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Class 7 Social Science Chapter 4 Question Answer in Hindi नवारंभ नगर एवं राज्य
नवारंभ नगर एवं राज्य Question Answer in Hindi
कक्षा 7 नवारंभ नगर एवं राज्य पाठ 4 के प्रश्न उत्तर मौसम को समझना
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 81)
प्रश्न 1.
अध्याय के आरंभ में दिए गए उद्धरण पर विचार करें और समूह में चर्चा करें। अपने निरीक्षणों तथा निष्कर्षों की तुलना करें कि कौटिल्य ने एक राज्य के लिए क्या अनुशंसा की थी? क्या यह आज की परिस्थिति से भिन्न है?
उत्तर:
कौटिल्य ने अपने ग्रंथ “अर्थशास्त्र” में एक आदर्श राज्य की कई महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताई हैं। आइए, इसे बिंदुवार समझते हैं:
- राज्य की सुरक्षा : कौटिल्य ने कहा कि राज्य को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रहना चाहिए। इसकी राजधानी और नगर चारों ओर से सुरक्षित होने चाहिए।
- आपदाओं में सहारा : राज्य को आपदाओं के समय न केवल अपने नागरिकों की मदद करनी चाहिए, बल्कि बाहरी लोगों का भी सहारा बनना चाहिए।
- संपन्न संसाधन : राज्य में बड़े कृषि योग्य क्षेत्र, खनिज, लकड़ी के जंगल, हाथियों के जंगल और पशुधन होना चाहिए। इसके अलावा, अच्छे सड़क और जलमार्ग भी आवश्यक हैं।
नहीं, आज की स्थिति में, सरकारें कौटिल्य की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, चिकित्सा सुविधाओं, और रक्षा के लिए कई पहल कर रही हैं।
जनता का शासन : आज का शासन जनता द्वारा चुना जाता है। यदि सरकार सही तरीके से काम नहीं करती है, तो उसे बदला जा सकता है।
प्रश्न 2.
पाठ के अनुसार प्रारंभिक वैदिक समाज में शासकों का चयन कैसे किया जाता था?
उत्तर:
- जनपद और समूह : जनपद विभिन्न समूहों या कबीले से मिलकर बनता था। इन समूहों का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति राजा या शासक बनता था।
- सभा और समिति : प्रत्येक जनपद या महाजनपद में एक सभा या परिषद् होती थी, जिसे ‘सभा’ या ‘समिति’ कहा जाता था।
- राजा का चयन : राजा को सभा या समिति द्वारा चुना जा सकता था, और कई बार यह परंपरा होती थी कि राजा का बेटा अगला राजा बनता था।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया : कुछ महाजनपदों में राजा का चयन मतदान द्वारा किया जाता था, जिससे यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मानी जा सकती है। सभा असमर्थ राजा को हटा भी सकती थी।
प्रश्न 3.
कल्पना कीजिए कि आप प्राचीन भारत के इतिहास का अध्ययन करने वाले एक इतिहासकार है। महाजनपदों के विषय में अधिक जानकारी हेतु आप कौन-कौन से स्रोतों (पुरातात्विक, साहित्यिक इत्यादि) का उपयोग करेंगे? प्रत्येक स्रोत से आपको क्या जानकारी प्राप्त हो सकती है, वर्णन करें।
उत्तर:
प्राचीन भारत के इतिहास का अध्ययन करने के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग करना आवश्यक है।
- पुरातात्विक स्रोत :
- खुदाई : प्राचीन नगरों की खुदाई से हमें उनकी नगरीय योजना, लोगों का जीवन और सुरक्षा की साक्ष्य मिलती है।
- कलाकृतियाँ : जैसे-बर्तन और औजार, ये व्यापार और तकनीक की उन्नति को दर्शाते हैं।
- सिक्के : सिक्के और मुहरें व्यापार और प्रशासनिक प्रथाओं के विकास क्रो दर्शाते हैं।
- साहित्यिक स्रोत : जैसे-वेद, बौद्ध और जैन ग्रंथ, ये राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक संरचनाओं और सामाजिक ज्ञान को समझने में मदद करते हैं।
- लेख : शासकों के नाम, उनके साम्राज्य के कानून, विजय और धार्मिक आस्थाएँ इन लेखों से ज्ञात होती हैं।
- कला और वास्तुकला : मूर्तियों और इमारतों का अध्ययन करके उस काल की कलात्मक शैलियों और धार्मिक विश्वासों को समझा जा सकता है।
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प्रश्न 4.
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. में नगरीकरण हेतु लौह धातु-विज्ञान का विकास इतना महत्वपूर्ण क्यों था? उत्तर देने हेतु आप पाठ में दिए गए तथ्यों के साथ-साथ अपनी जानकारी या कल्पना का भी उपयोग कर सकते हैं।
उत्तर:
नगरीकरण के लिए लौह धातु-विज्ञान का विकास प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. में बहुत महत्वपूर्ण था।
- कृषि में सुधार : लौह उपकरणों ने कृषि की कार्यक्षमता को बढ़ाया। इससे बड़े पैमाने पर कृषि संभव हुई, जिससे अधिक खाद्य उत्पादन हुआ। अधिक खाद्य सामग्री के कारण लोग एक स्थान पर रहने लगे, जिससे नगरों का विकास हुआ।
- वनों की सफाई : लौह उपकरणों की मदद से जंगलों को साफ करना आसान हो गया। इससे अधिक भूमि कृषि और बसावट के लिए उपलब्ध हुई, जिससे जनसंख्या वृद्धि हुई।
- बेहतर हथियार : लौह से बने हथियार जैसे तलवारें, भाले और ढालें हल्के और मजबूत होते थे। इससे सैन्य क्षमताएँ बढ़ीं, जिससे नए राज्य और साम्राज्य का निर्माण हुआ और नगरों की सुरक्षा में भी वृद्धि हुई।
- व्यापार का विस्तार : लौह उपकरणों और हथियारों के उपयोग ने व्यापार को सुगम बनाया। इससे आर्थिक वृद्धि हुई और नगरीकरण को बढ़ावा मिला।
- तकनीकी नवाचार : लौह धातु विज्ञान में महारत हासिल करना एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति थी। इससे विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिली, जैसे-निर्माण, कृषि और सैन्य तकनीक में सुधार।
नवारंभ नगर एवं राज्य Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 4 Question Answer
महत्वपूर्ण प्रश्न? (पृष्ठ 67)
प्रश्न 1.
भारत में ‘द्वितीय नगरीकरण’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भारत में ‘द्वितीय नगरीकरण’ का अर्थ है एक नया शहरी विकास का चरण, जो लगभग प्रथम सहस्ताब्दी सा.सं.पू. के आस-पास शुरू हुआ। इस समय, गंगा के मैदानों और सिंधु घाटी के कुछ हिस्सों में शहरी केंद्रों का विकास हुआ।
इस द्वितीय नमरीकरण के दौरान, शहरों में व्यापार, तीर्थ यात्रा और सैन्य अभियानों के लिए संचार मार्ग खुले। पुरातात्विक खोजें और प्राचीन ग्रंथ यह दर्शाते हैं कि ये शहर जीवंत थे और सांस्कृतिक तथा आर्थिक उन्नति का केंद्र बने।
प्रश्न 2.
जनपदों और महाजनपदों का भारत के प्रारंभिक इतिहास में क्या महत्व है?
उत्तर:
जनपदों और महाजनपदों का भारत के प्रारंभिक इतिहास में बहुत महत्व है। जनपद छोटे क्षेत्र होते थे, जिनका नेतृत्व एक शासक करता था। जबकि महाजनपद बड़े होते थे, जो कई जनपदों को मिलाकर बनते थे। इस विकास ने समाज को जनजातीय जीवन से संगठित किया।
महाजनपदों ने शहरों और सेनाओं का निर्माण किया, जिससे सुरक्षा बढ़ी और कर प्रणाली भी विकसित हुई। व्यापार, कृषि और शिल्प में तेजी से सुधार हुआ। इस प्रकार, जनपदों और महाजनपदों ने शासन की नींव रखी, जिससे मगध, मौर्य जैसे साम्राज्यों का उदय हुआ और भारत का इतिहास नया मोड़ लिया।
प्रश्न 3.
इन जनपदों और महाजनपदों ने किस प्रकार की शासन प्रणाली का विकास किया?
उत्तर:
जनपदों और महाजनपदों में शासन प्रणाली का विकास मुख्यतः दो तरीकों से हुआ। पहले, राजा का पद वंशानुगत होता था, यानी राजा का बेटा ही अगला राजा बनता था। इसे हम वंशानुगत शासन कहते हैं। दूसरे, कुछ राज्यों में राजा के साथ एक सभा होती थी, जिसमें बुजुर्ग लोग शामिल होते थे।
इस सभा में चर्चा और निर्णय लेकर राज्य का शासन किया जाता था। यदि राजा योग्य नहीं होता, तो सभा के सदस्य उसे पदन्युत कर सकते थे। इस प्रकार. जनपदों और महाजनपदों में शासन्न प्रणाली में लोकतांत्रिक तत्व भी शामिल थे, जिससे लोगों की भागीदारी बढ़ी।
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आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 70)
प्रश्न 1.
इन नवीन राजकीय इकाइयों में सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद थे-मगध, कोसल, वत्स तथा अवंति। मानचित्र को देखकर क्या आप इनकी राजधानियों की पहचान कर सकते हैं? साथ ही, इनमें से कितने नगरों की पहचान वर्तमान भारतीय नगरों से की जा सकती है?
उत्तर:
महाजनपदों की राजधानियाँ:
- मगध : मगध की राजधानी राजगृह (राजगीर) थी, जो आज के बिहार में स्थित है।
- कोसल : कोसल की राजधानी श्रावस्ती थी, जो वर्तमान उत्तर प्रदेश के भाग में है।
- वत्स : वत्स की राजधानी कौशांबी थी, जो भी आज के उत्तर प्रदेश में है।
- अवंति : अर्वति की राजधानी उन्जयिनी (उज्जैन) थी, जो आज के मध्य प्रदेश में स्थित है।
प्रश्न 2.
इस मानचित्र की तुलना कक्षा 6 के अध्याय ‘भारत अर्थात इंडिया’ में महाभारत में उल्लिखित प्रदेशों के मानचित्र (चित्र 5.4) से कीजिए और उन नामों को सूचीबद्ध कीजिए जो दोनों में समान हैं। आपके अनुसार यह समानता क्या संकेत करती है?
उत्तर:
जब हम महाजनपदों के मानचित्र की तुलना महाभारत में उल्लिखित प्रदेशों के मानचित्र से करते हैं, तो हमें कुछ समान नाम मिलते हैं जैसे-मगध, कोसल, और वत्स।
यह समानता यह संकेत करती है कि इन क्षेत्रों का सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व सदियों से बना रहा है। इसका मतलब है कि ये क्षेत्र भारतीय सभ्यता में महत्वपूर्ण रहे हैं और इनका सामाजिक, राजनीतिक, और आर्थिक ढाँचे पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह दर्शाता है कि प्राचीन समय से लंकर आज तक इन क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 74)
प्रश्न:
निम्नलिखित तालिका में प्रत्येक वर्ग में ‘हाँ’ (सही का चिह्न) या ‘नहीं’ (काटने का चिह्न) भरें, जो भारतीय सभ्यता के दोनों चरणों की एक रोचक तुलना करती है।
उत्तर:
| श्रेणी | प्रथम नगरीकरण | द्वितीय नगरीकरण |
| गंगा का मैदान | × | ✓ |
| बौद्ध मठ | × | ✓ |
| साहित्य | × | ✓ |
| व्यापार | ✓ | ✓ |
| युद्धकला | × | ✓ |
| ताम्र/कास्य | ✓ | × |
| लोहा | × | ✓ |
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 76)
प्रश्न 1.
एक विकसित समाज अपने आप को विभिन्न समूहों में क्यों विभाजित करता है? ऐसा क्यों होता है, इसके संभावित कारणों पर विचार करें।
उत्तर:
एक विकसित समाज अपने आप को विभिन्न समूहों में विभाजित करता है। यह विभाजन कई कारणों से होता है।
- कुछ समूह विशेष पेशों में विशेषजता रखते हैं, जैसेकृषक, रक्षा, कारीगरी या व्यापार। इससे उनके कार्यों में दक्षता आती है।
- समाज को प्रबंधित करना आसान होता है जब लोग एक ही पेशे या वर्ग में होते हैं। इससे शासन करना सरल हो जाता है।
- शक्ति, धन, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएँ, भोजन की आदतें, शिक्षा और पूजा के तरीके भी समाज में विभाजन का कारण बनते हैं।
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प्रश्न 2.
आप प्रथम सहस्त्राब्दी सा.संपू. के एक विकसित समाज में ऐसे और कौन-कौन से व्यवसायों की कल्पना कर सकते हैं?
उत्तर:
प्रथम सहस्ताब्दी सा.सं.पू. के एक विकसित समाज में कई प्रकार के व्यवसाय हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- चिकित्सक या हीलर
- शिक्षक और लेखाकार
- वास्तुकार और मिस्त्री
- न्यायाधीश और प्रशासक
- व्यापारी
- किसान
- कला और शिल्पकार : जैसे कि मिट्टी के बर्तन बनाने वाले, बुनकर, धातु कारीगर।
आइए विचार करें (पृष्ठ 77)
प्रश्न:
समाज में असमानताएँ अनेक रूपों में पाई जाती हैं। क्या आपने कभी ऐसी कोई घटना देखी या अनुभव की है जब आपको या आपके किसी परिचित को दूसरों से भिन्न समझा गया हो? क्या आप मानते हैं कि समाज में समानता आवश्यक है? यदि हाँ, तो क्यों? क्या आपने किसी ऐसे व्यक्ति या किसी ऐसी पहल को देखा है, जिनके द्वारा समाज में असमानता को कम करने का प्रयास किया गया हो?
उत्तर:
समाज में असमानताएँ कई रूपों में पाई जाती हैं, जैसे धन, जाति, धर्म. लिंग और नस्ल। मैंने कुछ गाँवों में देखा है कि निम्न जाति के लोग ऊँची जाति के लोगों के साथ नहीं बैठ सकते। यह अजीब है कि ये लोग अपने लिए अलग बर्तन का उपयोग करते हैं, जो साफ होते हैं। इससे यह साबित होता है कि समाज में असमानता अभी भी मौजूद है।
हाँ, समाज में समानता आवश्यक है क्योंकि हर व्यक्ति की सोचने की क्षमता अलग होती है। अगर सभी को समान अवसर मिले, तो वे अपनी प्रतिभा साबित कर सकते हैं और समाज का विकास कर सकते हैं। समानता से लोग सम्मानित महसूस करते हैं, आत्मविश्वासी बनते हैं और एकजुट रहते हैं, जिससे संघर्ष कम होते हैं।
असमानता को कम करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने कई कानून बनाए हैं, जैसे-मुफ्त शिक्षा, पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी और गरीब छात्रों के लिए स्कॉलरशिप।
कई धार्मिक स्थल, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और कॉर्पोरेट घराने गरीब परिवारों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में मदद करते हैं। इसके अलावा, कई शिक्षित लोग कमजोर छात्रों की मदद करते हैं ताकि वे समान रूप से सीख सकें।