Teachers guide students to use Exploring Society India and Beyond Class 7 Solutions and Class 7 Social Science Chapter 1 Question Answer Hindi Medium भारत की भौगोलिक विविधता for quick learning.
Class 7 Social Science Chapter 1 Question Answer in Hindi भारत की भौगोलिक विविधता
भारत की भौगोलिक विविधता Question Answer in Hindi
कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान पाठ 1 के प्रश्न उत्तर भारत की भौगोलिक विविधता
प्रश्न और क्रियाकलाप (पृष्ठ 25)
प्रश्न 1.
आपकी राय में भारत की दो महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं? आपके विचार में वे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
भारत की दो महत्वपृष्ण भौगालिक विशेपताएँ हिमालय और प्रायद्वीपीय पठार हैं।
- हिमालय : यह पर्वत श्रृंख्ला भारत को ठंडी हवाओं से बचाती है और जलवायु को प्रभावित करती है। यहाँ की बर्फ पिघलने से नदियाँ बनती हैं, जो कृषि और जीवन के लिए आवश्यक जल प्रदान करती हैं।
- प्रायद्वीपीय पठार : यह क्षेत्र कृषि के लिए बहुत उपयुक्त है। यहाँ की नदियाँ जैसे गोदावरी और कृष्णा, फसल उगाने में मदद करती हैं। इसके समतल भू-भाग पर बस्तियाँ बसाई जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र जनसंख्या के लिए महत्वपुर्ण बनता है।
प्रश्न 2.
आपके विचार में यदि हिमालय नहीं होता तो भारत का स्वरूप कैसा होता? अपनी कल्पना को व्यक्त करने के लिए एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए अथवा चित्र द्वारा अभिव्यक्त कीजिए।
उत्तर:
यदि हिमालय नहीं होता, तो भारत का स्वरूप बहुत अलग होता। हिमालय की ऊँचाई और उसके द्वारा बनाए गए जलवायु के कारण, उत्तर के मैदान अधिक विस्तृत होते। इससे भारत का तापमान गर्म हो सकता था। गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ अलग दिशा में बह सकती थीं, जिससे कृषि और बस्तियों पर असर पड़ता।
बिना पहाड़ों के, मानसून की बारिश भी कम हो सकती थी, जिससे जल आपूर्ति और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता। इस तरह, भारत की भौगोलिक विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि में कमी आती। कुल मिलाकर, हिमालय का होना भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3.
अध्याय में दी गई जानकारी के आधार पर बताइए कि भारत को ‘लघु महाद्वीप’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारत को ‘लघु महाद्वीप’ कहा जाता है क्योंकि इसकी भौगोलिक विविधता बहुत विशाल है। यहाँ पर्वत, मैदान, मरुस्थल और तटीय क्षेत्र हैं, जिनमें अलग-अलग जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र पाए जाते हैं। हिमालय, दक्कन पठार और गंगा तथा ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ इस विविधता में योगदान करती हैं। यह विविधता विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और जीवनशैली को एक ही देश में फलने-फूलने का अवसर देती है, जैसे कि एक महाद्वीप में होता है।
प्रश्न 4.
भारत की किसी प्रमुख नदी को मानचित्र में देखिए। इसका उद्गम कहाँ है और यह समुद्र में कहाँ मिलती है? इसकी यात्रा के दौरान लोग इस नदी का विभिन्न प्रकार से कैसे उपयोग करते हैं? अपनी कक्षा में इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
भारत की प्रमुख नदियों में से एक गंगा नदी है, जो हिमालय से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- उद्गम स्थान : गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड राज्य के गंगोत्री ग्लेशियर से होता है, जिसे गौमुख भी कहा जाता है। यहाँ से यह नदी धीरे-धीरे नीचे की ओर बहती है।
- समुद्र में मिलना : गंगा नदी अंततः बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- उपयोग :
- पीने का पानी : ग्रामीण क्षेत्रों में कई समुदाय गंगा पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि यह उन्हें पीने का पानी प्रदान करती है।
- सिंचाई : किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए गंगा का उपयोग करते हैं, जो फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
- परिवहन : गंगा नदी सामान और लोगों के परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ सड़कें नहीं हैं।
- धार्मिक प्रथाएँ : गंगा को पवित्र माना जाता है, और लोग इसके किनारे पर स्नान, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
- पर्यटन : गंगा की सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के कारण पर्यटक यहाँ आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
- मछली पकड़ना : स्थानीय मछुआरे गंगा से मछलियाँ पकड़ते हैं, जो उनके लिए भोजन और आय का स्रोत है।
प्रश्न 5.
भारत के दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारत के दक्षिणी भाग को प्रायद्वीपीय पठार कहा जाता है क्योंकि यह एक समतल भू-भाग है जो आस-पास के क्षेत्रों से ऊँचा है। यह क्षेत्र तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है: पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में भारतीय महासागर। इस क्षेत्र में दक्कन पठार शामिल है, जो पश्चिमी और पूर्वी घाटों से घिरा हुआ है। यह भूगोल और पारिस्थितिकी में अद्वितीय है।
प्रश्न 6.
इस अध्याय में वर्णित यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त कौन-से धरोहर स्थल आपको अधिक रूचिकर लगे? इसके रोचक तथ्यों का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इस अध्याय में वर्णित यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त धरोहर स्थलों में सुंदरवन सबसे अधिक रुचिकर है। यह एक अनोखा डेल्टा है, जो रॉयल बंगाल टाइगर का घर है। यहाँ की जैव विविधता अद्भुत है, जिसमें नदियाँ, समुद्र और भूमि के पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। सुंदरवन के मैंग्रोव न केवल तटरेखा की सुरक्षा करते हैं, बल्कि विभिन्न वन्यजीवों का भी समर्थन करते हैं। यह क्षेत्र प्रकृति और स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 7.
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक और राजनीतिक मानचित्रों को देखिए। आप अभी जिस क्षेत्र में है, उसकी पहचान कीजिए। आप भारत की किस भौतिक विशेषता का उपयोग इस स्थान का वर्णन करने के लिए करेंगे?
उत्तर:
भारत के भौतिक और राजनीतिक मानचित्रों को देखकर, मैं मध्य प्रदेश में रहता हूँ, जो भारत के मध्य भाग में स्थित है। यहाँ की भौतिक विशेषता ‘प्रायद्वीपीय पठार’ है। यह पठार समतल है और इसके चारों ओर पश्चिमी और पूर्वी घाट हैं। यह हमारे राज्य की एक महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषता है, जो यहाँ की जलवायु और कृषि पर भी प्रभाव डालती है।
प्रश्न 8.
भारत में खाद्य संरक्षण के उपाय जगह-जगह पर भिन्न हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप होते हैं। ‘कक्षा परियोजना’ के अंतर्गत खाद्य संरक्षण के विभिन्न उपायों के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए। (संकेतमौसमी (ऋतु विशेष में उपलब्ध) सब्जियों को सुखाकर उन्हें अन्य ऋतुओं में उपयोग हेतु सुरक्षित रखना।)
उत्तर:
भारत में खाद्य संरक्षण के उपाय विभिन्न हैं और ये स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विकसित किए गए हैं। यहाँ कुछ प्रमुख उपाय दिए गए हैं:
- सुखाना : सब्जियों और फलों को धूप में सुखाया जाता है, जिससे उनकी शेल्फ-लाइफ बढ़ जाती है। यह विशेष रूप से फसल के मौसम में किया जाता है, ताकि अधिक मात्रा में खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
- अचार बनाना : मसालों और सिरके का उपयोग करके फलों और सब्जियों का अचार बनाया जाता है। इससे न केवल स्वाद बढ़ता है, बल्कि ये लंबे समय तक सुरक्षित भी रहते हैं।
- किण्वन : दही और इडली का बैटर जैसे खाद्य पदार्थों का किण्वन किया जाता है। यह न केवल उन्हें संरक्षित करता है, बल्कि उनके पोषण मूल्य को भी बढ़ाता है।
- धुआँ देना : मछलियों और मांस को धुएँ में पकाया जाता है, जिससे उनकी खराब होने की संभावना कम होती है और स्वाद भी बढ़ता है।
ये सभी विधियाँ भारतीय संस्कृति की समृद्धता और स्थानीय पर्यावरण के प्रति अनुकूलन को दर्शाती हैं।
प्रश्न 9.
इतने अलग-अलग भौतिक स्वरूपों (पर्वतीय, मरुस्थलीय, मैदानी, तटीय इत्यादि) के साथ भारत एक विशाल देश है। भारत की भौगोलिक स्थिति ने लोगों को एकजुट रहने में किस प्रकार सहायता की है। इसके बारे में आपका क्या विचार है?
उत्तर:
भारत की भौगोलिक विविधता ने इसे एक विशाल देश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहाँ विभिन्न भौतिक स्वरूप जैसे पर्वतीय, मरूस्थलीय, मैदानी और तटीय क्षेत्र हैं।
- प्राकृतिक बाधाएँ : हिमालय पर्वत उत्तर में एक प्राकृतिक दीवार की तरह कार्य करते हैं, जो भारत को आक्रमणों से सुरक्षित रखते हैं। इससे विभिन्न संस्कृतियों का विकास शांतिपूर्वक हो पाता है।
- नदी प्रणालियाँ : गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियाँ कृषि के लिए जल प्रदान करती हैं। ये नदियाँ लोगों को साझा संसाधनों और व्यापार के माध्यम से एकजुट करती हैं।
- संस्कृतिक आदान-प्रदान : विभिन्न क्षेत्रों की समृद्ध परंपराएँ एक-दूसरे के साथ मिलकर त्योहारों. भाषाओं और व्यंजनों के माध्यम से एकता को बढ़ावा देती हैं।
- साझा पहचान : भिन्नताओं के बावजूद, साझा इतिहास और भौगोलिक स्थिति एक मजबूत राष्ट्रीय पहचान बनाते हैं, जिससे भारत एक एकीकृत देश बनता है।
भारत की भौगोलिक विविधता Class 7 Question Answer in Hindi
Class 7 Samajik Vigyan Chapter 1 Question Answer
महत्वपूर्ण प्रश्न? (पृष्ठ 1)
प्रश्न 1.
भारत की कुछ प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
हिमालय पर्वत : उत्तर में स्थित हिमालय पर्वत, जो बर्फ से ढके हैं, भारत की सबसे ऊँची पर्वत शृंखला हैं। ये न केवल प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं, बल्कि जलवायु को भी प्रभावित करते हैं।
थार मऊस्थल : पश्चिम में थार मरुस्थल है, जो गर्म और शुष्क है। यहाँ की रेत के टीलों और ऊबड़-खाबड़ भू-भाग ने इसे एक विशेष पहचान दी है।
उपजाऊ मैदान : भारत के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों द्वारा सिंचित उपजाक मैदान हैं, जो कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये मैदान विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए अनुकूल हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
प्रश्न 2.
भारत की भौगोलिक विविधताएँ हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
उत्तर:
कृषि और खाद्य विविधता : विभिन्न जलवायु और भौगोलिक संरचनाएं हमें विभिन्न प्रकार की फसलें उगाने की अनुमति देती हैं। इससे हमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ मिलते हैं, जो हमारे आहार को समृद्ध बनाते हैं।
जल संसाधन : नदियाँ हमारं जीवन के लिए आवश्यक जल प्रदान करती हैं, जो पीने और कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये जल स्रोत हमारं जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाते हैं।
संस्कृति और जीवनशैली : भौगोलिक विविधता हमारे रीति-रिवाजों, परंपराओं और जीवनशैली को भी आकार देती है। विभिन्न क्षेत्रों में लोग अपनी भौगोंलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग तरीके से जीते हैं. जिससं भारत की संस्कृति में विविधता आती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 2)
प्रश्न:
इस पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के मानचित्र का अवलोकन कीजिए। आपको इसमें क्या-क्या दिख्राई दे रहा है? क्या आपको पिछली कक्षा मे पढ़ाई गई विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियाँ- पर्वत, पठार और मैदान स्मरण हैं? आप मानचित्र पर कौन-कौन सी भू-आकृतियों को पहचान सकते हैं? मानचित्र पर अलग-अलग रंगों का क्या तात्पर्य है? (संकेत- मानचित्र पर अंकित संकेत सूची प्रत्येक क्षेत्र की ऊँचाई को दर्शाती है।)
उत्तर:
भारत के मानचित्र का अवलांकन करने पर हमें विभिन्न भौगोलिक आकृतियाँ दिखाई देती हैं, जैसे पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल, नदियाँ, समुद्र, महासागर और द्वीप। हम मानचित्र पर पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल जैसी भौगोलिक आकृतियों को पहचान सकते हैं।
मानचित्र पर विभिन्न रंगों का तात्पर्य ऊँचाई से है। उदाहरण के लिए, गहरे भूरे रंग ऊँचे पर्वतों को दर्शाते हैं, जबकि पीला रंग मैदानों को और गहरा हरा रंग पठारों को दर्शाता है। नीला रंग जल निकायों, जैसे नदियाँ, झीलें और समुद्र को दिख्वाता है, जबकि सफेद रंग बर्फ से न्ढके पर्वतों को दर्शांता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 3)
प्रश्न 1.
क्या आपको अक्षांश और देशांतर रेखाओं पर अपना पाठ याद है? मानचित्र को देखिए। क्या आप बता सकते हैं कि भारत लगभग किन अक्षांशों और देशांतर रेखाओं के मध्य स्थित है?
उत्तर:
भारत लगभग 8° उत्तरी अक्षांश से लेकर 37° उत्तरी अक्षांश और 68° पूर्वी देशांतर से लेकर 97° पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।
प्रश्न 2.
भारत के भौतिक मानचित्र पर उपर्युक्त विशेषताओं की पहचान कीजिए।
नोट- छात्र स्वयं करें।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 6)
प्रश्न:
क्या आप हिमालय के विभिन्न भागों में स्थित राज्यों के नाम ज्ञात कर सकते हैं? इस अभ्यास के लिए भौतिक और राजनीतिक दोनों मानचित्रों की सहायता लीजिए।
उत्तर:
हिमालय के विभिन्न भागों में स्थित राज्यों के नाम जानना बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ हम इसे तीन मुख्य बिंदुओं में समझते हैं:
उत्तरी हिमालयी राज्य : उत्तरी हिमालय में जम्मू और कश्मीर तथा हिमाचल प्रदंश जंसं राज्य स्थित हैं। ये राज्य हिमालय की ऊँचाई पर हैं और यहाँ की जलवायु ठंडी हांती है।
पूर्वी हिमालयी राज्य : पूर्वी हिमालय में उत्तराखंड और सिक्किम जैसे राज्य हैं। उत्तराखंड में कई प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं. जैसे कि हरिद्वार और ॠषिकेश। सिक्किम एक छोटा लेकिन बहुत सुंदर राज्य है, जहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता अद्वितीय है।
सुदूर पूर्व में : पूर्वी हिमालय के और आगे हम पश्चिम बंगाल और अरुणाचल प्रदंश को देख सकते हैं। पश्चिम बंगाल का दार्जिलिग क्षेत्र अपने चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में अद्भुत पर्वत श्रृंखलाएँ और वन्यजीव हैं।
इसे अनदेखा न करें (पृष्ठ 11)
प्रश्न:
गर्मियों में सूखने की अपेक्षा ब्रह्मपुत्र नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है! क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
गर्मी के मौसम में ब्रह्मपुत्र नदी में जल की मात्रा बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण हिमालय की बर्फ का पिघलना है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, पहाड़ों पर बर्फ और बर्फ के टुकड़े पिघलने लंगते हैं। यह पिघला हुआ पानी नदी में बहता है, जिससे नदी का जल स्तर बढ़ता है। इसलिए, गर्मियों में ब्रह्मपुत्र नदी में अधिक पानी होता है, जिससे यह बड़ी और तेज बहती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 11)
प्रश्न:
मैदानी क्षेत्रों में प्रकाश के संकेंद्रण पर ध्यान दीजिए। इस संकेंद्रण का क्या कारण हो सकता है?
उत्तर:
मैदानी क्षेत्रों में प्रकाश के संकेंद्रण का मुख्य कारण यहाँ की घनी जनसंख्या और शहरी विकास है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में उपजाऊ मिट्टी और कृषि की प्रचुरता के कारण, यहाँ लोग अधिक संख्या में रहते हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 12)
प्रश्न:
रेत के टीले का आकार कैसा होता है? पर्वत चट्टानों से बने होते हैं और उनका आकार स्थिर होता है। आपको क्यों लगता है कि रेत के टीलों का आकार भी इनके समान होता है, जबकि वे केवल रेत से बने होते हैं?
उत्तर:
रेत के टीले का आकार आमतौर पर लहरदार और वक्र होता है। ये पहाड़ों की तरह ठोस और स्थिर नहीं होते। हवा के प्रभाव से रेत के टीले अपना आकार बदलते रहते हैं। हवा रेत को इधर-उधर ले जाती है, जिससे उनके अद्वितीय आकार बनते हैं। समय के साथ, ये टीले अक्सर एक समान आकार में स्थिर हो जाते हैं, लेकिन उनका मूल आकार हमेशा बदलता रहता है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 14)
प्रश्न:
आइए, मानचित्र पर वापस चलते है। थार मरुस्थल से पूर्व की ओर धीरे-धीरे अपने रास्ते को देखिए। क्या आपको अरावली की पहाडियाँ दिख रही हैं?
उत्तर:
हाँ, जब हम मानचित्र पर थार मरुस्थल से पूर्व की ओर बढ़ते हैं. तो अरावली पहाड़ियों का दृश्य हमें स्पष्ट रूप से दिखाई दता है। यह एक महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषता है जो इस क्षेत्र की पहचान बनाती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 15)
प्रश्न:
पाठ्यपुस्तक में दिए गए राजनीतिक मानचित्र को देखिए और उन राज्यों की पहचान कीजिए, जिनमें अरावली पर्वत शृंखला फैली हुई है। क्या आप इसमें दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात को देख सकते हैं?
उत्तर:
भारत के राजनीतिक मानचित्र में अरावली पर्वत शृंखला कई राज्यों में फैली हुई है। हाँ, इनमें प्रमुख रूप से राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली शमिल हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 16)
प्रश्न:
पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए और नदियों के प्रवाह की दिशा पर ध्यान दीजिए।
उत्तर:
- गंगा : यह नदी हिमालय से निकलती है, उत्तर से पूर्व की ओर बहती है और फिर दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- यमुना : यमुना भी हिमालय से निकलती है, उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है और गंगा में मिल जाती है।
- ब्रह्मपुत्र : यह नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है, पूर्व की ओर बहती है और फिर दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- नर्मदा : नर्मदा नदी विंध्य पर्वत से निकलती है, पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और अरब सागर में मिलती है।
- ताप्ती (तापी) : यह नदी सतपुड़ा पर्वत से निकलती है, पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और अरब सागर में मिलती है।
- महानदी : महानदी मध्य भारत से निकलती है, पूर्व की ओर बहती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- गोदावरी : यह नदी पश्चिमी घाट से निकलती है, पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है और बंगोल की खाड़ी में मिलती है।
- कृष्णा : कृष्णा नदी भी पश्चिमी घाट से निकलती है, पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
- कावेरी : कावेरी नदी पश्चिमी घाट से निकलती है, पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 17)
प्रश्न:
आदिवासी समुदाय मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्टू, तेलंगाना और गुजरात राज्यों में बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं। इस पुस्तक के अंत में दिए गए राजनीतिक मानचित्र में इन राज्यों की स्थिति का पता लगाइए और इन्हें भौतिक मानचित्र से जोड़ने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
- संथाल : मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार में पाए जाते हैं। ये समुदाय अपने अनूठे सांस्कृतिक परंपराओं और जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं।
- गोंड : मुख्यतः मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में निवास करते हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में भी छोटे समूह मिलते हैं।
- बैगा : मुख्यत: मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। इनके अलावा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी कुछ छोटे समूह हैं।
- भील : मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में फैले हुए हैं। भील समुदाय की अपनी विशेष परपराएँ और कला हैं।
- कोरकु : मुख्यतः मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में पाए जाते हैं। ये समुदाय भी अपनी अद्भुत संस्कृति और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 19)
प्रश्न 1.
अपने विद्यालय की मानचित्रावली (स्कूल एटलस) अथवा ‘भित्ति-मानचित्र’ को देखकर बंगाल की खाड़ी की ओर बहने वाली पाँच नदियों के नाम लिखिए। भारत के तटीय राज्यों का पता लगाइए और भारत के पश्चिमी तथा पूर्वी तटीय मैदानों के मध्य क्या-क्या अंतर हैं, इन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
बंगाल की खाड़ी की ओर बहने वाली प्रमुख नदियों में गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी शामिल हैं। ये नदियाँ अपने मार्ग में कई क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं और अंत में बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं। भारत के तटीय राज्यों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों में कई अंतर हैं। पश्चिमी तटीय मैदान संकरा और ऊँचाई में भिन्न है, जहाँ कई छोटी नदियाँ बहती हैं। यहाँ के मुहाने (एस्चुरी) भी छोटे होते हैं। जबकि पूर्वी तटीय मैदान चौड़ा है और यहाँ बड़ी नदियाँ जैसे गोदावरी और कृष्णा बहती हैं, जो धीरे-धीरे बहती हैं और उपजाऊ डेल्टाओं का निर्माण करती हैं।
प्रश्न 2.
क्या आप जानते हैं कि जब ये नदियाँ तटों के निकट अनेक धाराओं में विभाजित हो जाती हैं, तो इन्हें क्या कहा जाता है? कक्षा में अपने शिक्षक के साथ चर्चा करके पता लगाइए।
उत्तर:
जब नदियाँ तटों के निकट पहुँचकर कई धाराओं में विभाजित हो जाती हैं, तो इसे “डेल्टा निर्माण” कहा जाता है। डेल्टा क्षेत्र कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।