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Sanskrit Class 8 Chapter 6 Hindi Translation डिजिभारतम् युगपरिवर्तनम् Summary
डिजिभारतम् युगपरिवर्तनम् Meaning in Hindi
Class 8 Sanskrit Chapter 6 Summary Notes डिजिभारतम् युगपरिवर्तनम्
आज का युग प्रौद्योगिकी प्रधान है। मानव जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का बोलबाला है। इस पाठ में डिजिटल भारत की परिवर्तनशील यात्रा को दर्शाया गया है। इसमें बताया गया है कि आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर भारत किस प्रकार एक सशक्त, समृद्ध और परिवर्तनशील राष्ट्र बन रहा है। पाठ में छात्र प्रधानमंत्री संग्रहालय की यात्रा करते हैं, जहाँ वे हॉलोग्राम, संवर्धित वास्तविकता ( Augmented Reality), आभासी वास्तविकता ( Virtual Reality), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आदि तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं। यह पाठ न केवल भारत की आधुनिक तकनीकी संबंधित उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी प्रेरणा देता है कि हम सभी को एक डिजिटल, समावेशी और सुरक्षित भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए ।
Class 8 Sanskrit Chapter 6 Hindi Translation डिजिभारतम् युगपरिवर्तनम्
अस्माकं देशः भारतं न केवलं सांस्कृतिकक्षेत्रे समृद्धम् अपि तु नित्यम् आविष्कारैः कीर्ति लभते । अद्य सम्पूर्णविश्वे ‘डिजिटल्-भारतम्’ इत्यस्य चर्चा श्रूयते । एकस्यैव पिञ्जस्य नोदनेन सर्वं नागरिक सौविध्यं लभ्यते । अनेन भारतीयानां जीवनम् अधिकं सरलं जायमानम् अस्ति । डिजिटल – पटले सम्पूर्णा वसुधा कुटुम्बवत् अस्ति । अधुना वयं भारतस्य डिजिटल्-प्रगतेः विषये पठामः ।
शब्दार्था: (Word Meanings) :
- पिञ्जस्य नोदनेन – अंगूठे की छापे (Thumb print),
- सौविध्यं – सुविधा (Services),
- डिजिटल्-पटले-डिजिटल स्क्रीन (Digital Screen)।
सरलार्थ-
हमारा देश भारत न केवल सांस्कृतिक क्षेत्र में समृद्ध है, बल्कि वह आज लगातार आविष्कारों के कारण प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। आज पूरे विश्व में ‘डिजिटल भारत’ की चर्चा हो रही है। केवल एक अंगूठे की छाप (फिंगरप्रिंट) से सभी नागरिक सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं। इससे भारतीयों का जीवन और अधिक सरल बन रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी दुनिया एक परिवार की तरह हो गई है। अब हम भारत की डिजिटल प्रगति के विषय में पढ़ेंगे।

(1) (नवदेहलीस्थः प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालयः । अत्र विविधा : डिजिटल – प्रौद्योगिक्यः प्रदर्शिताः सन्ति । सर्वे उत्सुकतया सङ्ग्रहालये प्रदर्शितानि वस्तूनि पश्यन्ति।)
अध्यापकः – बालाः! प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये युष्माकं सर्वेषां स्वागतम् । अत्र विविधा : डिजिटल – प्रौद्योगिक्यः प्रयुक्ताः सन्ति । सानन्दं सावधानं च पश्यन्तु। अनन्तरं एतस्योपरि चर्चा करिष्यामः ।
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
- सङ्ग्रहालय :- संग्रहालय ( Museum),
- प्रौद्योगिक्य : – प्रौद्योगिकी ( Technology),
- प्रदर्शिताः – प्रदर्शित की गई हैं (Are displayed)।
सरलार्थ-
(प्रधानमंत्री संग्रहालय नई दिल्ली में स्थित है। यहाँ पर अनेक प्रकार की डिजिटल तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं। सभी बच्चे उत्साहपूर्वक संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुओं को देख रहे हैं ।)
अध्यापक – बच्चो ! प्रधानमंत्री संग्रहालय में आप सभी का स्वागत है। यहाँ पर अनेक प्रकार की डिजिटल तकनीकें उपयोग में लाई गई हैं। इन्हें आनंद और ध्यानपूर्वक देखो। इसके बाद हम इस पर चर्चा करेंगे।
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(2) (सर्वे छात्राः प्रदर्शितानि विविधानि वस्तूनि उत्साहेन पश्यन्ति, अनुभवन्ति, परस्पसं चर्चाम् अपि कुर्वन्ति । )
सर्वे छात्राः – अद्भुतं महोदय ! अत्र हॉलोग्राम् द्वारा प्रधानमन्त्रिणः भाषणं श्रूयते दृश्यते च । प्रत्यक्षमेव प्रधानमन्त्री अत्र उपविष्टः इति भासते ।
यशिका – सत्यम्, अहम् अपि हॉलोग्रामं दृष्टवती । अनेन दिवङ्गताः नेतारः अपि जीविताः इव दृश्यन्ते।
अथर्वः – अत्र ‘वर्धिता-वास्तविकता’ (AR) ‘आभासीया – वास्तविकता’ (VR) च इत्याभ्यां सम्बद्धानि उपकरणानि अपि सन्ति, अनेन ऐतिहासिकवृत्तानि प्रत्यक्षम् इव अनुभूयन्ते । ‘भारतीय – स्वतन्त्रता सङ्ग्रामं दृष्ट्वा अस्माकं पूर्वजानां संघर्ष : कियान् विशालः आसीत् इति ज्ञायते ।
भास्करः – अहम् अत्र कृत्रिमबुद्धि-आधारितं संवादयन्त्रं दृष्टवान् । एतत् यन्त्रम् अस्माकं सर्वविधप्रश्नानाम् उत्तराणि ददाति।
वेदिका – अहो! ‘डिजिटल्-प्रक्षेपण – चलच्चित्रं’ दृष्ट्वा अहं विस्मिता अभवम् । अत्र सम्पूर्णस्य भारतस्य विकास-यात्रा प्रदर्शिता अस्ति ।
श्रेया – एषः कश्चन अपूर्व: अनुभवः अस्ति । यश्च चिरकालपर्यन्तं स्मरणीयः भविष्यति।
सर्वे छात्राः – मान्यवर! वयं सर्वे एतस्मिन् सन्दर्भे चर्चां कर्तुम् इच्छामः । किं कक्षां प्रति चलाम: ?
अध्यापकः – उत्तमः विचारः । चलामः तावत् ।
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
- हॉलोग्राम – होलोग्राम (Hologram),
- वर्धिता – वास्तविकता (AR) – संवर्धित वास्तविकता (Augmented Reality (AR),
- आभासीया – वास्तविकता (VR) – आभासी वास्तविकता (Virtual Reality (VR),
- कृत्रिमबुद्धि – कृत्रिम – बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence AI),
- डिजिटल – प्रक्षेपण – डिजिटल प्रक्षेपण (Digital Projection)।
सरलार्थ-
सभी बच्चे संग्रहालय में प्रदर्शित विभिन्न वस्तुओं को उत्साहपूर्वक देख रहे हैं,
अनुभव कर रहे हैं और एक-दूसरे से चर्चा भी कर रहे हैं।
सभी छात्र – महोदय ! यह अद्भुत है ! यहाँ होलोग्राम के माध्यम से प्रधानमंत्रियों के भाषण सुन और देख सकते हैं। ऐसा लगता है जैसे प्रधानमंत्री स्वयं हमारे सामने बैठे हों।
यशिका – सत्य है, मैंने भी होलोग्राम देखा । इससे दिवंगत ( मर चुके) नेता भी जीवित जैसे प्रतीत होते हैं।
अथर्व – यहाँ संवर्धित वास्तविकता (AR) और ‘आभासी वास्तविकता’ (VR) से जुड़े उपकरण भी हैं। इनसे ऐतिहासिक घटनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है । ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम’ देखकर यह ज्ञात होता है कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष कितना महान था ।
भास्कर – मैंने यहाँ एक कृत्रिम बुद्धि (AI) आधारित संवाद यंत्र देखा, जो हमारे सभी प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देता है।
श्रेया – मैं ‘डिजिटल प्रक्षेपण चलचित्र’ को देखकर चकित रह गई। इसमें पूरे भारत की विकास यात्रा दिखाई गई है।
श्रेया – यह एक अत्यंत अनोखा अनुभव है, जिसे हम लम्बे समय तक याद रखेंगे।
सभी छात्र – महोदय! हम इस विषय पर आगे चर्चा करना चाहते हैं। क्या हम कक्षा में चलें ?
अध्यापक – बहुत अच्छा विचार है । चलें। ”

(3) (सर्वे मिलित्वा गच्छन्ति।)
(सर्वे कक्षायाम् उपविष्टाः)
सर्वे छात्राः – अहो! सङ्ग्रहालयस्य अद्भुतः अनुभवः प्राप्तः।
अध्यापकः – बालाः! अस्मिन् सङ्ग्रहालये उपस्थापितं ज्ञानम् अद्भुतम् एव । ‘डिजिटल’ योजनायाः प्रभावः दैनन्दिने जीवनेऽपि दृश्यते।
सर्वे छात्राः – आम्, मान्यवर! वयम् इमं प्रभावं ज्ञातुम् इच्छामः।
अध्यापकः – उत्तमम्। अस्माकं दैनिक जीवनं ‘डिजिटल’ इत्यनेन परिवर्तितं प्रभावितं च भवति । अस्य क्षेत्रं व्यापकम् अस्ति । यथा ‘डिजिटल – शासनं स्वास्थ्यसेवा, शिक्षणं, वित्तीय समावेशनम्’ इत्यादीनि क्षेत्राणि ।
यशिका – अहं स्वयं ‘डिजि-लॉकर्’ इत्यस्य उपयोगं करोमि । मम आधारपत्रं विद्यालयीयं प्रमाणपत्रं च तत्र सुरक्षितम् अस्ति ।
अथर्वः – मम पितरौ ‘फ़ास्टॅग्’ इत्यस्य उपयोगं कुरुत: । अनेन राजमार्गेषु स्वचालितविधिना मार्गशुल्कस्य सङ्ग्रहणं शीघ्रं भवति ।
भास्करः – अहम् ‘एकीकृत-धनदेयप्रत्यर्पण-अन्तरफलकस्य’ (यूपीआय्) उपयोगं करोमि । अनेन मम पितरौ अपि त्वरया मह्यं धनं प्रेषयितुं शक्नुतः
शब्दार्था: (Word Meanings) :
- व्यापकम् – विस्तृत ( Widespread),
- वित्तीयं समावेशनम् – वित्तीय समावेशन (Financial inclusion),
- फ़ास्टॅग्-वाहन पर लगने वाला टोल सिस्टम (Toll collection system)।
सरलार्थ-
(सभी बच्चे मिलकर आगे बढ़ते हैं ।)
(सभी अब कक्षा में बैठ गए हैं। )
सभी छात्र – वाह! संग्रहालय का अनुभव बहुत अद्भुत था।
अध्यापक – बच्चो! इस संग्रहालय में जो ज्ञान प्रस्तुत किया गया है, वह वाकई अद्भुत है। ‘डिजिटल योजना’ का प्रभाव दैनिक जीवन में दिखता है।
सभी छात्र – हाँ, महोदय! हम इस प्रभाव को जानना चाहते हैं।
अध्यापक – बहुत अच्छा। हमारा दैनिक जीवन अब ‘डिजिटल’ के कारण परिवर्तित और प्रभावित हो चुका है। इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है; क्षेत्र जैसे- डिजिटल शासन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, वित्तीय समावेशन आदि ।
यशिका – मैं स्वयं ‘डिजि-लॉकर’ का उपयोग करती हूँ। मेरा आधार कार्ड और स्कूल प्रमाणपत्र वहाँ सुरक्षित है।
अथर्व – मेरे माता-पिता ‘फास्टैग’ का उपयोग करते हैं। इससे राजमार्गों पर स्वत: ही टोल शुल्क का भुगतान जल्दी से हो जाता है।
भास्कर – मैं ‘यूपीआई’ (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) का उपयोग करता हूँ। इससे मेरे माता – पिता मुझे तुरंत पैसे भेज सकते हैं।
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(4) अध्यापकः – उत्तमम्! वित्तीयसमावेशनस्य क्षेत्रे ‘यूपीआय्, रूपे – काई, जनधनयोजना’ इत्यादीनि बहूनि साधनानि सन्ति । अधुना आपणेषु वस्तुक्रयणार्थं साक्षात् मुद्रायाः आवश्यकता नास्ति। मुद्रारहित-विनिमयसन्दर्भे विश्वे भारतस्य अग्रगण्यं स्थानम् अस्ति ।
राघवः – डिजिटल्-योजना भारतस्य काचित् महत्त्वाकाङ्क्षणी योजना अस्ति।
अध्यापकः – आम् राघव! एषा भारतसर्वकारस्य विशिष्टा महत्त्वाकाङ्क्षणी योजना अस्ति । राष्ट्रं डिजिटल – रूपेण सुशक्तं भवेत् इत्येव अस्याः योजनायाः लक्ष्यम् । डिजिटल – शक्तिः सर्वजनान् सुशक्तान् कुर्यात् इति अस्माकं ध्येयम् ।
श्रेया – महोदय ! अस्य स्वरूपं किञ्चित् स्पष्टीकरोतु ।
अध्यापकः – अवश्यम्! पश्य, डिजिटल्-शासन-सेवायाः अन्तर्गतं ‘डिजी- लॉकर् ( आधार-पॅन्-कार्ड् इत्यादीनां डिजिटल्-सङ्ग्रहणम्), ‘ई-शासन-पटलम्’ यथा ‘उमङ्ग्’ (UMANG), ‘माय्-गव्’ (My-Gov), ‘जेम्’ (GeM) इत्यादयः। ऑन्-लैन् टीकाकरण-पञ्जीकरणार्थं ‘कोविन्-पटलम् (COWIN) अस्ति।
यशिका – किन्तु यदि ग्राम्य-क्षेत्रे अन्तर्जालस्य समस्या अस्ति तर्हि तत्र कथम् एतासां सेवानाम् उपयोगः भविष्यति ?
शब्दार्था: (Word Meanings) :
- आपणेषु – दुकानों में (In shops),
- वस्तुक्रयणार्थं – वस्तु खरीदने हेतु (For purchasing items),
- अग्रगण्यं स्थानम्-अग्रणी स्थान (Leading position),
- महत्त्वाकाङ्क्षिणी – योजना – महत्त्वाकांक्षी योजना (Ambitious scheme),
- ध्येयम् – उद्देश्य (Goal),
- स्पष्टिकरोतु – स्पष्ट करें (Clarify),
- अन्तर्जालस्य – संचार ( Internet ) ।
सरलार्थ-
अध्यापक – बहुत अच्छा! वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में यूपीआई, रुपे कार्ड, जनधन योजना आदि अनेक (बहुत) साधन हैं। अब दुकानों में सामान खरीदने के लिए रुपयों की आवश्यकता नहीं है। कैशलेस लेन-देन के क्षेत्र में भारत का स्थान दुनिया में अग्रणी है।
राघव – ‘डिजिटल योजना’ भारत की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है।
अध्यापक – हाँ राघव! यह भारत सरकार की एक विशेष और महत्त्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य है कि देश डिजिटल रूप में सशक्त बने । डिजिटल से सभी नागरिक सशक्त बनें यह हमारा ध्येय है।
श्रेया – महोदय! कृपया इसका स्वरूप थोड़ा स्पष्ट करें।
अध्यापक –
- अवश्य! देखो ‘डिजिटल शासन सेवाओं’ के अंतर्गत कई सेवाएँ आती हैं:
- डिजी-लॉकर, आधार, पैन कार्ड आदि का डिजिटल भंडारण ।
- ई-शासन प्लेटफॉर्म; जैसे – (उमंग, माय् – गव, जेम आदि । )
- कोविन – पोर्टल ऑनलाइन टीकाकरण, पंजीकरण हेतु उपलब्ध है।
- यशिका – लेकिन यदि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या है तो वहाँ इन सेवाओं का उपयोग कैसे होगा ?
(5) श्रेया – मान्यवर! मया श्रुतं यत् सर्वकारः अन्तर्जालस्य उत्तरोत्तरं विस्ताराय कार्य करोति । अनेन ग्राम्य-क्षेत्रे अपि उच्चगतेः जालस्य उपलब्धिः भविष्यति ।
भास्करः – बहु समीचीनम्। एतासां सेवानाम् उपयोगः शिक्षायाः माध्यमेन अधिकाधिकं प्रचारणीयः ।
अध्यापकः – सत्यम् ! शिक्षायाः क्षेत्रे ‘दीक्षा’ ( DIKSHA), ‘स्वयम्’ (SWAYAM), ‘स्वयं-प्रभा’ (SWAYAM PRABHA), ‘ई-पाठशाला’ (ePathshala), ‘भारतीय – राष्ट्रिय – डिजिटल् – पुस्तकालय:’, ‘निष्ठा’ (NISHTHA), ‘पीएम् – ई – विद्या’ (PM – VIDYA), नि: शुल्क – डिजिटल – शैक्षिकमञ्चः इत्यादीनाम् उपयोगः करणीयः ।
अथर्वः – आचार्य ! किं कृषिक्षेत्रे अपि डिजिटल ! – भारतस्य योगदानम् अस्ति ?
अध्यापकः – आम्! ‘ई-नाम्’ (e-NAM) ‘पीएम् – किसान् – अनुप्रयोग : ‘ (PM KISAN), ड्रोन – प्रौद्योगिकी इत्यादीनि पटलानि सन्ति ।
यशिक – बहु सम्यक्। किन्तु ‘डिजिटल’ इत्यस्य वाणिज्ये कीदृशः प्रभावः अस्ति।
शब्दार्थाः (Word Meanings) :
- सर्वकार:- सरकार (Government),
- प्रचारणीयः – प्रचार योग्य (To be propagated),
- शैक्षिकमञ्च:- शिक्षा मंच (Educational platform),
- कृषिक्षेत्रे – कृषि क्षेत्र में (In the field of agriculture),
- अनुप्रयोग:- एप्लिकेशन (Application),
- वाणिज्ये – व्यापार (Trade)।
सरलार्थ-
श्रेया – मान्यवर! मैंने सुना है कि सरकार इंटरनेट का लगातार विस्तार कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी गति से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
भास्कर – यह बहुत अच्छा है। इन सेवाओं का अधिक से अधिक प्रचार शिक्षा के माध्यम से किया जाना चाहिए।
अध्यापक – सत्य है! शिक्षा के क्षेत्र में जैसे – दीक्षा ( DIKSHA ), स्वयं ( SWAYAM ), स्वयं प्रभा ( SWAYAM PRABHA), ई-पाठशाला भारतीय राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय, निष्ठा (NISHTHA ), पीएम ई – विद्या ( PM e-VIDYA) और अन्य निःशुल्क डिजिटल शिक्षण मंच का उपयोग किया जा सकता है।
अथर्व – आचार्य! क्या कृषि क्षेत्र में भी डिजिटल भारत का योगदान है ?
अध्यापक – हाँ! ई-नाम् (e-NAM), ‘पीएम किसान एप’, ( PM KISAN ) – ड्रोन तकनीक आदि प्लेटफॉर्म इस क्षेत्र में हैं।
यशिका – बहुत अच्छा है। परंतु ‘डिजिटल’ का व्यापार में कैसा प्रभाव है?

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(6) अध्यापकः – आभासीय- -पटलम् अनुप्रयोगः च इत्येतयोः माध्यमेन आभासीयं (ऑन्-लैन्) विक्रयणं भवति । ‘आशु – प्रतिक्रिया-कूट : ‘ (QR Code) इत्याधारितः विनिमयश्च भवति ।
सर्वे – वयं धन्याः मान्यवर! अस्मिन् सन्दर्भे वयं भवद्भि पाठिताः । वयम् अपि भारतं डिजिटल – भारतं कर्तुं प्रयत्नं करिष्यामः ।
अध्यापकः – उत्तमम्। किन्तु अस्माभिः ‘साङ्गणिक – सुरक्षा’ विषये अपि चिन्तनीयम् । अनेकविधाः साङ्गणिक-अपराधाः भवन्ति। जनाः प्रायशः लोभात् भयात् वा साङ्गणिक-अपराधेन पीडिताः भवन्ति।
भास्करः – एतस्मिन् विषये जनाः जागृताः भवेयुः तदर्थम् अपि उपायाः चिन्तनीयाः ।
अध्यापकः – सत्यं कथितम्! अनेन प्रकारेण डिजिटल क्रान्तौ भारतम् अग्रगण्यं राष्ट्रं भविष्यति।
सर्वे – कृतज्ञाः वयं गुरुवर! वयं डिजिटल – भारतं समृद्धं कर्तुं योगदानं करिष्यामः ।
(सर्वे मिलित्वा गायन्ति)
सर्वं विकसितं भाति डिजिटल – भारतेऽधुना ।
जीवनस्य च सौकर्यं सहसा लभते जनः ॥
शब्दार्था: (Word Meanings) :
- आभासीय-पटलम् – ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Virtual platform),
- आभासीयं विक्रयणं- ऑनलाइन बिक्री (Online selling),
- आशु – प्रतिक्रिया – कूट : – क्यूआर कोड ( QR Code),
- साङ्गणिक – सुरक्षा – ( साइबर सुरक्षा) (Cyber security)
- जागृता:- जागरूक (Aware) ।
सरलार्थ-
अध्यापक – ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप्स के माध्यम से डिजिटल बिक्री होती है । आजकल क्यू आर कोड आधारित लेन-देन भी होता है।
सभी छात्र – हम धन्य हैं, मान्यवर! आपने हमें इस विषय में पढ़ाया । हम भी भारत को डिजिटल भारत बनाने में प्रयास करेंगे।
अध्यापक – बहुत अच्छा। लेकिन हमें साइबर सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। बहुत तरह के साइबर अपराध होते हैं। लोग अक्सर लोभ या डर के कारण इनका शिकार हो जाते हैं।
भास्कर – इस विषय में लोगों को जागरूक करना चाहिए। उसके लिए उपाय सोचना चाहिए।
अध्यापक – बिल्कुल सही कहा! इस प्रकार, डिजिटल क्रांति में भारत एक अग्रणी राष्ट्र बन सकता है।
सभी छात्र – हम आभारी हैं, गुरुवर! हम डिजिटल भारत को समृद्ध बनाने में योगदान देंगे।
(सभी मिलकर गाते हैं)
अब भारत का हर क्षेत्र विकसित दिखता है,
डिजिटल भारत में अब जीवन अधिक सुविधाजनक हो गया है । ”
Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना Summary Notes
गृहं शून्यं सुतां विना Summary
प्राचीन भारत में स्त्रियों को अत्यधिक सम्मान प्राप्त था। उनकी स्थिति उन्नत तथा सुदृढ थी। स्त्रियाँ सुशिक्षित होती थीं। स्त्रियों को शास्त्र का ज्ञान होता था। इतिहास में ब्रह्मवादिनी गार्गी, मैत्रेयी आदि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। वैदिक युग में पुरुषों और स्त्रियों में कोई विभेद नहीं है।

कालान्तर में स्त्रियों की दशा दयनीय होती गई। उनकी सामाजिक, शैक्षणिक दशा में न्यूनता आती गई। इसके अतिरिक्त भ्रूणहत्या, सतीप्रथा जैसी कुत्सित प्रथाओं का आविर्भाव हो गया। ये प्रथाएँ अमानवीय हैं। समय समय पर महापुरुषों ने ऐसी प्रथाओं का घोर विरोध किया।

यह पाठ कन्याओं की गर्भ में हत्या पर रोक लगाने और उनकी शिक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रशंसनीय कदम है। आज भी पुत्र और पुत्री में भेदभाव की भावना कार्यरत है। समाज में कन्या जन्म को आज के युग में भी तिरस्कार की दृष्टि से देखा जाता है। इसके निवारण की नितान्त आवश्यकता है। प्रस्तुत पाठ में संवादात्मक शैली में इन बातों को सुगमता से समझाया गया है।

गृहं शून्यं सुतां विना Word Meanings Translation in Hindi
मूलपाठः, अन्वयः, शब्दार्थः, सरलार्थश्च
(क) “शालिनी ग्रीष्मावकाशे पितृगृहम् आगच्छति। सर्वे प्रसन्नमनसा तस्याः स्वागतं कुर्वन्ति परं तस्याः भ्रातृजाया उदासीना इव दृश्यते”।
शालिनी – भ्रातृजाय! चिन्तिता इव प्रतीयसे, सर्वं कुशलं खलु?
माला – आम् शालिनि। कुशलिनी अहम्। त्वदर्थं किम् आनयानि, शीतलपेयं चायं वा?
शालिनी – अधुना तु किमपि न वाञ्छामि। रात्रौ सर्वैः सह भोजनमेव करिष्यामि।
शब्दार्थ-
पितगृहम्-पिता के घर।
कुर्वन्ति-करते हैं।
भ्रातृजाया-भाभी।
दृश्यते-दिखाई पड़ती है।
प्रतीयसे-प्रतीत होती हो।
त्वदर्थम्-तुम्हारे लिए।
अधुना-अब।
वाञ्छामि-चाहती हूँ (Want)।
रात्रौ-रात में।
सर्वैः-सभी।
सरलार्थ-
शालिनी गर्मी की छुट्टियों में पिता के घर आती है। सभी प्रसन्नमन होकर उसका स्वागत करते हैं, परन्तु उसकी भाभी उदासीन-सी दिखाई पड़ती है।
शालिनी – भाभी, (तुम) चिन्तित-सी प्रतीत होती हो। सभी कुशल तो हैं?
माला – मैं कुशल हूँ। तुम्हारे लिए क्या लाऊँ? चाय या ठण्डा?
शालिनी – इस समय मैं कुछ नहीं चाहती। रात में सभी के साथ भोजन ही कर लूंगी।
(ख) (भोजनकालेऽपि मालायाः मनोदशा स्वस्था न प्रतीयते स्म, परं सा मुखेन किमपि नोक्तवती)
राकेशः – भगिनि शालिनि! दिष्ट्या त्वं समागता। अद्य मम कार्यालये एका महत्त्वपूर्णा गोष्ठी सहसैव निश्चिता। अद्यैव मालायाः चिकित्सिकया सह मेलनस्य समयः निर्धारितः त्वं मालया सह चिकित्सिकां प्रति गच्छ, तस्याः परामर्शानुसारं यद्विधेयं तद् सम्पादय।
शालिनी – किमभवत्? भ्रातृजायायाः स्वास्थ्यं समीचीनं नास्ति? अहं तु ह्यः प्रभृति पश्यामि सा स्वस्था न प्रतिभाति इति प्रतीयते स्म।
शब्दार्थ-
मुखेन-मुख से।
नोक्तम्-नहीं कहा।
भगिनि-हे बहन।
सहसैव-अचानक ही।
दिष्ट्या-भाग्य से।
चिकित्सिकया-डाक्टर के साथ।
निर्धारितः-निर्धारित।
समीचीनम्-उचित।
प्रतिभाति-लगता है।
सरलार्थ-
(भोजन के समय भी माला की मनोदशा स्वस्थ प्रतीत नहीं होती थी, परन्तु मुख से कुछ नहीं कहा।)
राकेश – बहन शालिनी, भाग्य से तुम आ गई हो। आज मेरे कार्यालय में अचानक एक बैठक निश्चित की गई है। आज ही माला का डॉक्टर के साथ मिलने का समय निर्धारित है। तुम माला के साथ डॉक्टर के पास जाओ। उसकी सलाह के अनुसार जो करने योग्य है, वह करो।
शालिनी – क्या हुआ? (क्या) भाभी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है? मैं तो कल से ही देख रही हूँ कि वह स्वस्थ नहीं लगती है, ऐसा प्रतीत होता था।
(ग) राकेशः – चिन्तायाः विषयः नास्ति। त्वं मालया सह गच्छ। मार्गे सा सर्वं
ज्ञापयिष्यति। (माला शालिनी च चिकित्सिकां प्रति गच्छन्त्यौ वार्ता कुरुतः)
शालिनी – किमभवत्? भ्रातृजाये? का समस्याऽस्ति?
माला – शालिनि! अहं मासत्रयस्य गर्दै स्वकुक्षौ धारयामि। तव भ्रातुः आग्रहः अस्ति यत् अहं लिङ्गपरीक्षणं कारयेयं कुक्षौ कन्याऽस्ति चेत् गर्भ पातयेयम्। अहम् अतीव उद्विग्नाऽस्मि परं तव भ्राता वार्तामेव न शृणोति।
शब्दार्थ-
ज्ञापयिष्यति-बता देगी।
गच्छन्त्यौ-जाती हुई।
मासत्रयस्य-तीन महीने का।
कुक्षौ-कोख में।
कारयेयम्-करवा लूँ।
पातयेयम्-गिरा देना।
उद्विग्ना-दु:खी।
शृणोति-सुनता है।
सरलार्थ –
राकेश – चिन्ता का विषय नहीं है। तुम माला के साथ जाओ। रास्ते में वह सब बता देगी। (माला और शालिनी डॉक्टर के पास जाती हुई वार्तालाप करती हैं)
शालिनी – क्या हुआ? भाभी। क्या समस्या है?
माला – शालिनी! मेरे कोख में तीन महीने का गर्भ है। तुम्हारे भाई का आग्रह है कि मैं लिङ्ग परीक्षण करवाऊँ और यदि कोख में कन्या है तो गर्भ को गिरवा दूँ। मैं अत्यधिक दुःखी हूँ तथा तेरा भाई सुनता ही नहीं है।
(घ) शालिनी – भ्राता एवं चिन्तयितुमपि कथं प्रभवति? शिशुः कन्याऽस्ति चेत् वधार्हा? जघन्यं कृत्यमिदम्। त्वम् विरोधं न कृतवती? सः तव शरीरे स्थितस्य शिशोः वधार्थं चिन्तयति त्वम् तूष्णीम् तिष्ठसि? अधुनैव गृहं चल, नास्ति आवश्यकता लिङ्गपरीक्षणस्य। भ्राता यदा गृहम् आगमिष्यति अहम् वार्ता करिष्ये।
(संध्याकाले भ्राता आगच्छति हस्तपादादिकं प्रक्षाल्य वस्त्राणि च परिवर्त्य पूजागृहं गत्वा दीप प्रज्वालयति भवानीस्तुतिं चापि करोति। तदनन्तरं चायपानार्थम् सर्वेऽपि एकत्रिताः।)
शब्दार्थ-
प्रभवति-समर्थ होता है।
वधार्हा-वध के योग्य।
जघन्यम्-पापपूर्ण।
वधार्थम्-हत्या के लिए।
तिष्ठसि-रहती हो।
अधुनैव-अभी ही।
आगच्छति-आता है।
हस्तपादादिकम्-हाथ व पैर।
प्रक्षाल्य-धोकर।
परिवर्त्य-बदल कर।
प्रज्वालयति-जलाता है।
सरलार्थ –
शालिनी – भाई अकेला कैसे विचार कर सकता है? यदि कन्या है तो हत्या करनी है। यह तो पापपूर्ण कार्य है। क्या तुमने विरोध नहीं किया? वह तुम्हारी कोख में स्थित बच्चे की हत्या के विषय में सोचता है और तुम चुप खड़ी हो। अभी घर चलो, लिंगपरीक्षण की आवश्यकता नहीं है। भाई जब घर आएगा, मैं बात कर लूँगी। (सायंकाल भाई आता है, हाथ-पैर आदि धोकर तथा कपड़े बदलकर पूजाघर में जाकर, दीपक जलाकर दुर्गा की पूजा करता है। तत्पश्चात् चायपान के लिए सभी एकत्रित होते हैं।)
(ङ) राकेशः – माले! त्वं चिकित्सिकां प्रति गतवती आसी:, किम् अकथयत् सा?
(माला मौनमेवाश्रयति। तदैव क्रीडन्ती त्रिवर्षीया पुत्री अम्बिका पितुः
क्रोडे उपविशति तस्मात् चाकलेहं च याचते। राकेशः अम्बिकां लालयति,
चाकलेहं प्रदाय तां क्रोडात् अवतारयति। पुनः माला प्रति प्रश्नवाचिका
दृष्टिं क्षिपति। शालिनी एतत् सर्वं दृष्ट्वा उत्तरं ददाति)
शालिनी – भ्रातः! त्वं किं ज्ञातुमिच्छसि? तस्याः कुक्षि पुत्रः अस्ति पुत्री वा? किमर्थम्? षण्मासानन्तरं सर्वं स्पष्टं भविष्यति, समयात् पूर्वं किमर्थम् अयम् आयासः?
राकेशः – भगिनि, त्वं तु जानासि एव अस्माकं गृहे अम्बिका पुत्रीरूपेण अस्त्येव।
अधुना एकस्य पुत्रस्य आवश्यकताऽस्ति तर्हि…….
शब्दार्थ-
मौनम्-चुप।
त्रिवर्षीया-तीन साल की।
क्रोडे-गोद में।
याचते-माँगती है।
प्रदाय-देकर।
क्षिपति-डालता है।
ज्ञातुम्-जानना।
किमर्थम्-किसलिए।
आयासः-प्रयास (Effort)।
षण्मासा-छह महीना।
सरलार्थ –
राकेश – माला! तुम डॉक्टर के पास गई थीं। उसने क्या कहा?
(माला चुप रहती हैं। तब तीन साल की खेलती हुई बेटी ‘अम्बिका’ पिता की गोद में बैठ जाती है, उससे चॉकलेट माँगती है। राकेश अम्बिका का लाड (प्यार) करता है और उसे चॉकलेट देकर गोद से उतार देता है। पुनः माला की ओर प्रश्नवाचक दृष्टि डालता है।
शालिनी – यह सब देखकर उत्तर देती है।) शालिनी – भाई! तुम क्या जानना चाहते हो? उसकी कोख में पुत्र है या पुत्री? किसलिए? छह महीने के पश्चात् सब स्पष्ट हो जाएगा। समय से पूर्व यह प्रयास कैसा?
राकेश – बहन! तुम जानती तो हो कि पहले ही हमारे घर में पुत्री के रूप में ‘अम्बिका’ है ही। अब एक पुत्र की आवश्यकता है। अवश्य ही
(च) शालिनी – तर्हि कुक्षि पुत्री अस्ति चेत् हन्तव्या? (तीव्रस्वरेण) हत्यायाः पापं कर्तुं प्रवृत्तोऽसि त्वम्।
राकेशः – न, हत्या तु न…।
शालिनी – तर्हि किमस्ति निघृणं कृत्यमिदम्? सर्वथा विस्मृतवान् अस्माकं जनकः
कदापि पुत्रीपुत्रमयः विभेदं न कृतवान्? सः सर्वदैव मनुस्मृतेः पंक्तिमिमाम् उद्धरति स्म “आत्मा वै जायते पुत्रः पुत्रेण दुहिता समा”। त्वमपि सायं प्रातः देवीस्तुतिं करोषि? किमर्थं सृष्टः उत्पादिन्याः शक्त्याः तिरस्कारं करोषि? तव मनसि इयती कुत्सिता वृत्तिः आगता, इदं चिन्तयित्वैव अहम्
कुण्ठिताऽस्मि। तव शिक्षा वृथा’
शब्दार्थ-
हन्तव्या-मार डालना है।
तर्हि-अवश्य।
निघृणम्-क्रूर।
विभेदम्-अन्तर (Difference)।
उद्धरति-उद्धृत करता।
जायते-उत्पन्न होता है।
समा-समान।
तिरस्कारम्-अपमान।
कुण्ठिता-कुण्ठित।
उत्पादिन्याः-उत्पन्न करने वाली।
इयती-इतनी।
सरलार्थ –
शालिनी – अवश्य ही, यदि कोख में कन्या होगी तो मार देना चाहिए। (तेज आवाज में) तुम हत्या के पाप में प्रवृत्त हो।
राकेश – नहीं, हत्या नहीं।
शालिनी – तो यह क्रूर कर्म क्या है? क्या तुम सर्वथा भूल गए हो कि हमारे पिता ने बेटा-बेटी में भेद कभी नहीं किया। वे सदा मनुस्मृति के इस वाक्य को उद्धृत करते थे- आत्मा ही पुत्र के रूप में उत्पन्न होती है, पुत्री पुत्र के समान होती है। तुम भी प्रातः सायं देवी की स्तुति करते हो। जगत् को उत्पन्न करने वाली शक्ति का तिरस्कार किसलिए करते हो? तुम्हारे मन में इतनी गन्दी विचारधारा आ गई है- यह सोचकर ही मैं कुण्ठित हूँ। तुम्हारी शिक्षा व्यर्थ………..।
(छ) राकेशः – भगिनि! विरम विरम। अहं स्वापराधं स्वीकरोमि लज्जितश्चास्मि। अद्यप्रभृति कदापि गर्हितमिदं कार्यं स्वप्नेऽपि न चिन्तयिष्यामि। यथैव अम्बिका मम हृदयस्य संपूर्णस्नेहस्य अधिकारिणी अस्ति, तथैव आगन्ता शिशुः अपि स्नेहाधिकारी भविष्यति पुत्रः भवतु पुत्री वा। अहं स्वगर्हितचिन्तनं प्रति पश्चात्तापमग्नः अस्मि, अहं कथं विस्मृतवान्
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैताः न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।”
अथवा “पितुर्दशगुणा मातेति।” त्वया सन्मार्गः प्रदर्शितः भगिनि।
कनिष्ठाऽपि त्वं मम गुरुरसि।
शब्दार्थ-
विरम-रुक जाओ।
स्वापराधम्-अपने अपराध को।
अद्यप्रभृति-आज से लेकर।
गर्हितम्-निन्दनीय।
आगन्ता-आने वाला।
शिशुः-बच्चा।
नार्यः-स्त्रियों की।
अफला:-व्यर्थ।
प्रदर्शितः-दिखला दिया।
कनिष्ठा-(आयु में) छोटी।
सरलार्थ –
राकेश – बहन। रुक जाओ, रुक जाओ। मैं अपने अपराध को स्वीकार करता हूँ और लज्जित हूँ। आज से लेकर कभी इस निन्दनीय कार्य का चिन्तन नहीं करूँगा। जिस प्रकार ‘अम्बिका’ मेरे हृदय की तथा सम्पूर्ण स्नेह की अधिकारी है, उसी प्रकार आने वाला बच्चा भी स्नेह का अधिकारी होगा। पुत्र होवे अथवा पुत्री। मैं अपने निन्दनीय विचार के प्रति पश्चाताप में डूबा हुआ हूँ। मैं किस प्रकार भूल गया हूँ-
जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है, वहाँ देवता प्रसन्न होते हैं। जहाँ इनकी पूजा नहीं होती है, वहाँ सभी क्रियाएँ व्यर्थ होती हैं। अन्वयः-यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, तत्र देवताः रमन्ते। यत्र एताः न पूज्यन्ते, तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति।) अथवा ‘पिता से दश गुणा माता (सम्माननीय) है।’ तुमने सन्मार्ग दिखला दिया है। बहन, (आयु में) छोटी होते हुए भी तुम मेरी गुरु हो।
(ज) शालिनी – अलं पश्चात्तापेन। तव मनसः अन्धकारः अपगतः प्रसन्नतायाः विषयोऽयम् भ्रातृजाये! आगच्छ। सर्वां चिन्तां त्यज आगन्तुः शिशोः स्वागताय च सन्नद्धा भव। भ्रातः त्वमपि प्रतिज्ञां कुरु-कन्यायाः रक्षणे, तस्याः पाठने दत्तचित्तः स्थास्यसि “पुत्रीं रक्ष, पुत्री पाठय” इतिसर्वकारस्य घोषणेयं तदैव सार्थिका भविष्यति यदा वयं सर्वे मिलित्वा चिन्तनमिदं यथार्थरूपं
करिष्यामः –
या गार्गी श्रुतचिन्तने नृपनये पाञ्चालिका विक्रमे।
लक्ष्मीः शत्रुविदारणे गगनं विज्ञानाङ्गणे कल्पना।।
इन्द्रोद्योगपथे च खेलजगति ख्याताभितः साइना
सेयं स्त्री सकलासु दिक्षु सबला सर्वैः सदोत्साह्यताम्।
अन्वयः-
श्रुतचिन्तने नृपनये या गार्गी, विक्रमे पाञ्चालिका, शत्रुविदारणे लक्ष्मीः, विज्ञानांगणे गगनं कल्पना, इन्द्रोद्योगपथे खेलजगति च अभितः ख्याता साइना, सा इयं स्त्री सकलासु दिक्षु सबला (अस्ति), (स्त्री) सर्वैः सदा उत्साह्यताम्।
शब्दार्थ-
अलम्-बस करो।
अपगतः-दूर हो गया।
त्यज-छोड़ दो।
आगन्तुः-आने वाले का।
सन्नद्धा-तैयार।
दत्तचित्तः- ध्यान युक्त।
सर्वकारस्य-सरकार की।
मिलित्वा-मिलकर।
नृपनये-राजनीति में।
विक्रमे-विक्रम में।
पाञ्चालिका-द्रौपदी।
विदारणे-विनाश करने में।
अँगने-आँगण में।
ख्याता-प्रसिद्ध।
सकलासु-सभी।
उत्साह्यताम्-प्रोत्साहित किया जाए।
सरलार्थ –
शालिनी –
पश्चात्ताप मत करो। तुम्हारे मन का अज्ञान नष्ट हो गया है। प्रसन्नता का विषय है भाभी चिन्ता को छोड़ दो। आने वाले शिशु के स्वागत के लिए तैयार हो जाओ। भाई, तुम भी प्रतिज्ञा करो- कन्या की रक्षा करने में उसके पालन में सावधान रहँगा। ‘बेटी की रक्षा करो, बेटी का पालन करो’ यह सरकार की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब हम सभी मिलकर इस विचार को सत्य करेंगे- वेदशास्त्रों के चिन्तन में जो गार्गी तथा राजनीति में, पराक्रम में द्रौपदी, शत्रु का विनाश करने में लक्ष्मीबाई, विज्ञान के क्षेत्र में कल्पना, इन्द्र उद्योग के पथ पर तथा खेल जगत् में साइना- ये चारों ओर प्रसिद्ध (स्त्रियाँ) हैं। यह स्त्री सभी दिशाओं में सबला है। सभी इसे सदा प्रोत्साहित करें।