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Class 7 Social Science Chapter 3 Question Answer in Hindi भारत की जलवायु
भारत की जलवायु Question Answer in Hindi
कक्षा 7 भारत की जलवायु पाठ 3 के प्रश्न उत्तर मौसम को समझना
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 65)
प्रश्न 1.
जलवायु के कारकों का उनके प्रभावों के साथ निम्नलिखित सूची में मिलान कीजिए

उत्तर:
| स्तंभ (क) | स्तंभ (ख) |
| 1) अक्षांश | ख) उत्तर एवं दक्षिण में अलग-अलग जलवायु बनाता है। |
| 2) ऊँचाई | ग) ऊँचे स्थानों को अधिक ठंडा रखता है। |
| 3) समुद्र से निकटता | घ) तापमान को प्रभावित करता है। |
| 4) मानसूनी पवन | क) भारत में गर्मी के दौरान नमीयुक्त पवन को लाता है। |
प्रश्न 2.
नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए-
(क) मौसम और जलवायु में क्या अंतर है ?
उत्तर:

(ख) समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम क्यों होता है ?
उत्तर:
समुद्र के निकट स्थित स्थानों का तापमान समुद्र से दूर स्थित स्थानों की तुलना में कम होने का मुख्य कारण यह है कि समुद्र तापमान को निर्यंत्रित करता है। समुद्र धीरेधीरे गर्मी को अवशोषित करता है और धीरे-धीरे उसे छोड़ता है।
इसका मतलब है कि जब गर्मी का मौसम आता है, तो समुद्र आस-पास के क्षेत्रों को ठंडा रखता है, जिससे गर्मियों में तापमान अधिक नहीं बढ़ता। वहीं, जब सर्दी का मौसम होता है, तो समुद्र गर्मी को धीरे-धीरे छोड़ता है, जिससे तटीय क्षेत्रों में सर्दी अधिक कठोर नहीं होती।
(ग) भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की क्या भूमिका है?
उत्तर:
भारतीय जलवायु को प्रभावित करने में मानसूनी पवन की महत्वपूर्ण भूमिका है। गर्मी के मौसम में, ये पवन भारी बारिश लाते हैं, जो कृषि के लिए आवश्यक जल प्रदान करते हैं। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और जल स्रोतों का पुनर्भरण होता है, जिससे जीवन का विकास होता है।
सर्दी के मौसम में, मानसूनी पवन शुष्क होते हैं और दक्षिण भारत में ठंडा मौसम लाते हैं। लेकिन, जब ये पवन बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरते हैं, तो कुछ नमी इकट्ठा करते हैं और पूर्वी और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश लाते हैं।
(घ) चेन्नई पूरे वर्ष गर्म क्यों रहता है, जबकि लेह ठंडा रहता है?
उत्तर:
- चेन्नई और लेह की जलवायु में अंतर का मुख्य कारण उनकी भौगोलिक स्थिति है।
- चेन्नई, जो कि भू-मध्य रेखा के करीब है, समुद्र के पास स्थित है। यहाँ का तापमान स्थिर रहता है और गर्मी अधिक होती है। समुद्र की नमी और गर्मी इसे पूरे वर्ष गर्म बनाए रखते हैं।
- वहीं, लेह एक ऊँचे पहाड़ी क्षेत्र में है। यहाँ की ऊँचाई के कारण वायु पतली होती है, जो अधिक गर्मी को नहीं रख पाती। इस वजह से, लेह का तापमान ठंडा रहता है।
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प्रश्न 3.
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र को देखिए। लेह, चेन्नई, दिल्ली, पणजी, इन शहरों की जलवायु को पहचानिए।
क्या यह स्थान समुद्र के समीप हैं, पर्वत पर हैं या रेगिस्तान में हैं?
ये कारक वहाँ की जलवायु को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
- लेह : यह हिमालय पर्वत में स्थित है। यहाँ की ऊँचाई अधिक होने के कारण वायुमंडल की घनत्व कम होती है, जिससे तापमान ठंडा रहता है। यहाँ की जलवायु ठंडी रेगिस्तानी है, जिसमें लंबे और कठोर सर्दियाँ और छोटे ग्रीष्मकाल होते हैं। ऊँचाई के कारण सूरज की गर्मी यहाँ तक कम पहुँचती है।
- चेन्नई : यह बंगाल की खाड़ी के निकट है। समुद्र धीरे-धीरे गर्मी को अवशोषित करता है और धीरे-धीरे उसे छोड़ता है। इसलिए, यहाँ का तापमान गर्म और आर्द्र रहता है, और यहाँ मानसून का मौसम भी महत्वपूर्ण होता है।
- दिल्ली : यह समुद्र, पर्वत और रेगिस्तान से दूर स्थित है। यहाँ गर्मियों में गर्मी, सर्दियों में ठंड और विभिन्न ॠतुएँ होती हैं। जलवायु इन भौगोलिक कारकों पर निर्भर करती है।
- पणजी : यह अरब सागर के पास है। यहाँ भी समुद्र की गर्मी धीरे-धीरें अवशोषित होती है, जिससे यहाँ का तापमान गर्म रहता है और मानसून के दौरान भारी वर्षा होती है।
- जयपुर : यह रेगिस्तान में स्थित है। यहाँ गर्म और शुष्क गर्मियाँ होती हैं और सर्दियाँ हल्की होती हैं। यहाँ वर्षा भी कम होती है।
प्रश्न 4.
भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को प्रदर्शित कीजिए।
- गर्मियों और सर्दियों में पवनें कहाँ चलती हैं, इसके प्रतीक लगाइए।
- मानसून के दौरान पवनों की दिशा दिखाइए।
उत्तर:

- भारत के मानचित्र पर गर्मी और सर्दी के मानसून चक्र को दर्शाने के लिए हमें पवनों की दिशा को समझना होगा।
- गर्मी के मौसम में, मानसून की पवनें उत्तर पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती हैं।
- सर्दी के मौसम में, पवनें दक्षिण-पश्चिम से उत्तर: पूर्व की ओर चलती हैं।
नोट-मानचित्र पर इन पवनों की दिशा को तीरों से दिखाया गया है। आपको ध्यान से मानचित्र का अध्ययन करना चाहिए और तीरों की दिशा को याद रखना चाहिए।
प्रश्न 5.
भारत में कृषि और मौसम से जुड़े त्योहारों (जैसेबैसाखी, ओणम) को दिखाते हुए एक रंगीन पोस्टर बनाड़ए। इन त्योहारों की तस्वीरें या रेखाचित्र लगाइए।
उत्तर:

प्रश्न 6.
कल्पना कीजिए कि आप भारत में एक किसान हैं। बरसात के मौसम के लिए आप कैसे तैयारी करेंगे? इस बारे में डायरी में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
डायरी प्रविष्टि : बरसात के मौसम की तैयारी
तारीख : 1 जून, 20 xx
जैसे ही बरसात का मौसम नजदीक आता है, मैं मानसून बुलेटिन से संपर्क में रहूँगा। मैं फसलों को मानसून की स्थिति और अपनी सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार उगाऊँगा। सबसे पहले, मैं मिट्टी की जाँच करूँगा ताकि यह सुनिश्चित कर सकूँ कि यह बारिश को अच्छे से अवशोषित कर सके। मैं चावल और अन्य फसलें लगाऊँगा जो गीले वातावरण में अच्छी तरह से बढ़ती हैं। इसके अलावा, मैं उचित जल निकासी की व्यवस्था करूँगा ताकि पानी जमा न हो, क्योंकि इससे फसलों को नुकसान हो सकता है।
मैं सभी कृषि उपकरणों की स्थिति और उपलब्धता की जाँच करूँगा। इसके साथ ही, मैं बीज और खाद इकट्ठा करूँगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे बारिश शुरू होने पर लगाने के लिए तैयार हों। मैं उत्साहित हूँ, क्योंकि बारिश न केवल फसलों को पोषण देती है, बल्कि इस वर्ष भरपूर फसल की आशा भी लाती है!
सादर,
भारत का एक किसान
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प्रश्न 7.
किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे- चक्रवात, बाढ़ भूस्खलन या दावानल) की पहचान कीजिए और एक छोटा निबंध लिखिए, जिसमें इसके कारण और प्रभाव सम्मिलित हों। ऐसे सुझाव दीजिए, जो व्यक्ति, समुदाय और सरकार को इस आपदा के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
उत्तर:
चक्रवात : कारण और प्रभाव-
चक्रवात एक शक्तिशाली तूफान है, जिसमें तेज हवाएँ और भारी बारिश होती है। यह गर्म समुद्री जल के ऊपर बनते हैं, जब नम हवा ऊपर उठती है और निम्न दबाव का क्षेत्र बनाती है। भारत में, चक्रवात अक्सर मौसमी परिवर्तनों के कारण होते हैं, विशेषकर मानसून के दौराना चक्रवात के प्रभाव बहुत विनाशकारी हो सकते हैं। ये जीवन की हानि, घरों का नाश, और सड़कें तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके अलावा, चक्रवात बाढ़, मिट्टी का कटाव, और समुदायों का विस्थापन भी कर सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं।
प्रभाव कम करने के उपाय :
- चक्रवात के प्रभाव को कम करने के लिए, व्यक्तियों को आपातकालीन सामान तैयार करनी चाहिए और मौसम की जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।
- समुदायों को आपदा प्रतिक्रिया योजनाएँ विकसित करनी चाहिए और नियमित अभ्यास करना चाहिए।
- सरकार को पूर्व चेतावनी प्रणाली में निवेश करना चाहिए, आधारभूत संरचनाओं को मजबूत बनाना चाहिए, और निर्माण नियमों को लागू करना चाहिए ताकि संरचनाएँ गंभीर मौसम का सामना कर सकें।
- इन उपायों को अपनाकर, हम चक्रवातों के खिलाफ अपनी तैयारी बढ़ा सकते हैं।
भारत की जलवायु Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 3 Question Answer
महत्वपूर्ण प्रश्न? (पृष्ठ 45)
प्रश्न 1.
भारतीय जलवायु को कौन-कौन से तत्व विविध बनाते हैं ?
उत्तर:
भारत की जलवायु कई तत्वों से मिलकर बनती है, जो इसके विशाल आकार और विविध भौगोलिक संरचना के कारण है। इसमें पहाड़, मरस्थल, पठार, मैदानी क्षेत्र और तटीय क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न अक्षांश और ऊँचाई के कारण अलग-अल्नग मौसम प्रतिरूप बनते हैं। उदाहरण के लिए, हिमालय उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं को रोकता है, जबकि थार मरुस्थल पश्चिम में शुष्क स्थिति को प्रभावित करता है। तीनों ओर का समुद्र नमी लाता है और भारी वर्षा करता है। इस मिश्रण के कारण देशभर में त्रिभिन्न जलवायु होती हैं, जैसेगर्मी, सर्दी. बसंत, बारिश और शरद् ऋतु।
प्रश्न 2.
मानसून क्या है? यह कैसे बनता है?
उत्तर:
मानसून एक मौसमी पवन है जो भारत में भारी वर्षा लाता है, जो कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह भूमि और समुद्र के बीच तापमान के अंतर का कारण बनता है। गर्मियों में, भूमि समुद्र की तुलना में तंजी से गर्म होती है, जिससे भूमि पर निम्न दबाव बनता है। गर्म हवा समुद्र की ओर जाती है और समुद्र से आर्द्र हवा भूमि की ओर आती है। इससे वर्षा होती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर जून के आसपास आता है।
प्रश्न 3.
जलवायु का समाज, संस्कृति और आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
जलवायु का समाज, संस्कृति और आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भारत में, कृषि मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। यदि बारिश कम होती है, तो इससे खाद्य संकट और महंगाई बढ़ सकती है. जिससे लोगों की आय और रोजगार पर असर पड़ता है।
संस्कृति में, त्योहार अक्सर मौसमी बदलावों का जश्न मनाते हैं, जैसे फसल के त्योहार। जब जलवायु में बदलाव होता है, तो ये त्योहार भी प्रभावित हो सकते हैं।
प्रश्न 4.
जलवायु की समझ हमें प्राकृतिक आपदा के लिए तैयार रहने में किस प्रकार सहायता करती है ?
उत्तर:
जलवायु की समझ हमें प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार रहने में बहुत मदद करती है। जब हम मौसम के प्रतिरूप और संभावित खतरों को समझते हैं, तो हम पहले से ही तैयार हो सकते हैं। जैसे, यदि हमें पता है कि कब चक्रवात, बाढ़ या भारी बारिश आ सकती है, तो हम सुरक्षित स्थानों पर जा सकते हैं या अपनी संपत्ति को मजबूत कर सकते हैं।
इस ज्ञान से हम कृषि, बाहरी कार्यक्रमों और जल संसाधनों की योजना भी बना सकते हैं।
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प्रश्न 5.
जलवायु परिवर्तन क्या है? इसके परिणाम क्या-क्या होते हैं ?
उत्तर:
जलवायु परिवर्तन का अर्थ है किसी क्षेत्र या स्थान में लंबे समय तक मौसम के प्रतिरूप में बदलाव। इसके परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि. चरम मौसम की घटनाएँ, और वर्षा के प्रतिरूप में बदलाव होते हैं।
इन बदलावों के कारण सूखा, बाढ़, और कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोग पानी, भोजन, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर सकते हैं। वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण बर्फ के हिमनद तेजी से पिघलते हैं, जिससे समुद्र स्तर बढ़ता है, और तटीय क्षेत्रों को खतरा होता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 47)
प्रश्न 1.
आपकी प्रिय ऋतुएँ कौन-सी हैं? अपने कारणों सहित इस पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए।
उत्तर:
मेरी प्रिय ऋतु वसंत है। इस ऋतु में फूल खिलते हैं और मौसम बहुत सुहावना होता है। ठंडी सर्दी के बाद यह समय बहुत ताजगी भरा लगता है। पेड़-पौधे हरे-भरे और रंग-बिरंगे हो जाते हैं, और हवा में फूलों की मीठी खुशबू फैल जाती है। वसंत में कई त्योहार भी मनाए जाते हैं, जैसे बैसाखी, जो नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। यह ऋतु खुशी और उम्मीद लेकर आती है, जिससे हमें प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने का मौका मिलता है।
प्रश्न 2.
आपके क्षेत्र में ऋतुओं से जुड़ी विशेष घटनाओं का पता लगाने के लिए तीन या चार विद्यार्थियों के समूह में चर्चा कीजिए। इनसे संबंधित गीत, उत्सवों से संबंधित भोजन, विभिर्न ऋतुओं से संबंधित प्रचलित प्रथाएँ आदि को लिखिए और कक्षा के साथ साझा कीजिए।
उत्तर:

प्रश्न 3.
क्या आप जानते हैं कि आपके क्षेत्र में कौन-से वृक्ष शीत ऋतु के आगमन से पूर्व अपना रंग बदलते हैं? क्या ऐसे वृक्ष हैं, जो इस समय अपने पत्ते गिरा देते हैं? आ।फके विचार में ऐसा क्यों होता है? इन वृक्षों के स्थानीय नामों का पता लगाइए और उनके विषय में लिखिए।
उत्तर:

पुनरावलोकन करें (पृष्ठ 49)
प्रश्न:
विषुवत रेखा के आस-पास की जलवायु बहुत गर्म होती है लेकिन अक्षांश बढ़ने के साथ-साथ यह समशीतोष्ण और फिर ठंडी या बर्फीली हो जाती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
जलवायु में बदलाव का मुख्य कारण अक्षांश है। भूमध्य रेखा के आस-पास सूर्य की किरणें मीधी पड़ती हैं, जिससे वहाँ का तापमान बहुत गर्म होता है। जैसे-जैसे हम उत्तर या दक्षिण ध्रुव की ओर बढ़ते हैं, सूर्य की किरगों तिरूबी हो जाती हैं। इससे ऊर्जा एक बड़े क्षेत्र में फैल जाती है, जिससे तापमान ठंडा होता है। इसलिए. भूमध्य रेखा के पास जलवायु गर्म और ध्रुवों के पास ठंडी या बर्फीली होती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 51)
प्रश्न:
उधगमंडलम (ऊटी) एवं कोयंबटूर लगभग समान अक्षांशों पर स्थित हैं। ऊटी में गर्मी का तापमान 10-25 डिग्री सेल्सियस जबकि कोयंबटूर में 25-38 डिग्री सेल्सियस होता है। इन दो स्थानों पर तापमान में यह अंतर क्यों है? इस बारे में आप क्या सोचते हैं?
उत्तर:
उधगमंडलम (ऊटी) और कोयंबटूर दोनों लगभग समान अक्षांश पर हैं, लेकिन तापमान में अंतर इसलिए है क्योंकि ऊटी की ऊँचाई अधिक है। ऊँचाई बढ़ने पर वायुमंडलीय दबाव कम होता है, जिससे हवा ठंडी होती है। ऊटी में तापमान 10-25 डिग्री संल्सियस है. जबकि कोयंबटूर में यह 25-38 डिग्री सेल्सियस होता है।
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आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 56)
प्रश्न:
अपने क्षेत्र में वर्षा, कोहरे, हिम या सहिमवृष्टि के बारे में ऐसे स्थानीय ज्ञान की एक सूची बनाइए।
उत्तर:
आपके क्षेत्र में वर्षा, कोहरे, हिम या सहिमवृष्टि के बारे में स्थानीय ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं:
- वर्षा : किसान अक्सर फसलें तब बोते हैं जब वं कुछ विशेष फूलों को खिलतं हुए देखतं हैं. जो बारिश के मौसम की शुरुआत का संकेत देने हैं।
- जब पक्षी आसमान में नीर्चा उड़ान भरते हैं, तो इसका मतलब है कि भारी बारिश या तूफान आने वाला है।
- यदि चींटियाँ अपने बिल के चारों ओर ऊँचे मिट्टी के ढेर बनाती हैं, तो बारिश नजदीक है।
- जब आसमान गहरा ग्रे हो जाता है, तो इसका मतलब है कि भारी बारिश आने वाली है।
- कोहरा : सुबह का घना कोहरा आमताँर पर एक धूप वाले दिन का संकेत देता है।
- हिम : सर्दियों में, यदि जानवर अधिक सक्रिय होते हैं, तां यह एक आने वाले हिमपात का संकेत हो सकता है।
- सहिमवृष्टि : जब अचानक हवा तेज हो जाती है और काले बादल इकट्टा होते हैं, तो यह अक्सर सहिमवृष्टि से पहले होता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 56)
प्रश्न:
अपने दादाजी-दादीजी या पड़ोस के वृद्धजनों से संपर्क कीजिए। उनसे उनके बचपन और युवावस्था में मनाए जाने वाले पारंपरिक त्योहारों और नृत्यों के बारे में पूछिए, जो उन्हें याद हैं, विशेषकर जो कृषि और वर्षा से संबंधित थे। वे किन रीति-रिवाजों में भाग लेते थे?
उत्तर:
- पोंगल (तमिलनाड़ु) : यह त्योहार फसल कटाई के बाद मनाया जाता है। लोग सूर्य देवता को धन्यवाद देने के लिए पारंपरिक नृत्य करते हैं और पूजा करते हैं।
- भोगाली बिहू (असम) : यह त्योहार फसल के मौसम का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। इसमें लोग खाने-पीने और नृत्य करने का आनंद लेते हैं।
- लोहड़ी (पंजाब और उत्तर भारत) : यह त्योहार फसल की शुरुआत पर मनाया जाता है। लोग आग के चारों ओर इकट्ठा होकर गाते और नृत्य करते हैं।
- ओणम (केरल) : यह त्योहार मानसून के अंत में मनाया जाता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 60)
प्रश्न:
क्या आपने कभी बाढ़ देखी है अथवा इसके विषय में पढ़ा है? भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए। समूह में चर्चा कीजिए कि बताए गए राज्यों में बाढ़ क्यों आती है?
उत्तर:
बिल्कुल, बाढ़ एक गंभीर समस्या है जो भारत के कई राज्यों में होती है। मैंने टीवी पर बाढ़ के दृश्य देखे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल और असम जैसे राज्यों में बाढ़ मुख्य रूप से मानसून के दौरान भारी वर्षा के कारण आती है।
आंध्र प्रदेश में, चक्रवातों के कारण जो बंगाल की खाड़ी से भारी वर्षा लाते हैं, बाढ़ होती है। जब भूमि अधिक पानी को अवशोषित नहीं कर पाती, तो नदियाँ और झीलें भर जाती हैं और बाढ़ का कारण बनती हैं। हिमालयी क्षेत्रों में, जब हिमनद पिघलते हैं, तो इससे झीलें भी भर जाती हैं, जिससे बाढ़ आ सकती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 62)
प्रश्न 1.
चित्र 3.15 को देखिए। आपदा के प्रकार को पहचानिए और लोगों, पड़े-पौधों, जानवरों और आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

प्रश्न 2.
चार या पाँच के समूहों में ऊपर वर्णित प्रत्येक आपदा में प्राकृतिक और मानवीय कारणों की पहचान कीजिए। अपने निष्कर्षों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
आइए हम चार प्रमुख आपदाओं- जंगल की आग. चक्रवात, बाढ़, और भूस्खलन के कारणों का विश्लेषण करें।
(i) जंगल की आग :
- प्राकृतिक कारण : आकाशीय बिजली सूखी जगहों पर आग लगा सकती है। सूखा मौसम और उच्च तापमान आग के फैलने में मदद करते हैं।
- मानवीय कारण : कभी-कभी लोग कैम्पिंग करते समय या सिगरेट फेंकने से आग लगाते हैं। कृषि के लिए भूमि साफ करने से भी जगल की आग लग सकती है।
(ii) चक्रवात :
- प्राकृतिक कारण : चक्रवात गर्म समुद्री जल पर कम वायुमंडलीय दबाव के कारण बनते हैं, जो एक प्राकृतिक मौसम की घटना है।
- मानवीय कारण : जलवायु परिवर्तन मानव गतिविधियों के कारण चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा सकता है।
(iii) बाढ़ :
- प्राकृतिक कारण : भारी वर्षा बाढ़ का कारण बन सकती है, खासकर जब जमीन पहले से ही संतृप्त हो या तूफान हो रहे हों।
- मानवीय कारण : खराब शहरी योजना, जैसे बाढ़ के मैदानों परं निर्माण या जलमार्गों को अवरुद्ध करना, बाढ़ को बढ़ा सकता है।
(iv) भूस्खलन :
- प्राकृतिक कारण : भारी बारिश, भूकंप, या ज्वालामुखी गतिविधि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन को ट्रिगर कर सकती है।
- मानवीय कारण : वनों की कटाई और ढलानों पर निर्माण मिट्टी को अस्थिर कर सकता है और भूस्खलन का खतरा बढ़ा सकता है।
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प्रश्न 3.
इन्हीं समूहों में उन उपायों पर भी चर्चा कीजिए जो उपर्युक्त आपदाओं से बचने में सहायता कर सकते हैं।
उत्तर:
आपदाओं सं बचने क्रे लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जैस:
(i) जंगल की आग :
- आग को फैलने से रोकने के लिए वन में घास और झाड़ियाँ साफ करके आग को रोकथाम की जाती है।
- समुदायों को आग सुग्का के बारे में शिक्षित करना और उन्हें जंगलों में आग न लगाने के महत्व को समझाना आवश्यक है।
- अतिरिक्त सूखी वनस्पति को कम करने के लिए नियंत्रित जलने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
(ii) चक्रवात :
- चक्रवातों की चेतावनी देने के लिए बेहतर प्रणाली विकसित करनी चाहिए ताकि लोग समय पर सतर्क हो सकें।
- मजबूत बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना चाहिए जो तेज हवाओं और भारी बारिश का सामना कर सके।
- चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित आश्रय और निकासी योजनाएँ बनानी चाहिए।
(iii) बाढ़ :
- बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए बांध और लेवी का निर्माण करना चाहिए।
- जल निकासी प्रणाली को बनाए रखना और साफ करना आवश्यक है ताकि पानी आसानी से बह सके।
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण से बचने के लिए बेहतर भूमि उपयोग योजना लागृ,करनी चाहिए।
(iv) भूस्खलन :
- ढलानों पर पेड़ और वनस्पति लगाना चाहिए ताकि मिट्टी को मजबूती मिले।
- भूस्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी करनी चाहिए और स्थानीय समुदायों को चेतावनी देनी चाहिए।
- पहाड़ी क्षेत्रों से पेड़ काटने या वनस्पति हटाने से बचना चाहिए।