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Class 8 Hindi हरिद्वार Extra Question Answer
Class 8 Hindi Chapter 4 Extra Question Answer हरिद्वार
NCERT Class 8 Hindi Chapter 4 Extra Questions अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
भारतेंदु हरिश्चंद्र कौन थे ?
उत्तर:
भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार थे।
प्रश्न 2.
यह पाठ किस विषय पर आधारित है?
उत्तर:
यह पाठ हरिद्वार नामक तीर्थ स्थल के यात्रा – वृत्तांत पर आधारित है।
प्रश्न 3.
लेखक हरिद्वार को कैसा स्थल मानते हैं?
उत्तर:
लेखक हरिद्वार को मोक्षदायिनी स्थल मानते हैं।
प्रश्न 4.
लेखक के अनुसार हरिद्वार की यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
लेखक के अनुसार हरिद्वार की यात्रा का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और आत्मिक उन्नति है।
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प्रश्न 5.
लेखक भारतेंदु ने यह पत्र किसे लिखा है?
उत्तर:
लेखक भारतेंदु ने यह पत्र कविवचन सुधा के संपादक को लिखा है।
प्रश्न 6.
हरिद्वार में लेखक ने किनके जन्म को धन्य माना है?
उत्तर:
हरिद्वार में लेखक ने पेड़ों के जन्म को धन्य माना है।
प्रश्न 7.
पक्षियों को किनसे डर नहीं लगता है?
उत्तर:
पक्षियों को नगर के बधिकों से डर नहीं लगता है।
प्रश्न 8.
गंगा के किनारे किसने मठ-मंदिर बना लिए हैं?
उत्तर:
गंगा के किनारे वैरागियों ने मठ-मंदिर बना लिए हैं।
प्रश्न 9.
हरिद्वार क्षेत्र में कितने मुख्य तीर्थ हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
हरिद्वार क्षेत्र में पाँच मुख्य तीर्थ हैं। इनके नाम हैं- कुशावर्त, नीलधारा, विल्व पर्वत, कनखल और हरिद्वार।
हरिद्वार Class 8 Hindi Extra Question Answer लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
लेखक ने हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन कैसे किया है?
उत्तर:
लेखक ने हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा है कि यहाँ की हरी-भरी पहाड़ियाँ, अनेक प्रकार की छोटी-बड़ी वनस्पतियाँ और गंगा का निर्मल जल मन को मोह लेता है। वे झरनों, पेड़ों और पक्षियों की आवाज़ों का भी उल्लेख करते हैं जो यहाँ के वातावरण को दिव्य बनाते हैं।
प्रश्न 2.
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हरिद्वार की यात्रा को केवल मनोरंजन से बढ़कर क्यों माना है?
उत्तर:
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हरिद्वार की यात्रा को केवल मनोरंजन से बढ़कर इसलिए माना है क्योंकि यहाँ आकर व्यक्ति को इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। यह शिक्षा और आत्मिक उन्नति का माध्यम है, जहाँ मन को शांति और संतोष मिलता है।
प्रश्न 3.
हरिद्वार के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर:
हरिद्वार एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहाँ गंगा नदी का.. विशेष महत्व है। यहाँ के घाटों पर लोग स्नान कर पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं। अनेक मंदिर, आश्रम और धार्मिक अनुष्ठान इस स्थान को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र बनाते हैं । यहाँ आकर लोग दान-पुण्य करते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं।
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प्रश्न 4.
लेखक ने पाठ में किन-किन प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया है?
उत्तर:
लेखक ने पाठ में प्रमुख रूप से हरि की पैंड़ी, कनखल, कुशावर्त्त, नीलपर्वत (मनसा देवी मंदिर के साथ) और गंगा के विभिन्न घाटों का उल्लेख किया है।
प्रश्न 5.
हरिद्वार का वातावरण कैसा रहता है?
उत्तर:
हरिद्वार में अनेक प्रकार के यात्री, साधु-महात्मा और भक्त देखने को मिलते हैं। गंगा के घाटों पर लोग स्नान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दान-पुण्य में संलग्न रहते हैं। यहाँ मंदिरों में घंटियों की आवाज़ गूँजती है और भजन-कीर्तन होते रहते हैं, जिससे एक जीवंत और भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
प्रश्न 6.
पेड़-पौधे लोगों का मनोरथ किस तरह पूरा करते हैं? – पेड़-पौधे लोगों को फल, फूल, छाया, सुगंध, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी, जड़ आदि देते हैं। इसके अलावा वे कोयला और राख भी देते हैं। इस तरह वे लोगों का मनोरथ पूरा करते हैं।
प्रश्न 7.
वर्षा का हरिद्वार के सौंदर्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर: वर्षा होने पर हरिद्वार के पहाड़ पर और उसके आसपास की वनस्पतियाँ बढ़ने लगती हैं। इससे लगता है कि चारों ओर हरियाली फैल गई है। यह हरियाली धरती पर बिछे हरे बिछावन जैसी लगती है। इस तरह वर्षा हरिद्वार का सौंदर्य बढ़ा देती है।
प्रश्न 8.
गंगा की पवित्र धारा एवं उसके जल की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
गंगा की पवित्र धारा देखकर ऐसा लगता है जैसे कि गंगा में धारा के रूप में राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता आगे बढ़ रही है। गंगा का जल अत्यंत शीतल और मीठा है। इसका रंग स्वच्छ और श्वेत है।
हरिद्वार Extra Questions दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
प्रस्तुत पत्र के आधार पर भारतेंदु हरिश्चंद्र की हरिद्वार के प्रति भावनाओं और विचारों का विस्तृत विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हरिद्वार को केवल एक यात्रा स्थल नहीं, बल्कि एक पवित्र और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया है। वे हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता, जैसे हरी-भरी पहाड़ियाँ, बहती गंगा और झरने से अत्यधिक प्रभावित हैं। उनके वर्णन में प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। वे हरिद्वार के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर ज़ोर देते हैं, इसे एक पृण्यभूमि और मोक्षदायिनी स्थल मानते हैं।
लेखक का मानना है कि हरिद्वार की यात्रा केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति, ज्ञान प्राप्ति और संतोष के लिए होनी चाहिए। वे हरिद्वार को एक ऐसा स्थान बताते हैं जहाँ विभिन्न साधु-महात्माओं का संगम होता है और धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। उनके लेखन में श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वे पाठकों को भी हरिद्वार की यात्रा कर इस दिव्य अनुभव को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रश्न 2.
‘हरिद्वार’ पाठ में लेखक ने हरिद्वार की जिन विशेषताओं का वर्णन किया है, उनका अपने शब्दों में विस्तार से वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
‘हरिद्वार’ पाठ में लेखक ने हरिद्वार की कई विशेषताओं का वर्णन किया है। सबसे पहले, उन्होंने यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता पर प्रकाश डाला है। हरिद्वार पहाड़ों से घिरा है और गंगा नदी यहाँ से बहती है, जिससे यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक हो जाता है। हरी-भरी वनस्पतियाँ, झरनों का मधुर संगीत और पक्षियों का कलरव इस सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
दूसरी प्रमुख विशेषता यहाँ का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। हरिद्वार को एक ‘पुण्यभूमि’ माना गया है, जहाँ गंगा में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेखक ने हरि की पैंड़ी, कनखल, मनसा देवी मंदिर जैसे अनेक पवित्र स्थलों का उल्लेख किया है, जहाँ लोग पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करते हैं।
तीसरी विशेषता यहाँ का सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण है। लेखक ने साधु-संतों, यात्रियों और भक्तों की भीड़ का वर्णन किया है, जो विभिन्न स्थानों से यहाँ आते हैं। यहाँ के बाज़ारों में धर्म से संबंधित वस्तुएँ मिलती हैं और पूरा वातावरण भक्तिमय रहता है।
अंत में, लेखक ने हरिद्वार को ज्ञान और आत्मिक उन्नति का केंद्र भी बताया है। वे कहते हैं कि यहाँ की यात्रा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व को जानने का अवसर प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति का आत्मिक विकास होता है। इस प्रकार, लेखक ने हरिद्वार को एक बहुआयामी स्थल के रूप में प्रस्तुत किया है जो प्रकृति, धर्म, संस्कृति और आत्मिक शांति का अद्भुत संगम है।
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प्रश्न 3.
लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हरिद्वार की यात्रा के दौरान किन व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को साझा किया है ? इसका पाठकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हरिद्वार की यात्रा के दौरान अपने व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को बड़े ही आत्मीय ढंग से साझा किया है। वे गंगा में स्नान करने, विभिन्न मंदिरों में दर्शन करने और साधु-महात्माओं से मिलने के अपने अनुभवों का वर्णन करते हैं। लेखक को हरिद्वार में असीम शांति और संतोष का अनुभव होता है, और वे इसे एक ऐसी जगह मानते हैं जहाँ “ अपूर्व और दिव्य आनंद” मिलता है।
वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हरिद्वर की सुंदरता और पवित्रता उनके मन को मोह लेती है और उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो वे स्वर्ग के करीब आ गए हों।
इन व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करने से पाठकों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह उन्हें हरिद्वार की यात्रा के वास्तविक अनुभव से जोड़ता है और उन्हें भी उस स्थान की पवित्रता और सुंदरता को महसूस करने के लिए प्रेरित करता है। लेखक की श्रद्धा और भक्ति पाठकों में भी वही भावनाएँ जगाती हैं, जिससे वे हरिद्वार को सिर्फ एक भौगोलिक स्थान के बजाय एक आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में देखते हैं।
प्रश्न 4.
गंगा की धारा को भगीरथ की उज्ज्वल कीर्ति की लता क्यों कहा गया है? इसकी पौराणिक कथा को ध्यान में रखकर बताइए।
उत्तर:
कहा जाता है कि गंगा पहले स्वर्ग में गंगाजी के कमंडल में रहती थी। राजा भगीरथ को अपने पूर्वजों का उद्धार करना था। यह काम गंगा के बिना नहीं हो सकता था। उन्होंने गंगा को धरती पर लाने के लिए कठोर तपस्या की। धरती पर गंगा को लाने का श्रेय भगीरथ को है। अतः गंगा की धारा को भगीरथ की उज्ज्वल कीर्ति कहा गया है।
प्रश्न 5.
कनखल की प्रसिद्धि का क्या कारण है? ‘हरिद्वार’ नामक पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
कनखल हरिद्वार क्षेत्र का बहुत ही उत्तम तीर्थ है। इसकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण इस स्थान का शिव-पार्वती से जुड़ा होना है। यहाँ किसी काल में दक्ष ने यज्ञ किया था । दक्ष ने इस यज्ञ में शिव को बुलाया नहीं गया था। शिव की पत्नी पार्वती अपने पिता द्वारा किए अपमान को सह न सकीं और उन्होंने अपना शरीर यज्ञ में जलाकर भस्म कर दिया था। इस घटना के बाद से कनखल प्रसिद्ध हो गया।
Class 8 Hindi Chapter 8 Extra Questions and Answers अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं। सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं। इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं। वर्षा के कारण सब हरिद्वार को हरिद्वार भी लिख सकते हैं। ओर हरियाली ही दिखाई पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी ।
एक ओर त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है। जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है, रंग जल का स्वच्छ और श्वेत है और अनेक प्रकार के जल-जंतु कल्लोल करते हुए। यहाँ श्री गंगा जी अपना नाम नदी सत्य करती हैं अर्थात् जल के वेग का शब्द बहुत होता है और शीतल वायु नदी के उन पवित्र छोटे-छोटे कनों को लेकर स्पर्श ही से पावन करता हुआ। संचार करता है।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
लेखक ने किस प्रकार के लोगों को ‘सज्जन’ कहा है और उनके व्यवहार का क्या उदाहरण दिया है ?
उत्तर:
लेखक ने उन लोगों को ‘सज्जन’ कहा है जो ‘पत्थर’ मारने से फल देते हैं। इसका अर्थ है कि वे लोग दूसरों की बुराई या आघात करने पर भी बदले में भलाई करते हैं।
प्रश्न 2.
गद्यांश के अनुसार, हरिद्वार में हरियाली क्यों दिखाई देती है?
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, हरिद्वार में चारों ओर हरियाली दिखाई पड़ती थी, मानो यह ‘ हर गलीचा की जात्रियों के विश्राम हेतु’ विकसित थी। इसका तात्पर्य यह है कि यहाँ की भूमि की उर्वरता और प्रकृति की सुंदरता हरियाली का कारण है।
प्रश्न 3.
लेखक ने गंगा नदी की धारा का वर्णन किस प्रकार किया-सी’ क्यों है? इसे ‘राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता – कहा गया है?
उत्तर:
लेखक ने गंगा नदी की धारा को ‘पवित्र धारा’ बताया है जो ‘राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता – सी’ दिखाई देती है। इसे ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि राजा भगीरथ ही गंगा को पृथ्वी पर लाए थे, और गंगा की यह धारा उनकी महान तपस्या और प्रसिद्धि का प्रतीक है।
प्रश्न 4.
गंगा के जल की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?
उत्तर:
गंगा के जल की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई गई हैं-
- यह अत्यंत शीतल है।
- यह इतना भिन्न है मानो ‘चीनी के पने का बर्फ में जमाया हो’ ।
- यह स्वच्छ और श्वेत है।
- इसमें अनेक प्रकार के जल-जंतु कल्लोल करते हैं।
- जल के वेग के कारण इसका शब्द बहुत होता है।
प्रश्न 5.
शीतल वायु का नदी के जल से क्या संबंध बताया गया है और इसका हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
शीतल वायु का नदी के जल से यह संबंध बताया गया है कि शीतल वायु नदी के पवित्र छोटे-छोटे कणों को लेकर बहती है और इन कणों का स्पर्श मात्र ही हृदय को शीतलता से भर देता है।
2. क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं। पंडे दुकानदार इत्यादि कनखल व ज्वालापुर से आते हैं। पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं। इस क्षेत्र में पाँच तीर्थ मुख्य हैं हरिद्वार, कुशावर्त्त, नीलधारा, विल्व पर्वत और कनखल। हरिद्वार तो हरि की पैंड़ी पर नहाते हैं, कुशावर्त्त भी उसी के पास है, नीलधारा वही दूसरी धारा, विल्व पर्वत भी पास ही एक सुहाना पर्वत है जिस पर विल्वेश्वर महादेव की मूर्ति है और कनखल तीर्थ इधर ही है, यह कनखल तीर्थ बड़ा उत्तम है।
किसी काल में दक्ष ने यहीं यज्ञ किया था और यहीं सती ने शिव जी का अपमान न सहकर अपना शरीर भस्म कर दिया । यहाँ कुछ छोटे-छोटे घर भी बने हैं। और भारामल जैकृष्णदास खत्री यहाँ के प्रसिद्ध धनिक हैं। हरिद्वार में यह बखेड़ा कुछ नहीं है और शुद्ध निर्मल साधुओं के सेवन योग्य तीर्थ है। मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है। मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है। चारों ओर से शीतल पवन आती थी।
यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया। वैसे ही मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे । निदान इस उत्तम क्षेत्र में जितना समय बीता, बड़े आनंद से बीता । एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया। जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे।
प्रश्न-
प्रश्न 1.
लेखक ने क्रोध की खानि किसे कहा है और इस कथन से क्या आशय है?
उत्तर:
लेखक ने ‘क्रोध की खानि’ मनुष्य को कहा है। इसका आशय यह है कि मनुष्य क्रोध का मूल स्रोत या भंडार है, यानी मनुष्य आसानी से क्रोधित हो जाता है। हालाँकि, यहाँ संदर्भ में यह भी अनुप्रयोग है कि ऐसे लोग हरिद्वार जैसे पवित्र स्थान पर नहीं ठहरते हैं।
प्रश्न 2.
लेखक ने इस क्षेत्र के पाँच मुख्य तीर्थ कौन-कौन से बताए हैं और उनमें हरिद्वार की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
लेखक इस क्षेत्र के पाँच मुख्य तीर्थ हरिद्वार, कुशावर्त्त, नीलधारा, विल्वपर्वत और कनखल बताए हैं। हरिद्वार की विशेषता यह है कि यह ‘हरि की पैंड़ी’ पर स्थित है जहाँ लोग स्नान करते हैं। यह शुद्ध और निर्मल साधुओं के सेवन योग्य तीर्थ भी है।
प्रश्न 3.
कनखल तीर्थ के महत्व के बारे में लेखक क्या जानकारी देते हैं?
उत्तर:
लेखक बताते हैं कि कनखल तीर्थ बहुत उत्तम है। किसी समय में दक्ष ने यहीं यज्ञ किया था और सती ने शिव जी का अपमान न सहकर अपना शरीर भस्म कर दिया था, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
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प्रश्न 4.
हरिद्वार में लेखक का चित्त कैसा हो गया और वे कहाँ ठहरे थे?
उत्तर:
हरिद्वार में लेखक का चित्त वहाँ जाते ही ‘प्रसन्न और निर्मल’ हो गया था, जिसका वर्णन उनके लिए संभव नहीं था। वे दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर ठहरे थे ।
प्रश्न 5.
‘हरिद्वार’ शब्द का समास विग्रह करते हुए समास का नाम भी लिखिए।
उत्तर:
‘हरिद्वार’ शब्द का समास – विग्रह होगा -हरि का द्वार। इसमें उत्तरपद ‘द्वार’ प्रधान है तथा विग्रह करने पर ‘का’ कारक चिह्न लगने के कारण तत्पुरुष समास है।
Class 8 Hindi Chapter 8 Extra Questions for Practice
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक ने किस पर्वतीय श्रृंखला की हरियाली का उल्लेख किया है ?
(क) विंध्याचल
(ख) अरावली
(ग) हिमालय
(घ) सतपुड़ा
प्रश्न 2.
पाठ में वर्णित ‘कनखल’ किस लिए प्रसिद्ध है?
(क) व्यापार के लिए
(ख) प्रसिद्ध शिव मंदिर के लिए
(ग) मनोरंजन पार्क के लिए
(घ) कृषि के लिए
प्रश्न 3.
‘हरि की पैंड़ी’ पर मुख्य रूप से क्या किया जाता है?
(क) व्यापार
(ख) गंगा स्नान
(ग) खेलकूद
(घ) संगीत कार्यक्रम
प्रश्न 4.
पाठ में किस देवी के मंदिर का जिक्र है, जो एक पर्वत पर स्थित है ?
(क) वैष्णो देवी
(ख) चामुंडा देवी
(ग) मनसा देवी
(घ) दुर्गा देवी
प्रश्न 5.
भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखा गया यह पाठ किस पत्रिका में प्रकाशित हुआ था ?
(क) हंस
(ख) सरस्वती
(ग) कविवचन सुधा
(घ) धर्मयुग
प्रश्न 6.
पाठ में वर्णित नीलपर्वत पर कौन – सा मंदिर स्थित है ?
(क) चंडी देवी मंदिर
(ख) मनसा देवी मंदिर
(ग) दक्षेश्वर मंदिर
(घ) विल्वेश्वर महादेव मंदिर
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अति लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर क्या देखने की मिलते हैं?
प्रश्न 2.
लेखक ने कनखल को किस कारण प्रसिद्ध बताया है?
प्रश्न 3.
लेखक ने नीलपर्वत पर किस देवी के मंदिर का उल्लेख किया है ?
लघूत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
लेखक ने हरिद्वार की तुलना किससे की है और क्यों ?
प्रश्न 2.
पाठ के अनुसार, हरिद्वार की यात्रा से एक व्यक्ति को किस प्रकार का अनुभव प्राप्त होता है ?
प्रश्न 3.
लेखक ने गंगा नदी के जल की पवित्रता और उसके प्रभाव का वर्णन कैसे किया है?
प्रश्न 4.
पाठ में वर्णित ‘कविवचन सुधा’ पत्रिका का महत्व स्पष्ट कीजिए ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
‘हरिद्वार’ पाठ में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने तत्कालीन समाज और धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण को कैसे प्रस्तुत किया है ? उदाहरण सहित समझाइए |
प्रश्न 2.
पाठ में वर्णित हरिद्वार के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत चर्चा कीजिए ।
प्रश्न 3.
‘हरिद्वार’ पाठ के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए ।
प्रश्न 4.
लेखक हरिद्वार के वातावरण को कैसा मानते हैं?
प्रश्न 5.
पाठ में ‘कविवचन सुधा’ का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?