्री।
- एगमार्क – कृषि उत्पाद।
- बी.ई.ई. स्टार रेटिंग – इलेक्ट्रॉनिक्स पर ऊर्जा दक्षता रेटिंग अधिक तारे, अधिक कुशल उपयोग।
→ बाजारों के प्रकार
• भौतिक बाजार और ऑनलाइन बाजार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार, थोक और खुदरा बाजार।
→ भौतिक और ऑनलाइन बाजार
(i) भौतिक बाजार :
- विक्रेता और क्रेता आमने-सामने मिलते हैं।
- पैसे के लिए वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान।
- उदाहरण- साप्ताहिक बाजार स्थानीय दुकानें,मॉल।
(ii) ऑनलाइन बाजार :
- भौतिक बैठक की आवश्यकता नहीं।
- खरीदार विक्रेता इलेक्ट्रॉनिक मंच का उपयोग करते हैं।
- वं हजारों किलोमीटर दूर हो सकते हैं।
- वस्तुओं और सेवाओं को बेचने/खरीदने के लिए ऐप्स, वेबसाइटों का उपयोग।
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→ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार :
- घरेलू बाजार – देश के भीतर क्रय/विक्रय। उदाहरण-स्थानीय मिलों से कागज क्रय।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार-देशों के बीच क्रय/ विक्रय। उदाहरण-वस्तुओं / सेवाओं का निर्यात-आयात।
→ थोक और खुदरा बाजार :
- थोक बाजार-बड़ी मात्रा में सीधे उत्पादकों/ गोदामों से वस्तुओं/सेवाओं को खुदरा विक्रेताओं के लिए संगृहीत करना।
- खुदरा बाजार-खुदरा विक्रेताओं से सीधे उपभोक्ताओं तक वस्तुओं की बिक्री।
→ निर्यात और आयात
- आयात-सब्जियाँ जैसे-मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड से।
- आयात-हीरा, इलेक्ट्रिकल उपकरण, कच्चा तेल।
- निर्यात-विमान के पुर्जे, खाद्य प्रसंस्करण, औषधियाँ।
→ वितरण और भंडारण
- भंडारण के लिए शीतागार : शीघ्र सड़ने वाली वस्तुओं (जैसे-फल, सब्जियाँ) के लिए।
- गोदाम : सामान्य वस्तुओं के लिए।
- वितरण : निर्माता से थोक व्यापारी फिर खुदरा व्यापारी और अंत में उपभोक्ता तक।
→ थोक व्यापारी की भूमिका :
- फैक्ट्री से तैयार सामान को थोक बाजार में लाना।
- थोक व्यापारी बड़े खुदरा विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों को सामान पहुँचाते हैं।
- खुदरा विक्रेताओं से सामान की माँग का आकलन करते हैं।
- आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
→ वस्त्र में आपूर्ति श्रृंखला :
- सूरत को वस्त्र केंद्र के रूप में जाना जाता है।
- कपास आस-पास के राज्यों से आपूर्ति की जाती है, कपड़ा बनाया जाता है।
- इसके चरण हैं- बुनाई, रंगाई और तैयार उत्पाद।
→ सूरत-व्यापार केंद्र :
- सबसे बड़ा वस्त्र केंद्र है।
- पश्चिमी तट पर स्थित होने के कारण विकसित हुआ है।
- सबसे बड़ा हीरा उद्योग है।
- विकसित बंदरगाह और सड़कों के जाल बिछे हैं।
- कुशल कारीगर और पर्याप्त श्रम बल उपलब्ध है।
बाजारों की भूमिका
→ आर्थिक जीवन :
- उत्पादक और उपभोक्ता के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
- सामान और सेवाओं तक पहुँचने में मदद करता है।
- कारीगरों के लिए क्रेता प्रदान करता है।
- उपभोक्ताओं की पसंद को बढ़ाता है।
- उचित मूल्य निर्धारण को बढ़ावा देता है, क्रेता और विक्रेता के हितों की रक्षा करता है।
सामाजिक जीवन :
- क्रेता और विक्रेता के बीच संबंध स्थापित और मजबूत करता है।
- रोजगार प्रदान करता है और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाता है।
- उदाहरण : इंफाल (मणिपुर) में मदर्स बाजार।
सरकार की भूमिका
- बाजारों के बीच बातचीत की निगरानी करती है।
- उचित मूल्य सुनिश्चित करती है (मूल्य नियंत्रण)।
- क्रेता/विक्रेता के हितों की रक्षा करती है।
- वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता को नियंत्रित करती है।
गुणवत्ता / उचित बाजार / सार्वजनिक वस्तु
- गुणवत्ता और परीक्षण के लिए नियम बनाती है।
- नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों के लिए नियम बनाती है।
- उत्पादक को प्रेरित करने और उपभोक्ता की रक्षा के लिए मूल्य नियंत्रण करती है।
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उचित बाजार / सार्वजनिक वस्तु
- धोखाधड़ी से रोकने के लिए वजन और माप की निगरानी करती है।
- सार्वजनिक लक्ष्य जैसे उद्यान, सड़कें आदि प्रदान करती है।
गुणवत्ता नियंत्रण
→ उत्पाद की गुणवत्ता का आकलन :
- खरीदते समय कीमत, आकार और गुणवत्ता महत्वपूर्ण होते हैं।
- लेबल महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।
- गुणवत्ता मानक और प्रमाणन की जाँच करें।
→ सरकार/ बाजार की भूमिका उत्पाद की गुणवत्ता में :
- ऑनलाइन समीक्षाओं और फीडबैक की भूमिका।
- माँग और आपूर्ति का प्रभाव।
- आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका।
- विचारों और परंपराओं के आदान-प्रदान में भूमिका।
- गुणवत्ता और उचित मूल्य के संबंध में सरकार द्वारा नियमावली।