Reading Class 7 Hindi Notes Malhar Chapter 5 नहीं होना बीमार Summary in Hindi Explanation helps students understand the main plot quickly.
नहीं होना बीमार Class 7 Summary in Hindi
नहीं होना बीमार Class 7 Hindi Summary
नहीं होना बीमार का सारांश
यह कहानी एक बच्चे की है, जो स्कूल न जाने के लिए बीमारी का बहाना बनाता है। वह घर में लेटे-लेटे स्वादिष्ट भोजन और आराम की कल्पना करता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे ऊब, अकेलापन और भूख सताने लगती है। नानाजी-नानीजी उसकी बीमारी को गंभीरता से लेते हैं, जिससे बच्चे को इलाज के नाम पर कड़वी दवा और उपवास ही मिलता है। अंत में बच्चा समझ जाता है कि झूठ बोलकर बीमारी का बहाना बनाना समझदारी नहीं है।
नहीं होना बीमार Class 7 Summary in Hindi
प्रस्तुत कहानी “ नहीं होना बीमार ” प्रसिद्ध लेखक स्वयं प्रकाश द्वारा रचित है। इस कहानी में एक बच्चा अपनी नानीजी के साथ एक बीमार व्यक्ति को देखने अस्पताल जाता है । बालमन होने के कारण उसके मन में कुछ शरारत सूझती है और अपनी बीमारी का नाटक करता है। इसी का वर्णन कहानी में किया गया है। कहानी का सारांश इस प्रकार है-
एक दिन नानीजी अपने बीमार पड़ोसी सुधाकर जी से मिलने अस्पताल गईं। अपने साथ बच्चे को भी ले गईं। वहाँ एक बड़े से वार्ड में कई एक जैसे पलंग लाइन से लगे हुए थे। सब पर एक जैसी सफेद चादर और लाल कंबल थे। एक पलंग पर सुधाकर काका लेटे हुए थे। हमें देखकर सुधाकर काका अति प्रसन्न हो गए। नानीजी ने उनके सिर पर हाथ फेरा और उनके सिरहाने खड़ी हो गईं।

तभी सफेद कपड़ों में एक नर्स आई। नर्स ने नानीजी को देखकर अभिवादन में सिर हिलाया । नानीजी सुधाकर काका के लिए साबूदाने की खीर बनाकर लाई थीं। नर्स की सहमति से उन्होंने काका को चम्मच से खीर खिलाई। काका की ठाठ-बाट देखकर बच्चे के मन में शरारत सूझी। मन-ही-मन बच्चा सोचने लगा- “ काश! मैं भी बीमार पड़ जाता। ”

कुछ रोज बाद एक दिन बच्चे को स्कूल जाने का मन नहीं किया। उसने होमवर्क भी नहीं किया था। तुरंत दिमाग में शरारत सूझी और बीमार होने का नाटक किया। नानीजी के पूछने पर बीमार और पेट दुखने का बहाना बना लिया। नानीजी ने मुझे छूकर देखा और बोली – ” बुखार तो नहीं है । ” फिर उन्होंने मुझे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय बना दी। उधर से नानाजी भी आ गए और बोले, “ आज इसे कुछ खाने को मत देना। और उसके बाद दोनों चले गए। ”

अचानक मुझे भूख लगी। फल या साबूदाने की खीर मिलने की उम्मीद तो सुबह ही हत्या हो चुकी थी। अब तो मैं बुरी तरह फँस गया। किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था। इधर पेट में चूहा कूद रहा था। मैं सोचने लगा- ” बीमार होने का नाटक बहुत महँगा पड़ा।” भूख के कारण नींद भी नहीं आ रही थी। कोई खाने के लिए पूछ भी नहीं रहा था। उधर मुन्नू आम चूस रहा था। इधर मैं भूख से परेशान था। मैं जलन, गुस्से और कुढ़न में पाँव पटकता वापस बिस्तर में आ गया। मुझे अहसास हो गया। कि मुझे बीमार होने का झूठा नाटक नहीं करना चाहिए था। इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।
नहीं होना बीमार शब्दार्थ और टिप्पणी
पृष्ठ 57
ट्रैफिक – यातायात ।
नर्स – परिचारिका ।
पृष्ठ 58
ठाठ – शान।
होमवर्क – गृहकार्य ।
पृष्ठ 59
नब्ज – नाड़ी ।
थर्मामीटर – ताप – मापक यंत्र |
पृष्ठ 60
भगोना – खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाला बर्तन ।
आहट – पदचाप |
पंजीरी- आटे को घी में भूनकर उसमें धनिया, सोंठ, जीरा आदि मिलाकर बनाई जाने वाली मिठाई ।
पृष्ठ 61
भुक्कड़ – जो बहुत भूखा हो।